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Mahasamund : जिले में अब तक 249.3 मिलीमीटर औसत वर्षा, सर्वाधिक वर्षा पिथौरा तहसील में 290.6 मिलीमीटर

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 महासमुंद : महासमुंद जिले में चालू मानसून के दौरान 01 जून 2025 से अब तक 249.3 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है।


भू-अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार जिले में सर्वाधिक औसत वर्षा पिथौरा तहसील में 290.6 मिलीमीटर, सरायपाली में 282.15 मिलीमीटर, महासमुंद में 249.8 मिलीमीटर, बसना में 239.3 मिलीमीटर, बागबाहरा में 234.6 मिलीमीटर और सबसे कम वर्षा 199.5 मिलीमीटर कोमाखान तहसील में दर्ज की गई। आज 07 जुलाई को 49.8 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई।

जिले के तहसीलवार वर्षा में पिथौरा तहसील में 75.6 मिलीमीटर, सरायपाली में 54.1 मिलीमीटर, बसना में 50.6 मिलीमीटर, महासमुंद में 48.0 मिलीमीटर, कोमाखान में 37.3 मिलीमीटर एवं बागबाहरा तहसील में 33.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।

नक्सलवाद मुक्त प्रदेश की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ केंद्रीय गृह मंत्रालय और प्रदेश गृह मंत्रालय के सफल योजना से लगातार हो रहा नक्सलियों का एनकाउंटर :- पप्पू पटेल

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 महासमुन्द :- तुमगांव नगर के पूर्व उपाध्यक्ष भाजपा जिला प्रतिनिधि पप्पू पटेल ने हमारे सुरक्षा बल के जवानों के शौर्य पराक्रम को प्रणाम कहते हुए यह बात कही है कि छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के सघन जंगलों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराज सहित 27 नक्सली मारे गए. बसवराज पर एक करोड़ रुपये का इनाम था और वह नक्सल आंदोलन का शीर्ष नेतृत्वकर्ता था.


यह नक्सलवाद को खत्म करने की लड़ाई में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है इससे जवानों के सौर्य से मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का खात्मा होना निश्चित है .

बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री माननीय श्री अमित शाह जी और राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री माननीय श्री विजय शर्मा जी लगातार बस्तर प्रवास कर सुरक्षा बल के जवानों का हौसला बुलंद कर सुनियोजित कार्य योजना बना रहे है। हमारे उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा जी का विगत कुछ दिनों से लगातार अबूझमाड़ के बस्तियों में दौरा किया था। जिसका परिणाम यह भी हुवा है कि माओवादियों की तथाकथित राजधानी कहे जाने वाले ग्राम कुतुल से आजादी के बाद पहली बार बस सेवा का शुभारंभ भी हुवा है''नियद नेल्ला नार योजना'' अंतर्गत बस सेवा के संचालन से आवागमन सुगम, समय की बचत और रोजगार व शिक्षा की बढ़ी पहुंच।

यह सेवा अबूझमाड़ के सुदूर अंचल में बसे कुतुल, पदमकोट, बेड़माकोटी, नेलांगुर, मोहंदी, कच्चापाल, कोडलियार, ईरकभट्टी, कोहकामेटा आदि ग्रामों को जोड़ेगी। इस सेवा से इस ग्रामो में एक नई उन्मूलन विकास की राह अब रफ्तार पकड़ेगी यह मुठभेड़ न केवल सुरक्षा बलों की रणनीतिक सफलता को दर्शाती है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी नक्सली संगठन की पकड़ कमजोर पड़ रही है. इसके लिए पूरे प्रदेशवासियों की ओर से माननीय केंद्रीय गृह मंत्रालय सुरक्षा बल के जवानों के शौर्य को प्रणाम करते है।

देशभक्ति का जज्बा जगाने हर पंचायत और नगरीय निकायों में निकाली जाएगी तिरंगा यात्रा

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महासमुंद। तिरंगा यात्रा के सफल आयोजन के लिए कलेक्टर  विनय कुमार लंगेह ने वीसी के माध्यम से जिला स्तरीय एवं विकासखण्ड अधिकारी एवं कर्मचारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ  एस. आलोक, जिला शिक्षा अधिकारी  विजय लहरे उपस्थित थे।

तिरंगा यात्रा के सफल आयोजन के लिए कलेक्टर  विनय कुमार लंगेह ने दिए
दिशा निर्देश 

कलेक्टर श्री लंगेह ने बताया कि शनिवार 17 मई को प्रत्येक ग्राम पंचायत में तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। तिरंगा यात्रा ’राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नागरिक के बैनर तले आयोजित किया जाना है। उन्होंने बताया कि तिरंगा यात्रा के दौरान ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित स्लोगन “हम सेना के साथ हैं“ और “ऑपरेशन सिंदूर के साथ राष्ट्र’ जैसे संदेश होना चाहिए। भारत की जीत, सशस्त्र बलों की सुरक्षा, सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों को धन्यवाद देने के लिए यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा में क्षेत्र के सांसद, विधायक, जिला व जनपद पंचायत अध्यक्ष, सदस्य सहित पंचायत प्रतिनिधियों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा।

कलेक्टर ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में जिले के पूर्व सैनिक संगठन, सैनिकों के परिवारों को यात्रा में भाग लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने जनपद के सभी सीईओ, नगरीय निकाय सीएमओ, जिला शिक्षा अधिकारी से यात्रा की तैयारी हेतु आवश्यक निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि यात्रा सुबह 10 बजे से दोपहर 01 बजे तक निकाला जा सकता है। उन्होंने तिरंगा यात्रा को शांतिपूर्ण, अनुशासित, संगठित एवं उत्साह से लबरेज होने के लिए देशभक्ति के गीत और देशभक्ति के नारे शामिल करने कहा है। 

Murder In Mahasamund : जोबा में ऐसे हुआ महाभारत, जानिए जमीन कैसे बना जी का जंजाल

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अशोक कुमार साहू





रायपुरः छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 75 किमी दूर स्थित है गांव जोबा। महासमुंद जिले के इस गांव की आधा आबादी बाबा गुरूघासीदास के अनुयायी सतनामी समाज के लोगों की है। बाबा ने सत्य-अहिंसा और नशामुक्ति का पाठ पढ़ाया, यह हम सब जानते हैं। लेकिन, यहां बाबा के अनुयायी एक परिवार की बेइमानी ने महाभारत करा दिया। कहा जाता है कि जर-जोरू-जमीन ये तीन ही संसार में सभी फसाद की जड़ हैं। कुरूक्षेत्र का महाभारत- हस्तिानपुर में सुई के नोंक के बराबर जमीन नहीं देने संबंधी दुर्योधन के उद्गार से शुरू हुआ। जो कौरव वंश के समूल नाश का कारण बना। ऐसा ही घटना महासमुंद जिले के जोबा गांव में घटित हुआ। जमीन का बंटवारा नहीं देना एक परिवार के लिए जी का जंजाल बन गया। ।




और महज 6 एकड़ जमीन के बंटवारा के लिए अब तक चार हत्याएं हो चुकी है। हत्या करने वालों की योजना तो बड़े भाई के खानदान को समूल नष्ट करने का था। लेकिन, ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। इसके चलते उनकी योजना सफल नहीं हो पायी।




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हत्यारोपी: चेहरे पर जरा भी सिकन नहीं





हाथों में हथियार लिए खड़े ये दोनों पिता-पुत्र पर त्रिपल मर्डर का आरोप है। तुमगांव थाना में इनके खिलाफ घर में बलात प्रवेश कर हत्या और हत्या का प्रयास का अपराध पंजीबद्ध हुआ है। अपने ही सगे भाई-भतीजों और रिश्तेदारों को मौत के घाट उतारने के बाद भी इनके चेहरे पर जरा भी सिकन नहीं है। हत्या का आरोपी परसराम गायकवाड़ तो अपने भतीजे की हत्या का दोषाभियुक्त रहा है। वह अपने भतीजा धनीराम की हत्या के लिए दस साल की सजा काटकर कुछ महीने पहले ही जेल से रिहा हुआ है। पिता के जेल जाने और खुद दाने-दाने के लिए मोहताज होने से परसराम के बेटे बज्रसेन के मन में भी नफरत घर कर गया था। बाप-बेटे के मन में भरा नफरत का गुबार योजनाबद्ध तरीके से हत्या की साजिश बनकर निकला।





आंख में मिर्ची पाउडर डालकर मारा





महासमुंद डीएसपी नारद सूर्यवंशी बताते हैं कि हत्यारोपी परसराम 62 और उनका बेटा बज्रसेन 27 दोनों ने हत्या की योजना बनाई। मिर्ची पाउडर लेकर ओसराम के घर के बाहर खड़े थे। सुबह करीब चार बजे जागृति नींद से जागकर शौच आदि के लिए जा रही थी। उसके आंखों में मिर्ची पाउडर डालकर धारदार हथियार से गला रेत दिया। बाद दोनों बाप-बेटा घर में प्रवेश कर गए। पत्नी जागृति की चीख-पुकार सुनकर घर से निकल रहे ओसकुमार पर भी दोनों ने संघातिक वार किया। वह जख्मी होने के बाद जैसे-तैसे वहां से भागकर जान बचाया और अपने बड़े भाई खिलावन को जगाया।




इस बीच हत्या की योजना बनाकर घर में घुसे बाप-बेटे ने सब्बल से एक कमरे के दरवाजे को तोड़ा और कमरे में सो रही टीना का गला रेत दिया। इस बीच टीना का नौ साल का भाई मनीष भागकर घर से बाहर निकला तो उसे दोनों ने दौड़ाकर पकड़ लिया और गला रेतकर हत्या कर दी।




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एक के बाद एक सात लोगों पर किया वार





आरोपित बाप-बेटे ने एक के बाद एक सात लोगों पर वार किया। परसराम की भाभी अनारबाई 60 पति सादराम का गला रेता। उसे मृत समझकर ओसकुमार की 15 साल की गूंगी बेटी गीतांजलि और 11 साल के बेटे ओमन पर भी वार किया। दोनों बाप-बेटे के सिर में खून सवार था। वे वहशी दरिंदे की तरह ओसकुमार को मारने के लिए ढूंढ रहे थे। जिससे कि वे उसे मारकर जमीन हासिल कर सकें। लेकिन, ओसकुमार ने वहां से भागकर ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी। जिससे आरोपी बाप-बेटे की योजना पूरी तरह से सफल नहीं हो पायी। त्वरित उपचार मिलने से चार की जान फिलहाल बच गई है। गंभीर रूप से घायल ओसकुमार, गीतांजलि, अनारबाई और ओमन रायपुर के चिकित्सालय में भर्ती हैं।





यह है जमीन विवाद की जड़




इस जमीन विवाद को समझने के लिए तीन पीढ़ी की कहानी जानना जरूरी है। जोबा में लुड़गू सतनामी के दो बेटे हुए बड़ा सादराम और छोटा परसराम गायकवाड़( हत्यारोपी)। लुड़गू के पैतृक संपत्ति करीब 6 एकड़ का दोनों भाई के बीच बंटवारा होना था। जो विधिवत नहीं हुआ। आपसी बंटवारा से तीन-तीन एकड़ जमीन को खेती करके जीवन बसर कर रहे थे। ब़ड़े भाई सादराम के तीन बेटे हुए धनीराम, खिलावन और ओसकुमार। इधर, छोटे भाई परसराम का एक बेटा हुआ बज्रसेन गायकवाड़ (हत्यारोपी)।




लुड़गू की मौत के बाद पूरी जमीन बड़े भाई सादराम के नाम पर लंबरदारी में दर्ज हुआ। सादराम, तीन बेटों के जवान होने और बड़े होने से सबल हो गया। इधर, परसराम का बेटा छोटा था। जमीन के स्वामित्व और कब्जा को लेकर अक्सर भाई और भतीजों के बीच विवाद होता था। इससे आवेश में आकर एक दिन परसराम ने अपने बड़े भतीजे धनीराम की हत्या कर डाली। तब उसका बेटा ब्रजसेन नाबालिग था। भतीजे की हत्या न्यायालय में प्रमाणित होने से परसराम को दस साल की कैद की सजा सुनाई गई। वह सजा पूरी करके अभी कुछ समय पहले ही जेल से रिहा हुआ है।




पिता-पुत्र ने मिलकर बनाई हत्या की योजना





जेल की सजा काटने और जमीन नहीं मिलने से दोनों पिता-पुत्र के मन में नफरत घर कर गया था। कुछ महीने पहले बज्रसेन पलायन करके अन्य प्रांत में रोजी-रोटी की तलाश में गया था। जहां से कटार जैसे धारदार हथियार लेकर आया था। वह बलौदाबाजार जिले में अपने मामा के घर रह रहा था। इस बीच पिता के जेल से छूटने पर दोनों ने मिलकर हत्या करने और अपनी जमीन वापस हथियाने की योजना बनाई। करीब महीनेभर पहले दोनों बाप-बेटा अपने पैतृक गांव जोबा आए। जहां उन्हें रहने को घर नहीं मिला तो कांजी हाउस को आशियाना बना लिए। और खानदानी जमीन पर खेती कर रहे ओसकुमार के परिवार को निशाना बनाकर उनकी दिनचर्या पता करते रहे। जब उन्हें यकीन हो गया कि सुबह चार बजे के समय में हत्या की जा सकती है। तब योजनाबद्ध तरीके से मिर्ची पाउडर लेकर और हथियार लेकर आज सुबह धावा बोल दिया।





आठ साल पहले धनीराम का हुआ निधन





यह पुरानी रंजिश की अजब-गजब कहानी है। परसराम ने करीब आठ साल पहले अपने बड़े भतीजे धनीराम की हत्या कर दी थीं। जागृति उसी की धर्मपत्नी थी। बाद में जागृति ने पति की मौत का बदला लेने की ठानी और अपने देवर ओसकुमार से शादी कर ली। उसने योजनाबद्ध तरीके से वंशवृद्धि की। टीना, गीतांजलि दो बेटी और ओम तथा मनीष दो बेटों को उन्होंने जन्म दिया। अपने पहले पति की मौत का बदला लेने की बात अक्सर वह गुस्से में अपने चाचा ससुर के बेटे बज्रसेन से कहती थी। यह उसे नागवार गुजरा और अपने पिता के साथ मिलकर हत्या की योजना बना डाली





जमीन के बंटवारे को लेकर उपजा संघर्ष महाभारत में तब्दील हो गया। महज छह एकड़ जमीन का बंटवारा जी का जंजाल बन गया। जागृति का परिवार बिखर गया। जागृति और उसके दो बच्चों की मौत हो गई। वहीं उसकी सास, पति और दो बच्चे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।


महासमुंद में 1 करोड़ 62 लाख रुपए कीमत का गांजा को जब्त

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महासमुंद: जिला पुलिस ने अवैध मादक पदार्थ गांजा की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गाड़ी में खाली कैरेट के नीचे रखकर ले जाए जा रहे 1 करोड़ 62 लाख रुपए कीमत का 8 क्विंटल 10 किलोग्राम गांजा को जब्त किया है. मामले में राजस्थान के दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है.अवैध गांजा परिवहन व अवैध शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर से मिले निर्देश पर सतर्क जिले के सरहदी थाना के प्रभारी को मुखबिर से सूचना मिली कि ओड़िशा से अवैध मादक पदार्थ गांजा का परिवहन होने वाला है.





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थाना कोमाखान थाना प्रभारी ने इस पर पुलिस टीम को अलर्ट किया. चेकिंग के दौरान ओड़िशा से आ रहे ट्रक क्रमांक RJ 02 GA 5686 को ग्राम टेमरी फारेस्ट नाका के पास रोका गया. वाहन की तलाशी में खाली कैरेट के नीचे 26 बोरियों में भरा 165 पैकेट खाखी रंग के झिल्ली में लिपटा हुआ गांजा मिला.मामले में गाड़ी में सवार भरतपुर, राजस्थान निवासी 20 वर्षीय खालिद पिता स्माईल और अलवर, राजस्थान निवासी 32 वर्षीय साकिर हुसैन पिता सौकत अली से पूछताछ करने पर उन्होंने गांजा को भवानीपटना, ओडिशा से दिल्‍ली ले जाना बताये.





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इस तरह से आरोपियों के कब्जे से 1,62,00,000 रुपए कीमत का 8 क्विंटल 10 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा जब्त कर गिरफ्तार किया गया. आरोपियों के खिलाफ थाना कोमाखान में धारा 20(ख) नारकोटिक एक्ट के तहत् कार्यवाही की जा रही है.


CM साहब ! जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है महासमुन्द जिला प्रशासन ?

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क्या जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है महासमुन्द का जिला प्रशासन? यह अहम सवाल मेरे जैसे सैकड़ों कलमकारों के जेहन में है। इसका जवाब छत्तीसगढ़ सरकार के मुखिया से मांगने का समय अब आ गया है। वह इसलिए, क्योंकि जब जन सामान्य कोरोना संकटकाल में अनेक परेशानियों से जूझ रहा है। उन्हें लॉकडाउन नियमों का पालन, आजीविका के लिए उपाय करने की चिंता है। कोरोना संक्रमण का खतरा उठाते हुए भी मीडियाकर्मी बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। तब जिला प्रशासन के आला अधिकारियों का रवैया गैर जिम्मेदाराना भला कैसे हो सकता है?





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निरंतर बन रही संवादहीनता की स्थिति से अनेक गलतफहमियां पैदा हो रही है। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के ज्यादातर साथियों का कहना है कि जिला प्रशासन के मुखिया न तो फोन कॉल अटेंड करते हैं। और सोशल मीडिया में जानकारी मांगने पर भी कोई जवाब देना उचित नहीं समझते हैं।





जिला कार्यालय में भी ऐसी व्यवस्था कर रखे हैं कि मीडिया के प्रतिनिधि उनसे मिल नहीं सकते। अनेक पत्रकारों ने बताया कि आधा से पौन घंटे तक इंतजार के बाद भी मिलने का उन्हें समय नहीं दिया जा रहा है। इस तरह की शिकायतें लगातार मिल रही है। इससे जनता और शासन-प्रशासन के बीच का सेतुबंध टूटने लगा है।





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समन्वय स्थापित करने में मीडिया की भूमिका अहम





जनता और शासन-प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने में मीडिया की भूमिका अहम है। इसे नकारा नहीं जा सकता है। मीडिया की कड़ी टूटेगी तो सभी की दिक्कतें बढ़ना स्वाभाविक है। यहां आम आदमी परेशान हैं। गरीबों को दो वक्त की रोटी के लाले पड़ रहे हैं। रोज कमाने-खाने वाले हजारों लोग भूखे मरने के कगार पर हैं। एसी कमरे में कांच के घेरे में बैठे अफसरों की नजर में जमीनी स्तर पर सबकुछ ठीक चल रहा है। जबकि, जमीनी हकीकत इससे अलग है। इनकी तकलीफ को शासन-प्रशासन तक मीडिया ही पहुंचाती है। जिसकी अनदेखी और असहयोग से सभी परेशान हैं। जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली से सभी वर्ग के लोग आहत हैं।





यहां लोक सेवक समझने लगे हैं खुद को खुदा





जन सामान्य के बीच यह चर्चा का विषय है कि लोकसेवक यहां खुद को खुदा समझने लगे हैं। इस स्थिति में विद्रोह होना स्वाभाविक है। मैदानी क्षेत्रों से लोक सेवकों की मनमानी की ढेरों शिकायतें मिल रही है। जनता से जुड़े मुद्दे कलमकार प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया पर लगातार उठा रहे हैं। सूचना क्रांति के वर्तमान समय में सब कुछ बहुत तेजी से वायरल हो जाता है। बावजूद संज्ञान में लेना तो दूर मामला उजागर करने वाले को ही संदेह की नजरों से देखा जाने लगा है।





ऐसा हुआ एक ताजा मामला





सोशल मीडिया पर "महासमुन्द जिले की खबरें" व्हाट्सएप्प ग्रुप में आज एक प्रकरण वायरल हुआ। पिथौरा के तहसीलदार ने पटवारी को नोटिस दिया है, उसे एक मीडिया प्रतिनिधि ने ग्रुप में शेयर किया। जिले के इस महत्वपूर्ण ग्रुप में कल रात भी कुछ मसलों पर कलमकारों की तीखी प्रतिक्रिया आई थी। सूत्रों के अनुसार यह अफसरों को नागवार गुजरा। लॉकडाउन के मसले पर मंथन करने पुलिस और प्रशासन के अधिकारी जिला कार्यालय में एकत्र थे। तब इस व्हाट्सएप्प ग्रुप पर चर्चा हुई। और जिला प्रशासन के तीन शीर्ष अफसर एक साथ लेफ्ट हो गए।





CM साहब ! जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है महासमुन्द जिला प्रशासन ?









सोशल मीडिया पर पोस्ट के बाद एक साथ लेफ्ट हुए ये अधिकारी।









किसी ग्रुप में रहना, हट जाना निश्चय ही संबंधित का विशेषाधिकार है। लेकिन, अहम सवाल यह है कि जनता से जुड़े मामलों पर क्या आला अधिकारी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रहे हैं? जब शीर्ष अफसरों का रवैय्या ऐसा नकारात्मक रहेगा, तो जमीनी अमला आम आदमी का काम कहां करने वाले हैं। बहरहाल, अधिकारियों के एक साथ ग्रुप छोड़ने से मीडियाकर्मियों से जुड़े इस ग्रुप में तरह- तरह की चर्चाएं हो रही है।





बड़ों का अनुशरण करते हैं छोटे





यह प्रकृति का नियम है कि बड़ों का अनुशरण छोटे करते हैं। जब तीन शीर्ष अफसर एक साथ ग्रुप से लेफ्ट हुए। तब छोटे कहां पीछे रहने वाले हैं। इस ग्रुप से सहायक जनसंपर्क अधिकारी भी लेफ्ट हो गए। अधिकारियों के नकारात्मक रवैया से रूष्ट होकर ग्रुप के एडमिन ने उन्हें अन्य ग्रुपों से भी रिमूव कर दिया। क्या ये किसी प्रकार की जवाबदेही से बच रहे हैं? सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच शुतुरमुर्ग वाला व्यवहार किसी के हित में नहीं है। मीडिया, प्रशासन, शासन सबकी जनता के प्रति बराबर जवाबदेही है। और मीडिया को चौथे स्तंभ का दर्जा भारतीय लोकतंत्र में ऐसे ही नहीं मिला है। यह बात खुद को खुदा समझने वाले नौकरशाह को बखूबी समझना ही चाहिए।





आनंदराम साहू
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व प्रेस क्लब-महासमुन्द के अध्यक्ष हैं)


Elephant Panic : दो दंतैल हाथी खल्लारी क्षेत्र में मचा रहे हैं कोहराम, देखें Video

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महासमुन्द : छत्तीसगढ़ के महासमुन्द जिले में जंगली हाथियों का स्वच्छंद विचरण हो रहा है। इससे किसानों की मुसीबत बढ़ी है। हाथी किसानों की फसल को रौंद कर नुकसान पहुंचा रहे हैं। सिरपुर क्षेत्र में डेरा डाले हाथियों के दल में से दो दंतैल हाथी अलग हो गए हैं।
और, ये अचानकपुर, भावा, जोगीडीपा, नवागांव के जंगल से होते हुए खल्लारी की ओर आगे बढ़ गए हैं। रातभर जंगलों में विचरण करते हुए पहुंचे हाथियों को अलसुबह ग्रामीणों ने कोमा गांव के पास खेत में देखा। गांव के पास जंगली हाथी देखकर उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। क्योंकि इस क्षेत्र में इसके पहले जंगली हाथी का मूवमेंट कभी नहीं रहा। 





देखें Video






https://media24media.com/wp-content/uploads/2020/09/WhatsApp-Video-2020-09-09-at-9.53.27-AM-1.mp4





https://youtu.be/4nfTxMgZSjc




आज सुबह जैसे ही ग्रामीणों ने खल्लारी के पास कोमा गांव से बोइरगांव की तरफ विचरण करते दो हाथियों को देखा। उन्होंने आसपास के ग्रामीण और किसानों को हाथी से अलर्ट किया। 





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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रवेश कर गया हाथी





इस बीच ये हाथी खल्लारी पहाड़ी की ओर तेजी से आगे बढ़े। सुबह सात बजे हाथी खल्लारी के तालाब के पास खेतों में पहुंच गए थे। सूचना के बावजूद वन विभाग का अमला मौके पर तत्काल नहीं पहुंचा। तब ग्रामीण फसल बचाने हाथों में लाठी-डंडा लेकर घरों से निकल पड़े। इस बीच वन विभाग के मैदानी अमले और अफसरों के नहीं पहुँचने पर ग्रामीणों ने रोष जताया। देखते ही देखते दोनों दंतैल हाथी कक्ष क्रमांक 182 खल्लारी के पास टावर पहाड़ी तक पहुंच गए। खल्लारी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी हाथी के प्रवेश कर जाने से ग्रामीण जमकर नाराज हुए। और अपनी जान की परवाह किए बिना ही ग्रामीण खतरनाक ढंग से हाथियों के नजदीक जाकर खदेड़ रहे हैं। इससे जानमाल का नुकसान होने की आशंका बनी हुई है। 





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हाथी से बचने छत पर चढ़े





हाथी से बचने ग्रामीण, बच्चे, महिलाएं घर के छतों पर चढ़कर हाथी के गांव से दूर जाने का इंतजार करते रहे थे। आबादी क्षेत्र में जंगली हाथियों के स्वच्छंद विचरण से ग्रामीणों में दहशत है। वन अमले के पहुंचने और हाथी को जंगल की ओर खदेड़ने की व्यवस्था का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे समय रहते छत पर चढ़कर अपनी जान नहीं बचाते तो हाथी हमला कर सकता था।





देखें वीडियो : https://www.youtube.com/watch?v=4nfTxMgZSjc&feature=youtu.be


Godhan Nyay Yojna : किसान ने 15 दिन में गोबर बेच कर कमाया 44000 रूपये

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महासमुंद । छत्तीसगढ़

खेती किसानी और पशुपालन करने वाले लिंगराज आज खुशी से झूम रहा है। यह खुशी उसे गोधन न्याय योजना के जरिए मिली है। महासंमुद जिले के दूरस्थ गांव छिबर्रा के रहने वाले और खेती किसानी के साथ पशुपालन का काम करने वाले लिंगराज ने गोधन न्याय योजना के शुभारंभ 20 जुलाई से 4 अगस्त तक 15 दिनों में 221 क्विंटल गोबर बेचा। आज किसान के खाते में 44200 रूपए आने की सूचना उसे मोबाइल पर  एसएमएस (अलर्ट टोन्स) से मिली। तो खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। लिंगराज ने सपने में भी नहीं सोचा था कि गोबर बेचने से 15 दिन में इतने पैसे मिल सकते हैं।

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लेकिन यह सब मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल की इस महात्वाकांक्षी योजना ने उसके और उसके जैसे हजारों पशुपालकों के सपने को साकार कर दिया। राज्य सरकार दो रूपये प्रतिकिलो की दर से गौठानों में पशुपालकों से गोबर खरीद रही है और वायदे के मुताबित 15 दिन के भीतर उसका भुगतान भी कर दिया। किसान गोपालक लिंगराज के पास खेती के अलावा 25 गाय है। जिसका दूध वह  आसपास के बाजार में बेचता है। लेकिन लाॅकडाउन के चलते उसका दूध ज्यादा नहीं बिक रहा था।  अब गोबर बेचने से उसकी दूध नहीं बिकने की भरपायी जरूर हो गयी है। इससे वह राहत महसूस कर रहा है।

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ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ सरकार की ‘‘गोधन न्याय योजना‘‘ का हरेली पर्व 20 जुलाई को शुरूआत हुई थी। जिले में इस योजना के शुरू होने से अब तक  15 दिन के भीतर जिले के 84 गौठानों में 1635 किसान, पशुपालकों ने 45551क्विंटल गोबर बेचा (विक्रय) किया है । इक्यासी (81) गौठान समिति द्वारा इसके एवज में 911186 रूपए का भुगतान जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक द्वारा पब्लिक फायनेंसीयल मेनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) से सभी 1635 किसान, पशुपालक को किया गया है ।

पीएफएमएस एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसके द्वारा ई-पेमेन्ट सब्सिडी का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर (डीबीटी) से होता है। आपको बतादें कि जिले में 84 गौठानों में 78 ग्रामीण क्षेत्र के तथा 6 नगरीय निकाय क्षेत्र के है। इनमें अब तक  4 अगस्त कुल 1935 किसान, पशुपालक हितग्राहियों ने गोबर बेचने के लिए पंजीयन कराया है।

रियलिटी चेक:- जनसंपर्क अधिकारी जिला महासमुन्द की ओर से जारी इस खबर के तथ्यों की पड़ताल करने पर ज्ञात हुआ कि किसान लिंगराज ने पन्द्रह दिनों में 221 क्विंटल गोबर बेचा है।  जिसके एवज में उसे 2 रुपये प्रतिकिलो की दर से ऑनलाइन भुगतान किया गया है। चूंकि किसान के पास 25 मवेशी होने का खबर में उल्लेख है। जिसके अनुसार एक मवेशी प्रतिदिन करीब उनसठ किलो गोबर कैसे दे सकता है। जो आश्चर्यजनक और अविश्वसनीय है। इस संबंध में पूछने पर जनसंपर्क विभाग के महासमुन्द सहायक संचालक शशिरत्न पराशर का कहना हैं कि कृषि विभाग के उपसंचालक के द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार खबर प्रसारित किया गया हैं। संभवतः किसान ने महीनेभर का गोबर एकत्र करके अथवा पड़ोसियों का भी गोबर को  मिलाकर बेचा होगा। 
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