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प्रधानमंत्री आवास योजना से महिलाओं को मिली रोजगार, आवास पूर्णता में निभा रहीं हैं अपनी महत्वपूर्ण भूमिका

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रायपुर। प्रत्येक व्यक्ति का सपना होता है कि उसका स्वयं का पक्का मकान हो। प्रधानमंत्री आवास योजना आज जरूरतमंद लोगों के इस सपने को साकार कर रही है। योजना के तहत प्रदेश के लाखों लोगों के सपनों का आशियाना बनकर तैयार है, जिसमें वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित एवं सुखमय जीवन व्यतीत कर रहें हैं। योजना से कई परिवार समाज में सम्मानजनक और स्थिर जीवन व्यतीत कर रहें हैं। सरगुजा जिले की महिलाएं ईंट, सीमेंट, गिट्टी, छड़, सेटरिंग प्लेट जैसी गतिविधियों के माध्यम से नियमित आय प्राप्त कर रही है, जिससे जिले कि कुल 465 महिलाएं लखपति दीदी क्लब में शामिल हो गई हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना ने एक ओर जहां लोगों को आवास प्रदान किया है, वहीं दूसरी ओर रोजगार प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भरता दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। सरगुजा जिले की महिलाओं ने इस योजना को आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बना लिया है। स्व-सहायता समूह की महिलाएं आवास निर्माण हेतु निर्माण सामग्री प्रदान कर आवास पूर्णता में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहीं हैं।

समूह की दीदियों द्वारा समूह से लोन प्राप्त कर योजना के हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु ईंट, सीमेंट, गिट्टी, छड़, सेंटरिंग सामान एवं मिक्सर मशीन उपलब्ध कराया जा रहा है। सरगुजा जिले के समूह की 281 दीदियों के द्वारा ईंट निर्माण का कार्य किया जा रहा है। वहीं 413 दीदियों के द्वारा बैंक लिंकेज और समूहों से लोन लेकर सेंट्रिंग प्लेट्स को किराए में देने का व्यवसाय किया जा रहा है। इसी कड़ी में 9 दीदियों के द्वारा लोन राशि और अपने परिवार की सहायता से सीमेंट मिक्सर मशीन को खरीद कर किराए में लगाया गया है। वहीं 06 दीदियों के द्वारा सीमेंट गिट्टी व छड़ आदि सामग्रियों को ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

पीएम आवास के हितग्राहियों को ग्राम पंचायत स्तर पर ही निर्माण के आवश्यक सामग्रियां मिल जा रही हैं। महिलाओं ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना उनके जीवन में नई रोशनी लेकर आयी है, जिसके माध्यम से उन्हें रोजगार का एक नया और सशक्त माध्यम मिल गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद दिया।


‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को देवरबीजा में मिला जीवन, खादी केंद्र बना ग्रामीण आत्मनिर्भरता का उदाहरण

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए वोकल फॉर लोकलअभियान और आत्मनिर्भर भारतके संकल्प को छत्तीसगढ़ में मजबूती से ज़मीन पर उतारा जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पांडेय ने बेमेतरा जिले के देवरबीजा स्थित खादी उत्पादन केंद्र का दौरा किया।

यह केंद्र वर्तमान में 129 महिला कत्तिन और 11 बुनकरों के श्रम और समर्पण से चल रहा है, जो स्वदेशी वस्त्र निर्माण को ग्रामीण क्षेत्र में सशक्त आधार दे रहा है। दौरे के दौरान पांडेय ने न केवल उत्पादन की प्रक्रिया को देखा, बल्कि श्रमिकों से संवाद भी किया और उनकी जरूरतों व अनुभवों को सुना।

पांडेय ने कहा कि यह केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकलअभियान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प की सजीव मिसाल है। खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि यह हमारे स्वाभिमान, संस्कृति और स्वदेशी आत्मा का प्रतीक है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि खादी बोर्ड द्वारा इस केंद्र को डिज़ाइन नवाचार, तकनीकी उन्नयन, प्रशिक्षण एवं विपणन के क्षेत्र में हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। पांडेय ने कर्मियों से गुणवत्ता और नवाचार को लगातार बनाए रखने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, खादी बोर्ड के अधिकारी और जिला प्रशासन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। महिला कर्मियों और बुनकरों ने बोर्ड की योजनाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए अपनी बात रखी। पांडेय ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक उद्योगों को पुनर्जीवित कर रहा है, जिससे न केवल रोजगार सृजन हो रहा है, बल्कि गाँवों में आत्मनिर्भरता की नींव भी मजबूत हो रही है। देवरबीजा खादी उत्पादन केंद्र इसी दिशा में एक सशक्त कदम है।

बिहान की महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अम्बिकापुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत डिगमा की राधे कृष्णा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हर्बल गुलाल का निर्माण कर अपनी अलग पहचान बना रही हैं। उनका यह प्रयास न केवल आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में एक कदम है, बल्कि लोगों को रासायनिक मुक्त और प्राकृतिक रंगों से सुरक्षित होली मनाने का भी अवसर दे रहा है।

समूह की महिलाओं ने बताया कि वे हर्बल गुलाल बनाने के लिए फलों, चुकंदर और पलाश के फूलों का उपयोग करती हैं, जिससे यह गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक और त्वचा के लिए सुरक्षित होता है। यह पहल न केवल एक स्वस्थ विकल्प प्रदान कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है। पिछले वर्ष समूह ने 10 क्विंटल हर्बल गुलाल का विक्रय कर एक लाख 54 हजार रुपये की आमदनी अर्जित की थी। इस वर्ष उन्होंने बिक्री का लक्ष्य 20 क्विंटल निर्धारित किया है, जिससे उनकी आय और अधिक होगी।

महिला समूह द्वारा कलेक्ट्रेट कंपोजिट बिल्डिंग में लगाए गए हर्बल गुलाल के स्टॉल पर कलेक्टर विलास भोसकर सहित अन्य अधिकारियों ने भी होली के लिए हर्बल गुलाल खरीदा। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाएं अब स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे स्वयं सहायता समूह द्वारा निर्मित हर्बल गुलाल का उपयोग करें और रासायनिक रंगों से बचकर प्राकृतिक और सुरक्षित होली मनाएं।

प्रधानमंत्री ने भारतीय वायुसेना के बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान पूरी की

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दिल्ली। तेजस में सफलतापूर्वक उड़ान पूरी की। यह अनुभव अविश्वसनीय और समृद्ध करने वाला था। इसने हमारे देश की स्वदेशी क्षमताओं में मेरे विश्वास को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा दिया है और हमारी राष्ट्रीय क्षमता के बारे में मुझमें नए सिरे से गर्व और आशावाद की भावना पैदा की है।

मैं आज तेजस में उड़ान भरते हुए अत्यंत गर्व के साथ कह सकता हूं कि हमारी मेहनत और लगन के कारण हम आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में विश्व में किसी से कम नहीं हैं। भारतीय वायुसेना, DRDO और HAL के साथ ही समस्त भारतवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।

छत्तीसगढ़ :रीपा में ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा रोजगार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) योजना से गांवों में ग्रामीणों को रोजगार व स्व-रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं। महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह में अग्रसर हो रही हैं। गांवों को उत्पादन का केन्द्र और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना अब ग्रामीण परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव लाने लगी है। ग्रामीणजन रीपा के माध्यम से अपनी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में बदलाव के लिए पूरे मनोयोग से जुट गए हैं। 

गरियाबंद ज़िले के फ़िंगेश्वर ब्लॉक में ग्राम पंचायत श्यामनगर स्थित रीपा में सिलाई यूनिट की स्थापना की गई है। यूनिट की स्थापना से लगभग 50 ग्रामीणों को रोज़गार मिला है, साथ ही यहां कार्यरत् महिलाओं को महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए 14 हजार यूनिफार्म सिलाई का आर्डर दिया है। रीपा में समूह के सदस्यों द्वारा हथकरघा, अगरबत्ती निर्माण, धोबी का भी कार्य किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने, लघु एवं कुटीर उद्योग स्थापित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा ग्रामीण औद्योगिक पार्क (रीपा) योजना प्रारंभ किया गया है। राज्य सरकार द्वारा छोटे-छोटे उद्योग धंधों के लिए रीपा में पानी, बिजली, जमीन जैसी सभी जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। रीपा के माध्यम से गांव के लोगों को जरूरी वस्तुएं आस-पास उपलब्ध हो रही हैं, जिसके कारण अब उन्हें दूर शहरों की ओर नहीं जाना पड़ता। उत्पादों की अच्छी गुणवत्ता के कारण आसपास के शहर-गांवों से सप्लाई के आर्डर मिलने प्रारंभ हो गए हैं। व्यवसायिक गतिविधियों को रीपा के साथ जोड़कर संरक्षित करने के साथ ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर विभिन्न गतिविधियां संचालित होने से लोगों को बड़ी संख्या में रोजगार भी प्राप्त हो रहे हैं। वही पारंपरिक गतिविधियों के संचालन से ग्रामीणों के आयसंवर्धन में भी महती भूमिका निभा रही है।

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