Media24Media.com: जन-जागरूकता

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लोकतंत्र को जीवित रखने एवं सशक्त करने के लिए जन-जागरूकता और सक्रिय भागीदारी अनिवार्य - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह अत्यंत आवश्यक है कि लोकतंत्र की हत्या के उस काले दिन को हमारी भावी पीढ़ी भी जाने, समझे और उससे सीख ले। आपातकाल के दौर को याद करते हुए भावुक हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कालखंड मेरे जीवन से गहराई से जुड़ा है। यह मेरे लिए मात्र एक घटना नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत पीड़ा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि प्रसाद साय आपातकाल के दौरान 19 माह तक जेल में रहे। उस समय लोकतंत्र सेनानियों के घरों की स्थिति अत्यंत दयनीय थीकई बार घर में चूल्हा तक नहीं जलता था। ऐसे अनेक परिवारों को मैंने स्वयं देखा है। उन्होंने कहा कि निरंकुश सत्ता ने उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल दिया था, नागरिक अधिकार छीन लिए गए थे। वास्तव में, वह लोकतंत्र का काला दिन था, जिसका दंश हमारे परिवार ने झेला है और जिसे मैंने स्वयं जिया है।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम के दौरान लोकतंत्र सेनानी परिवारों के सदस्यों से भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा शॉल, श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार लोकतंत्र सेनानी परिवारों को सम्मान देने का कार्य कर रही है। इन परिवारों को प्रतिमाह 10 हजार से 25 हजार रुपए तक की सम्मान राशि दी जा रही हैयह उनके संघर्ष और बलिदान को नमन करने का एक विनम्र प्रयास है।

कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं और युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान की रक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे आपातकाल के इतिहास को जानें, पढ़ें और समझें कि किस प्रकार उस कालखंड में संविधान को कुचला गया था। लोकतंत्र को जीवित रखने और सशक्त करने के लिए जन-जागरूकता और सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के संविधान और लोकतंत्र पर आपातकाल एक ऐसा कलंक है, जिसे इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज किया गया है। आपातकाल थोपकर न केवल संविधान को निष्क्रिय कर दिया गया, बल्कि मौलिक अधिकारों को समाप्त कर लोकतंत्र की आत्मा को कुचल दिया गया।

उन्होंने कहा कि उस समय देश को एक खुली जेल में बदल दिया गया था, जिसमें भय और आतंक का वातावरण था। एक लाख से अधिक लोगों को बिना न्यायिक प्रक्रिया के जेलों में बंद कर दिया गया, और उन्हें यातनाएं दी गईं। यह केवल राजनीतिक दमन का दौर नहीं था, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना को समाप्त करने का सुनियोजित प्रयास था।

डॉ. सिंह ने युवाओं से आह्वान किया कि वे आपातकाल के विषय में शोध करें, पढ़ें और समझें कि लोकतंत्र की रक्षा हेतु कितने लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी। भविष्य में लोकतंत्र को सुरक्षित बनाए रखने के लिए हमें सदैव जागरूक और सजग रहना होगा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति श्री बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र का सबसे शर्मनाक और काला दिन था। इस दिन संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को जिस तरह से कुचला गया, उसका कोई दूसरा उदाहरण विश्व इतिहास में नहीं मिलता। संविधान में मनमाने ढंग से संशोधन किए गए, जिससे देश की आत्मचेतना और नागरिक अधिकारों का दमन हुआ।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित जनजागरूकता रैली में भी भाग लिया। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने आपातकाल पर आयोजित विशेष प्रदर्शनी का किया अवलोकन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में आपातकाल के दौरान की दमनकारी नीतियों, मानवाधिकारों के उल्लंघन और लोकतंत्र के हनन को चित्रों एवं दस्तावेजों के माध्यम से दर्शाया गया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय है, जिसे विस्मृत नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी प्रदर्शनी नई पीढ़ी को लोकतंत्र और संविधान के महत्व को समझाने में सहायक सिद्ध होगी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदर्शनी लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

इस अवसर पर उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, विधायकगण पुरंदर मिश्रा, गुरु खुशवंत साहेब, मोतीलाल साहू, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने, प्रदेश अध्यक्ष दिवाकर तिवारी, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा तथा संचालक संस्कृति विवेक आचार्य सहित बड़ी संख्या में विद्वान, लोकतंत्र सेनानी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

नशा मुक्ति जन-जागरूकता अभियान : कार्ययोजना प्रारूप का संशोधन एवं सुझाव कर बैठक संपन्न

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर छत्तीसगढ़ में नशा मुक्ति के लिए व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। समाज कल्याण विभाग द्वारा जोर-शोर से इसके लिए तैयारी की जा रही है। नशा मुक्ति अभियान के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा कार्ययोजना (प्रारूप) तैयार कर ली गई है। आज कार्ययोजना (प्रारूप) में संशोधन एवं सुझाव के लिए बैठक आयोजित की गई।
                      

नशा मुक्ति अभियान के लिए तैयार प्रारूप में संशोधन एवं सुझाव हेतु आयोजित बैठक में चर्चा के दौरान विभागीय समन्वय और शासकीय, गैर शासकीय, स्वयं सेवी संस्थाओं तथा धार्मिक व समाजिक संस्थाओं का सहयोग लिए जाने पर विशेष बल दिया गया। बैठक में स्कूलों, कॉलेजों, पारा-मोहल्लों में आदिवासी पारम्परिक संस्कृति को बिना प्रभावित किए हुए नशा  मुक्ति अभियान चलाए जाने पर जोर दिया गया। समाज को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने, युवा पीढ़ी को बर्बादी से बचाने तथा उनकी संपूर्ण ऊर्जा का राष्ट्र निर्माण में उपयोग करने के लिए आवश्यक है कि नशा मुक्ति हेतु बड़ा जन-जागरण अभियान आरंभ किया जाये। उच्चतर माध्यमिक शालाओं, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के छात्रों में जागरूकता हेतु लेखन, कविता, भाषण, प्रतियोगिता सहित सेमीनार आदि का आयोजन किया जाए। बैठक में समाज कल्याण विभाग के अपर संचालक पंकज वर्मा सहित संबंधित विभागीय अधिकारी और स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि विशेष रूप उपस्थित थे। 

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में नशे के दुष्प्रभावों से समाज को बचाने के लिए व्यापक जन-जागरण अभियान आरंभ करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि नशा मुक्ति जन-जागरण अभियान की विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के लिए देश में नशा मुक्ति हेतु कार्य कर रहे ख्यातिनाम व्यक्तियों एवं संस्थाओं से आवश्यक रूप से परामर्श किया जाए। समाज कल्याण विभाग द्वारा नशा मुक्ति जन-जागरण अभियान के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार कर ली गई है। प्रारूप में संशोधन एवं सुझाव के लिए बैठक में विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा कि नशा एक ऐसी गंभीर सामाजिक बुराई है, जिससे मनुष्य का अनमोल जीवन गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है तथा वह अकाल मृत्यु का भी शिकार बन जाता है। नशे के लिए लोगों द्वारा गांजा, भांग, जर्दा गुड़ाखू, तंबाकू, शराब, गुटका, धूम्रपान, चरस, अफीम, स्मैक, कोकीन और ब्राउन शुगर तथा सुंघकर की जाने वाली नशा जैसे मादक पदार्थों का सेवन किया जाता है। इसे रोकने के लिए शासकीय प्रयासों के साथ ही जनभागीदारी जरूरी है। जब तक हम इस अभियान को जनमानस से नहीं जोड़ेंगे तथा जन-जन तक नहीं पहुंचायेंगे, तब तक यह अभियान सफल नहीं हो पाएगा। युवा पीढ़ी में नशे की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ना अत्यधिक चिंताजनक विषय है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा लू के लिए अलर्ट जारी

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दुर्ग। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौसम में बदलाव के कारण सभी वर्ग के व्यक्ति प्रभावित होते हैं। प्रमुख रूप से बच्चों में सर्दी, खांसी बुखार व उल्टी दस्त की शिकायते मिलती है। जिले में औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष ग्रीष्म ऋतु में तापमान वृद्धि से लू की संभावना अधिक होती है। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लू का अलर्ट जारी किया गया है। 

आम जनता को लू के लक्षण से अवगत कराया जाकर जन-जागरूकता लायी जा रही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.पी. मेश्राम तथा जिला नोडल अधिकारी, डॉ. सी.बी.एस. बंजारे द्वारा अवगत कराया गया। जिले में लू-तापघात के लक्षण जैसे सिर दर्द, तेज बुखार, कमजोरी, मुंह का सूखना, चक्कर आना, पेशाब कम आना, भूख न लगना आदि होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्रों में उपचार करायें एवं स्वास्थ्य लाभ लें। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा लू-तापघात से संबंधित प्रचार-प्रसार कर अवगत कराया जा रहा है।

कि बुखार पीड़ित व्यक्ति के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी लगाएँ, अधिक पेय पदार्थ का सेवन करें जैसे नारियल पानी, आम का पना, जलजीरा आदि। पीड़ित मरीज को पौष्टिक आहार दें, पूरी नींद लेने दें, शरीर को क्रियाशील रखें, ठंडी हवा दें एवं शुद्ध पेयजल अधिक से अधिक दिया जाना चाहिए, आस-पास का वातावरण स्वच्छ रखें। इस हेतु नगरीय निकाय एवं शुद्ध पेयजल हेतु लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से निरन्तर समन्वय बनाया जा रहा है। मितानिन व संबंधित क्षेत्र के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को पर्याप्त मात्रा में दवाईयां उपलब्ध करा दी गयी है।

पर्यावरण संरक्षण में स्कूली बच्चों की महत्वपूर्ण भूमिका : सुब्रत साहू

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रायपुर। स्कूली बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिये प्रेरित करने के लिये छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा आयोजित दो दिवसीय इको बाल मेले का आज शुभारंभ किया गया। अपर मुख्य सचिव आवास एवं पर्यावरण विभाग एवं अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल सुब्रत साहू ने इस मेले का शुभारंभ करने के बाद समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण में स्कूली बच्चों को आगे आना होगा। उन्होंने आज मेले में उपस्थित स्कूली बच्चों एवं शिक्षकों से पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी होने के नाते स्कूली बच्चों की पर्यावरण की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका है।



सुब्रत साहू ने पर्यावरण पर मंडराते खतरों का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा समय में पृथ्वी और हमारा जन-जीवन एक कठिन दौर से गुजर रहा है। विकास की गति को बरकरार रखते हुए पर्यावरण को बचाये रखना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन थोड़ी सी सावधानियों के साथ ऐसा कर पाना संभव है। सुब्रत साहू ने कहा कि हमें अपनी आदतों में परिवर्तन लाना होगा तथा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों को छोड़ना होगा। हमें अपने व्यवहार से पर्यावरण की रक्षा का संदेश देना होगा।छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव आर.पी. तिवारी ने दो दिवसीय इको बाल मेले के आयोजन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कार्यक्रम मुख्यतः पर्यावरणीय जन-जागरूकता के लिए किया जा रहा है।



आज के इस कार्यक्रम में सभी जिलों के इको क्लब स्कूलों के बच्चों द्वारा उत्साहपूर्वक भाग लिया जाना यह प्रदर्शित कर रहा है कि बच्चे पर्यावरण के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहे हैं। दो दिवसीय इको बाल मेले में प्रदेश के सभी जिलों के 03-03 इको क्लब स्कूलों के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। यहां आयोजित प्रदर्शनी मंे इन विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न पर्यावरणीय विषयों पर केन्द्रित शैक्षणिक मॉडल प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें पर्यावरण पर आये खतरों को दर्शाते हुए पर्यावरण की रक्षा का संदेश दिया गया है। इसके साथ ही पर्यावरण पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही है। श्री सुब्रत साहू ने पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा तैयार स्कूली बच्चों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

स्वच्छता ही सेवा अभियान प्रारंभ, स्वच्छता रथ रवाना

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रायपुर। स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रदेश में ‘‘स्वच्छता ही सेवा’’ अभियान आज से शुरू हो गया है। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री रविंद्र चौबे ने आज इस अभियान का शुभारंभ किया। इस मौके पर चौबे ने जन-जागरूकता के लिए तैयार किए गए स्वच्छता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह स्वच्छता रथ आज से आगामी दो अक्टूबर तक प्रदेश के विभिन्न स्थानों का भ्रमण करेगा और इसके माध्यम से लोगों को  स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाएगा। 


यह रथ ग्रामीण क्षेत्रों के हाट- बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थानों का विशेष रूप से भ्रमण करेगा
, जहां एक ही स्थान पर अधिक से अधिक लोगों को स्वच्छता के संबंध में बुनियादी जानकारी दी जा सके। गौरतलब है कि देशभर में स्वच्छता को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से यह अभियान हर वर्ष पंद्रह सितंबर से दो अक्टूबर तक चलाया जाता है। इस अभियान के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से साफ-सफाई पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों पर जमा कूड़े-कचरे को श्रमदान के माध्यम से साफ किया जाएगा। इस अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और ग्रामीणों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।

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