Media24Media.com: #WomenSafety

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #WomenSafety. Show all posts
Showing posts with label #WomenSafety. Show all posts

जमुई की घटना: सिर्फ एक अपराध नहीं, समाज और सिस्टम के लिए बड़ा सबक

No comments Document Thumbnail

जमुई, बिहार: बिहार के जमुई में 19 सितंबर की शाम दो नाबालिग छात्रों के साथ कथित बदसलूकी, मारपीट और लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का वीडियो सामने आने के बाद पूरे देश में चर्चा तेज हो गई है। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की, कई आरोपियों की पहचान की और गिरफ्तारियां की गईं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए बिहार के DGP से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

लेकिन यह मामला केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। इसने महिला और बाल सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही, सोशल मीडिया की भूमिका, भीड़ की मानसिकता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

घटना में क्या हुआ?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 19 सितंबर की शाम जमुई क्षेत्र में दसवीं कक्षा के एक नाबालिग छात्र और छात्रा को रास्ते में कुछ युवकों ने रोक लिया। दोनों को कथित तौर पर घेरा गया, छात्र के साथ मारपीट की गई और छात्रा के साथ बदसलूकी की गई।

घटना का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक वीडियो में कई लोग मौके पर दिखाई दे रहे हैं और छात्रा लोगों से उसे जाने देने की अपील करती नजर आती है। पुलिस ने वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की।

पुलिस के अनुसार मामले में POCSO Act और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया। जांच के लिए SIT गठित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

पुलिस कार्रवाई और मुख्य आरोपी पर कार्रवाई

घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की कार्रवाई तेज की। शुरुआती रिपोर्टों में तीन गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई, जबकि बाद की रिपोर्ट में मुख्य आरोपी समेत पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई।

मुख्य आरोपी नंदन यादव को पकड़ने के दौरान पुलिस के साथ मुठभेड़ की भी रिपोर्ट सामने आई। पुलिस के अनुसार आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने का प्रयास किया और पुलिस पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। इस घटनाक्रम की स्वतंत्र कानूनी जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

घटना के बाद सोशल मीडिया बना दूसरा मुद्दा

इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह भी है कि नाबालिग पीड़िता से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ।

पुलिस ने कथित तौर पर पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले लगभग 120 सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

यहां समाज के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश है:

किसी अपराध का वीडियो शेयर करना न्याय दिलाने का तरीका नहीं है।

वीडियो शेयर करने से पीड़ित की पहचान उजागर हो सकती है, मानसिक आघात बढ़ सकता है और उसके परिवार को सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

POCSO Act की धारा 23 बच्चे की पहचान—नाम, पता, फोटो, परिवार, स्कूल या ऐसी किसी जानकारी के प्रकाशन पर रोक लगाती है जिससे बच्चे की पहचान उजागर हो सकती है।

इसलिए ऐसे मामलों में वीडियो को डाउनलोड करके दोबारा पोस्ट करना, WhatsApp ग्रुप में भेजना या सोशल मीडिया पर वायरल करना मदद नहीं, बल्कि पीड़ित की निजता के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

सबसे बड़ा सवाल: अगर वीडियो वायरल नहीं होता तो?

इस घटना से पुलिस की preventive policing और स्थानीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार घटना के समय पुलिस को तत्काल इसकी जानकारी नहीं मिली और वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने पीड़ितों की पहचान कर कार्रवाई शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने क्षेत्र में पेट्रोलिंग व्यवस्था की समीक्षा की बात भी कही है।

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—पीड़ित या परिवार की शिकायत न आना, पुलिस की जिम्मेदारी को पूरी तरह समाप्त नहीं करता, खासकर जब मामला सार्वजनिक स्थान पर नाबालिगों के साथ कथित गंभीर अपराध से जुड़ा हो।

POCSO Act की धारा 19 के तहत किसी व्यक्ति को किसी POCSO अपराध की जानकारी होने या आशंका होने पर पुलिस/विशेष किशोर पुलिस इकाई को सूचना देना अनिवार्य है। कानून पुलिस को ऐसी सूचना पर बिना अनावश्यक देरी कार्रवाई करने का दायित्व भी देता है।

समाज को इस घटना से क्या सीखना चाहिए?

1. अपराध देखकर चुप रहना समाधान नहीं

अगर कोई व्यक्ति किसी लड़की या बच्चे के साथ सार्वजनिक स्थान पर हिंसा या यौन दुर्व्यवहार होते देखता है, तो उसे सुरक्षित तरीके से पुलिस या आपातकालीन सेवा को सूचना देनी चाहिए।

भीड़ बनाकर तमाशा देखना या वीडियो बनाना समस्या को और गंभीर कर सकता है।

2. पीड़ित को दोष देना बंद करना होगा

किसी लड़की का किसी लड़के के साथ होना, किसी स्थान पर जाना या देर से घर लौटना किसी भी व्यक्ति को उसके साथ दुर्व्यवहार करने का अधिकार नहीं देता।

अपराध की जिम्मेदारी अपराध करने वाले व्यक्ति की होती है।

3. सोशल मीडिया पर संवेदनशीलता जरूरी है

आज मोबाइल कैमरा अपराध का सबूत जुटाने में मदद कर सकता है, लेकिन वही कैमरा पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करके उसकी जिंदगी और मुश्किल बना सकता है।

वीडियो पुलिस को दें, सोशल मीडिया को नहीं।

4. युवाओं में कानून और सहमति की समझ जरूरी

स्कूल और कॉलेज स्तर पर बच्चों को केवल परीक्षा की तैयारी नहीं, बल्कि सहमति, व्यक्तिगत सीमाएं, साइबर सुरक्षा, लैंगिक सम्मान और कानूनी जिम्मेदारियों के बारे में भी शिक्षित किया जाना चाहिए।

क्या कानून में बदलाव की जरूरत है?

जमुई की घटना के आधार पर केवल “सजा और कठोर कर दी जाए” कहना पर्याप्त समाधान नहीं है। भारत में पहले से ही POCSO Act बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए व्यापक कानूनी ढांचा देता है और इसमें अनिवार्य रिपोर्टिंग, विशेष अदालत, बच्चे के अनुकूल प्रक्रिया तथा बंद कमरे में सुनवाई जैसी व्यवस्थाएं हैं।

इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल है कि मौजूदा कानून जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से लागू हो रहा है।

फिर भी कुछ क्षेत्रों में सुधार पर विचार किया जा सकता है:

 1. Sensitive areas में mandatory safety audit

स्कूल, कोचिंग सेंटर और छात्र-छात्राओं के नियमित आवागमन वाले सुनसान रास्तों की पुलिस द्वारा नियमित सुरक्षा समीक्षा हो।

 2. POCSO मामलों के लिए तेज response system

नाबालिग से जुड़े गंभीर मामलों में सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, महिला हेल्पलाइन, बाल संरक्षण इकाई और मेडिकल सहायता के बीच एकीकृत response mechanism मजबूत किया जाए।

3. सोशल मीडिया पर victim-identification रोकने की बेहतर व्यवस्था

प्लेटफॉर्म और पुलिस के बीच ऐसा त्वरित तंत्र होना चाहिए जिससे नाबालिग पीड़ित की पहचान वाले वीडियो को तेजी से हटाया जा सके और मूल uploader/resharer की पहचान की जा सके।

 4. Police accountability को measurable बनाया जाए

सिर्फ घटना के बाद गिरफ्तारी ही सफलता का पैमाना नहीं होना चाहिए। यह भी देखा जाए कि सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कितने समय में response दिया, FIR कब दर्ज हुई, पीड़ित को सुरक्षा कब मिली और जांच कितनी जल्दी आगे बढ़ी।

5. Victim support को कानून का केंद्र बनाया जाए

कानूनी कार्रवाई के साथ पीड़ित बच्चे और परिवार को counselling, legal aid, privacy protection और आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले में पीड़ितों की सुरक्षा, कानूनी सहायता और मनोवैज्ञानिक परामर्श की जरूरत पर जोर दिया है।

राजनीति से ऊपर उठकर देखने की जरूरत

ऐसी घटनाओं के बाद मामला अक्सर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल जाता है। अलग-अलग नेताओं ने घटना पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं दी हैं। लेकिन किसी भी पक्ष के राजनीतिक बयान को घटना की जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

मुख्य सवाल बहुत सीधा है:

क्या पीड़ित को न्याय मिला? क्या आरोपी कानून के अनुसार दंडित होंगे? और क्या ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए व्यवस्था में ठोस सुधार होगा?

इन सवालों का जवाब जांच और अदालत की प्रक्रिया से आना चाहिए।

निष्कर्ष: जमुई सिर्फ एक खबर नहीं, एक चेतावनी है

जमुई की घटना समाज के सामने कई स्तरों पर एक गंभीर चुनौती रखती है।

एक तरफ अपराध करने वालों की जवाबदेही जरूरी है, दूसरी तरफ पुलिस की preventive व्यवस्था मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके साथ समाज को यह समझना होगा कि किसी लड़की या बच्चे की गरिमा मनोरंजन, भीड़ के तमाशे या सोशल मीडिया कंटेंट का विषय नहीं है।

कानून मौजूद हैं। POCSO बच्चों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट प्रावधान देता है और BNS में भी महिलाओं तथा यौन अपराधों से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं।

अब असली चुनौती है—इन कानूनों का समय पर, निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से पालन।

किसी भी सभ्य समाज की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि अपराधी को कितनी सजा मिली; बल्कि इससे भी होती है कि अपराध होने से पहले व्यवस्था ने कितनी सुरक्षा दी, अपराध के बाद पीड़ित को कितना सहारा मिला और समाज ने पीड़ित के साथ कैसा व्यवहार किया।

जमुई की घटना से सबसे बड़ा सबक यही है—अपराध को रोकना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, लेकिन अपराध होने पर कानून लागू करना निश्चित रूप से राज्य व्यवस्था की जिम्मेदारी है। समाज की जिम्मेदारी है कि वह तमाशबीन नहीं, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बने।

रायपुर में महिला को सड़क पर जलाने का मामला, इलाज के दौरान मौत

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक महिला को सड़क पर आग के हवाले किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद महिला को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, महिला को माना एयरबेस के पास आग के हवाले किया गया था। आग में झुलसने के बाद उसकी हालत बेहद गंभीर बताई गई और उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, बाद में उसने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों की जांच की। जांच के बाद पुलिस ने मामले में एक आरोपी को हिरासत में लिया है। सामने आई जानकारी के अनुसार आरोपी की पहचान विरू धीवर के रूप में हुई है।

पुलिस अब घटना के पीछे की वजह, आरोपी और महिला के बीच संबंध तथा वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

इस घटना ने इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस मामले की सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और जांच पूरी होने के बाद घटना से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है।

रायपुर में सीरियल रेप और हत्या का आरोपी गिरफ्तार: साइकिल से महिलाओं का पीछा करता था, जांच में दो घटनाओं का कनेक्शन सामने आया

No comments Document Thumbnail

रायपुर- राजधानी रायपुर में महिला से दुष्कर्म और हत्या के मामले की जांच कर रही पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर साइकिल से महिलाओं का पीछा करता था और जुलाई तथा अगस्त में हुई दो अलग-अलग घटनाओं में उसकी संलिप्तता सामने आई है।

21 जुलाई को महिला की हत्या का आरोप

पुलिस के मुताबिक, 21 जुलाई को 20 वर्ष की उम्र की एक महिला का आरोपी ने साइकिल से पीछा किया। आरोप है कि उसने न्यू स्वागतम विहार के पास पानी से भरे एक प्लॉट में महिला पर हमला किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की और आरोपी की तलाश में कई स्तरों पर सुराग जुटाए।

5 अगस्त की दूसरी घटना से जुड़ा कनेक्शन

जांच के दौरान पुलिस को 5 अगस्त को हुई एक अन्य घटना के बारे में जानकारी मिली। इस मामले में भी लगभग उसी उम्र की एक महिला का कथित रूप से साइकिल सवार व्यक्ति ने पीछा किया और उस पर हमला किया।

हालांकि, इस घटना में महिला ने शोर मचाकर मदद के लिए आवाज लगाई, जिसके बाद आरोपी मौके से भाग गया। पुलिस ने दोनों घटनाओं में समान पैटर्न को देखते हुए जांच आगे बढ़ाई। 

जांच में सामने आया समान पैटर्न

पुलिस जांच में दोनों मामलों के बीच समानताएँ सामने आने के बाद आरोपी तक पहुंचने की कोशिश तेज की गई। महिलाओं का पीछा करना और साइकिल का इस्तेमाल करना जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बना। इसी आधार पर पुलिस ने संदिग्ध की पहचान और उसकी गतिविधियों की पड़ताल शुरू की।

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों और अन्य तथ्यों की पुष्टि कानूनी जांच एवं आगे की विवेचना के माध्यम से की जाएगी। 

पुलिस जांच जारी

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों मामलों से जुड़े साक्ष्यों, घटनास्थल और अन्य परिस्थितियों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी की अन्य आपराधिक घटनाओं में कोई भूमिका रही है या नहीं।

इस घटना के बाद शहर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। पुलिस का फोकस मामले की विस्तृत जांच करने, उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाने और आरोपों की पुष्टि के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर है।

नोट: आरोपी पर लगाए गए आरोप पुलिस जांच के आधार पर हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी को कानूनन निर्दोष माना जाता है।

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए बड़ा कदम: ‘निर्भय चेतना’ अभियान की शुरुआत, देशभर में प्रशिक्षित होंगे 17.5 लाख जनप्रतिनिधि

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंचायती राज मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘निर्भय चेतना’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। 17 से 19 जून 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कार्यक्रम के साथ इस राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया गया।

यह पहल निर्भया फंड परियोजना के तहत शुरू की गई है और इसे दुनिया का अपनी तरह का सबसे बड़ा अभियान माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं से जुड़े मुद्दों, लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना है।

17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेगा अभियान

कार्यक्रम के तहत देशभर में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जो आगे चलकर 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देंगे। इसका उद्देश्य पंचायत स्तर पर महिलाओं के अधिकारों, नेतृत्व, सुरक्षा और सम्मान को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करना है।

छह राज्यों से शामिल हुए मास्टर ट्रेनर्स

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड के लगभग 40 मास्टर ट्रेनर्स ने भाग लिया। ये प्रशिक्षक आगे अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इस अभियान को विस्तार देंगे।

‘विकसित भारत’ के लिए महिलाओं की भागीदारी जरूरी

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी के बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने पंचायतों को सामाजिक परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सोच और व्यवहार में बदलाव लाने में पंचायतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

वहीं, मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के प्रति जवाबदेह नेतृत्व विकसित करने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया?

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ सत्र, समूह चर्चा, केस स्टडी और अनुभव आधारित शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को लैंगिक समानता, सकारात्मक पुरुषत्व (Positive Masculinity), सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया गया।

‘निर्भय रहो’ पहल का हिस्सा है ‘निर्भय चेतना’

‘निर्भय चेतना’ केंद्र सरकार की ‘निर्भय रहो’ पहल का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसमें तीन महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं:

  • निर्भय नेत्री – महिला जनप्रतिनिधियों के लिए नेतृत्व और कानूनी जागरूकता प्रशिक्षण।

  • निर्भय चेतना – पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाना।

  • निर्भय दृष्टि – ग्रामीण क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर CCTV कैमरे लगाकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना।

मुख्य बातें

▪️ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए ‘निर्भय चेतना’ अभियान शुरू।
▪️ देशभर में 17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण।
▪️ 28,500 मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने का लक्ष्य।
▪️ पहले चरण में 6 राज्यों के 40 प्रशिक्षकों ने लिया हिस्सा।
▪️ पंचायतों को बनाया जाएगा लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा का केंद्र।


नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन (SHe-Box) का आयोजन

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- हिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा (SHe-Box) विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, संसद सदस्य सुधांशु त्रिवेदी, रेखा शर्मा, लवली आनंद और शोभनाबेन महेंद्रसिंह बारैया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, आंतरिक समितियों (IC) और स्थानीय समितियों (LC) के अध्यक्ष व सदस्य, नोडल अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि SHe-Box पोर्टल के माध्यम से देशभर में 1.5 लाख से अधिक कार्यस्थलों को जोड़ा गया है और प्रत्येक जिले में स्थानीय समितियों की स्थापना से महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार किया गया है।

महिलाओं की सुरक्षा और समानता पर जोर

अपने मुख्य संबोधन में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि न्याय और समानता के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि

  • 1.48 लाख से अधिक संस्थान SHe-Box पोर्टल पर पंजीकृत हैं

  • 60,000 से अधिक आंतरिक समितियां सक्रिय हैं

  • महिला श्रम भागीदारी दर पिछले छह वर्षों में 23% से बढ़कर 42% हो गई है

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना तभी साकार होगी जब हर महिला बिना डर के कार्य कर सके और नेतृत्व कर सके।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जानकारी

राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि कार्यस्थल की सुरक्षा महिलाओं का मौलिक अधिकार है। उन्होंने बताया कि

  • मुद्रा ऋण का 70% महिलाओं को दिया गया है

  • पीएम स्वनिधि योजना के 44% लाभार्थी महिलाएं हैं

  • 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं

उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर महिला सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।

नई पहल और घोषणाएं

सम्मेलन के दौरान मंत्री ने

  • SHe-Box का नया लोगो

  • PoSH स्वैच्छिक अनुपालन चेकलिस्ट

  • मिशन शक्ति ऐप के साथ SHe-Box का एकीकरण

  • कर्मयोगी भारत PoSH प्रशिक्षण लिंक
    का शुभारंभ किया।

साथ ही राष्ट्रीय कार्यस्थल सुरक्षा प्रतिज्ञा भी दिलाई गई।

विशेष चर्चा और पैनल सत्र

सम्मेलन में “अनुपालन को मजबूत करने और सुरक्षित कार्यस्थल संस्कृति बनाने” पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें मंत्रालय, संसद, सुप्रीम कोर्ट, UN Women और विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस चर्चा में संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

व्यापक सहभागिता

इस सम्मेलन में लगभग 1,500 प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि 40,000 से अधिक लोग लाइव वेबकास्ट के माध्यम से जुड़े।

सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करना, PoSH कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाना और SHe-Box के उपयोग को बढ़ावा देना है।


कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय सम्मेलन (SHe-Box) का आयोजन

No comments Document Thumbnail

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 14 फरवरी 2026 को विज्ञान भवन में ‘कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन (SHe-Box)’ का आयोजन कर रहा है।

यह सम्मेलन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, आंतरिक/स्थानीय समितियों (ICs/LCs) के अध्यक्षों और सदस्यों, नोडल अधिकारियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, उद्योग जगत के नेताओं, नागरिक समाज प्रतिनिधियों, मीडिया आदि की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित होगा।

यह सम्मेलन सभी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और उत्पीड़न-मुक्त कार्यस्थल सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करने तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (PoSH Act) के प्रभावी कार्यान्वयन को मजबूत करने का प्रयास है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 29 अगस्त 2024 को SHe-Box पोर्टल लॉन्च किया था। यह एक सुरक्षित, उपयोगकर्ता-अनुकूल और बहुभाषी सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म है, जिसमें कड़ी गोपनीयता के साथ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने, संबंधित आंतरिक या स्थानीय समिति को स्वचालित रूप से भेजने और वास्तविक समय में शिकायत की स्थिति ट्रैक करने की सुविधा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।

यह पोर्टल एक संसाधन केंद्र के रूप में भी कार्य करता है, जहाँ कार्यस्थल अपनी अनुपालन संबंधी जानकारी जैसे समिति का विवरण, वार्षिक रिपोर्ट और जागरूकता एवं प्रशिक्षण गतिविधियाँ अपलोड कर सकते हैं।

कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय गोलमेज चर्चा, SHe-Box लोगो का शुभारंभ, राष्ट्रीय PoSH प्रशिक्षण वीडियो, सूचना-शिक्षा-संचार (IEC) सामग्री का विमोचन तथा प्रत्येक नागरिक के लिए करमयोगी भारत पर उपलब्ध PoSH प्रशिक्षण तक पहुंच शामिल होगी। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा राष्ट्रीय कार्यस्थल सुरक्षा शपथ दिलाई जाएगी, इसके बाद उनका मुख्य भाषण होगा।

मुख्य सत्रों में PoSH अनुपालन और कार्यस्थल संस्कृति को मजबूत करने पर राष्ट्रीय गोलमेज चर्चा (विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित) और वैश्विक कार्यस्थल सुरक्षा के सर्वोत्तम अभ्यासों पर संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों एवं बहुपक्षीय संस्थानों के साथ अंतरराष्ट्रीय गोलमेज चर्चा शामिल होगी। सम्मेलन में सुरक्षित कार्यस्थल के प्रति प्रतिबद्धता बढ़ाने के लिए PoSH स्वैच्छिक अनुपालन चेकलिस्ट भी जारी की जाएगी।

इस सम्मेलन में सरकारी और निजी क्षेत्रों की 100 से अधिक संस्थाओं से लगभग 1,500 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम वेबकास्ट के माध्यम से ऑनलाइन भी उपलब्ध होगा, जिसे इस लिंक पर देखा जा सकता है:

यह सम्मेलन PoSH अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, अनुपालन को मजबूत करने, SHe-Box को अपनाने को बढ़ावा देने और सुरक्षित व सम्मानजनक कार्यस्थलों को आगे बढ़ाने में भारत की नेतृत्व भूमिका को सुदृढ़ करने का सरकारी प्रयास है।


गुन्टूर में नई चेतना 4.0 का शुभारंभ, महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान

No comments Document Thumbnail

ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया और सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे “एक आवाज़, एक संकल्प, समानता के लिए एक नई शुरुआत” की प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ें।

डॉ. चंद्रशेखर ने राज्य स्तरीय ‘नई चेतना 4.0’ के शुभारंभ के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इसे लैंगिक हिंसा के खिलाफ एक शक्तिशाली जन आंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि हिंसा को हर रूप में समाप्त करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के अंतर्गत मंत्री ने गुन्टूर में जेंडर रिसोर्स सेंटर (GRC) का उद्घाटन किया। यह सेंटर महिलाओं के लिए एक वन-स्टॉप सहायता प्रणाली के रूप में कार्य करेगा, जिसमें काउंसलिंग, कानूनी सहायता, रेफरल और आजीविका संबंधी सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि महिलाओं को समय पर समर्थन, सुरक्षा और न्याय तक पहुँच सुनिश्चित हो सके।

गुन्टूर में उपस्थित आंध्र प्रदेश की नारी शक्ति से संवाद करते हुए मंत्री ने एक परिवर्तित ग्रामीण भारत के लक्ष्य पर जोर दिया, जहाँ हर महिला सुरक्षित, सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत करे और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण को समावेशी और सतत विकास का आधार बताया।

मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि महिलाओं को सशक्त बनाना सामाजिक प्रगति को तेज करता है, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राष्ट्र को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा भारत की वृद्धि और मजबूती के लिए मूलभूत हैं।

डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि DAY-NRLM के तहत, नई चेतना महिलाओं के समूहों को मजबूत कर रही है, लैंगिक हिंसा के प्रति शून्य सहनशीलता को बढ़ावा दे रही है, पुरुषों और लड़कों की भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है और महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने नागरिकों से सामूहिक संकल्प दोहराने का आग्रह किया और कहा कि सुरक्षित, सम्मानित और आर्थिक रूप से सशक्त भारत का निर्माण एक साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।

नई चेतना की शुरुआत 2021 में हुई थी और यह अब लगभग 10 करोड़ SHG महिलाओं द्वारा संचालित एक राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है। देशभर में 13 लाख से अधिक बैठकों और कार्यक्रमों के माध्यम से 4 करोड़ से अधिक ग्रामीण नागरिकों ने जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लिया है। यह पहल 12 केंद्रीय मंत्रालयों के समन्वय में लागू की जा रही है, जिसमें महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, साथ ही भूमि, बैंकिंग और प्रौद्योगिकी तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित की जा रही है।

कार्यक्रम में राज्य गृह मंत्री वंगलापुडी अनिता और राज्य मंत्री (MSME, SERP एवं NRI सशक्तिकरण और संबंध) कोंडापल्ली श्रीनिवास भी उपस्थित थे, और इस अवसर पर 3000 से अधिक महिलाएं मौजूद थीं।

केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘नई चेतना 4.0’ महिला सशक्तिकरण अभियान का किया शुभारंभ

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में ‘नई चेतना 4.0’ — लिंग समानता और महिला सशक्तिकरण पर राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, तथा ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान भी उपस्थित रहे।

मुख्य बातें:

  • शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को दोहराया कि कोई बहन गरीबी में न रहे, कोई महिला आँसुओं के साथ जीवन न जीए, और हर बहन “लाखपति दीदी” बनकर आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और समृद्धि प्राप्त करे। उन्होंने बताया कि दो करोड़ से अधिक SHG महिलाओं ने पहले ही लाखपति दीदी बनने की यात्रा पूरी कर ली है।

  • लॉन्च के अवसर पर 11 मंत्रालयों/विभागों का अंतर-मंत्रालयीय संयुक्त मार्गदर्शन (Joint Advisory) भी जारी किया गया। इसमें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, गृह मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यम मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, तथा न्याय विभाग शामिल हैं। इसका उद्देश्य लिंग आधारित भेदभाव और हिंसा को समाप्त करना है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इस अवसर पर बताया कि तीन मंत्रालयों — महिला एवं बाल विकास, कानून और न्याय, और ग्रामीण विकास — के बीच अंतर-मंत्रालयीय MoU के तहत Violence-Free Village Initiative के तहत मॉडल गांव विकसित किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण भारत में लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा, अधिकार और सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा।

अभियान की अवधि और कार्यप्रणाली:

  • यह माह लंबा अभियान DAY-NRLM (दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

  • अभियान सभी भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 23 दिसंबर 2025 तक चलेगा।

  • अभियान का आधार 10 करोड़ ग्रामीण महिलाओं की SHG नेटवर्क है, जो इसे मजबूत जन आंदोलनों में परिवर्तित करती है।

मुख्य उद्देश्य:

  • ग्रामीण भारत में लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ सामुदायिक कार्रवाई को मजबूत करना।

  • महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।

  • महिलाओं की सुरक्षित आवाजाही, संपत्ति, क्रेडिट, कौशल और बाजार तक पहुँच सुनिश्चित करना।

  • महिलाओं को उद्यमिता और आजीविका के अवसर प्रदान करना।

  • लिंग-संवेदनशील नीतियों और बजटों के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करना।

विशेष आयोजन:

  • बिहार और राजस्थान की दो महिला चैंपियनों ने अपने अनुभव साझा किए, जिन्होंने भेदभाव को पार कर सामुदायिक बदलाव की अगुवाई की।

  • विभिन्न मंत्रालयों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों के प्रतिनिधियों, SHG महिलाओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और साझेदार नागरिक समाज संगठनों की भागीदारी रही।

नयी चेतना 4.0 ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, लिंग समानता और समुदाय आधारित विकास की दिशा में एक मजबूत पहल है, जो महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने का कार्य करेगी।


POSH अधिनियम पर जागरूकता एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन

No comments Document Thumbnail

जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग [DoWR, RD & GR] में यौन उत्पीड़न की रोकथाम (POSH) अधिनियम, 2013 के संबंध में अभिमुखीकरण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन आर्थिक सलाहकार एवं आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के अध्यक्ष की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम में ICC की बाह्य सदस्य एवं अधिवक्ता जानवी सतपाल बब्बर ने POSH अधिनियम एवं उसके तहत बनाए गए नियमों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।


इस कार्यक्रम का उद्देश्य DoWR, RD & GR के कर्मचारियों को न केवल अधिनियम के कानूनी प्रावधानों की गहन समझ प्रदान करना था, बल्कि इसके व्यापक उद्देश्य—कार्यस्थल पर गरिमा और समानता की संस्कृति को बढ़ावा देना—भी था।

यौन उत्पीड़न की रोकथाम (POSH) अधिनियम, 2013 को कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए सुरक्षित, संरक्षित और गरिमापूर्ण वातावरण सुनिश्चित करने हेतु सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक ‘विशाखा’ निर्णय के अनुरूप अधिनियमित किया गया था। यह अधिनियम यौन उत्पीड़न को रोकने, प्रतिबंधित करने और उसका निवारण करने हेतु एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जिसमें अपराध की स्पष्ट परिभाषा तथा अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियोक्ताओं की जिम्मेदारियाँ निर्धारित की गई हैं।

यह अधिनियम दस या अधिक कर्मचारियों वाले संगठनों में आंतरिक शिकायत समितियों (ICCs) की स्थापना को अनिवार्य बनाता है और न केवल संरचित निवारण तंत्र पर जोर देता है, बल्कि जागरूकता, संवेदनशीलता एवं क्षमता-विकास जैसी सक्रिय पहलों पर भी बल देता है। इन प्रावधानों के माध्यम से अधिनियम सभी कर्मचारियों के लिए लैंगिक-संवेदनशील, सम्मानजनक और न्यायसंगत कार्य वातावरण को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखता है।



Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.