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वन क्षेत्र में हाथियों के लिए रखे धान की निगरानी ट्रैप कैमरा से करने के निर्देश

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वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने अपने निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वन विभाग के अंतर्गत कैम्पा मद के कार्यों की समीक्षा की। मंत्री अकबर ने प्रदेश में हाथी प्रभावित क्षेत्रों में हाथियों के भोजन व्यवस्था के लिए उनके विचरण क्षेत्र में धान उपलब्ध कराए जाने के प्रयोग की समीक्षा करते हुए वन क्षेत्र में जहां पर धान रखा गया है, वहां पर ट्रैप कैमरा लगाकर इसकी निगरानी कर अवगत कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए।


मंत्री  अकबर ने सभी मुख्य वन संरक्षकों और वन मंडलाधिकारियों को कैम्पा मद के वार्षिक कार्ययोजना साल 2020-21 के कार्यों को माह नवम्बर और वार्षिक कार्ययोजना वर्ष 2021-22 के कार्यों को मार्च 2022 तक पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को वन और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। वन मंत्री अकबर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कैम्पा मद से कराए जा रहे कार्यों की वृत्तवार समीक्षा की। 

बैठक में ये रहे उपस्थित

विशेष रूप से वर्तमान वर्षा ऋतु में कराए गए वृक्षारोपण की समीक्षा की, जिसमें वृक्षारोपण के कार्य लगभग पूर्णता की ओर पाए गए। उन्होंने इसके साथ ही मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना और निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी की। समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन  मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (कैम्पा)   व्ही. श्रीनिवासराव उपस्थित थे।

बड़ी खबर: बदले गए 5 नगर निगमों के आयुक्त, इन्हें सौंपा गया प्रभार

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रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार (chhattisgarh government) ने आज एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के 14 नगर निगमों में से पांच के आयुक्तों को बदल दिया गया है। बता दें कि दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी, बिलासपुर और अंबिकापुर के नगर निगम आयुक्त का तबादला कर दिया गया है।





प्रशासनिक विभाग की यह सर्जरी बुधवार को की गई है । नए आदेशों के मुताबिक दुर्ग नगर निगम के आयुक्त रहे इंद्रजीत बर्मन अब कबीरधाम जिले के एडिशनल कलेक्टर होंगे । वही राजनांदगांव नगर निगम आयुक्त चंद्रकांता कौशिक को धमतरी का ज्वाइंट कलेक्टर बनाकर भेजा जा रहा है । इसके साथ ही धमतरी नगर निगम के आयुक्त आशीष कुमार टिकरी हाथों राज्य शहरी विकास प्राधिकरण का प्रभार सौंपा गया है।





राज्यसेवा के कुल 11 अधिकारियों का तबादला





इसके अलावा बिलासपुर नगर निगम आयुक्त की जिम्मेदारी से मुक्त हो रहे प्रभाकर पांडे को अब अंबिकापुर नगर निगम के आयुक्त का पद सौंपा गया है। वहीं अंबिकापुर नगर निगम के आयुक्त हरीश मंडावी दुर्ग नगर निगम के आयुक्त बना दिए गए हैं । बता दें कि इन पांच अफसरों को मिलाकर राज्यसेवा के कुल 11 अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है।


छत्तीसगढ़ में नदी-नालों को मिल रहा नया जीवन, बापू के सपनों का गांव गढ़ने की दिशा में किया जा रहा काम

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (cm bhupesh baghel) की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ राज्य में भू-जल संरक्षण और संवर्धन के लिए संचालित नरवा (नाला) विकास योजना के जरिए राज्य के नदी-नालों और जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित किया जा रहा है।









राज्य में संचालित नरवा विकास योजना दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजना के नरवा, गुरवा, घुरवा, बाड़ी का एक घटक है। नरवा विकास के माध्यम से वर्षा जल को सहेजने के लिए तेजी से नालों का उपचार कराया जा रहा है।





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पहले चरण में छत्तीसगढ़ राज्य में 1385 नरवा (नाला) उपचार के लिए चिन्हित किए गए हैं। जिसमें से 1372 नालों में वर्षा जल की रोकथाम के लिए बोल्डर चेक, गली प्लग, ब्रश हुड, परकोलेशन टैंक जैसी संरचनाओं का निर्माण एवं उपचार कर पानी को रोकने और भू-जल स्तर बेहतर बनाने प्लान तैयार कर काम कराया जा रहा है।





भू-जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में काम





छत्तीसगढ़ राज्य में सुराजी गांव योजना के प्रमुख घटक नरवा (नाला) के तहत अब तक 1310 नालों में वर्षा जल को रोकने के लिए विभिन्न प्रकार के 71 हजार 831 स्ट्रक्चर बनाए जाने की मंजूरी दी गई है, जिसमें से 51 हजार 742 स्ट्रक्चर का निर्माण हो चुका है। अभी 9 हजार 685 स्ट्रक्चर निर्माणाधीन है। लगभग दो सालों से छत्तीसगढ़ राज्य में भू-जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में किए जा रहे कार्यों का सकारात्मक परिणाम भी अब दिखाई देने लगा है।





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छत्तीसगढ़ राज्य में पानी को रोकने की इस मुहिम को केन्द्र सरकार ने न सिर्फ सराहा है, बल्कि सूरजपुर और बिलासपुर जिले को नेशनल वाटर अवार्ड से सम्मानित भी किया है। यह नेशनल वाटर अवार्ड बिलासपुर जिले को नदी-नालों के पुनरूद्धार के लिए और सूरजपुर जिले को जल संरक्षण के उल्लेखनीय कार्यों के लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से दिया गया।





छत्तीसगढ़ राज्य के जिन-जिन क्षेत्रों में नरवा उपचार के काम हुए हैं, वहां भू-जल स्तर में आशातीत वृद्धि हुई है। नालों में जल भराव होने से किसान अब बेहतर तरीके से फसलोत्पादन के साथ-साथ साग-सब्जी की भी खेती करने लगे हैं। नालों के पानी को लिफ्ट करने से किसानों को सिंचाई की भी सुविधा मिली है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना के माध्यम से गांवों को विकसित और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने की पहल की जा रही है। 








दरअसल यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपनों का गांव गढ़ने की दिशा में बढ़ते कदम है। इसके माध्यम से नदी-नालों और पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देकर पौष्टिक खाद्यान्न, फल तथा सब्जी-भाजी के उत्पादन को बेहतर बनाना है, ताकि गांव आर्थिक रूप से समृद्ध हो सके।









राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने वर्धा के सेवा आश्रम में प्रार्थना सभा में कहा था कि हमारी दृष्टि दिल्ली के बजाय देहात की ओर होनी चाहिए। देहात हमारा कल्पवृक्ष है। कल्पवृक्ष हर इच्छाओं को पूरा करता है। छत्तीसगढ़ सरकार सुराजी गांव योजना के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों को सहेज कर सशक्त, खुशहाल और समृद्ध गांव गढ़ रही है।


युवाओं के लिए 11 से 23 जनवरी तक ऑनलाइन प्लेसमेंट कैंप का आयोजन, 8 हजार से ज्यादा पदों पर होगी भर्ती

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छत्तीसगढ़ राज्य के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 11 से 23 जनवरी तक जिला रोजगार और स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र ,पुराना पुलिस मुख्यालय परिसर ,जी ई रोड रायपुर में ऑनलाइन प्लेसमेंट कैंप का आयोजन (Placement camp latest update) किया जा रहा है।





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कैंप के माध्यम से निजी क्षेत्र के नियोजक आर. एस. डी. एस. पी. सी. टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड रायपुर द्वारा स्टेट जोनल और डिस्ट्रिक्ट, फील्ड इंचार्ज ,ब्लॉक फील्ड कोऑर्डिनेटर, कंप्यूटर टीचर, टेलीकॉलर, कंप्यूटर आफ्टर और रिसेप्शनिस्ट के 8000 से ज्यादा पदों पर भर्ती की जाएगी।





8000 से ज्यादा पदों के लिए अभ्यर्थियों की भर्ती





रोजगार कार्यालय के उप संचालक ने बताया कि 8000 से ज्यादा पदों के लिए न्यूनतम 12वीं और कंप्यूटर विषयों के साथ स्नातक और कंप्यूटर डिप्लोमा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की भर्ती की जाएगी, जिसका वेतनमान 9000 से 40,500 प्रतिमाह की दर पर होगी।





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उप संचालक ने बताया कि इन पदों पर भर्ती के लिए इच्छुक आवेदक निर्धारित अंतिम तिथि 23 जनवरी तक इस लिंक http://shorturl.at/bcehA के माध्यम से अपनी शैक्षिक और तकनीकी शिक्षा के संबंध में अपना विवरण भेज सकते हैं। साथ ही ज्यादा जानकारी के लिए रोजगार कार्यालय रायपुर में संपर्क ( organizing online placement camp from 11 to 23 January in chhattisgarh) किया जा सकता है।





23 से 31 दिसंबर तक किया गया था ऑनलाइन प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन





बता दें कि इससे पहले जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, रायपुर द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दिनांक 23 से 31 दिसंबर तक रोजगार कार्यालय, पुराना पुलिस मुख्यालय परिसर, जी.ई. रोड, रायपुर में ऑनलाइन प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन (Placement camp latest update) किया गया था।


छत्तीसगढ़ में 30 दिसंबर तक 48 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी, अब तक 12.40 लाख किसानों ने बेचा धान

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रायपुर : खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में 30 दिसंबर 2020 तक छत्तीसगढ़ में 48 लाख मीट्रिक धान की खरीदी (paddy purchased Chhattisgarh Update) की गई है। अब तक राज्य के 12 लाख 40 हजार किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचा है।









वहीं राज्य के मिलरों को 14 लाख 58 हजार 601 मीट्रिक टन धान का D.O. जारी किया गया है, जिसके तहत मिलरों द्वारा अब तक 11 लाख 19 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव कर लिया गया है। बता दें कि धान खरीदी का आज 32वां दिन है। छत्तीसगढ़ में 1 दिसंबर से धान खरीदी शुरू हुई थी।





खरीफ वर्ष 2020-21 में 30 दिसंबर 2020 तक छत्तीसगढ़ के इन जिलों में हुई इतनी धान खरीदी - (paddy purchased Chhattisgarh Update)





  • बस्तर जिले में 61 हजार 663 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • बीजापुर जिले में 26 हजार 542 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • दंतेवाड़ा जिले में 5 हजार 579 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • कांकेर जिले में एक लाख 51 हजार 532 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • कोंडागांव जिले में 71 हजार 62 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • नारायणपुर जिले में 8 हजार 938 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • सुकमा जिले में 16 हजार 407 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • बिलासपुर जिले में 2 लाख 57 हजार 37 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 36 हजार 981 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • जांजगीर-चांपा जिले में 4 लाख 68 हजार 98 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • कोरबा जिले में 55 हजार 160 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • मुंगेली जिले में एक लाख 86 हजार 631 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • रायगढ़ जिले में 3 लाख 4 हजार 953 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • बालोद जिले में 2 लाख 95 हजार 394 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • बेमेतरा जिले में 3 लाख 21 हजार 624 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • दुर्ग जिले में 2 लाख 30 हजार 569 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • कवर्धा जिले में 2 लाख 34 हजार 517 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • राजनांदगांव जिले में 4 लाख 2 हजार 362 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • बलौदाबाजार जिले में 3 लाख 10 हजार 801 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • धमतरी जिले में 2 लाख 33 हजार 336 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • गरियाबंद जिले में एक लाख 71 हजार 184 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • महासमुंद जिले में 3 लाख 12 हजार 823 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • रायपुर जिले में 2 लाख 84 हजार 551 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • बलरामपुर जिले में 70 हजार 77 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • जशपुर जिले में 51 हजार 947 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • कोरिया जिले में 50 हजार 548 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • सरगुजा जिले में 78 हजार 344 मीट्रिक टन धान की खरीदी
  • सूरजपुर जिले में 98 हजार 575 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है।

किसान अब रबी मौसम में 31 जनवरी तक करा सकते हैं फसलों का पंजीयन

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छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों के फसल उत्पाद को प्रोत्साहित करने कृषि आदान सहायता के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना साल 2020-21 से लागू की गई है। योजनांतर्गत राजस्व विभाग द्वारा कृषकवार, फसलवार शतप्रतिशत रकबे क्षेत्राच्छादन का गिरदावरी करते हुए भूइयां पोर्टल में इंद्राज किया जा रहा है।





सीएम बघेल ने की गोधन न्याय योजना की 10वीं किश्त जारी, 5.12 करोड़ रूपए की राशि गोबर विक्रेताओं के खातों में ट्रांसफर





योजनांतर्गत धान, मक्का एवं गन्ना उत्पादक कृषकों को छोड़कर शेष फसलों या सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, रामतिल, कोदो, कुटकी और रागी फसल के लिए आदान सहायता राशि की गणना संबंधित फसलों के गिरदावरी के मुताबिक भूइयां पोर्टल में संधारित रकबा के आधार पर अनुपातिक रूप से की जाएगी।





10 वीं और 12 वीं बोर्ड परीक्षा 2021 के आवेदन की तिथि बढ़ी, उत्कृष्ट अंग्रेजी स्कूल में भर्ती के लिए अंतिम मेरिट सूची जारी





फसल लगाने वाले कृषकों को संबंधित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। इस योजनांतर्गत रबी मौसम में पंजयीन कराने के लिए 30 नवंबर 2020 तक समय-सीमा निर्धारित की गई (Farmers can register crops till 31 January in Rabi season) थी। इस समय-सीमा को बढ़ाते हुए 31 जनवरी 2021 तक की गई है। साथ ही किसानों से अनुरोध किया है कि राजीव गांधी किसान न्याय योजनांतर्गत अपने फसलों का पंजीयन सहकारी समितियों में कराकर योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठावें।





प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए कृषकों से अपील





बेमेतरा में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में कृषकों का पंजीयन अनवरत चालू है। इस योजना में जिले के कृषकों का पंजीयन कर उन्हें योजनानुसार 6000 रूपये वार्षिक दर पर किस्त की राशि सीधे उनके खाते में भेजकर लाभान्वित किया जा रहा है। उप संचालक कृषि ने बताया कि वर्तमान में अभी भी जिले के कुछ ऐसे मूल कृषक भी है जिन्होंने योजनान्तर्गत अपना पंजीयन नहीं कराया है।





छत्तीसगढ़ में 23 दिसंबर तक 37 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी, अब तक 9.81 लाख किसानों ने बेचा धान





ऐसे अपंजीकृत कृषक पंजीयन के लिए अपना मूल दस्तावेज जैसे ऋण पुस्तिका, आधार कार्ड एवं बैंक पास बुक की छायाप्रति को साथ ले जाकर अपने विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय में तत्काल अपना पंजीयन करवा सकते हैं। साथ ही पूर्व से पंजीकृत जिन कृषकों को किसी कारणवश योजनान्तर्गत किस्त की राशि प्राप्त न हो रही हो वो अपने विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय में जाकर तत्काल अपने पंजीयन में सुधार करवा सकते हैं , ताकि वे कृषक भी योजना का लाभ उठा सकें।


छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार के दो साल हुए पूरे, प्रदेश की योजनाओं पर डाले एक नजर

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आज यानी 17 दिसंबर को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार (Congress Government) को बने 2 साल पूरे (2 years of Bhupesh Government) हो गए हैं। इन दो सालों में बघेल सरकार पूरी तरह से देसी छवि अपनाकर 'गढ़बो नवा छत्तीसगढ़' का नारा लगते रहे हैं। वहीं योजनाओं पर नरवा, गुरुवा, घुरवा और बाड़ी योजना हो, गोधन न्याय योजना हो या फिर राजीव गांधी किसान न्याय योजना भूपेश सरकार का पूरा फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर रहा है।









छत्तीसगढ़ सरकार ने दो साल में विकास का कीर्तिमान स्थापित किया : शकुंतला साहू





बता दें कि 7 दिसंबर साल 2018 को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनी थी। 15 साल के बाद कांग्रेस को फिर से सत्ता मिली थी। हालांकि की उस समय मुख्यमंत्री के पद के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी, लेकिन आखिर में सीएम की कुर्सी भूपेश बघेल को मिली। मुख्यमंत्री के पद के लिए टीएस सिंहदेव भी रेस में थे, लेकिन सीएम का ताज भूपेश बघेल के सिर पर सजा था। कांग्रेस को जीत दिलाने में बड़ी भूमिका घोषणा पत्र की भी थी, जिसे तैयार करने में टीएस सिंहेदव का बड़ा हाथ था।









बता दें कि इन दो साल के कार्यकाल में भूपेश सरकार ने कई योजनाओं की शुरुआत की, जिसका लोग अभी भी लाभ ले रहे है। आज हम उन्हीं योजनाओं के बारे में आपको विस्तार से बताने वाले है।





छत्तीसगढ़ की प्रमुख योजनाओं के नाम और उद्देश्य (Names of schemes of Chhattisgarh and its objectives)





मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान (Mukhyamantri suposhan Yojana) – छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने 2 अक्टूबर 2019 को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर इस योजना की शुरुआत की थी। मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के तहत राज्य सरकार प्रदेश के कुपोषण और एनीमिया से पीड़ित महिलाएं और बच्चे को पौष्टिक खाना उपलब्ध करा रही है।





छत्तीसगढ़ सार्वभौम पीडीएस (Chhattisgarh sarvbhom PDS) – इस योजना के अंतर्गत प्रति राशन कार्ड 35 रूपए किलो चावल, एपीएल परिवारों को 10 रूपए किलो चावल वितरण, ग्रामीण और शहरी गरीबों को मिट्टी का तेल दिया जाता है।





मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना (CG Mukhyamantri Haat Bazar Yojana) – छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 2 अक्टूबर को 150वीं गांधी जयंती पर राज्य में दूर दराज के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में मुख्यमंत्री हाट बाजार योजना 2019 (CM Haat Bazar Yojana in Chhattisgarh) की शुरुआत की है।





छत्तीसगढ़ में फिर एक किसान ने की आत्महत्या, यह बनी खुदकुशी की वजह





मुख्यमंत्री हाट बाजार योजना (CG Mukhyamantri Haat Bazar Yojana) में राज्य सरकार आदिवासी क्षेत्रों में मुफ्त चिकित्सा देने के लिए और लोगों को पर्याप्त उपचार प्रदान करने के लिए दवाइयों के साथ डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ सहित एक मेडिकल टीम के साथ मोबाइल चिकित्सा यूनिट भेजती है। इस सरकारी योजना के माध्यम से राज्य सरकार दूर-दराजों के क्षेत्रों में मुफ्त इलाज उपलब्ध करा रही है।





मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना (mukhyamantri sahari Slum swasthya yojana) – इस योजना को उद्देश्य शहरी स्लम बस्तियों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को सुनिश्चि करना है। साथ ही ओपीडी सहित कई तरह के जांच और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराना है।





मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालय योजना (mukhyamantri ward karyalay yojana) – इस योजना का उद्देश्य नगरीय निकायों के विभिन्न वार्डों में मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालय के माध्यम से विभिन्न तरह के जन समस्याओं का निराकरण करना है।









कृषक जीवन ज्योति योजना (krishak jeevan jyoti yojana) – इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के सभी किसानों के सभी पंपों को बिना किसी क्षमता और खपत की सीम के फ्लैट रेट की सुविधा उपलब्ध कराना है।









छत्तीसगढ़ पढ़ई तुंहर दुआर योजना (chhattisgarh padhai tuhar dwar yojana) - पढ़ई तुंहर दुआर योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को ई क्लासरूम, स्टडी मटेरियल, वीडियो लेसन, शैक्षणिक खेल, होमवर्क जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अभी के लिए इस पोर्टल पर पहली कक्षा से 10वीं तक के पाठ्यक्रम और विषय सामग्री उपलब्ध है। जिस पर कुछ ही दिनों में 11वीं, 12वीं कक्षा को भी जोड़ा जाएगा। वेबसाइट शुरू होने के सिर्फ एक दिन में ही इससे राज्य के 2216106 स्कूली बच्चे और 200922 स्कूल शिक्षक जुड़ चुके हैं।





छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री मितान योजना (chhattisgarh mukhyamantri mitan yojana) – छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में 15 अगस्त 2020 को मुख्यमंत्री मितान योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत राज्य के सभी नागरिकों को घर बैठे सेवाओं का लाभ दिया जाएगा। मुख्यमंत्री मितान योजना के तहत राज्य के निवासी कॉल सेंटर में फोन करके किसी भी सेवा के बारे में पूछताछ कर सकते हैं या फिर सर्विस की Home Delivery करवा सकते हैं।






https://twitter.com/bhupeshbaghel/status/1294506882283921408?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1294506882283921408%7Ctwgr%5E%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fsarkariyojana.com%2Fmukhyamantri-mitan-yojana%2F




गोधन न्याय योजना छत्तीसगढ़ (jodhan nyay yojana) – गोधन न्याय योजना' छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों को लाभ पहुंचाने की प्रदेश सरकार की एक नई योजना है। इस योजना के तहत किसानों और पशुपालकों से 2 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर की खरीदी की जाएगी, जिसके जरिए गौठानों में बड़े पैमाने पर वर्मी कम्पोस्ट खाद का निर्माण और अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इससे गांव के लोगों को रोजगार और आर्थिक लाभ मिल सकेगा।





राजीव गांधी किसान न्याय योजना (rajiv gandhi kisan nyay yojana) - छत्तीसगढ़ राज्य में लगभग 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। राज्य का अधिकांश क्षेत्र वर्षा आधारित होने से मौसमीय प्रतिकूलता और कृषि आदान लागत में वृद्धि के कारण कृषि आय में अनिश्चितता या ऋण ग्रस्तता बनी रहती है, जिसकी वजह से किसान फसल उत्पादन के लिए आवश्यक आदान जैसे उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक, यांत्रिकीकरण और नवीन कृषि तकनीकी में पर्याप्त निवेश नहीं कर पाते है। कृषि में पर्याप्त निवेश और लागत से राहत देने के लिए राज्य शासन द्वारा कृषि आदान सहायता के लिए 'राजीव गांधी किसान न्याय योजना' लागू की गई है।





किसानों की शिकायत पर सख्त कार्रवाई, गीदम धान खरीदी केंद्र प्रभारी की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त





राजीव गांधी किसान न्याय योजना का उद्देश्य
राजीव गांधी किसान न्याय योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में फसल उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना है।





इंदिरा वन मितान योजना (Indira Van Mitan Yojana)- इंदिरा वन मितान योजना छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई एक नई योजना है, जिसके तहत राज्य में वनवासियों के विकास के लिए कई कार्य किए जाएंगे। इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में वनवासियों को खुशहाल और वनांचल के गांवों को स्वावलंबी बनाना है।






https://twitter.com/ChhattisgarhCMO/status/1293802279183609858?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1293802279183609858%7Ctwgr%5E%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fsarkariyojana.com%2Findira-van-mitan-yojana%2F




मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 09 अगस्त 2020 को विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर इस नई इंदिरा वन मितान योजना का शुभारंभ किया। छत्तीसगढ़ सरकार ने इंदिरा वन मितान योजना के तहत अनुसूचित क्षेत्रों के 19 लाख परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। इस योजना के माध्यम से समूहों को वृक्ष प्रबंधन का अधिकार प्रदान किया जाएगा जिससे वे वन क्षेत्रों के वृक्षों से वनोपज संग्रहण कर आर्थिक लाभ ले सकें।





छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री कन्यादान योजना ( Chhattisgarh Chhattisgarh Kanyadan Yojana)- इस सरकारी योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य राज्य की बेटियों के विवाह में आर्थिक मदद पहुँचाना है। साथ ही विवाह के अवसर पर होने वाली फिजूल खर्चो को रोकना और सादगीपूर्ण विवाहों को बढ़ावा देना है।इस योजना के माध्यम से दहेज़ में लेनदेन की प्रथा को भी रोका जायेगा। अब गरीब परिवारों को बेटी के विवाह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। इस योजना की पहल कन्याओ के विवाह की परेशानियों को कम करने के लिए ही की गई है।





धनलक्ष्मी योजना छत्तीसगढ़ (chhattisgarh dhan lakshmi yojana) - बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान को बढ़ावा देते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने धनलक्ष्मी योजना की शुरुआत की है। राज्य में बढ़ती कन्या भ्रूण हत्या को देखते हुए सरकार द्वारा इस योजना को शुरू किया गया है।इस योजना के जरिये छत्तीसगढ़ राज्य की कन्याओं को 1 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता और शिक्षा करने के लिए अलग से आर्थिक मदद दी जाएगी।





शक्ति स्वरूपा योजना (Shakti Swarupa Yojana)- इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य विधवा और कानूनी रूप से तलाकशुदा महिलाओ की आर्थिक मदद करना है। इस योजना के तहत महिलाओं के खुद के कारोबार को शुरू करने में उन्हें सरकारी से मदद मिलेगी।





छत्तीसगढ़ मेधावी छात्र शिक्षा प्रोत्साहन योजना( Medhavi Chatra Shiksha Protsahan Yojana) - इस योजना के तहत मजदूरों के बच्चों को 5 से 12 हजार तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, ताकि वे अपने आगे की पढ़ाई को जारी रखे। बता दें कि इस योजना के तहत श्रमिकों के एक परिवार से सिर्फ 2 बच्चों को ही प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा सकती है। जिसने छात्र ने 10 वीं, 12 वीं, ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन में 75 % अंक प्राप्त की हो। ऐसे छात्रों को इस योजना के अंतर्गत 5,000 से 12,000 रूपये तक की राशि प्राप्त होगी।





छत्तीसगढ़ ई-रिक्शा सब्सिडी योजना ( chhattisgarh E-Rickshaw Subsidy yojana)- छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए ई-रिक्शा सहायता योजना (E-Rickshaw Subsidy Scheme) चला रखी है, जिसमें राज्य सरकार असंगठित क्षेत्र के लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए ई-रिक्शा खरीदने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।





छत्तीसगढ़ किसान कर्ज माफी योजना (chhattisgarh kisan karj mafi yojana)- किसान कर्ज माफी योजना के तहत सरकार 65 लाख किसानों के अल्पकालिक कृषि (फसल) ऋण को माफ करेगी। छत्तीसगढ़ में लगभग 16 लाख किसान है, जिन पर 6100 करोड़ रूपए का कर्ज है। सरकार यह पूरा कर्जा माफ करेगी।





डॉ. खुबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना (Dr. Khubchand Baghel swasthya yojana)- इस योजना का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं का एकीकरण करना है। इस योजना के तहत 6 योजना का एकीकरण किया गया है।





सुराजी गांव योजना (Suraji gaon yojana)- इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण विकास और रोजगार प्रदान करना है।





आजीविका अंगना योजना - इस योजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की महिलाओं को स्वरोजगार दिलाने के लिए आजीविका अंगना प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण करना है। जिसमें महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर खुद का रोजगार स्थापित कर सके।





मिनीमाता अमृत धारा नल योजना- इस योजना का उद्दश्य छत्तीसगढ़ के बीपीएल परिवारों के घर में निशुल्क नल कनेक्शन प्रदान करना है।





पौनी पसारी योजना- इसका उद्देश्य नगरीय निकाय के बाजारों में परम्परागत और स्थानीय व्यवसायों को एक जुटकर उन्हें बढ़ावा देना है। साथ ही इन स्थानीय व्यवसायों का सुद्दढ़ीकरण कर रोजगार सृजन करना है।





मुख्यमंत्री स्वादिष्ट चना वितरण योजना- इसका उद्देश्य चना वितरण कर कुपोषण मुक्त राज्य बनाना है।





मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना- इस योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में लभी बीपीएल परिवारों और मध्यवर्गीय परिवारों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है।





बिजली बिल हॉफ योजना- इस योजना के अंतर्गत छत्तीगढ़ के सभी बिजली उपभोक्ताओं को प्रति 400 युनिट से कम बिजली खपत पर आधा बिजली बिल लिया जाता है।





मोर छत-मोर बिजली योजना- इस योजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के 300 सरकारी भवनों में सोलर सिस्टम लगाकर बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना है।





प्रबल योजना- इस योजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के बच्चों को कुपोषण की समस्या से निजात दिलाना और प्रदेश से कुपोषण मिटाना है।


सड़क दुर्घटनाओं का गढ़ बना छत्तीसगढ़, आंकड़ों पर डाले एक नजर

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटना (Road accident increased in Chhattisgarh) बढ़ता ही जा रहा है, आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में रोजाना 10 से ज्यादा लोग सड़क हादसे में अपनी जान गवांते है. हालांकि छत्तीसगढ़ पुलिस (Chhattisgarh Police) ने दावा किया है कि बीते साल के मुकाबले इस साल सड़क दुर्घटनाओं में मृत्युदर 4.57 प्रतिशत कम हुआ है।





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इस साल नवंबर में सड़क दुर्घटनाओं (Road accidents) में 408 लोगों की मौत और 884 लोग घायल हुए है। प्रदेश में 11 महीनों में 10 हजार 126 सड़क दुर्घटनाओं में 395 लोगों की मौत हुई और 9 हजार 270 लोग घायल हुए है। वहीं सड़क हादसे से होने वाली मौत के मामले में छत्तीसगढ़ देश भर में 11 वें नंबर पर पहुंच गया है।





सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या





सड़क हादसों (Road Accident in Chhattisgarh) में मौत के मामले में छत्तीसगढ़ के आंकड़ों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2019 में करीब 14 हजार सड़क हादसों में 4 हजार 556 लोगों ने अपनी जान गवांई है। इसमें करीब 3 हजार 200 मृतक ऐसे हैं, जो दो पहिया वाहनों में थे।









दिन ब दिन बढ़ रहा सड़क हादसों का ग्राफ





इन 3 हजार 200 में से करीब 2450 लोगों की मौत सिर में चोट लगने की वजह से हुई है। इसके कारण प्रदेश में सड़क हादसों का ग्राफ दिन ब दिन बढ़ता ही जा रह है, इसके कारण सड़क हादसों में जान गवांने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ती ही जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक सड़क हादसों में सबसे ज्यादा हादसे राजधानी रायपुर में हो रहे है।





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छत्तीसगढ़ पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी रायपुर के टाटीबंध चौक पर हर महीने 4 से 5 लोगों की मौत होती है। ऐसा नहीं है कि सरकार सड़क हादसों को कम करने के लिए कोई उपाय नहीं कर रही है।









लोगों की लापरवाही बन रही हादसों का कारण





बता दें कि सड़क हादसों और इन हादसों में घायल लोगों को जल्द इलाज मुहैया करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने हर जिले के पुलिस को पेट्रोलिंग वाहन सौंपा है. साथ ही सड़क हादसों को कम करने और लोगों को जागरूक करने के लिए कई तरह के जागरुकता अभियान भी चलाएं जा रहे है, लेकिन लोगों की लापरवाही के कारण सड़क दुर्घटना कम होने का नाम नहीं ले रहा है.





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लोग अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट नहीं पहनते है, बल्कि पुलिस से बचने के लिए हेलमेट पहनते है। वहीं लोग हर काम जल्दी करना चाहते है, कई बार लोगों की यहीं जल्दबाजी सड़क हादसों का कारण बनता है.





इन कारणों की वजह से हो रहा सबसे ज्यादा हादसा





  • शराब पीकर वाहन चलाने के कारण।
  • गलत साइड में ड्राइविंग करने के कारण।
  • बिना हेलमेट वाहन पहने गाड़ी चलाने के कारण।
  • मोबाइल फोन का उपयोग करते-करते ड्राइविंग करने के कारण।
  • नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने जैसे कारणों के कारण सबसे ज्यादा दुर्घटना और मौत हो रही है।




पुलिस के मुताबिक ज्यादातर दो पहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के गाड़ी चलाते हैं, इसलिए जब हादसा होता तो बिना हेलमेट वालों की 80 प्रतिशत से ज्यादा मौत हो जाती है, इसलिए छत्तीसगढ़ पुलिस का पूरा फोकस दो पहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनाने पर है।









समय-समय पर चलाएं जा रहे विशेष जांच अभियान





समय-समय पर चलाएं जा रहे विशेष जांच अभियान के तहत में बिना हेलमेट वाले दोपहिया वाहन चालकों की धरपकड़ करने के साथ ही उन्हें जागरूक करने का काम भी किया जा रहा है।





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छत्तीसगढ़ में 150 नए ब्लैक स्पॉट चिन्हांकित किए गए है, जिनमें नेशनल हाईवे में 95, स्टेट हाईवे में 22 और अन्य मार्गों में 13 ब्लैक स्पॉट चिन्हांकित किया गया है। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा राजनांदगांव में 15 और रायपुर में 9 जगहों के अलावा मुंगेली जिले में बड़ी संख्या में स्पॉट का चिह्नांकन किया गया है।





साल दर साल बढ़ रहा आंकड़ा





बीते तीन साल के सड़क हादसों के रिपोर्ट के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने रिपोर्ट तैयार की हैं। वहीं साल 2016 से अगस्त 2020 तक के मौतों के आंकड़ों को देखा जाए तो हर साल सड़क हादसों होने वाले मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा हैं।





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बता दें कि कोरोना के मद्देनजर किए गए लॉकडाउन में सड़क हादसों की संख्या में कमी आई थी, लेकिन अनलॉक के बाद प्रदेश में सड़क हादसों की संख्या में लगातार तेजी आई है। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में बीते साल के मुकाबले सबसे ज्यादा 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी सितंबर में हुई है।









हेलमेट नहीं पहनने की वजह हो रही सबसे ज्यादा मौतें





सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सड़क हादसों में हर 100 में से 95 लोगों की मौत हेलमेट नहीं पहनने की वजह से हुई है। पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए सभी जिलों में अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इन साल दस महीनों में सड़क हादसों के आंकड़ों में कमी आई थी , लेकिन लॉकडाउन खत्म होने के बाद जैसे-जैसे आवाजाही बढ़ी वैसे-वैसे हादसों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।





इन जिलों में आई मृत्यु दर में कमी

आंकड़ों के मुताबिक रायपुर, गरियाबंद, मुंगेली, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर में हादसों में मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है,जबकि बाकी जिलों में मृत्यु दर में कमी आई है। प्रदेशभर के सड़क हादसों के रिपोर्ट के मुताबिक 67% दोपहिया वाहन सवारों की मौत हुई है।





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दोपहिया वाहन सवार 2359 लोग हादसे के शिकार हुए, जिनमें 2361 की मौत हो गई। इनमें से 2257 की मौत हेलमेट नहीं पहनने से हुई है। इस साल दस महीने में 9097 सड़क हादसे हुए हैं । इसमें 3543 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा 8388 लोग घायल हुए हैं।





छत्तीसगढ़ पुलिस का दावा





छत्तीसगढ़ पुलिस का दावा है कि पिछले साल के मुकाबले हादसों में 22 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं मृतकों और घायलों की संख्या भी पिछले साल के मुकाबले कम है। केंद्रीय सड़क परिवाहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक ज्यादातर सड़क हादसा फ्लाईओवर के आस-पास होता हैं ।





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बता दें कि 40 प्रतिशत सड़क दुर्घटना फ्लाई ओवर के आस-पास होता हैं। इसके बाद सबसे ज्यादा हादसा क्रॉसिंग पर होता है, आंकड़ों के मुताबिक क्रॉसिंग पर होने वाले सड़क हादसों का प्रतिशत 30 है। इनमें सबसे ज्यादा हादसों के शिकार बाइक सवार और पैदल यात्री होते है। वहीं हादसों के शिकार होने वाले लोगों में ज्यादातर लोग युवा हैं।


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