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अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर पूरे प्रदेश में चला बाल श्रम विरोधी अभियान, कलेक्टरों ने दिए सख्त निर्देश

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बाल श्रम की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे प्रयासों को प्रदेश स्तर पर सख्ती के साथ क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रशासनिक प्रतिबद्धता, जन-जागरूकता और कड़ी निगरानी के माध्यम से बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और गरिमामय जीवन की ओर अग्रसर करने का संकल्प लिया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में बाल श्रम उन्मूलन के लिए जिलेवार अभियान चलाया गया। महासमुंद और कोण्डागांव सहित विभिन्न जिलों में प्रशासन, श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, पुलिस तथा बाल संरक्षण इकाई के संयुक्त प्रयासों से बाल श्रमिकों की पहचान, पुनर्वास और जन-जागरूकता की दिशा में व्यापक गतिविधियाँ आयोजित की गईं।

महासमुंद में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेते हुए निर्देश दिए कि जिले में बाल श्रम की किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संयुक्त जांच दल को होटल, ढाबा, निर्माण स्थल, दुकानों एवं अन्य संभावित स्थलों पर निरीक्षण करने कहा। साथ ही विकासखंड स्तर पर बाल श्रम विरोधी रैली, पोस्टर प्रदर्शनी और स्कूलों में विशेष सत्र आयोजित करने के निर्देश दिए। बाल श्रमिकों के पहचान हेतु 15 जून से 30 जून तक जिले में विशेष अभियान चलाया जाएगा। कलेक्टर ने बाल संरक्षण समिति की मासिक बैठक आयोजित कर सतत समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों को पुनः स्कूल में लाया जाएगा और उनके परिवारों को शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा। बाल श्रम की रोकथाम हेतु बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 13, 1415 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

श्रम पदाधिकारी डी.एन. पात्र ने बताया कि वर्ष 2024 में 92 संस्थानों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 14 के विरुद्ध श्रम न्यायालय में अभियोजन दायर किया गया। न्यायालय ने 9 संस्थानों को 5-5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं 2025 में अब तक 52 संस्थानों का निरीक्षण हुआ, जिसमें 12 संस्थानों पर सूचना बोर्ड न लगाने पर अभियोजन दायर किया गया है।

14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का नियोजन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक और अधिसूचित व्यवसायों में कार्य कराना दंडनीय अपराध है। इनमें होटल, ढाबा, ईंट-भट्ठा, पत्थर खदान, बीड़ी उद्योग, ऑटो गैरेज, घरेलू काम, आदि शामिल हैं। दोषी पाए जाने पर 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा या 20 हजार से 50 हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। बाल श्रम की शिकायत के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन 1098 और 1800-2332-197 पर संपर्क किया जा सकता है।

कोण्डागांव में चला विशेष निरीक्षण अभियान, दो बच्चों का रेस्क्यू कर पुनर्वास

कोण्डागांव जिले में कलेक्टर श्रीमती नुपूर राशि पन्ना के मार्गदर्शन में श्रम विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, पुलिस व चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम द्वारा बाल श्रमिकों और भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों के चिन्हांकन और पुनर्वास के लिए अभियान चलाया गया। ढाबों, होटल, मोटर गैरेज, दुकानों में निरीक्षण कर संचालकों को समझाइश दी गई। दो बच्चों को रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिन्हें परिवार के पास सुरक्षित पुनर्वासित किया गया तथा शिक्षा विभाग के माध्यम से स्कूल से जोड़ा जाएगा।

छत्तीसगढ़ में उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यव्यापी अभियान प्रारंभ

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रायपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत संचालित उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रमके सफल क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य भर में व्यापक अभियान की शुरुआत कर दी है। इसका उद्देश्य 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर नागरिकों को बुनियादी साक्षरता, संख्यात्मक ज्ञान और जीवनोपयोगी कौशल से सशक्त बनाना है, ताकि वे सितंबर 2025 और मार्च 2026 में आयोजित होने वाली FLNAT परीक्षा में सम्मिलित हो सकें।

राज्य से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक कार्यक्रम के सुचारू संचालन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशानुसार जिला, ब्लॉक और नगरीय साक्षरता मिशन प्राधिकरणों (DLMA, BLMA, TLMA) की बैठकें 20 जून तक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी। इनमें वार्षिक कार्ययोजना पर गहन चर्चा की जाएगी।

स्कूल शिक्षा सचिव  ने बताया कि चिन्हांकित स्कूलों की स्मार्ट क्लासों में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध ऑनलाइन वीडियो सामग्री के माध्यम से शिक्षण कार्य शुरू किया जाएगा। प्रत्येक ब्लॉक में तकनीकी रूप से दक्ष शिक्षकों को केन्द्र प्रभारी बनाया जाएगा। इसके साथ ही पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों को भी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सरपंचों, पार्षदों एवं अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है।

ड्रॉपआउट और शालात्यागी बच्चों की पहचान कर उन्हें भी उल्लास केन्द्रों से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक जिले से इनकी सूची तैयार कर राज्य कार्यालय को भेजी जा रही है। वहीं स्वयंसेवी शिक्षकों और असाक्षर नागरिकों का सर्वेक्षण कर उन्हें उल्लास पोर्टलपर पंजीकृत करने का कार्य 15 जून तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। पूर्ण साक्षर ग्राम पंचायत, श्पूर्ण साक्षर ब्लॉक और श्पूर्ण साक्षर जिलाश् की प्राथमिकता सूची तैयार कर 15 जुलाई तक राज्य कार्यालय को प्रस्ताव भेजे जाएंगे।

राज्य स्तर पर सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियाँ भी तेज़ी से चलाई जा रही हैं। पंचायत भवनों, स्कूलों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर, बैनर, नुक्कड़ नाटकों एवं प्रचार माध्यमों से जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सभी बैठकों और कार्यक्रमों में उल्लास शपथको अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है, जिससे साक्षरता आंदोलन में जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके।

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों को प्रोत्साहित करने हेतु एक अभिनव योजना लागू की गई है, जिसके तहत वे छात्र जो 10 असाक्षरों को FLNAT परीक्षा में सफल कराते हैं, उन्हें बोर्ड परीक्षा में 10 बोनस अंक प्रदान किए जाएंगे। इस पहल से युवा वर्ग में काफी उत्साह देखा जा रहा है। राज्य के सभी जिलों में आदर्श उल्लास साक्षरता केन्द्रों की स्थापना की जा रही है। ये केंद्र नवाचारी शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल सामग्री, जादुई पिटारा एवं रोचक गतिविधियों से समृद्ध होंगे। राज्य साक्षरता मिशन के अधिकारियों के अनुसार, साप्ताहिक मॉनिटरिंग, नियमित समीक्षा बैठकें, विभागीय समन्वय और स्थानीय प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी के साथ यह कार्यक्रम एक जन आंदोलन का रूप ले रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों, जिला शिक्षा अधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे श्उल्लासश् कार्यक्रम को राज्य की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल कर समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

बैक टू आयुर्वेद: छत्तीसगढ़ के धमतरी में बूटीगढ़ की स्थापना, आयुर्वेदिक रसशाला बन रही आकर्षण का केंद्र

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में जल संरक्षण और आयुर्वेद को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। यहां आयुर्वेदिक चिकित्सा और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष प्रयास किया गया है। यह प्रदेश में अपनी तरह का पहला नवाचार है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आयुष विभाग और धमतरी जिला प्रशासन के इस नवाचार की सराहना की है और ज्यादा से ज्यादा वन संपदा को सहजने और लोगों को आयुर्वेद के बारे में जागरूक करने के लिए कहा है।इस पहल के अंतर्गत जिला प्रशासन ने आयुर्वेद को स्थानीय लोगों के जीवन में सम्मिलित करने के लिए विशेष रूप से जिले के वंनाचल ग्राम सिंगपुर (बूटीगढ़) में आयुष रसशाला (औषधीय पेय केंद्र) की स्थापना की गई है।

बूटीगढ़ क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से औषधिगुणयुक्त पौधे पाये जाते हैं, इसलिए यहां हर्बेरियम का निर्माण किया जा रहा है। औषधिगुणयुक्त पौधों के संवर्धन, प्रचार-प्रसार और उपयोगिता के लिए रसशाला निर्मित किया जा रहा है। इस रसशाला के माध्यम से स्थानीय लोगों, छात्रों और पर्यटकों को रसपान का लाभ मिल सकेगा।

आयुर्वेद में पानी का महत्व अनमोल है, क्योंकि यह शरीर के सभी प्रमुख तत्वों को संतुलित रखता है। धमतरी जिले में जल जगारकार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण के साथ-साथ आयुर्वेदिक पेय पदार्थों और औषधियों की उपयोगिता को भी प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में उपस्थित आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने बूटीगढ़ और रसशाला के महत्व को बताते हुए यह जानकारी दी कि कैसे एक परिवार और समाज शुद्ध पानी और आयुर्वेदिक खानपान को अपनाकर स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

बेहतर मानसिक और शारिरिक स्वास्थ्य के लिए दिया जा रहा काढ़ा

आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवध पचौरी ने बताया कि 160 प्रकार की जड़ी-बूटियों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से पहले चरण में बूटीगढ़ में 25,000 पौधे लगाए गए हैं। इनमें से कुछ ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं जिन्हें आयुर्वेदिक उपचार के लिए चूर्ण या टैबलेट बनाकर इस्तेमाल भी किया जा रहा है। समय के साथ जब बूटीगढ़ विकसित होने लगेगा तो रसशाला के जरिए लोगों को आयुर्वेद के प्रति और भी जागरूक किया जा सकता है। इसके साथ ही बूटीगढ़ में विलुप्त होने वाली जड़ी-बूटियों को भी सहजा जा रहा है, ताकि भविष्य में इन पर शोध हो सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विभिन्न आयुष केंद्रों में योग करने आये लोगों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं, किशोर-किशोरियों व बच्चों को विभिन्न जड़ी-बुटियों से बना काढ़ा, औषधी स्वरूप दिया जा रहा है, जिससे लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सकारात्मक परिर्वतन देखने को मिल रहा है।

हृदय रोगियों के लिए रामबाण है अर्जुन क्षीरपाक

डॉ. अवध पचौरी के मुताबिक कोविड काल के बाद से ही लगातार ये देखा जा रहा है कि अचानक हार्ट अटैक से किसी भी उम्र वर्ग के व्यक्ति की ऑन-द-स्पॉट मृत्यु हो रही है, जान बचाने के लिए समय भी नहीं मिल पा रहा है, जो एक चिंता का विषय बन चुका है। आयुर्वेद में अर्जुन पेड़ की छाल से बनें अर्जुन क्षीरपाकके नियमित सेवन इंस्टेंट हार्ट अटैक के मामलों में कमी लाई जा सकती है। अर्जुन की छाल में विशेष औषधीय गुण होते हैं, जो हृदय की धमनियों को मजबूती प्रदान करते हैं और हृदय की मांसपेशियों को शक्ति देते हैं। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यधिक लाभकारी है, जिन्हें हृदय संबंधी समस्याएं हैं या जिनमें हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है।

सामान्य जीवन में बेहद लाभकारी है आयुर्वेदिक औषधियाँ

जिला आयुष अधिकारी डॉ. गुरूदयाल साहू ने जानकारी देते हुए बताया कि हाल ही में जिले में हुए जल जगार महोत्सव में आयुष विभाग की प्रदर्शनी में बूटीगढ़ और रसशाला की प्रदर्शनी में  मुनगा (सहजन) जैसे पौधों के औषधीय गुणों को भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें मुनगा का सूप बनाने की विधि बताई गई। साथ ही, विभिन्न जड़ी-बूटियों का अर्क डिस्टिलेशन प्रक्रिया के माध्यम से निकाला गया, जिससे रोज़मर्रा के जीवन में उपयोगी औषधियाँ तैयार की जा सकती हैं। बूटीगढ़ और रससाला का उद्देश्य ही यही है कि आमजनों को ज्यादा से ज्यादा औषधीय गुणों से भरे पेड़-पौधों को लेकर जागरूक किया जाए। हमारे घरों में ही कितनी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ उपलब्ध होती हैं, जिसके सेवन से मौसमी बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। डॉ. गुरूदयाल आगे बताते हैं कि राशि रत्न पौधों को लगाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। ज्यादा से ज्यादा औषधीय पौधरोपण से प्रकृति को भी सहजा जा रहा है और जल सरंक्षण में भी यह कदम सराहनीय है। साथ ही औषधीय पेड़-पौधों से जीवन में सकारात्मकता भी बढ़ती है।

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ रसशास्त्र से मिली रसशाला की प्रेरणा

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में से एक रसशास्त्र में औषधियों को बनाने की कई विधियों का वर्णन मिलता है। इन प्रक्रियाओं में अलग-अलग यंत्रों का उपयोग किया जाता था, जिनसे औषधियों को शुद्ध और तैयार किया जाता था। महर्षि नागार्जुन को इन विधियों का जनक माना जाता है। इन औषधियों का उपयोग विशेष रूप से बीमारियों के इलाज में किया जाता है। पुराने समय में आयुर्वेदाचार्य कई प्रकार के यंत्रों का इस्तेमाल करते थे। जैसे दोला यंत्र, उलूखल यंत्र, कच्छप यंत्र, और स्वेदनी यंत्र। इन यंत्रों से औषधियाँ बनती थीं, जो आज भी कई बीमारियों में कारगर होती हैं। आयुष रसशाला के जरिए ताजा जड़ी-बूटियों से औषधीय रस, अर्क, क्वाथ और पेय बनाए जाते हैं। ये औषधियाँ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं और कई बीमारियों में फायदेमंद साबित होती हैं।

मुख्यमंत्री के सुशासन में राज्य में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन के लिए चलाया जा रहा विशेष अभियान

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रायपुर। स्वास्थ्य जीवन की पूंजी है। इसी विश्वास के साथ छत्तीसगढ़ के विष्णुदेव सरकार सभी नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। विष्णु के सुशासन से छत्तीसगढ स्वस्थ हो रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेशभर में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन हेतु विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि छत्तीसगढ़ से सिकल सेल बीमारी को विदा करना है और इसके लिए हम सब मिलकर प्रयास करेंगे। इस अभियान का उद्देश्य राज्य को सिकल सेल जैसे बिमारी से मुक्त कराना और लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

इस अभियान के तहत् राज्य में पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर विशेष कैंप आयोजित कर 40 वर्ष तक के लोगों को संभावित लक्षणों के आधार पर पहचान कर आवश्यक उपचार और दवाई उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही साथ प्रत्येक गर्भवती महिलाओं की सिकल सेल जांच सुनिश्चित की जा रही है। जिससे की जन्म लेने वाले प्रत्येक शिशु स्वस्थ्य और सिकल सेल मुक्त हो।

गौरतलब है कि सिकल सेल एक अनुवांशिक रक्त विकार है। इससे अनेक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती है। जिसमें लाल रक्त कणिका के सामान्य आकार में परिवर्तन होकर हसिया के आकार का हो जाता है। रक्त कणिकाओं का हसिया आकार होने के कारण इसकी ऑक्सीजन वहन क्षमता कम हो जाती है और ये कणिकाएं रक्त वाहिकाओं में चिपकने लगती है। इसके कारण शरीर के सभी अंगों को ऑक्सीजन आपूर्ति में समस्या आती है, जिससे पीड़ित व्यक्ति को शरीर में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, बुखार जैसे समस्या उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि सिकल सेल वाहक और सिकल सेल रोगी दो प्रकार के होते हैं। सिकल सेल वाहक में गंभीर लक्षण नहीं होते पर यह विकार को अगली पीढ़ी में बढ़ाते हैं।

मोतियाबिंद ऑपरेशन से 815 लोगों को मिली नई रोशनी

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रायपुर। बस्तर जिले को मोतियाबिंद मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। जिले में चिन्हांकित इसके 1392 पीड़ितों में से 563 मरीजों का सघन मोतियाबिंद मुक्त अभियान के तहत सफल ऑपरेशन कर उनकी आंखों की रोशनी लौटाई गई है।
                   

बस्तर जिले में 15 मई 2023 से यह विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इसमें जिले के सभी विकासखंडों में संभावित मरीजों का सर्वे कर 3512 मरीजों की जांच कर 1392 की पुष्टि मोतियाबिंद मरीजों के रूप की गई है। सर्वे कार्य अभी भी सतत जारी है। अभियान के दौरान मिले मरीजों में से 563 तथा सर्वे के पहले चिन्हांकित 252 सहित अब तक 815 मरीजों का ऑपरेशन कर इस बीमारी से निजात दिलाई जा चुकी है।

                                  

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. चतुर्वेदी ने बताया कि बस्तर जिले को जल्द से जल्द मोतियाबिंद मुक्त करने के लिए यह विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके तहत हर मरीजों की पहचान के लिए डोर-टू-डोर अभियान चलाया जा रहा है।

                               

चिन्हांकित मरीजों का शीघ्र ऑपरेशन सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल और महारानी अस्पताल के डॉक्टरों को जिम्मेदारी दी गई है। सघन मोतियाबिंद मुक्त अभियान के अंतर्गत बकावंड में 99, बास्तानार में 32, लोहंडीगुड़ा में 37, दरभा में 71, तोकापाल में 63 और जगदलपुर (नानगुर) में 123 मरीजों का आपरेशन किया गया। बस्तर विकासखंड में अब तक चिन्हांकित सभी मरीजों का आपरेशन किया जा चुका है।

नागरिक सुविधाओं की दृष्टि से परिवहन विभाग के नवाचार उपयोगी: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में परिवहन विभाग के अंतर्गत संचालित तुंहर सरकार तुंहर दुआर योजना के तहत दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्राइविंग ट्रेनिंग एण्ड रिचर्स इंस्टीट्यूट के माध्यम से प्रदेश में कुशल ड्राइवरों की आवश्यकता पूरी हो रही है।
                     

नागरिक सुविधाओं की दृष्टि से परिवहन विभाग की नवाचारी पहल उपयोगी साबित हुई है। इस दौरान परिवहन आयुक्त दीपांशु काबरा ने परिवहन विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों की मुख्यमंत्री को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तुंहर सरकार तुंहर दुआर अभियान से अब तक 21 लाख 4 हजार 95 लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्रों की होम डिलीवरी हुई है।

शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में खुले 461 परिवहन सुविधा केंद्र

तुंहर सरकार तुंहर दुआर के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 461 परिवहन सुविधा केंद्र आरम्भ किये गए हैं। प्रदेश के सभी विकासखण्डों में यह केन्द्र आरम्भ हो चुके हैं। परिवहन आयुक्त दीपांशु काबरा ने बताया कि अब तक 14 लाख 33 हजार 444 रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और 6 लाख 70 हजार 651 ड्राइविंग लाइसेंस की होम डिलीवरी हुई है। वर्तमान में परिवहन विभाग द्वारा संचालित तुंहर सरकार-तुंहर दुआर योजना के माध्यम से 22 प्रकार की सेवाओं की घर पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है। परिवहन सुविधा केन्द्र के माध्यम से शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार भी मिला है।

अब किसी भी आवेदक के डेटा के आधार प्रमाणीकरण के बाद प्राप्त आवेदनों का बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वतः अनुमोदन हो जाता है। इसी तरह ड्राइविंग लाइसेंस के लिए जारी होने वाला प्रमाण पत्र वन-ए भी ऑनलाइन जारी किया जा रहा है। इसके लिए परिवहन विभाग द्वारा डॉक्टरों की सेवाएं ली जा रही हैं। अब तक एक लाख से अधिक मेडिकल फार्म ऑनलाइन जारी किए जा चुके हैं। आवेदक को पंजीयन पुस्तिका एवं ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए परिवहन कार्यालय नहीं जाना पड़ता। इसके साथ ही परिवहन विभाग द्वारा आसानी से स्वामित्व हस्तांतरण के लिए भी आधार प्रमाणीकरण सेवा शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री बघेल ने सिविक सेंटर भिलाई में अर्जुन रथ परिसर का किया लोकार्पण

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने प्रदेश व्यापी भेंट मुलाकात अभियान के तहत आज दुर्ग जिला के भिलाई नगर विधानसभा के सिविक सेंटर में अर्जुन रथ परिसर का लोकार्पण किया।

उन्होंने वन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री मोहम्मद अकबर ,विधायक देवेंद्र यादव एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ परिसर का अवलोकन भी किया।

वार्ड नंबर 64 स्थित सिविक सेंटर में 1 करोड़ से अधिक की लागत से अर्जुन रथ परिसर का सौंदर्यीकरण किया गया है। जिसमें परिसर का बाउंड्री वाल, पाथ-वे, रथ का नवीनीकरण, लैंडस्कैपिंग, लाइटिंग एवं ग्रिल आदि के कार्य शामिल हैं।

एक्सटेन्डेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को लागू करने में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर

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रायपुर। छत्तीसगढ़ एक्सटेन्डेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (ePMSMA) को लागू करने में देश में दूसरे स्थान पर है। केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने आज नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय मातृत्व स्वास्थ्य कार्यशाला में प्रदेश को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया। राज्य में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान अप्रैल माह से नवम्बर माह के बीच एक लाख 48 हजार 851 गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच की गई है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत प्रदेश में हर माह की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच की जाती है। एक्सटेन्डेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत अब हर महीने 9 तारीख के साथ ही 24 तारीख को भी एएनसी जांच की जा रही है।

राष्ट्रीय मातृत्व स्वास्थ्य कार्यशाला में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम की संयुक्त संचालक डॉ. अल्का गुप्ता, रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी, राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शैलेंद्र अग्रवाल और राज्य सलाहकार सुश्री अभिलाषा शर्मा ने प्रदेश की ओर से नई दिल्ली में यह पुरस्कार ग्रहण किया। मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शैलेंद्र अग्रवाल ने बताया कि कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की टीम द्वारा हाई रिस्क प्रेगनेंसी ट्रैकिंग गाइडलाइन पर पोस्टर प्रस्तुत किया गया। पोस्टर के माध्यम से हाई रिस्क प्रेगनेंसी की जल्द से जल्द पहचान कर उपचार कैसे की जा रही है, यह बताया गया है।

भेंट-मुलाकात अभियान : मुख्यमंत्री ने कहा - राजीव गांधी किसान न्याय योजना की चौथी किस्त की राशि दी जाएगी 31 मार्च के पहले

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने प्रदेश व्यापी भेंट-मुलाकात अभियान के दौरान आज 14 दिसम्बर को महासमुंद जिले के खल्लारी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम मरारकसीबहरा पहुंचे। उन्होंने वहां आम जनता से सीधे बात-चीत कर शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन के बारे में जानकारी ली। इस मौके पर मुख्यमंत्री से चर्चा करते हुए ग्रामीणों ने भी शासकीय योजनाओं से मिल रहे भरपूर लाभ के बारे में बताया और राज्य सरकार की सराहना की। मुख्यमंत्री बघेल ने भेंट-मुलाकात अभियान में कहा कि किसानों के हित में राज्य सरकार द्वारा संचालित राजीव गांधी किसान न्याय योजनाकी चौथी किस्त की राशि 31 मार्च के पहले किसानों को मिल जाएगी।



मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर ग्रामीणों से चर्चा करते हुए कहा कि राज्य में सभी वर्ग के लोगों के विकास के लिए विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इनमें किसान, मजदूर, आदिवासी सहित गरीब व कमजोर आदि वर्ग के लोगों के हित को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने इस तारतम्य में ग्राम सुराजी योजना के तहत् नरवा, गरवा, घुरूवा, बाड़ी कार्यक्रम, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, मुख्यमंत्री हॉट बाजार क्लीनिक योजना, स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना, वनोपज संग्रहण तथा राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना आदि के बारे में उल्लेख करते हुए लोगों को इनका अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुख्यमंत्री ने भेंट-मुलाकात के दौरान स्थानीय जनतिनिधियों और ग्रामीणों के आग्रह पर क्षेत्र के विकास के लिए अनेक घोषणाएं की। इनमें सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बागबाहरा को 30 वितस्तर से 50 बिस्तर में उन्नयन और आई.टी.आई. बागबाहरा 2 नये ट्रेड-इलेक्ट्रिशियन तथा फिटर प्रारंभ करने की घोषणा की गई। इसी तरह चण्डी मंदिर बागबाहरा और खल्लारी मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में  विकसित करने तथा ग्राम कुलिया में विद्युत सब स्टेशन की स्थापना की स्वीकृति दी गई। इसके अलावा ग्राम एम.के.बाहरा में हाईस्कूल तथा ग्राम मुनगासेर में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की शाखा खोलने की घोषणा की गई। साथ ही कमरौद से चरौदा मार्ग एवं पुल-पुलिया और खोपली से सोनापुटी मार्ग एवं पुल-पुलिया के निर्माण की घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री बघेल ने ग्राम मरारकसीबहरा में किसानों से कहा कि किसका-किसका कर्ज माफ हुआ है। इस पर एक स्वर में सहमति जताते हुए वहां उपस्थित सभी किसानों ने हांमें जवाब दिया। इस दौरान ग्राम कामरौद निवासी किसान जितेंद्र साहू ने बताया कि मेरा ढाई लाख रूपए का कर्ज माफ हुआ है। इसके साथ-साथ राजीव गांधी किसान न्याय योजना का पूरा लाभ मिल रहा है। इनसे हुई आय से डेढ़ एकड़ खेती-जमीन खरीदा है और मकान भी बनाया हूं। 

इसी तरह ग्राम चुरकी निवासी ओमप्रकाश साहू ने बताया कि वे 2 एकड़ जमीन के मालिक है, 40 हजार का ऋण था जो माफ हो गया है। ग्राम एम.के.बाहरा निवासी श्रीमती तुमेेश्वरी साहू ने बताया कि समूह का नाम जय मां लक्ष्मी स्व-सहायता समूह है। उन्हें शासन द्वारा संचालित योजनाओं के तहत् विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से पर्याप्त आमदनी होने लगी है, जिसका लाभ समूह के सभी सदस्यों को मिल रहा है। इसी तरह ग्राम पचेड़ा निवासी श्री चमन लाल साहू, सावित्रिपुर की सुश्री सजनी मिश्रा तथा श्रीमती प्रेमलता बघेल, दयाराम चंद्राकर आदि ने भी शासन के विभिन्न योजनाओं से हो रहे लाभ के बारे में अवगत कराया।


मुख्यमंत्री ने मरारकसीबहरा में किसान ध्रुव के घर किया भोजन

मुख्यमंत्री बघेल आज भेंट-मुलाकात अभियान के दौरान महासमुंद जिले के खल्लारी विधान सभा के ग्राम एम.के.बाहरा निवासी आदिवासी किसान यादराम धु्रव के घर बड़े ही चाव से भोजन किया। उन्हें भोजन में गौठानों की बाड़ी की लालभाजी तथा मुनगाभाजी, तिवरा भाजी के अलावा जिमीकांदा की सब्जी और सील से पीसे टमाटर चटनी फुलकांस की थाली में परोसा गया था।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की मांग पर आईटीआई फिंगेश्वर को बाबा गुरुघासीदास के नाम पर करने और 48 कम्प्यूटर देने की घोषणा

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भेंट-मुलाकात अभियान के तहत आज गरियाबंद जिले के राजिम विधानसभा के ग्राम फिंगेश्वर पहुंचे। वहां उन्होंने फिंगेश्वर के किसान बिसेलाल साहू के यहां भोजन के पश्चात मुख्य कार्यक्रम स्थल में आम जनता से भेंट-मुलाकात की। उन्होेंने छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की और हितग्राहियों को सामग्री वितरण किया। उन्होंने किसानों से धान विक्रय तथा खरीदी केन्द्रों में व्यवस्था की जानकारी ली और कहा कि हमारी सरकार ने सबसे पहले किसानों के लिए योजना बनाई। उन्होंने कहा कि चौथा किश्त राजीव गांधी न्याय योजना की राशि 31 मार्च को दे दी जाएगी।



मुख्यमंत्री ने यहां पर फिंगेश्वर उप-तहसील को पूर्ण तहसील बनाने, फणीकेश्वर नाथ शासकीय महाविद्यालय फिंगेश्वर में अतिरिक्त कक्ष निर्माण, फिंगेश्वर के 6 प्राथमिक और 4 माध्यमिक शालाओं में आवश्यक अतिरिक्त कक्ष हेतु 133.12 लाख रुपए देने और पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास गरियाबंद में स्वीकृत सीट क्षमता में 50 सीट की वृद्धि करते हुए 100 सीटर करने की घोषणा की। इसके अलावा मुख्यमंत्री कोपरा को नगर पंचायत बनाने, छात्र-छात्राओं की मांग पर आईटीआई फिंगेश्वर को बाबा गुरुघासीदास के नाम पर करने एवं 48 कम्प्यूटर देने, भेण्डरी से रवेली के बीच नवीन पुल निर्माण और सिलयारी बाहरा से संतोषपुरी धाम ग्राम पंचायत पतोरा-पनियारी में पहुंच मार्ग बनाने, कासरबाय से पतोरादादर मार्ग आर डी.1350 मी में स्थित जर्जर पुल की मरमत,

हरदी-कसरबाय-बेहराबुड़ा मार्ग पर स्थित पगार नाला पर पुल निर्माण, ग्राम बोरसी के हाई स्कूल को हायर सेकेण्डरी में उन्नयन करने और साथ ही कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय फिंगेश्वर के लिए नवीन भवन बनाने, 18 गांव के पेयजल और सिंचाई हेतु अकरबारा में बैराज नाला निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने यहां जनता से शासकीय योजनाओं के संबंध में बातचीत की। गोधन न्याय योजना के ग्राम बारुला के मुकेश साहू ने बताया कि उन्होंने गोबर बेचकर 70 हजार कमाए। इससे उन्होंने सिलाई मशीन खरीदा और पत्नी को भी टेलरिंग का काम सिखाया। आज वह भी अपना काम कर रही है। साहू ने कहा कि गोबर को पहले घुरवा में फेकते थे अब उसका पैसा मिल रहा है उसके लिए हम मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। 

ग्राम जेन्जरा की महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य ने बताया कि 2 साल से वर्मी कम्पोस्ट खाद बना रहे हैं। इसे बेचने से प्राप्त आय को समूह के कार्याे में लगाती है। अभी बाड़ी में साग-सब्जी भी लगाए हैं। उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट रखने के लिए शेड बनाने का आग्रह किया।  इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के लिए निर्देशित किया। राजीव युवा मितान क्लब ग्राम टेका के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज ने बताया कि युवा मितान क्लब के कार्यों से सांस्कृतिक कार्यक्रम को बढ़ावा मिला है। छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में खेल स्पर्धाएं हो रही हैं। इससे प्रतिभाएं को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। हाट बाजार क्लीनिक योजना के हितग्राही घनश्याम प्रसाद गुप्ता ने बताया कि शनिवार को बाजार में डॉक्टर की टीम आती है और हर प्रकार से जांच कर दवाई भी मुफ्त में देते है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इलाज महंगा हो गया है। इसे देखते हुए हमने मुफ्त में इलाज, दवा दे रहे हैं। इसका लाभ जरूर उठाना चाहिए। मुख्यमंत्री सुपोषण योजना की हितग्राही ग्राम बिनौरी की सुश्री उर्मिला ध्रुव ने बताया कि हीमोग्लोबिन बहुत कम होने के कारण तबियत खराब रहती थी, आगनबाड़ी कार्यकर्ता ने उन्हें योजना की जानकारी दी और अब आंगनबाड़ी केंद्र में गर्म पोष्टिक भोजन मिल रहा है जिससे हीमोग्लोबिन बढ़ा है। राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के हितग्राही गौतम निषाद ने बताया कि 2 किस्त मिल गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि 7 हजार रुपए दे रहे है। जरूरत मंद पात्र हितग्राही इसका आवश्य लाभ उठाएं।

 

मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के सातवें चरण की शुरूआत एक दिसंबर से

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रायपुर। प्रदेश में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के सातवें चरण की शुरूआत आगामी एक दिसंबर से होगी। राज्य के चार मलेरिया संवेदी जिलों - बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा में एक माह तक यह अभियान संचालित किया जाएगा। मलेरिया के मामलों को निम्नतम स्तर तक ले जाकर पूर्ण मलेरिया मुक्त राज्य के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रदेश में लगातार यह अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में इस अभियान के पिछले छह चरणों के अच्छे नतीजे आए हैं।



एक दिसंबर से शुरू हो रहे सातवें चरण में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम बस्तर संभाग के इन चारों जिलों के घने जंगलों और पहाड़ों से घिरे दुर्गम तथा दूरस्थ इलाकों में घर-घर पहुंचकर सभी लोगों में मलेरिया की जांच करेगी। इस दौरान पॉजीटिव पाए गए लोगों को तत्काल मलेरिया की दवाई खिलाई जाएगी। मलेरिया की जांच और इलाज के साथ ही इससे बचाव के लिए जन-जागरूकता संबंधी गतिविधियां भी चलाई जाएंगी। इस दौरान लोगों को मच्छरदानी के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। घरों के आसपास जमे पानी और नालियों में डी.डी.टी. या जले हुए तेल का छिड़काव किया जाएगा। घर के आसपास स्वच्छता बनाए रखने और मच्छरों को पनपने से रोकने के उपाय भी लोगों को बताए जाएंगे।

मेरा घर, मेरा दफ्तर अभियान से शासकीय कार्यालयों में व्यापक पैमाने पर की गई साफ-सफाई

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राजनांदगांव। जिले में शासकीय कार्यालय की सफाई के लिए कलेक्टर डोमन सिंह के मार्गदर्शन में चलाये जा रहे मेरा घर, मेरा दफ्तर अभियान के तहत सभी शासकीय कार्यालयों में व्यापक पैमाने पर साफ-सफाई की गई। कलेक्टर के आव्हान पर जिले भर में हर माह के पहले शनिवार को शासकीय अधिकारी- कर्मचारी अपने कार्यालय की सफाई कर रहे हैं। आज कलेक्टोरेट में सभी विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों ने फाइल व्यवस्थित कर संधारित किया वहीं अनुपयोगी वस्तुओं को नष्ट किया गया।


गौरतलब है कि प्रत्येक माह के तीसरे शनिवार को सुबह 8 बजे से 10 बजे तक शासकीय कार्यालय की साफ-सफाई की जा रही है। सफाई अभियान अंतर्गत रिकार्ड व्यवस्थित रखना है। आज कलेक्टोरेट सहित जिला पंचायत, नगर निगम, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, संयुक्त जिला कार्यालय भवन, आबकारी कार्यालय, जिला आयुर्वेद अधिकारी कार्यालय, जनसंपर्क कार्यालय, कार्यपालन अभियंता विद्युत, जिला कोषालय, आदिम जाति विभाग, जिला परिवहन कार्यालय, कृषि विभाग, मत्स्य विभाग, पंजीयक कार्यालय, पीएमजीएसवाई कार्यालय, वन विभाग कार्यालय, समस्त एसडीएम कार्यालय, जिले भर के सभी शासकीय कार्यालयों में साफ-सफाई की गई।

नशा माफियाओं के विरूद्ध कार्यवाही में कोई रियायत नहीं

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भोपाल। प्रदेश में नशामुक्ति अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। नशा माफियाओं के विरूद्ध कार्यवाही करने में कोई कोर-कसर नहीं रखी जा रही है। साथ ही आमजन को नशामुक्ति के लिये प्रेरित करने जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिलों में सख्ती से कार्यवाही की गई। दमोह जिले में ही 38 होटल और 28 ढाबों में सघन चेकिंग की गई। शुक्रवार को एनडीपीएस एक्ट में 67 प्रकरण दर्ज कर 573.39 ग्राम मादक पदार्थ जप्त किये गये।

 


अवैध शराब की बिक्री संबंधी 1078 प्रकरण में 1085 लोगों को आरोपी बनाते हुए 7214 लीटर शराब जप्त की गई। सार्वजनिक स्थल पर शराब पीने वाले 413 लोगों पर कार्यवाही की गई। शराब पीकर वाहन चलाने वाले 130 लोगों के विरूद्ध कार्यवाही की गई। धूम्रपान निषेध कानून में 508 लोगों को आरोपी बनाया गया है। प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों का नशा कराने वाले संदिग्ध 1591 स्थानों और अवैध शराब पीने-पिलाने वाले 2347 संदिग्ध स्थलों की जाँच सघनता से की गई। प्रदेश में आमजन को नशामुक्ति के प्रति जागरूक करने को 917 कार्यक्रम किये गये।

जबलपुर में 1350, रीवा में 400, छतरपुर में 50 लीटर लाहन जप्त कर नष्ट की गई। इंदौर में 459 किलो भांग जप्त की गई। अशोकनगर में 19 होटल चेक किये गये। सागर में जन-जागरूकता के सर्वाधिक 63 कार्यक्रम हुए। उज्जैन में 53, मंदसौर और रतलाम में 46-46, छिंदवाड़ा में 41, सतना में 37, शहडोल में 34, विदिशा में 32, बालाघाट में 28, बैतूल में 25, सिंगरोली में 25, राजगढ़ में 21, टीकमगढ़ और नीमच में 22-22, कार्यक्रम हुए।

देश से टीबी रोग के उन्मूलन के लिए जनभागीदारी आवश्यक : राष्ट्रपति

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि देश से टीबी रोग के उन्मूलन के लिए जनभागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने देश से दो हजार पच्चीस तक टीबी उन्मूलन के मिशन पर पुनः बल देने के लिए प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान का आज वर्चुअली शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नये भारत की रीति-नीति टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में भी दिखाई दे रही है। उन्होंने लोगों से कहा कि बिना संकोच के टीबी का जल्दी पता लगाने और इसका उन्मूलन करने में सहायता के लिए आगे आएं।



इस अवसर पर राष्ट्रपति ने नि-क्षय टू प्वॉइंट जीरो पहल की भी शुरूआत की। नि-क्षय वेबपोर्टल है, जो उपचाराधीन टीबी मरीजों को विभिन्न प्रकार का समर्थन उपलब्ध कराने के इच्छुक दानदाताओं के लिए मंच है। राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी आयुष्मान भारत योजना के तहत  टीबी के उन्मूलन की दिशा में कार्य करने के लिए आरोग्य केंद्रों को विशेष रूप से तैयार किया गया है। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके के सचिव अमृत खलखो वर्चुअल रूप से शामिल हुए। इस मौके पर उप सचिव दीपक अग्रवाल और माइक्रो बायोलॉजिस्ट निशांत मेश्राम भी उपस्थित थे।

महासमुंद : भारत जोड़ो अभियान के तहत संसदीय सचिव की अगुवाई में निकाली पदयात्रा

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महासमुंद। भारत जोड़ो अभियान के तहत कांग्रेसजनों ने संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर की अगुवाई में शहर के साथ ही गांवों में पदयात्रा की। इस दौरान कई जगहों पर सभा भी लेकर ग्रामीणों को जागरूक किया गया। आज गुरूवार को भारत जोड़ो अभियान की शुरूआत कांग्रेस भवन से हुई। संसदीय सचिव व विधायक चंद्राकर की अगुवाई में पदयात्रा बरोंडा चौक, शास्त्री चौक, बीटीआई रोड, कलेक्टोरे, रमन टोला, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी से परसकोल, भुरका, लाफिनखुर्द, लाफिनकला, चिंगरौद से होते हुए बम्हनी में समाप्त हुई। 


गावों में सभा लेकर ग्रामीणों को किया गया जागरूक

पदयात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं द्वारा महापुरुषों के जिन्दाबाद के नारे लगाकर उनको याद करने के साथ ही केंद्र सरकार की गलत नीतियों से हुई महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। पद यात्रा के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संसदीय सचिव व विधायक चंद्राकर ने कहा कि देश की अखंडता को आज जाति धर्म के नाम पर तोड़ा जा रहा है। इसलिए भारत जोड़ो अभियान की आज के हालात को देखते हुए इसकी आवश्यकता जरुरी हो गई है।

शहर से लेकर गांवों तक पदयात्रा करते पहुंचे कांग्रेसजन

आज देश में व्याप्त महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार से जनता परेशान है और देश में जाति धर्म को लेकर साम्प्रदायिकता का माहौल बना हुआ है, जिससे आपसी भाईचारा खत्म हो रहा है। जबकि इस देश को आजादी दिलाने में सभी धर्मों का बराबर सहयोग रहा है। भारत जोड़ों अभियान के माध्यम से लोगों को जागरुक कर आपसी एकता बनाए रखने की आवश्यकता है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष खिलावन बघेल, ढेलू निषाद, खिलावन साहू, जनपद अध्यक्ष यतेंद्र साहू, कृषि उपज मंडी अध्यक्ष हीरा बंजारे, जिला वनोपज संघ के अध्यक्ष प्रमोद चंद्राकर, नगरपालिका अध्यक्ष राशि महिलांग

उपाध्यक्ष कृष्णा चंद्राकर,  बीज अनुसंधान समिति के संचालक दाउलाल चंद्राकर, महामंत्री संजय शर्मा, कोषाध्यक्ष सुरेश द्विवेदी, सोमेश दवे, जिला पंचायत सदस्य अमर चंद्राकर, नरेंद्र दुबे, जसबीर ढिल्लो, हार्दिक सोना, आरीन चंद्राकर, हेमंत डडसेना, मायाराम टंडन, डा तरूण साहू, विजय साव, गोविंद साहू, किशन देवांगन, राजू यादव, सचिन गायकवाड़, निखिलकान्त कांत साहू, पार्षद बबलू हरपाल, गुरमीत चावला, जावेद चौहान, सुनील चंद्राकर, राजू साहू, आवेज खान, सती चंद्राकर, अन्नू चंद्राकर, लता कैलाश चंद्राकर, रविसिंह ठाकुर, ओमप्रकाश यादव, केके साहू, हर्ष शर्मा, गजेंद्र साहू, शिव यादव, निखिल चंद्राकर, जब्बर चंद्राकर, जय पवार, मानिक साहू, लता कैलाश चंद्राकर, ममता चंद्राकर, लक्ष्मी देवांगन, डीआर नायक, संतोष धीवर, थानू साहू, गेमन साहू, लक्ष्मी सोनी, अरीश अनवर आदि मौजूद रहे।

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