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अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को गंभीरता से लेकर पूरी गुणवत्ता के साथ समय सीमा में पूर्ण कराएं कलेक्टर्स : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज जांजगीर-चांपा जिले के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक में प्राधिकरण के बजट को 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये करने की स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को सभी कलेक्टर्स गंभीरता से लें और उन्हें उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अब प्राधिकरण की बैठक हर वर्ष समय पर आयोजित होगी और कार्यों की गहन समीक्षा की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संविधान की मंशा के अनुरूप अनुसूचित जाति समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए हम बाबा गुरु घासीदास जी के ‘मनखे-मनखे एक समान’ के संदेश को आत्मसात कर समाज में सम्मान और समानता की भावना को सशक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचे, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

अनुसूचित जाति वर्ग के पांच युवाओं को हर साल पायलट बनाने दी जाएगी आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जांजगीर-चांपा जिले को इस बैठक के लिए विशेष रूप से इसलिए चुना गया क्योंकि यह अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और अब समय आ गया है कि हम विकास की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित करें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की संकल्पना के अनुरूप राज्य में विकास के कार्य हुए हैं। अनुसूचित जाति समाज के समुचित विकास के लिए प्राधिकरण एक सशक्त माध्यम है, जिसके माध्यम से सरकार ठोस प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने गिरौधपुरी धाम के विकास के लिए 2 करोड़ रुपये, अजा वर्ग के विद्यार्थियों हेतु कोचिंग व्यवस्था के लिए 50 लाख रुपये, प्रत्येक वर्ष अनुसूचित जाति वर्ग के 5 युवाओं को पायलट प्रशिक्षण हेतु सहायता, तथा जोड़ा जैतखंभ के निर्माण में सीमेंट के साथ-साथ लकड़ी के उपयोग हेतु राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। साथ ही, दिल्ली में संचालित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीट संख्या बढ़ाकर 200 करने की जानकारी दी और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु इसका लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने आगामी समय में सभी जिला मुख्यालयों में ‘नालंदा परिसर’ के निर्माण की भी बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने बैठक के दौरान प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों के वर्षों से लंबित रहने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही प्राधिकरण के कार्यों की राशि कम हो, लेकिन उनका सामाजिक महत्व अत्यंत बड़ा है। इन कार्यों का समय पर पूर्ण न होना चिंता का विषय है।

बैठक को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अनुसूचित जाति समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सोच समाज के वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में स्पष्ट है। उन्होंने सभी लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए और सभी समाज को साथ लेकर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास का संकल्प दोहराया।

अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब ने मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में समाज के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों हेतु आभार प्रकट किया। उन्होंने गिरौधपुरी धाम में रोपवे निर्माण, मेला आयोजन के दौरान बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, जोक नदी के पास स्नान हेतु आवश्यक व्यवस्था, ठहरने की सुविधा, जोड़ा जैतखंभ में लकड़ी के उपयोग, बाराडेरा धाम में ऐतिहासिक तालाब का संरक्षण और सौंदर्यीकरण, विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट क्लास की व्यवस्था जैसी मांगें बैठक में रखीं। उन्होंने बजट वृद्धि और मांगों की स्वीकृति के लिए भी आभार व्यक्त किया।

बैठक में प्राधिकरण के स्वरूप, कार्यक्षेत्र, अनुमोदित कार्यों की समीक्षा, बजट प्रावधानों की जानकारी, एवं वित्तीय वर्ष 2020 से 2025 तक स्वीकृत कार्यों की प्रगति सहित नागरिक सुविधाओं, सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों, और शैक्षणिक सुविधा विस्तार जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं प्राधिकरण सदस्यों के प्रस्तावों के आधार पर 49 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के विकास एवं हितग्राही मूलक कार्यों का अनुमोदन किया गया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री दयाल दास बघेल, लखन लाल देवांगन, लक्ष्मी राजवाड़े, टंकराम वर्मा, सांसद कमलेश जांगड़े, विधायक पुन्नूलाल मोहले, डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, दिलीप लहरिया, शेषराज हरवंश, उतरी गणपत जांगड़े, कविता प्राण लहरे, हर्षिता स्वामी बघेल सहित रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के आयुक्त, आईजी, एवं 17 जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि अनुसूचित जाति प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र संपूर्ण राज्य है जिसमें प्रदेश के 17 अनुसूचित जाति बाहुल्य जिले – जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, मुंगेली, रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, महासमुंद, राजनांदगांव, खैरागढ़ सहित अन्य वे जिले भी शामिल हैं, जिनमें अनुसूचित जाति जनसंख्या 25 प्रतिशत से अधिक है।

बैठक में जांजगीर-चांपा जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यलता आनंद मिरी, बिलासपुर से राजेश सूर्यवंशी, गरियाबंद से गौरीशंकर कश्यप, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद एवं बसव राजू, पुलिस महानिदेशक अरुणदेव गौतम, विभागीय सचिव शहला निगार, रोहित यादव, कमलप्रीत सिंह, रीना बाबा साहेब कंगाले, आर. प्रसन्ना, शम्मी आबिदी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


कलेक्टर मिशन मोड में कार्य करें: मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री ने 8 घंटे चली मैराथन कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में की शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा


रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि कलेक्टर्स आम जनता के हितों को केन्द्र में रखकर संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान हो। शासन की फ्लैगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कोताही नहीं होनी चाहिए। इन योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए मिशन मोड पर जुट कर काम करें। प्रशासन के कार्यों से जनता के मन में शासन और प्रशासन के प्रति विश्वास का भाव उत्पन्न हो।

मुख्यमंत्री ने आज राजधानी रायपुर में लगातार 8 घंटों तक चली कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में ये दिशा-निर्देश अधिकारियों को दिए। लंच ब्रेक को छोड़कर मुख्यमंत्री लगातार बैठक में उपस्थित रहे। कॉन्फ्रेंस में अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद,  बसवराजु एस.,  राहुल भगत तथा सभी संबंधित विभागों के सचिव सहित सभी संभागों के आयुक्त, सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के सीईओ और नगर निगमों के आयुक्त भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छे कार्यों की सराहना होगी और कार्य में लापरवाही बरतने पर कड़ा रूख भी अपनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कलेक्टरों के परफार्मेंस की नियमित अंतराल पर समीक्षा की जाएगी और जिलों की रैंकिंग तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी जिम्मेदारी आपको सौंपी गई है उसकी मॉनिटरिंग की जाती है। फ्लैगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन और जिला प्रशासन के कार्यों पर हमारी नजर रहती है। जिले में होनी वाली घटनाओं पर जिला प्रशासन कितनी तत्परता से काम करता है, यह भी देखा जाता है। कलेक्टरों की पहली जिम्मेदारी दंडाधिकारी के रूप में कानून व्यवस्था बनाए रखने की है। विभिन्न संगठनों के साथ संवाद के दौरान यदि असंतोष की कोई बात सामने आती है, तो उसका समाधान स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर में गुरूवार को जनदर्शन आयोजित किया जाता है। इसमें अनेक ऐसी छोटी-छोटी समस्याएं आती हैं जिनका समाधान तहसील और जिला स्तर पर किया जा सकता है। कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि रायपुर में होने वाले जनदर्शन में ऐसी समस्याएं ही आएं जिनका समाधान जिला स्तर पर नहीं हो सकता है। जिलों में आम जनता की समस्या के समाधान के लिए कलेक्टर जनदर्शन का कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किया जाए। नागरिकों तक शासन की योजनाओं की सुगम पहुंच से शासन की छवि बनती है। कलेक्टर यह भी सुनिश्चित करें कि भूमिहीन परिवारों को जाति प्रमाण पत्र बनाने में दिक्कत न आए। प्राथमिकता के साथ इन परिवारों का जाति प्रमाण पत्र बनाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम जनमन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना का क्रियान्वयन सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों की पीड़ा को मैंने करीब से महसूस किया है। पीएम जनमन योजना इन जनजातियों के लिए आशा की नई किरण है। इसका क्रियान्वयन पूरी गंभीरता से करते हुए योजनाओं का हितग्राहियों को शत-प्रतिशत लाभ दिलाएं। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बीच जाकर मैं स्वयं पीएम जनमन योजना के क्रियान्वयन का निरीक्षण करूंगा। प्रधानमंत्री जी ने हाल ही में आयोजित कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत प्रदेश में 8 लाख 46 हजार आवासों की स्वीकृति दी है। जिससे गरीब परिवारों के स्वयं के घर का सपना अब पूरा होगा।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पहली बार पैरेंट्स टीचर मीटिंग और जनभागीदारी से न्योता भोज की पहल की गई है। स्थानीय भाषा में बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था की गई है। शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ स्कूलों की इमारत की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। स्कूलों में बच्चों के स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनाने का कार्य प्राथमिकता से किया जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व संबंधी मामलों का निराकरण समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ हो। राजस्व मामलों को हल करने में अमला जितनी तत्परता दिखायेगा, सरकार की छवि भी उतनी ही अच्छी बनेगी। हम जितना तकनीकी नवाचार को बढ़ाएंगे, राजस्व संबंधी भ्रष्टाचार उतना ही घटेगा। डिजिटल क्राप सर्वे, भू नक्शे की जियो-रिफ्रेंसिंग आदि के माध्यम से इस क्षेत्र में पारदर्शिता आयेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के माध्यम से अधिकतम रोजगार के अवसर सृजित हों। जल संचय के कार्यों को बढ़ावा दिया जाए। छत्तीसगढ़ में तालाबों की सुन्दर परंपरा रही है। नये तालाब बनाए जाएं, इससे जल स्तर बेहतर होगा, खेती-किसानी के लिए पानी मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी द्वारा प्रारंभ की गई अमृत सरोवर योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए। बस्तर, सरगुजा और मैदानी क्षेत्रों के ऐसे गांव जो मानसून में कट जाते हैं, उन क्षेत्रों के लिए सड़कों का प्रस्ताव बनाकर शीघ्र भेजें।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो, निजी अस्पतालों में भी मरीजों का आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने में कोई दिक्कत न आए। पीएम जनऔषधि केन्द्र प्राइम लोकेशन पर हो, यहां दवाईयों की पर्याप्त उपलब्धता हो। प्रदेश की बड़ी आबादी शासकीय अस्पतालों पर निर्भर हैं, इसकी व्यवस्था दुरूस्त हो। हेल्थ बजट का उचित उपयोग हो और बुनियादी स्वास्थ्य अधोसंरचनाएं तैयार करने में जीवन दीप समितियों और डीएमएफ की राशि का उपयोग किया जाए। डेंगू और मलेरिया को लेकर सतत अभियान चलाया जाए। सिकल सेल के मरीजों को चिन्हांकन और इलाज की समुचित व्यवस्था हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बैंकों में तकनीकी वजहों से कुछ हितग्राहियों को महतारी वंदन योजना की राशि मिलने में दिक्कत आती है, इस पर कलेक्टर नजर रखें। कुपोषण दूर करने के लिए सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वंचित तबके के जीवन का आधार पेंशन की राशि होती है। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि हितग्राहियों को समय पर पेंशन का भुगतान हो। उन्होंने कहा कि निराश्रित निधि में 400 करोड़ रूपए की राशि उपलब्ध है। दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष स्कूल और अस्पताल के निर्माण की कार्ययोजना बनाकर शीघ्र प्रस्तुत करें। नशामुक्ति आज राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है। प्रत्येक जिले में नशामुक्ति केन्द्र की स्थापना कर विशेष अभियान चलाएं।

बस्तर ओलंपिक 2024 का होगा आयोजन
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित और संवेदनशील जिलों की खेल प्रतिभाओं को दुनिया से जोड़ने के लिए बस्तर ओलंपिक 2024 का आयोजन किया जा रहा है। दिव्यांग और आत्मसमर्पित नक्सलियों को भी इसमें खेल प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।

मुख्य सचिव ने की समर्थन मूल्य पर धान खरीदी सहित महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा

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रायपुर। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिले के मिलर्स की बैठक लेकर उपार्जन केन्द्रों से धान उठाव और भारतीय खाद्य निगम और नागरिक आपूर्ति निगम में चावल जमा करने की लगातार मॉनिटरिंग करें। मुख्य सचिव आज यहां मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य में खरीफ वर्ष 2022-23 में धान खरीदी के संबंध में कमिश्नर और कलेक्टरों की बैठक में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की समीक्षा कर रहे थे। मुख्य सचिव ने ग्रामीण औद्योगिक पार्क (रीपा), गोबर पेंट के उत्पादन एवं उपयोग की प्रगति, खेतों में से किए पैरा दान को शीघ्र गौठान पहुंचाने, जिलों में भू नक्शों के जिओ रिफ्रेंसिंग, मिलेट्स मिशन, आकांक्षी ब्लॉक प्रोग्राम सहित अन्य योजनाओं के प्रगति की समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 की धान खरीदी की समीक्षा करते हुए कलेक्टरों से कहा कि सभी जिलों में धान खरीदी की प्रक्रिया सफलता पूर्वक बहुत अच्छे से की जा रही है। मुख्य सचिव ने शीघ्र ही धान का उठाव, मिलर्स द्वारा कस्टम मिलिंग करने और मिलिंग के बाद चावल को नागरिक आपूर्ति निगम और भारतीय खाद्य निगम में जमा कराये जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने धान खरीदी के अंतिम दिवस पर सभी खरीदी केन्द्रों का भौतिक सत्यापन पूरी सतर्कता से करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि हमने धान खरीदी कार्य में राज्य के किसानों को सर्वोपरि रखा और आगे भी किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में खाद्य सचिव ने जानकारी दी कि धान खरीदी के 110 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी के लक्ष्य के विरूद्ध करीब 86 प्रतिशत धान की खरीदी की जा चुकी है। जिसमें से 75 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब पंजीकृत 87 प्रतिशत किसानों ने अपना धान खरीदी केन्द्रों में बेच दिया है। मुख्य सचिव ने ग्रामीण औद्योगिक पार्क (रीपा) की समीक्षा करते हुए सभी जिले के कलेक्टरों को निर्देश दिए है कि वे अपने जिलों में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर कम से कम एक रीपा का लोकार्पण अवश्य करवायें। इसके लिए समुचित कार्यवाही सुनिश्चित कर ले।

उन्होंने कलेक्टरों और संभागायुक्तों को ग्रामीण औद्योगिक पार्कों की स्थापना तेजी से करने के निर्देश दिए है। इसी तरह से जैन ने कहा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशानुसार शासकीय कार्यालय भवनों, स्कूल आंगनबाड़ी में गोबर पेंट से पोताई कराने के कार्य को वरीयता दें। इसके लिए सभी कलेक्टर्स अपने चिन्हित गौठानों में गोबर पेंट इकाई की स्थापना शीघ्र करें। बैठक में बताया गया कि रायपुर, कांकेर और दुर्ग जिले में गोबर पेंट इकाईयों की स्थापना की जा चुकी है और गोबर पेंट का उत्पादन प्रारंभ कर दिया गया है। शासकीय भवनांे में भी गोबर पेंट से पोताई प्रारंभ कर दिया गया है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में गोबर पेंट इकाईयों की स्थापना गौठानों में तेजी की जा रही है। किसानों द्वारा अपने खेतों से स्वेच्छा अनुसार पैरा दान किया जा रहा है। खेतों में एकत्रित पैरा का गौठानों तक परिवहन में तेजी लायी जाए।

मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए है कि वे अपने जिलों में भू नक्शों के जिओ रिफ्रेंसिंग कार्य के लिए तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों की वर्कशॉप आयोजित कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर भू नक्शों के जिओ रिफ्रेंसिंग के कार्य में तेजी लाएं। मुख्य सचिव ने जिला अधिकारियों से कहा कि यदि उनके जिले में स्थित लघु एवं मध्यम उद्योगों के उद्यमी भारत सरकार के  उद्यम पोर्टल में पंजीयन कराने चाहते है तो उन्हें आवश्यक सहयोग एवं सलाह दें।  मुख्य सचिव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मिलेट्स वर्ष 2023 के पूर्व से ही शासन द्वारा मिलेट्स मिशन शुरू कर दिया गया है और किसान अब व्यापक पैमाने पर मिलेट्स फसलों का उत्पादन करने के लिए प्रेरित हुए हैं। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को अपने भोजन में मिलेट्स का उपयोग जरूर करना चाहिए। उन्होंने कलेक्टरों से इस दिशा में और प्रयास करने के निर्देश दिए।

इसी तरह से मुख्य सचिव ने सर्कुलर इकॉनामी और महिला स्व सहायता समूहों को स्वच्छता के कार्यों के अलावा अस्पतालों के भोजन, फूड जोन के संचालन सहित पर्यटन जैसे कार्यों से भी जोड़े जाने की जरूरत बताई। बैठक में कलेक्टरों से आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के तहत की गई प्रगति की भी समीक्षा की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में कृषि विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, खाद्य विभाग के सचिव टोपेश्वर वर्मा, राजस्व विभाग के सचिव एन.एन.एक्का, योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी एवं सहकारिता विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, संचालक भू-अभिलेख रमेश शर्मा, मार्कफेड के प्रबंध संचालक मनोज सोनी सहित सभी संभागायुक्त एवं जिलों के कलेक्टर एवं अन्य अधिकारी शामिल हुए


मुख्य सचिव ने की समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की समीक्षा

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रायपुर। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिले के मिलर्स की बैठक लेकर उपार्जन केन्द्रों से धान उठाव और भारतीय खाद्य निगम और नागरिक आपूर्ति निगम में चावल जमा करने की लगातार मॉनिटरिंग करें। उन्होंने नए धान खरीदी केन्द्रों में धान उपार्जन की व्यवस्था की भी मैदानी अमलों के जरिए लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव आज यहां मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य में खरीफ वर्ष 2022-23 में धान खरीदी के संबंध में कमिश्नर और कलेक्टरों की बैठक में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की समीक्षा कर रहे थे।



मुख्य सचिव ने किसान पंजीयन, गिरदावरी की शुद्धता एवं शिकायतों का निराकरण, समिति स्तर पर नए एवं पुराने बारदाने की व्यवस्था और समर्थन मूल्य में धान खरीदी के एवज में किसानों को निर्धारित समयावधि में राशि भुगतान की भी जानकारी ली। उन्होंने बैठक में सहकारी समिति स्तर पर धान की सुरक्षा एवं रखरखाव और सीमावर्ती जिलों में अन्य राज्यों एवं कोचियों-बिचौलियों द्वारा अवैध धान विक्रय पर नियंत्रण, समितियों से मिलर्स द्वारा धान उठाव और मिलर्स द्वारा भारतीय खाद्य निगम और नागरिक आपूर्ति निगम में चावल जमा की समीक्षा की। बैठक में कृषि विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, खाद्य विभाग के सचिव टोपेश्वर वर्मा, राजस्व सचिव एन.एन.एक्का, नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक निरंजनदास सहित मार्कफेड, सहकारिता और अपेक्स बैंक के अधिकारी शामिल हुए।

कलेक्टरों ने बैठक में बताया कि राज्य शासन द्वारा बनाए गए नये धान खरीदी केन्द्रों में वहां के क्षेत्रीय किसानों में प्रसन्नता है। किसानों को नए धान खरीदी के बन जाने से काफी सुविधा हुई है। अब उन्हें अपने नजदीक में ही धान बेचने की सुविधा हो गई है। इसी तरह से राज्य के विभिन्न जिलों में वनाधिकार मान्यता पत्र धारक किसानों को भी समर्थन मूल्य पर धान बेचने का मौका मिला है, जिससे उन्हें फायदा हो रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य में धान खरीदी का महाभियान एक नवम्बर से प्रारंभ हुआ है। धान खरीदी का कार्य 31 जनवरी 2023 तक चलेगा। इस वर्ष राज्य सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर किसानों से 110 लाख मेट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य है। धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए धान का उठाव लगातार किया जा रहा है।

डीएमएफ से 72 हजार से ज्यादा स्वीकृत कार्यों के लिए 10 हजार करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत

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रायपुर। मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य स्तरीय जिला खनिज संस्थान न्यास की समीक्षा समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य में खनिज न्यास निधि से स्वीकृत कार्यों की समीक्षा की गई एवं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय निगरानी समिति के निर्णयों के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तार से समीक्षा की गई।



बैठक में बताया गया कि जिला खनिज न्यास निधि से राज्य के विभिन्न जिलों में 72 हजार 522 कार्य अब तक स्वीकृत किए गए है। इन कार्यो के लिए 10 हजार 608 करोड़ 88 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। स्वीकृत कार्यों में 44 हजार 472 कार्य पूर्ण कर लिए गए है, शेष कार्य प्रगति पर है। बैठक में सभी कलेक्टर्स को न्यास के उद्देश्य एवं न्यास निधि के व्यय के संबंध में छत्तीसगढ़ जिला खनिज न्यास 2015 के अनुसार ही कार्यों की स्वीकृति प्रदान करने के निर्देश दिए गए। इस पोर्टल के माध्यम से ही सभी जिलों में कार्यों की स्वीकृति एवं भुगतान सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए। कलेक्टरों से न्यास के उदेश्यों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार कर शासी परिषद से विधिवत अनुमोदन एवं क्रियान्वयन करने कहा है।

बैठक में जिला खनिज न्यास अधिनियम के अनुसार प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र एवं व्यक्तियों के चिन्हांकन पर की गई कार्यवाही की समीक्षा की गई। इसी तरह से अधिकारियों को शासी परिषद के गठन के नवीन संशोधनों की जानकारी दी गई। जिलों के न्यास निधि से प्राप्त राशि एवं स्वीकृति की प्रगति जिलेवार समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों को सचेत किया गया कि जिला खनिज संस्थान न्यासों के द्वारा न्यास के उदेश्यों से अलग स्वीकृत कार्यों को नहीं करने के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। बैठक में खनिज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री की फ्लैगशिप योजनाओं के कार्य जो डीएमएफ से स्वीकृत किए गए है,

इनमें नरवा,घुरवा,गरवा, बाड़ी के लिए 425 करोड़ 22 लाख रूपए, मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना के लिए 38 करोड़ 21 लाख रूपए,  मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के लिए 359 करोड़ 40 लाख रूपए, मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के लिए 6 करोड़ 56 लाख रूपए और मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालय योजना के लिए 4 करोड़ 54 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। इसी तरह से इंग्लिश मिडियम स्कूल के लिए 358 करोड़ 11 लाख रूपए और गौठानों के विकास हेतु 260 करोड़ 29 लाख रूपए स्वीकृत किए गए। वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में  खनिज विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, स्वास्थ्य विभाग के सचिव प्रसन्ना आर., विशेष सचिव वित्त श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा सहित खनिज विभाग के अन्य अधिकारी शामिल हुए।

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