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छत्तीसगढ़ की भावी पीढ़ी के साथ मिलकर करेंगे सेवा और गढ़ेंगे नवा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ हमेशा से शांति का टापू रहा है, हमारे पुरखों ने इसे सहेजा है। हम भावी पीढ़ी के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ महतारी की इस धरा की सेवा करें और नवा छत्तीसगढ़ गढ़े। यह संदेश मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज बस्तर प्रवास के दौरान आईएनएच न्यूज के संवाद 2023 कार्यक्रम के दौरान दिया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में बच्चे सुपोषित हो, उन्हें शिक्षा और रोजगार मिले, पिछले पौने पांच सालों में हमने इसे सर्वाेच्च प्राथमिकता दी। पिछले पौने पांच सालों में हमने किसान, मजदूर, आदिवासी, महिलाओं और युवाओं के जेब में लगभग पौने 2 लाख करोड़ रूपए डाले हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि आज बस्तर के सुदूर अंचलों में गाड़ियों के शोरूम खुल रहे हैं, इसका मतलब है कि लोगों की जेब में पैसे पहुंचे हैं।

हमने कांक्रीट के जंगलों को बढ़ावा नहीं दिया, हम व्यक्ति को इकाई मानकर राज्य का विकास कर रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ में बच्चे सुपोषित हो रहे हैं, महिलाएं एनीमिया मुक्त हो रही हैं। बस्तर आज मलेरिया से लगभग मुक्त हो चुका है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि हमने अपने पुरखों की संस्कृति को सहेजने का काम किया है। बस्तर में 2400 से अधिक देवगुड़ियों का निर्माण किया। घोटुल का निर्माण कराया, बादल के माध्यम से जनजाति संस्कृति को संरक्षण और बढ़ावा दिया जा रहा है। आदिवासी नृत्य महोत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति का गौरव और व्यापकता देश-दुनिया के सामने आई है।

उन्होंने कहा कि हम राम वनगमन पथ के माध्यम से भगवान राम और माता सीता के प्रवेश स्थल कोरिया से लेकर सुकमा के रामाराम तक, जहां-जहां उनके कदम पड़े उन्हें जनभावना के अनुरूप आस्था स्थलों के रूप में विकसित करने का काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि आज हम छत्तीसगढ़ के परंपरागत तीज-त्यौहारों को उमंग के साथ मना रहे हैं। अपनी संस्कृति से लोगों का जुड़ाव हो, इस उद्देश्य के साथ परंपरागत त्यौहारों पर शासकीय अवकाश की घोषणा की गई है। हमने विश्व आदिवासी दिवस पर भी शासकीय अवकाश घोषित किया है और प्रदेशवासी आज उत्सुकता के साथ गांव-गांव में आदिवासी दिवस मना रहे है।

सार्थक संवादपुस्तक का किया विमोचन

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी द्वारा लिखित पुस्तक सार्थक संवादका विमोचन किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल, संसदीय सचिव रेखचंद जैन, विधायक बृजमोहन अग्रवाल, पूर्व मंत्री केदार कश्यप मौजूद रहे।

सीएम के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति एवं सभ्यता को मिल रही है अंतर्राष्ट्रीय पहचान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य का 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। 42 तरह की जनजातियां प्रदेश में निवास करती हैं। इन सभी जनजातियों के अपने-अपने तीज-त्यौहार हैं, अपनी-अपनी संस्कृति है, अपनी-अपनी कला परंपराएं हैं। इन्हीं सबसे मिलकर छत्तीसगढ़ राज्य की सुंदर संस्कृति और परंपराओं का निर्माण होता है। छत्तीसगढ़ में जनजातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 31 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति एवं सभ्यता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।



इसी कड़ी में राज्य में तीसरी बार आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री बघेल की पहल पर इंटरनेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल के रूप में एक बहुत महत्वपूर्ण परंपरा की शुरुआत छत्तीसगढ़ में की गई है। यह प्रयास न केवल छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि देश और पूरी दुनिया के जन-जातीय समुदायों के आपसी मेलजोल, कला-संस्कृतियों के आदान-प्रदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध साबित हो रहा है। 

इस आयोजन में भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय कलाकारों की टीमों के साथ-साथ 09 देशों के जनजातीय कलाकारों की टीमें भी शामिल हो रही हैं। इस वर्ष यह आयोजन 01 नवंबर से शुरू हो रहा है। यह छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की तारीख भी है। रायपुर में राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य महोत्सव का आयोजन तीन दिनों तक किया जाएगा। इस आयोजन में 1500 जनजातीय कलाकार शामिल होंगे। इनमें से 1400 कलाकार भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के हैं, और 100 कलाकार विदेशों के होंगे।



अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का यह तीसरा आयोजन है। पिछले वर्ष इस आयोजन में 12 देशों ने रुचि ली थी, जिनमें से 07 ने इसमें हिस्सा लिया था। इस साल 26 देशों ने रुचि प्रदर्शित की है, इनमें से 09 देश इस महोत्सव में शामिल होने जा रहे हैं। इस आयोजन में मोजांबिक, मंगोलिया, टोंगो, रशिया, इंडोनेशिया, मालदीव, सर्बिया, न्यूजीलैंड और इजिप्ट के जनजातीय कलाकार हिस्सा लेंगे।

इंटरनेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल में दो कैटेगिरी में प्रतियोगिताएं होंगी। विजेताओं को कुल 20 लाख रुपए के पुरस्कारों का वितरण किया जाएगा। प्रथम स्थान के लिए 05 लाख रुपए, द्वितीय स्थान के लिए 03 लाख रुपए और तृतीय स्थान के लिए 02 लाख रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। 01 नवंबर को सुबह नृत्य महोत्सव का शुभारंभ होगा और शाम को राज्योत्सव के अवसर पर राज्य अलंकरण दिया जाएगा।

03 नवंबर को नेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल का समापन होगा। इस महोत्सव के माध्यम से न केवल राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय कलाकारों के बीच उनकी कलाओं की साझेदारी होगी, बल्कि वे एक-दूसरे के खान-पान, रीति-रिवाज, शिल्प-शैली को भी देख-समझ सकेंगे। महोत्सव के दौरान संगोष्ठियां भी होंगी, जिनमें जनजातीय विकास के बारे में विमर्श होगा। जाने-माने विशेषज्ञ भी इसमें शामिल होंगे।

छत्तीसगढ़ फिर बना देशी-विदेशी जनजाति कला-संस्कृतियों का संगम

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दूसरी बार आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में देश-विदेश की जनजाति कला-संस्कृतियों का अनूठा संगम दिखाई दिया। भारत के निकोबारी, कोया, टोडा, घूमरा, छाऊ के साथ विदेशी इकोंबी, दबका, बाटा नृत्य की थाप से एक बार फिर राजधानी गूंज उठी। अलग-अलग भाषा-बोली, वेषभूषा, गीत-नृत्य शैली के बाद भी सुर-ताल के एक रंग में देशी-विदेशी कलाकार रंगे नजर आए और अनेकता में एकता का अनुपम उदाहरण पेश किया। 

कार्यक्रम की शुरुआत देशी-विदेशी कला दलों की झांकी से हुई, जिसमें सभी कलाकारों ने अपनी विशिष्ट नृत्य शैली की झलक दिखाई। इससे दो साल पहले साल 2019 में हुए आदिवासी नृत्य समारोह में ऊर्जा, उत्साह और उमंग का नजारा राजधानी में दिखाई दिया था। ये उत्सव एक बार फिर अलग-अलग संस्कृतियों को मंच देकर उनके कला-परंपराओं के आदान-प्रदान के अवसर के साथ सौहार्द्र और आपसी स्नेह-भाईचारा को बढ़ाने का एक अवसर लेकर आया है। 

नृत्य महोत्सव में भारत के 27 राज्य, 6 केंद्र शासित प्रदेश समेत 7 देशों के 59 दल भाग ले रहे हैं। ये कलाकार आगामी दिनों तक विवाह संस्कार, पारंपरिक त्योहार-अनुष्ठान और फसल कटने पर उत्साह से विभिन्न जनजाति संस्कृतियों द्वारा किए जाने वाले नृत्य कला का प्रदर्शन करेंगे। झांकी की शुरुआत नाइजीरिया, फिलीस्तीन, श्रीलंका, युगांडा, उज्बेकिस्तान के मेहमान कलाकारों की ऊर्जा और उत्साह से भरी झलकियों से हुई इसके बाद केंद्र शासित प्रदेश और विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने प्रदर्शन किया। 

झांकी में राजस्थान से आए कलाकारों ने पारंपरिक कालबेलिया नृत्य के साथ तलवार लहराते हुए महिलाओं ने अपने शौर्य का प्रदर्शन किया। वहीं सिक्किम के दल ने पारंपरिक वेशभूषा में आकर्षक प्रस्तुति दी। धोती-कुर्ता पहने तमिलनाडु के दल ने वहां की टोड़ा जनजाति के पारंपरिक नृत्य की झलक दिखाई।  तेलंगाना के आदिवासी समुदाय ने कोया की नृत्य कला का प्रदर्शन किया। त्रिपुरा के दल ने होजागिरी नृत्य के माध्यम से ईश्वर की आराधना करते हुए सधे हाथों में थाल घुमाते हुए अद्भुत संतुलन का प्रदर्शन किया। 

उत्तराखंड के कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से पहाड़ी संस्कृति सा माहौल छत्तीसगढ़ में बना दिया। इनके साथ उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कला दलों ने भी झांकी में प्रस्तुति दी। सबसे आखिरी में आए मेजबान छत्तीसगढ़ के बस्तर के जनजाति कलाकारों ने माड़िया समुदाय के गौर सींग नृत्य के माध्यम से प्रकृति की महक को जीवंत कर दिया।  गेड़ी नृत्य का प्रदर्शन भी छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने किया। मंच के सामने से गुजरते इन कलाकारों की प्रस्तुति पर दर्शक भी ताली बजाकर उत्साह बढ़ाते रहे। 

संसदीय सचिव विनोद झारखंड प्रवास पर, आज मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकात

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महासमुंद। संसदीय सचिव और विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर बुधवार को झारखंड के मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। इस दौरान छत्तीसगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने न्यौता देंगे। मिली जानकारी के अनुसार 28 अक्टूबर से 1 नवंबर तक राजधानी रायपुर में द्वितीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया गया है। 


कार्यक्रम में राज्य सरकार द्वारा देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री सहित संस्कृति विभाग के माध्यम से उन राज्यों के आदिवासी दलों को आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है। जिसके तहत संसदीय सचिव और महासमुंद विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर को झारखंड राज्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

CM को देंगे न्योता

संसदीय सचिव चंद्राकर मंगलवार को झारखंड के लिए रवाना हुए। बताया जाता है कि बुधवार को चंद्राकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेंमत सोरेन से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मुख्यमंत्री को राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने न्योता देंगे। साथ ही आदिवासी दलों को भी समारोह में शामिल होने आमंत्रण देंगे।

छत्तीसगढ़ में 28 से 30 अक्टूबर तक राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन, इन राज्यों के CM,मंत्री और अधिकारियों को दिया गया न्योता

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छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से  28 से 30 अक्टूबर तक रायपुर में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने के लिए लद्दाख के उप राज्यपाल को आमंत्रित किया गया है। छत्तीसगढ़ शासन की ओर से हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष चंदन कश्यप और विधायक संतराम नेताम ने लद्दाख पहुंचकर उप राज्यपाल का आमंत्रण पर्यटन सचिव को सौंपा। 

इस मौके पर कश्यप ने पर्यटन सचिव से छत्तीसगढ़ सरकार का आमंत्रण उप राज्यपाल को देने का आग्रह किया। हस्तशिल्प बोर्ड के अध्यक्ष कश्यप ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य की आदिवासी कला औप संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी और कहा कि राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के आयोजन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ सहित देश के सभी राज्यों की आदिवासी संस्कृति को मंच प्रदान करना है। 

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री को आमंत्रण

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री थिरू एन रंगास्वामी को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष और सिहावा विधायक लक्ष्मी के साथ गए प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने का आमंत्रण दिया। विधायक लक्ष्मी ध्रुव ने मुख्यमंत्री और पुडुचेरी के प्रशासनिक अधिकारियों से छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा रायपुर में 28 से 30 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के उद्देश्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी। 

सांस्कृतिक दलों को रायपुर भेजने का आग्रह

विधायक ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित देश के सभी राज्यों की आदिवासी संस्कृति को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आदिवासी संस्कृति को विश्व पटल पर लाने के प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी। छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि मंडल ने पुडुचेरी के मुख्यमंत्री से राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सांस्कृतिक दलों को रायपुर भेजने का भी आग्रह किया।  

मिजोरम के मुख्यमंत्री को आमंत्रण

छत्तीसगढ़ शासन की ओर से मिजोरम के मुख्यमंत्री जोराम थंगा को राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में शामिल होने का न्यौता दिया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और विधायक लखेश्वर बघेल, प्रकाश नायक ने मिजोरम की राजधानी आईजोल पहुंचकर मुख्यमंत्री जोराम थंगा से भेंट की। 

उन्होंने मुख्यमंत्री को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और  छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में शामिल होने आमंत्रण दिया। उन्होंने मिजोरम के मुख्यमंत्री से राज्य के सांस्कृतिक दलों को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रायपुर भेजने का भी आग्रह किया। वहीं मुख्यमंत्री  जोराम थंगा ने आमंत्रण के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आभार जताया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को न्योता

छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जशपुर विधायक विनय भगत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से मुलाकात कर  राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और एक नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में शामिल होने का न्योता दिया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार दोनों कार्यक्रमों में बतौर अतिथि देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्रीगणों और प्रशासक गणों को आमंत्रित किया जा रहा है। इसी सिलसिले में विधायक भगत  देहरादून पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें आमंत्रण पत्र सौंपा।  

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को न्योता

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने के लिए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और मुख्य सचिव राम सुभाग सिंह को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से संसदीय सचिव चन्द्रदेव प्रसाद राय ने आमंत्रण दिया। उन्होंने इस मौके पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर एक नवंबर को आयोजित राज्योत्सव में भी शामिल होने का न्योता दिया। मुख्यमंत्री  ठाकुर ने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में आमंत्रित किए जाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का आभार जताया। 

त्रिपुरा के संस्कृति मंत्री को न्योता

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने के लिए त्रिपुरा के संस्कृति मंत्री को संसदीय सचिव कुंवर सिंह निषाद और डोंगरगढ़ के विधायक-अनुसूचित जाति प्राधिकरण के अध्यक्ष भुवनेश्वर बघेल ने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से न्यौता दिया। त्रिपुरा के संस्कृति मंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आमंत्रित किए जाने को लेकर त्रिपुरा सरकार की ओर से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आभार जताया।

संसदीय सचिव निषाद ने त्रिपुरा के संस्कृति मंत्री से राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के आयोजन और उसके उद्देश्य के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को देश-दुनिया में पहुंचाने के उद्देश्य से लगातार प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन राजधानी रायपुर 28-30 अक्टूबर तक होगा। 


दादर नगर हवेली और दमनदीव के प्रशासक को न्योता

छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से चित्रकोट के विधायक राजमन बेंजाम ने दादर नगर हवेली और दमनदीव के प्रशासक प्रफुल्ल भाई पटेल से मुलाकात कर उन्हें राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और राज्योत्सव में शामिल होने का आमंत्रण दिया। विधायक बेंजाम ने प्रशासक प्रफुल्ल भाई पटेल से मुलाकात की और उन्हें राज्य सरकार की ओर से राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और राज्योत्सव में शामिल होने का न्यौता दिया। प्रशासक प्रफुल्ल भाई पटेल ने आमंत्रण के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का आभार जताया। 


पंजाब के राज्यपाल को न्योता

 राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने के लिए पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित को विधायक शैलेष पांडेय ने चंडीगढ़ पहुंचकर न्योता दिया। विधायक  पांडेय ने राज्यपाल पुरोहित को राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आमंत्रण पत्र सौंपने के साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से शाल-श्रीफल और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने पंजाब के राज्यपाल को छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण समारोह में शामिल होने का भी आमंत्रण दिया। 


राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव-2021

कोरबा जिले से राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव 2021 में शामिल होने के लिए परंपरागत नृत्य दलों का चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस महोत्सव में शामिल होने के लिये आदिवासी नृतक दल अपने-अपने विकासखंड मुख्यालयों में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिता के मापदंड और शर्तों के अनुरूप जनपद स्तर पर पंजीयन उपरांत प्रत्येक विकासखंड से एक-एक दल चयन कर कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कोरबा को 12 अक्टूबर 2021 तक सूची उपलब्ध कराया जाना है। 

थीमों के आधार पर उत्कृष्ठ दलों का चयन

बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव रायपुर में 28 से 30 अक्टूबर 2021 तक आयोजित किया जाएगा। इस महोत्सव के लिये पूरे छत्तीसगढ़ से उत्कृष्ठ आदिवासी नृतक दलों का चयन किया जा रहा है। कोरबा जिले से चार थीमों विवाह, फसल कटाई, पारंपरिक त्यौहार सहित अन्य ओपन कैटेगरी को चयनित किया जाएगा। इस संबंध में आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त से मिली जानकारी के मुताबिक कोरबा जिले में आदिवासी नृतक दलों के परंपरागत पहनावे, नृत्य की मौलिकता, परंपरागत वाद्य यंत्रों के प्रयोग को ध्यान में रखते हुए चारों थीमों पर उत्कृष्ठ दलों का चयन किया जाएगा। 

संभाग स्तरीय कार्यक्रम 

पहले विकासखंड स्तर पर उत्कृष्ठ दल चयनित होंगे जो जिला स्तर पर होने वाली चयन प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। जिला स्तर पर उत्कृष्ठ आदिवासी नृतक दलों को संभाग और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शामिल होने का मौका मिलेगा। विकासखंड स्तरीय उत्कृष्ठ दलों में से जिला स्तर पर चयन  के बाद संभाग स्तरीय कार्यक्रम 17 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2021 तक बिलासपुर संभाग में आयोजित होगी। इस चयन प्रक्रिया में शामिल होने वाले प्रत्येक आदिवासी नृतक दल को अपनी प्रस्तुति के लिये अधिकतम 10 मिनट का समय दिया जाएगा।

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