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छत्तीसगढ़ फसल बीमा के क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बेहतर एवं सफल क्रियान्वयन के लिए भारत सरकार के कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ को उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने इस सम्मान के लिए कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश भर में अग्रणी राज्यों में शुमार है। 

भारत सरकार के कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग द्वारा आज राजधानी रायपुर में आयोजित 9 वी राष्ट्रीय समीक्षात्मक कार्यशाला भारत सरकार के सचिव मनोज आहूजा ने छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह को उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित करते हुए प्रशस्ति पत्र सौंपा। इस मौके पर कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. अय्याज एफ. तम्बोली, संचालक कृषि श्रीमती रानू साहू, संचालक उद्यानिकी विभाग व्ही. माथेश्वरण, अपर संचालक उद्यानिकी श्री भूपेन्द्र पाण्डेय और संयुक्त संचालक कृषि बी.के मिश्रा भी उनके साथ थे।

राष्ट्रीय समीक्षात्मक कार्यशाला में जानकारी दी गई कि भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल की स्वचलित गणना और  निपटान के लिए डिजीक्लेम मॉड्यूल के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया गया है। साथ ही पोर्टल दर्ज करने और बीमा का लाभ किसानों तक पहुंचाने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के तहत वर्ष 2022-23 में 6 लाख 77 हजार 558 पात्र किसानों को फसल बीमा का लाभ दिलाया गया है। किसानों को बीमा राशि के रूप में 192.41 करोड़ रूपए की राशि दी गई है।

विशेष लेख : मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ के युवा किसान कर रहे हैं खेती में नवाचार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। कुछ समय पहले तक छत्तीसगढ़ के किसान धान की फसल के अलावा दूसरी फसलों के बारे में सोचते भी नहीं थे। लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा किसानों के लिए शुरू की गयी जनहितकारी योजनाओं के चलते किसान अब नवाचार कर रहे हैं। धान के बदले दूसरी फसलें लेने के लिए शासन द्वारा शुरू की गयी योजना का लाभ लेकर किसान छत्तीसगढ़ जैसे गर्म प्रदेश में सेव की खेती कर रहे हैं।

सेव की खेती ठंडे प्रदेशों में हो सकती हैइस मिथ्या को तोड़ने की कोशिश प्रतापपुर के एक युवा कृषक ने की है। मुकेश गर्ग नाम के कृषक ने सूरजपुर जिले के प्रतापपुर जैसी गर्म जगह में अलग-अलग किस्म के सेव के सौ से ज्यादा पौधे लगाए हैं और कुछ में तो फल भी आने शुरू हो गए हैं।कुछ हप्तों में ये पूरी तरह से तैयार होकर खाने लायक हो जायंगे। कहा जा रहा है कि  छत्तीसगढ़ में कहीं भी सेव की खेती हो सकती है और ये किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

आमतौर पर सेव का फल हिमाचल प्रदेशजम्मू कश्मीर, उत्तराखंड जैसे कम तापमान वाले राज्यों में होते हैं क्योंकि वहां का मौसम सेव की खेती के लिए अनुकूल है। छत्तीसगढ़ का मौसम गर्म है उन्हें सेव के अनुकूल नहीं माना जाता और इसकी खेती सपने जैसी है।लेकिन अब गर्म स्थानों में भी सेव की खेती हो सकती है।

कृषि एवं उद्यानिकी विभाग से मिली फसल के रखरखाव की जानकारी

मुकेश गर्ग से मिली जानकारी के अनुसार खेती से उनका जुड़ाव शुरू से है,वे हमेशा कुछ अलग करने का प्रयास करते हैं। इस बीच उन्हें जानकारी मिली कि हिमाचल प्रदेश में सेव की ऐसी किस्म विकसित हुई है जो गर्म प्रदेशों में भी उग सकते हैं । मुकेश ने इसके लिए  कृषि एवं उद्यानिकी विभाग से सम्पर्क किया और प्रतापपुर में सेव की नई किस्म के पौधे लगाए। उन्होंने इनके रोपण और रखवाली को लेकर उनसे और तरीके समझे तथा पौधे  ऑर्डर किये इनका रोपण कराया। एक वर्ष की अवधि में ये पौधे चार से छह फीट के हो चुके हैं,कई में फल भी आ चुके हैं।

पौधों की रखवाली और रोपण में तरीकों को लेकर उन्होंने बताया कि इसका मुख्य समय नवम्बर से फरवरी के बीच होता है।इसके लिए उन्होंने पहले से ही दो बाय दो फीट गड्ढे तैयार करके रखे थे और गड्ढों को दीमक रोधी दवा(रीजेंट) से उपचारित किया गया था। गड्ढों में गोबर,मिट्टी और थोड़ा सा डीएपी डालकर पानी से भरकर रखे गए थे।इसका फायदा  यह होता है कि गड्ढों को जितना बैठना होता है बैठ जाता है और पौधे लगने के बाद इनके रेशे टूटने का डर नहीं होता है। इसके बाद 1-2 दिन में पौधे रोपित कर दिए थे।इनके लिए ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है केवल गर्मियों में दो से तीन दिन में पानी देना होता है। इस बात का ध्यान रखना होता है कि पौधों में बारिश के पानी का रुकाव नहीं हो क्योंकि जड़ों के सड़ने का डर होता है।

सेव की इस किस्म के लिए 50 डिग्री तक का तापमान है अनुकूल

मुकेश गर्ग बताते हैं कि आमतौर पर सेव  की फसल ठंडे प्रदेशों में होती है लेकिन सेव की फसल हरमन 99’ के लिए अधिकतम 50 डिग्री तक का तापमान अनुकूल है। हरमन के साथ अन्नाऔर डोरसेटकिस्म भी यहां के तापमान के अनुकूल है।

अपने फलोद्यान और सब्जी बाड़ी में कलेक्टर को देखकर किसान हुए प्रसन्न

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रायपुर। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में राष्ट्रीय बागवानी मिशन की जमीनी हकीकत को देखने के लिए कलेक्टर पी.एस. ध्रुव ने आज मनेन्द्रगढ़ ब्लाक के वनांचल के गांव बुंदेली का दौरा किया। कलेक्टर इस दौरान लगभग 4 किलोमीटर पैदल चलकर कई किसानों के फलोद्यान एवं सब्जी की खेती का मुआयना किया। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत बुंदेली गांव के कृषक चरकूराम, किसान सिंह, गजाधर, चन्द्रप्रताप सिंह ने एक-एक हेक्टेयर में विभिन्न प्रजातियों के फलदार पौधों का रोपण करने के साथ ही नदी कछार योजना का लाभ उठाकर सब्जी की खेती की है। इन किसानों ने आम का बाग लगाने के साथ ही वहां अनार, पपीता, केला आदि के पौधे भी लगाएं हैं।

कलेक्टर ध्रुव ने किसानों के फलोद्यान और सब्जी की खेती को देखकर प्रसन्नता जताई और उन्हें बधाई दी। कलेक्टर ध्रुव को अचानक अपने बीच सब्जी बाड़ी में आया देखकर किसान बेहद खुश हुए। उन्होंने फलोद्यान विकास, सब्जी की खेती के लिए शासन की ओर से मिली मदद और इससे हो लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कृषक गजाधर सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 में उसने बागवानी मिशन के तहत आम का उद्यान लगाने के साथ ही पपीता लगाया था। अब आम के पेड़ तैयार हो गए हैं। उन्होंने अभी सवा लाख रूपए का पपीता और टमाटर बेचने के साथ ही करीब 30 हजार रूपए की हरी मिर्च बेची है। कृषक चन्द्रप्रताप ने बीते साल फलोद्यान लगाया है। बुंदेली गांव में कई कृषकों द्वारा फलोद्यान एवं सब्जी की खेती की जा रही है।

कलेक्टर ध्रुव ने इस मौके पर डीएमएफ की राशि से कृषक चरकूराम, गजाधर सिंह, किशन सिंह, सितेश्वर, सुखधु सिंह को सब्जी मिनीकिट का वितरण किया और उन्हें  सब्जी की खेती कर अपनी आय को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। कलेक्टर ने इससे पूर्व प्राथमिक शाला बुंदेली का निरीक्षण किया। विलंब से शाला पहुंचे शिक्षक को कलेक्टर ने समय पर शाला आने और बच्चों को मेहनत से पढ़ाने-लिखाने की समझाईश दी।  

कृषक से पैसे की मांग करते हुए विडियो प्रकाश में आया, पटवारी निलंबित

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कवर्धा। कलेक्टर जनमेजय महोबे के निर्देश पर अनुविभागीय अधिकारी (रा.) सहसपुर लोहारा सुश्री लेखा अजगल्ले ने तहसील सहसपुर लोहारा के ग्राम गोछिया, पटवारी प.ह.नं. 35 राजेश कुमार शर्मा को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। निलंबन अवधि में शर्मा का मुख्यालय तहसील कार्यालय सहसपुर लोहारा होगा।



अनुविभागीय अधिकारी (रा.) सहसपुर लोहारा से जारी आदेश में बताया गया है कि तहसील सहसपुर लोहारा के ग्राम गोछिया, पटवारी प.ह.नं. 35 राजेश कुमार शर्मा के द्वारा कृषक से पैसे की मांग करते हुए विडियो प्रकाश में आया है, जो प्रथम दृष्टया गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है, जो कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 एवं 3-क के विपरित होने के कारण पटवारी शर्मा के विरूद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करने का निर्णय लिया गया। 

किसानों को समर्थन मूल्य पर धान और मक्का विक्रय के लिए एकीकृत किसान पोर्टल में 31 अक्टूबर तक कराना होगा पंजीयन

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रायपुर। खरीफ विपणन वर्ष 2022- 23 में समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का विक्रय करने वाले किसानों के लिए एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन कराये जाने की प्रक्रिया जारी है । इस पोर्टल में किसान 31 अक्टूबर 2022 तक पंजीयन करा सकते हैं। खरीफ वर्ष 2021-22 में समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले कृषकों को धान फसल हेतु एकीकृत किसान पोर्टल में नवीन पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी, किंतु ऐसे धान उत्पादक कृषक जो खरीफ वर्ष 2021-22 में धान विक्रय करने हेतु पंजीयन नहीं कराए थे, उन कृषकों को  नवीन पंजीयन कराना होगा।



छत्तीसगढ़ खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग मंत्रालय द्वारा इस संबंध में जारी आदेश के तहत एकीकृत किसान पोर्टल पर कृषकों के नवीन पंजीयन तथा पंजीकृत फसल अथवा रकबे में संशोधन की कार्यवाही भी 31 अक्टूबर तक की जानी है। पंजीकृत कृषको से ही समर्थन मूल्य पर धान और मक्का की खरीदी की जाएगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रदेश के कृषकों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने हेतु पृथक- पृथक कार्यालयों में आवेदन अथवा पंजीयन कराना पड़ता था, जिससे समय, संसाधन आदि का अपव्यय होता रहा है। 

राज्य शासन द्वारा प्रक्रिया का सरलीकरण कर विभिन्न योजनाओं के लिए एक प्लेटफार्म पर कृषक पंजीयन हेतु एकीकृत किसान पोर्टल विकसित किया गया है तथा  कृषक द्वारा धारित भूमि क एवं बोए गए फसलों के रकबा सत्यापन हेतु इसे भुईया पोर्टल से लिंक किया गया है। एकीकृत किसान पोर्टल में राजीव गांधी किसान न्याय,योजना मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना, धान एवं मक्का उपार्जन ,कोदो -कुटकी एवं रागी उपार्जन योजना को सम्मिलित किया गया है। इस पोर्टल में समस्त श्रेणी के भू धारक एवं वन पट्टा धारी कृषक पंजीयन करा सकते हैं। 

मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना अंतर्गत वन पट्टा धारक, ग्राम पंचायत एवं संयुक्त वन प्रबंधन समिति जो अपने उपलब्ध भूमि में वृक्षारोपण करते हैं, उन्हें भी पोर्टल में पंजीयन की पात्रता होगी। खरीफ मौसम की समस्त कृषि एवं उद्यानिकी फसल तथा धान के बदले सुगंधित धान , फोर्टीफाइड धान एवं वृक्षारोपण करने वाले कृषकों का एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन जरूरी है। एकीकृत किसान पोर्टल में नवीन पंजीयन हेतु ऋण पुस्तिका, बी-1 ,आधार नंबर, बैंक पासबुक की छायाप्रति के साथ निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होगा।

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