Media24Media.com: नई संसद भवन

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नई संसद में पीएम मोदी ने जारी किया 75 रुपये का सिक्का, जाने क्या है खासियत?

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PM Modi released a coin of 75 rupees:   आजादी के बाद आज देश को नई संसद भवन को तोहफा मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे विधि-विधान से पूजन आदि के बाद देश को आज नई संसद समर्पित की है। वहीं, हवन-पूजन के कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी ने सेंगोल को दंडवत प्रणाम किया और उसे स्पीकर के आसन के पास स्थापित कर दिया। पीएम मोदी ने संसद के उद्घाटन समारोह पर आयोजित कार्यक्रम के दूसरे चरण के दौरान में स्मारक डाक टिकट और 75 रुपये का सिक्का भी जारी किया है। इस सिक्के का वजन  34.65-35.35 ग्राम है। इस सिक्के को पश्चिम बंगाल के कोलकाता की टकसाल में ढाला गया है।


ये हैं खासियतें

जानकारी दे दें कि इस सिक्के के दोनों तरफ अशोक स्तंभ, जिस पर भारत और इंडिया लिखा हुआ है। वहीं, इसके नीचे रुपये के चिह्न के साथ 75 लिखा है। सिक्के के दूसरी तरफ संसद की तस्वीर है और उसके नीचे 2023 लिखा है। ये सिक्का कोलकाता के टकसाल में ढाला गया है। सिक्के का डायमीटर 44 मिमी है। इसका वजन 34.65-35.35 ग्राम है। जानकारी के लिए बता दें कि ये सिक्का 50% सिल्वर, 40% कॉपर, 5% निकल और 5% जिंक से बना है। सिक्के के एक तरफ अशोक स्तंभ है, जिसके नीचे सत्यमेव जयते लिखा है। बाईं ओर देवनागरी में भारत और दाईं ओर अंग्रेजी में इंडिया लिखा है। जानकारी के मुताबिक, नए सिक्के में रुपए का साइन है और लायन कैपिटल के नीचे 75 रुपये लिखा है। साथ ही सिक्के की दूसरी साइड पर संसद परिसर की तस्वीर बनी हुई है और तस्वीर के ऊपर देवनागरी में संसद संकुल और नीचे अंग्रेजी में पार्लियामेंट कॉम्प्लेक्स लिखा हुआ है।

पहली बार किया संबोधन

वहीं, पीएम मोदी ने इस मौके पर नई संसद भवन में पहली बार अपना संबोधन दिया। उन्होंने कहा, 'देश की विकास यात्रा में कुछ पल अमर हो जाते हैं। आज 28 मई 2023 का ये दिन भी ऐसा ही शुभ अवसर है। देश आजादी के 75 वर्ष पूरा होने पर अमृत महोत्सव मना रहा है और आज सुबह ही संसद भवन परिसर में सर्व पंथ प्रार्थना हुई है। पीएम ने आगे कहा कि मैं देशवासियों को इस स्वर्णिम क्षण की बहुत बधाई देता हूं। यह सिर्फ भवन नहीं है यह 140 करोड़ देशवासियों के आकांक्षाओं की परछाई है और ये हमारे लोकतंत्र का मंदिर है।'


देश को मिल गई नई संसद भवन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधिवत पूजन के बाद किया भव्य उद्घाटन

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New Parliament Inauguration:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई संसद भवन का उद्घाटन किया है। नई इमारत के उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की मूर्ति को प्रणाम किया। नई संसद भवन के उद्घाटन किए जाने का लंबे समय से इंतजार हो रहा था। इसके बाद ऐतिहासक राजदंड ‘सेंगोल’ का विधिवत पूजन करने के बाद उसे साष्टांग किया। इसके बाद ऐतिहासिक राजदंड ‘सेंगोल’ को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के समीप स्थापित किया गया है।


इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चिर परिचित अंदाज में दिखे। पूजन के मौके पर उन्होंने सफेद रंग का धोती-कुर्ता पहन रखा था। इसके ऊपर उन्होंने क्रीम कलर का जैकेट भी पहना। पारंपरिक परिधान में प्रधानमंत्री मोदी ने द्वार संख्या-एक से संसद भवन परिसर में प्रवेश किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मोदी और बिरला ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद प्रधानमंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के साथ पूजा अर्चना व हवन किया।

प्रधानमंत्री ने नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर ईश्वर का आशीर्वाद लेने के लिए कर्नाटक के श्रृंगेरी मठ के पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच ‘गणपति होमम्’ अनुष्ठान किया। प्रधानमंत्री ने ‘सेंगोल’ (राजदंड) को दंडवत प्रणाम किया और हाथ में पवित्र राजदंड लेकर तमिलनाडु के विभिन्न अधीनमों के पुजारियों का आशीर्वाद लिया। इसके बाद ‘नादस्वरम्’ की धुनों के बीच प्रधानमंत्री मोदी सेंगोल को नए संसद भवन लेकर गए और इसे लोकसभा कक्ष में अध्यक्ष के आसन के दाईं ओर एक विशेष स्थान में स्थापित किया।

कई मंत्री रहे मौजूद

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, एस. जयशंकर और जितेंद्र सिंह, योगी आदित्यनाथ सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे. पी. नड्डा मौजूद रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने नए संसद भवन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कुछ कर्मचारियों को शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर एक सर्वधर्म प्रार्थना भी आयोजित की गई। प्रधानमंत्री बाद में लोकसभा अध्यक्ष और कुछ अन्य गणमान्य लोगों के साथ पुराने संसद भवन गए।

ये है संसद भवन की खासियत

टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा निर्मित नए संसद भवन में भारत की लोकतांत्रिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए एक भव्य संविधान हॉल, सांसदों के लिए एक लाउंज, एक पुस्तकालय, कई समिति कक्ष, भोजन क्षेत्र और पर्याप्त पार्किंग स्थान होगा। त्रिकोणीय आकार की चार मंजिला इमारत 64,500 वर्ग मीटर में फैली है। इस इमारत के तीन मुख्य द्वार ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार हैं। इसमें विशिष्ट जन, सांसदों और आगंतुकों के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार होंगे। नए भवन के लिए उपयोग की गई सामग्री देश के विभिन्न हिस्सों से लाई गई है। इमारत में इस्तेमाल सागौन की लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से मंगाई गई थी, जबकि लाल और सफेद बलुआ पत्थर राजस्थान के सरमथुरा से खरीदा गया था। राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले और हुमायूं के मकबरे के लिए बलुआ पत्थर भी सरमथुरा से प्राप्त किया गया था। केसरिया हरे पत्थर को उदयपुर से, लाल ग्रेनाइट को अजमेर के पास लाखा से और सफेद संगमरमर को राजस्थान के अंबाजी से खरीदा गया है। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘एक तरह से पूरा देश लोकतंत्र के मंदिर के निर्माण के लिए एक साथ आया, जो एक प्रकार से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को दर्शाता है।’’

देश भर से आए सामानों से सजाया गया संसद भवन

लोकसभा और राज्यसभा के कक्षों में फॉल्स सीलिंग के लिए स्टील का ढांचा केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव से मंगाया गया है जबकि नई इमारत का फर्नीचर मुंबई में तैयार किया गया था। इमारत में पत्थर की जाली का काम किया गया है, जिसमें राजस्थान के राजनगर और उत्तर प्रदेश के नोएडा का योगदान है। अशोक स्तंभ के लिए सामग्री महाराष्ट्र के औरंगाबाद और राजस्थान के जयपुर से मंगाई गई थी जबकि लोकसभा और राज्यसभा कक्षों की विशाल दीवारों और संसद भवन के बाहरी हिस्से में लगे अशोक चक्र को मध्य प्रदेश के इंदौर से खरीदा गया था। नए संसद भवन में निर्माण गतिविधियों के लिए कंक्रीट मिश्रण बनाने के लिए हरियाणा के चरखी दादरी से ‘एम-सैंड’ यानी निर्मित रेत का उपयोग किया गया। एम-सैंड को पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है क्योंकि यह बड़े कठोर पत्थरों या ग्रेनाइट को कुचलकर निर्मित होता है, न कि नदी के तल में निकर्षण द्वारा। निर्माण में इस्तेमाल ‘फ्लाई ऐश’ ईंटें हरियाणा और उत्तर प्रदेश से मंगाई गई थीं, जबकि पीतल के काम और पूर्वनिर्मित खाइयां गुजरात के अहमदाबाद से थीं। ‘फ्लाई ऐश’ एक बारीक पाउडर है जो तापीय बिजली संयंत्रों में कोयले के जलने से उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।

कुल 1280 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था

इसमें भारी धातु होते हैं और साथ ही पीएम 2.5 और ब्लैक कार्बन भी होते हैं। नए संसद भवन के लोकसभा कक्ष में 888 सदस्य और राज्यसभा कक्ष में 300 सदस्य आराम से बैठ सकते हैं। दोनों सदनों की संयुक्त बैठक होने पर कुल 1,280 सदस्यों को लोकसभा कक्ष में समायोजित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने 10 दिसंबर, 2020 को नए संसद भवन की आधारशिला रखी थी। पुराना संसद भवन 1927 में बनकर तैयार हुआ था। पुरानी इमारत को वर्तमान आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त पाया गया था। लोकसभा और राज्यसभा ने प्रस्ताव पारित कर सरकार से संसद के लिए एक नया भवन बनाने का आग्रह किया था। पुरानी इमारत ने स्वतंत्र भारत की पहली संसद के रूप में कार्य किया और यह संविधान को अपनाने की गवाह भी बनी। मूल रूप से ‘इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल’ में स्थित इस संसद भवन को ‘काउंसिल हाउस’ कहा जाता था। संसद भवन में 1956 में अधिक जगह की आवश्यकता को देखते हुए दो मंजिलों को जोड़ा गया था। वर्ष 2006 में, भारत की समृद्ध लोकतांत्रिक विरासत के 2,500 वर्षों को प्रदर्शित करने के लिए संसद संग्रहालय का निर्माण किया गया था

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की राष्ट्रपति से नई संसद भवन के उद्घाटन की मांग वाली याचिका

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Supreme Court: देश के नए संसद भवन के उद्घाटन की तराखी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है। इसको लेकर रोज नए नए ट्वस्टि देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस समेत 21 विपक्षी दलों ने कार्यक्रम के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। वहीं मामाल देश की सर्वोच्च अदालत में भी दस्तक देता दिखा। अब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से संसद भवन के उद्घाटन को लेकर दायर की गई याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भारत की प्रथम नागरिक और संस्था के प्रमुख राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए लोकसभा सचिवालय को निर्देश देने की याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि हम जानते हैं कि आप ऐसी याचिकाएं क्यों दायर करते हैं, हम इस पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं।


बता दें कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें यह निर्देश देने की मांग की गई है कि नए संसद भवन का उद्घाटन भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने कहा था कि लोकसभा सचिवालय ने राष्ट्रपति को उद्घाटन के लिए आमंत्रित नहीं करके संविधान का उल्लंघन किया गया। याचिका में कहा गया है कि राष्ट्र के मुखिया राष्ट्रपति को न बुलाना गलत है।

तमिलनाडु के एक वकील ने दाखिल की थी याचिका

याचिकाकर्ता का नाम सी आर जयासुकिन है. पेशे से वकील जयासुकिन तमिलनाडु से हैं. वह लगातार जनहित याचिकाएं दाखिल करते रहते हैं. उनकी इस याचिका में कहा गया था कि देश के संवैधानिक प्रमुख होने के नाते राष्ट्रपति ही प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं. सभी बड़े फैसले भी राष्ट्रपति के नाम पर लिए जाते हैं. राष्ट्रपति देश की प्रथम नागरिक हैं. संविधान के अनुच्छेद 79 के मुताबिक राष्ट्रपति संसद का भी अनिवार्य हिस्सा हैं. लोकसभा सचिवालय ने उनसे उद्घाटन न करवाने का जो फैसला लिया है, वह गलत .

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