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उप मुख्यमंत्री अरुण साव के विभागों के लिए 15,386 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज उप मुख्यमंत्री अरुण साव के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 15,386 करोड़ 42 लाख 47 हजार रूपए की अनुदान मांगे पारित की र्गइं। इसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के लिए 2,793 करोड़ 60 लाख 73 हजार रूपए, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग-नगरीय निकाय के लिए 24 करोड़ 38 लाख 13 हजार रूपए, लोक निर्माण कार्य-सड़कें और पुल के लिए 4,664 करोड़ 8 लाख 56 हजार रूपए,


न्याय प्रशासन एवं निर्वाचन के लिए 894 करोड़ 45 लाख 20 हजार रूपए, लोक निर्माण कार्य-भवन के लिए 2,101 करोड़ 99 लाख 36 हजार रूपए, नगरीय प्रशासन एवं नगरीय विकास-नगरीय कल्याण के लिए 1,715 करोड़ 44 लाख 46 हजार रूपए, लोक निर्माण विभाग से संबंधित विदेशों से सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 69 करोड़ 20 हजार रूपए तथा नगरीय निकायों को वित्तीय सहायता हेतु 3,123 करोड़ 45 लाख 83 हजार रूपए शामिल हैं।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग

उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने अपने विभागों से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए सदन में कहा कि आजादी के 60 वर्षाें के बाद भी गांवों में घरों तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाया था। ग्रामीण महिलाओं को पेयजल की व्यवस्था में लगने वाले अथक परिश्रम से राहत दिलाने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जल जीवन मिशन की परिकल्पना की है। हर घर तक पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम देने वर्ष 2019 से जल जीवन मिशन का काम शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने जल जीवन मिशन को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए पिछली सरकार की त्रुटियों और खामियों को दूर करते हुए कार्याें की गुणवत्ता, गतिशीलता और पूर्णता के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। इसके लिए लापरवाह और कार्य नहीं करने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है।

उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री साव ने सदन में बताया कि जल जीवन मिशन के तहत राज्य में 22 हजार 389 करोड़ 99 लाख रूपए लागत की 29 हजार 173 सिंगल विलेज एवं रेट्रोफिटिंग योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। साथ ही 3,212 गांवों के लिए 4166 करोड़ 50 लाख रूपए की लागत से 70 समूह जल प्रदाय योजनाएं भी मंजूर की गई हैं। इन योजनाओं से राज्य के 50 लाख 4 हजार ग्रामीण परिवार लाभान्वित होंगे। जल जीवन मिशन में अब तक 40 लाख 10 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इसके तहत 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन के मान से हर घर नल से जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। मिशन के कार्याें के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में 4500 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के आगामी वर्ष के बजट में हैण्डपम्पों के संधारण के लिए 28 करोड़ 51 लाख रूपए, ग्रामीण नल जल प्रदाय योजनाओं के संधारण के लिए 28 करोड़ 51 लाख रूपए, समूह जल प्रदाय योजनाओं के संचालन/संधारण के लिए 8 करोड़ रूपए और नाबार्ड पोषित सौर ऊर्जा आधारित योजनाओं के लिए 3 करोड़ 50 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। भू-जल को रिचार्ज करने जल संवर्धन कार्य के लिए 2 करोड़ रूपए, शहरी क्षेत्रों में नलकूपों के खनन के लिए 2 करोड़ 60 लाख रूपए, प्रगतिरत नगरीय पेयजल योजनाओं में अनुदान के लिए 56 करोड़ 37 लाख 6 हजार रूपए एवं 41 करोड़ 99 लाख 46 हजार रूपए ऋण का भी प्रावधान इस बजट में किया गया है। भिलाई आईआईटी में पेयजल आपूर्ति के लिए शिवनाथ नदी पर आधारित निर्माणाधीन योजना के लिए भी 01 करोड़ रूपए का प्रावधान इस बजट में है।

उप मुख्यमंत्री साव ने सदन में बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुदृढ़ पेयजल व्यवस्था के लिए आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में नवीन मद में कई प्रावधान किए गए हैं। इनमें जल जीवन मिशन के कार्याें की निगरानी हेतु डेशबोर्ड निर्माण के लिए 3 करोड़ रूपए, मानव संसाधन के लिए 01 करोड़ 19 लाख रूपए, राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए 01 करोड़ 60 लाख रूपए, नल जल योजनाओं के अनुरक्षण कार्य के लिए 5 करोड़ रूपए, विभागीय कार्यालयों के निर्माण के लिए 01 करोड़ 65 लाख रूपए तथा समूह जल प्रदाय योजनाओं के लिए 250 करोड़ रूपए के प्रावधान शामिल हैं।

लोक निर्माण विभाग

उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरूण साव ने सदन में विभागीय अनुदान मांगों पर चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि सड़कें केवल आवागमन के साधन नहीं हैं। ये विकास की दिशा भी तय करते हैं। राज्य के तीव्र विकास के लिए नई सड़कों का निर्माण तेजी से किए जा रहे हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2024-25 में राज्यमार्गाें के उन्नयन के लिए सीआरआईएफ योजना के तहत 8 सड़क खण्डों के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण के लिए 892 करोड़ 36 लाख रूपए मंजूर किए गए हैं। इससे राज्य के विभिन्न जिलों में 323 किलोमीटर लम्बाई की सड़कों का मजबूतीकरण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विभाग के आगामी वर्ष के बजट में राज्य में विद्यमान रेल्वे लाईन्स पर लेबल क्रॉसिंग, रेल्वे ओव्हर ब्रिज, व्यस्ततम तथा अधिक घनत्व वाले चौक पर ग्रेड सेपरेटर के निर्माण तथा राष्ट्रीय राजमार्गाें एवं मुख्य जिला मार्गाें के संकीर्ण एवं कमजोर पुलों के पुनर्निर्माण के कार्य को प्राथमिकता से शामिल किया गया है। भारत सरकार ने राज्य में सात रेल्वे क्रॉसिंग पर आरओबी निर्माण के लिए 356 करोड़ 71 लाख रूपए स्वीकृत किए हैं। केन्द्र सरकार राज्य की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए एनएचएआई के माध्यम से विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गाें के निर्माण एवं उन्नयन के कार्य प्राथमिकता से कर रही है।

साव ने सदन में बताया कि वर्ष 2001 में लोक निर्माण विभाग का बजट मात्र 103 करोड़ 85 लाख रूपए का था, जो 2025-26 के बजट में बढ़कर अब 9,451 करोड़ रूपए पहुंच गया है। यह नये छत्तीसगढ़ के निर्माण की कल्पना को सुदृढ़ करने की पहल है। इस बजट को वर्ष 2030 तक के लिए सड़कों के व्यवस्थित विकास की कार्ययोजना को ध्यान में रखकर बनाया गया है। अत्यधिक यातायात वाले शहरी भागों में 4 लेन का निर्माण तथा घनी आबादी वाले शहरों की नजदीकी बसाहटों को 4 लेन मार्गाें से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है। इससे शहरों का व्यवस्थित विस्तार होगा और विकास बढ़ेगा। अत्यधिक यातायात तथा खनन क्षेत्रों में भारी यातायात को ध्यान में रखते हुए सड़कों के मजबूतीकरण और आवश्यकतानुसार 4 लेन निर्माण को प्राथमिकता दी गई है।

अंतराज्यीय सीमा की सड़कों के सुदृढ़ीकरण तथा सुगम यातायात के लिए उन्हें 4 लेन करने की योजना बनाई गई है। साव ने सदन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में भारतमाला योजना संचालित है। छत्तीसगढ़ में रायपुर से विशाखापटनम को जोड़ने वाली भारतमाला 4 लेन एक्सप्रेस-वे निर्माणाधीन है, जिसके शीघ्र ही पूरा होने की संभावना है। बस्तर क्षेत्र को इस एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए नये बजट में कई सर्वेक्षण, सड़क निर्माण और सुदृढ़ीकरण के कार्य शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि 2025-26 के बजट में 1909 नई सड़कों एवं पुल-पुलियों के लिए 1902 करोड़ रूपए, 168 सड़कों की डामरीकृत सतह के उन्नयन एवं मजबूतीकरण के लिए 917 करोड़ रूपए, दुर्घटनाओं को रोकने महत्वपूर्ण मार्गाें के पुलों के चौड़ीकरण एवं सुरक्षा उपाय, मरम्मत कार्य एवं ब्लैक-स्पॉट सुधार कार्याे के लिए 120 करोड़ रूपए, निजी भूमि के मुआवजा भुगतान के लिए 420 करोड़ रूपए तथा 339 पुलों के निर्माण के लिए 1351 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। बिलासपुर और रायगढ़ में विभागीय कार्यालयों के निर्माण के साथ ही मनेन्द्रगढ़ और सारंगढ़ में नये सर्किट हाउस के निर्माण का भी प्रावधान इस बजट में किया गया है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री साव ने विभाग की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा के उत्तर में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के शहर विकास के नित नये आयाम स्थापित कर रहे हैं। राज्य के नागरिकों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दी गई गारंटी को हमारी सरकार एक-एक कर पूरा करते हुए आगे कदम बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि जन आकांक्षाओं के अनुरूप राज्य के नये उभरते कस्बों के सुव्यवस्थित और सुनियोजित विकास के लिए हमने नगरीय निकायों की संख्या 179 से बढ़ाकर 192 की है।

हमने विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने तथा विकसित छत्तीसगढ़ निर्माण की ओर तेजी से कदम बढ़ाने अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन कहे जाने वाले शहरों के विकास के लिए 2025-26 में ऐतिहासिक 6,044 करोड़ 12 लाख रूपए का बजट प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के प्रथम चरण में हमने कुल स्वीकृत 02 लाख 49 हजार 166 आवासों में से 2 लाख 5 हजार 360 आवास पूर्ण कर लिए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत दूसरे चरण में सभी शहरों में ऑनलाईन हितग्राही सर्वेक्षण कार्य प्रगति पर हैं। अब तक 42 हजार हितग्राहियों की जानकारी भारत सरकार के पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी है। केन्द्र सरकार द्वारा दिसम्बर-2024 में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ के लिए 15 हजार आवासों की स्वीकृति दी गई है।

साव ने बताया कि नये बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 875 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। योजना के लाभार्थियों द्वारा निर्धारित समयावधि में आवास निर्माण कर गृह प्रवेश करने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने के लिए मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना प्रारंभ की जा रही है। इसके लिए 100 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने बताया कि राज्य के नये बजट में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के लिए 380 करोड़ रूपए, अमृत मिशन 2.0 के लिए 744 करोड़ रूपए, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के लिए 25 करोड़ रूपए, प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए 30 करोड़ रूपए, रायपुर स्मार्ट सिटी के लिए 100 करोड़ रूपए, बिलासपुर स्मार्ट सिटी के लिए 100 करोड़ रूपए, मोर संगवारी सेवा के लिए 10 करोड़ रूपए, मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के लिए 100 करोड़ रूपए, शहरों में मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए अधोसंरचना मद में 750 करोड़ रूपए तथा 14वें एवं 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत 680 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है।

साव ने सदन में बताया कि राज्य के 17 नगरीय निकायों में नालंदा परिसरों के निर्माण के लिए 100 करोड़ रूपए तथा संचालन के लिए 02 करोड़ रूपए प्रावधानित हैं। इस साल शुरू होने वाली नई योजना मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के लिए 500 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान रखा गया है।

विधि एवं विधायी कार्य विभाग

उप मुख्यमंत्री तथा विधि एवं विधायी कार्य मंत्री साव ने अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले एक वर्ष में न्यायिक व्यवस्था एवं न्यायिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। अधीनस्थ न्यायालयों में 321 नये पदों पर भर्ती की अनुमति के साथ ही उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायालयों में 1259 नये पद सृजित किए गए हैं। नागरिकों के सुविधा के लिए वर्ष 2024 में 49 नये नोटरी नियुक्त किए गए हैं।

न्यायालय भवनों, आवासीय भवनों और अन्य विकास कार्याें के लिए 240 करोड़ रूपए भी मंजूर किए गए हैं। राज्य की न्यायिक व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए 2025-26 के बजट में हमने 1265 करोड़ 46 लाख 78 हजार रूपए का प्रावधान किया है। इसमें न्यायालय भवन, न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के आवास निर्माण के लिए 45 करोड़ रूपए, बिलासपुर उच्च न्यायालय परिसर में ऑडिटोरियम निर्माण के लिए 10 करोड़ रूपए, न्यायालयों के आधुनिकीकरण/कम्प्यूटरीकरण के लिए 36 करोड़ 90 लाख 67 हजार रूपए, जरूरतमंद तबकों तक न्याय पहुंचाने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, उच्च न्यायालय सेवा समिति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों तथा तालुका विधिक सेवा समितियों के लिए 3 करोड़ 50 लाख रूपए तथा एडीआर सेंटर के निर्माण के लिए 11 करोड़ रूपए के प्रावधान शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि बिलासपुर उच्च न्यायालय में रजिस्ट्रार जिला न्यायाधीश के नये पदों के लिए 01 करोड़ रूपए तथा विभिन्न न्यायालयों में मानव संसाधन बढ़ाने 2 करोड़ 43 लाख 12 हजार रूपए, राज्य के 22 परिवार न्यायालयों में,  तथा बिलासपुर में परिवार न्यायालय की स्थापना के लिए नये पदों के सृजन के लिए 01 करोड़ रूपए और विभिन्न विधिक सेवा प्राधिकरणों में नये पदों के लिए 01 करोड़ रूपए के साथ ही महाधिवक्ता कार्यालय में शासकीय अधिवक्ता एवं उप शासकीय अधिवक्ता के नये पदों के लिए 02 करोड़ रूपए प्रावधानित हैं।

आगामी वर्ष के बजट में न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए स्थापित छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के ऑडिटोरियम में विभिन्न निर्माण कार्याें के लिए 03 करोड़ 20 लाख रूपए, हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं के अंतरराष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए 01 करोड़ रूपए और वहां स्थापना व्यय के लिए 13 करोड़ 50 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।

लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा विधि एवं विधायी कार्य विभाग से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा में विधायकगण सर्वश्री दलेश्वर साहू, अजय चंद्राकर, उमेश पटेल, धर्मजीत सिंह, धरमलाल कौशिक, दिलीप लहरिया, सुनील सोनी, मोतीलाल साहू, व्यास कश्यप, रिकेश सेन, सुशांत शुक्ला, कुंवर सिंह निषाद, पुन्नूलाल मोहले, श्रीमती हर्षिता बघेल, श्रीमती शेषराज हरवंश, सुश्री लता उसेंडी और श्रीमती यशोदा वर्मा ने भाग लिया।

महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग के लिए अनुदान मांगे पारित

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रायपुर। महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के विभागों के लिए वर्ष 2024-25 के लिए 3009 करोड़ 28 लाख 14 हज़ार रुपए की अनुदान मांगे छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज पारित की गई। इनमें समाज कल्याण विभाग से संबंधित व्यय के लिए मांग संख्या 34 के तहत 121 करोड़ 76 लाख 27 हज़ार रुपए और महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए मांग संख्या 55 के तहत 2887 करोड़ 51 लाख 87 हजार रूपए की अनुदान मांगे शामिल हैं।


महिला एवं बाल विकास विभाग

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 हेतु कुल राशि 5682 करोड़ 85 लाख 83 हजार रूपए की अनुदान मांगें छत्तीसगढ़ राज्य की महतारियों को समर्पित करते हुए कहा कि यह बजट प्रदेश की नारी शक्ति, किशोरी बेटियों और नौनिहालों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने यह संकल्प लिया है कि प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से संबल बनाएगी तथा उनका सशक्तिकरण करेगी। यह वादा हमने निभाया और लगभग सभी पात्र महिलाओं को 1000 रूपये प्रतिमाह उनके खाते में अंतरित करने का निर्णय लिया है। आगामी माह में राशि का अंतरण भी प्रारंभ कर देंगे। महतारी वंदन योजना में लगभग 8000 करोड़ रूपये का व्यय संभावित है। इसके लिए वर्ष 24-25 में प्रथम चरण में 3000 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। इससे महिलाओं के सामाजिक आर्थिक सशक्तिकरण में सहायता मिलेगी।

श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि कामकाजी महिलाओं के बच्चों की देखभाल हेतु 1500 स्थानों पर पालना केन्द्रों हेतु बजट में 20 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य एवं पोषण हमारी सरकार की प्राथमिकता में है। बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए बजट में 82.80 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। कुपोषण दूर करने पोषण आहार हेतु बजट में 700 करोड़ का प्रावधान किया गया है। बजट में 1000 कन्या शालाओं, महाविद्यालयों में सेनेटरी नेपकिन वेडिंग मशीन हेतु 13 करोड़ का प्रावधान है। ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी भवनों के लिए 24 करोड़ रूपए और शहरी क्षेत्रों में 100 आंगनबाडी हेतु 12 करोड़ रूपये का प्रावधान और आंगनबाड़ी को नर्सरी स्कूलों की तरह विकसित करने के लिए 29 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। मिशन शक्ति हेतु 10 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ महिला कोष से स्व-सहायता समूहों तथा महिलाओं को ऋण योजना का लाभ दिलाने हेतु 25 करोड़ 20 लाख का प्रावधान।

श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना हेतु 7600 कन्याओं के विवाह का लक्ष्य रखते हुए 38 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना हेतु 116 करोड़ 56 लाख रूपये और मिशन वात्सल्य के लिए 94 करोड़ 80 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। साथ ही महिला सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए 5 करोड़ 27 लाख रूपए का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि महिला हेल्पलाइन नम्बर (181), चाइल्ड हेल्पलाइन नम्बर (1098) के एकीकरण टोल फ्री नम्बर 112 हेतु 75 करोड़ 71 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष योजनाओं और सेवाओं में उन्नत तकनीक अपनाने के लिए विभाग को डिजिटलाईजेशन करने के लिए बजट में 5 करोड़ 75 लाख रूपये का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि गत सरकार द्वारा संचालित 25 योजनाओं का युक्तियुक्तकरण किया गया है और इन योजनाओं को 10 अम्ब्रेला योजना के रूप में संचालित करने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ महिला कोष द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों को ऋण योजना के लिए 25 करोड़ 20 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।

समाज कल्याण विभाग

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और उभयलिंगी व्यक्तियों के साथ ही अन्य व्यक्तियों के लिए विभागीय योजनाओं से संबंधित किसी भी समस्या के त्वरित निराकरण के लिए हेल्पलाइन नंबर 155326 या टोल फ्री नंबर 1800-233-8989 संचालित है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में एक करोड़ 30 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। नशापान की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य के सभी विकासखण्डों के ग्राम पंचायतों में 2951 भारतमाता वाहिनी का गठन किया गया है। इसके लिए बजट में 10 करोड़ रूपए का प्रावधान है। 

श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को पीआरआरसी सेंटर के माध्यम से अत्याधुनिक कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदाय करने के लिए एक करोड़ 59 लाख 72 हजार रूपए का प्रावधान है। दिव्यांग व्यक्तियों के सामाजिक पुनर्वास के लिए निःशक्त जन विवाह प्रोत्साहन योजना के लिए 4 करोड़ रूप्ए का प्रावधान किया गया है। योजना के तहत दिव्यांग दम्पति को एकमुश्त एक लाख रूपए की सहायता दी जाती है। दिव्यांग व्यक्तियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए संबल योजना के तहत एक करोड़ 91 लाख रूपए और वृ़द्धाश्रमों के संचालन के लिए 4 करोड़ 15 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।    


प्रधानमंत्री आवास योजना से नीतू का सपना हुआ पूरा

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दुर्ग। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नगर पालिक निगम दुर्ग के गया नगर वार्ड क्रं. 4 की नीतू ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के क्रियान्वित होते ही उन्होंने सर्वे में अपना नाम जुड़वाया और हितग्राही द्वारा आवास निर्माण के तहत् उन्होंने मात्र 8 माह में अपने पक्के घर का निर्माण कर लिया। कुल  29.00 वर्ग मीटर स्वीकृत कॉरपेट क्षेत्रफल में उन्होंने अपना पक्का घर बनाया है।

प्रथम तल निर्मित इस घर हेतु इन्हें 04 किश्तों में 2.24 लाख राशि का अनुदान आधार लिंक्ड बैंक खाते में दिया गया। हितग्राही को सारी प्रक्रियाएं बिल्कुल नई और आश्चर्य से भरी हुई लगती है, क्योंकि उन्होंने नक्शा पास कराने किश्त लेने हेतु किसी भी कार्यलय में भागमभाग नहीं की तथा 1 रूपए भी उन्हें अतिरिक्त नहीं खर्च नहीं करना पड़ा। उनके एवं उनके परिवार की वर्षों की आस पूरी हो गई। योजना से प्राप्त अनुदान के अतिरिक्त स्वयं की राशि लगाते हुए उन्होंने सर्वसुविधा युक्त आवास का निर्माण किया तथा आज अच्छे से जीवन निर्वहन कर रही हैं। 

स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम स्कूलों में 9117 पदों पर होगी भर्ती

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रायपुर। स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम के 318 स्कूलों में 9117 पदों पर भर्ती की जाएगी। इसको लेकर प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आत्मानंद स्कूलों में विभिन्न पदों की भर्ती के लिए नियमावली जारी कर दी गई है। सभी पद स्कूल शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति पर ही भरे जाएंगे। प्रत्येक स्कूल हेतु कलेक्टर की अध्यक्षता में एक सोसायटी का गठन किया गया है। इन स्कूल के संचालन हेतु गठित सोसायटी को भर्ती एवं स्कूल संचालन के अधिकार हस्तांतरित किए गए हैं।

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी स्कूलों में प्राचार्य, उप प्राचार्य, व्याख्याता, प्रधान पाठक (प्राइमरी एवं मीडिल स्कूल), शिक्षक, व्यायाम शिक्षक, कम्प्यूटर शिक्षक, सहायक शिक्षक, सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला), ग्रंथपाल, लेखापाल एवं सहायक ग्रेड-02, सहायक ग्रेड-03, भृत्य, चौकीदार एवं अंशकालीन सफाई कर्मी के पद पर भर्ती की जाएगी। इसके लिए राज्य शासन द्वारा सोसायटी को पद अंतरित कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा पूर्व में लिए गए निर्णय के अनुसार प्रदेश में शिक्षा सत्र 2022-23 से 32 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालयों का संचालन कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति को सौंपा गया था।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल संचालन के संबंध में सोसायटी की नियमावली तय की गई है, जिसके अनुसार विद्यालय के संचालन के लिए पंजीकृत सोसायटी के राज्य शासन द्वारा अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा और सोसायटी अन्य स्त्रोतों से भी धन जुटा सकेगी। विद्यालय के संचालन हेतु आवश्यक पद शासन की अनुमति से समिति द्वारा निर्मित किए जा सकेंगे। राज्य शासन द्वारा सोसायटी को अंतरित किए गए सभी पदों को सोसायटी केवल राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति पर ही भर सकेगी। इन पदों पर सोसायटी द्वारा सीधी भर्ती अथवा संविदा नियुक्ति नहीं की जाएगी। इन स्कूलों में वर्तमान में पदस्थ कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर लेना सोसायटी के लिए अनिवार्य नहीं होगा। यदि सोसायटी इन कर्मचारियों को स्कूल के लिए उपयुक्त पाती है और यह कर्मचारी सोसायटी में प्रतिनियुक्ति पर कार्य करना चाहते हैं तो सोसायटी उन्हें प्रतिनियुक्ति पर ले सकेगी, अन्यथा सोसायटी राज्य शासन स्कूल शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर ले सकेगी।

गौरतलब है कि प्रदेश में सत्र 2022-23 से 32 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट माध्यम विद्यालयों का संचालन कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति को सौंपा गया था। इस योजना की सफलता को देखते हुए राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि अब प्रदेश में 318 स्कूलों को स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम उत्कृष्ट के रूप में विकसित किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार इन 318 स्कूलों में से सबसे अधिक दंतेवाड़ा जिले में 54, बस्तर जिले में 43, कोरबा में 37, कांकेर और रायगढ़ जिले में 30-30, बीजापुर जिले में 22, सुकमा जिले में 18, दुर्ग और बिलासपुर जिले में 13-13 स्कूलों को स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। इसी प्रकार जिला बालोद में 10, बलौदाबाजार में 8, जांजगीर-चांपा और सांरगढ़-बिलाईगढ़ में 6-6, कोण्डागांव में 5, जशपुर और बलरामपुर में 4-4, सरगुजा और सूरजपुर में 3-3, गरियाबंद, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही और नारायणपुर में 2-2, धमतरी, कोरिया और कबीरधाम जिले में 1-1 स्कूलों को स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा।

अनुसूचित जाति एवं जनजाति, स्कूल शिक्षा एवं सहकारिता विभाग के 48,093 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगे पारित

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, स्कूल शिक्षा और सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम के विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 हेतु 48093 करोड़ 99 लाख 32 हजार रूपए की अनुदान मांगे ध्वनि मत से पारित की गई। इसमें आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विभाग के लिए 40468 करोड़ 4 लाख 80 हजार रूपए, स्कूल शिक्षा के लिए 7 हजार 338 करोड़ 97 लाख 29 हजार रूपए और सहकारिता विभाग के लिए 286 करोड़ 97 लाख 23 हजार रूपए की राशि शामिल है।

मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने विभागीय बजट पर चर्चा का उत्तर देते हुए बताया कि स्कूली बच्चों को उत्कृष्टतापूर्ण शिक्षा देना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशानुरूप सत्र 2021-22 में 52 स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल प्रारंभ किए गए। ये विद्यालय इतने लोकप्रिय हुए कि स्कूलों में बच्चों के लिए उपलब्ध एक-एक सीट के लिए 40-40 आवेदन प्राप्त हुए। इतना ही नहीं बहुत से निजी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को माता-पिता ने इन स्कूलों में भर्ती कराया। इन स्कूलों की लोकप्रियता को देखते हुए शासन ने लगातार स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की संख्या में वृद्धि की और वर्तमान में 247 अंग्रेजी माध्यम तथा 32 हिन्दी माध्यम विद्यालय संचालित हो रहे हैं। 

247 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में 01 लाख 30 हजार अंग्रेजी माध्यम और लगभग 90 हजार हिन्दी माध्यम के विद्यार्थी अध्ययनरत् हैं। हिन्दी माध्यम के 32 विद्यालयों में लगभग 24 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत् हैं। मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों की लोकप्रियता इस बात से भी प्रमाणित होती है कि दूरस्थ अंचलों में होने वाले भेंट-मुलाकात कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के समक्ष अनेक स्थानों पर नवीन अंग्रेजी माध्यम स्कूल प्रारंभ करने की मांग आई है। इस मांग की पूर्ति के लिए आगामी वर्ष में बजट में 101 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय प्रावधानित किए गए हैं। 

इससे लगभग 60 हजार नवीन बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने का मौका मिलेगा। आगामी बजट में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के लिए 870 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय भी प्रारंभ किए जाएंगे। मंत्री डॉ. टेकाम ने बताया कि राज्य सरकार ने सभी महापुरूषों के प्रति सम्मान रखते हुए यह निर्णय लिया है कि यदि किसी विद्यालय को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में परिवर्तित किया जा रहा है एवं संबंधित विद्यालय का पूर्व में नामकरण किया जा चुका हो तो उसे नहीं बदला जाएगा, बल्कि पूर्व से संचालित विद्यालय के नाम के पश्चात् ‘‘स्वामी आत्मानंद योजना के अंतर्गत’’ शब्द जोड़े जाएंगे। मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने कई नवाचार किए।

कोरोना काल में बुल्टू के बोल, मोहल्ला क्लास, लाउडस्पीकर वाले गुरूजी, श्यामपट वाले गुरूजी, अंगना म शिक्षा के माध्यम से शैक्षणिक गतिविधियों को बनाए रखा। छत्तीसगढ़ में बच्चों के शैक्षणिक स्तर को बचाए रखने में काफी हद तक सफल रहे। इसका प्रमाण असर सर्वेकी रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक जैसे राज्यों में बच्चों के पढ़ने के स्तर में काफी गिरावट आई है, उसकी तुलना में छत्तीसगढ़ के बच्चों का असर काफी अच्छा रहा। कोरोना महामारी के कारण शैक्षणिक अधिगम के स्तर में आई कमी को दूर करने के लिए विश्व बैंक के समर्थन से 2500 करोड़ रूपए की चॉक परियोजना शुरू कर रहे हैं। इस परियोजना के लिए वर्ष 2023-24 में 400 रूपए का प्रावधान किया गया है। मंत्री डॉ. टेकाम ने बताया कि एससीईआरटी के माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। जिन शिक्षकों ने अपने विद्यालय को उत्कृष्ट बनाने के लिए प्रशिक्षण चाहा था उन्हें प्रशिक्षण दिया गया।

कुछ शिक्षकों ने मांग की उन्हें राष्ट्रीय स्तर का अकादमिक एवं प्रशासनिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए आगामी सत्र के लिए नवा रायपुर में राष्ट्रीय स्तर का शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान हेतु बजट में एक करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। विद्यार्थियों में बुनियादी दक्षताओं को प्राप्त करने के लिए विभाग द्वारा सुघ्घर पढ़वैय्यायोजना प्रारंभ की गई है। योजना का मूलभाव यह है कि विद्यार्थियों को उनके प्रारंभिक वर्षों में अर्थात् 8 वर्ष की आयु तक समझ के साथ पढ़ना और जोड़ना, घटाना, गुणा-भाग आदि को करने में दक्षता हासिल करना। यह योजना कक्षा पहली से 8वीं तक विद्यार्थियों के लिए है। अभी तक 48 हजार 501 विद्यालयों में से 39009 विद्यालयों में इस चुनौती को स्वीकार किया है। थर्ड पार्टी आकलन के लिए 3880 विद्यालयों ने अनुरोध किया है।

इनमें से 630 विद्यालयों का आकलन एससीईआरटी द्वारा किया जा रहा है। मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि प्रदेश की शालाओं में उच्च स्तर की अधोसंरचनात्मक सुविधाएं विकसित करने के लिए हमारी सरकार ने मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजनाशुरू की है। इससे शीघ्र ही विद्यालयों को नये भौतिक स्वरूप में देखेंगे। इस योजना के लिए बजट में 500 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। नवीन सत्र में विद्यार्थी अपने विद्यालय के सुसज्जित भवन में नई उमंग के साथ पढ़ने जाएंगे। योजना के तहत 20408 विद्यालय चिन्हित किए गए हैं, जहां मरम्मत व अतिरिक्त कक्षों की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए जिलों को अब तक 193 करोड़ की राशि विमुक्त की जा चुकी है। सभी जिलों से 31 मार्च तक जानकारी मंगाई गई है, ताकि स्कूल सत्र शुरू होने से पूर्व स्कूलों को सुसज्जित किया जा सके। 

मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि विज्ञान विषय लेकर पढ़ने वाले प्रत्येक विद्यार्थी का सपना रहता है कि वह अच्छे मेडिकल या इंजीनियरिंग संस्थान में एडमिशन ले। इसके लिए बच्चे स्कूली पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न कोचिंग संस्थान में कोचिंग हेतु जाते हैं। राजस्थान के कोटा में संचालित कोचिंग संस्थानों ने पूरे देश में पहचान बनाई है। हमारे प्रदेश से भी बड़ी संख्या में बच्चे कोचिंग के लिए कोटा जाते हैं, परन्तु बहुत से गरीब परिवारों के बच्चे इस सुविधा से वंचित हो जाते हैं। अतः आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे कोटा राजस्थान में जाकर कोचिंग ले सकें, इसके लिए सरकार ने वहां छात्रावास निर्माण करने की योजना रखी है। सत्र 2023-24 के लिए 25 लाख के बजट का प्रावधान किया गया है। इसके लिए राजस्थान सरकार से जमीन की मांग की गई है।

मंत्री डॉ. टेकाम ने बताया कि हमारी सरकार ने नौनिहालों की नींव मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश में 5 हजार 173 बालवाड़ी 2022-23 में प्रारंभ किए हैं। बालवाड़ी में 5 से छह वर्ष के बच्चों को प्रवेश दिया गया है और यह आंगनबाड़ी तथा कक्षा पहली के बीच सेतु का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पूरा विश्व मिलेट्स ईयरमना रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार को मिलेट्स में की गई पहल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। इसी कड़ी में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मध्यान्ह भोजन योजना में मिलेट्स को शामिल करने का निर्णय लिया गया है, ताकि बच्चों को कुपोषण से मुक्ति में सहायता मिले। मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में कभी भी शिक्षकों की सीधी भर्ती नहीं की गई थी। हमारी सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए 10834 शिक्षकों की भर्ती की है और आने वाले समय में भी आवश्यकतानुसार शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।

मंत्री डॉ. टेकाम ने सहकारिता विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री बघेल की सरकार बनते ही दो घंटे के भीतर किसानों की ऋण माफी की। सरकार की नीतियों के कारण किसानों का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। सहकारी समितियों के माध्यम से गोपालन के लिए 2 लाख रूपए की सीमा तक 01 प्रतिशत एवं 2 से 3 लाख रूपए तक तीन प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। लाख उत्पादकों को दो लाख रूपए की सीमा तक और मत्स्य पालन, उद्यानिकी कार्य हेतु तीन लाख रूपए की सीमा तक शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। विभाग की इस योजना के फलस्वरूप ऋण लेने वाले किसानों की संख्या में वृद्धि हो रही है। वर्ष 2021-22 में 12 लाख 99 हजार कृषकों को 5 हजार 458 करोड़ रूपए का अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराया गया था। 

वर्ष 2022-23 में 14 मार्च तक लगभग 14 लाख 10 हजार किसानों को 6 हजार 434 करोड़ रूपए का अल्पकालीन ऋण सहकारी समितियों से उपलब्ध कराया गया है, जो विगत वर्ष की अपेक्षा लगभग 18 प्रतिशत अधिक है। कृषक ऋण ब्याज दर युक्तियुक्तकरण के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 में 290 करोड़ रूपए का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। मंत्री डॉ. टेकाम ने प्रदेश में संचालित 1333 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का पुनर्गठन कर 725 नवीन प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां गठित की गई है। इस तरह प्रदेश में कुल 2058 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां संचालित हैं। प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के पुनर्गठन के लिए फलस्वरूप नवीन पंजीकृत 725 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में 200 मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम सह-कार्यालय निर्माण के लिए प्रति गोदाम 25.56 लाख रूपए की लागत से कुल 185 करोड़ 31 लाख की परियोजना स्वीकृत की गई है। 

इसके लिए वर्ष 2023-24 में 34 करोड़ 16 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। मंत्री डॉ. टेकाम ने आदिम जाति, अनुसूचित जाति विकास विभाग की अनुदान मांगों की चर्चा पर उत्तर देते हुए कहा कि वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2023-24 के बजट प्रावधान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्य बजट वित्तीय वर्ष 2022-23 में 2347 करोड़ 70 लाख का प्रावधान था, जिसमें 628 करोड़ 65 लाख की वृद्धि हुई है। वर्ष 2023-24 के मुख्य बजट में 2976 करोड़ 35 लाख रूपए का प्रावधान रखा गया है। इस प्रकार प्रावधानित बजट में 26.77 प्रतिशत की वृद्धि परिलक्षित हुई है। इसी प्रकार आदिवासी उपयोजना एवं अनुसूचित जाति उपयोजना के माध्यम से विभिन्न सेक्टरों में विकास कार्यों का गति प्रदान करने के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य के मुख्य बजट में आदिवासी उपयोजना मद अंतर्गत कुल बजट प्रावधान 26168 करोड़ 69 लाख 45 हजार शामिल है।

इसी तरह अनुसूचित जाति उपयोजना मद वर्ष 2023-24 में कुल बजट प्रावधान 8276 करोड़ 15 लाख 02 हजार रूपए शामिल है।अनुसूचित जनजाति उपयोजना तथा अनुसूचित जाति उपयोजना मदों में वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2023-24 के मुख्य बजट प्रावधान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अनुसूचित जनजाति उपयोजना मुख्य बजट प्रावधान वर्ष 2022-23 में 21492 करोड़ 34 लाख 10 हजार रूपए था। वर्ष 2023-24 में 26168 करोड़ 69 लाख 45 हजार का प्रावधान किया गया है। इसमें तुलनात्मक वृद्धि 4676 करोड़ 35 लाख 35 हजार रूपए हुई है, जो 21.75 प्रतिशत है।

इसी प्रकार अनुसूचित जाति उपयोजना मद में गत वर्ष के मुख्य बजट की तुलना में वर्ष 2023-24 के मुख्य बजट प्रावधान में 22.67 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 के मुख्य बजट में 6746 करोड़ 44 लाख 40 हजार रूपए का प्रावधान था। वर्ष 2023-24 में 8276 करोड़ 15 लाख 2 हजार रूपए का प्रावधान किया गया है। इसमें तुलनात्मक वृद्धि 1529 करोड़ 70 लाख 62 हजार रूपए परिलक्षित हुई है। मंत्री डॉ. टेकाम ने बताया कि वर्ष 2023-24 के मुख्य बजट में नवीन मद के रूप में 15 पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों की स्थापना के लिए 01 करोड़ 43 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए हर जिले में पोस्ट मैट्रिक छात्रावास खोले जाएंगे।

सरकारी अनुदान की राशि का निजी ऋण के एवज में समायोजन करने पर होगी कार्रवाई

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बलौदाबाजार। कलेक्टर रजत बंसल ने दो टूक कहा है कि सरकारी योजनाओं के तहत हितग्राहियों को दिए जा रहे अनुदान राशि का समायोजन उनके द्वारा निजी तौर पर लिए गए बैंक ऋण के विरुद्ध नहीं किया जायेगा। यदि कोई बैंक ऐसा करते पाया गया तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी। कलेक्टर ने जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति की बैठक में कुछ बैंकों द्वारा ऐसी हरकतों की शिकायत मिलने पर इस आशय के कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने बैंकों द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण देने में रुचि नहीं दिखाने पर बैंक अधिकारियों को फटकार भी लगाई है।

बैठक में नाबार्ड की वित्तीय वर्ष 2023-24 की संभाव्यता युक्त ऋण योजना से सम्बंधित पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जिला पंचायत सीईओ गोपाल वर्मा,रिज़र्व बैंक के रायपुर कार्यालय से आये डीजीएम गजेंद्र साहू और एलडीएम प्रवीण अवस्थी विशेष रूप से उपस्थित थे। कलेक्टर बंसल ने परामर्शदात्री समिति की तिमाही समीक्षा बैठक में बैंकों के काम-काज और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रगति की बैंकवार विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बैंक लोन का प्रवाह ग्रामीणों और किसानों की ओर प्राथमिकता से ज्यादा होने चाहिए।

रिज़र्व बैंक के इस सम्बन्धी दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाना चाहिये। उन्होंने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना और जीवन सुरक्षा योजना क्षतिपूर्ति की भी जानकारी ली।कलेक्टर ने पंचायत सचिव और सांख्यिकी विभाग से मृत्यु के आंकड़ों से मिलान कर शत-प्रतिशत हितग्राहियों को लाभ दिलाने के निर्देश दिए। खादी और ग्रामोद्योग विभाग की योजनाओं में भी अपेक्षित प्रगति नहीं मिली है। कलेक्टर ने अंत्यावसायी सहकारी समिति की योजनाओं में अत्यंत धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी दिखाई।

ऋण वितरण प्रक्रिया में देरी पर नाराज हुए जिला पंचायत सीईओ

जिला पंचायत सीईओ गोपाल वर्मा ने सभी बैंकों को शासकीय ऋण योजनाओं के तहत स्वीकृत प्रकरणों में तेजी से ऋण वितरित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही बैंकों की ऋण वितरण की धीमी प्रगति पर नाराजगी जाहिर की उन्होंने सभी पुराने प्रकरणों का निराकरण करने के लिए बैंकों को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक और हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्राथमिकता से कार्य किया जा रहा है। इसके लिए सभी बैंकर्स ऐसे हितग्राही मूलक योजनाओं के प्रकरणों में जल्द निर्णय लेकर प्रकरण स्वीकृत करने के लिए निर्देशित किए है।

रोजगार के लिए ऋण की प्रक्रिया सरल बनाएं

बैठक में बैंकर्स द्वारा विभिन्न शासकीय विभागों के माध्यम से ऋण के प्रकरण और लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए अपनाई जाने वाली कार्य के संबंध में भी जानकारी ली। उन्होंने सभी बैंक प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना,पीएमईजीपी, शिक्षा ऋण,सहित अन्य ऋण के लिए प्राप्त आवेदनों का जल्द से जल्द स्वीकृत करते हुए ऋण वितरित करने की बात कही। साथ ही ऋण के आवेदनों में किसी भी प्रकार के दस्तावेज की कमी होने पर संबंधित विभाग को सूचित कर दस्तावेज की पूर्ति अनिवार्य रूप से करा लेने के निर्देश दिए है। एलडीएम श्री अवस्थी ने कलेक्टर के निर्देश और समिति में लिए गए निर्णयों के अनुरूप भविष्य में प्रगति लाने का बैंकों की ओर से भरोसा दिलाया और अंत में उपस्थित सभी अधिकारियों के प्रति आभार प्रकट किया। इस मौके सभी बैंकों के शाखा प्रबंधक,जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र,अंत्यावसायी विभाग, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, खादी ग्रामोद्योग विभाग,मत्स्यपालन विभाग समेत आदि उपस्थित थे।


शासकीय, निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में 20 से ‘‘हमर तिरंगा’’ कार्यक्रम का होगा आयोजन

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रायपुर। देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत राज्य के सभी शासकीय, निजी एवं अनुदान प्राप्त स्कूलों में ‘‘हमर तिरंगा’’ कार्यक्रम 20 से 30 अगस्त 2022 तक आयोजित किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने सभी कलेक्टरों, सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मिशन समन्वयकों को स्कूलों में ‘‘हमर तिरंगा’’ कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

 

                    आजादी का अमृत महोत्सव: ‘‘हमर तिरंगा अभियान’’

सचिव स्कूल शिक्षा द्वारा भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस वर्ष 15 अगस्त 2022 को भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे हो जाएंगे। स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे करने के अवसर पर हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ में हमर तिरंगाके नाम से जन समुदाय के साथ मिलकर सभी शासकीय, निजी एवं अनुदान प्राप्त स्कूलों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। 

इस कार्यक्रम का उद्देश्य मुख्य रूप से जन-जन में देशभक्ति की भावना का प्रचार-प्रसार करना, शहीदों की गाथाएं जन-जन तक पहुंचाना एवं सभी नागरिकों में देश के प्रति समर्पित रहने की भावना विकसित करते हुए वर्तमान सन्दर्भ में आजादी के असली अर्थ को समझाते हुए निरक्षरता के चंगुल से आजादी पाकर सभी को बेहतर गुणवत्ता की शिक्षा सुविधा उपलब्ध कराना है।

11वीं और 12वीं के बच्चों को दिखाई जाएंगी गांधीफिल्म

‘‘हमर तिरंगा’’ कार्यक्रम की इन्हीं भावनाओं से ओत-प्रोत होकर 20 से 30 अगस्त 2022 के मध्य  राज्य के सभी सरकारी, निजी एवं अनुदान प्राप्त शालाओं में समुदाय को साथ लेकर विभिन्न कार्यक्रमों को समारोहपूर्वक धूम-धाम से आयोजित किया जाएगा। सभी ग्रामों में इन आयोजनों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। राज्य में 20 अगस्त से 30 अगस्त 2022 तक हमर तिरंगाकार्यक्रम के तहत स्कूलों में प्रतिदिन आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के साथ-साथ कक्षा ग्यारहवी एवं बारहवीं के विद्यार्थियों को निकट के थियेटर अथवा स्मार्ट कक्षाओं में ‘‘गांधी’’ फिल्म दिखाई जाएगी। इस फिल्म के प्रदर्शन हेतु जिले में तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को दिए गए हैं।

स्कूलों में 20 से 30 अगस्त तक आयोजित किए जाएंगे देशभक्तिपूर्ण कार्यक्रम

कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि जिले में उपलब्ध सिनेमा हाल से संपर्क कर शासन की ओर से 20 से 30 अगस्त 2022 तक प्रतिदिन स्कूल अवधि के दौरान किसी उचित समय का निर्धारण कर एक शो कक्षा ग्यारहवी एवं बारहवी के बच्चों के लिए निःशुल्क दिखाया जाना तय करवाएं। जिले में उपलब्ध थियेटर जहां इन शो का प्रदर्शन किया जा सके एवं उनके आस-पास की शालाओं को मैपिंग करते हुए थियेटर में बैठक क्षमता के आधार पर शालाओं को इस अवधि में उनके विद्यार्थियों को शो के लिए समय पर लाने की व्यवस्था करने हेतु निर्देशित करें। 

ध्यान रखें कि शालाओं से निर्धारित संख्या में बच्चे इस शो को देखने समय पर उपस्थित होने चाहिए। शासकीय शालाओं के विद्यार्थियों को प्राथमिकता देते हुए साथ-साथ कुछ निजी शालाओं को भी इस कार्यक्रम का लाभ लेने हेतु आवश्यक सुविधा प्रदान करें। ट्विनिंग ऑफ स्कूल (Twinning of School) कार्यक्रम के अंतर्गत बड़े निजी शालाओं को उनके यहां उपलब्ध बस सुविधा का लाभ शासकीय शालाओं के बच्चों को थियेटर में लाने एवं निर्धारित समय पर उन्हें वापस छोड़ने के लिए उपयोग में लाया जा सके।

 जिले के स्कूलों के बच्चों के रोस्टर इस प्रकार से बनाए जाएं कि अधिकतम बच्चों को इस फिल्म को देखने का अवसर मिल सके। बच्चों को निर्धारित तिथि में फिल्म दिखाने लेकर जाने के संबंध में पालकों को सूचित करने के साथ-साथ उनसे सहमति एवं अन्य प्रक्रिया भी पूरी करवा ले। बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएं। जिन शालाओं के आसपास थियेटर नहीं है वहां के बच्चों को यदि उस शाला में स्मार्ट कक्षाएं उपलब्ध है, 

या अन्य संसाधनों से प्रोजेक्टर आदि के माध्यम से फिल्म दिखाए जाने की सुविधा सुलभ हो तो उसका उपयोग किया जा सकता है। उपरोक्तानुसार सभी आवश्यक तैयारियां करते हुए ‘‘हमर तिरंगा’’ कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार, कोरोना प्रोटोकोल का कड़ाई से पालन करते हुए बड़ी संख्या में जन समुदाय की सहभागिता एवं सभी ओर देशभक्ति का माहौल बनाने की दिशा में सभी आवश्यक प्रयास किए जाएं।

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