Media24Media.com: पक्का मकान

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“पक्का मकान बन गया है?” – प्रधानमंत्री मोदी के सवाल पर मुस्कराए दल्लु राम बैगा, कहा – “हां, बन गया है”

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 रायपुर : प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने जब बिलासपुर जिले के ग्राम मोहभट्ठा में आयोजित आमसभा एवं विकास कार्यों के लोकार्पण-शिलान्यास समारोह के दौरान हितग्राहियों से संवाद किया, तो मंच पर एक विशेष क्षण आया – प्रधानमंत्री और दल्लु राम बैगा के बीच सरल, संक्षिप्त किन्तु सजीव, आत्मीय एवं सारगर्भित संवाद।


प्रधानमंत्री ने मुस्कराकर पूछा –
“पक्का मकान बन गया है?”
दल्लु राम ने हाथ जोड़कर जवाब दिया –
“हां, बन गया है।”
प्रधानमंत्री  मोदी ने फिर स्नेहपूर्वक पूछा –
“अच्छा लग रहा है की नहीं?”
भावुक दल्लु राम ने जवाब दिया
“अच्छा लग रहा है।”
प्रधानमंत्री ने अंत में पूछा –
“बाकी सब ठीक है?”
दल्लु राम ने आत्मविश्वास के साथ कहा –
“ठीक है।”

यह संवाद कोई औपचारिक प्रश्नोत्तर नहीं था, बल्कि विश्वास, संवेदना और साझेदारी का साक्षात चित्रण था।


छत्तीसगढ़ के तीन लाख गरीब परिवारों के लिए आज का दिन बेहद खास और अविस्मरणीय है। आज चैत्र नवरात्रि के पहले दिन प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने उन्हें उनके सपनों के आशियानों में गृहप्रवेश कराया। इनमें बड़ी संख्या में दूरस्थ वनांचलों के गरीब और वंचित परिवार भी शामिल हैं। ये ऐसे परिवार हैं जो प्रधानमंत्री आवास जैसी योजना नहीं होती तो शायद ही कभी अपने खुद के पक्के मकान का सपना पूरा कर पाते। यह योजना प्रदेश के लाखों गरीब परिवारों का बड़ा सपना पूरा कर रही है।

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने आज बिलासपुर के मोहभट्ठा में दूरस्थ अंचलों के तीन आदिवासी परिवारों को खुद अपने हाथों से नए आवासों की चाबी सौंपी। बीजापुर जिले के चेरपाल पंचायत की श्रीमती सोमारी पुनेम, कबीरधाम जिले के ग्राम हाथीडोब के श्री दल्लुराम बैगा और जशपुर जिले के करदना पंचायत के पहाड़ी कोरवा श्री जगतपाल राम को जब प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रतीक रूप में मंच से उनके नवनिर्मित पक्के आवासों की चाबी सौंपी तो उनकी खुशियां देखते ही बनती थी।

रोटी, कपड़ा और मकान हर इंसान की सबसे बुनियादी जरूरतें हैं। पिछड़े ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जहां आज भी संसाधनों की भारी कमी है, वहां एक पक्का घर सिर्फ एक दीवार और छत नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास का प्रतीक है।

विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के दल्लुराम बैगा कभी कच्ची मिट्टी और खपरैल के घर में भय और असुरक्षा के साये में रहते थे। बरसात में छत से टपकते पानी, कमजोर मिट्टी की दीवारें और रात के सन्नाटे में रेंगते जहरीले जीव-जंतु... ऐसे हालात में पूरे परिवार के साथ रहना रोज का संघर्ष था।

प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत दल्लुराम का आवास स्वीकृत होने के बाद उसके सपनों के घर का सफर शुरू हुआ। आवास निर्माण के लिए दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता के साथ ही 95 दिनों की मनरेगा मजदूरी के रूप में 23 हजार रुपए भी मिले। अन्य योजनाओं से रसोई गैस, शौचालय और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी मिलीं। अब दल्लुराम और उसका परिवार न केवल सुरक्षित मकान में रह रहा है, बल्कि आत्मसम्मान और गर्व के साथ समाज में अपनी पहचान भी बना रहा है।

दीवारों की नहीं सपने के पूरे होने की मुस्कान

राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरबा समुदाय के जशपुर जिले के सुदूर अंचल में बसे ग्राम करदना के श्री जगतपाल राम वर्षों से एक टूटी-फूटी झोपड़ी में अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकता था, चारों ओर कीचड़ और भीतर डर का माहौल बना रहता था। सांप-बिच्छुओं का डर, हर साल झोपड़ी की मरम्मत का बोझ, और बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का भी अभाव था।

प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना जगतपाल के लिए उम्मीद की रोशनी लेकर आई। योजना के तहत मिली दो लाख रुपए की सहायता से जगतपाल ने साफ-सुथरा, मजबूत पक्का घर बनवाया जहां न केवल रहने के लिए कमरे हैं, बल्कि शौचालय और बिजली भी है। अब उनका परिवार मूसलाधार बारिश के थपेड़ो, जंगली जानवर और रात के अंधेरे के खतरों से सुरक्षित है।

आज जब जगतपाल अपने घर के सामने बैठते हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष की मुस्कान होती है। यह मुस्कान सिर्फ दीवारों की नहीं, बल्कि सपने के पूरे होने की मुस्कान है। जगतपाल की ही तरह हजारों गरीब और वंचित आदिवासी परिवारों की भी ऐसी ही कहानी है जिनका जीवन प्रधानमंत्री आवास योजना ने खुशियों से भर दिया है।

टूटे सपनों को मिला सहारा और मिट्टी के आंगन में उग आई उम्मीद की छत

वर्षों तक संघर्ष करते हुए सोमारी पुनेम ने कभी नहीं सोचा था कि उसके सिर पर एक दिन पक्की छत होगी। पति के निधन के बाद वह अपने बेटे के साथ एक छोटे से टपकते छप्पर के नीचे जीवन की अनगिनत कठिनाइयों के बीच अपना जीवन-यापन कर रही थी। नियद नेल्ला नार योजना शुरू होने के बाद जब उसे प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिली, तो उसकी आंखें चमक उठी। वह बताती है - "मैंने अपने पास जो थोड़ी-बहुत बचत थी, वही लगाई। हर दिन मजदूरों के साथ बैठकर खुद ईंटें उठाई। घर बनता गया... और मेरा आत्मविश्वास भी। आखिरकार महीनों की मेहनत के बाद पक्का आवास बनकर तैयार हो गया। अब बारिश की बूंदें डर नहीं, राहत देती हैं... रातें भी सुकूनभरी लगती हैं। धूप से अब सिर्फ दीवारें नहीं, सम्मान भी बचता है।"

बीजापुर के चेरपाल में रहने वाली 60 साल की सोमारी कहती है - "आज जब मैं अपने घर के दरवाजे से अंदर जाती हूं, तो लगता है कि मैं अकेली नहीं हूं। मेरे साथ मेरे स्वर्गीय पति का सपना भी इस घर में सांस ले रहा है।" प्रधानमंत्री आवास योजना ने सोमारी को सिर्फ एक मकान नहीं दिया। यह योजना उसके जीवन में भरोसे की नींव, आत्मसम्मान की दीवारें और भविष्य की छत बनकर उतरी है।

कबीरधाम जिले के 22 हजार परिवारों का पक्का मकान का सपना होगा पूरा

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रायपुर। नवरात्र पर्व पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दी गई गांरटी के तहत कबीरधाम जिले के 22 हजार से अधिक आवासहीन परिवारों का स्वयं का पक्का मकान बनाने का सपना पूरा होने जा रहा है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में आवासहीन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए तेजी से आवासों की स्वीकृति दी जा रही है साथ ही उनका निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है।

कबीरधाम जिले में आवासहीन परिवारों को स्वयं का पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास मेले का आयोजन 9 अक्टूबर को किया जा रहा है। इस मेले का शुभारंभ पीजी कॉलेज स्टेडियम (डोम) में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा करेंगे। इस मौके पर शर्मा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के 18 हजार लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए 4 हजार आवासों के लाभार्थियों को गृह प्रवेश के लिए चाबी सौपेंगे। गौरतलब है कि कबीरधाम जिले में 30,944 आवासहीन ग्रामीण परिवारों के लिए आवास स्वीकृत की कार्रवाई की जा रही है। जिसमें प्रथम चरण पर 18848 आवासो की की स्वीकृति दी गई है तथा शेष बचे हुए हितग्राहियों को जल्द ही आवास की निर्माण के लिए स्वीकृति दी जाएगी।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की मुख्य आतिथ्य में आयोजित किए जा रहे प्रधानमंत्री आवास मेले में कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा सांसद संतोष पाण्डेय करेंगे। विशिष्ट अतिथि विधायक श्रीमती भावना बोहरा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुशीला रामकुमार भट् होंगी। इसके अलावा अनेक पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम में 294 आवास मित्रो को रोजगार चयन पत्र और 250 से अधिक प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों को भी प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। कार्यक्रम में आवासहीन परिवारों को पक्का आवास का हक दिलाने में योगदान देने वाले जनप्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया जाएगा।

आवास मेला स्थल पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा हेल्थ कैंप लीड बैंक द्वारा बैंकिंग सुविधाओं के लिए कैम्प और खाद्य विभाग द्वारा राशन कार्ड आदि के लिए स्टॉल लगाया जाएगा। इसके साथ ही आवास योजना के नए लाभार्थियों को भवन निर्माण के लिए मार्गदर्शन के साथ ही उपयोग होने वाले सामग्रियों की गुणवत्ता के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

 

 

वनांचल क्षेत्र में पीएम आवास बना हितग्राहियों के लिए सुरक्षाकवच, दिव्यांग बाबू लाल के सपनों को मिला नया आयाम

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 रायपुर : प्रदेश में राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के पहल ‘‘प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण’’ के माध्यम से ऐसे पात्र वनवासी हितग्राहियों का चयन कर  पक्का मकान बना कर दिया जा रहा है। सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के गोमर्डा अभ्यारण के वनांचल कनकबीरा और आश्रित ग्रामों के  नारद खुड़िया, श्रीमती गायत्री यादव, देवानंद खुड़िया जैसे कई पीएम आवास हितग्राही परिवार हैं जिनका ‘‘प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण’’ के तहत पक्का मकान, बनाया गया है। 


 
ग्रामीणों ने बताया कि पहले कच्चे मकान होने से उन्हें दिन-रात जंगली हाथी का भय बना रहता था। अब पीएम आवास हो जाने से एक सुरक्षा कवच बन गया है। हितग्राही श्रीनारद ने कहा कि हम लोग सरकार के मदद के बिना पक्का मकान नहीं बना सकते थे। सरकार के सहयोग से हमारा पक्का मकान बना है। पहले कच्चा मकान होने पर हर साल खपरैल वाले छत में बंदर के आने से खपरैल टूट जाते थे तो उसको बदलना पड़ता था। अब पक्का मकान हो जाने से बंदर से कोई नुकसान नहीं है। कनकबीरा की पीएम हितग्राही परिवार की श्रीमती गायत्री यादव कहती हैं कि यह वनांचल क्षेत्र जंगली हाथी प्रभावित क्षेत्र है। पीएम आवास योजना से पक्का मकान बन जाने से अब भय नहीं रहता है।
 
सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सरसीवां तहसील के ग्राम पंचायत गाताडीह के आश्रित ग्राम अमलीडीह निवासी दिव्यांग श्री बाबूलाल मानिकपुरी अपने बातों का उच्चारण सही ढंग से नहीं कर पाते। परन्तु राज्य सरकार ने आवास की मांग, जरूरत को समझा और पीएम आवास योजना ग्रामीण से उनको लाभ दिया। दिव्यांग श्री बाबूलाल के लिए पीएम आवास केंद्र और राज्य सरकार का बड़ा सहयोग है। सरकार के सहयोग से उनके लिए उनका पीएम आवास बना है जिससे वे संतुष्ट हैं। 
 
 बाबूलाल बताया कि वर्ष 2007 के आसपास ओंकारेश्वर मध्यप्रदेश के जेपी कंपनी में वे श्रमिक का काम करते थे, तब उनके पैर में कैंसर हो गया, जिनकी वजह से उनके पैर को काटना पड़ा और वह सामान्य से दिव्यांग हो गए। उनके घर में उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं। अमलीडीह गांव की बस्ती में पुराने घर में वे रहते थे। अब वह अपने नए घर में रहने लगे। घर के पास एक छोटे से ठेला में कुरकुरे बिस्किट आदि बिक्री कर अपनी आजीविका चलाते हैं। यदि सरकार उनके आवास के लिए सहयोग नहीं करते तो उनके जीवन में आवास की समस्या बनी रहती।
 
हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को प्रधानमंत्री आवास प्रदान करने के लिए आभार और धन्यवाद व्यक्त किया।

विशेष लेख : ’प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)-हर गरीब परिवार को पक्का मकान

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बेमेतरा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराना है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य हर गरीब परिवार को पक्का मकान उपलब्ध कराना था, लेकिन यह कार्यक्रम अभी भी जारी है और अधिकाधिक पात्र लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को आवास निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है ताकि वे सुरक्षित और स्थायी घर बना सकें।

हाल ही में बेमेतरा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत हितग्राहियों को आवास की स्वीकृति प्रक्रिया ग्राम सभा द्वारा पारित प्रस्ताव और भौतिक सत्यापन के पश्चात की जा रही है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और स्वचालित है, जिसमें स्थायी प्रतीक्षा सूची और पूर्व में किए गए सर्वेक्षण के आधार पर ही पात्र हितग्राहियों का चयन किया जा रहा है। इन हितग्राहियों का नाम अंतिम रूप से स्वीकृत कर लिया गया है, और इसमें किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है।

बेमेतरा ज़िले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वर्ष 16-17 से  लेकर 22-23 तक 32,424 स्वीकृत आवासों में 30,940 आवास पूर्ण हो चुके है। वही वर्ष 24-25 में 25087 प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) लक्ष्य के विरुद्ध पात्र हितग्राहियों को 14545 स्वीकृत किए जा चुके है। पहली किश्त 40 हज़ार रुपये के मान से अब तक कुल 53 करोड़ 83 लाख 20 हज़ार रुपये जारी किए गए है।

योजना के अनुसार, पात्र हितग्राहियों को किसी भी प्रकार की स्वीकृति के लिए अधिकारियों या कर्मचारियों से संपर्क करने की आवश्यकता नहीं है। योजना की पूरी प्रक्रिया इस प्रकार से डिजाइन की गई है कि पात्र व्यक्ति स्वतरू ही आवास की स्वीकृति प्राप्त कर लेते हैं। साथ ही, उनके बैंक खातों में योजना के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता की राशि भी सीधे जमा हो जाती है। यह योजना पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया पर आधारित है, जिसमें भ्रष्टाचार या धांधली की कोई गुंजाइश नहीं है।

हालांकि, हाल के दिनों में यह देखने में आया है कि कुछ अनैतिक लोग इस योजना का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। वे हितग्राहियों को झूठे दावे करके यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वे उनका नाम सूची में जुड़वा सकते हैं या उनकी स्वीकृति प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों से सावधान रहना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह पूरी तरह से फर्जी दावा है। योजना की स्वीकृति प्रक्रिया में किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या व्यक्ति द्वारा किसी प्रकार का बदलाव करना संभव नहीं है। इसलिए, यदि कोई व्यक्ति या अधिकारी यह दावा करता है कि वह किसी का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में जोड़ सकता है, तो वह पूरी तरह से झूठ बोल रहा है।

अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग योजना के बारे में कम जानकारी होने के कारण धोखेबाजों के झांसे में आ जाते हैं। कई बार अज्ञात व्यक्तियों द्वारा फोन कॉल करके हितग्राहियों को यह बताया जाता है कि वे उनका नाम योजना में जुड़वा सकते हैं, बशर्ते कि वे कुछ धनराशि प्रदान करें। ऐसी स्थितियों में हितग्राहियों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए और ऐसे किसी भी कॉल या संदेश का जवाब नहीं देना चाहिए। किसी भी अनजान व्यक्ति से योजना से संबंधित कोई जानकारी साझा न करें, क्योंकि यह धोखाधड़ी हो सकती है।

अगर किसी हितग्राही को इस प्रकार की कोई कॉल या संदेश प्राप्त होता है, तो उसे तुरंत पुलिस थाने में इसकी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके अलावा, हितग्राही जिला पंचायत के दूरभाष नंबर +91-07824-222609 पर कार्यालयीन समय में संपर्क कर सकते हैं और इस प्रकार के मामलों की जानकारी दे सकते हैं। प्रशासन भी इस प्रकार की धोखाधड़ी के मामलों पर सख्त नजर रखे हुए है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की स्वीकृति प्रक्रिया पूरी तरह से ऑटोमेटेड और डेटा-आधारित है। किसी भी प्रकार का मैनुअल हस्तक्षेप इसमें संभव नहीं है। हितग्राही के चयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभा द्वारा पारित प्रस्ताव और भौतिक सत्यापन के आधार पर ही नामों की अंतिम सूची तैयार की जाती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि केवल वही लोग योजना का लाभ उठाएं जो वास्तव में इसके पात्र हैं।

सरकार ने इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए विभिन्न स्तरों पर निगरानी और जांच की मजबूत व्यवस्था की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र हितग्राही योजना के लाभ से वंचित न रहे और अपात्र लोग इसका अनुचित लाभ न उठा सकें। इसके साथ ही, आम जनता को भी जागरूक होना आवश्यक है ताकि वे किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बच सकें और योजना के वास्तविक लाभार्थी बन सकें।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को आवास की स्वीकृति पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया द्वारा दी जाती है। इसमें किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति द्वारा कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। यदि कोई व्यक्ति या अधिकारी यह दावा करता है कि वह किसी का नाम सूची में जोड़ सकता है, तो वह झूठ बोल रहा है। हितग्राहियों को चाहिए कि वे ऐसे किसी भी झांसे में न आएं और किसी भी अनजान व्यक्ति से कॉल या संदेश प्राप्त होने पर उसकी तुरंत शिकायत करें।

सरकार इस प्रकार की धोखाधड़ी के मामलों पर सख्त कार्रवाई कर रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि योजना के लाभार्थियों तक योजना का पूरा लाभ पहुंचे। जनता को भी अपनी जागरूकता बढ़ानी चाहिए और किसी भी प्रकार की गलत सूचना या धोखाधड़ी से बचने के लिए सतर्क रहना चाहिए।

 

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