Media24Media.com: #VocationalTraining

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #VocationalTraining. Show all posts
Showing posts with label #VocationalTraining. Show all posts

उत्तरी-पूर्व की प्रतिभा का राष्ट्रीय मंच: इंडिया स्किल्स 2025–26 का नॉर्थ ईस्ट रीजनल कॉम्पटीशन गुवाहाटी में 19–22 जनवरी 2026 को

No comments Document Thumbnail

भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा आयोजित इंडिया स्किल्स 2025–26 के नॉर्थ ईस्ट रीजनल कॉम्पटीशन का आयोजन 19 से 22 जनवरी 2026 तक गुवाहाटी विश्वविद्यालय, असम में किया जा रहा है। यह पहली बार है जब उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए समर्पित रीजनल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सभी आठ राज्यों की प्रतिभाएँ 26 विभिन्न कौशल श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करेंगी।

इस प्रतियोगिता का उद्घाटन 19 जनवरी 2026 को कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री, जयंत चौधरी द्वारा किया जाएगा। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) इस प्रतियोगिता का ज्ञान साझेदार और कार्यान्वयन एजेंसी है।

इंडिया स्किल्स, भारत की प्रमुख राष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता है, जो देश के सर्वश्रेष्ठ कौशल प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण और वैश्विक मानकों के अनुसार उनकी तुलना करने का एक मंच है। इस वर्ष के इंडिया स्किल्स 2025–26 साइकिल में 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 3.65 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने 63 कौशल श्रेणियों में पंजीकरण किया है।

नॉर्थ ईस्ट रीजनल प्रतियोगिता का उद्देश्य क्षेत्रीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच पर लाना, भौगोलिक और लॉजिस्टिक बाधाओं को कम करना, तथा स्थानीय कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। इस प्रतियोगिता के विजेता इंडिया स्किल्स 2025–26 के राष्ट्रीय चरण में प्रवेश करेंगे और देश के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाली प्रतिभाओं की श्रृंखला को आगे बढ़ाएंगे।


जॉब-लिंक्ड कौशल विकास का नया मंच: एमएसडीई का जन शिक्षा संस्थान सम्मेलन पुणे में 19-20 जनवरी 2026 को

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), भारत सरकार, 19-20 जनवरी 2026 को पुणे, महाराष्ट्र के Symbiosis Skill and Professional University के ऑडिटोरियम हॉल में दो दिवसीय जन शिक्षा संस्थान (JSS) ज़ोनल सम्मेलन एवं स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन व प्रगति समीक्षा कार्यशाला का आयोजन करेगा।

इस सम्मेलन में 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 152 जन शिक्षा संस्थानों के प्रतिनिधि, MSDE, Directorate of Jan Shikshan Sansthan (DJSS), National Institute for Entrepreneurship and Small Business Development (NIESBUD) तथा अन्य महत्वपूर्ण हितधारक शामिल होंगे।

जन शिक्षा संस्थान (JSS) योजना: एक व्यापक परिचय

JSS योजना केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे MSDE द्वारा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य गैर-शिक्षित, नव-शिक्षित, स्कूल ड्रॉपआउट और समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों को गैर-औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। योजना में विशेष रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित समूहों पर जोर दिया जाता है।

वर्तमान में 26 राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों में 294 JSS कार्यरत हैं, जो 51 NSQF-आधारित पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं और स्थानीय स्तर पर आजीविका सृजन में योगदान देते हैं।

प्रमुख आंकड़े (31 दिसंबर 2025 तक)

  • कुल 34 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण

  • जिनमें 28.3 लाख महिलाएँ शामिल

  • प्रशिक्षण मुख्य रूप से डोर-टू-डोर स्तर पर सब-सेंटर्स के माध्यम से दिया जाता है

  • विशेष रूप से अभिलाक्षित जिले, आदिवासी क्षेत्र, वामपंथी प्रभावित क्षेत्र, सीमा और दूरदराज के इलाकों में सक्रिय

पुणे सम्मेलन का उद्देश्य और मुख्य विषय

यह सम्मेलन JSS के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच होगा। सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • FY 2025–26 में भाग लेने वाले JSS की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा

  • नीति, दिशा-निर्देशों में सुधार और कार्यान्वयन चुनौतियों पर संरचित स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन

  • JSS कार्यकर्ताओं की क्षमता वृद्धि: रोजगार कौशल, उद्यमिता, आजीविका, क्रेडिट लिंकिंग और वित्तीय प्रबंधन

  • AI और डिजिटल टूल्स सहित मांग-आधारित और उभरते कौशल क्षेत्रों की पहचान

  • आधुनिक कौशल प्रयोगशालाओं का एक्सपोज़र विज़िट

  • JSS की बेहतरीन प्रथाओं और स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन

समापन सत्र और भविष्य की रूपरेखा

20 जनवरी 2026 को आयोजित वैलिडेटरी सत्र में MSDE की वरिष्ठ अधिकारी देबाश्री मुखर्जी (सचिव, MSDE) मुख्य भाषण देंगी। इस सत्र में सम्मेलन की प्रमुख सिफारिशें और निष्कर्ष तैयार किए जाएंगे, जो JSS योजना को और मजबूत बनाने में मदद करेंगे।

सरकारी दृष्टि के साथ समावेशी विकास

यह ज़ोनल सम्मेलन MSDE के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जो समुदाय आधारित कौशल विकास को और प्रभावी, गुणवत्ता पूर्ण और व्यापक बनाने के लिए किया जा रहा है। यह भारत सरकार की समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि के अनुरूप है।


PM-SETU के तहत पुणे में उद्योग परामर्श बैठक: उन्नत आईटीआई के माध्यम से भविष्य-तैयार कार्यबल की दिशा में कदम

No comments Document Thumbnail

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई), भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से प्रधानमंत्री कौशल एवं रोज़गार परिवर्तन उन्नत आईटीआई (PM-SETU – Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs) योजना के कार्यान्वयन के अंतर्गत 19 जनवरी 2026 को पुणे में एक प्रमुख उद्योग परामर्श बैठक का आयोजन करेगा। प्रधानमंत्री द्वारा विकसित भारत के विज़न के अनुरूप घोषित यह महत्वाकांक्षी पहल भविष्य के लिए तैयार, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परामर्श बैठक यशवंतराव चव्हाण अकादमी ऑफ़ डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन (यशदा), पुणे में आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य उद्योग की भागीदारी को प्रोत्साहित करना तथा योजना के उद्योग-नेतृत्व वाले कार्यान्वयन ढांचे के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

इस परामर्श में 50 से अधिक पात्र कंपनियाँ भाग लेंगी, जो निर्माण, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, तेल एवं गैस तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगी। बैठक की अध्यक्षता देबाश्री मुखर्जी, सचिव, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा की जाएगी। उनके साथ मनीषा वर्मा, अपर मुख्य सचिव, कौशल, रोज़गार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग, महाराष्ट्र सरकार भी उपस्थित रहेंगी। इस अवसर पर वे क्षेत्र के आईटीआई एवं उद्योगों का भी दौरा करेंगी।

PM-SETU योजना के अंतर्गत देशभर में 1,000 सरकारी आईटीआई को हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से आधुनिक बनाने का लक्ष्य है। इसके तहत 200 हब आईटीआई को उन्नत अवसंरचना और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा, जबकि 800 स्पोक आईटीआई जिलों में प्रशिक्षण की पहुँच को विस्तारित करेंगे। इस योजना में आईटीआई को सरकारी स्वामित्व लेकिन उद्योग-प्रबंधित संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे मांग-आधारित प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और बेहतर प्लेसमेंट अवसर सुनिश्चित हो सकें। क्लस्टर आधारित साझेदारी के माध्यम से उद्योग, एंकर इंडस्ट्री के साथ मिलकर प्रशिक्षण और रोज़गार से जुड़ी मज़बूत कड़ियाँ स्थापित करेगा।

अधिकारियों के अनुसार, यह परामर्श बैठक इस बात पर प्रकाश डालेगी कि PM-SETU किस प्रकार उद्योग को केवल समय-समय पर सहभागिता तक सीमित न रखते हुए, कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में निरंतर और संरचित भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करती है। क्लस्टर मॉडल के तहत उद्योग साझेदार संस्थागत शासन में प्रत्यक्ष भागीदारी कर सकेंगे, प्रशिक्षण को वास्तविक श्रम बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल सकेंगे, पाठ्यक्रम एवं शिक्षण पद्धतियों में सुधार कर सकेंगे, प्रशिक्षकों के कौशल उन्नयन में सहयोग देंगे तथा अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट तंत्र को मज़बूत बनाएंगे। इससे भर्ती लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि और उद्योग मानकों के अनुरूप जॉब-रेडी प्रतिभा की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

योजना के क्रियान्वयन की दिशा में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भी प्रारंभिक कदम उठाए गए हैं। अब तक 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रारंभिक क्लस्टरों की पहचान कर ली है और 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने राज्य स्तरीय संचालन समितियों (State Steering Committees) को अधिसूचित कर दिया है।

परामर्श बैठक के दौरान, राज्य में व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोज़गार परिणामों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उद्योग एवं संस्थागत साझेदारियों को औपचारिक रूप देने हेतु समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान भी किया जाएगा। इनमें व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय (DVET), महाराष्ट्र सरकार और FIAT इंडिया, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया, अनुदीप फ़ाउंडेशन, तथा DVET और SDN/वाधवानी के बीच साझेदारियाँ शामिल हैं।

PM-SETU भारत की कौशल यात्रा में एक निर्णायक मोड़ साबित होने जा रही है, जो सरकार और उद्योग के बीच सहयोग के स्वरूप को पुनर्परिभाषित करेगी। यह योजना उच्च गुणवत्ता वाले व्यावसायिक संस्थानों के निर्माण, भविष्य-उन्मुख पाठ्यक्रमों के विकास और उभरते क्षेत्रों के लिए सशक्त प्रतिभा पाइपलाइन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संस्थागत शासन को सुदृढ़ कर, प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र का आधुनिकीकरण कर तथा कौशल को श्रम बाज़ार की मांग से जोड़कर, यह पहल विकसित भारत के अवसरों के लिए देश के युवाओं को तैयार करने में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी।

मुंबई में उद्योग–सरकार कौशल संवाद आयोजित, पीएम-सेतु से उद्योग-संगत कौशल विकास को मिलेगा नया आयाम

No comments Document Thumbnail

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के साथ साझेदारी में आज ताज महल पैलेस, मुंबई में “कौशल प्रतिभा के लिए उद्योग–सरकार सहयोग को सशक्त बनाना” विषय पर एक उच्चस्तरीय उद्योग संवाद का आयोजन किया। इस संवाद की अध्यक्षता जयंत चौधरी, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री, भारत सरकार ने की। कार्यक्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य, आतिथ्य, बैंकिंग और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों के वरिष्ठ उद्योग नेताओं, विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा उद्योग-संगत कौशल ढांचे को मजबूत करने और रोजगारपरकता बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि भारत एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहाँ तीव्र तकनीकी परिवर्तन, कार्यस्थलों के बदलते स्वरूप और जनसांख्यिकीय बदलाव विभिन्न क्षेत्रों में कौशल आवश्यकताओं को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी युवा आबादी के बावजूद उद्योगों को जॉब-रेडी प्रतिभा न मिल पाना कौशल असंतुलन को दर्शाता है, जिससे उद्योग–सरकार के बीच अधिक गहन और संरचित सहयोग की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

मंत्री ने उत्कृष्टता केंद्रों (Centres of Excellence – CoEs) के लिए एक सुसंगत राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने की सरकार की महत्वाकांक्षा को रेखांकित किया, जिसमें उन्नत कौशल, उद्योग प्रासंगिकता और मापनीय रोजगार परिणामों पर विशेष ध्यान होगा। उन्होंने बताया कि CoEs को उच्च स्तरीय कौशल प्रशिक्षण, प्रशिक्षक उत्कृष्टता और पाठ्यक्रम नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो सीधे उद्योग की मांग से जुड़े होंगे।

जयंत चौधरी ने सरकार की प्रमुख पहल पीएम-सेतु (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई) का भी उल्लेख किया, जिसे आईटीआई को आधुनिक, आकांक्षी और परिणामोन्मुख संस्थानों के रूप में पुनर्स्थापित करने वाला एक परिवर्तनकारी सुधार बताया। लगभग ₹60,000 करोड़ के अनुमानित परिव्यय के साथ, पीएम-सेतु के तहत 1,000 सरकारी आईटीआई को उद्योग-संगत उत्कृष्टता केंद्रों में उन्नत किया जाएगा। इसके लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाया जाएगा, जिसमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई को जोड़कर देशभर में गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार किया जाएगा। इस योजना की एक प्रमुख विशेषता उद्योग-नेतृत्व वाली गवर्नेंस है, जिसे विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से लागू किया जाएगा। यह एसपीवी वित्तीय प्रबंधन, अवसंरचना और उपकरण विकास, निगरानी एवं मूल्यांकन, हितधारक सहभागिता और उद्योग सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मंत्री ने कहा,

“पीएम-सेतु व्यावसायिक संस्थानों के उद्योग से जुड़ने के तरीके में एक प्रणालीगत बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। पाठ्यक्रम डिजाइन, प्रशिक्षक प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट में उद्योग की भागीदारी सुनिश्चित कर हम ऐसे आईटीआई बना रहे हैं, जो घरेलू और वैश्विक श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप, प्रासंगिक और आकांक्षी हों।”

उन्होंने स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर्स (SIICs) की रणनीतिक भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जो वैश्विक गतिशीलता को समर्थन देते हैं, और उद्योग से आग्रह किया कि वे SIICs को अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले प्रशिक्षण और विदेश रोजगार के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने में सक्रिय भागीदारी निभाएं। साथ ही, उन्होंने विश्व आर्थिक मंच (WEF) के स्किल एक्सेलेरेटर में भारत की भागीदारी को हाल ही में मिली कैबिनेट मंजूरी का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे भारत की कौशल प्रणाली को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी।

परिणाम मापन और पारदर्शिता पर जोर देते हुए, मंत्री ने एम्प्लॉयबिलिटी मैट्रिक्स को एक विश्वसनीय और मानकीकृत सूचकांक बताया, जो विभिन्न क्षेत्रों में जॉब-रेडीनेस का आकलन करने में सहायक होगा। उन्होंने APAAR ID और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया, जो लचीले शिक्षण मार्ग, क्रेडिट पोर्टेबिलिटी और आजीवन कौशल उन्नयन को संभव बनाते हैं। अप्रेंटिसशिप पर बोलते हुए उन्होंने NAPS और NATS के तहत भागीदारी बढ़ाने पर सरकार के फोकस को दोहराया और इसे शिक्षा तथा रोजगार के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया।

अर्चना मयराम, आर्थिक सलाहकार, MSDE ने गोलमेज चर्चाओं की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए उद्योग की मांग और उपलब्ध कौशल के बीच बढ़ते अंतर पर प्रकाश डाला। पीएम-सेतु पर प्रस्तुति देते हुए उन्होंने कहा कि नियोक्ताओं को उपयुक्त दक्षताओं वाले उम्मीदवार ढूंढने में कठिनाई हो रही है, जबकि तीव्र तकनीकी बदलाव उद्योगों से उभरते कौशलों के प्रति निरंतर सजग रहने की अपेक्षा करता है। उन्होंने जनरेशन-ज़ेड की बदलती अपेक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे त्वरित प्रतिफल चाहते हैं और करियर स्थिरता को लेकर चिंतित रहते हैं, इसलिए कौशल को अधिक आकांक्षी बनाना, आत्मसम्मान को मजबूत करना और सार्थक रोजगार के स्पष्ट मार्ग तैयार करना आवश्यक है—जिसे पीएम-सेतु जैसी पहलें संबोधित करती हैं।

उद्योग की ओर से बी. थियागराजन, अध्यक्ष, CII ने कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में उद्योग की सह-निर्माता की भूमिका पर बल दिया और कहा कि प्रशिक्षण को कार्यस्थल की वास्तविकताओं और भविष्य के विकास क्षेत्रों के अनुरूप बनाए रखने के लिए सरकार के साथ निकट सहयोग आवश्यक है। आशंक देसाई, अध्यक्ष, मास्टेक ने नए और सहयोगात्मक कौशल मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि उभरती औद्योगिक आवश्यकताओं और तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए उद्योग, प्रशिक्षण संस्थानों और सरकार के बीच घनिष्ठ साझेदारी अनिवार्य है।

इंटरएक्टिव सत्र के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने CII और मंत्री के साथ विचार साझा किए कि विभिन्न उद्योग सरकार के साथ मिलकर कौशल विकास में कैसे योगदान दे सकते हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि समन्वित प्रशिक्षण कार्यक्रम और मजबूत प्लेसमेंट से प्रशिक्षणार्थियों के नामांकन और रोजगार अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। विचार-विमर्श का केंद्र उद्योग-नेतृत्व वाले कौशल मॉडल को सशक्त बनाना, प्रशिक्षण संस्थानों का आधुनिकीकरण, अप्रेंटिसशिप का विस्तार और श्रम-बाजार की आवश्यकताओं के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना रहा।

सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सरकार और उद्योग के बीच निरंतर सहयोग ही एक कुशल, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के निर्माण की कुंजी है, जो भारत की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूती प्रदान करेगा।

NCVET ने अदानी स्किल्स एंड एजुकेशन फाउंडेशन को अवार्डिंग बॉडी (स्टैंडर्ड) के रूप में मान्यता दी

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (NCVET) ने 26 नवंबर 2025 को अदानी स्किल्स एंड एजुकेशन फाउंडेशन के साथ समझौता किया, जिसके तहत इसे Awarding Body (Standard) के रूप में मान्यता दी गई और इसे पूरे भारत में क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त हुए।

इस मान्यता के तहत अदानी स्किल्स एंड एजुकेशन फाउंडेशन अब पोर्ट लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में NCVET द्वारा अनुमोदित योग्यताओं के लिए शिक्षार्थियों को प्रमाणित और मान्यता प्रदान कर सकेगा। यह पूरे देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की संरचित, जवाबदेह और गुणवत्ता-आधारित डिलीवरी सुनिश्चित करता है।

NCVET राष्ट्रीय कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में उद्योग की भागीदारी को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है। पोर्ट्स, लॉजिस्टिक्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर में विशेष विशेषज्ञता रखने वाली अदानी स्किल्स एंड एजुकेशन फाउंडेशन के साथ यह सहयोग उद्योग-संरेखित मानक, NCVET दिशानिर्देशों के अनुसार उन्नत प्रशिक्षण गुणवत्ता और शिक्षार्थियों के लिए विस्तारित अवसर प्रदान करेगा।

NCVET ने पोर्ट मैनेजमेंट डोमेन में अदानी स्किल्स एंड एजुकेशन फाउंडेशन की पहली योग्यता को मंजूरी दी है। यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में कुशल कार्यबल की आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

NCVET इस सहयोग के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षण परिदृश्य को और सशक्त बनाने और युवाओं को विश्वसनीय कौशल और राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रदान करने की उम्मीद करता है।

डीजीटी और ऑटोडेस्क के बीच साझेदारी से डिजिटल डिजाइन और ‘मेक’ कौशल को मिलेगी नई गति: आईटीआई और एनएसटीआई के प्रशिक्षकों को मिलेगा अत्याधुनिक प्रशिक्षण

No comments Document Thumbnail

प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी), कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के अंतर्गत, और ऑटोडेस्क ने आज एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर साझेदारी की घोषणा की, जिसका उद्देश्य भारत भर के राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के फैकल्टी और प्रशिक्षकों के बीच डिजिटल डिजाइन और ‘मेक’ कौशल को बढ़ावा देना है।

इस साझेदारी का उद्देश्य प्रशिक्षकों और शिक्षकों की डिजिटल क्षमताओं को मजबूत करना, छात्रों में रोजगार कौशल को बढ़ाना और भारत के कार्यबल को आर्किटेक्चर, इंजीनियरिंग, विनिर्माण और निर्माण जैसे क्षेत्रों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।

एमओयू का आदान-प्रदान नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में किया गया, जिसमें देबाश्री मुखर्जी, सचिव, एमएसडीई; सुनील कुमार गुप्ता, उप महानिदेशक, डीजीटी; और ऑटोडेस्क के शीर्ष अधिकारी एंड्रयू एनेग्नोस्ट (सीईओ), स्टीव ब्लम (सीओओ), हारेष खुबचंदानी, और कमोलिका गुप्ता पेरेस उपस्थित थे।

ऑटोडेस्क की ‘स्टेट ऑफ डिजाइन एंड मेक रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, भारत की 52% कंपनियों ने कहा है कि एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से संबंधित कौशल भविष्य में उनकी शीर्ष भर्ती प्राथमिकता होगी। इस साझेदारी के तहत, आने वाले तीन वर्षों में कौशल विकास को एआई, उद्योग नवाचार और नए कैरियर अवसरों के अनुरूप बनाया जाएगा। ऑटोडेस्क अपने पेशेवर सॉफ्टवेयर को देशभर के 14,500 से अधिक आईटीआई और 33 एनएसटीआई के शिक्षकों और छात्रों के लिए उपलब्ध कराएगा, जिससे प्रशिक्षक लाखों युवाओं को उन्नत डिजिटल डिजाइन और विनिर्माण कौशल सिखा सकें।

सचिव, एमएसडीई देबाश्री मुखर्जी ने कहा,

“ऑटोडेस्क के साथ यह साझेदारी एनएसटीआई और आईटीआई के प्रशिक्षकों की क्षमताओं को उन्नत डिजाइन तकनीकों से सशक्त बनाएगी। यह अकादमिक शिक्षा और उद्योग प्रथाओं के बीच की खाई को पाटने में मदद करेगी, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर कुशल और तकनीकी रूप से सशक्त प्रतिभा का केंद्र बन सके।”

ऑटोडेस्क के अध्यक्ष और सीईओ एंड्रयू एनेग्नोस्ट ने कहा,

“भारत को कुशल प्रतिभा के वैश्विक नेता के रूप में उभरते देखना गर्व की बात है। डीजीटी के साथ हमारी साझेदारी शिक्षकों और छात्रों को डिजिटल उपकरणों और उद्योग से जुड़ी सीख प्रदान करने के लिए है। जैसे-जैसे एआई डिजाइन और विनिर्माण को बदल रहा है, वैसे-वैसे एआई-तैयार प्रतिभा की मांग भी बढ़ रही है। यह सहयोग भारत के कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को भविष्य के अवसरों के लिए तैयार करेगा।”

इस पहल के तहत संयुक्त रूप से शैक्षिक कार्यक्रमों, पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षण गतिविधियों का विकास किया जाएगा, जिसमें ऑटोडेस्क की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग होगा।

यह सहयोग स्किल इंडिया मिशन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और व्यावसायिक प्रशिक्षण में डिजिटल डिजाइन तकनीक को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

About DGT (प्रशिक्षण महानिदेशालय)

डीजीटी, एमएसडीई के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय निकाय है, जो भारत में व्यावसायिक प्रशिक्षण की नीति, मानक और समन्वय का दायित्व संभालता है। देशभर में 14,500+ आईटीआई, 33 एनएसटीआई और आईटीओटी संस्थानों के माध्यम से यह 23 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान करता है।
डीजीटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3डी प्रिंटिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे नई पीढ़ी के ट्रेड्स में प्रशिक्षण को भी प्रोत्साहित कर रहा है।

About Autodesk (ऑटोडेस्क)

ऑटोडेस्क विश्वभर के डिजाइनरों, इंजीनियरों और निर्माताओं को डिजाइन और मेक प्लेटफॉर्म के माध्यम से समर्थ बनाता है। यह सॉफ्टवेयर कंपनी शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर छात्रों और शिक्षकों को निःशुल्क पहुंच, प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करती है।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.