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भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से 101 करोड़ लोग जुड़े, आबादी के 68% से अधिक को मिला लाभ : डॉ. मनसुख मांडविया

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नई दिल्ली- केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का दायरा अब लगभग 101 करोड़ लोगों तक पहुंच चुका है, जो देश की 68 प्रतिशत से अधिक आबादी को कवर करता है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने पिछले सप्ताह हैदराबाद में आयोजित ब्रिक्स श्रम मंत्रियों की बैठक में भी रेखांकित किया, जो भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर मिली मान्यता का प्रमाण है।

डॉ. मांडविया नई दिल्ली में आयोजित चौथे ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट को संबोधित कर रहे थे। इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एम्प्लॉयर्स (AIOE) ने फिक्की (FICCI) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के सहयोग से किया।

उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, नियोक्ता, श्रमिक और ट्रेड यूनियनों के बीच निरंतर समन्वय ही स्वस्थ औद्योगिक संबंधों की आधारशिला है। आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को साथ लेकर चलने के लिए सभी पक्षों की साझेदारी आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि औद्योगीकरण राष्ट्रीय विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी मॉडल की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ये पहल आजीविका के नए अवसर पैदा करने, अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसा संतुलित विकास मॉडल आवश्यक है जो एक ओर श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करे तथा दूसरी ओर उद्योगों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को भी बढ़ावा दे।

डॉ. मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थिर कर व्यवस्था, बढ़ती बचत, बढ़ी हुई क्रय शक्ति और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के कारण आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का सकारात्मक चक्र विकसित हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जीडीपी में प्रत्येक 1 प्रतिशत वृद्धि के साथ रोजगार में 1.11 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि लगभग 12 वर्ष पहले रोजगार वृद्धि का यह अनुपात केवल 0.008 प्रतिशत था।

उन्होंने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में प्रस्तावित सुधारों की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य में केवल ईएसआईसी अस्पताल ही नहीं, बल्कि बेहतर निजी अस्पतालों को भी ईएसआईसी से संबद्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के रूप में मान्यता दी जा सकती है। इसके अलावा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की सभी दावों की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल की जा रही है तथा एकल यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के माध्यम से खातों का स्वतः स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, यूपीआई के माध्यम से पीएफ निकासी की सुविधा पर भी विचार किया जा रहा है।

इस अवसर पर भारत में ILO की दक्षिण एशिया निदेशक सुश्री मिचिको मियामोटो ने भारत को सामाजिक सुरक्षा के विस्तार पर बधाई देते हुए कहा कि ILO के आकलन के अनुसार भारत अब एक अरब से अधिक लोगों को कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने वाला देश बन गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि भारत की आर्थिक प्रगति को और गति देगी।

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने दो दिवसीय सम्मेलन की स्मारिका का भी विमोचन किया।

श्रम मंत्रालय के प्रयासों से धनबाद में तीन पुराने औद्योगिक विवादों का समाधान, श्रमिकों को ₹55 लाख से अधिक की राहत

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श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) [CLC(C)] के क्षेत्रीय तंत्र ने धनबाद में तीन लंबे समय से लंबित औद्योगिक विवादों का सफलतापूर्वक समाधान कर सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा मृत कर्मचारियों के आश्रितों को 55 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय राहत दिलाई है।

क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय), धनबाद तथा सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय)-I एवं II के प्रयासों से हुए इन समझौतों ने समय पर न्याय, सामाजिक सुरक्षा और सौहार्दपूर्ण औद्योगिक संबंधों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

BCCL के दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को मिलेगा दीर्घकालिक वित्तीय सहयोग

सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय)-I, धनबाद ने भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की बुर्रागढ़ कोलियरी के एक दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को मुआवजा दिलाने से जुड़े विवाद का समाधान कराया।

प्रबंधन और श्रमिक संगठन कोयला इस्पात मजदूर पंचायत के बीच कई दौर की सुलह-वार्ता के बाद 1 जुलाई 2026 को समझौता ज्ञापन (MoS) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत आश्रित को 60 वर्ष की आयु तक मासिक वित्तीय सहायता मिलेगी। इस समझौते का अनुमानित वित्तीय प्रभाव लगभग 30 लाख रुपये है।

FCIL के दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिला लंबित ब्याज भुगतान

सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय)-II, धनबाद ने फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (FCIL) के दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों पर देय ब्याज के लंबे समय से लंबित विवाद का भी समाधान कराया।

7 जुलाई 2026 को हुए समझौते के अनुसार FCIL प्रबंधन सेवानिवृत्ति की तिथि से लेकर अनुग्रह राशि (Ex-gratia) और अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment) के वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज का भुगतान करेगा। इस समझौते का अनुमानित वित्तीय प्रभाव करीब 14 लाख रुपये है।

सुलह प्रक्रिया के दौरान नियोक्ताओं की यह वैधानिक जिम्मेदारी भी रेखांकित की गई कि सेवानिवृत्ति लाभों का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। FCIL प्रबंधन ने भविष्य में ऐसी देरी रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

ECL के दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को भी मिली राहत

क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय), धनबाद ने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के एक दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को वित्तीय सहायता दिलाने से जुड़े विवाद का भी सफल समाधान कराया।

प्रबंधन और श्रमिक संगठन के बीच सुलह-वार्ता के बाद 3 जुलाई 2026 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते का अनुमानित वित्तीय प्रभाव लगभग 11 लाख रुपये है। इसके तहत आश्रित को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे उसे समय पर आर्थिक सहयोग और सामाजिक सुरक्षा मिल सकेगी।

सुलह प्रक्रिया के दौरान ECL प्रबंधन को कर्मचारियों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों के प्रति अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का पालन करने के महत्व से भी अवगत कराया गया।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा कि मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) का क्षेत्रीय तंत्र नियोक्ताओं, श्रमिक संगठनों और कर्मचारियों के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से श्रम कानूनों के पालन, सामाजिक सुरक्षा एवं सेवानिवृत्ति लाभों के समयबद्ध वितरण तथा उद्योगों में विश्वास और सहयोग का वातावरण मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। मंत्रालय का उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिवारों को समय पर न्याय, वित्तीय सुरक्षा और उनके वैधानिक अधिकार सुनिश्चित करना है।

डॉ. मनसुख मंडाविया ने गोवा में दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का वर्चुअल उद्घाटन किया, श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

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केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा मामले एवं खेल मंत्री, डॉ. मनसुख मंडाविया, ने 7 जनवरी 2026 को गोवा में दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का वर्चुअल उद्घाटन किया।

यह सम्मेलन छह क्षेत्रीय सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला है, जिन्हें श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित किया जाएगा। इन सम्मेलनों का उद्देश्य चार श्रम संहिताओं के सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. मंडाविया ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने राज्यों की सराहना की, जिन्होंने चार श्रम संहिताओं के प्रावधानों के अनुरूप अपने मौजूदा श्रम कानूनों में संशोधन करने का उत्साहपूर्वक प्रयास किया। यह सुधार 21 नवंबर 2025 से लागू हुए हैं और इसमें वार्षिक स्वास्थ्य जांच, जोखिमपूर्ण गतिविधियों में लगे श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य, और ग्रेच्युटी की पात्रता अवधि घटाकर एक वर्ष करना जैसी प्रगतिशील प्रावधान शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि आगे केंद्र और राज्य सहनशील समन्वय के माध्यम से कोड्स का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगे, जिससे श्रमिकों के कल्याण और लाभ में समानता और निष्पक्षता बढ़ेगी। इन श्रम सुधारों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया जैसे Global Times और The Economist से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

सम्मेलन में सचिव, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, वंदना गुरनानी ने बताया कि चार श्रम संहिताओं का उद्देश्य 29 मौजूदा श्रम कानूनों को समेकित और सरल बनाकर श्रमिक कल्याण को मजबूत करना है। इन संहिताओं में वेब-आधारित निरीक्षण प्रणाली और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज जैसे कई प्रगतिशील उपाय शामिल हैं। केंद्रीय सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट नियमों को पूर्व-प्रकाशित किया है, जबकि नियमों की आवश्यकता न होने वाले प्रावधान 21 नवंबर 2025 से लागू हैं। उन्होंने राज्यों से कहा कि वे अपने संबंधित नियमों को शीघ्र अधिसूचित करें और इसके लिए कानून विभाग की सलाह लें।

सरलीकृत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए, मंत्रालय ने FAQs हैंडबुक जारी की, V.V. गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान (VVGNLI) के माध्यम से क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किए, ड्राफ्ट निरीक्षण योजना साझा की और डिजिटल हस्तक्षेपों के लिए श्रम सुविधा और समाधान पोर्टल्स पर API इंटीग्रेशन किया। राज्यों को PMVBRY के तहत आउटरीच, दुकानों और प्रतिष्ठानों अधिनियमों के साथ ओवरलैप, और ESIC कवरेज के विस्तार का लाभ उठाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है, जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों, संविदा और आउटसोर्सेड श्रमिकों को शामिल करना भी शामिल है।

सम्मेलन नियमों और विनियमों पर विचार-विमर्श, अंतराल और असमानताओं की पहचान, सांविधिक अधिसूचनाओं का त्वरित प्रावधान, बोर्डों और फंडों के गठन और संबंधित संस्थागत तंत्रों पर चर्चा के लिए मंच के रूप में कार्य करेगा। इसमें चार श्रम संहिताओं के तहत योजनाओं, आईटी सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के कार्यान्वयन, क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों की क्षमता निर्माण और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों तथा अन्य हितधारकों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

सम्मेलन में मंत्रालय और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और सक्रिय भागीदारी की।


भारत में गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए ऐतिहासिक सुधार

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गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को कानूनी मान्यता और सामाजिक सुरक्षा

भारत की तेजी से बढ़ती गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक शक्ति नई आर्थिक प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है, जिसे युवा जनसंख्या, डिजिटल अपनापन और तेज़ शहरीकरण संचालित कर रहे हैं। उनकी भूमिका को पहचानते हुए, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (SS Code) (हाल ही में लागू चार श्रम संहिताओं में से एक) ने गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को औपचारिक रूप से सुरक्षा के दायरे में लाया है। यह सुधार एक लंबे समय से आवश्यक सुरक्षा प्रदान करता है, क्योंकि यह श्रमिक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को वर्षों से संचालित कर रहे थे, लेकिन उनके लिए समान सुरक्षा उपलब्ध नहीं थी।

गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सशक्त बनाना

कानूनी मान्यता, पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा लाभ, समर्पित कल्याण कोष, और राष्ट्रीय पंजीकरण ढांचे के माध्यम से ये सुधार गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को जरूरी सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह उन्हें अधिकारों के साथ सशक्त बनाता है और अनौपचारिक कार्य को सुरक्षित, मान्यता प्राप्त और स्थायी रोजगार में बदल देता है।

कानूनी मान्यता

गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को पेमेंट ऑफ वेजेस एक्ट (1936), न्यूनतम मजदूरी अधिनियम (1948), EPF एक्ट या ESI एक्ट के तहत कोई मान्यता नहीं थी। SS Code पहली बार उन्हें औपचारिक कानूनी मान्यता देता है और सामाजिक सुरक्षा एवं कानूनी संरक्षण के दायरे में लाता है।

कुछ परिभाषाएँ भी शामिल की गई हैं:

  • एग्रीगेटर (Aggregator) – डिजिटल मध्यस्थ या ऐसा प्लेटफॉर्म जो सेवा के खरीदार/उपयोगकर्ता को सेवा प्रदाता से जोड़ता है।

  • गिग श्रमिक (Gig Worker) – ऐसा व्यक्ति जो पारंपरिक नियोक्ता-नियोक्ता संबंध के बाहर कार्य करता है और उससे आय अर्जित करता है।

  • प्लेटफॉर्म श्रमिक (Platform Worker) – ऐसा व्यक्ति जो प्लेटफॉर्म कार्य में संलग्न होता है।

  • प्लेटफॉर्म कार्य (Platform Work) – पारंपरिक नियोक्ता-नियोक्ता संबंध के बाहर ऐसा कार्य जिसमें संगठन या व्यक्ति ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी कार्य या सेवा को अंजाम देने के लिए जुड़ते हैं और भुगतान प्राप्त करते हैं।

कल्याण / सामाजिक सुरक्षा कोष

SS Code के तहत अब एग्रीगेटर्स को अपनी वार्षिक कारोबार का 1-2% (या भुगतान में 5% की सीमा) सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान देना होगा। यह कोष श्रमिकों के लिए विभिन्न कल्याण योजनाओं को वित्तपोषित करेगा। पहले यह जोखिम श्रमिकों पर ही था, और एग्रीगेटर्स का कोई दायित्व नहीं था।

सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ

पहले ये श्रमिक केवल स्वैच्छिक योजनाओं या CSR पहल पर निर्भर थे और PF, ESI, पेंशन या बीमा का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था। अब गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक सरकार द्वारा अधिसूचित सामाजिक सुरक्षा लाभ जैसे दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य एवं मातृत्व लाभ, पेंशन और अन्य लाभ पाने के पात्र हैं। यह ऐतिहासिक सुधार उन्हें कानूनी ढांचे में दृश्य बनाता है और औपचारिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में लाता है।

लाभों की पोर्टेबिलिटी

गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक अब काम या प्लेटफॉर्म बदलने पर भी सामाजिक सुरक्षा लाभ का आनंद ले सकते हैं। प्रत्येक श्रमिक को e-Shram पर आधार-लिंक्ड यूनिक ID मिलेगी, जिससे उनके लाभ सभी प्लेटफॉर्म पर पोर्टेबल होंगे। चाहे वे कई प्लेटफॉर्म पर काम करें या किसी एक से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाएँ, उनके लाभ लगातार और निर्बाध रूप से मिलते रहेंगे।

पंजीकरण और डेटाबेस

गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक सरकारी e-Shram पोर्टल पर स्वयं पंजीकरण कर सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक डेटाबेस तैयार होता है। यह डेटाबेस सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास, लक्षित कल्याण वितरण और नीति निर्माण में सहायक होगा।

शिकायत निवारण

पहले गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के पास औपचारिक श्रम कानूनों के तहत कोई संरचित शिकायत निवारण प्रणाली नहीं थी। अब SS Code के तहत सरकार टोल-फ्री हेल्पलाइन, कॉल सेंटर या सुविधा केंद्र स्थापित कर सकती है, जो श्रमिकों की शिकायतों का समाधान और समय पर सहायता सुनिश्चित करेगा।

गिग अर्थव्यवस्था का रूपांतरण: अनौपचारिक से संरक्षित

पहले दृश्यहीन, अत्यधिक असुरक्षित और बिना समान लाभों वाले गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक अब मूलभूत सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्राप्त कर रहे हैं। यह सुधार गिग अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाकर श्रमिकों को कानूनी मान्यता, वास्तविक समर्थन और कल्याण योजनाओं तक पहुँच प्रदान करता है। समर्पित सामाजिक सुरक्षा कोष, पोर्टेबल लाभ और राष्ट्रीय पंजीकरण ढांचा e-Shram के माध्यम से स्थापित करके, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 न केवल आज के श्रमिकों की सुरक्षा करती है बल्कि एक समावेशी, लचीली और भविष्य-सक्षम गिग अर्थव्यवस्था का आधार भी रखती है।

जिले में श्रमिकों के लिए दिसंबर माह में 09 ग्राम पंचायतों में निःशुल्क मोबाइल कैंप शिविर आयोजित

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श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण और योजनाओं के आवेदन हेतु शिविर—आधार, बैंक खाता व आवश्यक दस्तावेज साथ लाने की अपील

रायपुर- श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल तथा छत्तीसगढ़  असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के माध्यम से श्रमिकों के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ सुनिश्चित करने हेतु  खैरागढ़ जिले में दिसंबर माह में निःशुल्क मोबाइल कैंप शिविर आयोजित किए जाएंगे।

इन शिविरों में निर्माण कार्य एवं अन्य स्थापनाओं पर कार्यरत श्रमिक अपने पंजीयन, नवीनीकरण एवं योजना आवेदन की प्रक्रिया निःशुल्क करा सकेंगे। विभाग ने श्रमिकों से अपील की है कि वे शिविर में आवश्यक दस्तावेजों की मूल प्रतियां, जैसे—अपना व परिवार का आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, राशन कार्ड तथा मोबाइल ओटीपी हेतु आवश्यक मोबाइल सहित उपस्थित हों।

दिसंबर माह में जिले के दोनों विकासखंडों—खैरागढ़ एवं छुईखदान में अलग-अलग तिथियों पर कुल 09 ग्राम पंचायतों में ये शिविर आयोजित होंगे।

विकासखंड खैरागढ़ में 04 दिसंबर को ग्राम पंचायत गातापार कला, 11 दिसंबर को घोंघेडबरी, 19 दिसंबर को देवरी तथा 26 दिसंबर को प्रकाशपुर में शिविर लगेंगे।

इसी प्रकार विकासखंड छुईखदान में 02 दिसंबर को जगमडवा, 09 दिसंबर को झुरानदी, 16 दिसंबर को पैलीमेटा, 23 दिसंबर को जीराटोला तथा 30 दिसंबर को जंगलपुर में श्रमिकों के लिए निःशुल्क शिविर आयोजित किए जाएंगे।

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