Media24Media.com: जगन्नाथ मंदिर

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में हुए शामिल : छेरापहरा की रस्म अदायगी कर मांगा प्रदेशवासियों के लिए आशीर्वाद

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  आज गायत्री नगर रायपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर में आयोजित महाप्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा महोत्सव में शामिल हुए। राज्यपाल डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना कर छेरा-पहराकी रस्म निभाई। राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी ने जगन्नाथ जी की विधि-विधान से पूजा अर्चना की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में आयोजित रथ यात्रा में शामिल हुए। रायपुर के गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में विशेष विधि-विधान के साथ महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा निकाली गई। रथ यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व भगवान की प्रतिमाओं को मंदिर से रथ तक लाया गया और मार्ग को सोने की झाड़ू से स्वच्छ किया गया। इस परंपरा को छेरापहरा कहा जाता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी प्रदेशवासियों को रथ यात्रा की बधाई देते हुए कहा कि यह पर्व ओडिशा के लिए जितना बड़ा उत्सव है, उतना ही बड़ा उत्सव छत्तीसगढ़ के लिए भी है। साय ने कहा कि भगवान जगन्नाथ किसानों के रक्षक हैं। उन्हीं की कृपा से वर्षा होती है, धान की बालियों में दूध भरता है और किसानों के घरों में समृद्धि आती है। मैं भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना करता हूं कि इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ में भरपूर फसल हो। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा से मेरी विनती है कि वे हम सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और हमें शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की ओर अग्रसर करें।

मुख्यमंत्री ने सोने की झाड़ू से छेरापहरा की रस्म निभाई

राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में पुरी की रथ यात्रा की तर्ज पर यह पुरानी परंपरा निभाई जाती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छेरापहरा की रस्म पूरी करते हुए सोने की झाड़ू से मार्ग बुहारकर रथ यात्रा का शुभारंभ किया। इसके उपरांत उन्होंने भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को रथ तक ले जाकर विराजित किया।

ओडिशा की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में होती है रथ यात्रा

रथ यात्रा के लिए भारत में ओडिशा राज्य प्रसिद्ध है। ओडिशा का पड़ोसी राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ में भी इस उत्सव का व्यापक प्रभाव है। आज निकाली गई रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, उनके भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा की विशेष विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के पुजारी के अनुसार उत्कल संस्कृति और दक्षिण कोसल की संस्कृति के बीच यह एक अटूट साझेदारी का प्रतीक है। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ का मूल स्थान छत्तीसगढ़ का शिवरीनारायण तीर्थ है, जहां से वे जगन्नाथ पुरी में स्थापित हुए। शिवरीनारायण में ही त्रेता युग में प्रभु श्रीराम ने माता शबरी के प्रेमपूर्वक अर्पित मीठे बेर ग्रहण किए थे। यहां वर्तमान में नर-नारायण का भव्य मंदिर स्थापित है।

इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, धर्मलाल कौशिक सहित अन्य गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

46 साल बाद फिर से खोला गया जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार, जानिए कितना है अंदर सोना-चांदी

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 पुरी । ओडिशा के पुरी में स्थित 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर का ‘रत्न भंडार’ 46 साल बाद रविवार दोपहर को फिर से खोला गया। अधिकारिय़ों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि आभूषणों, मूल्यवान वस्तुओं की सूची बनाने और भंडार गृह की मरम्मत करने के लिए रत्न भंडार को खोला गया है। इसे पिछली बार 1978 में खोला गया था। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित समिति के सदस्यों ने दोपहर करीब 12 बजे मंदिर में प्रवेश किया और अनुष्ठान करने के बाद रत्न भंडार पुनः खोला गया।


ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा गया, ‘‘भगवान जगन्नाथ की इच्छा पर उड़िया समुदाय ने उड़िया अस्मिता की पहचान के साथ आगे बढ़ने की कोशिशें शुरू कर दी हैं।’’ इसमें कहा गया, ‘‘आपकी इच्छा पर ही जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार खोले गए थे। आज आपकी इच्छा पर ही 46 साल बाद रत्न भंडार को एक बड़े उद्देश्य के लिए दोपहर एक बजकर 28 मिनट की शुभ घड़ी पर खोला गया।’’

अधिकारियों ने बताया कि रत्न भंडार को खोलते समय 11 लोग मौजूद थे, जिसमें उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश विश्वनाथ रथ, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीक्षक डीबी गड़नायक और पुरी के नाममात्र राजा गजपति महाराजा के एक प्रतिनिधि शामिल थे। एक अधिकारी ने बताया कि रत्न भंडार फिर से खोल दिया गया है, लेकिन मूल्यवान वस्तुओं की सूची तत्काल नहीं बनाई जाएगी।

रत्न भंडार को इससे पहले 1905, 1926 और 1978 में खोला गया था. साल 2018 में तत्कालीन कानून मंत्री प्रताप जेना ने ओडिशा विधानसभा में बताया था कि रत्न भंडार में 12,831 भरी से ज्यादा सोने के जेवर हैं. इनमें कीमती पत्थर लगे हैं. साथ ही 22,153 भरी चांदी के बर्तन और अन्य सामान हैं.  आपको बता दें कि एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर होता है. आपको बता दें कि ओडिशा विधानसभा चुनाव में रत्न भंडार को खोले जाना बड़ा मुद्दा था. भाजपा ने वादा किया था कि सरकार बनने के बाद इस खजाने को खोला जाएगा.


Puri Jagannath Temple Dress Code: जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस कोड, एक जनवरी से इन कपड़ों पर लगी पाबंदी

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Puri Jagannath Temple Dress Code :  पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने निक्कर, पारदर्शी वस्त्र, फटी हुई जींस जैसे अनुचित कपड़ों में आने वाले श्रद्धालुओं को एंट्री नहीं देने का फैसला किया है। ये नियम एक जनवरी, 2024 से लागू होगा। इसकी गाइडलाइन जारी हो गई है।


हालांकि मंदिर प्रशासन ने कोई विशिष्ट ‘ड्रेस कोड’ लागू नहीं किया है, लेकिन उसने पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पैंट, शर्ट और धोती और महिलाओं के लिए साड़ी, सलवार-कमीज जैसी सभ्य पोशाक पहनने का सुझाव दिया।

परामर्श में कहा गया है कि समूचे भारत और विदेशों में विभिन्न धर्मों के धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए स्वयं के ‘ड्रेस कोड’ हैं और इसी तरह के ड्रेस कोड को पुरी में भी विद्वान, पुजारी और भगवान जगन्नाथ के श्रद्धालु लागू करने की मांग कर रहे है। दास ने कहा कि एसजेटीए की हाल ही में हुई नीति उप समिति की बैठक में सभी श्रद्धालुओं से पवित्रता बनाए रखते हुए शालीन वेशभूषा में आने का आग्रह करने का प्रस्ताव रखा गया।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक ने कहा, “निक्कर, पारदर्शी और भड़कीले वस्त्र, फटी हुई जींस और अन्य अनुचित वेशभूषा में आने वाले लोगों को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि अनेक श्रद्धालु होटलों और ‘गेस्ट हाउस’ में ठहरते हैं और इस तरह से ये मंदिर में आने से पूर्व के प्राथमिक बिंदु हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए हम आप से (होटल संगठनों से) आग्रह करते हैं कि आप अपने कर्मचारियों, टूरिस्ट गाइड को जानकारी दें कि वे इस संबंध में श्रद्धालुओं को जागरुक करें।


पुरी के जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए लागू होगा ड्रेस कोड, फटे जीन्स, स्कर्ट और स्लीवलेस कपड़े पहनने पर रोक

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ओडिशा के पुरी में स्थित 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए एक जनवरी से ड्रेस कोड लागू हो जाएगा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने सोमवार को बताया कि मंदिर में कुछ लोगों को अशोभनीय पोशाक में देखे जाने के बाद नीति उप-समिति की बैठक में श्रद्धालुओं के लिए ‘ड्रेस कोड’ लागू करने का निर्णय लिया गया।


श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के प्रमुख रंजन कुमार दास ने कहा, मंदिर की गरिमा और पवित्रता बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। दुर्भाग्यवश, कुछ लोग दूसरों लोगों की धार्मिक भावनाओं की परवाह किए बिना मंदिर में आ जाते हैं।

उन्होंने कहा, कुछ लोगों को मंदिर में फटी जीन्स, बिना आस्तीन वाले वस्त्र और हाफ पैंट पहने देखा गया मानो ये लोग समुद्री तट या पार्क में घूम रहे हों। मंदिर में भगवान रहते हैं, मंदिर मनोरंजन का कोई स्थान नहीं है। उनके अनुसार, मंदिर में आने के लिए जल्द ही स्वीकृत पोशाकों पर निर्णय लिया जाएगा।

दास ने कहा, मंदिर में एक जनवरी, 2024 से ड्रेस कोड लागू किया जाएगा। मंदिर के सिंह द्वार पर तैनात सुरक्षा कर्मियों और मंदिर के अंदर प्रतिहारी सेवकों को ड्रेस कोड लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन मंगलवार से श्रद्धालुओं को ड्रेस कोड के लिए जागरूक करेगा। दास ने कहा कि हाफ-पैंट, शॉर्ट्स, फटी जीन्स, स्कर्ट और बिना आस्तीन वाले कपड़े पहने लोगों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।


जगन्नाथ मंदिर खजाने की चाबियां दशकों से गायब हैं, जानें खजाने का रहस्य

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पुरी । जगन्नाथ पुरी के रत्नभंडार (खजाने) की चाबी को लेकर राज्य में बीजेडी सरकार और भाजपा के बीच ठन गई है। हाल ही में ओडिशा हाई कोर्ट ने बीजेडी सरकार से न्यायिक जांच आयोग  की रिपोर्ट की जानकारी देने को कहा है। सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप बराल की याचिका पर हाई कोर्ट ने 25 अप्रैल को सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव और कानून सचिव को सरकार की तरफ से जवाब देने को कहा गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होनी है। हालांकि खजाने के इस रहस्य को लेकर भाजपा बीजेडी पर हमलावर है।


दरअसल पुरी के जगन्नाथ मंदिर  में कुछ संदिग्ध गतिविधियों की आशंका है। इसी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जाता है कि मंदिर के आंतरिक रत्न भंडार की चाबियां गायब हैं। इसी बीच मंदिर की दो अहम फाइल गायब होने की भी रिपोर्ट आ गई। अब विपक्ष इस मुद्दे को लेकर पटनायक सरकार को घेर रहा है और कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहा है।

कहां गुम हो गईं रत्न भंडार की चाबी?

बता दें कि 4 अप्रैल 2018 को एएसआई की टीम रत्नभंडार को खोलने के लिए पहुंची थी लेकिन इसकी चाबी ही नहीं मिली। ऐसे में रत्न भंडार खुल नहीं पाया। इसको लेकर विवाद होने लगा। भाजपा नेता पितांबर आचार्य ने कहा कि आखिर सरकार मंदिर का आंतरिक कक्ष क्यों नहीं खोलना चाहती है। उन्होंने कहा, एएसआई ने हाई कोर्ट में कहा है कि इस कक्ष की रिपेयरिंग की सख्त जरूरत है। संदेह है कि इस कक्ष में सुरक्षित रखे गए रत्न अब हैं भी या नहीं।

वहीं ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी  के चेयरपर्सन गनेश्वर बेहरा ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस मंदिर की सुरक्षा एएसआई के जिम्मे है। अगर वह कह रही है कि रिपेयरिंग की जरूरत है तो तुरंत इसे खोला जाना चाहिए। उन्होंने कहा, बीजेडी सरकार जिस तरह की हरकत कर रही है उससे लगता है कि अब कक्ष में रत्न सुरक्षित नहीं है। यहां रखे गए खजाने के बारे में राज्य को सबको बताना चाहिए।

बता दें कि 12वीं शताब्दी के इस मंदिर में रत्न भंडार के दो भाग हैं। बाहरी भाग की चाबी उपलब्ध है और इसे सूना बेशा के दौरान भगवानके श्रंगार के लिए खोला जाता है। सालाना रथ यात्रा के दौरान यह परंपरा निभाई जाती है। वहीं बाहरी भाग की तीन चाबियां पुरी राज घराने के पास हैं। बात आंतरिक भाग की है जिसकी चाबियां गायब हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कक्ष की रिपेयरिंग 1978 में हुई थी। इसके बाद इसे 14 जुलाई 1985 को खोला गया। 29 नवंबर को आयोग ने इस बारे में 324 पेज की रिपोर्ट सरकार को दी थी लेकिन सरकार ने इसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया।

साल 2018 में विधानसभा में सरकार के जवाब के मुताबिक रत्न भंडार में 12831 भारी सोने के गहने हैं। एक भारी 11.66 ग्राम के बराबर होता है। वहीं इस रत्न भंडार में 22153 भारी चांदी के बर्तन हैं। इसके अलावा भी कुछ बहुमूल्य रत्न यहां मौजूद हैं।

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