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राज्यपाल से मिले हाई स्कूल के विद्यार्थी, डेका ने जीवन में सफलता के लिए दिया मार्गदर्शन

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका से आज राजभवन में रायपुर के निजी स्कूल के विद्यार्थियों ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर डेका ने बच्चों को जीवन और कैरियर में सफलता पाने के लिए मार्गदर्शन दिया और विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। विद्यार्थियों ने राज्यपाल की बातों को पूरे उत्साह से ध्यानपूर्वक सुना।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से उनके सपनों और हॉबी पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि अनुशासन और धैर्य सफलता की कुंजी हैं। यदि किसी परीक्षा में सफलता न मिले तो उसके विकल्प तैयार रखें। विद्यार्थी यूपीएससी की परीक्षा देना चाहते हैं, उसके लिए पूरी लगन के साथ तैयारी करें लेकिन अन्य विकल्पों पर भी ध्यान दें।

डेका ने कहा कि हर विद्यार्थी को अपनी हॉबी विकसित करना चाहिए क्योंकि यह व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होते हैं। एक छात्रा ने संगीत से जुड़े अपने हॉबी का जिक्र किया। इस पर राज्यपाल ने कहा कि संगीत जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, इसमें विज्ञान भी निहित है। विद्यार्थियों ने जब राजनीति के बारे में पूछा तो राज्यपाल ने कहा कि अच्छे लोगों को राजनीति में आना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनौतियों का समाधान करने के लिए सही समय पर सही निर्णय लेना जरूरी है और गुस्से में कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए। उन्होंने अनुभव, तर्कशक्ति और निर्णय क्षमता को जीवन में सफलता के लिए अहम बताया।

डेका ने कहा कि सतत् विकास सबसे जरूरी विषय है। हमें अपनी पृथ्वी और पर्यावरण को बचाने के लिए काम करना होगा। हमें अपने वातावरण को स्वच्छ रखना होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 45 प्रतिशत वन क्षेत्र है यह बात उन्हें बहुत प्रभावित करती है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करें और टॉपर बनने का लक्ष्य रखें। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के बोर्ड परीक्षाओं के टॉपर विद्यार्थियों को उनके द्वारा 5 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि भी दी गई है। इस अवसर पर रेयान इंटरनेशनल स्कूल के प्राचार्य श्रीमती धनेश्वरी शर्मा, मैनेजर एवं अन्य स्टॉफ के साथ विद्यार्थियों को राजभवन का भ्रमण भी कराया गया।


बच्चों के प्रति क्रूरता को लेकर सख्त हुआ बाल अधिकार संरक्षण आयोग

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बालोद जिले में एक नाबालिग बालिका के साथ हुई मारपीट की घटना को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 (बच्चों के प्रति क्रूरता) को पुलिस द्वारा अभियोग पत्र में शामिल न किए जाने पर नाराज़गी जताई है और इस संबंध में पुलिस अधीक्षक बालोद को 2 जून 2025 को सख्त पत्र जारी किया है।

मामला एक पारिवारिक विवाद से जुड़ा है, जिसमें एक महिला और उसकी नाबालिग पुत्री के साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई थी। आयोग की सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि घटना के दौरान आरोपी ने नाबालिग बच्ची को धक्का देकर गिरा दिया, जिससे उसके सिर में चोट आई और चक्कर व धुंधलापन जैसे लक्षण शुरू हो गए। बाल कल्याण समिति द्वारा इस मामले में पुलिस को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे, बावजूद इसके चालान पेश करते समय इस धारा को शामिल नहीं किया गया। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए डॉ. शर्मा ने अभियोग पत्र में उक्त धारा को जोड़ते हुए तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

प्रकरण को क्रमांक 1297/25 के अंतर्गत पंजीबद्ध कर आयोग ने इसकी समीक्षा शुरू कर दी है। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग बच्चों के हितों की रक्षा हेतु पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा है!  यह सख्त रुख न केवल कानून व्यवस्था को बच्चों के हित में संवेदनशील बनाने का प्रयास है, बल्कि राज्य में बच्चों के प्रति होने वाली हिंसा को रोकने की दिशा में एक ठोस कदम भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा बेटा, यहां सब अपने लोग हैं और समाप्त हो गई तृप्ति की हिचक

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रायपुर। प्रदेश के मुखिया न केवल आम जनता की नब्ज समझते हैं अपितु बच्चों के मनोविज्ञान को भी गहराई से समझते हैं। अपनी बात कहने जब प्रोफेसर जे.एन. पांडे आत्मानंद स्कूल की छात्रा तृप्ति जगत खड़ी हुई। तृप्ति अपनी बात कहने में थोड़ा सा हिचक रही थी।

मुख्यमंत्री ने पूरे वात्सल्य से स्नेहपूर्वक कहा, बेटा यहां सब अपने लोग हैं बेझिझक अपनी बात कहो। मुख्यमंत्री की बात को सुनते ही तृप्ति की हिचक पूरी तरह दूर हो गई। उसने बताया कि इस स्कूल में पढ़ाई के अच्छे स्तर को देखते हुए मैंने यहां प्रवेश लिया है। मुझे यहां बहुत अच्छा लग रहा है। उसके बाद मुख्यमंत्री ने छात्रा को शाबासी देते हुए कहा आप कितने अच्छे ढंग से बात रख रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर बच्चों से आज रू-ब-रू हो रहे थे।

मुख्यमंत्री से बच्चों ने भी बेझिझक होकर अपने दिल की बात कहीं। मुख्यमंत्री ने बच्चों से पूछा कि 16 जून के बदले 26 जून को स्कूल खोलने पर कैसा अनुभव कर रहे हैं। सभी बच्चों ने मुख्यमंत्री बघेल को धन्यवाद देते हुए कहा कि 26 जून से स्कूल खुलने से गर्मी और लू से राहत मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय गर्मी के मौसम और बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए सरकार ने निर्णय लिया कि स्कूल 26 जून से खोले जाएं। शाला प्रवेश उत्सव शुरू होने से पूर्व ही प्रदेश में बरसात शुरू हो गई। बारिश की फुहारों के साथ ही नए शिक्षा सत्र की शुरूआत हुई।

विद्यार्थी राजेश ने बताया कि हम सबकी पढ़ने में रुचि बढ़ गई है। स्वामी आत्मानंद बीपी पुजारी शाला में पढ़ रही आठवीं की छात्रा सुरभि साहू ने कहा कि स्वामी आत्मानंद स्कूल आरंभ होने से आर्थिक रूप से कमजोर और होनहार बच्चों को भी अच्छी अंग्रेजी शिक्षा का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री बघेल के समक्ष स्वामी आत्मानंद राजा तालाब स्कूल कक्षा 8वीं की छात्रा कशिश अंजुम खान ने भी शाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर अपनी विचार रखी।

सुपोषित छत्तीसगढ़ बनाने गांव-गांव हुआ पोषण पखवाड़े का आयोजन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में सुपोषित छत्तीसगढ़ के ध्येय से पोषण जागरूकता पखवाड़े का आयोजन किया गया। 20 मार्च से 03 अप्रैल तक चले इस पखवाड़े में बच्चों तथा महिलाओं के पोषण एवं स्वास्थ्य देखभाल संबंधी जागरूकता और आदतों में सुधार लाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। पखवाड़े में सुपोषण रथ, पोषण साइकल/बाइक रैली, मैराथन, मिलेट्स जागरूकता कैम्प, सुपोषण चौपाल, अम्मा की रसोई का भी आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में महिलाओं और बच्चों के साथ ही पंचायत प्रतिनिधि, गांव के युवा, विभिन्न विभागों के अधिकारी और यूनिसेफ के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

महिला एवं बाल विकास विभाग संचालक श्रीमती दिव्या मिश्रा ने बताया कि पोषण पखवाड़े के दौरान प्रत्येक दिन के लिए कलेण्डर अनुसार गतिविधियां आयोजित की गई। इन गतिविधियों के माध्यम से व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर पोषण सम्बन्धित व्यवहार परिवर्तन का प्रयास किया गया। पोषण पखवाड़े के दौरान आयुष, पंचायत, कृषि सहित अन्य विभागों, जनप्रतिनिधियों का पूरा सहयोग मिला। पोषण पखवाड़े के दौरान कई किसान, पंचायत प्रतिनिधि, युवा भी इस अभियान से जुड़े। यूनिसेफ ने पोषण संबंधी संदेश और वीडियो के माध्यम से तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

श्रीमती मिश्रा ने बताया कि पोषण पखवाड़े के दौरान बच्चों का वजन, लंबाई एवं ऊंचाई मापन कर बच्चों में पोषण स्थिति की जानकारी लेकर पोषण ट्रैकर ऐप में दर्ज किया गया है। इस दौरान विकासखण्ड स्तर पर बेहतर काम करने के लिए दो-दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को पुरस्कृत भी किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को एकमुश्त विशेष मानदेय के रूप में 5000 रूपये और सहायिकाओं को 2500 रूपये प्रदान किए जाएंगे। 

पोषण पखवाड़े के दौरान मुख्य रूप से पोषण कल्याण के लिए मिलेट्स के प्रचार-प्रसार और लोकप्रियता, स्वस्थ्य बालक-बालिका स्पर्धा और सक्षम आंगनबाड़ी केन्द्र संबंधित थीम आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों को मिलेट्स के फायदों के बारे में जानकारी देकर उन्हें इसेे दैनिक आहार में शामिल करने के लिए जागरूक किया गया। पोषण पखवाड़े के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अन्य विभागों के समन्वित प्रयास से छत्तीसगढ़ में 2 लाख 68 हजार 180 गतिविधियां आयोजित की गई। पोषण पखवाड़े के समापन अवसर पर आज महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित वेबिनार में यह जानकारी दी गई। वेबिनार में सभी जिलों के विभागीय अधिकारी सहित स्वास्थ्य, पंचायत, कृषि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और यूनिसेफ के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बाल सुरक्षा सप्ताह का आयोजन, पुलिस बच्चों की कानूनी जानकारी दे रही है

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महासमुन्द। अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस 14 नवम्बर 2022 के उपलक्ष्य में बच्चों को शुभकामना देते हुये महासमुन्द पुलिस विभाग के द्वारा टाउन हाॅल महासमुन्द परिसर में बच्चों की सुरक्षा जागरूकता विषय पर बाल सुरक्षा सप्ताह ( 14 नवंबर से 20 नवंबर तक) 07 दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ पश्चात अथितियों के द्वारा महिला एवं बच्चों से संबंधित सुरक्षा विषय पर विस्तृत उद्बोधन दिया गया। 


पुलिस अधीक्षक महासमुन्द भोजराम पटेल ने बच्चों प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में अपने आप को इतना मजबूत बनाओ कि कोई भी आपको किसी भी गलत कार्याें व नशा के लिए प्रेरित न कर सके। अपने आप को मानसिक रूप मजबूत करें ताकि किसी प्रतिस्थिति का सामना कर सके। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश राव ने
  स्वामी विवेकानंद के सिध्दांतों को बच्चों में अपने विचार रूप में प्रकट किया गया।

मुख्य अतिथि
  विधायक महासमुन्द विनोद सेवनलाल चन्द्राकर ने कहा कि गुरूओं का सम्मान करें। संघर्ष कर जमीन से उठकर जिम्मेदार नागरिक बनें। उन्होंने देश की तरक्की में अपना योगदान देने की बात कही। जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष श्रीमति डाॅ. रश्मि चन्द्राकर के द्वारा चाचा नेहरू जैसे बच्चों को आगे बढने की प्रेरणा दी गई। नपाध्यक्ष श्रीमति राशि त्रिभुवन महिलांग ने बच्चों को घर के माता-पिता से प्राप्त छूट का ज्यादा फायदा नही उठाते हुये। माता-पिता के सपनों पर खरा उतरने की बात कही।


कार्यक्रम में महासमुन्द जिले विभिन थानों में बाल मित्र, पुलिस अधिकारी, राजपत्रित पुलिस अधिकारी व शहर के गणमान्य नागरिक, पुलिस परिवार उपस्थित थे। बाल दिवस के अवसर पर बच्चों की जागरूकता कार्यक्रम के द्वितीय दिवस 15 नवम्बर को शहरी क्षेत्र महासमुन्द में स्कुल, काॅलेज, अन्य शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित किया जाएगा। जिसमे गुड टच-बैड टच, पोक्सो एक्ट के प्रावधान, साईबर सुरक्षा, जेजे एक्ट, मानव तस्करी, नशा के दुष्प्रभाव की जानकारी दिया जावेगा।

तृतीय दिवस 16 नवम्बर को सार्वजनिक क्षेत्र (रेल्वे स्टेशन, बस स्टैण्ड, माॅल, पार्क, आदि) में गुड टच-बैड टच पोक्सो एक्टके प्रावधान, मानव तस्करी, बाल विवाह, बाल श्रम, स्वच्छता, नशा के दुष्प्रभाव, पीडित क्षतिपूर्ति योजना आदि से संबंधित जानकारी दी जावेगी।

चतुर्थ दिवस 17 नवम्बर को स्कुल, काॅलेज के बच्चों को पुलिस थाना, चैकी का भ्रमण में पुलिस की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी जावेगी।

पंचम दिवस 18 नवम्बर को विभिन्न प्रकार के बाल देखरेख संस्थान जैसे बाल गृह, बाल सम्प्रेक्षण गृह, विशेष गृह, खुला आश्रय गृह में गुड टच-बैड टच, पोक्सो एक्ट के प्रावधान, मानव तस्करी,, बाल विवाह, बाल श्रम, स्वास्थ्य, स्वच्छता, नशा के दुष्प्रभाव जानकारी दी जावेगी ।

षष्टम दिवस दिनांक 19 नवम्बर को छात्रावास/हाॅस्टल आदि में गुड टच-बैड टच, पोक्सो एक्ट के प्रावधान, बाल विवाह, बाल श्रम, पौष्टिक आहार, नशा के दुष्प्रभाव आदि की जानकारी दी जाएगी ।

सप्तम दिवस दिनांक 20 नवम्बर को खेलकूद, निबंध, कविता, रंगोली प्रतियोगिता आदि का आयोजन को अभियान का समापन महासमुन्द में गणमान्य नागरिकों के मध्य किया जाएगा।

पहली से आठवी के वाले बच्चों के बुनियादी स्तर पर भाषा हिन्दी, अंग्रेजी और गणित की होगी जांच

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रायपुर। प्रदेश में कक्षा पहली से आठवी तक पढ़ने वाले बच्चों के बुनियादी स्तर पर भाषा हिन्दी, अंग्रेजी और गणित की जांच असर सर्वे-2022 के अंतर्गत की जाएगी। सर्वेक्षण के दौरान तीन से सोलह वर्ष के बच्चों के नामांकन स्थिति की जानकारी ली जाएगी। असर सर्वे के लिए प्रत्येक जिले के 60 गांव का चयन किया जाएगा। चयनित प्रत्येक गांव से 20 घर का रेण्डम चयन किया जाएगा। यह जानकारी आज राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् में असर सर्वेक्षण 2022 के प्रशिक्षण के दौरान दी गई। यहां 07 से 11 नवम्बर तक 5 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया गया।



प्रशिक्षण में प्रत्येक जिले से 4 प्रतिभागी जिसमे 2 डाइट के छात्राध्यापक एवं 02 असर के कार्यकर्ता सहित कुल 28 जिले से 113 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।  राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् के संचालक राजेश सिंह राणा ने प्रतिभागियों से कहा कि असर सर्वे-2022 में यह ध्यान रखा जाए की बच्चे जिस स्तर के है उसके अनुरूप परिणाम आना चाहिए। इसके लिए बच्चों से मित्रवत व्यवहार करें, उनके मन में किसी भी प्रकार का डर न हो, सहजता महसूस करें तब उनसे प्रश्न पूछें, तभी सर्वे का उद्देश्य पूरा हो पाएगा।

प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को बताया गया कि असर सर्वेक्षण कैसे करना है, बच्चों से बातचीत कैसे करनी है, घर में जाकर बच्चों की बुनियादी दक्षता गणित एवं अंग्रेजी की पढ़ाई की जांच कैसी की जाएगी, घरों का चयन कैसे किया जाएगा, स्कूल की जानकारी कैसी लेनी है, से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही सर्वेक्षण कार्य करने के लिए रायपुर जिले के समीपस्थ 14 गाँवों में जाकर प्रत्यक्ष रूप से अभ्यास कराया गया। इस प्रशिक्षण के पश्चात् प्रत्येक जिले से 70-70 प्रतिभागियों के लिए तीन दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। इस सर्वे में प्रत्येक जिले के 60 गाँवों का चयन किया जायेगा।

संयुक्त संचालक डॉ. योगेश शिवहरे ने कहा कि सर्वेक्षण करने वाले की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। सर्वे का कार्य पूरी सावधानी के साथ करना है। जांच से पूर्व बच्चों के साथ सहज तरीके से वातावरण निर्मित कर बातचीत के जरिए प्रश्न करें। यदि शंका हो तो प्रशिक्षण में पूछ सकते हैं। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. निशी भाम्बरी ने कहा कि सर्वेक्षण कार्य डाइट के छात्राध्यापक द्वारा किया जा रहा है, अतः अपने यूनिफार्म में ही सर्वे करने जाए। साथ ही अपना पहचान पत्र भी अपने साथ रखे जिससे गाँव में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। बच्चों के साथ परीक्षा या जाँच जैसे शब्दों का प्रयोग न करें, जिससे परीक्षा का भय बच्चों में न हो, सहजतापूर्वक वार्तालाप कर बच्चों के स्तर की जाँच करें।

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह प्रशिक्षण दो चरणों में होगा। जिसमें प्रथम चरण 19 20 नवम्बर 2022 को प्रत्येक जिले के 30 गाँवों में तथा द्वितीय चरण 26-27 नवम्बर 2022 को 30 गाँवों में सर्वे किया जाएगा। प्रशिक्षण में दिल्ली से भालचन्द्र सहारे, संतोष कुमार, सजल घोष, मोहित मिश्रा, आकांक्षा बिस्त के साथ प्रदेश से भूपेन्द्र जांगड़े, सनित कुमार, कृष्णा कश्यप, केशव साहू और भुवेन्द्र बघेल स्त्रोत व्यक्ति के रूप उपस्थित थे।

बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का रखें ध्यान, ठंडी चीजों के खानपान से करें परहेज

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रायपुर। इस समय मौसम में उतार चढ़ाव के कारण कभी पारा बहुत ज़्यादा तो कभी कम हो रहा है। ऐसे समय में बच्चों को मौसमी बीमारी से बचाना जरूरी हो जाता है। सर्दी शुरू होते ही अस्पतालों में बच्चों को मौसमी बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम से इन्‍फेक्‍शन वाले रोगियों की संख्या बढ़ने की सम्भावना रहतीहै। बदलते मौसम के साथ बच्चों की बीमारी से घबराएं नहीं बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें ताकि सही समय पर उचित इलाज मिल सके। इस बारे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिरगांव में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.रश्मि अग्रवाल जैन ने बताया: ‘’मौसम में इन दिनों बदलाव आ रहा है।



जिसके कारण ठंड बढ़ रही है। बदलता मौसम शरीर पर भी असर डालता है। विशेष रूप से ऐसे समय में बच्चों की सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। हल्की ठंडी हवा भी उन्हें नुकसान कर सकती है। अब कुछ दिनों से हल्की ठंड महसूस होने लगी है जिससे बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी सहित अन्य मौसमी बीमारियां हो सकती हैं। बच्चों की त्वचा के साथ ही पूरा शरीर नाजुक होता है। हल्की हवा भी नुकसान कर देती है। इसलिए छोटे बच्चों को ऐसे मौसम में हवा के संपर्क में सीधा नहीं आने दें। इम्यून सिस्टम पर विशेष ध्यान रखें। उम्र और शरीर के हिसाब से खानपान भी होना चाहिए  एवं घर का ही बना खाना खाएं तो बेहतर है।

आगे उन्होंने कहा: बच्चों की डाइट पर ध्यान दिया जाए तो बच्चों को मौसमी फैरिंजाइटिस व लैरिंजाइटिस वायरल से बचाया जा सकता है। इसके लिए बच्चों को प्रोटीन डाइट जरूर दें। इसमें सोयाबीन, पनीर, चने, सूप, हरी सब्जियां भी दे सकते हैं। बच्चों को कोई समस्या होने पर घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि चिकित्सक से सही समय पर सलाह लेना चाहिए। सर्दी, खांसी, बुखार और बच्चों में इंफेक्शन होने पर घबराएं नहीं, तत्काल चिकित्सक के पास लेकर जाए, बच्चों को दूसरे बच्चों से भी दूर रखें, स्कूल नहीं भेजें। चिकित्सक की सलाह से ही दवा दें। बच्चों को तरल पदार्थ जैसे दलिया, दाल, जूस आदि दे सकते हैं, पूरी तरह ठीक होने तक चिकित्सक से सलाह लेते रहें, बच्चों को ठंडा पानी न पिलाएं। बच्चों को बाहर की चीजें जैसे प्लास्टिक बंद नमकीन, आर्टिफ़िशियल रंग वाले फ्रूट्स जूस, उन्हें न दिए जाएं, इनकी वजह से दमा के लक्षण उभरते है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपने 6 वर्षीय बच्चे को लेकर आई सबा खान बताती है: चार दिन पहले बच्चे ने एक विवाह समारोह कार्यक्रम में जिद करके आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक का सेवन कर लिया था कल से  बच्चे को बहुत ज्यादा सर्दी हो गई थी। सांस लेने में तकलीफ हो रही है, अभी डॉक्टर को दिखाया, डॉक्टर ने बताया मौसम के अनुरूप ही खाद्य एवं पेय पदार्थ का प्रयोग करना चाहिए इस मौसम में ठंडी चीजों को खाने से बचना चाहिए और बच्चे को सीधा हवा के सम्पर्क में आने से बचाना चाहिए, ताकि बच्चे को ठंड लगने से बचाया जा सके। बिना कपड़ों के एक दम से बाहर न निकालें एवं रात में पंखा न चलाने की सलाह दी गई ।

इन बातों का भी रखें ध्यान

रोग प्रतिरोधक क्षमता सही रहेगी तो बच्चा किसी बीमारी के चपेट में नहीं आएगा, बच्चा अगर 6 महीने से कम का है तो मां का दूध ही पिलाएं, छोटे बच्चों को उचित आहार दें, समस्या होने पर चिकित्सकों की सलाह लें, 6 महीने से एक साल तक के बच्चे को पतला खाना खिलाएं जिसमें सादी खिचड़ी या आलू को मैश कर के खिलाएं। मौसम अनुरूप वस्त्र पहनाए। हाथ साफ रखें। मास्क लगाने के लिए बच्चों को प्रेरित करें। आसपास साफ सफाई रखें।

बच्चों को लैंगिक शोषण से बचाने मददगार बनें-चुप्पी तोड़ें

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रायपुर। बच्चों के अच्छे शरीरिक, मानसिक, भावनात्मक और समाजिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि हर स्तर पर उनके हितों और अधिकारों की रक्षा पर ध्यान दिया जाए। भारतीय संविधान में भी बच्चों के हित और अधिकारों के संरक्षण के लिए कई प्रावधान किये गए हैं। इनमें संविधान का अनुच्छेद 15 का खंड (3) राज्यों को बालकों के लिए विशेष उपबंध करने के लिए सशक्त करता है। जिसके तहत महिलाओं के लिए आरक्षण और बच्चों की मुफ्त शिक्षा जैसे प्रावधान किये जा सकते हैं।



इसके साथ ही बच्चों पर लैंगिक हमले, लैंगिक उत्पीड़न और अश्लील साहित्य के अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने के लिए विशेष अधिनियम लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 लागू किया गया है। जिसे सामान्य रूप से पोक्सो एक्ट के नाम से जाना जाता है। बालकों का लैंगिक शोषण और लैंगिक दुरूपयोग जघन्य अपराध हैं। इंटनेट के बढ़ते उपयोग के साथ इस प्रकार के अपराधों में बढ़ोत्तरी हुई है, जिस पर प्रभावी मॉनिटरिंग और करवाई करने की आवश्यकता है।

पॉक्सो एक्ट के तहत बच्चों का लैंगिक शोषण करना या उसका प्रयास करना, अश्लील साहित्य हेतु बच्चे का उपयोग करना अथवा इन कृत्यों को करवाना गंभीर अपराध माना गया है। यह कानून 18 वर्ष से कम उम्र के बालक तथा बालिकाओं दोनों पर समान रूप से लागू होता है। इस कानून के तहत प्रकरणों के लिए विशेष अदालत नामित किये गए हैं, जिन्हें हम सामान्य भाषा में फास्ट ट्रैक कोर्ट के नाम से जानते हैं। इनमें तेजी से सुनवाई होती है और दोषी को शीघ्र सजा मिलती है। अब इस कानून में मृत्युदंड तक का प्रावधान है। 

ऐसे मामलों की सुनवाई का विचारण बंद कमरे में किये जाने की भी व्यवस्था की गई है। इस अधिनियम के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग का जिम्मा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को प्रदान किया गया है। इस कानून के तहत ऐसी घटनाओं को छुपाना या सूचना ना देना भी अपराध माना गया है और 6 माह से 1 वर्ष तक की कैद का भी प्रावधान है। यदि यह अपराध बच्चे के संरक्षक द्वारा किया जाता है तो उसे और भी ज्यादा गंभीर माना गया है। इसके लिए उसे आजीवन कारावास या कम से कम 10 वर्ष तक कैद हो सकती है। 

साथ ही जुर्माने की राशि से पीड़ित के पुनर्वास और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए भी उपबंध में प्रावधान किया गया है। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में बच्चों के विरूद्ध लैंगिक अपराध को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है तथा उसे गंभीर स्तर तक परिभाषित कर दण्ड के प्रावधान किये गये हैं। इस अधिनियम के अंतर्गत अश्लील साहित्य के प्रयोजनों के लिए बच्चों का उपयोग करना अपराध घोषित करते हुए उसके लिए दण्ड के प्रावधान किये गये हैं। बच्चों के प्रति इस प्रकार के अपराधों को करने के लिए किसी को दुष्प्रेरणा देना याने उकसाना या प्रेरित करना भी दण्डनीय अपराध घोषित किया गया है।

यदि किसी व्यक्ति को ऐसे अपराध की जानकारी है एवं वह सूचना नहीं देता है तो उसे भी सूचना देने में विफल रहने के लिए दण्ड का प्रावधान किया गया है। अधिनियम के तहत बच्चों की पहचान प्रकट करने वाली किसी भी सूचना को मीडिया द्वारा प्रकट करना भी प्रतिबंधित किया गया है। अधिनियम की धारा 23 के अंतर्गत मीडिया के लिए प्रक्रिया निर्धारित करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार के मीडिया या स्टूडियो या फोटो चित्रण संबंधी प्रमाणों के बिना किसी बच्चे के संबंध में कोई रिपोर्ट या ऐसी टीका टिप्पणी नहीं कर सकेगा, जिससे बच्चे की प्रतिष्ठा हनन या उसकी गोपनीयता का उल्लंघन हो।

किसी भी मीडिया से ऐसा कोई भी ब्यौरा प्रकाशित नहीं किया जा सकता, जिससे पीड़ित बच्चे की पहचान जैसे नाम, पता, फोटो, परिवार का विवरण, विद्यालय, पड़ोस या अन्य कोई विशेष सूचना प्रकट हो जाये। इसका तात्पर्य यह है कि पीड़ित बच्चे की पहचान प्रकट नहीं होनी चाहिए। मीडिया या स्टूडियो या फोटो चित्र संबंधी सुविधाओं के प्रकाशक या स्वामी संयुक्त रूप से और पृथक रूप से अपने कर्मचारी के किसी ऐसे कार्य जिसमे उक्त धाराओं का उल्लंघन हो उत्तरदायी माना जायेगा। इसके उल्लंघन की दशा में न्यायालय द्वारा दोषी पाने जाने पर कम से कम 6 माह से 1 वर्ष तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।

आवश्यक है कि बालकों की निजता, सम्मान और गोपनीयता का अधिकार भी संरक्षित हो और इसके लिए जरूरी है कि समाज के सभी लोग अपनी जिम्मेदारी समझें। किसी आपत्तिजनक पोस्ट को रीट्वीट करना, साझा करना या फॉरवर्ड करना भी आपको अपराधी बना सकता है। बच्चें का लैंगिक शोषण बहुत गंभीर अपराध है, इसकी रोकथाम में मददगार बनें। याद रखिये कि बच्चों का लैंगिक शोषण चुप्पी के अंधेरे में ही पनपता है इसलिये चुप्पी तोड़ें और ऐसी घटनाओं का पता लगने पर निकटतम पुलिस थाने या 1098 पर सूचना दें।

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