Media24Media.com: कुपोषण

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मल्टीग्रेन दलिया से कुपोषण और एनीमिया को मिल रही मात

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रायपुर। दंतेवाड़ा जिले में कुपोषण और एनीमिया एक बड़ी समस्या रही है। इसको देखते हुए जिला प्रशासन की विशेष पहल पर सुपोषण योजना के तहत आंगनबाड़ी के बच्चों को मल्टीग्रेन दलिया दिए जाने की अभिनव पहल के बड़े ही सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जिले में बीते अप्रैल माह में कुल कुपोषित बच्चों की संख्या 8082 थी, जो अब घटकर 6969 रह गई है। इसको देखते हुए यह उम्मीद है कि निकट भविष्य में दंतेवाड़ा जिले में कुपोषण और एनीमिया को न्यूनतम स्तर लाने में मल्टीग्रेन दलिया का उपयोग कारगर सिद्ध होगा। यह मल्टीग्रेन दलिया रागी, कोदो, कोसरा, बाजरा, ज्वार आदि से स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह द्वारा तैयार कर आंगनबाड़ियों को प्रदाय किया जा रहा है।

राष्ट्रीय पोषण माह में मल्टीग्रेन दलिया नियद नेल्लानार के ग्राम गमावाडा एवं धुरली के आंगनबाड़ी केंद्र में 3 से 6 वर्ष के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र बंद होने के समय अर्थात 3 बजे के आसपास खिचड़ी या हलवा के रूप में बनाकर दिया जाता है, जिससे आंगनबाड़ी केन्द्र से प्राप्त गर्म भोजन व घर में मिलने वाले शाम के भोजन के बीच में ‘‘न्यूट्रिशनल गैप‘‘ को पूरा करती है। मल्टीग्रेन दलिया पौष्टिक होने के साथ-साथ बच्चों को खाने में पसंद है। जिसके कारण आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है। इसके चलते ‘‘अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेषन‘‘ (ईसीसीई) गतिविधियों के क्रियान्वयन भी कारगर साबित हुआ है।

दंतेवाड़ा जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलेट आधारित दलिया को मिड-डे मील के रूप में शामिल किया गया है। बच्चों और उनके माता-पिता से मिले सकारात्मक फीडबैक ने इस योजना की सफलता को और भी ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। बच्चों में पहले की तुलना में अधिक ऊर्जा, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और शारीरिक विकास में तेजी देखी गई है।

गौरतबल है कि मिलेट्स के पोषक तत्वों एवं स्वास्थ्यवर्धक गुणों से पूरे देश-दुनिया परिचित हो चुकी है। जब से देश में चावल, गेहूं की भरपूर पैदावार होने लगी, तब से मिलेट्स यानि मोटे अनाजों से लोगों ने मुहं मोड़ लिया था। देश-दुनिया को मोटे अनाजों की पौष्टिकता, इसमें विद्यमान मल्टी विटामिन्स तथा कई रोगो के प्रति प्रतिरोधक क्षमता का पता लगा है, तब से उसके उपयोग को बढ़ावा मिला है। मोटा अनाज अब अन्न कहा जाने लगा है। मिलेट्स सभी के लिए सुपाच्य एवं मरीजों के विभिन्न व्याधियों में फायदेमंद इस अनाज की मांग अब एकाएक बढ़ चुकी है। खास तौर पर महिलाओं एवं बच्चों के सेहत के लिए इसका उपभोग लाभकारी है।

राष्ट्रीय पोषण माह 2024: पोषण जागरूकता गतिविधियों में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में 01 सितम्बर से 30 सितम्बर तक जन आंदोलन के रूप में 7वां राष्ट्रीय पोषण माह आयोजित किया गया। इस दौरान गांवों से लेकर राज्यस्तर तक सुपोषण, बच्चों में व्याप्त कुपोषण एवं किशोरी बालिकाओं, गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं में एनीमिया के संबंध में जागरूकता के लिए स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया गया। इस अभियान में हर वर्ग के लोगों की सक्रिय सहभागिता रही।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पोषण माह के प्रारंभ में सुपोषित छत्तीसगढ़ बनाने के लिए राज्य के समस्त जनप्रतिनिधि, पंचायती राज संस्था के प्रतिनिधियों महिला स्व-सहायता समूहों, प्रबुद्ध वर्ग, विद्यार्थी वर्ग, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के निकायों के प्रतिनिधि एवं समस्त जनसमुदाय से सक्रिय सहभागिता की अपील की थी। पोषण माह की गतिविधियों में महिलाओं और बच्चों को पोषण के प्रति जागरूक करने के लिए है जन प्रतिनिधियों, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, महिला स्वसहायता समूह, प्रबुद्ध नागरिकों, विद्यार्थियों और स्थानीय जन समुदाय का भरपूर सहयोग मिला। पोषण माह का शुभारम्भ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं विभागीय मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा पोस्टर व वीडियो का विमोचन, पोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर एवं पोषण शपथ दिलवाकर किया गया था।

पोषण जागरूकता गतिविधियों में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर

विभागीय अमलों सहित सम्पूर्ण पोषण माह में जनप्रतिनिधियों, पंचायतीराज संस्थाओं, के प्रतिनिधि, स्व-सहायता समूह के सदस्यों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के कुशल नेतृत्व, श्रीमती शम्मी आबिदी सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रभावी मार्गदर्शन और श्रीमती तुलिका प्रजापति, संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग के सतत् प्रोत्साहन से राष्ट्रीय पोषण माह 2024 में छत्तीसगढ़ ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 01 करोड़ 33 लाख से ज्यादा गतिविधियों का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ ने इसमें पूरे देश में तृतीय स्थान प्राप्त किया।

प्रदेश में कुल गतिविधि संख्या के आधार पर 8.77 लाख गतिविधि आयोजित कर जिला दुर्ग प्रथम, 8.70 लाख गतिविधि आयोजित कर जशपुर द्वितीय, 8.44 लाख गतिविधि आयोजित कर रायपुर तृतीय, 7.92 लाख गतिविधि आयोजित कर गरियाबंद चतुर्थ एवं 7.70 लाख गतिविधि आयोजित कर बलरामपुर पांचवें स्थान पर रहें। प्रति आंगनबाड़ी औसत गतिविधि संख्या के आधार पर जिला क्रमशः दुर्ग प्रथम, गरियाबंद द्वितीय, रायपुर तृतीय, धमतरी चतुर्थ एवं कबीरधाम पांचवे स्थान पर रहें।

23 लाख बच्चों का वृद्धि मापन किया गया

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण माह के दौरान एक विशेष अभियान के रूप में वजन त्यौहार का आयोजन किया गया, जिसमें समुदाय के सभी 0 से 06 वर्ष के बच्चों का वजन एवं ऊंचाई लेकर वृद्धि मापन किया गया। इस अभियान में लगभग 23 लाख बच्चों का वृद्धि मापन किया गया।

राष्ट्रीय पोषण माह 2024 की मुख्य थीम एनीमिया, वृद्धि निगरानी, पूरक पोषण आहार, पोषण भी पढ़ाई भी, बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और कुशल सेवा वितरण के लिए प्रौद्योगिकी का आयोजन और समग्र पोषण रखी गई थी। भारत शासन द्वारा प्रेषित थीम के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पूरे माह के लिए प्रतिदिन राज्य, जिला, विकासखण्ड, और आंगनबाड़ी केन्द्र स्तर पर आयोजित की जाने वाली गतिविधियांे के लिए रोड मैप के रूप में दिनांकवार गतिविधि कैलेंडर तैयार किया गया। जिसके आधार पर व्यापक पैमाने पर थीम आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया।

एनीमिया कैम्प, स्वास्थ्य जांच शिविर, पोषण संबंधी जागरूकता, भाषण एवं निबंध प्रतियोगिता जैसी गतिविधियां आयोजित की गई-

महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एनीमिया कैम्प, एनीमिया जागरूकता गतिविधियां, वीएचएसएनडी दिवस का आयोजन, आईवायसीएफ गतिविधियां, स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित शालाओं एवं आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में छात्रों द्वारा पोषण संबंधी जागरूकता के लिए शपथ, व्यंजन प्रतियोगिता, व्यंजन प्रदर्शनी, भाषण प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, खेल भी पढ़ाई भी, पोषण भी पढ़ाई भी, पोषण चौपाल, खेल खेल में पोषण ज्ञान प्राप्त करने संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया गया।

कृषि विभाग के सहयोग से मिलेट आधारित पौष्टिक भोजन संबंधी जागरूकता शिविर, प्रदर्शनी, जैविक उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु प्रचार-प्रसार इत्यादि गतिविधियां आयोजित की गई। लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग द्वारा जल संरक्षण एवं सुरक्षित पेयजल के उपयोग, वेस्ट वाटर के उचित निपटान के संबंध में जागरूकता प्रसार संबंधी उल्लेखनीय कार्य किया गया। वन विभाग द्वारा एक पेड़ मॉं के नाम अभियान अंतर्गत विशेष सहयोग देते हुए वृहत वृक्षारोपण का कार्य किया गया। आयुष विभाग द्वारा राज्य, जिला, विकासखंड एवं आंगनबाड़ी स्तर पर व्यापक पैमाने पर कुपोषण एवं एनीमिया की रोकथाम के लिए स्वस्थ जीवनशैली, पौष्टिक आहार, योग गतिविधियां का प्रचार-प्रसार एवं आयोजन किया गया। खाद्य विभाग के सहयोग से सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से जन समुदाय के मध्य पौष्टिक आहार के सेवन के संबंध में प्रचार प्रसार किया गया। ग्राम पंचायतों में पोषण विषय पर विशेष चर्चा की गई।

पोषण माह के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ अन्य सहयोगी विभागों द्वारा सक्रिय रूप से सहभागिता दी गई एवं सभी विभागों द्वारा समन्वित रूप से पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय पौष्टिक आहार, स्वस्थ्य जीवनशैली, पोषण के साथ पढ़ाई का संदेश जनसमुदाय तक पहुंचाया गया।

यूनिसेफ ने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सराहा

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रायपुर। यूनिसेफ इंडिया सहित यूनिसेफ के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय संगठन के प्रतिनिधियों ने आज कोंडागांव जिले को दौरा किया एवं कोण्डागांव में नवाचार के रूप में मानसिक स्वास्थ्य एवं कुपोषण से लड़ने के लिए तैयार की गयी योजनाओं की प्रशंसा की गई। यूनिसेफ इंडिया के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी लुइज़ी डैक्विनो सहित यूनिसेफ के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय संगठन के प्रतिनिधि पश्चिम अफ्रीका के रेने एहोनु एक्पिनी, बेल्जियम के गुंटर बूसरी, चोल थाबो आयुल, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ प्रमुख जॉब ज़ैकारीया, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ गजेंद्र सिंह के द्वारा मंगलवार को कोण्डागांव में संचालित यूनिसेफ के कार्यक्रमों का अवलोकन किया गया।

दल द्वारा विशेष तौर पर मया मंडई‘, ‘एनिमिया मुक्त कोण्डागांवअभियान एवं युवोदय कोंडानार चौम्प्सजैसे कार्यक्रमों की प्रशंसा की गई। इसके साथ ही स्वयं सेवकों के योगदान को सराहा गया। इसके अलावा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन हेतु कार्य योजना निर्माण पर जोर देते हुए समन्वय स्थापित कर कार्य करने हेतु गहन विमर्श किया गया। इस अवसर पर यूनिसेफ के दल द्वारा केशकाल विकासखण्ड के अंतर्गत बांधापारा और नाकापारा आंगनबाड़ी केंद्र में ग्राम स्वास्थ्य स्वचछता मया मंडई‘, पोषण दिवस और एनिमिया मुक्त कोण्डागांव के बारे में युवाओं एवं ग्रामीणों के संग चर्चा की। 

उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिन और एएनएम से टीकाकरण, एनीमिया मुक्त कोण्डागांव के कार्यों के बारे में जानकारी ली। दल के द्वारा जिले में संचालित सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य संबंधित कार्यों पर विचार विमर्श किया। उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हुए बस्तरिया हल्बी गानों की धुन पर बच्चों एवं युवोदय स्वयं सेवकों के संग नृत्य किया।

इस दौरान उन्होंने योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्यवन के बारे में जाना। साथ ही स्कूलों में स्वयंसेवकों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के बारे में फैलाई जा रही जागरूकता और समुदाय में उनके योगदान पर चर्चा की। इस अवसर पर स्कूल के प्राचार्यों ने स्वयंसेवकों के साथ अपने अनुभवों को साझा किया और स्वयंसेवकों ने भी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के परिणामस्वरूप उनके जीवन में परिवर्तनों एवं अनुभवों को साझा किया। इस दौरान कलेक्टर श्री दीपक सोनी, बीएमओ डॉ0 एएल रोहलेडर, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ0 रूद्र कश्यप, सीडीपीओ दिपेश बघेल, बीपीएम उमेश मरकाम, प्रियंका वर्मा सहित  जिले के अन्य अधिकारी एवं सक्रिय स्वयंसेवक उपस्थित थे।

गंभीर कुपोषित जुड़वा बच्चे हुए सुपोषित : पौष्टिक आहार और विशेष देखभाल से मिली सफलता

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रायपुर। पौष्टिक आहार और विशेष देखभाल से कुपोषण से मुक्ति पाई जा सकती है। प्रदेश में पिछले चार सालों में दो लाख 65 हजार बच्चे कुपोषण मुक्त हुए हैं। इसी कड़ी में जशपुर के बलुवाबहार गांव की श्रीमती ललिता बाई के गंभीर कुपोषित जुड़वा बच्चों को कुपोषण के चक्र से बाहर लाने में सफलता मिली है।

फरसाबहार विकाखण्ड के बलुवाबहार में गृह भेंट के लिए गई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक को गंभीर कुपोषित जुड़वा बच्चों के बारे में जानकारी हुई। उन्होंने बताया कि श्रीमती ललिता बाई ने 20 दिसम्बर 2021 को जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। जुड़वा बच्चों में एक बालक एवं एक बालिका है। जन्म के समय बालिका अमृता का वजन 1.20 किलोग्राम और बालक आयुष का वजन एक किलोग्राम था। दोनों बच्चे जन्म से ही गंभीर कुपोषित थे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की विशेष निगरानी में श्रीमती ललिता द्वारा दोनों बच्चों को शुरू से कंगारू मदर केयर के माध्यम से दूध पिलाने, अधिक से अधिक गर्म रखने, छः माह पूर्ण होने के बाद ऊपरी आहार देने जैसे निर्देशों का पूरा-पूरा पालन किया गया। इससे बालिका के वजन में वृद्धि हुई है और अब वह सामान्य ग्रेड पर आ रही है। बालक मध्यम ग्रेड पर है। बीच-बीच में बाल संदर्भ सेवा के लिए कार्यकर्ता द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर मां और बच्चों का स्वास्थ्य जांच करवाया गया। बच्चों के शारीरिक विकास के लिए डॉक्टर की सलाह पर उन्हें प्रोटीन पाउडर भी दिया गया, जिसका उन्हें लाभ मिला। दोनों बच्चों को पूरी तरह ठीक होने में दो वर्ष लग गए। दोनों बच्चे स्वस्थ हैं और आंगनबाड़ी केन्द्र स्कूलपरा में जाने लगे हैं।

गौरतलब है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा सभी विकासखण्डों में बाल संदर्भ शिविर लगाया जाकर कुपोषित बच्चों की पहचान और इलाज किया जा रहा हैै। आंगनबाड़ी केंद्रों में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत पोषक आहार और रेडी-टू-ईट गर्भवती माताओं और बच्चों को दिया जा रहा है। कार्यकर्ता, सहायिकाओं के द्वारा गृह भेंट करके कुपोषित बच्चों के वजन वृद्धि में निगरानी रखी जा रही है। महिलाओं को पौष्टिक भोजन, पोषण आहार और अपने बाड़ी में हरी साग-सब्जियां लगाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

विशेष लेख : जिले में पहली बार कुपोषण को दूर करने रागी फसल

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महासमुंद। पूरे छत्तीसगढ़ सहित महासमुंद ज़िले में मिलेट के उत्पादन और उपभोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। महासमुंद जिले में पहली बार कुपोषण को दूर करने हेतु लहलहाती पोषक रागी फसल की आज शनिवार को ग्राम भँवरपुर में रागी फसल की हार्वेस्टर के द्वारा कटाई हुई। रागी फसल कृषक संतकुमार पटेल, पूरन पटेल, सागर पटेल एवं अन्य ने लगभग 100 एकड़ में की। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना मिलेट्स मिशन अंतर्गत महासमुंद जिले के अंतर्गत सभी विकासखण्डों में मिलेट्स वर्ष का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

महासमुंद जिले को कुल लक्ष्य 1500 हेक्टेयर प्राप्त हुआ है। कृषि विभाग ने जिले के पांचों विकासखण्डों को 310 हेक्टेयर में 31 क्विंटल रागी बीज प्रति विकासखण्ड के मान से 155 क्विंटल प्रदाय किया गया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि महासमुंद विकासखण्ड में 220 हेक्टेयर, विकासखण्ड बागबाहरा में 210 हेक्टेयर, विकासखण्ड पिथौरा में 235 हेक्टेयर, विकासखण्ड बसना 280 हेक्टेयर एवं विकासखण्ड सरायपाली में 310 हेक्टेयर में इस प्रकार कुल 1255 हेक्टेयर में क्षेत्राच्छादन किया जा चुका है। शेष लक्ष्य की पूर्ति नर्सरी से बोनी कर किया जा रहा है। धान की अपेक्षा कम पानी में रागी की फसल लिया जा सकता है।

इस योजनांतर्गत जिले के कुल 173 ग्रामों में 1826 कृषक लाभान्वित हो रहे है। 200 हेक्टेयर से अधिक में बीज निगम द्वारा बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत् पंजीयन भी किया गया है। प्रति एकड़ 10 क्विंटल उत्पादन होता है। उत्पादित रागी बीज का भोजन के रूप में उपयोग, आंगनबाड़ी, मध्यान्ह भोजन एवं गर्भवती महिलाओं को तथा कुपोषित बच्चों में कुपोषण को दूर करने के लिए किया जायेगा।

मिलेट में छोटा अनाज और मोटा अनाज दोनों शामिल होते हैं। इन्हें पहाड़ी, तटीय, वर्षा, सूखा आदि इलाकों में बेहद कम संसाधनों में ही उगाया जा सकता है. एक तरफ मिलेट को उगाने में लागत कम आती है. वहीं इसका सेवन करने से शरीर को वो सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं, जो साधारण खान-पान से मुमकिन नहीं है. यही वजह है कि अब बेहतर स्वास्थ्य के लिए चिकित्सक भी डाइट में 15 से 20 प्रतिशत मिलेट को शामिल करने की सलाह दे रहे हैं। जानकारी के लिए बता दें कि मिलेट को साइज के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा गया है.

एक छोटा अनाज और एक मोटा अनाज. मोटा अनाज में ज्वार, बाजरा और रागी आते हैं. वहीं छोटा अनाज में कंगनी, कोदो, चीना, सांवा और कुटकी शामिल हैं. अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 का भी उद्देश्य मिलेट की खपत को बढ़ाकर पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना है. इसके लिए 8 मिलेट्स के चिन्हित किया गया है, जिसमें ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, कुटकी, कंगनी, चेना, सांवा आदि शामिल हैं। लघु धान्य फसल के सेवन से होने वाले लाभ:- कोदो, कुटकी, रागी, मोटा अनाज खाने से रक्तचाप को नियंत्रण करने में सहायक मिलेगा। रागी खाने से खून की कमी दूर होगा। रागी के सेवन से प्रचुर मात्रा में कैल्शियम उपलब्ध होने से हड्डिया मजबूत होगी। कुपोषित बच्चों एवं महिलाओं में कुपोषण दूर होगा। रक्त में मधुमेह (शुगर) नियंत्रित होगा।

 

पोट्ठ लईका अभियान अंतर्गत यूनिसेफ की टीम ने दिया प्रशिक्षण

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बेमेतरा। पोट्ठ लईका अभियान अन्तर्गत जिले में कुपोषण दर में कमी लाने आज बुधवार को जिला पंचायत कार्यालय के सभागार में यूनीसेफ के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अनुविभागीय अधिकारी (रा.) बेमेतरा सुरुचि सिंह, महिला बाल विकास विभाग के कर्मचारी सहित मितानीन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका उपस्थित थे।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में यूनीसेफ छत्तीसगढ़ से आए डॉ. भारती साहू ने सभी मितानीन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को कुपोषण के लक्षण एवं कुपोषण को दूर करने के संबंध में जानकारी दी। उन्होने बताया कि हमें उस समय पर ध्यान देना चाहिए जब बच्चा ठोस आहार खाना शुरू करता है क्योंकि उस समय में कुपोषण की संभावना अधिक होती है इसलिए माताओं को इस बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। इस दौरान कुपोषण को दूर करने के लिए चलाए जा रहे सुपोषण अभियान के बेहतर संचालन हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

 गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से खुद को और बच्चों को बचाने के उपाय भी बताए। तिरंगा भोजन का महत्व बताए, यानी थाली में तिरंगे का रंग होना सफेद चावल, दूध और अंडे के लिए है, हरा रंग हरी सब्जियों के लिए है और केसरिया या पीला दाल, छोले, सोयाबीन, मांस आदि के लिए है। हमारी थाली में तीनों रंगों का होना संतुलित आहार के लिए महत्वपूर्ण है। सिर, बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथ धोने और भोजन करने से पहले हाथ धोने के महत्व के बारे में भी बताया गया। कुपोषित बच्चों, गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को जितना संभव हो उतना पौष्टिक भोजन प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा हैं।

मिड-डे-मील योजना (एमडीएम) स्कूल जाने वाले बच्चों की देखभाल करती है, पोषण अभियान के तहत आंगनबाड़ी में माताओं और बच्चों को खाने के लिए गर्म भोजन परोसा जाता है। मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के तहत अंडे और केले का भी वितरण किया जा रहा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के साथ इन योजनाओं ने भोजन की उपलब्धता की समस्या को समाप्त कर दिया है। कुपोषण दूर करने की दिशा में ये बड़े कदम हैं। हालांकि, अभी भी एक अंतर मौजूद है जिसमें कब और क्या खाना चाहिए, इसके बारे में जानकारी सभी परिवारों के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं है। इस प्रकार, पोषण परामर्श और व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम की आवश्यकता है। इन सभी कारण से बेमेतरा जिले ने पोट्ठ लाइका अभियान की शुरुआत की है।

पायलट प्रोजेक्ट में बेमेतरा अनुभाग के 40 गांवों को कवर किया जाएगा। मुख्य उद्देश्य जिले में कुपोषण को खत्म करना (गंभीर तीव्र कुपोषण बच्चों की संख्या को शून्य करना) है। इस मिशन के तहत होने वाली गतिविधियां इस प्रकार हैं :-प्रत्येक शुक्रवार महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग व बिहान के कार्यकर्ता उक्त 40 गांवों के एक-एक घर में जाकर बच्चों के माता-पिता को समझाएंगे कि क्या खाएं और कब खाएं, उन्हें तिरंगा भोजन के बारे में बताया जाएगा, खाना खाने से पहले हमेशा हाथ धोना चाहिए, रेडी-टू-ईट कैसे इस्तेमाल करना चाहिए और अपने बच्चों को दिन में कम से कम 3 बार कैसे खिलाना चाहिए। 

वे उन्हें जंक फूड को ना कहने के लिए भी प्रोत्साहित करेंगे और प्रोटीन (अंडे, दूध, मांस, मछली, दाल, सोयाबीन, आदि) के महत्व को भी समझाएंगे। वे माता-पिता को यह भी याद दिलाएंगे कि वे अपने बच्चों को हमेशा आंगनबाड़ियों में भेजें और अपने बच्चों को आयरन फोलिक एसिड की गोलियां समय पर दें। यह गांव के सभी घरों के लिए होगा लेकिन कुपोषित बच्चों के घरों पर विशेष ध्यान होगा। कलेक्टर महोदय के निर्देशानुसार हमें उस समय पर ध्यान देना चाहिए जब बच्चा ठोस आहार खाना शुरू करता है क्योंकि उस समय में कुपोषण की संभावना अधिक होती है इसलिए माताओं को इस बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।

कुपोषण अंकेक्षण और सूक्ष्म पोषक तत्व योजना-कुपोषण पर चर्चा करने के उद्देश्य से 40 गांवों के प्रत्येक मोहल्ले को इकट्ठा किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी पंचायत सचिव और सरपंच की होगी। इस प्रक्रिया में आंगनवाड़ी दीदी और मितानिन दीदी मदद करेंगी। यहां ग्राम सभा सदस्य आपस में चर्चा करेंगे पंचायत सचिव चार्ट पेपर पर विवरण लिख जाएगा। प्रभावित करने वालों की सूची सीईओ जनपद कार्यालय द्वारा एसडीएम कार्यालय को भेजी जायेगी। इन प्रभावित करने वालों में 40 पायलट गांवों के सरपंच, सचिव, बिहान की सकरीया महिला, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक, मितानिन पर्यवेक्षक, राजीव युवा मितान अध्यक्ष शामिल होंगे। इन प्रभावितों को यूनीसेफ द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा कि ग्रामीणों को पोषण परामर्श कैसे प्रदान किया जाए।

विशेष लेख : प्रदेश के सभी जिलों में होगा फोर्टिफाइड चावल का वितरण

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रायपुर। में महिलाओं और बच्चों में कुपोषण और एनीमिया की स्थिति को दूर करने के मद्देनजर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में शासकीय उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से प्राथमिकता वाले परिवारों को फोर्टिफाइड चावल वितरण का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब प्रदेश के सभी जिलों में आगामी माह के एक अप्रैल से फोर्टिफाइड चावल का वितरण होगा। जिला प्रशासन द्वारा इसकी तैयारी की जा रही है। फोर्टिफाइड चावल प्राथमिकता, अन्त्योदय, एकल निराश्रित, निःशक्जन, श्रेणी के राशनकार्डधारियों को वर्तमान में दिए जा रहे सामान्य चावल के स्थान पर मिलेगा।

गौरतलब है कि राज्य सरकार सार्वभौम पीडीएस के तहत खाद्यान्न सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा एनीमिया एवं अन्य पोषक तत्वों की कमी को दूर करने नवम्बर 2020 से कोण्डागांव जिले में फोर्टिफाइड चावल वितरण प्रारंभ किया गया है। वर्तमान में मध्यान्ह भोजन योजना तथा पूरक पोषण आहार योजना में प्रदेश के सभी जिलों में फोर्टिफाइड चावल का वितरण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राज्य के 10 आकांक्षी जिले (कोरबा, राजनांदगांव, महासमुंद, कांकेर, नारायणपुर, दंतेवाडा, बीजोपुर, बस्तर, कोण्डागांव, सुकमा) तथा 02 हाई बर्डन जिले (कबीरधाम एवं रायगढ़) में फोटिफाइड चावल का  भी वितरण किया जा रहा है।

आयरन और विटामिन से भरपूर है फोर्टिफाइड चावल

फोर्टिफाइड चावल पोषक एवं स्वास्थ्यवर्धक है। यह आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन बी-12 से युक्त होता है। इसमें मौजूद आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन बी-12 जैसे पोषक तत्व बड़ो एवं बच्चों में खून की कमी नहीं होने देता है तथा खून निर्माण एवं तंत्रिका तंत्र के सही ढंग से कार्य में सहायक होता है। प्रदेश के कई स्थानों पर फोर्टिफाइड चावल को लेकर प्लास्टिक चावल होने का भ्रम भी सामने आई है। दरअसल फोर्टिफाइड चावल सामान्य चावल से अधिक चिकना और अलग दिखता है, लेकिन वह प्लास्टिक नहीं है। लेकिन बेहतर गुणवत्ता वाला चावल है। खाद्य विभाग द्वारा लोगों में भ्रम की स्थिति को दूर करने राशनकार्डधारियों को आंगनबाडी कार्यकर्ता, मितानीन, एवं उचित मूल्य दुकानों में बैनर, पोस्टर आदि के माध्यम से फोर्टिफाइड चावल को पकाने के तरीके एवं उपयोग के संबंध में समय-समय पर जागरूक किया जा रहा है।

फूड या खाद्य पदार्थों के फोर्टीफिकेशन का क्या मतलब होता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक फूड फोर्टीफिकेशन का मतलब होता है टेक्नोलॉजी के माध्यम से खाने में विटामिन और मिनरल के स्तर को बढ़ाना। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि आहार में पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जा सके और इससे लोगों के स्वास्थ्य को भी लाभ मिले। आम तौर पर चावल की मिलिंग और पॉलिशिंग के समय फैट और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर चोकर की परतें हट जाती है। चावल की पॉलिश करने से 75-90 प्रतिशत   विटामिन भी निकल जाते है जिसके वजह से चावल के अपने पोषक तत्व खत्म हो जाते है। इसलिए चावल को फोर्टिफाई करने से उनमें सूक्ष्म पोषक तत्व न सिर्फ फिर से जुड़ जाते है बल्कि और ज्यादा मात्रा में मिलाये जाते है जिससे चावल और अधिक पौष्टिकयुक्त हो जाता है।

बता दे कि चावल को फोर्टीफाई करने के लिए सबसे पहले सामान्य चावल का पाउडर बनाया जाता है और उसमे सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे विटामिन बी-12, फोलिक एसिड और आयरन, एफएसएसएआई ;थ्त्ज्ञद्ध के मानकों के अनुसार मिलाये जाते है। चावल के पाउडर और विटामिन/मिनरल के मिश्रण को मशीनों द्वारा गूंथा जाता है और एक्सट्रूजन नामक मशीन से चावल के दानों फोर्टिफाइड राइस कर्नेल एफआरके ;थ्त्ज्ञद्ध को निकाला जाता है। इस एफआरके ;थ्त्ज्ञद्ध के एक दाने (ग्राम) को सामान्य चावल के 100 दानों (ग्राम) के अनुपात में मिलाया जाता है जिसे फोर्टीफाइड चावल कहते है।

ऐसे पकाया जाता है फोर्टीफाइड चावल-

अधिकतम पौष्टिक लाभ के लिए फोर्टीफाइड चावल को पर्याप्त पानी में पकाना चाहिए और बचे हुए पानी को फेंकना नहीं चाहिए। अगर चावल को बनाने से पहले पानी में भिगोया गया हो तो चावल को उसी पानी में पकाना चाहिए। फोर्टीफाइड चावल अत्यधिक पानी में धोने और पकाने के बाद भी अपने पोषक तत्वों को बरकरार रखता है। फोर्टीफाइड चावल को हर बार इस्तेमाल करने के बाद साफ और सूखे हवा-बंद डब्बे में रखना चाहिए।

प्रदेश के सभी जिलों में होगा फोर्टिफाइड चावल का वितरण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बच्चों में कुपोषण और एनीमिया की स्थिति को दूर करने के मद्देनजर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई आज राज्य मंत्री परिषद् की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब प्रदेश के सभी जिलों में फोर्टिफाइड चावल का वितरण होगा। फोर्टिफाइड चावल उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से राशनकार्डधारियों को अप्रैल 2023 से वितरण किया जाएगा। प्राथमिकता, अन्त्योदय, एकल निराश्रित, निःशक्जन, श्रेणी के राशनकार्डधारियों को वर्तमान में दिए जा रहे सामान्य चावल के स्थान पर फोर्टिफाइड चावल मिलेगा।

गौरतलब है कि सार्वभौम पीडीएस के तहत खाद्यान्न सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा एनीमिया एवं अन्य पोषक तत्वों की कमी को दूर करने नवम्बर 2020 से कोण्डागांव जिले में फोर्टिफाइड चावल वितरण प्रारंभ किया गया है। वर्तमान में मध्यान्ह भोजन योजना तथा पूरक पोषण आहार योजना में प्रदेश के सभी जिलों में फोर्टिफाइड चावल का वितरण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राज्य के 10 आकांक्षी जिले (कोरबा, राजनांदगांव, महासमुंद, कांकेर, नारायणपुर, दंतेवाडा, बीजोपुर, बस्तर, कोण्डागांव, सुकमा) तथा 02 हाई बर्डन जिले (कबीरधाम एवं रायगढ़) में फोटिफाइड चावल का  भी वितरण किया जा रहा है।

आयरन और विटामिन से भरपूर है फोर्टिफाइड चावल

फोर्टिफाइड चावल पोषक एवं स्वास्थ्यवर्धक है। यह आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन बी-12 से युक्त होता है। इसमें मौजूद आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन बी-12 जैसे पोषक तत्व बड़ो एवं बच्चों में खून की कमी नहीं होने देता है तथा खून निर्माण एवं तंत्रिका तंत्र के सही ढंग से कार्य में सहायक होता है। फोर्टिफाइड चावल के फायदे के संबंध में जिले के राशनकार्डधारियों को आंगनबाडी कार्यकर्ता, मितानीन, एवं उचित मूल्य दुकानों में बैनर, पोस्टर आदि के माध्यम से फोर्टिफाइड चावल को पकाने के तरीके एवं उपयोग के संबंध में समय-समय पर जागरूक किया जा रहा है।

लच्छा, ककनी, तोड़ा, करधन पहनकर आयी पोषण परी ने दिया पोषण का संदेश

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रायपुर। महिला बाल विकास विभाग द्वारा जिले की समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों में राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में मंदिर हसौद परियोजना के खौली सेक्टर की ग्राम टेकारी में सेक्टर स्तरीय पोषण जागृति शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के माध्यम से लोगों को पोषण आहार के बारे जागरूक किया गया एवं प्रदेश से कुपोषण को समाप्त करने का संदेश देने का प्रयास किया गया ।



इस सम्बन्ध में खौली सेक्टर की पर्यवेक्षक अल्का सक्सेना ने बताया: आंगनबाड़ी केंद्र की लाभार्थी बालिकाओं ने सब्जियों का लच्छा, ककनी, तोड़ा, करधन बनाकर  एवं पोषण परी बनकर समुदाय को सही पोषण देश रोशन का संदेश दिया। पोषण परी को सोयाबड़ी, सब्जियों, भाजियों से बने गहनों से सजाया गया। केले के पत्तों के पंख लगाए गए। पोषण परी ने पौष्टिक आहार, और संतुलित आहार को अपने भोजन में शामिल करने का संदेश दिया। जिसमें मौसमी फलों, सब्जियों, भाजियों और अनाज के पौष्टिक गुणों के बारे में गर्भवती महिलाओं, शिशुवती माताओं और किशोरियों को दैनिक जीवन में पौष्टिक तत्व युक्त आहार को शामिल  करने, अपने गांव को कुपोषण मुक्त करने के बारे में जागरूक किया गया। कुपोषण  पर विजय अगर पाना है तो पौष्टिक अनाज,सब्जियों और भाजियों का उपयोग करना होगा। प्रत्येक दिन सभी को एक मौसमी फल और भाजियों को खाने के लिए प्रेरित किया।

पर्यवेक्षक अल्का सक्सेना ने आगे बताया: पोषण जाग्रति शिविर में सभी लोगों को मिलकर कुपोषित बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए आगे आने की सलाह दी गई। स्वस्थ रहने के लिये अपने आहार में प्रतिदिन सुबह भीगा और अंकुरित चना, खाने में मुनगा, उसकी भाजी, सुखा पावडर खाने में डालकर या खाना खाने के बाद गुड़ खाने से अनीमिया से बचाव की जानकारी भी लाभार्थियों को दी गई।आकर्षक रंगोली के बाद भाजियों बरबटी ,खीरे का उपयोग कर पोषण छतरी भी बनाई गई।

इस अवसर पर पौष्टिक अनाज,सब्जियोंभाजियों का उपयोग कर आकर्षक रंगोली भी बनाई गई। पोषण शिविर में ग्राम सरपंच नंदा यादव के साथ खौली सेक्टर की समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका ग्राम की मितानिन, समूह की महिला सदस्य बच्चों की माताएं, गर्भवती महिलाएं, शिशुवती माताएं उपस्थित रही। कार्यक्रम के अंत में सभी को अंकुरित अनाज का सलाद भी दिया गया।

मन की बात : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कही ये बातें, 2023 में मनेगा अंतरराष्ट्रीय मोटा वर्ष

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि सामाजिक जागरूकता के प्रयास कुपोषण से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आकाशवाणी से ‘‘मन की बात’’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने सभी से कुपोषण से लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सितंबर का महीना त्यौहारों के साथ-साथ पोषण से जुड़े अभियान के लिए समर्पित है। सितंबर का महीना त्योहारों के साथ-साथ पोषण से जुड़े बड़े अभियान को भी समर्पित है। हम हर साल 1 से 30 सितंबर के बीच पोषण माह मनाते हैं।



कुपोषण के खिलाफ पूरे देश में अनेक क्रिएटिव और डाइवर्स एफोर्टर्स किए जा रहे हैं। टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल और जन-भागीदारी भी, पोषण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना है। देश में लाखों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मोबाइल डिवाइस देने से लेकर आंगनबाड़ी सेवाओं की पहुंच को मॉनीटर करने के लिए पोषण टै्रकर भी लॉन्च किया गया है। नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में 14 से 18 साल की बेटियों को भी, पोषण अभियान के दायरे में लाया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने दो हजार तेईस को अंतर्राष्ट्रीय मोटा वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा का प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव का सत्तर से अधिक देशों ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में मोटे अनाज बाजरे की लोकप्रियता बढ़ रही है। देश में मोटे अनाज के अनुसंधान और नवाचार पर ध्यान देने के साथ ही किसान उत्पादक संगठनों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि इनका उत्पादन बढ़ाया जा सके।

प्रधानमंत्री ने दूरदर्शन पर प्रसारित स्वराज धारावाहिक का दिया उदाहरण 

ये आजादी के आंदोलन में हिस्सा लेने वाले अनसुने नायक-नायिकाओं के प्रयासों से देश की युवा-पीढ़ी को परिचित कराने की एक बेहतरीन पहल है। दूरदर्शन पर, हर रविवार रात 9 बजे, इसका प्रसारण होता है और मुझे बताया गया कि 75 सप्ताह तक चलने वाला है। मेरा आग्रह है कि आप समय निकालकर इसे खुद भी देखें और अपने घर के बच्चों को भी जरुर दिखाएं और स्कूल-कॉलेज के लोग तो इसको रिकॉर्डिंग करके जब सोमवार को स्कूल-कॉलेज खुलते हैं, तो विशेष कार्यक्रम की रचना भी कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छता अभियान और कोविड टीकाकरण में भी देश की यही भावना देखने को मिली थी। उन्होंने हर घर तिरंगा अभियान के लिए लोगों के नये-नये विचारों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेजर ध्यानचंद की जयंती कल उनतीस अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाई जाएगी। उन्होंने खिलाड़ियों से वैश्विक मंचों पर तिरंगे और देश की शान बढ़ाते रहने का आग्रह किया, यही मेजर ध्यानचंद को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मोदी ने कहा कि आने वाले दिनों में कई त्योहार मनाये जाएंगे। उन्होंने इन पर्वों के लिए सभी को शुभकामनाएं दीं।

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