Media24Media.com: छत्तीसगढ़ राज्य

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छत्तीसगढ़ में गैर संचारी रोग के ईलाज में आभा आईडी है मददगार, इस डिजिटल तकनीक से इलाज की गुणवत्ता में हो रहा सुधार

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य में अब गैर संचारी रोग (नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज़- एनसीडी) जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ , कैंसर के स्क्रीनिंग , इलाज और मॉनिटिरिंग में डिजिटल तकनीक का उपयोग बड़े स्तर पर किया जा रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत शुरू की गई आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) आईडी इस दिशा में गेमचेंजर साबित हो रही है।


आभा आईडी के माध्यम से मरीज अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से आसानी से साझा कर सकते हैं। इस आईडी की मदद से अस्पतालों, क्लीनिकों और लेबोटरी के बीच जानकारी साझा करना भी आसान हो गया है, जिससे इलाज की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।


आधार सेवाओं में उत्कृष्टता के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सम्मान, बच्चों के बायोमैट्रिक अपडेट के लिए मिला गौरव

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 रायपुर : आधार सेवाओं के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ राज्य को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के बायोमैट्रिक आधार अपडेट की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। यह सम्मान आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित आधार संवाद कार्यक्रम में दिया गया।


कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (फायनेंस) तेनतु सत्यनारायण द्वारा यह सम्मान छत्तीसगढ़ को प्रदान किया गया। राज्य की ओर से छत्तीसगढ़ सदन के श्री मनीष जोशी ने यह सम्मान ग्रहण किया। उल्लेखनीय है कि चिप्स, राज्य में नामांकन एजेंसी के रूप में कार्य करते हुए आधार से संबंधित सेवाएं प्रदान कर रही है। यह सम्मान छत्तीसगढ़ सरकार की डिजिटल सेवाओं को सुदृढ़ एवं जन सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मलिक ने बताया कि राज्य में 5 से 7 एवं 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के अनिवार्य बायोमैट्रिक अपडेट की दिशा में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए यह सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशों के अनुरूप चिप्स द्वारा विगत एक वर्ष में राज्य के दूरस्थ एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 944 विशेष आधार शिविरों का आयोजन किया गया है, जिनमें 38,762 नागरिकों का आधार पंजीयन एवं अद्यतन किया गया।

राज्य स्तरीय विशिष्ट पहचान क्रियान्वयन समिति की बैठक सम्पन्न

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय विशिष्ट पहचान क्रियान्वयन समिति (यूआईडीआईसी) की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव  अमिताभ जैन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में आधार नामिनेशन वेरिफिकेशन एवं अपडेशन के संबंध में विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने आधार नामांकन एवं अपडेशन हेतु विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि जिन्हें अभी तक आधार कार्ड नही मिल पाया है उन सभी नागरिकों को आधार कार्ड प्रदान करने हेतु प्रत्येक जिले में कलेक्टरों द्वारा विशेष समीक्षा कर इस हेतु विभिन्न स्तरों पर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आधार नामांकन कैम्प आयोजित किए जाए। बैठक में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय हैदराबाद की उप निर्देशन सुश्री पी.संगीता मौजूद थी।


 
मुख्य सचिव ने राज्य के सभी हायर सेकेण्डरी एवं हाई स्कूलों में आधार हेतु नामांकन एवं अपडेशन के लिए शिविर लगाने कहा। इसी तरह से महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने वाले बच्चों एवं महिलाओं के आधार नामांकन एवं अपडेशन के लिए विशेष कार्य करने के निर्देश दिए।
 
मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वास्थ्य केन्द्रों में संस्थागत प्रसव के दौरान नवजात शिशुओं का भी आधार नामांकन किया जाए। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को राज्य के सभी नागरिकों, बच्चों, छात्र-छात्राओं को आधार प्रदान करने नामांकन कराने हेतु विशेष प्रयास किया जाए। उन्होंने जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में जिनका अभी तक आधार कार्ड नही बन पाया है उन सभी को आधार प्रदान करने हेतु नामांकन किया जाए।
 
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव  बसवराजु एस., सचिव खाद्य विभाग  अन्बलगन पी., सामान्य प्रशासन एवं राजस्व सचिव श्री अविनाश चम्पावत, सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित कटारिया, सचिव समाज कल्याण  भूवनेश यादव एवं उच्च शिक्षा सचिव  एस.भारतीदासन सहित स्कूल शिक्षा, श्रम, दूरसंचार, एनआईसी, चिप्स, जनगणना, निर्वाचन सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

विश्व हिंदी दिवस पर विशेष छत्तीसगढ़ के साथ विश्व स्तर पर दिख रहा हिन्दी भाषा का प्रभाव: महेन्द्र सिंह मरपच्ची

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 एमसीबी : हर वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाने वाला विश्व हिंदी दिवस हिंदी भाषा की महत्ता को समर्पित एक विशेष अवसर रहता है। यह दिन हिंदी भाषा के वैश्विक महत्व और उसकी समृद्धि को उजागर करता है। हिंदी जो भारत की राजभाषा है, अब सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली भाषा बन चुकी है। इस विषय में छत्तीसगढ़ सरकार की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि यहां हिंदी भाषा को न केवल सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित किया जा रहा है, बल्कि इसे आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रोत्साहित किया जा रहा है।


छत्तीसगढ़ राज्य में हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार ने विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से हिंदी को जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उनके मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों ने राज्य में हिंदी के साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व को बढ़ावा देने के लिए कई कार्य किए हैं। राज्य में हिंदी को शिक्षा, प्रशासन और सरकारी कार्यों के माध्यम से प्रमुखता दी गई है। हिंदी में सरकारी दस्तावेजों का प्रचार-प्रसार, योजनाओं की जानकारी और प्रशासनिक कार्यों की संचालन विधि यह सब छत्तीसगढ़ में हिंदी के सम्मान और प्रभाव को बढ़ाते रहे हैं।

शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी हिंदी का रहता है महत्वपूर्ण योगदान

छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा प्रणाली में भी हिंदी को महत्वपूर्ण स्थान दिया है। राज्य के स्कूलों और विश्वविद्यालयों में हिंदी को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाता है, जिससे छात्रों को अपनी मातृभाषा में सशक्त शिक्षा मिल सके। इसके अलावा हिंदी साहित्य और कविता के अध्ययन के माध्यम से छात्र हिंदी भाषा और संस्कृति से जुड़ते हैं। राज्य सरकार द्वारा आयोजित साहित्यिक कार्यशालाएं, कवि सम्मेलनों और संगोष्ठियों में हिंदी के प्रमुख लेखकों और कवियों को आमंत्रित किया जाता है, ताकि हिंदी साहित्य की समृद्धि और विस्तार हो सके। हिंदी के प्रचार-प्रसार में मीडिया का भी महत्वपूर्ण योगदान है। राज्य के स्थानीय मीडिया जैसे कि टीवी चौनल्स, रेडियो स्टेशन, और समाचार पत्रों ने हिंदी में सूचना और मनोरंजन के माध्यम से सरकारी योजनाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जानकारी पहुंचाई है।

हिंदी भाषा छत्तीसगढ़ की लोक साहित्यिक की धरोहर

छत्तीसगढ़ की लोक साहित्य और हिंदी साहित्य के बीच गहरा संबंध है। यहां के लोक साहित्य, गीत और काव्य रचनाएं हिंदी भाषा के माध्यम से ही प्रसारित होती हैं। राज्य सरकार ने लोक साहित्य को संरक्षित करने और उसे बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। लोक कवियों और साहित्यकारों को सम्मानित किया जाता है, और उनके कार्यों को व्यापक रूप से प्रचारित किया जाता है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ सरकार ने हिंदी को व्यावसायिक रूप में प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी नौकरियों में हिंदी को प्रमुख भाषा के रूप में अपनाया है। इस प्रकार हिंदी को एक सक्षम और प्रभावशाली भाषा के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

हिंदी भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए किया जा रहा प्रयास

वही केन्द्र की सरकार न केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए कई कदम उठा रही है। विभिन्न देशों में हिंदी सम्मेलनों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है, जिसमें भारत के हिंदी साहित्यकार और संस्कृति प्रेमी भाग लेते हैं। इस प्रकार हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त पहचान मिल रही है।

डिजिटल प्लेटफार्म पर भी दिख रहा हिंदी का प्रभाव

डिजिटल युग में केन्द्र सरकार ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफार्मों का भरपूर उपयोग किया है। सभी राज्यों की वेबसाइटों, मोबाइल एप्लिकेशनों और सोशल मीडिया पर हिंदी में सेवाएं और जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे राज्य के नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में सुविधाएं मिल रही हैं, और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उनके पास सहजता से पहुंच रही है।

हिंदी भाषा में अब हो रहा शोध और अनुसंधान

वही छत्तीसगढ़ राज्य में हिंदी भाषा में शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की गई हैं। राज्य के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में हिंदी साहित्य पर शोध कार्य को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा हिंदी में लिखी गई किताबों और शोधपत्रों को मान्यता देने के लिए पुरस्कारों और अनुदानों की व्यवस्था की गई है, जिससे हिंदी के समृद्ध साहित्यिक धरोहर का निर्माण हो सके।

हिंदी भाषा का सामाजिक सशक्तिकरण में हो रहा महत्वपूर्ण योगदान

हिंदी भाषा का सामाजिक सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण योगदान है। छत्तीसगढ़ सरकार ने हिंदी के माध्यम से राज्य के नागरिकों, खासकर महिलाओं, आदिवासी समुदाय और पिछड़े वर्गों को उनके अधिकारों और सामाजिक स्थिति के प्रति जागरूक किया है। हिंदी भाषा ने राज्य में एकता और विविधता के बीच सामंजस्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा का दिख रहा प्रभाव

हिंदी केवल भारत में ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिससे विदेशों में भी हिंदी बोलने वालों की संख्या लगभग लाखों में है। जैसे नेपाल, मॉरीशस, फिजी, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में हिंदी का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इन देशों में भारतीय प्रवासियों की बड़ी संख्या है, जो हिंदी भाषा का उपयोग करते हैं। हिंदी का योगदान केवल एक भाषा के रूप में नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, समाज और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन चुकी है। भारत में हिंदी की लोकप्रियता और प्रभाव हर दिन बढ़ रहा है, और यह समाज के हर वर्ग तक पहुंच रही है। छत्तीसगढ़ राज्य की सरकार द्वारा किए गए प्रयासों से हिंदी को बढ़ावा मिल रहा है, और राज्य में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। हिंदी के वैश्विक प्रभाव और छत्तीसगढ़ सरकार के योगदान से यह स्पष्ट होता है कि हिंदी का भविष्य उज्जवल है, और इसके विस्तार और प्रभाव के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

डबल इंजन की सरकार बनने से केन्द्र सरकार से छत्तीसगढ़ को मिल रहा भरपूर समर्थन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर : श्रद्धेय अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य बनाया है और हमारा संकल्प है कि-हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ को संवारेंगे। डबल इंजन की सरकार बनने से केन्द्र सरकार से छत्तीसगढ़ को भरपूर समर्थन मिल रहा है। हाल ही में केन्द्र सरकार ने सड़क और हवाई कनेक्टीविटी के साथ-साथ कई रेल परियोजनाओं की भी मंजूरी दी हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने एक साल में ही मोदी की गारंटी के ज्यादातर कामों को पूरा कर लिया है। सबका साथ-सबका प्रयास और सबका विकास के क्रम में महासमुंद जिले में विकास का पहिया अब तेजी से घूम रहा है। आने वाले समय में विकास में और तेजी आएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महासमुंद में विभिन्न विकास कार्यों के लोकर्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए यह बात कही।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने 217 करोड़ 17 लाख रुपए की लागत के 419 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 111 करोड़ रूपये के 335 कार्यों का लोकार्पण और 106 करोड़ रूपये के 84 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। कार्यक्रम में 271 हितग्राहियों को करीब सवा करोड़ रूपये की सामग्रियों का वितरण किया गया।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने गरीबों के लिए 18 लाख आवास स्वीकृति की गारंटी दी थी। उसे पूरा करते हुए शपथ के दूसरे ही दिन ही हमारी सरकार ने आवासहीन हितग्राहियों के आवास की स्वीकृति दी। अभी साढ़े तीन लाख आवास की स्वीकृति और मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि महासमुंद जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्राचीन नगरी सिरपुर और देवाधिदेव भगवान गंधेश्वरनाथ महादेव की ख्याति पूरे देश में है। लक्ष्मण मंदिर को विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने की दिशा में हम तेजी से प्रयास कर रहे हैं। इको पयर्टन के क्षेत्र में कोडार जलाशय को विकसित किया जा रहा है। वहीं शिशुपाल पर्वत का सौंदर्यीकरण करने की दिशा में भी काम हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महासमुंद जिला मुख्यालय की प्रमुख सड़क बरोंडा चौक महासमुंद से बम्हनी तक सड़क चौड़ीकरण और पुल-पुलिया निर्माण का हमने शिलान्यास किया है। अब इस मार्ग पर आवागमन सुलभ होगा। इसी प्रकार महासमुंद से तुमगांव-अछोला मार्ग चौड़ीकरण और सात महतारी सदन निर्माण के लिए भी शिलान्यास हुआ है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में हमारी सरकारी निरंतर कार्य कर रही है। निक्षय निरामय छत्तीसगढ़ योजना में महासमुंद ने राज्य में अव्वल स्थान हासिल किया है। महासमुंद जिले के कुल 551 ग्राम पंचायतों में से 292 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त करके महासमुंद ने छत्तीसगढ. में प्रथम स्थान हासिल किया है। महासमुंद के हृदय स्थल पर सेंट्रल लाइब्रेरी का निर्माण कराया जा रहा है। खिलाड़ियों के लिए सिंथेटिक ट्रेक का निर्माण कराया गया है। इस तरह से युवाओं के बौद्धिक और समन्वित विकास के लिए कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार किसान भाईयों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ और 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर पर धान खरीद रही है। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल जी की जयंती सुशासन दिवस पर गारंटी के अनुरूप हमने किसानों को दो साल के बकाया धान बोनस का भुगतान भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बारिश अच्छी होने के साथ ही फसल भी अच्छी हुई है, इस वर्ष 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्री रामलला दर्शन योजना का शुभारंभ कर प्रदेश के श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के दर्शन के लिए भेज रही है। अभी तक 20 हजार राम भक्तों को रामलला का दर्शन लाभ मिल चुका है। महतारी वंदन योजना में हम प्रदेश की 70 लाख से अधिक माता और बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए भुगतान कर रहे हैं। महासमुंद जिले की सवा तीन लाख से अधिक माताओं-बहनों को इस योजना का लाभ मिल रहा है।

कार्यक्रम को सांसद रूपकुमारी चौधरी, महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, बसना विधायक संपत अग्रवाल ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

01 अप्रैल 2019 के पूर्व पंजीकृत प्रत्येक वाहनों पर उच्च सुरक्षा पंजीयन चिन्ह 19 मार्च तक लगाना अनिवार्य

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 महासमुंद : परिवहन विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में 01 अप्रैल 2019 के पूर्व पंजीकृत प्रत्येक वाहनों पर उच्च सुरक्षा पंजीयन चिन्ह (एचएसआरपी) लगाना अनिवार्य किया गया है। जिला परिवहन अधिकारी आर.के. ध्रुव ने बताया कि परिवहन विभाग द्वारा इसकी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। संबंधित वाहन स्वामी परिवहन विभाग की अधिकारिक वेबसाईट cgtransport.gov.in के माध्यम से सीधे ऑनलाइन शुल्क भुगतान करते हुए आवेदन कर सकते है।


इसके अलावा नजदीकी परिवहन सुविधा केन्द्र या वाहन डीलर शोरूम में जाकर आवेदन कर सकते है। जिला परिवहन अधिकारी ने सभी श्रेणी के मोटर वाहनों के लिए वाहन स्वामी को केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम/नियम के दिए गए प्रावधान एवं ई-चालान की कार्यवाही से बचने के लिए 19 मार्च 2025 तक हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रीकरण प्लेट लगवाने की अपील की है।

इस प्रक्रिया के लिए वाहन दर निर्धारित की गई है, इनमें दोपहिया वाहन के लिए बेसा प्राइस 310 रुपए व जीएसटी 55.80 रुपए कुल 365.80 रुपए, तीन पहिया वाहनों के लिए 362 व जीएसटी 65.16 कुल 427.16 रुपए, एलएमवी 556 रुपए व जीएसटी 100.08 रुपए कुल 656.08 रुपए और हेवी कमर्शियल 598 व जीएसटी 107.64 रुपए कुल 705.64 रुपए निर्धारित किया गया है। प्रत्येक इंस्टॉलेशन के लिए 100 रुपए अतिरिक्त चार्ज के साथ लगाया जाएगा। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए जिला परिवहन कार्यालय महासमुंद में सम्पर्क कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ में होने वाली राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता स्थगित

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 रायपुर : अपर संचालक, छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय आदिम जाति कल्याण आवासीय एवं आश्रम शैक्षणिक संस्थान समिति, जितेन्द्र गुप्ता ने बताया कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की चतुर्थ राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के आयोजन को अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दिया गया है।


यह राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता राजधानी रायपुर में 15 दिसम्बर से 19 दिसम्बर 2024 तक आयोजित होने वाली थी। जिसमें देश के 25 राज्यों में संचालित एकलव्य विद्यालय के लगभग 6 हजार से अधिक खिलाड़ियों के भाग लेने की संभावना थी।

 

छत्तीसगढ़ में अप्रैल 2019 से पूर्व पंजीकृत वाहनों पर एचएसआरपी चिन्ह लगाना अनिवार्य, वर्ना ....

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य में अप्रैल 2019 के पूर्व पंजीकृत सभी श्रेणी के मोटर वाहनों पर वाहन स्वामी द्वारा 120 दिवस के भीतर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रीकरण चिन्ह (एचएसआरपी) लगवाया जाना अनिवार्य किया गया है।


इस संबंध में परिवहन विभाग द्वारा दो वेंडर क्रमशः मेसर्स रीयल मेजॉन इंडिया लिमिटेड और रोसमर्टा सेफ्टी सिस्टम लिमिटेड को निर्धारित दर पर एचएसआरपी चिन्ह लगाने के लिए अधिकृत किया गया है।

परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश की अध्यक्षता में महानदी मंत्रालय भवन में आयोजित बैठक में अतिरिक्त परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर, उप परिवहन आयुक्त मनोज ध्रुव, उप परिवहन आयुक्त सुश्री युगेश्वरी वर्मा, एआरटीओ वाय.व्ही. श्रीनिवास, वरिष्ठ वैज्ञानिक अमित देवांगन, एन.आई.सी कंपनी प्रतिनिधि मुकेश मल्होत्रा चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, मेसर्स रोसमर्टा सेफ्टी सिस्टम लिमि., विश्वजीत मुखर्जी, डायरेक्टर मेसर्स रियल मेजॉन इंडिया लिमि., कौशल नियाज एवं अनुराग चौधरी उपस्थित थे।

परिवहन विभाग द्वारा समस्त आरटीओ कार्यालयों को जोन-ए और जोन-बी में बांटा गया है। जोन-ए के अंतर्गत शामिल आरटीओ कार्यालयों में अप्रैल 2019 से पूर्व पंजीकृत वाहनों में एचएसआरपी चिन्ह लगाने की जिम्मेदारी मेसर्स रियल मेजॉन इंडिया लिमिटेड को दी गई है।

जोन-ए के अंतर्गत गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर, बलरामपुर, सूरजपुर, कोण्डागांव, मुंगेली, बेमेतरा, कवर्धा, केारबा, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर एवं रायपुर आरटीओ कार्यालय शामिल हैं। इसी तरह जोन-बी के अंतर्गत आरटीओ कार्यालय रायगढ़, गरियाबंद, जशपुर, धमतरी, बलौदाबाजार, महासमुंद, राजनांदगांव, बालोद, दुर्ग, दंतेवाड़ा, कांकेर, अम्बिकापुर, बैकुण्ठपुर, जदलपुर में पंजीकृत वाहनों पर एचएसआरपी चिन्ह लगाने की जिम्मेदारी मेसर्स रोसमर्टा सेफ्टी सिस्टम लिमिटेड को सौंपी गई है।

उक्त दोनों कम्पनियां निर्धारित दर पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाएंगी। टू-व्हीलर मोटर सायकिल, स्कूटर, मोपेड के अलावा ट्रैक्टर, पॉवर टीलर एवं ट्रेलर पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाने के लिए जीएसटी सहित 365.80 रूपए, 3-व्हीलर के लिए 427.16 रूपए, लाईट मोटर व्हीकल/पैसेंजर कार के लिए 656.08 रूपए एवं 705.64 रूपए की दर निर्धारित की गई है। सभी भुगतान केवल डिजिटल मोड के माध्यम से किए जाएंगे।

आटोमोबाइल डीलरों द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में 01 अप्रैल 2019 के पूर्व पंजीकृत मोटरवाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रीकरण चिन्ह (आवश्यक तीसरी पंजीकरण प्लेट सहित) प्रत्येक इंस्टालेशन हेतु 100/- अतिरिक्त चार्ज के साथ लगाया जावेगा। घर पहुंच सेवा हेतु अतिरिक्त राशि देनी होगी।

गौरतलब है कि सर्वाेच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रीकरण चिन्ह के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों, केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 एवं केन्द्रीय मोटरयान नियम 1989 के प्रावधानों, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के परिपालन में छत्तीसगढ़ राज्य में अप्रैल 2019 के पूर्व पंजीकृत प्रत्येक वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रीकरण चिन्ह लगवाए जाने के संबंध में आदेश जारी किया जा चुका है।

हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रीकरण चिन्ह हेतु जारी निर्देशों का पालन नहीं होने पर केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम एवं नियमों के अनुसार जुर्माना किया जाएगा। मोटरयान अधिनियम 1988 में दिये गये प्रावधान अंतर्गत दिए गए पेनाल्टी से बचने के लिए केन्द्रीय मोटरयान नियम 1989 के नियम 50 के तहत नकली हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रीकरण चिन्ह समान दिखने वाली प्लेटे/स्मार्ट नंबर प्लेट जैसे होलोग्राम/इंडिया मार्क/इंडिया शिलालेख आदि से लैस सड़क पर चलने वाले वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रीकरण चिन्ह प्लेट से बदलना होगा अनिवार्य होगा।
अनाधिकृत रूप से हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रीकरण चिन्ह की बिकी और आपूर्ति करते पाए जाने वाले डीलरों या अन्य व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जावेगी। आम नागरिकों की सुविधा हेतु हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रीकरण चिन्ह आवेदन की प्रक्रिया वेबसाईट में उपलब्ध होगी।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशव्यापी धान खरीदी महापर्व का किया शुभारंभ

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ राज्य में समर्थन मूल्य पर किसानों से प्रदेशव्यापी धान खरीदी महापर्व का शुभारंभ बालोद जिले के भांठागांव (बी) धान खरीदी केन्द्र से किया। इसी के साथ आज 14 नवम्बर राज्य में किसानों से धान खरीदी की शुरूआत हो गई है, जो 31 जनवरी 2025 तक चलेगी। मुख्यमंत्री साय ने भांठागांव (बी) उपार्जन केन्द्र पहुंचने के बाद इलेक्ट्रॉनिक तौल एवं अन्य यंत्रों का पूजन और वहां उपस्थित किसानों को माला पहना कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने किसान भाईयों को धान खरीदी महापर्व के शुभारंभ की बधाई और शुभकामनाएं दी।


मुख्यमंत्री की उपस्थिति में ग्राम भांठागांव के किसान भागबली ने कुल 148 क्विंटल और श्री हरिराम ने 65 क्विंटल 20 किलो धान की बिक्री की। मुख्यमंत्री के समक्ष अपने धान की बिक्री का अवसर प्राप्त होने से किसान भागबली और हरिराम बहुत ही खुश नजर आ रहे थे। उक्त उपार्जन केन्द्र में 14 नवम्बर को धान खरीदी हेतु कुल 06 किसानों का टोकन काटा गया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम मोहंदीपाट में 30 लाख रूपये की लागत से नवनिर्मित जिला सेवा सहकारी केन्द्रीय बैंक शाखा मर्यादित दुर्ग के नवीन शाखा भवन का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री साय ने इससे पूर्व छत्तीसगढ़ महतारी के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम स्थल में मुख्यमंत्री श्री साय ने शहीद बिरसा मुंडा एवं गहिरा गुरु के तैल चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य में पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 31 जनवरी 2025 तक होगी। किसानों को उनके द्वारा बेचे गए धान के एवज में राज्य शासन द्वारा 72 घंटे भीतर उनके बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य में धान खरीदी के लिए 2,739 स्थापित किए गए हैं। इस साल धान बेचने के लिए 27,01,109 पंजीकृत किसानों द्वारा बोये गए धान का कुल रकबा 34,51,729 हेक्टेयर है। पंजीकृत किसानों में 1,35,891 नये किसान हैं।

कार्यक्रम में सांसदभोजराज नाग, विधायक कुंवर सिंह निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सोनादेवी देशलहरा, पूर्व विधायक बीरेंद्र साहू एवं राजेंद्र राय, कंवर समाज के प्रदेश अध्यक्ष हरबंश मिरी, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि पवन साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष देवलाल ठाकुर, कंवर समाज के जिला अध्यक्ष केश कुमार ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधियो एवं विभिन्न समाज के पदाधिकारी, किसान एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

जनभागीदारी से जल संचय में छत्तीसगढ़ पूरे देश में पहले स्थान पर, CM देव साय ने जल संसाधन विभाग को दी शुभकामनाएं

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 रायपुर। जनभागीदारी से जल संचय में छत्तीसगढ़ पूरे देश में पहले स्थान पर है। केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस पहल पर उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में जल संचय, जनभागीदारी पहल के तहत जल संचय के एक लाख 53 हजार 533 कार्य पूर्ण किए गए हैं तथा 10 हजार 872 कार्य प्रगतिरत हैं। इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन में देश के पहले 10 जिलों में छत्तीसगढ़ के 8 जिलों ने अपना स्थान बनाया है।


छत्तीसगढ़ में जनभागीदारी से जल संचय के कार्यों में राज्य में पहले स्थान पर रायपुर जिला है, जहां 35 हजार 758 जल संचय के कार्य पूर्ण किए गए हैं तथा 5064 कार्य प्रगतिरत हैं। दूसरे स्थान पर बिलासपुर है, जहां 16,389 कार्य पूर्ण किए गए हैं तथा 1643 कार्य प्रगति पर हैं। तीसरे स्थान पर रायगढ़ जिला है, जहां 16,629 कार्य पूर्ण किए गए हैं तथा 662 कार्य प्रगति पर हैं। चौथे स्थान पर बलौदाबाजार-भाटापारा जिला है, जहां 16,730 कार्य पूर्ण किए गए हैं तथा 300 कार्य प्रगति पर हैं।

पांचवे स्थान बलरामपुर-रामानुजगंज जिला है, जहां 8618 कार्य पूर्ण किए गए हैं तथा 586 कार्य प्रगति पर हैं। छठवें स्थान पर गरियाबंद जिला है, जहां 6899 कार्य पूर्ण किए गए हैं तथा 634 कार्य प्रगति पर हैं। सातवें स्थान पर दुर्ग जिला है, जहां 4915 कार्य पूर्ण किए गए हैं तथा 609 कार्य प्रगति पर हैं। दसवें स्थान पर धमतरी जिला है, जहां 3706 कार्य पूर्ण किए गए हैं तथा 107 कार्य प्रगति पर हैं।

गौरतलब है कि जल संचय जन भागीदारी पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने के अटूट संकल्प का प्रतिबिंब है। यह पहल जल संरक्षण में जन भागीदारी के महत्व पर जोर देती है और सामूहिक पहल एवं एकजुटता से जलसंरक्षण की संकल्पना को साकार करती है। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य अन्य गतिविधियों के अलावा कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं, बोरवेल पुनर्भरण शाफ्ट के निर्माण पर विशेष बल दिया गया है, जिससे भंडारण क्षमता बढ़ेगी और भू-जल पुनर्भरण को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

Chhattisgarh : नेशनल लोक अदालत ने 8.31 लाख से ज्यादा प्रकरण हुए निराकृत

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य में द्वितीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन उच्च न्यायालय से लेकर तालुका स्तर के न्यायालयों के साथ साथ राजस्व न्यायालयों में 13 जुलाई को आयोजित नेशनल लोक अदालत हेतु गठित कुल 605 खंडपीठों द्वारा प्रेषित अंतिम आंकड़ो में 7 लाख 66 हजार 639 प्री- लिटिगेशन प्रकरण तथा 65 हजार 139 लंबित मामलों को मिलाकर कुल 8 लाख 31 हजार 848 प्रकरणों का निराकरण करते हुए कुल 230 करोड़ 09 लाख 55 हजार 219 रूपये के अवार्ड पारित किए गए।


छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय-सह- मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राज्य के सभी 23 जिला एवं सत्र न्यायालयों से वर्चुअल मोड के माध्यम जुड़कर लोक अदालत की कार्यवाहियों का निरीक्षण किया गया और सभी जिलों के प्रधान जिला न्यायाधीशों व अन्य खण्डपीठ के पीठासीन अधिकारियों से संवाद व चर्चा की गई और लोक अदालत की प्रगति का जायजा लिया गया। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण के लिए मार्गदर्शन करते हुए प्रोत्साहित करें।

वर्चुअल मोड में निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायाधिपति ने जिला न्यायलय रायगढ़ के एक प्रकरण में जहां एक उम्रदराज पति-पत्नी के मध्य घरेलु हिंसा का विवाद था और वे अलग अलग रह रहे थे और लोक अदालत के दौरान उनका समझौता हुआ और वे एक साथ रहने के लिये तैयार हो गये। मुख्य न्यायाधिपति द्वारा पक्षकारों के प्रयासों की सराहना की गई और दम्पत्ति को भविष्य के खुशहाल जीवन के लिए शुभकामनाएं दी गई ।

मुख्य न्यायाधिपति के द्वारा उच्च न्यायालय बिलासपुर में नेशनल लोक अदालत के संबंध में गठित दो खण्डपीठों का भी अवलोकन किया गया और लोक अदालत कार्यवाहियों का जायजा लेते हुए अधिवक्ताओं एवं पक्षकारों को लोक अदालत के माध्यम से प्रकरणों को निराकृत कराये जाने की बात कही।


गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधिपति की पहल पर छत्तीसगढ़ राज्य के इतिहास में पहली बार माननीय उच्च न्यायालय के सभी न्यायमूर्तिगणों द्वारा भी अपने पोर्टफोलियो जिलों में भ्रमण कर नेशनल लोक अदालत की कार्यवाहियों का निरीक्षण किया गया और लोक अदालत के पीठासीन अधिकारियों, सदस्यों व पक्षकारों को अधिक से अधिक प्रकरण निराकृत करने के लिये प्रोत्साहित किया गया। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश गणों के द्वारा नेशनल लोक अदालत के दिन अपने पोर्टफोलियो जिले में उपस्थित रहना लोक अदालत व्यवस्था की विश्वसनीयता को पारदर्शी व विश्वसनीय बनायेगा और इसे एक नई उंचाई प्रदान करने वाला सिद्ध होगा ।

मुख्य न्यायाधिपति द्वारा सभी 23 जिलों का वर्चुअल मोड से निरीक्षण जहां आधुनिक तकनीक का न्यायालयीन कार्यवाहियों में उपयोग को दर्शाता है, वहीं मुख्य न्यायाधिपति की यह पहल लोक अदालत के पीठासीन अधिकारियों, सदस्यों व पक्षकारों को प्रोत्साहित करने के साथ साथ पक्षकारों में विश्वास सृजित करेगा और लोक अदालत को और विश्वसनीयता और प्रमाणिकता प्रदान करेगा।

मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने उच्च न्यायालय के सभी न्यायमूर्तिगण जो लोक अदालत को सफल बनाने के लिए अपने पोर्टफोलियो के जिलों में लोक अदालत के अवसर पर गए थे, उनका विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया है, साथ-ही-साथ मुख्य न्यायाधिपति महोदय द्वारा उच्च न्यायालय में गठित लोक अदालत की दो खण्डपीठों के पीठासीन अधिकारी न्यायमूर्तिगण व सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया है। मुख्य न्यायाधिपति द्वारा राज्य के सभी सम्मानित प्रधान जिला न्यायाधीशगणों और नेशनल लोक अदालत के संबंध में राज्य में गठित सभी खण्डपीठों के पीठासीन अधिकारियों और खण्डपीठ के सदस्यों, सभी न्यायालयीन कर्मचारियों के साथ-साथ सभी पैरालीगल वालेण्टियर, अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों तथा पक्षकारों तथा सभी लोगों जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस नेशनल लोक अदालत को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने में योगदान दिया है, को धन्यवाद ज्ञापित किया है। मुख्य न्यायाधिपति द्वारा प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया को भी धन्यवाद ज्ञापित किया गया है, जिन्होनें इस लोक अदालत के प्रचार-प्रसार व लोगों के मध्य जागरूकता फैलाने में विशेष योगदान दिया ।

 

छत्तीसगढ़ जीएसटी विभाग द्वारा लाँच किया गया “ई-संवीक्षा” पोर्टल

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य कर (जीएसटी) विभाग द्वारा सूचना एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग कर नई पहल करते हुए “ई-संवीक्षा” पोर्टल लाँच किया गया है। यह पोर्टल रजत बंसल, आयुक्त, राज्य कर, छत्तीसगढ़ की पहल पर राज्य कर मुख्यालय, नवा रायपुर के डायरी कक्ष एवं कम्प्यूटर कक्ष द्वारा तैयार किया गया है जिसके अंतर्गत मैदानी कार्यालयों के समुचित अधिकारियों द्वारा जीएसटी अधिनियम की धारा 61 एवं धारा 73 और/ अथवा धारा 74 के अंतर्गत की जाने वाली कार्यवाहियों की रिपोर्टिंग आनलाईन की जानी है।


प्रारंभिक चरण में “ई-संवीक्षा” के अंतर्गत “स्क्रूटनी माड्यूल” बनकर तैयार है एवं लाईव किया जा चुका है तथा “एड्जुडिकेशन माड्यूल” तैयार किया जा रहा है। इससे न केवल विभागीय अधिकारियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की मानिटरिंग की जा सकेगी बल्कि ऐसे अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली मासिक डायरी भी आनलाईन होगी और एनालीटिक्स में इससे प्राप्त होने वाले आँकड़ों का राजस्व हित में उपयोग किया जाएगा।

इसके अलावा राज्य के व्यापारियों को होने वाली व्यवहारिक परेशानियों का निराकरण करने मे भी “ई-संवीक्षा” माड्यूल कारगर साबित होगा।

गौरतलब है कि, राज्य कर आयुक्त के ध्यान में कुछ ऐसे प्रकरण आये थे जिनमें एक ही व्यवसायी की एक ही अवधि के प्रकरण में एक से अधिक अधिकारियों द्वारा अलग-अलग समय पर नोटिस जारी किए गये थे, जिसके बाद आयुक्त द्वारा “ई-संवीक्षा” माड्यूल की आवश्यकता को ध्यान मे रखते हुए इसे तत्काल प्रभाव से लागू करवाया गया है।

GOOD NEWS : प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत छत्तीसगढ़ में दौड़ेंगी 240 सिटी बसें, मिली स्वीकृति…

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 रायपुर। शहरों में सार्वजनिक परिवहन के ढांचे को दुरुस्त करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पीएम ई-बस सेवा योजना प्रारंभ की गई है। योजना के तहत राज्यों को शहरों की जनसंख्या के आधार पर बसों की संख्या निर्धारित की गई है जिसके अनुसार रायपुर को 100, दुर्ग-भिलाई को 50, बिलासपुर को 50 तथा कोरबा को 40, इस प्रकार कुल 240 ई-बसों की स्वीकृति प्राप्त हुई है।


भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य के चार प्रमुख शहरों रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और कोरबा को पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की मंजूरी दी है। यह घोषणा न केवल छत्तीसगढ़ के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है, बल्कि पूरे देश के लिए एक मील का पत्थर भी है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ और हरित भारत के सपने को साकार करने में एक महत्वपूर्ण कदम है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस मौके पर कहा कि राज्य में इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत से शहरी परिवहन में क्रांति आएगी। यह पहल हमें पर्यावरणीय संरक्षण के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर परिवहन सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक कदम आगे ले जाती है। उन्होंने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों को इस चैलेंज में सफल होने पर बधाई दी एवं भविष्य में और शहरों को भी इस योजना में शामिल करने के लिए प्रयास करने के निर्देश दिए। 


इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने कहा कि डबल इंजन की सरकार के कारण हम नवाचार और स्थिरता की नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। यह योजना हमारे नागरिकों के लिए एक उपहार है, जो न केवल पर्यावरण को बचाएगी, बल्कि हमारे जीवन को भी सुगम बनाएगी। ई-बसों का आगमन छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए एक नई और स्वच्छ परिवहन सेवा का द्वार खोलेगी। इन बसों के शुरू होने से पर्यावरणीय प्रदूषण में कमी आएगी और शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही ऊर्जा की बचत भी होगी।


छत्तीसगढ़ को मिला एक और राष्ट्रीय पुरस्कार, मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को दी बधाई

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रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य को गैर कोयला मुख्य खनिज ब्लॉकों की नीलामी के लिए एक और राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। केन्द्रीय कोयला एवं खान मंत्री  प्रहलाद जोशी ने आज मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित राज्य खनन मंत्री सम्मेलन में गैर कोयला मुख्य खनिज ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी के लिए छत्तीसगढ़ को देशभर में द्वितीय बेस्ट परफॉर्मेंस अवार्ड से नवाजा है। 


यह पुरस्कार भारत सरकार के खनन मंत्रालय द्वारा दिया गया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के लिए खनिज विभाग के सभी अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।


मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय खनन मंत्री सम्मेलन में केन्द्रीय मंत्री श्री प्रहलाद जोशी से छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से श्री अनुराग दीवान, संयुक्त संचालक (खनिज प्रशासन) एवं इंचार्ज ऑक्शन तथा श्री संजय कनकने संयुक्त संचालक (भौमिकी) द्वारा अवार्ड प्राप्त किया गया।

गौरतलब है कि प्रदेश में वर्ष 2015 उपरांत राज्य में ई-ऑक्शन के माध्यम से कुल 35 आबंटित गैर कोयला मुख्य खनिज ब्लॉकों में से 20 खनिज ब्लॉकों का आबंटन वर्ष 2022-23 में किया गया है। इनमें 02 चूनापत्थर, 09 लौह अयस्क, 05 बाक्साइट ब्लॉक्स एवं 02 निकल-क्रोमियम-प्लेटिनम-गु्रप ऑफ एलीमेंट एवं 02 ग्रेफाइट खनिज सहित कुल 20 ब्लॉक्स का ई-ऑक्शन के माध्यम से खनिज पट्टा-कांपोजिट लायसेंस आबंटन किया गया। प्रदेश में बहुमूल्य एवं सामरिक महत्व के खनिजों के अन्वेषण एवं दोहन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से सितंबर, 2022 में राष्ट्रीय स्तर का स्टेकहोल्डर्स कॉन्फ्रेंस कराया गया था।

खनिज अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य निकल-क्रोमियम-प्लेटिनम-ग्रुप ऑफ एलीमेंट खनिज ब्लॉक का आंबटन करने वाला देश का पहला राज्य है। इसी प्रकार राज्य में प्रथम बार लौह अयस्क, बॉक्साइड एवं ग्रेफाईट ब्लॉक्स का आबंटन भी सफलतापूर्वक किया गया है। उन्होंने बताया कि 20 खनिज ब्लॉकों के सफल आबंटन से रायल्टी, डीएमएफ, एनएमईटी, पर्यावरण एवं अधोसंरचना उपकर के अतिरिक्त लगभग 43,700 करोड़ रूपए की आय बतौर प्रीमियम राज्य को होगी।  

छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल परीक्षा आवदेन के लिए कल अंतिम दिन

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की ओर से आयोजित मुख्य एवं अवसर परीक्षा 2024 में सम्मिलित होने के लिए प्रवेश की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2023 है।


इस निर्धारित तिथि के बाद 01 जनवरी 2024 से 15 जनवरी 2024 तक 500 रुपए विलंब शुल्क के साथ छात्र-छात्राएं परीक्षा आवेदन फॉर्म जमा कर सकते है।

छात्र प्रवेश से संबंधित अधिक जानकारी के लिए अपने समीपस्थ अध्ययन केन्द्र में सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते है। प्रवेश के लिए आवेदन पत्र छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते है, और अपने समीपस्थ अध्ययन केन्द्रों में बिना विलंब शुल्क के 31 दिसम्बर 2023 तक जमा कर सकते है।

अध्ययन केन्द्रों की सूची कार्यालयीन वेबसाइट में उपलब्ध है। इसके साथ ही राज्य कार्यालय की पोर्टल में जाकर छात्र इस वर्ष से ऑनलाईन प्रवेश आवेदन भर सकते है। आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड कर भुगतान कर सकते है।

पूर्ण भरे हुए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म एवं संलग्न दस्तावेजों का प्रिन्ट आउट ले जाकर अपने चयनित अध्ययन केन्द्र में जाकर दस्तावेजों का सत्यापन कराएं। दस्तावेज एवं शुल्क की पावती अध्ययन केन्द्र से प्राप्त कर सकते हैं।


‘छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा)’’ लगातार तीसरी बार पुरस्कृत, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए स्टार परफॉर्मेंस अवार्ड से पुरस्कृत किया गया। सोसाईटी ऑफ एनर्जी इजीनियर्स एण्ड मैनेजर्स-सीम की ओर से 21 सितम्बर को आयोजित 8वें नेशनल एनर्जी मैनेजमेंट अवार्ड समारोह में यह सम्मान दिया गया। आलोक कटियार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण की ओर से इस पुरस्कार को डॉ. अशोक कुमार, उप महानिदेशक, ऊर्जा दक्षता ब्यूरों, (बीईई) भारत सरकार के उपस्थिति में प्राप्त किया गया। 


इस समारोह में क्रेडा की ओर से संजीव जैन, मुख्य अभियंता और राजीव ज्ञानी, अधीक्षण अभियंता भी उपस्थित रहें। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस पुरस्कार के लिए क्रेडा की टीम और प्रदेशवासियों को बधाई दी है।

उल्लेखनीय है कि लगातार 3 वर्षों (वर्ष 2020, 2021 और 2022) से क्रेडा को सीम की ओर से ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य नामित एजेंसी के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। ‘छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा)’ की ओर से विगत 11 वर्षों में प्रदेश में ऊर्जा संरक्षण और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई है। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिसिएंसी, भारत सरकार की च्।ज् परियोजना के अंतर्गत प्रथम और द्वितीय चरण में कुल 44 औद्योगिक संस्थानों की ओर से प्रदेश में लगभग 2.198 मिलियन टन ऑफ ऑयल इक्वीवेलेंट (MTO) ऊर्जा की बचत कर लगभग 6.67 मिलियन टन का कार्बन उत्सर्जन कम किया गया है। इस परियोजना के तहत प्रदेश के उद्योगों को कुल दस लाख से भी अधिक एनर्जी सेविंग सर्टिफिकेट ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिसिएंसी के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। व्यावसायिक भवन क्षेत्र में ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा दिए जाने के लिए राज्य सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता अधिसूचित किया गया है तथा राज्य में कुल 15 भवनों को ग्रीन भवन के रूप में प्रमाणित किया गया है तथा 8 शासकीय भवनों को स्टार रेटिंग नामित करने के लिए प्रस्ताव केन्द्र शासन को अग्रेषित किया गया है। आवासीय भवनों में इको निवास सहिता (ECO NIWAS Samhita) अंतर्गत ऊर्जा दक्ष भवन निर्माण तकनीक अपनाने के लिए प्रदेश के आवासीय परियोजनाओं ऊर्जा दक्ष बनाने के लिए सतत् कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में क्रेडा की ओर से 150 से ज्यादा जागरूकता कार्यक्रम इंजीनियर्स और आर्कीटेक्ट के लिए आयोजित किया गया है।

ग्रामीण क्षेत्र में ऊर्जा दक्ष उपकरणों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुल 77 ग्रामों को मॉडल ऊर्जा दक्ष ग्रामों में विकसित किया गया है। इसी तरह 56 स्वास्थ्य केन्द्रों को मॉडल ऊर्जा दक्ष स्वास्थ्य केन्द्र और 376 शासकीय स्कूलों को मॉडल ऊर्जा दक्ष शासकीय स्कूलों के रूप में विकसित किया गया है। स्कूली छात्र छात्राओं को ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य सेक्रेडा की ओर से कुल 603 स्कूलों में ऊर्जा क्लब का गठन किया गया है तथा आगामी वर्ष में 1 हजार से भी अधिक शैक्षणिक संस्थानों में ऊर्जा क्लब गठन किए जाने का लक्ष्य है।

कृषि क्षेत्र में किसानों को ऊर्जा संरक्षण के विषय में क्रेडा की ओर से बहुआयामी जागरूकता कार्यशाला आयोजित किए गए हैं। इसके तहत ऊर्जा दक्ष पंप के उपयोग से होने वाले ऊर्जा और पैसे के बचत के विषय पर राज्य के समस्त कृषि विज्ञान केन्द्रों में किसानों को जागरूक किया गया है। प्रदेश के शासकीय कार्यालय और संस्थानों ऊर्जा दक्ष उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए क्रेडा की ओर से सतत् प्रयास किये जा रहे हैं, जिससे बिजली खपत में कमी लाई जा सकें।


बारनवापारा में सैलानियों के लिए नया आकर्षण म्यूजियम, लायब्रेरी और लग्जरी फैमली कॉटेज , बढ़ रही है पर्यटकों की संख्या

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य के बलौदाबाजार जिले के वन्यजीव अभ्यारण्य बारनवापारा में सैलानियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसको देखते हुए बारनवापारा में सैलानियों के लिए शासन-प्रशासन द्वारा कई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। बारनवापारा में म्यूजियम और लायब्रेरी स्थापना के साथ-साथ वहां लग्जरी फैमली कॉटेज का निर्माण कराया जा रहा है। बारनवापारा में सैलानियों के लिए मौजूद तीन पुराने कॉटेज को रेनोवेट कर वर्ल्ड क्लास फैमली कॉटेज का स्वरूप दिया जा रहा है। प्रत्येक कॉटेज में दो रुम, किचन, दो हेल्पर की रुकने की व्यवस्था है। दो कॉटेज बनकर तैयार हो गए है। तीसरे का निर्माण कार्य जारी है। 


यहां निर्मित म्यूजियम में बलौदाबाजार में मिलने वाले विभिन्न स्टोन, बारनवापारा में पाएं जाने वाले पशु-पक्षियों का जीवंत चित्रण एवं जानकारी उपलब्ध है, जो बच्चों एवं आने वाले सैलानियों के लिए आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक है। यहां मुख्य चौक में नये पर्यटक सुविधा केंद्र बनाया जा रहा है, जिससे आने वाले पर्यटकों को सभी जानकारियां मिल जाएगी। स्थानीय ग्रामीणों एवं पर्यटकों के लिए एक लायब्रेरी भी बनाई जा रही है। जहाँ पर सभी वर्ग एवं समूह के पाठकों के लिए पर्याप्त किताबे उपलब्ध होंगी। कलेक्टर श्री चंदन कुमार ने बारनवापारा का दौराकर वहां निर्माणाधीन कार्यों का जायजा लिया और निर्माणाधीन कार्यों को समय-सीमा में पूरा कराए जाने के निर्देश दिए। 


गौरतलब है कि बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण 245 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे वर्ष 1972 में वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित किया गया। बारनवापारा का नाम दो वन्य गांवों से मिलकर बना है-बार और नवापारा। वन्यजीव प्रेमियों और एडवेंचर के शौक़ीन लोगो के लिए यह सफारी बहुत ही मनोहारी है। यहाँ हिंसक जानवरों से लेकर मासूम खरगोश तक देखने को मिलते है। यहाँ विदेश से आने वाले पक्षियों का कुछ समय के लिए बसेरा भी रहता है। यहाँ आपको बहुत ऊँचे-ऊँचे पेड़ से लेकर दो नदियां बालमदेही और जोंक नदियों का कल-कल भी सुनाई देगा। यह अभ्यारण्य मैदानी और छोटे-बड़े पठारी इलाकों से मिलकर बना है। यहाँ सागौन के साथ अन्य वृक्ष जैसे साजा, बीजा, लेंडिया, हल्दू, सरई, धौंरा, आंवला, और अमलतास, कर्रा शामिल हैं। 


इस अभ्यारण में तेंदुएं, बाघ, गौर, भालू, चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सुअर कोटरी चौसिंगा, जंगली कुत्ता, लकड़बग्गा, लोमड़ी इत्यादि भी आसानी से दिख जाते हैं। यहां कोबरा, करैत, अजगर जैसे सर्प प्रजातियां पाई जाती हैं। इस अभ्यारण में 150 से भी अधिक प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं, जिनमें प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं। प्रमुख पक्षियों में मोर, दूधराज, तोते, गोल्डन, अरियल, ड्रेंगो, रॉबिन, पाई, कठफोड़वा, बुलबुल, हुदहुद, बाझ, उल्लू हैं।

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन 03 तक आमंत्रित

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धमतरी : छत्तीसगढ़ राज्य तथा राज्य के बाहर अध्ययनरत छत्तीसगढ़ के निवासी जो शासकीय, अशासकीय महाविद्यालय, नर्सिंग महाविद्यालय, आईटीआई, पॉलीटेक्निक तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्था में अध्ययनरत है, ऐसे अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति कक्षा बारहवीं से उच्चतर का पंजीयन स्वीकृति एवं वितरण की कार्रवाई ऑनलाइन की जा रही है। सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग ने बताया कि वर्ष 2022-23 के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति (कक्षा 12 वीं से उच्चतर) के पंजीयन, स्वीकृति एवं वितरण की कार्रवाईhttps://postmatric-scholarship.cg.nic.in/वेबसाईट पर ऑनलाइन की जा रही है। इसके तहत छत्तीसगढ़ राज्य में अध्ययनरत विद्यार्थी द्वारा ऑनलाइन आवेदन हेतु नवीन/नवीनीकरण 03 मई तय की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य के बाहर अध्ययनरत विद्यार्थी द्वारा ऑनलाइन आवेदन हेतु नवीन/नवीनीकरण के लिए 04 मई से 08 मई, ड्रॉफ्ट प्रपोजल लॉक करने के लिए 10 मई तक और सेंक्शन ऑर्डर  लॉक करने के लिए 15 मई तक की तिथि निर्धारित किया गया है।


बताया गया है कि यह अंतिम अवसर विद्यार्थियों को प्रदाय किया जा रहा है। निर्धारित तिथियों के बाद शिक्षा सत्र 2022-23 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्त् िहेतु आवेदन, ड्रॉफ्ट प्रपोजल लॉक, सेंक्शन ऑर्डर लॉक करने का अवसर प्रदान नहीं किया जाएगा।

राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का संरक्षण अति महत्वपूर्ण , बालकों के सर्वांगीण विकास में सबकी सहभागिता जरूरी

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रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, विधिक सेवा प्राधिकरण, यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में किशोर न्याय अधिनियम, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण और बाल संरक्षण से संबंधित विषयों पर राजधानी रायपुर में कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का संरक्षण और उनके सर्वांगीण विकास में सबकी सहभागिता जरूरी है।


कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष श्री गौतम भादुड़ी ने कहा कि आपको बालकों के कल्याण के लिए कार्य मिला है। यह विशेष कार्य है, जिसे भगवान भी देख रहे हैं। आप के बहुत सारे दोस्त एवं परिचित होंगे जिन्हें यह मौका ही नहीं मिला है। हमें यह पुण्य अवसर मिला है इसे हमें सार्थक करना है। जिस प्रकार हम अपने बच्चों को बेहतर और खुशहाल देखना चाहते हैं, उसी प्रकार पीड़ित और अपचारी बच्चों को भी देखें, इससे मन को संतुष्टि मिलेगी।

न्यायमूर्ति श्री भादुड़ी ने आगे कहा कि बाल संरक्षण लैंगिक उत्पीड़न के लिए एक्ट तो बना है। लेकिन उसका क्रियान्वयन हो रहा है, यह भी देखना जरूरी है। उन्होंने पंचतंत्र की एक कहानी सुनाई कि एक गरीब व्यक्ति को कुछ आटा मिल जाता है और वह सपना देखने लग जाता हैं कि वह उसे बेचकर बकरी खरीद लेगा, फिर बकरी के दूध को बेचकर धीरे-धीरे अमीर हो जाएगा। इसी समय नींद में उसका पांव आटे पर पड़ता है और आटा बिखर जाता है। ऐसा बच्चों को नहीं लगना चाहिए कि यह एक ड्रीम है। उन्होंने एक और कहानी बताया कि एक व्यक्ति को कहीं जाना था। उसने स्वामी विवेकानंद जी से पूछा कि आप मुझे रास्ता बताए। स्वामी जी ने कहा कि रास्ता आपके पैरों के नीचे है जो आपको अपनी मंजिल तक ले जाएगा। आप सभी अधिकारियों-कर्मचारियों अथवा इस सेवा से जुड़े लोगों से मेरा अनुरोध है कि आपको अवसर मिला है, आप बच्चों के संरक्षण के लिए बेहतर कार्य कर सकते हैं। न्यायमूर्ति ने बाल संरक्षण एवं लैंगिक अपराध जागरूता एवं नियंत्रण की दिशा में बेहतर कार्य के लिए प्रसन्नता जाहिर की।

कार्यशाला को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं किशोर न्याय कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री पी.सैम कोशी, न्यायमूर्ति श्री दीपक तिवारी, छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती तेजकुंवर नेताम, यूनीसेफ के राज्य प्रमुख श्री जॉब जकारिया ने भी संबोधित किया। छत्तीसगढ़. बाल संरक्षण आयोग के सचिव श्री प्रतीक खरे ने स्वागत भाषण दिया। आभार प्रदर्शन श्री आनंद प्रकाश वॉरियाल, सदस्य सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राध्किारण, बिलासपुर के द्वारा किया गया।

कार्यशाला में जस्टिस वक्ताओं ने कहा कि एक नाबालिग जिसे यौन शोषण का शिकार बनाया गया है उसे बालिग पीड़ित से ज्यादा सुरक्षा की आवश्यकता है, क्योंकि शारीरिक उत्पीड़न, सामाजिक बहिष्कार और मानसिक उत्पीड़न का सामना करने की क्षमता बालिग व्यक्ति के मुकाबले नाबालिग में कम होती है। कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का संरक्षण अति महत्वपूर्ण हैं। यह मुस्कुराते हुए मासूम प्रार्थी वास्तव में हमारे समाज के हाशिये में पड़े वर्गों में से एक है। यह अक्सर यौन शोषण, पोर्नाेग्राफी, ऐसिड अटैक जैसी जघन्य अपराधों के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में हम सभी स्टैक होल्डर जो बडे़-बड़े पदों पर आसीन हैं, उनका नैतिक एवं संवैधानिक कर्तव्य है कि हम इन बच्चों की सुरक्षा एवं सम्मानित जीवन सुनिश्चित करने हेतु अथक प्रयास करें। इस अवसर पर लघु फिल्म ‘बेहद सख्त कानून है‘ और ‘सावधानी जरूरी है‘ का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यशाला में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।

कार्यशाला के द्वितीय सत्र में किशोर न्याय बोर्ड, लैंगिक अपराधों तथा बाल संरक्षण से संबंधित लंबित प्रकरणों की संभागवार समीक्षा की गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने बाल संरक्षण के दिशा में किये गये कार्यों की काफी सराहना की अधिकारियों ने विशेष प्राथमिकता व कर्तव्यों के साथ बालकों के भविष्य में कोई कुठाराघात न हो, ऐसे निर्णय लेने पर जोर दिया।

कार्यशाला में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, जिला एवं सत्र न्यायाधीशगण, डिस्ट्रिक्ट जज, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यगण सहित, वित्त विभाग की विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग, पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास और यूनिसेफ के प्रतिनिधि तथा किशोर न्यायालय बाल अधिकार संरक्षण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी व इससे जुड़े विद्वतजन उपस्थित थे।

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