Media24Media.com: जनजातीय समाज

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जनजातीय समाज के विकास को नई दिशा – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में जनजाति सलाहकार परिषद की पहली बैठक

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की पुनर्गठन पश्चात पहली बैठक विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में संपन्न हुई। बैठक में जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक उन्नयन, प्रशासनिक सुधार और संस्कृति संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में कैबिनेट मंत्री एवं जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम सहित प्रदेश के वरिष्ठ मंत्रीगण, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी एवं परिषद के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने परिषद की पहली बैठक में सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में जनजाति समुदाय की जनसंख्या 32% है, और उनका समग्र विकास हमारे राज्य की प्राथमिकता है। यह परिषद केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि नीति-निर्माण और निर्णय-क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण संवैधानिक इकाई है।उन्होंने बैठक में रखे गए सभी बहुमूल्य सुझावों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए और अधिकारियों से कहा कि जनजातीय समुदाय के जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी त्रुटियों के निवारण हेतु विस्तृत अध्ययन कर समाधान सुनिश्चित किया जाए। जनजातीय आस्था स्थलों के संरक्षण एवं विकास हेतु देवगुड़ी के साथ-साथ सरना स्थलों को भी शामिल करने की व्यवस्था की जाए। शिक्षा में सुधार हेतु आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक स्कूलों की समस्या को शीघ्रता से हल किया जाए। जनजातीय समुदाय की आर्थिक सशक्तिकरण योजनाओं पर प्रभावी अमल किया जाए, जिससे उनकी प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो।

कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद, सरकार और जनजातीय समाज के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करती है। हम सभी सदस्य प्रदेश के एक-तिहाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम शासन की योजनाओं को प्रभावी रूप से समुदाय तक पहुँचाएँ।उन्होंने परिषद द्वारा लिए गए निर्णयों को नीति-निर्माण में प्रभावी रूप से शामिल करने का आश्वासन दिया।

बैठक में सभी उपस्थित सदस्यों ने जनजातीय समुदाय की शिक्षा, आजीविका, सामाजिक-आर्थिक विकास और प्रशासनिक सुधार को लेकर ठोस सुझाव दिए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी प्रस्तावों पर त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए एवं अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि नीतिगत सुधारों का वास्तविक लाभ जनजातीय समुदाय तक पहुँचे। यह बैठक जनजातीय समाज के विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

बैठक में परिषद के सदस्यों ने जनजातीय समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए, जिनमें जनजातीय बालिकाओं के लिए छात्रावासों की संख्या एवं सुविधाओं में वृद्धि, जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं भर्ती प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना, स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता एवं जनजातीय क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, आदिवासियों की पारंपरिक आजीविका को सशक्त करने हेतु विशेष योजनाएँ लागू करना,जनजातीय कला, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष योजनाएँ लागू करना शामिल है।

बैठक में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने विभिन्न एजेंडा बिंदुओं पर प्रेजेंटेशन दिया और परिषद के समक्ष विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक सुश्री लता उसेण्डी, श्रीमती शंकुतला सिंह पोर्ते, श्रीमती उद्देश्वरी पैंकरा, श्रीमती रायमुनी भगत, श्रीमती गोमती साय, विधायक रामकुमार टोप्पो, प्रणव कुमार मरपच्ची, विक्रम उसेण्डी, आशाराम नेताम, नीलकंठ टेकाम, विनायक गोयल, चैतराम अटामी सहित मनोनित सदस्य रघुराज सिंह उईके एवं कृष्ण कुमार वैष्णव उपस्थित थे। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही, जिनमें मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, पंचायत विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, सचिव  राजेश सुकुमार टोप्पो, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आयुक्त पदुम सिंह एल्मा सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

प्रकृति के संरक्षक हैं जनजातीय समाज : कौशल्या देवी साय

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 रायपुर : जनजातीय समाज प्रकृति के संरक्षण का कार्य सदियों से कर रहे हैं। जनजातीय समाज को अपनी प्रकृति से अथाह प्रेम है और उसे बचाने के लिए वह किसी भी प्रकार का संघर्ष कर सकते हैं यह वक्तव्य श्रीमती कौशल्या देवी साय ने राजधानी रायपुर स्थित राधाबाई कन्या महाविद्यालय में आयोजित जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कही।


उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं के फलस्वरूप जनजातियों के जीवन स्तर में सुधार आया है।जनजातीय संस्कृति में गहरी आध्यात्मिकता छिपी है। प्रकृति को सहेजकर, प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना। बड़े-छोटे, स्त्री-पुरुष में किसी तरह का भेदभाव नहीं। सब बराबर हैं और प्रकृति का उपहार सबके लिए है। ये बातें हमें इस समाज से सीखने की आवश्यकता है। जनजातीय समाज में दहेज जैसी सामाजिक बुराई का अस्तित्व नहीं है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रामनाथ कश्यप ने कहा कि अंग्रेजों ने भारतीय और जनजाति संस्कृति को कुचलने का काम किया। जनजातियों की प्राचीन समृद्ध वैदिक संस्कृति रही है। वर्तमान भारत के निर्माण में भारतीय जनजातीय समाज ने अपना अभूतपूर्व योगदान दिया है। अतीत से लेकर वर्तमान तक इन जनजातीय समाजों का गौरवशाली इतिहास है। इस समाज ने अपनी कर्मठता, सहजता,सरलता और सत्य निष्ठा के लिए विश्व में ख्याति अर्जित की है। प्रकृति के साथ जीवन जीते इस समाज में औषधीय पहचान की अद्भुत क्षमता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ प्रीति मिश्रा ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि जनजातीय समाज में मातृ सत्तात्मक व्यवस्था है,जहां महिलाओं को विशेष महत्व दिया जाता है।आदिवासी समाज की महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रमुख स्थान प्राप्त किए हैं।

गौरतलब है कि राज्य में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और राष्ट्रीय गौरव,वीरता तथा आतिथ्य के भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने में आदिवासियों के प्रयासों को मान्यता देने के लिए स्वतंत्रता सेनानी, धार्मिक नेता और लोक नायक बिरसा मुंडा की याद में जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। आज उसी कड़ी में राधा बाई शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष एवं छात्राओं द्वारा राजकीय गीत के साथ किया गया। महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा जशपुरिया मांदर गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में आर आर आर फिल्म का कोमड़म भीमडू गीत भी प्रदर्शित किया गया। जनजातीय संस्कृति तथा कला पर आधारित पोस्टर प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर महाविद्यालय में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।a

अनुसूचित जनजाति समाज हमारी सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं का संवाहक : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा छत्तीसगढ़ का अनुसूचित जनजाति समाज हमारी सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और मूल्यों का संवाहक है। मुख्यमंत्री ने लोकसंस्कृति पर केंद्रित डुमन लाल ध्रुव की किताब ‘‘लोक जीवन के बदलते संदर्भ‘‘ और छत्तीसगढ़ी कहानियों के संग्रह ‘‘मन के पाखी‘‘ का विमोचन किया।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनजाति समाज के विकास और उत्थान के लिए राज्य शासन के प्रयासों के साथ-साथ आप सभी की सहभागिता और समर्पण महत्वपूर्ण है। जनजातीय समाज के कल्याण के लिए यह स्वर्णिम समय है। राज्य और केन्द्र सरकार ने जनजातीय समाज के उत्थान को अपनी सर्वाेच्च प्राथमिकता में रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने जनजातीय समाज के उत्थान के लिए जो योजनाएं, नीतियां और कार्यक्रम बनाए हैं, उन्हें सफ़ल करने का दायित्व आपका भी है। हम सभी का सौभाग्य है कि हमें यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का मजबूत नेतृत्व मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं एक बात आपसे विशेष रूप से कहना चाहता हूं कि हमारी-आपकी प्राथमिकता भले ही जनजातीय समाज है, लेकिन हम और आप प्रदेश के सभी नागरिकों के विकास के लिए जिम्मेदार हैं। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास हमारा ध्येय होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह शपथ समारोह यह बताता है कि आप सभी एकजुट होकर प्रदेश को एक नई दिशा देने के लिए तैयार हैं। प्रदेश के और खासकर जनजातीय समुदायों के विकास के लिए सरकार के प्रयासों के साथ-साथ आप जैसे कर्मठ सेवकों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में आपका कार्य समाज को प्रेरणा देता है। मुझे विश्वास है कि आपकी सेवाओं के माध्यम से हमारे प्रदेश का हर कोना विकास और समृद्धि की ओर अग्रसर होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं इस मंच से यह कहना चाहता हूँ कि हमारी सरकार आपकी हर सकारात्मक पहल में आपका साथ देगी। हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और समावेशी प्रदेश बनाएंगे। आशा करता हूँ कि आपके प्रयास प्रदेश के हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।

छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ के प्रांताध्यक्ष आर. एन. ध्रुव ने अपने सम्बोधन में समाज की विभिन्न मांगों से अतिथियों को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों पर विचार कर उचित निर्णय का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, समाज के पूर्व प्रांताध्यक्ष सरजियस मिंज, प्रांताध्यक्ष आर. एन. ध्रुव, आर ठाकुर, बी. एल. ध्रुव सहित छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के तत्त्वावधान में जनजातीय गौरव दिवस पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयू), भिलाई के तत्त्वावधान में शासकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय, रायपुर में जनजातीय गौरव दिवस के निमित्त एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में जनजातीय समाज के ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान को सामने लाना है।

कार्यक्रम का आयोजन रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती (5 अक्टूबर) और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती (15 नवंबर) को ध्यान में रखते हुए किया गया, जिसके अंतर्गत पूरे राज्य में 5 अक्टूबर से 15 नवंबर तक 40 दिनों तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से जनजातीय समाज के गौरवशाली  अतीत, उनके सामाजिक मूल्यों और स्वतंत्रता आंदोलनों में महत्त्वपूर्ण भूमिका को समाज के सामने  लाया जाएगा।

इस कार्यशाला में राज्यभर के विभिन्न इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निकल एवं आईटीआई संस्थानों के समन्वयक एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा थे। मुख्य प्रशिक्षक एवं वक्ता के रूप में बस्तर से आए रामनाथ कश्यप और सामाजिक कार्यकर्ता वैभव सुरंगे ने जनजातीय समाज के ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक पहलुओं पर गहन प्रकाश डाला। कार्यक्रम स्थल पर जनजाति नायकों की सुंदर प्रदर्शनी भी लगाई गई जो विद्यार्थियों व प्राध्यापकों के बीच में आकर्षण का केंद्र रही।

इस अवसर पर सीएसवीटीयू के कुलपति प्रो. एम. के. वर्मा, वनवासी विकास समिति के प्रांत अध्यक्ष उमेश कच्छप, रजिस्ट्रार प्रो. अंकित अरोड़ा, शासकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एम.आर. खान, डॉ अनुराग जैन प्रांत सचिव वनवासी विकास समिति, टेक्निकल एजुकेशन के उप संचालक और राष्ट्रीय सेवा योजना के अधिकारी  उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन राजीव शर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर जनजाति छात्राओं द्वारा आकर्षक स्वागत नृत्य की प्रस्तुति भी की गई। कार्यक्रम में सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग से बड़ी संख्या में अध्येताओं और छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।

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