Media24Media.com: कृषि कानून

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मोदी के कृषि कानून एवं महंगाई के विरोध में जिला कांग्रेस ने निकाली पदयात्रा

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देश भर में चल रहे तीन कृषि कानून एवं महंगाई की विरोध की आग बढ़ते जा रही है। प्रदेश कांग्र्रेस पार्टी के निर्देश पर अब जिला स्तरों में भी विरोध जोरों शोरों पर जारी है। केन्द्र द्वारा पारित तीनों कृषि कानूनों के विरोध में आज महासमुन्द जिला कांग्रेस कमेटी ने ग्राम बेलसोंडा से जिला कार्यालय महासमुन्द तक 8 कि.मी. की पदयात्रा निकाली।





तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए राष्ट्रपति के नाम जिलाधीश को ज्ञापन सौपा गया पदयात्रा के पश्चात प्रेस क्लब में विधायकगणों के साथ जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष डाॅ. रश्मि चन्द्राकर के द्वारा तीनों कृषि कानूनों को काला कानून बताते हुए दिल्ली में देश के विभिन्न प्रांतों के किसानों के द्वारा किये जा रहे आंदोलन को सही ठहराते हुए कहा कि राजग मोर्चा की मोदी नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने तीन काले कृषि कानून लाकर देश के किसानों के हित के साथ कुठाराघात किया है, इन कानूनों से केवल देश का किसान ही नही वरन् आने वाली कृषि पीढी व इससे जुड़े संबंधित सभी व्यवसाय व आम जनता बूरी तरह से प्रभावित होगी एवं उनका जीवन कष्टमय हो जायेगा।









गिनवाया कानून में खामियां
तीनों कृषि कानूनों से संबंधित खामियों को गिनाते हुये विधायकगण एवं जिलाध्यक्ष ने बताया कि हिन्दूस्तान का सबसे बड़ा व्यवसाय सेक्टर कृषि क्षेत्र है जहां पर 40ः से भी ज्यादा इससे जुड़कर कृषि कार्य एवं अन्य रोजगार के अवसर उपलब्ध होते है लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार किसानों के हाथो से उनकी जमीन एवं उपज छिनकर देश के बडे-बडे उद्योगपतियों एवं बड़े व्यापारियों के हाथो में यह व्यवसाय को सौपना चाहती है जो कि पूर्णतः गलत है।





असिमित भण्डारण से मांग और पूर्ति बड़े उद्योगपति एवं बड़े व्यापारियों की इच्छा पर संचालित होगी जिस समय किसानों की फसल पककर तैयार होने को होगी तभी गोदाम का मुंह खोलकर बाजारों को अनाज से भर दिया जायेगा जिससे किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पायेगा एवं कौडियों के दाम से किसानों की फसल ली जायेगी और फिर पुनः अनाज की कमी दिखाकर मनमाने रेट पर अनाज को बेचा जायेगा इसका प्रत्यक्ष प्रमाण अटल जी की सरकार में हम सभी ने प्याज के दामों में बेतहाशा वृद्धि के साथ देखा है, कि किसानों से कम दर 10रु. से 20 रु. किलो पर प्याज को खरीदीकर गोदामों में भर दिया गया एवं बाद में प्याज की कमी बताकर 125 रु से 150 रु. किलो तक प्याज बाजार में बेचा गया।





दूर्भाग्य की बात यह है कि इस कानून में कहा गया है कि किसान अपनी शिकायत को लेकर एस.डी.एम. को शिकायत कर सकता है लेकिन वो अन्य जगह शिकायत नहीं कर सकता इन परिस्थितियों में यह सोचने और समझने वाली बात है कि ऐसी बाध्यता क्यो? एक गरीब किसान कब तक अपनी लड़ाई लडेगा, वह अपनी शिकायत की फरियाद को लेकर दर-दर भटकने के लिए मजबूर हो जायेगा।





कृषि कानून वापसी के साथ देश में जो महंगाई बढ़ रही है उसका भी हम विरोध करते है बढ़ते हुये गैस सिलेण्डर के दाम, बढ़ते हुए पेट्रोल एवं डीजल के भाव से देश के प्रत्येक नागरिक का बजट बिगड़ गया है। आवश्यक वस्तुओं का दाम आसमान छू रहा है जिससे लोगों की जिन्दगी बदहाल हो रही है। अतः हम मांग करते है कि किसान विरोधी तीनों बिल के साथ महंगाई पर अंकुश लगाया जावें। अंत में हम और हमारी कांग्रेस पार्टी देशहित में किसान हित में मजदूर हित में छोटे व्यापारियों के हित में एवं देश के करोड़ो-करोड़ो आम नागरिकों के हित में तीनों कृषि कानून को वापसी की मांग करते है।


सरकार कृषि कानून स्थगित करने पर हुई राजी

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दिल्ली की सीमाओं पर तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ बीते 55 दिनों से जारी आंदोलन के बीच आज (बुधवार) किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच 10वें दौर की बातचीत एक बार फिर बेनतीजा ही खत्म हो गई। बैठक के दौरान सरकार ने सहमित बनने तक कृषि कानूनों को स्थगित करने का प्रस्ताव (Proposal to Defer Agricultural Law) दिया है। सरकार के प्रस्ताव को लेकर किसान नेताओं ने विज्ञान भवन में अलग से बैठक की। कुछ देर बैठक करने के बाद किसान नेताओं ने तय किया कि वे गुरुवार को अन्य किसानों से बातचीत करने के बाद फैसला लेंगे।





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वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बैठक में कहा कि आज प्रकाश पर्व का शुभ दिन है। हमें इस मुद्दे पर मिलकर कोई बीच का रास्ता निकालना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आखिर कब तक किसान इस आंदोलन के कारण सड़कों पर बैठे रहेंगे। इसके लिए हम सभी को मिलकर समाधान निकालना पड़ेगा।





कानून लागू नहीं करेंगे : नरेंद्र सिंह तोमर(Proposal to Defer Agricultural Law)





कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि हम तीनों कानूनों पर आपके (किसान नेताओं) साथ बिंदुवार चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार किसी भी कीमत पर कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार और किसान संगठनों के नेताओं की एक कमेटी बना देते हैं, जब तक बीच का रास्ता नहीं निकलेगा तब तक हम कानून को लागू नहीं करेंगे। सरकार ये एफिडेविट सुप्रीम कोर्ट में भी देने को तैयार हैं। 


केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस की ट्रैक्टर रैली आज

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कांग्रेस केंद्र सरकार के खिलाफ 15 जनवरी यानि आज राजधानी रायपुर में बड़ा विरोध प्रदर्शन करने जा रही है। कांग्रेस केंद्र सरकार के लाए गए तीन कृषि कानून (Agricultural Law) को वापस लेने सहित पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी की मांग को लेकर ट्रैक्टर रैली (Congress tractor Rally) निकालकर प्रदर्शन करेगी।






इस प्रदर्शन में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम सहित पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। इस रैली में हजारों की संख्या में ट्रैक्टर शामिल होने की संभावना है।





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कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता विकास तिवारी ने बताया कि 15 जनवरी को एक ट्रेक्टर रैली कांग्रेस प्रदेश कार्यालय राजीव भवन से राजभवन तक निकली जाएगी। जहां कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगा।





किसान महासंघ ने जलाई थी प्रतियां (Congress tractor Rally)





छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले रायपुर में लंबे समय से केंद्र के इस कानून को लेकर धरना प्रदर्शन चल रहा है। लगातार किसान संगठनों के पदाधिकारी और किसान धरना देकर क्रमिक भूख हड़ताल कर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों ने आज कृषि कानून की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया है।


सरकार के दबाव में आकर सुप्रीम कोर्ट सुना रहा फैसला!

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कृषि कानून (Agricultural Law News) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप करने वाले फैसले को लेकर किसान संगठनों में जमकर नाराजगी है। छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले रायपुर में लंबे समय से केंद्र के इस कानून को लेकर धरना प्रदर्शन चल रहा है। लगातार किसान संगठनों के पदाधिकारी और किसान धरना देकर क्रमिक भूख हड़ताल कर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों ने आज कृषि कानून (Agricultural Law News)की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया है।





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छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के कई सदस्य दिल्ली में भी आंदोलन में शामिल हुए हैं। ऐसे में आंदोलन को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाए जा रहे कमेटी को लेकर भी किसानों ने नाराजगी जताई है।






कमेटी को लेकर विश्वसनीयता नहीं (Agricultural Law News)





छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संचालक मंडल सदस्य डॉ संकेत ठाकुर ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी है सुप्रीम कोर्ट भी उनके ही दबाव में आकर यह फैसला सुना रहा है। ऐसे में आने वाले समय में भी बनाई जा रही कमेटी को लेकर किसी तरह की कोई विश्वसनीयता नजर नहीं आ रही है। आने वाले समय में किसान लगातार इसे लेकर आंदोलन करेंगे। जब तक सरकार कृषि कानून को वापस नहीं लेती आंदोलन जारी रहेगा।


सुप्रीम कोर्ट ने 3 कृषि कानूनों को लागू करने पर लगा दी रोक

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सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों (agricultural laws News) को लागू करने पर रोक लगा दी है। उच्चतम न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा "कोई ताकत उसे नए कृषि कानूनों (agricultural laws News) पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करने से नहीं रोक सकती और उसे समस्या का समाधान करने के लिए कानून को निलंबित करने का अधिकार है।"





साथ ही कृषि कानूनों की जांच के लिए एक समिति के गठन की बात कही है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे ने कहा, “हम कानून को निलंबित करने के लिए तैयार हैं लेकिन अनिश्चित काल के लिए नहीं।”





चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे ने कहा(agricultural laws News)





“हम एक समिति बना रहे हैं ताकि हमारे पास एक स्पष्ट तस्वीर हो। हम यह तर्क नहीं सुनना चाहते कि किसान समिति में नहीं जाएंगे। हम समस्या को हल करने के लिए देख रहे हैं। अगर आप (किसान) अनिश्चितकालीन आंदोलन करना चाहते हैं, तो आप ऐसा कर सकते हैं।” जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यन के साथ ही चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने ये फैसला सुनाया है।





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सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा “हम कानूनों की वैधता के बारे में चिंतित हैं और विरोध से प्रभावित नागरिकों की जीवन और संपत्ति की रक्षा के बारे में भी। हम अपने पास मौजूद शक्तियों के अनुसार समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे पास शक्तियों में से एक है कि हम कानून को निलंबित करें और एक समिति बनाएं।





किसानों की तरफ से बहस करने वाले चारो वकील गैर हाजिर





किसानों की तरफ से सोमवार को सुनवाई में हाजिर हुए चारो वकील आज गैर हाजिर हैं. इपर चीफ जस्टिस ने कहा, “चारों वकील कहां हैं, जो कल तमाम किसान संगठनों कि ओर से पेश हुए थे”





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कानून का समर्थन कर रहे वकील साल्वे ने कहा कि यह चिंता कि विषय कि है कि 400 किसान संगठन की ओर से पेश हुए 4 वरिष्ठ वकील आज सुनवाई में नहीं आए। दुष्यंत दवे, एच एस फुल्का, प्रशांत भूषण और कॉलिन गोंसॉलविस आज मौजूद नहीं हैं।


किसान आंदोलन और कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई

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प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के साथ सरकार की बातचीत में गतिरोध बरकरार है, इस बीच उच्चतम न्यायालय नए कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं और दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसानों के प्रदर्शन (farmer's protest news) से जुड़ी याचिकाओं पर आज सुनवाई करेगा।





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केंद्र और किसान संगठनों के बीच 7 जनवरी को हुई आठवें दौर की बाचतीच में भी कोई समाधान निकलता नजर नहीं आया, क्योंकि केंद्र ने विवादास्पद कानून निरस्त करने से इनकार कर दिया. जबकि किसान नेताओं ने कहा कि वे अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं और उनकी 'घर वापसी' सिर्फ 'कानून वापसी' के बाद होगी।





सुनवाई महत्वपूर्ण (farmer's protest news)





प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा आज की जाने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र और किसान नेताओं के बीच 15 जनवरी को अगली बैठक निर्धारित है। शीर्ष न्यायालय को केंद्र सरकार ने पिछली तारीख पर बताया था कि उसके और किसान संगठनों के बीच सभी मुद्दों पर 'स्वस्थ चर्चा' जारी है और इस बात की संभावना है कि दोनों पक्ष निकट भविष्य में किसी समाधान (farmer's protest news)पर पहुंच जाएं।





पिछली सुनवाई की गई थी स्थगित





अदालत ने तब सरकार को भरोसा दिया था कि अगर वह उससे कहेगी कि बातचीत के जरिये समाधान संभव है तो वह 11 जनवरी को सुनवाई नहीं करेगी। अदालत ने कहा था कि हम स्थिति को समझते हैं और चर्चा को बढ़ावा देते हैं। हम सोमवार (11 जनवरी) को मामला स्थगित कर सकते हैं अगर आप जारी वार्ता प्रक्रिया की वजह से ऐसा अनुरोध करेंगे तो।





आठवें दौर की बातचीत में नहीं निकला हल





आठवें दौर की बातचीत के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका क्योंकि किसान नेताओं ने कानून को निरस्त करने की अपनी मांग का कोई विकल्प नहीं सुझाया। किसानों की एक संस्था ‘कंसोर्टियम ऑफ इंडियन फार्मर्स असोसिएशन’ (सीआईएफए) ने तीनों कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया और मामले में पक्षकार बनाए जाने का अनुरोध किया।





उसने कहा कि कानून किसानों के लिए 'फायदेमंद' हैं और इनसे कृषि में विकास और वृद्धि आएगी। उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले तीनों विवादित कृषि कानूनों को लेकर दायर कई याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर उससे जवाब मांगा था।


किसानों को दिग्भ्रमित कर रही कांग्रेस : भाजपा

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महासमुन्द। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा किसानों के हित में किसानों की आय दोगुना करने, किसानों को संबल बनाने के लिए लाये गए किसान सुधार बिल के समर्थन में भाजपा मंडल सराईपाली के जोगनीपाली , कनकेबा, केजुवां व सराईपाली सोसायटी में जनसंपर्क कर किसानों को किसान सुधार बिल के लाभ के बारे में बताया गया । किसानों को विरोधियों और विपक्षियों द्वारा भ्रमित किया जा रहा है। फैलाए जा रहे कथित झूठ का भाजपा भंडाफोड़ कर रही है। विपक्ष किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर चला रही है। दिल्ली के आसपास जमा हुए किसानों को साजिश के तहत गुमराह किया जा रहा है। उन्हें मोदी के खिलाफ भड़काया जा रहा है। सत्ता में रहते हुए जो लोग किसानों का भला नही कर सके, वे अब किसानों को गुमराह कर लाभ उठाने से रोकने के लिए भ्रमित कर रहे हैं।





किसान आंदोलन को दे रहे हवा






किसान आंदोलन का समर्थन कर रही विपक्षी पार्टियां जब केंद्र में सत्ता में थी तो कृषि क्षेत्र में इसी तरह के सुधारों का समर्थन करती थी।और 2014 और 2018 के लोकसभा चुनाव के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल भी की थी।परंतु अब इस बात से मुकर रही है। अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने और अपनी खोई हुई जमीन वापसी के लिए किसान बिल का विरोध किसानों से करवा रही है।





कांग्रेस की दोहरी नीति






कांग्रेस हमेशा से ही दोहरे चाल और चरित्र करती आई है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल किसानों को भ्रमित करने की साजिश चल रही है। उन्हें डराया जा रहा है कि नए कृषि बिल से किसानों की जमीन पर दूसरे कब्जा कर लेंगे। मंडी बंद हो जाएगी, समर्थन मूल्य खत्म हो जायेगा। अनेक तरह की भ्रम फैलाई जा रही है जबकि नए किसान बिल में साफ- साफ अंकित किया गया है और देश के प्रधानमंत्री ने भी इस बात को स्पष्ट किया है कि मंडी बंद नही होगी। पहले की तरह समर्थन मूल्य में खरीदी होती रहेगी। समर्थन मूल्य खत्म नही होगा हमेशा की तरह लागू रहेगी। इस बिल में यह भी बताया गया है कि किसान अपनी उपज को सोसायटी, मंडी के अलावा जहां जिस क्षेत्र में ज्यादा दाम मिलता है बिना रोक टोक के, बिना परिवहन शुल्क के किसान कहीं भी बेचने के लिए स्वतंत्र है। किसानों को लगने वाले मंडी शुल्क, कमीशन और अन्य शुल्क से राहत मिलेगी जिससे किसान भाइयों को ज्यादा आमदनी होगी।





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किसान के हित में है बिल





किसानों के मुनाफ़े को बीच में जो बिचौलिए खा जाते थे। उन्हें अब बिचौलियों से भी राहत मिलेगी। इस तरह से प्रधानमंत्री द्वारा लाये गए किसान बिल किसान के हित में है। किसानों की आय को बढ़ाने वाली है। किसान को संबल प्रदान करने वाली है। जबकि अनेक लोक लुभावने घोषणा कर सत्ता में आई छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार 2500 रुपये क्विंटल देने का वादा कर सत्ता में आई। और सत्ता में आने के बाद जिस तरह से किसानों के साथ छल कर रही है। वह किसी से छुपा नहीं है।पिछले वर्ष का 2500 का बकाया राशि, धान खरीदी में एक माह की देरी, बारदाना की कमी, दो साल का बोनस, नकली खाद, नकली दवाई जैसे अनेक तरह से किसानों को परेशान किया जा रहा है। जिससे किसान आत्महत्या करने मजबूर हो रहे हैं। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती सरला कोसरिया, पूर्व विधायक द्वय त्रिलोचन पटेल, रामलाल चौहान, मंडल अध्यक्ष धनेश नायक, जिला उपाध्यक्ष विपिन उपावेजा, मंडल महामंत्री घासीराम अग्रवाल आदि भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।






किसानों की आड़ में सेंक रहे राजनीतिक रोटी- मूणत

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महासमुन्द। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राजेश मूणत (Rajesh Munat on Farmer bill) ने आज महासमुन्द भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हित में निरंतर कार्य कर रही है। किसानों की समृद्धि के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम को किसान विरोधी पचा नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि संशोधन बिल (Agriculture reforms 2020) का मूल उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना है।भाजपा हमेशा किसानों के हित में काम कर रही है। सरकार की नीयत पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। किसानों की आड़ में कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास कर रहे हैं।





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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य का ढांचा इस बिल से प्रभावित नहीं होने वाला है। उन्होंने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिस कृषि सुधार बिल को वे चुनावी घोषणा पत्र बनाते हैं। उसी बिल के संसद में पारित होने पर बखेड़ा खड़ा कर किसानों को उकसाने का काम करते हैं। इससे कांग्रेस की दोगली नीति उजागर हो रही है।





प्रदेश में बीजेपी कर रही प्रेस कॉन्फ्रेंस





उन्होंने हर समस्या का समाधान संवाद से होने की बात कहते हुए कहा कि सरकार किसानों से बातचीत करने तत्पर है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल द्वारा फैलाई जा रही भ्रम और गलतफहमी से बचने की जरूरत है। गलतफहमी दूर करने के लिए देशभर के चुनिंदा 700 स्थानों पर भाजपा नेता प्रेसवार्ता कर मीडिया के माध्यम से जन-जन को वस्तुस्थिति से अवगत कराने का प्रयास कर रहे हैं।





किसानों के हित में कृषि बिल






एक सवाल के जवाब में मूणत (Rajesh Munat on Farmer bill) ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर किसानों को भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। तीन कृषि बिल किसानों के हित में है। यह किसानों के हित में है। किसानों की आमदनी बढ़ाने केंद्र सरकार प्रतिबद्घ है। स्वतंत्र किसान-समृद्ध किसान के मूलमंत्र को भाजपा साकार कर रही है। संसद में पास हुए कृषि विधेयकों से 70 साल बाद देश के अन्न दाताओं को बिचौलियों के चंगुल से मुक्ति मिलेगी।





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प्रेसवार्ता में महासमुन्द सांसद चुन्नीलाल साहू, नपाध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर, भाजपा जिलाध्यक्ष रूपकुमारी चौधरी, पूर्व विधायकगण पूनम चंद्राकर, डॉ विमल चोपड़ा, परेश बागबाहरा, सरला कोसरिया, इंद्रजीत सिंह गोल्डी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।


कृषि कानून पर सरकार ने रखा पक्ष, जानिए 10 अहम बातें

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कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली में किसानों का आंदोलन जारी है। 14 दिन से आंदोलनरत किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग पर अड़े हैं। सरकार और किसान संगठनों के बीच हुई पांच दौर की बैठक बेनतीजा रही। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद भी सरकार किसानों को मना पाने में असमर्थ रही। इसे लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस की।





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कृषि मंत्री ने बतायी 10 अहम बातें-





  • कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इस कानून में ऐसे प्रावधान हैं कि बिना जोखिम उठाए पैसे मिलें। किसान की जमीन को पूरी तरह से सुरक्षित रखने का प्रबंध किया गया है। अगर विवाद होता है तो एसडीएम 30 दिन के भीतर उसका निराकरण करेगा।
  • पहले यूरिया की काफी किल्लत होती थी। जब किसानों को जरूरत होती थी तो मुख्यमंत्री दिल्ली आ जाते थे। कई बार यूरिया लूटने की घटनाएं भी हुईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरिया की पूर्ति नियमित की। 
  • कृषि कानूनों पर कांट्रैक्ट फार्मिंग को लेकर किसानों में डर है। कृषि मंत्री ने कहा कि समझौता किसान की फसल का होगा। किसान की जमीन, पट्टा या लीज पर नहीं ली जा सकेगी। फसल तैयार करने के दौरान कोई खेत पर कोई ढांचा बनाने की जरूरत पड़ी तो बाद में ये ढांचा हटाना पड़ेगा। पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात में कांट्रैक्ट फार्मिंग पहले से ही हो रही है। 
  • कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि हम बार-बार एमएसपी के बारे में किसानों को आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन अब भी किसानों को कोई शंका है तो मोदी सरकार एमएसपी पर लिखकर देने को तैयार है।
    किसानों को डर है कि इन कानूनों से एपीएमसी की मंडियां खत्म हो जाएंगी। किसान प्राइवेट मंडी के चंगुल में फंस जाएगा। राज्य सरकार प्राइवेट मंडियों का पंजीकरण कर सकें ऐसी व्यवस्था की जाएगी।
  • कृषि कानून में प्रावधान है कि पैन कार्ड से व्यापारी खरीदारी कर सकता है, लेकिन किसानों को लगता था कि कोई भी पैन कार्ड के जरिए खरीदकर भाग जाएगा। इस आशंका के समाधान के लिए राज्य सरकार को शक्ति दी जाएगी कि वह इस प्रकार की परिस्थिति में कोई भी नियम बना सकती है। 
  • कृषि मंत्री ने कहा कि स्वामीनाथन आयोग ने 2006 में एमएसपी को डेढ़ गुना करने की बात कही थी, हमने उसे भी पूरा करने की कोशिश की। अधिक उम्र के किसानों के लिए भी केंद्र सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं। किसानों की सामाजिक सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। नया कानून नए मौके और नई टेक्नोलॉजी लेकर आएगा। 
  • तोमर ने कहा कि जब तक कृषि और कृषक और गांव दोनों आत्मनिर्भर नहीं होंगे तब तक कृषि क्षेत्र का उत्थान नहीं हो सकता। फसलों की खरीदी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हुई। हमारी कोशिश है कि ऐसी संरचनाओं का निर्माण किया जाए जिससे किसानों को फायदा हो। हर्बल पार्क, मधुमक्खी पालन के लिए लोन उपलब्ध कराया जाए। 
  • कृषि मंत्री ने कहा कि उपज बेचने के बाद किसान को उसकी कीमत मिलने का प्रावधान हो जाएगा, लेकिन इस कानून में यह प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। हमें लगता है कि लोग इसका फायदा उठाएंगे, किसान महंगी फसलों की ओर आकर्षित होंगे, बुवाई के समय उसे मूल्य की गारंटी मिल जाएगी। किसान की भूमि को पूरी सुरक्षा देने का प्रबंध किया गया है।  
  • आरोप लग रहे थे कि कृषि कानून अवैध हैं क्योंकि कृषि राज्य का विषय है और केंद्र सरकार ये नियम नहीं बना सकती है। इस बारे में तोमर ने स्पष्ट किया कि केंद्र के पास व्यापार पर कानून बनाने का अधिकार है।





पंजाब के पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल ने पद्म विभूषण लौटाया

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नई दिल्ली : किसान आंदोलन (Peasant movement) के समर्थन में और कृषि कानून के विरोध में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल (Parkash Singh Badal returned padma vibhushan) ने अपना पद्म विभूषण सम्मान लौटाया है।





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पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल (Prakash Singh Badal) ने यह सम्मान लौट आते हुए कहा कि “वह किसानों के साथ किए जा रहे केंद्र सरकार के व्यवहार से बेहद आहत है। किसानों के समर्थन सहित कृषि कानून के विरोध में उन्होंने अपना यह सम्मान केंद्र सरकार को वापस लौटाने का फैसला किया है।





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बादल (Prakash Singh Badal) ने अपना सम्मान लौटाने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को 3 पन्नों की चिट्ठी लिखी है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि “मैं इतना गरीब हूं कि किसानों के लिए कुर्बान करने के लिए मेरे पास कुछ और नहीं। मैं जो भी हूं, किसानों की वजह से हूं, ऐसे में अगर किसानों का अपमान हो रहा है तो किसी तरह का सम्मान मेरे द्वारा रखने का कोई फायदा नहीं है।”





Prakash Singh Badal बोले किसानों से किया धोखा





पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल (Parkash Singh Badal returned padma vibhushan) ने अपने पत्र में आगे लिखा कि किसानों के साथ जिस तरह का धोखा किया गया है, मैं उस से आहत हूं। केंद्र सरकार के रवैए पर उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि किसानों के आंदोलन को जिस तरह से गलत नजरिए से पेश किया जा रहा है, वह बेहद दर्दनाक है।





प्रधानमंत्री मोदी और बादल के अच्छे है संबंध





गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल के कद्दावर नेता प्रकाश सिंह बादल आर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे संबंध है। यही वजह है कि अटल बिहार बाजपेयी के समय से भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन भी अब तक ज़ारी रहा।





प्रकाश सिंह के बेटे सुखबीर बादल को पार्टी की कमान देने के बाद से ही वे राजनैतिक गतिविधियों से दूर रहते है, जिसके बाद भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन भी टूटा था। यहां यह बताना भी जरूरी है कि प्रकाश सिंह बादल 5 बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके है।


जिसका हो रहा विरोध, जानिए क्या है वह 'कृषि कानून'

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कृषि कानून ( Indian farm reforms 2020) के खिलाफ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को काफी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ राष्ट्रपति ने सभी कृषि विधेयकों को अपनी मंजूरी दे दी है।  आज देश के कई हिस्सों से इस बिल के विरोध (Farmer Law Protest) में प्रदर्शन हो रहे हैं।





राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह तीनों विधेयक अब एक्ट यानी की कानून बन गए हैं। कृषि विधेयकों के विरोध के बीच राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने तीनों विधेयकों पर हस्ताक्षर किए। विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति से विधेयकों पर हस्ताक्षर न करने की अपील की थी।





दूसरी ओर इन विधेयकों का विरोध राजग के सबसे पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने भी किया है और उसने खुद को राजग से अलग कर लिया।





 जानिए क्या है कृषि कानून (What is Agriculture law)





  • किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020 का उद्देश्य विभिन्न राज्य विधानसभाओं द्वारा गठित कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) द्वारा विनियमित मंडियों के बाहर कृषि उपज की बिक्री की अनुमति देना है।
  • किसानों (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) का मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक का उद्देश्य अनुबंध खेती की इजाजत देना है।
  • आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक अनाज, दालों, आलू, प्याज और खाद्य तिलहन जैसे खाद्य पदार्थों के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण को विनियमित करता है।




विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच राज्यसभा ने दो प्रमुख कृषि विधेयकों को पारित कर दिया था। हंगामे के दौरान विपक्षी सदस्यों ने पीठासीन अधिकारी के आसन की ओर रुख करते हुए उनकी ओर नियम पुस्तिका को उछाला, सरकारी कागजातों को फाड़ डाला और मत विभाजन की अपनी मांग को लेकर उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया था।





इस कानून के फायदे (Benefits of Farmer Laws)





  • सरकार का कहना है कि इस अध्यादेश से किसान अपनी उपज देश में कहीं भी, किसी भी व्यक्ति या संस्था को बेच सकते हैं। कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी मंडियों) के बाहर भी कृषि उत्पाद बेचने और खरीदने की व्यवस्था तैयार करना है। इसके जरिये सरकार एक देश, एक बाजार की बात कर रही है।
  • सरकार किसानों से धान-गेहूं की खरीद पहले की ही तरह करती रहेगी और किसानों को एमएसपी का लाभ पहले की तरह देती रहेगी।
  • मंडियों में व्यापारियों की संख्या कम होती जा रही है, जिससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा नहीं हो पाती, नतीजतन किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। पूर्व के नियम अनुसार किसान अपने उत्पाद बाहर खुले में नहीं बेच सकते थे, ऐसा नहीं कि यह सभी जगह हो लेकिन अधिकतर स्थान पर ऐसा ही है,  इसलिए वे मंडी के व्यापारियों के मोहताज बन जाते थे।अब किसान मंडी के साथ-साथ मंडी से बाहर भी अपनी उपज भेज सकते हैं।




कृषि कानून के नुकसान





  • विपक्ष का कहना है कि इससे मंडी की व्यवस्था ही खत्म हो जाएगी. वे कहते हैं, ‘सरकार के इस फैसले से मंडी व्यवस्था ही खत्म हो जाएगी। इससे किसानों को नुकसान होगा और कॉरपोरेट और बिचौलियों को फायदा होगा।
  • 1950-60 के दशकों में अमेरिका एवं  यूरोप सहित कई देशों में इस प्रकार का कृषि मॉडल लागू किया गया लेकिन वह बुरी तरह असफल साबित हुआ। 70 सालों के बाद अमेरिका और यूरोप में किसानों की हालात बहुत बदतर है। किसानों की आत्महत्या की दर साधारण शहरों में रहने वाले व्यक्ति से 45% अधिक है। इसके अलावा वहां के किसान सरकारों के ऊपर निर्भर रहते हैं।
  • एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट 1955 के हट जाने के बाद अब व्यापारी इन फसलों की  जमाखोरी कर सकेंगे और जब चाहे महंगाई को नियंत्रित कर सकेंगे। एक तरीके से यह पूंजीपतियों के हाथ में अर्थव्यवस्था का नियंत्रित होना है। भारत में 80% से अधिक छोटे और मझोले किसान है, अर्थात इनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है. इससे उनका काफी नुकसान होगा। 

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