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राज्य की नई औद्योगिक नीति को हमने रोजगार परक बनाया है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज शाम नवा रायपुर के मेफेयर रिसार्ट में छत्तीसगढ़ राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 को लांच किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने इस नई नीति को रोजगार परक और विजन-2047 के अनुरूप विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना को ध्यान में रखते हुए विकसित छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण का लक्ष्य तय किया है।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य के नई औद्योगिकी नीति 2024-30 को किया लांच 

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यदि कोई उद्योग एक हजार से अधिक युवाओं को रोजगार देता है तो हम उसे बी-स्पोक पॉलिसी के तहत और अधिक रियायतें देंगे। युवाओं को रोजगार मूलक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर हमने इस नीति में प्रति व्यक्ति 15 हजार रूपये प्रतिमाह तक का अनुदान देने का प्रावधान भी किया है।

हमने पहली बार इस नीति के माध्यम से राज्य में पर्यटन एवं स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं में निवेश को भी प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। हमारा राज्य देश के मध्य में स्थित है, आने वाले वर्षों में हम अपनी भौगोलिक स्थिति, आवागमन के आधुनिक साधनों और आप सबकी भागीदारी से प्रदेश को देश का ‘‘हेल्थ हब’’ बनाने में सफल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जगदलपुर के नजदीक हम लगभग 118 एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र का निर्माण प्रारंभ करने जा रहे हैं। पूर्व के ‘‘न्यूनतम 20 एकड़ भूमि’’ के स्थान पर अब हमने ‘‘15 एकड़ भूमि’’ पर निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्क की स्थापना की अनुमति देने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ संभवतः देश में पहला राज्य है, जिसने युवा अग्निवीरों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को स्वयं के रोजगार धन्धे स्थापित करने पर विशेष अनुदान एवं छूट का प्रावधान किया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं को स्वयं का रोजगार उपलब्ध कराने हेतु भी कटिबद्ध हैं। इसके लिए हम इन वर्गों के उद्यमियों को मात्र 1 रूपये प्रति एकड़ की दर पर औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि दे रहे है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी कोशिश होगी कि उद्योग स्थापना एवं संचालन में सरकारी हस्तक्षेप न्यूनतम हो एवं यथासंभव सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा ऑनलाइन माध्यम से हो ताकि आपके उद्योग हेतु आपको सरकार के पास आने की आवश्यकता ना हो।

इस मौके पर उपमुख्यमंत्री अरूण साव, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और मुख्य सचिव अमिताभ जैन, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन अमर परवानी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और उद्योगपति मौजूद रहे। नई औद्योगिक नीति के लांचिंग अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार ने नवीन औद्योगिक विकास नीति का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया।

औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के विशेष प्रावधान

छत्तीसगढ़ की औद्यौगिक विकास नीति 2024-30 को राज्य में 01 नवबंर 2024 से लागू किया गया है। यह नीति उद्योगों को निवेश करने, नये रोजगार सृजन करने और आर्थिक विकास को गति देने के लिये एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।

इस नीति के माध्यम से राज्य के युवाओं के लिए कौशलयुक्त रोजगारों का सूजन करते हुये अगले 5 वर्षों में 5 लाख नए औपचारिक क्षेत्र के रोजगार का लक्ष्य रखा गया है। इस नीति मैं स्थानीय श्रमिकों को औपचारिक रोजगार में परिवर्तित करने के लिए प्रशिक्षण कर प्रोत्साहन का प्रावधान करते हुये 1000 से अधिक रोजगार प्रदाय करने वाली इकाईयों को प्रोत्साहन के अतिरिक्त विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में सहभागिता के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला उद्यमियों, सेवानिवृत्त अग्निवीर, भूतपूर्व सैनिकों (जिनमें पैरा मिलेट्री फोर्स भी सम्मिलित है), नक्सल प्रभावित, आत्म-समर्पित नक्सलियों एवं तृतीय लिंग के उद्यमों का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने का प्रावधान किया गया है।

औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा को भारत सरकार द्वारा परिभाषित एम.एस.एम.ई. के अनुरुप किया गया है। इसी के अनुसार ही इन उद्यमों को प्राप्त होने वाले प्रोत्साहनों को अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनाया गया है।

राज्य सरकार द्वारा देश में सेवा गतिविधियों के बढ़ते हुये। रुझान को दृष्टिगत रखते हुये इस नीति में पहली बार सेवा क्षेत्र अंतर्गत एमएसएमई सेवा उद्यम एवं वृहद सेवा उद्यमों के लिये पृथक-पृथक प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। सेवा क्षेत्र अंतर्गत इंजीनियरिंग सर्विसेस, रिसर्च एंड डेव्हलपमेंट, स्वास्थ्य सेक्टर, पर्यटन एवं मनोरंजन सेक्टर आदि से संबंधित गतिविधियों को सम्मिलित किया गया है।

औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में विशिष्ट श्रेणी के उद्योगों जैसे फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाईल, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोंपज प्रसंस्करण, कम्प्रेस्ड बॉयो गैस, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू), आई.टी., आई.टी.ई.एस./डेटा सेंटर जैसे नवीन सेक्टरों के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान है।

इसके साथ ही थ्रस्ट सेक्टर के ऐसे उद्योग जहां राज्य का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है और जहां भविष्य के रोजगार आ रहे हैं, उन क्षेत्रों के लिये अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान है।

नीति में प्रोत्साहनों की दृष्टि से राज्य के विकासखण्डों को 03 समूहों में रखा गया है। समूह-1 में 10. समूह 2 में 61 एवं समूह 3 में 75 विकासखण्डों को वर्गीकृत किया गया है।

औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में विनिर्माण के लिए स्थाई पूंजी निवेश का 100 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र के लिए स्थाई पूंजी निवेश का 150 प्रतिशत तक का समग्र प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। नीति के माध्यम से एक ओर जहां राज्य के युवाओं को अपना स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ कर आत्मनिर्भर बनाने के लिये उद्यम कांति योजना का प्रावधान किया गया है, वहीं दूसरी ओर देश में बन रहे बड़े इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर के अनुरुप ही राज्य में भी NICDC के माध्यम से इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर औद्योगिक नगरी कोरबा-बिलासपुर-रायपुर की परिकल्पना की गई है। जो कि राज्य के औद्योगिक विकास में एक महत्तवपूर्ण कदम है।

इस नीति में प्रथम बार उद्यमों में राज्य के निवासियों को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिये स्थानीय रोजगार सृजन को लक्ष्य में रखकर 1000 अथवा इससे अधिक रोजगार सृजन के आधार पर विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान साथ ही उद्योगों में नियोजित राज्य के निवासी के प्रशिक्षण पर प्रति व्यक्ति रूपये 15,000 रूपए की प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति एवं कर्मचारियों पर होने वाले ई.पी.एफ. व्यय की प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है।

पहली बार ग्रीन उद्यम की परिकल्पना को साकार करने के लिये पर्यावरण संरक्षण उपायों को अपनाने के लिये औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन इनवायरमेंट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट अनुदान (पर्यावरणीय प्रोजेक्ट अनुदान), जल एवं उर्जा दक्षता (एनर्जी ऑडिट) व्यय प्रतिपूर्ति, गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं ग्रीन हाइड्रोजन/कम्प्रेस्ड बॉयोगैस सेक्टर के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

मतदान दिवस पर संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में सामान्य अवकाश घोषित

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2023 के लिए हो रहे दो चरणों में मतदान के लिए मतदान दिवसों पर संबंधित क्षेत्रों में सामान्य अवकाश की घोषणा की गई है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत प्रथम चरण के लिए 7 नवंबर 2023 को संबंधित 20 विधानसभा क्षेत्रों में तथा 17 नवंबर 2023 को दूसरे चरण के 70 विधानसभा क्षेत्रों में सभी शासकीय कार्यालयों एवं संस्थानों में सामान्य अवकाश घोषित किया गया है। 

इसके साथ ही इसके तहत वे कार्यालय अथवा संस्थान भी शामिल हैं जो निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881  के तहत शामिल हैं। इसके अतिरिक्त निजी संस्थानों,औद्योगिक तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अधिकारी तथा कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश दिए जाने का निर्देश जारी किया गया है।

निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार श्रम विभाग ने विधानसभा निर्वाचन के लिए औद्योगिक, व्यावसायिक तथा अन्य प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को मतदान दिवस को सवैतनिक अवकाश दिए जाने संबंधी आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 151 की धारा 135 (ख) के तहत प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में संचालित औद्योगिक , व्यावसायिक तथा अन्य प्रतिष्ठान इस बात को सुनिश्चित करें कि मतदान दिवस पर कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश दिया जाए। 

आयोग के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश तथा तेलंगाना में मतदान तिथि 17 नवंबर तथा 30 नवंबर को निजी तथा सार्वजनिक प्रतिष्ठानों / दुकानों, औद्योगिक उपक्रम या व्यवसाय में कार्यरत संबंधितों के लिए उनके गृह राज्य में मतदान दिवस को सवैतनिक अवकाश घोषित किया गया है।  सवैतनिक अवकाश नहीं देने पर नियोक्ता पर दण्डात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। आयोग के अनुसार वे कर्मचारी भी अवकाश के पात्र होंगे जिनका नाम अन्य निर्वाचन क्षेत्र  में दर्ज है।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जो सप्ताह में सातों दिन कार्य करते हैं उन कारखानों में प्रथम एवं द्वितीय पाली के श्रमिकों को मतदान के दिन 02-02 घंटे का अवकाश घोषित किया जाए या बारी -बारी से मतदान करने की सुविधा प्रदान की जाए। मतदान की सुविधा समस्त कार्यरत श्रमिकों अथवा कर्मचारियों चाहे दैनिक वेतनभोगी या आकस्मिक श्रमिक हो उनको भी प्रदान की जाए।

एसआईएस लिमिटेड द्वारा 550 पदों पर की जाएगी भर्तीजनपद स्तर पर होगा शिविर का आयोजन

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बिलासपुर। बेरोजगार युवकों को सुरक्षा के क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए एसआईएस (इंडिया) लिमिटेड द्वारा जिले में शिविर आयोजित की जाएगी। इस शिविर के माध्यम से कंपनी द्वारा सिक्योरिटी गार्ड के 500 और सुपरवाइजर के 50 पदों के लिए अभ्यर्थियों का चयन कर प्रशिक्षण दिया जायेगा और प्रशिक्षण के बाद राष्ट्रीय स्तर के औद्योगिक संस्थानों में स्थाई नौकरी दी जाएगी।

जिला पंचायत से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त पदों में भर्ती हेतु जिले के जनपद पंचायत बिल्हा में 27 जून, मस्तूरी में 28 जून, तखतपुर में 30 जून एवं कोटा में 3 जुलाई को प्रातः 10 बजे से 4 बजे तक शिविर लगाया जाएगा। इच्छुक आवेदकों के लिये शैक्षणिक योग्यता 10 वीं उत्तीर्ण होने के साथ आयु 21 से 35 वर्ष, ऊँचाई 168 सेंटीमीटर से ऊपर और वजन 56 से 90 किलो के बीच होना चाहिए। शिविर में चयनित अभ्यर्थियों से 350 रुपए पंजीयन शुल्क के रूप में ली जायेगी।

सरकार किसानों को पैसा देना चाहती है टारगेट लीजिए, फॉलो कीजिए

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कोरबा। मुख्यमंत्री के सलाहकार, योजना, नीति, कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रदीप शर्मा ने आज जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरबा औद्योगिक जिला होने के साथ वनांचल क्षेत्र भी है। यहां आजीविका गतिविधियों को संचालित व विकसित करते हुए ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने की अपार संभावनाएं हैं। 

रूरल इंडस्ट्रियल पॉलिसी इसलिए बनाई गई है कि गांव उत्पादन का केंद्र बने, शहरों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकें और सरकार द्वारा दिए गए लक्ष्यों के अतिरिक्त गतिविधियों का चयन भी स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान रखकर किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को अलग-अलग आजीविका गतिविधियों तथा उत्पादों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पैसा देना चाहती है, आप सभी अधिकारी नेतृत्वकर्ता है इसलिए टारगेट (लक्ष्य) लेकर इस दिशा में आगे बढ़िए।

जिला पंचायत सभा कक्ष में बैठक लेते हुए मुख्यमंत्री के सलाहकार शर्मा ने जिले में संचालित नरवा, गौठान तथा रीपा की जानकारी ली। उन्होंने गौठान तथा रीपा की गतिविधियों को अलग-अलग संचालित करने, सभी ग्राम पंचायतों में गौठान को सक्रिय करने तथा गोबर खरीदी को बढ़ाने के निर्देश दिए। शर्मा ने राजस्व गौठानों की संख्या बढ़ाने आश्रित ग्रामों का चयन भी करने के निर्देश दिए। उन्होंने उपचारित नालों से स्वास्थ्य, जैव विविधता, जल संवर्धन तथा कृषि के क्षेत्र में आए परिवर्तन को रेखांकित करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

नरवा अंतर्गत संरचनाओं में आंशिक बदलाव तथा किसानों को इससे लाभान्वित करने के निर्देश देते हुए शर्मा ने कहा कि नाला बनने का लाभ किसानों को मिला है, जागरूकता आने के साथ जल के प्रति सोच बदली है। उन्होंने जिले में औद्योगिक क्षेत्रों में मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाने और रोजगार उत्पन्न करने के संबंध में निर्देश देते हुए कहा कि बाजार में बहुत पैसा है, लोगों के पास भी पैसा पहुंचे, इसके लिए उत्पादन के साथ निर्माण के क्षेत्र में युवाओं की सहभागिता को बढ़ाने की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बिजली, पाली, शेड, मशीन, बैंक लोन, प्रशिक्षण आदि सुविधाएं भी दी जा रही है।

इसके लाभ को बताते हुए युवाओं को इससे जोड़ा जाना चाहिए। शर्मा ने सोनहा लाख के उत्पादन के अलावा मत्स्य उत्पादन, फिशरिज पिकल दुग्ध उत्पादन, मुर्गीपालन को बढ़ाने, लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग सहित अन्य विभागों की आवश्यकताओं के आधार पर सामग्री तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिन स्थानों पर रीपा संचालित है, वहां आसपास के पांच गांव को भी शामिल करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के सलाहकार शर्मा ने जिले के ऐसे गौठान समितियां जो क्रियाशील नहीं है, उन्हें बदलने के निर्देश देेते हुए सक्रिय करने के निर्देश दिए। 

उन्होंने गौठानों में गोबर खरीदी को बढ़ाने और वर्मी कम्पोस्ट निर्माण को बढ़ाने के निर्देश देते हुए समूह की महिलाओं को प्रेरित करने के निर्देश दिए। शर्मा ने जिले में उत्पादन की नई संभावनाओं पर चर्चा करते हुए यू-ट्यूब आदि से भी जानकारी हासिल करने की बात कही। उन्होंने राजीव युवा मितान क्लब के युवाओं की सहभागिता के निर्देश भी दिए। बैठक में कलेक्टर संजीव कुमार झा ने जिले में नाबार्ड के माध्यम से फल, सब्जी सहित करतला क्षेत्र में काजू उत्पादन के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि जिला स्तर पर नई गतिविधियों को संचालित करने योजना बनाई जा रही है। जिसे रीपा से जोड़कर क्रियान्वित किया जाएगा। इस दौरान पुलिस अधीक्षक उदय किरण, जिला पंचायत के सीईओ नूतन कंवर, वनमण्डलाधिकारी अरविंद पीएम, श्रीमती प्रेमलता यादव, अपर कलेक्टर सहित सभी एसडीएम अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

बीमार एवं बंद उद्योगों के लिए निवेश प्रोत्साहन नीति एवं औद्योगिक व वाणिज्यिक विकास के लिए राज्य लॉजिस्टिक्स नीति लागू

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रायपुर। अर्थव्यवस्था के मानकों के हिसाब से देखें तो किसी राज्य के विकास में उद्योगों की भूमिका अहम मानी जाती है। उद्योग रोजगार सृजन करने के साथ ही राज्य की विकास दर में भी वृद्धि करता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य में लागू नवीन औद्योगिक नीति से राज्य में निवेश बढ़ा है। 

राज्य सरकार ने उद्योगों के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ में बंद एवं बीमार उद्योग के लिए नई नीति लागू की है। इससे बंद एवं बीमार उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा और वे बेहतर तरीके से संचालित हो पायेंगे। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू लॉजिस्टिक्स नीति की मदद से निर्यात में बढ़ोतरी के साथ ही कृषि सहित अन्य उत्पादों के प्रसंस्करण व भंडारण को प्रोत्साहन मिलेगा।

छत्तीसगढ़ राज्य लॉजिस्टिक नीति-2022

राज्य में औद्योगिक विकास के साथ-साथ वाणिज्यिक विकास को बढ़ावा देने, देश के कुल निर्यात में राज्य का योगदान बढ़ाने, राज्य में उपलब्ध खनिज सम्पदा का समुचित दोहन, सुदूर अंचलों में कृषि को प्रोत्साहित करने एवं अनाज तथा अन्य उत्पादों के प्रसंस्करण व भण्डारण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य लॉजिस्टिक्स नीति-2022 (01 नवम्बर 2019 से 31 अक्टूबर 2024) लागू की गई है। इस नीति के तहत लॉजिस्टिक, वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज की स्थापना, एकल स्वामित्व,

साझेदारी, कंपनी, सीमित दायित्व साझेदारी, सहकारी समिति, हिन्दू अविभाजित परिवार, स्वयं सहायता समूह तथा कृषक उत्पादक संगठन द्वारा किए जाने पर औद्यौगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता है। इस नीति के अंतर्गत उद्यमों में किये गये स्थायी पूंजी निवेश का 35-55 प्रतिशत तक अधिकतम राशि रूपये 35-350 लाख तक स्थायी पूंजी निवेश अनुदान, 50-60 प्रतिशत अधिकतम राशि रूपये 10-55 लाख तक ब्याज अनुदान, वाणिज्यिक उत्पादन प्रारम्भ करने के दिनांक से 5-8 वर्ष तक विद्युत शुल्क से पूर्ण छूट, स्टॉम्प शुल्क से छूट तथा परिवहन वाहन अनुदान दिए जाने का प्रावधान है।

छत्तीसगढ़ बंद एवं बीमार उद्योगों हेतु विशेष निवेश प्रोत्साहन नीति

वर्तमान में राज्य में औद्योगिक क्षेत्रों एवं औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर भी उद्योग स्थापित हुए हैं। प्रदेश में जितनी तीव्र गति से उद्योगों की स्थापना हो रही है उनसे जुड़ी हुई विभिन्न प्रकार की समस्याओं के कारण इन स्थापित उद्योगों में से कुछ उद्योग बीमार एवं बंद भी हुए हैं। इन बीमार व बंद उद्योगों को पुनः संचालित किये जाने, पुनः रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ बंद एवं बीमार उद्योगों हेतु विशेष निवेश प्रोत्साहन नीति 2019 लागू की गई है। इसके तहत् बीमार एवं बंद उद्योगों के पुर्नवास और पुर्नसंचालन पैकेज अंतर्गत स्टाम्प शुल्क से छूट, पंजीयन शुल्क से पूर्ण छूट, ब्याज अनुदान, स्थायी पूंजी निवेश अनुदान, परियोजना प्रतिवेदन अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, तकनीकी पेटेंट अनुदान, प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान, निःशक्त अनुदान, विद्युत शुल्क से छूट, प्रवेश कर भुगतान से छूट एवं मण्डी शुल्क छूट प्रदान करने का प्रावधान है।

फर्जीवाड़ा : मुख्यमंत्री का ओएसडी बताकर मंत्रालय में बेधड़क घूमता रहा, अब खा रहा जेल की हवा

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रायपुर। मुख्यमंत्री के ओएसडी की फर्जी आईडी का इस्तेमाल करने के आरोप में पुलिस ने छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के सहायक प्रबंधक यू. रवि पटनायक को गिरफ्तार कर चौदह दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। वहीं, बलौदाबाजार में जीवित लोगों को मृत बताकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने और खाता खुलवाकर मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु दिव्यांग सहायता योजना के तहत एक लाख रूपये का गबन करने का खुलासा हुआ है। इस मामले में छत्तीसगढ भवन सन्निर्माण मजदूर संघ की सदस्य और संघ के उपाध्यक्ष सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 

पलारी थाना क्षेत्र में एक महिला ने इस मामले की शिकायत थाने में दर्ज कराई थी। इधर, बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में स्थित एक्सिस बैंक में करोड़ों रूपये की राशि की धोखाधड़ी और गबन का पर्दाफाश हुआ है। बैंक के तीन कर्मचारियों ने एक निजी एजेंसी के साथ मिलीभगत कर यह राशि निकाल ली। शाखा प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

वहीं, भिलाई में केएफसी की फ्रेंचाइजी लेने के नाम पर नौ लाख रूपये से अधिक की ठगी का मामला सामने आया है। सुपेला थाना प्रभारी के अनुसार अभनपुर नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने अपनी बेटी के नाम पर फ्रेंचाइजी लेने के लिए एक वेबसाइट पर आवेदन किया था। जहां से दो लोगों ने खुद को कंपनी का अधिकारी बताकर अलग-अलग किस्तों में राशि जमा कराई।

विशेष लेख : न्याय के चार साल: सस्ती बिजली सबको बिजली

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विद्युत सरप्लस राज्य है। यहां लगभग 2 हजार 978 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा है। यहां से केन्द्रीय पुल में विद्युत देने के साथ ही देश के अन्य राज्यों को आपूर्ति भी की जा रही है। विद्युत सरप्लस राज्य होने के कारण यहां उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण है। ताप विद्युत गृहों और बढ़ती विद्युत अधोसंरचनाओं से देश के विद्युत उत्पादन में छत्तीसगढ़ अग्रणी स्थान पर है। छत्तीसगढ़ में घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों के साथ-साथ औद्योगिक प्रतिष्ठान को भी सस्ती बिजली का लाभ दिया जा रहा है। किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पम्प की क्षमता के अनुसार 6 हजार से 7 हजार यूनिट बिजली रियायती दर पर दी जा रही है। 



इसके अलावा किसानों को फ्लैट रेट की सुविधा भी दी जा रही है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को पूरी बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक 6.26 लाख किसानों को सिंचाई पम्पों पर विद्युत खपत में 10 हजार 400 करोड़ रूपए की छूट दी गई है। देश के अन्य राज्यों में महंगी बिजली से लोग परेशान है। वहीं छत्तीसगढ़ में सस्ती बिजली से लोग प्रसन्न है। मुख्यमंत्री का मानना है कि छत्तीसगढ़ में बिजली का उत्पादन अधिक है, तो इसका फायदा यहां के लोगों को मिलना चाहिए।


छत्तीसगढ़ में सस्ती बिजली मिलने से लोगों के रहन-सहन में तेजी से बदलाव आ रहा है। घरों में विद्युत उपकरणों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 01 मार्च 2019 से लागू की गई, हाफ बिजली बिल योजना का लाभ राज्य के लगभग 42 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को मिल रहा है। बिजली बिल में हो रही बचत राशि का उपयोग परिवार में अन्य जरूरी आवश्यकताओं के लिए उपयोग हो रहा है। अब तक घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल में 3236 करोड की राहत दी गई है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को एकलबत्ती कनेक्शन के जरिए विद्युत की आपूर्ति की जा रही है। 30 यूनिट मासिक विद्युत का उपयोग करने वाले 16.82 लाख परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है। इस योजना में विद्युत खपत पर 1973 करोड़ रूपए की छूट दी गई है।

अधोसंरचना में मजबूती

मुख्यमंत्री विद्युत अधोसंरचना विकास योजना में नये विद्युत के उपकेन्द्रों की स्थापना और विद्युत लाईनों के विस्तार का काम हो रहा है। इन कार्याें के लिए 817 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है। पिछले चार वर्षाें में 59 नये 33/11 केव्ही सबस्टेशन की स्थापना के साथ-साथ 173 किलोमीटर 33 केव्ही और 276 किलोमीटर 11 केव्ही बिजली लाईन विस्तार की गई। नगर निगम क्षेत्रों में मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना में विद्युत लाईन विस्तार और अधोसंरचना के कार्याें के लिए चार वर्षाें मंे 172 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है, जिससे अब तक 2617 कार्य पूर्ण किए गए हैं। मुख्यमंत्री मजरा-टोला विद्युतीकरण योजना में 238 करोड़ रूपए की लागत से 4593 कार्य कराए गए।

कोरोना काल में उद्योगों को राहत

 

कोरोना काल में इस्पात उद्योगों को मंदी से उबारने के लिए राज्य सरकार द्वारा ऊर्जा प्रभार में राहत दी गई। अप्रैल 2019 से अधिसूचित टेरिफ में ऊर्जा प्रभार पर 80 पैसे प्रति यूनिट की रियायत इस्पात उद्योगों को दी गई। जिसके तहत वर्ष 2019 में मार्च माह तक 413 उद्योगों को 418 करोड़ रुपए की रियायत प्रदान की गई।

पॉवर ट्रांसमिशन

प्रदेश में विद्युत पारेषण विस्तार के लिए 36 अति उच्च दाब के निर्माण का काम पूरा किया गया। साथ ही कुरूद में 400 केव्ही क्षमता का उपकेन्द्र, जगदलपुर, नारायणपुर और बिलासपुर (धरदेही) में 220 केव्ही और बीजापुर, उदयपुर, खैरागढ़, खरमोरा एवं इंदामारा में 132 केव्ही की स्थापना कर ऊर्जीकृत किया गया है।

नये पावर प्लांट

नए पावर प्लांट की स्थापना प्रदेश में 12 हजार 915 करोड़ रूपए की लागत से नवीन 1320 मेगावाट सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना की स्थापना की जाएगी। हसदेव ताप विद्युत गृह, दर्री (कोरबा पश्चिम) में उपलब्ध रिक्त भूमि पर 660-660 मेगावाट क्षमता की दो सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर इकाईयां स्थापित होगी। इसके साथ ही साथ 7700 मेगावाट के पंप स्टोरेज तकनीक आधारित जल विद्युत परियोजना पर काम प्रारंभ किया गया है।

मोर बिजली एप

घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की शिकायत दर्ज करने के लिए मोर बिजली-मोर एप तैयार किया गया है। इस एप के जरिए घेरलू बिजली खपत की जानकारी के साथ-साथ नये कनेक्शन के लिए आवेदन, कनेक्शन बिजली बिल संबंधी शिकायत सहित विद्युत विभाग की सभी सेवाओं का लाभ उठाया जा सकता है। इसके अलावा विद्युत आपूर्ति में व्यवधान, शिकायतों के लिए केन्द्रीयकृत कॉल सेंटर भी बनाया गया है, जिससे विद्युत आपूर्ति से संबंधी शिकायतों का तत्काल निराकरण हो सके।

विशेष लेख : न्याय के चार साल : औद्योगिक नवाचार की संभावनाओं से भरपूर छत्तीसगढ़

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की नवीन औद्योगिक नीति 2019-2024 में फूड, एथेनॉल, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस, दवा, सोलर जैसे नए उद्योगों को प्राथमिकता दी गई हैं। सेवा क्षेत्र को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा कृषि, लघु वनोपज, वनौषधियों, उद्यानिकी फसलों पर आधारित उद्योगोें को प्राथमिकता दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में उद्योग और व्यापार जगत के लोगों से विस्तृत विचार विर्मश के बाद तैयार की गई नई औद्योगिक नीति में किए गए इन प्रावधानों से छत्तीसगढ़ औद्योगिक नवाचार की संभावनाओं से भरपूर राज्य के रूप में तेजी से उभर रहा है।



छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक नीति के अंतर्गत स्टार्टअप इकाईयों को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य स्टार्टअप पैकेज लागू किया गया है। मान्यता प्राप्त 688 स्टार्टअप इकाईयों में से 508 इकाईयों को बीते चार वर्षो में पंजीकृत कर विशेष प्रोत्साहन पैकेज का लाभ दिया जा रहा है। एम.एस.एम.ई सेवा श्रेणी उद्यमों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिग स्टेशन, सेवा केन्द्र, बी.पी.ओ. 3-डी प्रिंटिंग, बीज ग्रेडिंग इत्यादि 16 सेवाओं को सामान्य श्रेणी के उद्योगों की भांति औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान किया गया है। मेडिकल उपकरण तथा अन्य सामग्री निर्माण के लिए उद्योगों की भांति औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन देने का प्रावधान भी किया गया है।



राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में 10 नवीन फूड पार्क की स्थापना की स्वीकृति दी गई है। सुकमा में 5.9 हेक्टेयर भूमि पर फूड पार्क की स्थापना के लिए आवश्यक अधोसंरचना निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। राज्य में 200 फूड पार्क की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के 146 विकासखण्डों में से 112 विकासखण्डों में फूड पार्क के लिए जमीन चिन्हांकित कर ली गई है। इसमें से 52 विकासखण्डों में 620 हेक्टेयर भूमि का अधिपत्य उद्योग विभाग को दिया गया है।

उद्योगों को दी जा रही अनेक रियायतें

अनुसूचित जाति, जनजाति एवं महिला वर्ग के उद्यमियों द्वारा 5 करोड़ के पूंजी लागत तक के नवीन उद्योग की स्थापना पर 25 प्रतिशत अधिकतम सीमा 50 लाख मार्जिन मनी अनुदान देने का प्रावधान। औधोगिक नीति 2019-24 में वनांचल उद्योग पैकेज के अंतर्गत स्थापित होने वाली इकाईयों को कुल निवेश का 50 प्रतिशत, 5 वर्षो में अधिकतम 50 लाख प्रति वर्ष अनुदान देने का प्रावधान। औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन नियमों का सरलीकरण किया गया था, जिसके अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन भू-प्रब्याजी में 30 प्रतिशत की कमी की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों में भू-भाटक में 33 प्रतिशत की कमी की गई है। राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक इकाईयों को 423 करोड़ रूपए स्थाई पूंजी निवेश अनुदान और 141 करोड़ ब्याज अनुदान दिया गया है।



ऐसे अनेकों प्रयासों के कारण छत्तीसगढ़ में नये उद्योगों की स्थापना हो रही है। राज्य में 10 साल या उससे अधिक समय से उत्पादनरत् औधोगिक इकाईयों को लीज पर आबंटित भूमि को फ्री-होल्ड कर निवेशकों को मालिकाना हक दिया जा रहा है, ऐसा करने वाला छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य है। उद्योग विभाग द्वारा एकल खिड़की प्रणाली से 56 सेवाएं ऑनलाइन दी जा रही हैं। ई-डिस्ट्रिक्ट के अंतर्गत 82 सेवाएं ऑनलाइन की गई हैं, जिसमें दुकान पंजीयन से लेकर कारोबार के लायसंेस तक शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति में उद्योगों की स्थापना के नियमों का सरलीकरण किया गया है। उद्यमियों को अनेक रियायतें दी जा रही है। स्वीकृति की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाया गया है, इससे प्रदेश में उद्योग के लिए अनुकूल माहौल बना है और पूंजी निवेश को बढ़ावा मिल रहा है। सरकार द्वारा नई औद्योगिक नीति में ऐसे अनेक प्रावधान किये गए हैं, जिनसे नवीन उद्योगों की स्थापना के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहन मिल रहा है और नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं। इससे प्रदेश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ रही है।

इज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में छत्तीसगढ़ देश के प्रथम 6 राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार ने नई औद्योगिक नीति 2021-2024 में उद्योगों की स्थापना से जुड़े नियमों को सरल बनाया है। पहले उद्योगों को स्थापना से पूर्व की प्रक्रियाओं में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। विभागीय स्वीकृति, कागजी कार्यवाही एवं अन्य कठिनाईयों के कारण उद्योग की स्थापना की प्रक्रिया में विलंब होता था। नई औद्योगिक नीति में इन सभी समस्याओं को दूर करने के लिए उद्योगों को विभिन्न स्वीकृतियां प्रदान करने के लिए एकल खिड़की प्रणाली लागू की गई है एवं कठिन प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है।

प्रदेश में 21 हजार करोड़ रूपए से अधिक का पूंजी निवेश, 2218 नए उद्योग स्थापित

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा औद्योगिक विकास को गति देने के लिए गए निर्णय के परिणाम स्वरूप राज्य में पिछले 4 वर्षो में 2218 नए उद्योग स्थापित हुए, जिसमें 21 हजार 457 करोड़ रूपए से अधिक का निवेश हुआ तथा 40 हजार 324 लोगों को रोजगार मिला है। प्रदेश में नए उद्योगों की स्थापना के लिए 167 एमओयू किये गए हैं। जिसमें 78 हजार करोड़ रूपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित हैं। इससे 90 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। इन्हे मिलाकर वर्तमान स्थिति में उद्योगों की स्थापना के लिए 177 एम.ओ.यू. प्रभावशील हैं, जिसमें 89 हजार 597 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश और 1 लाख 9 हजार 910 लोगों को रोजगार दिया जाना प्रस्तावित है। 90 से अधिक इकाईयों द्वारा उद्योग स्थापना की प्रक्रिया में 4 हजार 126 करोड़ से अधिक का पूंजी निवेश पर 11 इकाईयों ने व्यवसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है।

कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण आधारित 486 इकाइयां स्थापित

राज्य में साढ़े 3 सालों में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण पर आधारित 486 इकाइयां स्थापित हुई हैं जिसमें 9 सौ 31 करोड़ रूपए का पूंजी का निवेश हुआ है। इसी तरह से छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश में नई औद्योगिक नीति के क्रियान्वयन से रोजगार, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। बीते चार सालों में राज्य के निर्यात में तीन गुना वृद्धि आई है। वर्ष 2019-20 में 9067.29 करोड़, वर्ष 2020-21 में 17199.97 करोड़ तथा वर्ष 20121-22 में 25241.13 करोड़ रूपए का चावल, आयरन एवं स्टील एल्यूमिनियम एवं एल्यूमिनियम उत्पादों का निर्यात हुआ है। उद्योगों की स्थापना के नियमों के सरलीकरण और उद्यमियों को दी जा रही रियायतों से प्रदेश में उद्योग के लिए अनुकूल माहौल बना है।

खेल अकादमी : छत्तीसगढ़ में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए औद्योगिक इकाइयां करेगी पहल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए विभिन्न औद्योगिक इकाइयों द्वारा खेल अकादमी संचालित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में खेल और युवा कल्याण विभाग तथा औद्योगिक इकाइयों की बैठक हुई। इसमें भिलाई इस्पात संयंत्र-बीएसपी, और राष्ट्रीय खनिज विकास निगम-एनएमडीसी, भारत एल्युमीनियम कंपनी-बालको सहित नौ औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक में बीएसपी ने नारायणपुर में मलखंभ अकादमी स्थापित करने के लिए सहमति दी। वहीं, बालको द्वारा कोरबा के प्रियदर्शिनी स्टेडियम में फुटबॉल, वालीबॉल, बास्केटबॉल और तैराकी अकादमी स्थापित की जाएगी।



साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड-एस.ई.सी.एल. ने बिलासपुर में राज्य खेल प्रशिक्षण केन्द्र के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर सहमति दी। अल्ट्राटेक सीमेंट द्वारा रायपुर में आवासीय हॉकी अकादमी और श्री बजरंग पावर एण्ड इस्पात लिमिटेड द्वारा आवासीय एथलेटिक अकादमी संचालित की जाएगी। इसी तरह, गोपाल स्पंज एण्ड पॉवर लिमिटेड और फिल इस्पात लिमिटेड द्वारा बिलासपुर के बहतराई में बालिका कबड्डी अकादमी के लिए आर्थिक सहयोग दिया जाएगा। जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड द्वारा नवा रायपुर में निशानेबाजी अकादमी का संचालन किया जाएगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बीते पंद्रह जून को छत्तीसगढ़ खेल विकास प्राधिकरण की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि प्रदेश में खेल अकादमियों के संचालन में औद्योगिक इकाइयों के सामाजिक दायित्व कोष यानी सीएसआर फंड का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके तहत विभिन्न इकाइयों को अलग-अलग खेल अकादमियों के संचालन का दायित्व सौंपा जाएगा। उद्योगों द्वारा संचालित होने वाली इन खेल अकादमियों में राज्य के खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण के साथ ही भोजन, आवास और शिक्षा की सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जाएगी।

गोधन न्याय योजना : आठ करोड़ रूपए ऑनलाइन जमा

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज अपने निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में इस योजना की संतावनवीं किस्त के रूप में  करीब आठ करोड़ रूपए ऑनलाइन तरीके से जमा कराए। इस योजना के तहत गोबर विक्रेता पशुपालकों और ग्रामीणों को अब तक लगभग एक सौ नवासी करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों द्वारा खुद की जमा पूंजी से गोबर खरीदना, गोधन न्याय योजना की बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आधे से अधिक गौठान अपने ही संसाधनों से गोबर खरीद रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में ग्रामीण औद्योगिक परिक्षेत्र को विकसित करने में यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनेगी।



इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अधिक से अधिक गौठानों में पैरा बंडल बनाने के लिए बेलर मशीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कार्यक्रम को संबोधित करते हए कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि प्रदेश के साढ़े नौ हजार से अधिक गौठानों में से चार हजार दो सौ सत्तर गौठान स्वावलंबी हो गए हैं। इनमें गोबर खरीदी के साथ ही वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन और वितरण का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गौठानों की गतिविधियों का विस्तार करते हुए इनमें युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जाएंगे।

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