Media24Media.com: अमावस्या

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अंधकार और निराशा को दूर कर लोगों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने का प्रतीक है दीवाली

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रायपुर। कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला दीपों का पर्व दीपावली आज छत्तीसगढ़ सहित देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह त्यौहार अंधकार और निराशा को दूर कर लोगों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने का प्रतीक है। दीपावली के मौके पर आज लोगों के घर, दीपों और बिजली के रंग-बिरंगे झालरों की रोशनी से जगमगा रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि लंका पर विजय हासिल करने के बाद भगवान राम के अयोध्या पहुंचने पर लोगों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इस दिन की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है।



दीपावली के अवसर पर इस समय छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों और कस्बों में लोग लक्ष्मी पूजा की तैयारी कर रहे हैं। घर और आंगन को दीयों से रौशन कर दिया गया है। घरों के बाहर आकर्षक रंगोलियां भी सजाई गई है। बच्चों ने आतिशबाजी भी शुरू कर दी है। दीपावली के मौके पर आज सुबह से ही लोग खरीदारी में लगे रहे। बाजारों में ग्राहकों की भीड़ देखने को मिल रही है। लोग, मिठाइयों, पटाखों और कपड़ों के अलावा मौसमी फलों की भी खरीदी कर रहे हैं। वहीं, पूजा के लिए देवी लक्ष्मी की आकर्षक मूर्ति और घरों को सजाने से संबंधित सामान भी लोग खरीद रहे हैं।

समृद्धि का प्रतीक मानी जाने वाली धान की बालियों से बने झालर, यानि फाता की मांग भी काफी रही है। ज्योति पर्व दीपावली पर लोगों ने सोना-चांदी के जेवरातों के साथ बर्तन की जमकर खरीदारी की। दीपावली के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी प्रदेशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं दी हैं।

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा आज हो गया संपन्न, अंतिम दिन मावली माता की डोली और मां दंतेश्वरी के छत्र की विदाई

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जगदलपुर। पचहत्तर दिनों तक चलने वाला विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा आज संपन्न हो गया। इस पर्व के अंतिम दिन मावली माता की डोली और मां दंतेश्वरी के छत्र की विदाई की रस्म अदा की गई। बस्तर दशहरा पर्व श्रावण महीने की अमावस्या तिथि को पाट जात्रा विधान के साथ शुरू हुआ था। इस दौरान पचहत्तर से अधिक विधान किए गए। बस्तर दशहरा पर्व की अंतिम रस्म के विधान में परंपरा के अनुसार राज परिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव के साथ ही राजगुरू



पुजारी और सेवादारों द्वारा माता मावली की डोली को कांधे पर रखकर दंतेश्वरी मंदिर परिसर से बाहर लाया गया। इस दौरान महिला पुलिस के जवानों ने परंपरा के अनुसार बंदूक चलाकर माता को सलामी दी। इसके बाद मंदिर के सिंहद्वार में बने विशाल मंच पर मावली माता की डोली और मां दंतेश्वरी के छत्र को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया। यहां राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव द्वारा आरती के बाद माता को सम्मान के साथ विदाई दी गई। इस दौरान बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष एवं सांसद दीपक बैज सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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