Media24Media.com: गांधी जयंती

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छत्तीसगढ़ को स्वच्छ सर्वेक्षण-ग्रामीण में भी चार राष्ट्रीय पुरस्कार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ ने स्वच्छ सर्वेक्षण-ग्रामीण में भी चार राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किए हैं। टॉप परफॉर्मिंग राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ ने ईस्ट जोन में बाजी मारी है। इसके साथ तीन अन्य कैटेगिरी में उसे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। गांधी जयंती पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित स्वच्छ भारत दिवसकार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छत्तीसगढ़ को पुरस्कृत किया।



केन्द्रीय पेयजल और स्वच्छता विभाग, जलशक्ति मंत्रालय द्वारा स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों में दुर्ग और बालोद ने दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया है। साथ ही ओडीएफ प्लस पर दीवार लेखन प्रतियोगिता में सेंट्रल जोन में छत्तीसगढ़ को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ‘गांधी, युवा और नये भारत की चुनौतियां’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गांधी जयंती के अवसर पर आज शहीद स्मारक भवन में गांधी, युवा और नये भारत की चुनौतियांविषय पर संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने वाटर रिचार्जिंग के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले व्यक्ति और संस्था को अनुपम मिश्र पुरस्कारदेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीरके नाम पर भी पुरुस्कार दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और छत्तीसगढ़ महतारी के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर आशीष सिंह द्वारा लिखित पुस्तक सोनाखान 1857‘ और आमिर हाशमी द्वारा लिखित पुस्तक जोहार गांधीका विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, विधायक देवेन्द्र यादव, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के सचिव अन्बलगन पी, संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य सहित राजीव युवा मितान क्लब के लगभग साढ़े तीन हजार युवा सदस्य भी मौजूद थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री जी को याद करने का दिन है। महात्मा गांधी ने अपने जीवनकाल में जिन चीजों का प्रयोग किया गया, वह सभी वर्धा में स्थित मगन संग्रहालय में रखा गया है। उन्होंने चरखा, कृषि औजारों पर लगातार शोध करवाया। कार्यों को और उत्कृष्ट ढंग से करने के लिए प्रोत्साहन पूर्ण आयोजन उस समय गांधी जी ने करवाए। पूरी दुनिया में जितनी भी क्रांति हुई है, वह युवाओं से हुई है, अन्याय के विरुद्ध प्रतिशोध की भावना जागृत हुई, परिवर्तन की अलख जगी। गांधी जी ने स्वावलंबन, प्रेम, सत्य, अहिंसा का रास्ता दिखाया और आजादी दिलाई।

बघेल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि गांधी जी ने वस्त्र इसलिए त्यागे क्योंकि उन्होंने हिन्दुस्तान की न्यूनतम आवश्यकताओं की परम्परा का निर्वहन किया। अगर आगे बढ़ना है तो हमें भी न्यूनतम आवश्यकताएं रखनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से कहा कि अपना समय और ऊर्जा नये विचारों और कामों के लिए खर्च करें। गांधी जी चाहते थे युवा आत्मनिर्भर बनें, स्वावलंबी बनें, आगे बढ़ें, इन्हीं विचारों को लेकर गांधी जी भी आगे बढ़े।

उन्होंने कहा कि गांधी ने अहिंसा, सत्य और प्रेम से लड़ाई लड़ी। मेहनत और समर्पण से स्व-रोजगार गढ़कर स्वावलंबी बनना गांधी जी का रास्ता है। उन्होंने जरूरतमंद और पीड़ित मानवता की सेवा का रास्ता दिखाया। जीवन का अनुभव पुस्तक के ज्ञान पर भी भारी पड़ता। बघेल ने भेंट-मुलाकात के दौरान मिले बालोद के युवा किसान दिव्यांग धुर्वे का उदाहरण देकर युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया और कहा कि मेहनत ही गांधी जी का बताया रास्ता है। उन्होंने कहा कि मेहनतकश स्व-सहायता समूहों की बहनों के चेहरे पर जो आत्मविश्वास का भाव है

वह हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। मेहनत से आत्मविश्वास आता है, जिससे बड़ी से बड़ी लड़ाई जीती जा सकती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आगे कहा कि गांधी जी ने कर्म और श्रम का सम्मान किया। वे किसानों के बीच जाकर खेतों में काम करते थे, चरखा चलाकर उन्होंने बुनकर का सम्मान किया। इसी तरह गांधी जी ने मेहनत और श्रम का सम्मान किया। श्रम के सम्मान से लाखों-करोड़ों लोग जुड़े और एकजुट होकर खड़े हुए, जिन्हें हराना मुश्किल था। 

हमें सामाजिक और आर्थिक रूप से आजादी प्राप्त करना अभी बाकी हैं। युवा हमारी ताकत हैं, युवा ऊर्जा को दिशा देने की जरूरत है। उन्हें अवसर देने के लिए सामूहिक और संगठित होकर प्रयास करने की जरूरत है। बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने स्वावलंबन और स्वरोजगार की दिशा में अपने कदम बढ़ाए हैं। राज्य सरकार ने गोबर, गोमूत्र की खरीदी शुरू की है, अब तक 20 लाख क्विंटल वर्मी कंपोस्ट हम बना चुके हैं। पूरे देश में सबसे ज्यादा 8,500 खाद बनाने की फैक्टरी हमारे यहां हैं।

इससे हमारा प्रदेश जैविक राज्य की ओर बढ़ रहा है। नौजवान जैविक कृषि से जुड़कर लाखों रुपए की आमदनी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी कई काम हो रहे है। हमने वाटर रिचर्जिंग करना शुरु किया। हमने पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से बचने के लिए किसानो से पैरा दान की अपील की। इससे जल, जंगल, जमीन की उपयोगिता बढ़ी है।

प्रदीप शर्मा ने कहा कि युवा रहते हुए गांधी ने पूरे देश को सत्य और अहिंसा के एक मंत्र से बांध दिया था। युवा राजीव गांधी ने देश को इंफॉरमेशन टेक्नॉलोजी के क्षेत्र में अग्रणी बनाया। मुख्यमंत्री श्री बघेल इसी संकल्प को आगे बढ़ा रहे है। 22 साल के युवा छत्तीसगढ़ को आगे बढ़ाने के लिए नयी पीढ़ी संकल्पित होकर आगे बढ़ें। नई दिल्ली के डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के अध्यक्ष अशोक खोसला ने कहा कि हम युवाओं के लिए कैसा भविष्य बना सकते हैं, यह गांधी हमें बताते हैं,

उनके विचारों पर अमल करके हम स्वावलंबी और एक आदर्श समाज की स्थापना कर सकते हैं। राजीव गांधी फाउंडेशन दिल्ली के निदेशक डॉ. विजय महाजन ने युवाओं को स्पोर्ट्स, स्वरोजगार, सद्भावना और संस्कृति के पुर्नउत्थान के लिए प्रेरित करते हुए जल, जंगल जमीन और संसाधनों को सहेजने की दिशा में क्रियान्वित योजनाओं के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की प्रशंसा की। कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल अरुण साहनी, सुश्री आईका चतुर्वेदी और डॉ. विभा गुप्ता ने भी अपनी बात रखी।

सीधा सादा वेश था उनका ना कोई अभिमान, खादी की एक धोती पहनें बापू की थी शान

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हर साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाई जाती है। इस साल उनकी 152 वीं जयंती मनाई जाएगी। इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। गांधी जी के जन्मदिवस को राष्ट्रीय पर्व की तरह मानते हुए इस दिवस पर विद्यालयों और सरकारी कार्यालयों में अवकाश  रहता है। गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उन्हें राष्ट्र पिता और बापू के नाम से भी संबोधित किया जाता है। 


उन्होंने कई आंदोलन, सत्याग्रह आंदोलन,  दांडी मार्च यात्रा,  दलित आंदोलन,  भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व किया। गांधी जी हमेशा सत्य और अहिंसा की राह पर राष्ट्र को आजादी दिलाने में अहम योगदान दिया। गांधी जी पहली बार 20 दिसंबर 1920 को मौलाना शौकत अली के साथ छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए थे। उस समय धमतरी जिले में कंडेल नहर सत्याग्रह का आंदोलन चल रहा था, जिसका का नेतृत्व पंडित सुंदरलाल शर्मा कर रहे थे। यह आंदोलन धमतरी में नहर के पानी का उपयोग करने के लिए जुर्माना लगाए जाने पर शुरू हुआ था। 

अछूतोद्धार कार्यक्रम के लिए गांधी जी का दूसरा प्रवास

21 दिसंबर को धमतरी में जनसभा को संबोधित किया। रायपुर में ब्राह्मण पारा में आनंद समाज वाचनालय में महिलाओं को संबोधित किया। नवंबर 1933 में मीरा बेन, ठक्कर बाबा, महादेव देसाई के साथ अछूतोद्धार कार्यक्रम के लिए गांधी जी का द्वितीय प्रवास रहा, लेकिन इस कार्यक्रम के पूर्व ही पंडित सुंदरलाल शर्मा के द्वारा मंदिर में प्रवेश कराकर इसकी शुरुआत कर चुके थे। गांधी जी ने पंडित सूंदर लाल शर्मा को इस कार्य के लिए अपना अग्रणी कहा था। 

गांधी मीमांशा नामक पुस्तक की रचना 

छत्तीसगढ़ के रामदयाल तिवारी ने महात्मा गांधी जी के इस यात्रा से प्रभावित होकर गांधी मीमांशा नामक पुस्तक की रचना की। गांधी जी ने अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया, जो आज के आधुनिक युग में भी लोगों को प्रभावित करता है। भारतीय स्वतंत्रता के लिए किए गए अहिंसा आंदोलन से आज भी देश के राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ देशी और विदेशी युवा नेता भी प्रभावित होते हैं। इन्होंने स्वराज्य प्राप्ति, समाज से अस्पृश्यता को हटाने, सामाजिक बुराईयों को मिटाने,  किसानों के आर्थिक स्थिति को सुधारने में और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र महान कार्य किए हैं।

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