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मुख्यमंत्री ने दिव्यांगता : चुनौतियों से अवसर तक पुस्तक का किया विमोचन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यहां अपने निवास कार्यालय में दिव्यांगता पर आधारित पुस्तक दिव्यांगता: चुनौतियों से अवसर तक का विमोचन किया। इस कृति को सुश्री के. शारदा, श्रीमती प्रीति शांडिल्य और डॉ. अभिनव मिश्रा ने सह-लेखक के रूप में तैयार किया है।

मुख्यमंत्री को पुस्तक के लेखकों ने बताया कि यह किताब छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं, संसाधनों और सुविधाओं का व्यापक विवरण प्रस्तुत करती है। इसके अतिरिक्त, यह दिव्यांगता प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया, दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं और अधिकारों से संबंधित जानकारी प्रदान करती है। समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से यह पुस्तक शिक्षकों और दिव्यांगजनों के परिवारजनों को प्रशिक्षण देने और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने पर भी केंद्रित है। इसमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के दिव्यांगजनों की 15 प्रेरणादायक कहानियों को भी शामिल किया गया है, जो उनकी अदम्य इच्छाशक्ति, चुनौतियों पर विजय और असाधारण धैर्य की मिसाल पेश करती हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  लेखकों द्वारा इस महत्वपूर्ण विषय को उजागर करने की पहल की प्रशंसा की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक न केवल दिव्यांग समुदाय बल्कि समूचे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि यह पुस्तक समाज में दिव्यांगजनों के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और उनके जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उल्लेखनीय है कि इस पुस्तक के लेखकगण सुश्री के. शारदा एवं श्रीमती प्रीति शांडिल्य शासकीय विद्यालयों में शिक्षिकाएं हैं, जबकि डॉ. अभिनव मिश्रा एक पत्रकार हैं। दुर्ग जिले की सुश्री के. शारदा, जो स्वयं भी दिव्यांग हैं, को हाल ही में भारत की राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है। धमतरी जिले की शासकीय विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती प्रीति शांडिल्य को राज्यपाल पुरस्कार 2024 के लिए चयनित गया है। वहीं, डॉ. अभिनव मिश्रा को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अंग्रेज़ी पत्रकारिता के क्षेत्र में किए गए उनके कार्यों के लिए सराहा जा चुका है। पुस्तक विमोचन के अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप व शांतनु सिन्हा भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ‘आधा अध्याय’ शीर्षक से प्रकाशित का किया विमोचन

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहाँ अपने निवास कार्यालय में वरिष्ठ पत्रकार एवं नवभारत बिलासपुर के सम्पादक अरुण उपाध्याय द्वारा लिखित पुस्तक आधा अध्यायका विमोचन किया। उन्होंने उपाध्याय को उनकी इस नवीन रचना के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर श्रीमती स्वर्णा उपाध्याय एवं ओम उपाध्याय भी उपस्थित थे।

गौरतलब है कि उपाध्याय ने अपने 35 वर्षों के पत्रकारिता के अनुभवों पर केंद्रित पुस्तक की रचना की है। जिसमें उन्होंने इस पूरे दौर के सामाजिक, शैक्षणिक, राजनैतिक, आर्थिक और सम्पूर्ण जन-जीवन में बदलाव को एक रिपोर्टर से लेकर सम्पादक तक की नजर से देखने-समझने और प्रकाशित करने के अपने अनुभवों को दस्तावेज के रूप में दर्शाया है जो नए पत्रकारों के लिए उपयोगी साबित होगा।

गांवों की धड़कन सुनाती है किताब- ‘गांव अभी जीयत हे‘

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रायपुर। कोई लेखक या कवि जब अपने अनुभवों को शब्दों की मोतियों से पिरोकर उसे साहित्य रूपी माला का स्वरूप देता है तो वह साहित्य स्वयं में जीवंत हो जाता है। कुछ ऐसा ही जीवंत कहानियों का संकलन किया गया है सुप्रसिद्ध रचनाकार, लेखक अशोक नारायण बंजारा द्वारा लिखित पुस्तक गांव अभी जीयत हेमें। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने बतौर मुख्य अतिथि आज होली हार्ट्स एजुकेशनल अकादमी सिविल लाइन में छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य परिषद रायपुर की ओर से आयोजित गरिमामय समारोह में किताब के अवसर पर इस आशय के विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि कहानियों के संकलन अपने आप में गांवों की धड़कन संजोये हुए हैं। इनकी कहानियां गांवों की यादों को तरोताजा करेंगी। मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी भी विधा में संघर्ष करने के बाद ही अपना नाम रोशन करता है। लेखक बंजारा ने भी संघर्ष किया है। इस किताब में उनकी कहानी के रूप में उनका संघर्ष भी निहित है। उनके साहित्य में नैसर्गिकता और मौलिकता है। उन्होंने इस अवसर पर बंजारा इस पुस्तक के लेखन और प्रकाशन के लिए बधाई एवं शुभकामना दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जे.आर. सोनी ने की। विशिष्ठ अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार ईश्वरी प्रसाद यादव, होली हार्ट्स एजुकेशनल अकादमी के अध्यक्ष व संस्थापक आचार्य सुरेंद्र प्रताप सिंह, अतिथि वक्ता में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मृणालिका ओझा, रामेश्वर वर्मा, डॉ. माणिक विश्वकर्मा, संतोष कश्यप आदि मौजूद थे। सभी ने पुस्तक के साहित्य पर अपने विचार व्यक्त किए।

पुस्तक की समालोचना भी होनी चाहिए : बंजारा

लेखक अशोक नारायण बंजारा ने कहा कि लेखक के साहित्य की समालोचना भी होनी चाहिए ताकि वह अपनी गलतियों को दोबारा सुधार सके। उन्होंने कहा कि इस ग्रंथ में उनके मित्रों, स्वजनों, उनकी पत्नी की अहम भूमिका रही। बंजारा द्वारा लिखत यह किताब कहानियों का दूसरा संकलन है। इसके कवर पेज की डिजाइन शिवांश इंटरनेशनल स्कूल कुंरा की डायरेक्टर हिमांशी शर्मा ने की है। इसमें 18 कहानियों को चयनित किया गया है। प्रत्येक कहानी विषय बिंदु को विस्तार देती हुई लक्ष्य तक पहुंचती है। संकलन की चार कहानियां हिरदे के सपना‘, ‘गढ़ कलेवा‘, ‘मोर चंदाऔर संगवारी के छइहांपूरी तरह से नायिका प्रधान है। इसी तरह हिरदे के सपनाकी रोशनी शादी होने के बाद अपना सपना पूरा करने के लिए घर-गृहस्थी का काम संभालने के लिए अध्ययन जारी रखती है। 

परीक्षा सफल करने के बाद वह शिक्षिका बन जाती है। कहानी में लेखक ने बखूबी बयां किया है कि किस तरह आजकल छत्तीसगढ़ की कस्बाई भाषा के दर्शन होते हैं। गांवों में अब ठेठ छत्तीसगढ़ी बोलने वाले बुजुर्गों की कमी होने लगी है। जगह-जगह पाठशालाएं खुल गई हैं, जहां शिक्षा के माध्यम हिंदी है। इसी कारण छत्तीसगढ़ी में हिंदी का प्रभाव देखने में आ रहा है। पूर्व में बंजारा द्वारा काव्य संग्रह करिया बेटा‘, कहानी संग्रह अंतस के आरोभी लिखा गया है। उन्हें बेस्ट इनोवेशन एंड एडमिनिस्ट्रेशन का सम्मान मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मिल चुका है।

मुख्यमंत्री बघेल ने ‘तिरोहित तितुरघाट’ पुस्तक का किया विमोचन

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज शाम अपने निवास कार्यालय में तिरोहित तितुरघाटपुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक धमधा के तितुरघाट में दो दर्जन से अधिक सती स्तंभों के पुरातात्विक साक्ष्य और उनकी विशेषता पर आधारित है। इसका संपादन गोविन्द पटेल ने किया है तथा भूमिका पुरातत्विद् प्रभात सिंह ने लिखी है। धर्मधाम गौरवगाथा समिति ने तितुरघाट के तिरोहित (भुला दिये गए) तालाब को फिर से ढूंढा और श्रमदान व जनसहयोग से उसकी फिर से खुदाई की। इस स्थान की प्राचीनता व ऐतिहासिकता के साथ ही तालाब के महत्व को दर्शाने इस पुस्तक का प्रकाशन किया गया है।

इस पुस्तक में शिवनाथ नदी के किनारे स्थित 500 साल पुराने चतुर्भुजी तितुरघाट गांव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताई गई है। यह गांव अब वहां से उजड़ गई है, परन्तु गांव का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व दर्शाने वाले सौ से अधिक शिलाखंड, स्थापत्य खंड वहां बिखरे पड़े हैं। जिनमें तीन शिलालेख और दो दर्जन सती स्तंभ मिले हैं। यहां एक मंदिर और तालाब भी थी। धर्मधाम गौरवगाथा समिति ने इस विलुप्त तालाब का पुनर्निर्माण करवाया। पटेल इसके पूर्व टमाटर की बंपर पैदावार, तकदीर बदल सकते हैं सुनहरे दाने, छत्तीसगढ़ को तंदुरुस्त बना सकती है भाजी और छह कोरी छह आगर तरिया अऊ बूढ़वा नरवा नाम की पुस्तिका का प्रकाशन कर चुके हैं। इस अवसर पर धर्मधाम गौरवगाथा समिति के संयोजक वीरेंद्र देवांगन, ईश्वरी निर्मल, अशोक देवांगन, सामर्थ्य ताम्रकार उपस्थित थे।

राजस्व मंत्री ने किया राजस्व पुस्तक परिपत्र ग्रंथ का विमोचन

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रायपुर। प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कोरबा निवास पर वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कुमार दुबे लिखित राजस्व पुस्तक परिपत्र ग्रंथ का विमोचन किया। लगभग 1100 पृष्ठों के इस ग्रंथ में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद लोक हित में भू-राजस्व संहिता में अनेकों संशोधन किए गए हैं। संशोधनों के प्रवर्तन के लिए राज्य सरकार द्वारा शासकीय परिपत्रों के माध्यम से जो दिशा निर्देश जारी किए गए हैं, उन सभी का समावेश इस ग्रंथ में किया गया है।



राजस्व पुस्तक परिपत्र ग्रंथ के लोकार्पण अवसर पर विमोचन करते हुए राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि इस ग्रंथ में राजस्व संबंधी सभी संदर्भों का समावेश होने से राजस्व प्रकरणों के संबंध में यह ग्रंथ मार्गदर्शक की भूमिका अदा करते हुए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा, इसमें संदेह नहीं। राजस्व मंत्री ने उम्मीद जतायी कि इस ग्रंथ से राजस्व न्यायालयों और अधिवक्ताओं को बहुत सहायता मिलेगी। अथक परिश्रम से तैयार किए गए इस ग्रंथ के लिए राजस्व मंत्री ने ग्रंथ के लेखक वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कुमार दुबे व पुस्तक प्रकाशन में सहयोगकर्ता अधिवक्ता अभिषेक दुबे को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

राजस्व पुस्तक परिपत्र ग्रंथ के लेखक विजय कुमार दुबे ने बताया कि ग्रंथ में राजस्व संबंधी मामलों के संदर्भ में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी किए गए अद्यतन परिपत्रों तक को समाहित किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यह ग्रंथ राजस्व संबंधी प्रकरणों के निपटान में एक संदर्भ पुस्तक के रूप में सर्व संबंधित के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। विद्वान अधिवक्ता दुबे ने बताया कि उनके द्वारा लिखित अनेक पुस्तकों में से यह चौथी पुस्तक है, जिसका विमोचन राजस्व मंत्री द्वारा किया गया है। इससे पूर्व तीन अन्य पुस्तकों का विमोचन विगत वर्षों में राजस्व मंत्री द्वारा किया गया है।

केबिनेट की बैठक में राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के प्रावधान में संशोधन प्रस्ताव का अनुमोदन

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में  आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में भारत सरकार के संशोधन के अनुसार राजस्व पुस्तक परिपत्र खंड 6 क्रमांक 4 में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रस्तुत संशोधन प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस संशोधन प्रस्ताव के अनुसार प्राकृतिक आपदा के विरूद्ध प्रभावित व्यक्तियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता की राशि में बढ़ोतरी की गई है। केबिनेट की बैठक में अनुमोदित संशोधन प्रस्ताव के अनुसार कृषि भूमि से गाद/मलबा निकालने हेतु वर्तमान में 12,200 रूपए प्रति हेक्टेयर का प्रावधान है।


 

नवीन प्रावधान में इसे बढ़ाकर 18,000 रूपए प्रति हेक्टेयर किया गया है। भू-स्खलन/नदी से भूमि हानि के लिए वर्तमान प्रावधान 37,500 रूपए प्रति हेक्टेयर को नवीन प्रावधान में बढ़ाकर 47,000 रूपए प्रति हेक्टेयर, असिंचित भूमि में कृषि बागानी फसल हानि पर वर्तमान में 6,800 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 8,500 रूपए प्रति हेक्टेयर, सिंचित भूमि में कृषि बागानी फसल हानि पर वर्तमान में 13,500 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 17,000 रूपए प्रति हेक्टेयर, बारहमासी फसल हानि पर वर्तमान में 18,000 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 22,500 रूपए प्रति हेक्टेयर किया गया है।

इसी प्रकार रेशम ( ऐरी, मलबरी, टसर) की हानि पर वर्तमान प्रावधान 4,800 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6,000 रूपए प्रति हेक्टेयर, रेशम (मूगा) की हानि पर वर्तमान प्रावधान 6,000 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 7,500 रूपए प्रति हेक्टेयर, टिड्डी नियंत्रण हेतु रसायन स्प्रे पर नवीन प्रावधान राज्य के अंश की सीमा तक प्रावधान किया गया है। बड़े दुधारू पशु की हानि पर वर्तमान प्रावधान 30,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 37,500 रूपए, छोटे दुधारू पशु की हानि पर वर्तमान में 3,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4,000 रूपए, बड़े सूखे पशु की हानि पर वर्तमान प्रावधान 25,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 32,000 रूपए,

छोटे सूखे पशु की हानि पर वर्तमान में 16,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 20,000 रूपए, पोल्ट्री के लिए वर्तमान प्रावधान 5,000 रूपए प्रति परिवार, 50 रूपए प्रति पक्षी को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 10,000 रूपए प्रति परिवार, 100 रूपए प्रति पक्षी किया गया है। इसी प्रकार गौशाला में पशु चारा के लिए वर्तमान प्रावधान 70 रूपए प्रतिदिन प्रति बड़े पशु, 35 रूपए प्रतिदिन प्रति छोटेपशु को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 80 रूपए प्रतिदिन प्रति बड़ेपशु, 45 रूपए प्रतिदिन प्रति छोटेपशु, पशुगृह क्षति में 1500 रूपए प्रति शेड को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 3000 रूपए प्रति शेड, सामान्य क्षेत्र में मकान क्षति (पूर्ण) वर्तमान प्रावधान 95,100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 1,20,000 रूपए, पहाड़ी क्षेत्र में मकान क्षति (पूर्ण) वर्तमान प्रावधान 1,01,900 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 1,30,000 रूपए,

पक्का मकान क्षति (आंशिक) वर्तमान प्रावधान 5200 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6500 रूपए, कच्चा मकान क्षति (आंशिक) वर्तमान प्रावधान 3200 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4000 रूपए, झोपड़ी क्षति वर्तमान प्रावधान 4100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 8000 रूपए, कपड़ा क्षति वर्तमान प्रावधान 1800 रूपए प्रति परिवार को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2500 रूपए प्रति परिवार, बर्तन क्षति वर्तमान प्रावधान 2000 रूपए प्रति परिवार को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2500 रूपए प्रति परिवार, जनहानि पर वर्तमान प्रावधान 4,00,000 रूपए को नवीन प्रावधान में यथावत रखा गया है। इसी प्रकार अंग हानि (40 से 60 प्रतिशत) पर वर्तमान प्रावधान 59,100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 74,000 रूपए, अंग हानि (60 प्रतिशत से अधिक) पर 2,00,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2,50,000 रूपए

अस्पताल में भर्ती (1 सप्ताह से कम) वर्तमान प्रावधान 4300 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 5400 रूपए, अस्पताल में भर्ती (1 सप्ताह से ज्यादा) वर्तमान प्रावधान 12700 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 16000 रूपए, हथकरघा बुनकर को क्षति पर वर्तमान प्रावधान 4100 रूपए प्रति कारीगर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 5000 रूपए प्रति कारीगर, मछुवारों के नाव की पूर्ण क्षति पर वर्तमान प्रावधान 9600 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 15000 रूपए, मछुवारों के नाव की आंशिक क्षति पर 4100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6000 रूपए, मछुवारों के जाल की पूर्ण क्षति पर वर्तमान प्रावधान 2600 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4000 रूपए, मछुवारों के जाल की आंशिक क्षति पर वर्तमान प्रावधान 2100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 3000 रूपए, मछली चारे हेतु इनपुट सब्सिडी पर वर्तमान प्रावधान 8200 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 10000 रूपए प्रति हेक्टेयर, पंजीकृत भूमिहीन श्रमिक की आजीविका क्षति पर नवीन प्रावधान आपदा की अवधि (30 दिन) तक 02 सदस्य को मनरेगा दर पर आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है।  

गोठानों के ग्राउंड रिपोर्ट पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन

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रायपुर। सीएम हाउस रायपुर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गोठानों के ग्राउंड रिपोर्ट पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया। आलोक चंद्राकर की टीम द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के सीमावर्ती गोठानो की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है। छत्तीसगढ़ी भाखा में प्रकाशित इस पुस्तिका के विमोचन अवसर पर टीम के सभी सदस्यों को मुख्यमंत्री ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में सरकार सर्वहारा वर्ग के लिए कार्य कर रही है। शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का दायित्व भी सभी की है। 



आलोक चंद्राकर और उनकी टीम के सदस्यों ने सरकार के गोठान निर्माण योजना और गोधन न्याय योजना के प्रचार प्रसार के लिए छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में गये। इसके लिए सभी सदस्यों को साधुवाद और शुभकामनाएं।इस अवसर पर कांग्रेस नेता आलोक चंद्राकर ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य सात राज्यों से घिरा है। सभी राज्यों के बॉर्डर में सर्व सुविधायुक्त गौठान बना है।  जिसमें रोजगार प्राप्त कर गौठान समिति, महिला समिति, ग्राम पंचायत स्वावलंबी बन रहे हैं। और गांव में खेतों में चरी की समस्या दूर हो गई है। 

गोबर से बन रहे वर्मी कंपोस्ट से जबरदस्त फसल हो रही है। जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है। हमारी टीम मुख्यमंत्री भुपेश बघेल  के महत्वाकांक्षी योजना को लेकर  गिरीश देवांगन के मार्गदर्शन में राज्य के सभी सीमावर्ती गौठान में गए। उड़ीसा बार्डर के महासमुंद जिला के जंगलबेडा, सिरपुर, मप्र बार्डर के मनेंद्रगढ़ जिला के लाई ग्राम के गौठानमहाराष्ट्र बार्डर के राजनांदगांव जिला के पेंड्रीडीह,झारखंड बार्डर के रामानुजगंज ब्लाक के ताम्बेश्वर नगर, उत्तरप्रदेश बार्डर के वाड्रफनगर ब्लाक के बसंतपुर

आंध्रप्रदेश/तेलंगाना के सुकमा जिले के कोंटा ब्लाक के दूरस्थ मरईगुड़ा गौठानों में जाकर वस्तुस्थिति का अध्ययन कर पत्रिका प्रकाशित किया। वही से मुख्यमंत्री भूपेश बघेलगिरीश देवांगन से गौठान समिति के सदस्य,महिला समितिपंचायत पदाधिकारी ग्रामीणों से वीडियो कॉल से बात भी किये और सम्बंधित अधिकारीयो को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति इस बात का घोतक है कि पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। जिससे हम छत्तीसगढ़ के रहवासियों को सीधा लाभ मिल रहा है। टीम के वरिष्ठ सदस्य राजेंद्र चंद्राकर, विश्वजीत बेहरा, लीलाकांत पटेल, जावेद चौहान, गोपी पाटकर, देवेश साहू, चरणजीत छाबड़ा (रज्जे), अरविंदर छाबड़ा, धीरज नायक, संजय चौधरी, प्रीतम चतुर्वेदी, विक्की वैष्णव, सागर डोंगरे, स्नेहल चंद्राकर, ऋषभ चंद्राकर, प्रतीक चंद्राकर, यश चंद्राकर अन्य सदस्य इस पूरे अभियान में शामिल थे।

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