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PM-SETU के तहत ITI आधुनिकीकरण को बड़ी मंजूरी, राजस्थान-UP-तेलंगाना के लिए ₹735.70 करोड़ के निवेश को स्वीकृति

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नई दिल्ली- देश में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक और रोजगारपरक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs (PM-SETU) योजना के तहत 5वीं राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) की बैठक में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के ITI क्लस्टरों के लिए कुल ₹735.70 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

बैठक की अध्यक्षता कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सचिव श्रीमती देबाश्री मुखर्जी ने की। बैठक में प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) के महानिदेशक दिलीप कुमार, अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार जी. मधुमिता दास, संयुक्त सचिव मानसी सहाय ठाकुर सहित मंत्रालय और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, बहुपक्षीय विकास बैंकों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के साझेदार शामिल हुए।

9 ITI क्लस्टरों में अब तक ₹2,171 करोड़ का निवेश

5वीं NSC की मंजूरी के बाद PM-SETU के तहत अब तक 9 ITI क्लस्टरों के लिए कुल ₹2,171 करोड़ के निवेश को मंजूरी मिल चुकी है। सरकार का लक्ष्य इन संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं, नई तकनीकों और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।

PM-SETU के तहत इंडस्ट्री-लेड हब एंड स्पोक मॉडल अपनाया जा रहा है। इसमें एक प्रमुख Hub ITI के साथ कई Spoke ITI को जोड़ा जाता है, जिससे संसाधनों, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक का बेहतर समन्वय हो सके।

राजस्थान को ₹241 करोड़ की मंजूरी

राजस्थान के भिवाड़ी ITI क्लस्टर के लिए ₹241 करोड़ के Strategic Investment Plan (SIP) को मंजूरी दी गई है। इसे H.G. Infra Engineering Limited (HGIEL) ने प्रस्तुत किया था।

इस क्लस्टर में Government ITI Bhiwadi को Hub ITI बनाया गया है, जबकि Government ITI Alwar, Neemrana, Tijara और Kishangarh Bas को Spoke ITI के रूप में शामिल किया गया है।

तेलंगाना के लिए ₹254.30 करोड़

तेलंगाना के Medchal ITI क्लस्टर के लिए ₹254.30 करोड़ के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह प्रस्ताव ZEN Technologies Limited ने प्रस्तुत किया था।

यह प्रस्ताव पहले 4वीं NSC बैठक में कुछ स्पष्टीकरणों के अभाव में टाल दिया गया था। बाद में कोर्स स्ट्रक्चर, वित्तीय गणना, पात्रता, दस्तावेज और सिविल वर्क्स से जुड़े विस्तृत स्पष्टीकरण दिए गए, जिसके बाद समिति ने जवाबों को संतोषजनक मानते हुए प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की।

इस क्लस्टर में Government ITI Medchal Hub के रूप में होगा, जबकि Alwal, Shameerpet, Kukunoorpally और Siddipet ITI को Spoke संस्थानों के रूप में शामिल किया गया है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ ITI क्लस्टर को ₹240.40 करोड़

उत्तर प्रदेश के Meerut ITI क्लस्टर के लिए ₹240.40 करोड़ के Strategic Investment Plan को भी मंजूरी मिली है। यह प्रस्ताव National Skill Development Corporation (NSDC) ने प्रस्तुत किया था।

इस क्लस्टर में Government ITI, Saket, Meerut को Hub ITI बनाया गया है। इसके साथ Ghaziabad, Hapur, Gautam Buddha Nagar और Baghpat के Government ITI को Spoke ITI के रूप में जोड़ा गया है।

उद्योग की भागीदारी से बदलेगा ITI का स्वरूप

PM-SETU का उद्देश्य सरकारी ITI को आधुनिक तकनीक, बेहतर आधारभूत ढांचे और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण सुविधाओं से लैस करना है। स्वीकृत योजनाओं में इन्फ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण, मौजूदा ट्रेड्स का अपग्रेडेशन, नए लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म कोर्स शुरू करना तथा संस्थानों की संचालन क्षमता मजबूत करना शामिल है।

इन योजनाओं से ITI में पढ़ने वाले युवाओं को उभरती तकनीकों और बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार के नए अवसरों के लिए युवाओं की तैयारी को भी मजबूती मिलेगी।

राजस्थान बना PM-SETU के तहत SHA साइन करने वाला पहला राज्य

बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी हासिल हुई। H.G. Infra Engineering Limited, राजस्थान सरकार और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (भारत सरकार) के बीच Shareholders' Agreement (SHA) पर हस्ताक्षर किए गए।

राजस्थान के कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा की मौजूदगी में हुए इस समझौते के साथ भिवाड़ी ITI क्लस्टर में PM-SETU के तहत कार्यान्वयन की औपचारिक शुरुआत हो गई। इसके साथ राजस्थान PM-SETU के तहत SHA पर हस्ताक्षर करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने पर जोर

PM-SETU केंद्र सरकार की प्रमुख कौशल विकास योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य ITI इकोसिस्टम को उद्योग के साथ जोड़कर आधुनिक बनाना है। योजना के तहत बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम और उद्योग आधारित कौशल के जरिए युवाओं की रोजगार क्षमता (Employability) बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के तीन ITI क्लस्टरों के लिए ₹735.70 करोड़ की ताजा मंजूरी को देश में आधुनिक, उद्योग-उन्मुख और भविष्य के रोजगार बाजार के लिए तैयार ITI विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जीजामगांव के नवीन आईटीआई में शुरू हुआ ‘मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल’ ट्रेड; युवाओं के लिए रोजगार के खुलेंगे नए द्वार

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बदलती तकनीक और हरित परिवहन की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को मिलेगा आधुनिक एवं उद्योग-आधारित प्रशिक्षण

ऑनलाइन प्रवेश पंजीयन प्रक्रिया शुरू

रायपुर- छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नवीन शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई), जीजामगांव में सत्र 2026-27 से पहली बार मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल ट्रेड का प्रथम बैच प्रारंभ किया गया है। यह इस संस्था का भी पहला प्रशिक्षण सत्र होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों को देखते हुए यह ट्रेड युवाओं के लिए करियर की दृष्टि से बेहद अहम साबित होगा।

दो वर्षीय पाठ्यक्रम और आधुनिक प्रशिक्षण

मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल दो वर्षीय पाठ्यक्रम है। इसमें प्रशिक्षणार्थियों को इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक के साथ-साथ बैटरी प्रबंधन प्रणाली (BMS), मोटर कंट्रोल, चार्जिंग सिस्टम, वाहन सर्विसिंग और फॉल्ट डायग्नोसिस जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक एवं उद्योग-आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। वर्तमान में यह ट्रेड छत्तीसगढ़ के चुनिंदा 5 शासकीय आईटीआई संस्थानों में ही संचालित है, जिससे जीजामगांव आईटीआई में इसकी शुरुआत जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

रोजगार व स्वरोजगार के बेहतर अवसर

ई-व्हीकल के बढ़ते चलन से अधिकृत सर्विस सेंटरों, ई-व्हीकल निर्माण कंपनियों, चार्जिंग स्टेशनों और बैटरी से संबंधित सेवा इकाइयों में प्रशिक्षित तकनीशियनों की मांग तेजी से बढ़ेगी। इसके अलावा, प्रशिक्षित युवा खुद का सर्विस सेंटर या तकनीकी सेवा शुरू कर स्वरोजगार भी स्थापित कर सकेंगे।

क्षेत्र का तेजी से हो रहा विकास

जीजामगांव क्षेत्र में फॉरेस्ट पार्क, फूड पार्क सहित विभिन्न विकास एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। हाल ही में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने नवीन आईटीआई भवन के लिए चिह्नित भूमि का निरीक्षण भी किया था। जिला धमतरी की नोडल संस्था शासकीय आईटीआई कुरूद के प्राचार्य योगेश देवांगन ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की है कि वे इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए इस नवीन ट्रेड में प्रवेश लें।

प्रवेश प्रक्रिया और अन्य सौगातें

आईटीआई में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीयन एवं चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिसके बाद मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए शासकीय आईटीआई कुरूद से संपर्क किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 23 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ग्राम करेली बड़ी में आयोजित समारोह में जिले के लिए 83 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की घोषणा की थी, जिसमें जीजामगांव में नवीन आईटीआई की स्थापना भी शामिल थी।


विशेष लेख : विश्व युवा कौशल विकास दिवस : कौशल से सशक्त युवा, विकसित छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम

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रायपुर- "कौशल ही आज के समय की सबसे बड़ी पूंजी है। जिस युवा के पास हुनर है, उसके लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है।" इसी सोच को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को रोजगारोन्मुखी एवं उद्योगों की मांग के अनुरूप आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की विशा में लगातार कार्य कर रही है।

विश्व युवा कौशल विकास दिवस के अवसर पर यह कहना सार्थक होगा कि छत्तीसगढ़ ने कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य में युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के साथ रोजगार सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

लगभग पांच लाख युवाओं को मिला कौशल प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के प्रारंभ से अब तक प्रदेश के 4 लाख 94 हजार 330 युवाओं को विभिन्न रोजगारपरक ट्रेडों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इनमें से 2 लाख 74 हजार 934 युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा चुका है। वर्तमान में योजना के अंतर्गत राज्यभर में 375 व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रवाता (199 शासकीय एवं 176 अशासकीय) के माध्यम से राष्ट्रीय कौशल अर्हता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण संचालित किए जा रहे हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 9 हजार 418 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 7 हजार 528 युवाओं को रोजगार प्राप्त हो चुका है, जबकि 6 हजार 679 युवा वर्तमान में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

बदलते दौर के अनुरूप आधुनिक पाठ्यक्रम

राज्य सरकार ने युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए कौशल प्रशिक्षण में व्यापक बदलाव किए हैं। अब पारंपरिक ट्रेडों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मेंटेनेंस, ड्रोन ऑपरेटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग (AI-ML), साइबर सुरक्षा, सूर्यमित्र (सौर ऊर्जा) जैसे 21 वीं सदी के अत्याधुनिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

इस वर्ष विशेष रूप से जल वितरण संचालक (Water Distribution Operator) कोर्स प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत 2,770 युवाओं को मल्टी-स्किल प्रशिक्षण देकर सीधे रोजगार से जोड़ने की कार्ययोजना बनाई गई है।

गुणवत्ता पर विशेष जोर

छत्तीसगढ़ में कौशल विकास केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

अब प्रत्येक प्रशिक्षक के लिए शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव के साथ प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (Training of Trainers-TOT) प्रमाणन अनिवार्य किया गया है। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया है। 

प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के लिए मूल्यांकन से पहले कम से कम सात दिवस का ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) अनिवार्य किया गया है, जिससे उन्हें उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।

प्रशिक्षण केंद्रों में फेस आधारित ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है। साथ ही सभी प्रशिक्षण केंद्रों में आई.पी. आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रशिक्षण गतिविधियों की सतत निगरानी की जा रही है। इन व्यवस्थाओं से पारदर्शिता बढ़ी है तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता और अनुशासन में सुधार हुआ है।

प्रशिक्षण के साथ रोजगार की भी गारंटी

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं के रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रशिक्षण संचालन की अनुमति देने से पहले प्रत्येक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता द्वारा रोजगार उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण के बाद ही प्रशिक्षण संचालन की अनुमति प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्रों को मिलने वाली राशि का 60 प्रतिशत भुगतान तभी किया जाता है, जब प्रशिक्षित युवाओं का नियोजन सुनिश्चित हो जाता है। यह व्यवस्था प्रशिक्षण संस्थानों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देने के लिए प्रेरित करती है।

बस्तर के युवाओं तक पहुंच रहा कौशल विकास

प्रदेश के दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं तक कौशल विकास पहुंचाने के लिए बस्तर संभाग के प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर (SDC) स्थापित करने की कार्यवाही की जा रही है। जिला बीजापुर में असिस्टेंट मेसन कोर्स प्रारंभ किया जा चुका है। वहीं बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर एवं बीजापुर सहित छह पुनर्वास केंद्रों का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में पंजीयन किया गया है तथा अन्य केंद्रों को भी शीघ्र जोड़ा जा रहा है।

उद्योगों के साथ साझेवारी से बढ़ रही रोजगार क्षमता

राज्य सरकार ने उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।

महिंद्रा एंड महिंद्रा के साथ ट्रैक्टर मैकेनिक प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत अब तक 101 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं तथा 60 युवा प्रशिक्षणरत हैं।

साइरोनिक्स टेक्नोलॉजी प्रा. लि. के सहयोग से रायपुर के लाईवलीहुड कॉलेज में इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी के पांच जॉब रोल में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है।

नांदी फाउंडेशन के सहयोग से सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित महिलाओं को एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 1,142 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं।

पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में व लॉन्ड्री बैग के साथ साझेदारी कर लॉन्ड्री सुपरवाइजर एवं अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रारंभ किए गए हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में श्री सत्य साई हेल्थ एवं एजुकेशन ट्रस्ट के सहयोग से कार्डियक एवं स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित उन्नत कौशल प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए जा रहे हैं।

लाईवलीहुड कॉलेज बने कौशल विकास के सशक्त केंद्र

प्रदेश के जिलों में संचालित लाईवलीहुड कॉलेज आज युवाओं के लिए कौशल विकास का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। वर्ष 2013 से अब तक इन कॉलेजों में 68 हजार 552 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इनमें से 28 हजार 820 युवाओं को रोजगार तथा 10 हजार 632 युवाओं को स्वरोजगार प्राप्त हुआ है। इस प्रकार कुल 39 हजार 452 युवा आजीविका से जुड़ चुके हैं। वर्तमान में 2 हजार 413 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसी प्रकार पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत वर्ष 2024 से अब तक 13 हजार 188 युवाओं को लाईवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया है।

आधुनिक अधोसंरचना का विस्तार

राज्य के 26 जिलों में लाईवलीहुड कॉलेज भवन पूर्ण होकर संचालित हैं। नवीन जिलों में भी भवन निर्माण एवं भूमि आबंटन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रदेश में 26 बालिका छात्रावास तथा 20 बालक छात्रावास पूर्ण होकर संचालित हैं। शेष छात्रावासों का निर्माण एवं भूमि आबंटन कार्य प्रगति पर है।

नवा रायपुर में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।

नवा रायपुर में लाईवलीहुड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी, जहां अत्याधुनिक मशीनों, आधुनिक प्रयोगशालाओं, विशेष कार्यशालाओं तथा उद्योगों की मांग के अनुरूप इंजीनियरिंग एवं गैर-इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विश्वस्तरीय कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि लीज अनुबंध हेतु 2 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की नई विशा

विश्व युवा कौशल विकास दिवस पर छत्तीसगढ़ का अनुभव यह दर्शाता है कि कौशल विकास केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और रोजगारयुक्त बनाने का सशक्त अभियान है। नई तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योगों के साथ साझेदारी, रोजगार सुनिश्चित करने की व्यवस्था तथा आधुनिक अधोसंरचना के माध्यम से छत्तीसगढ़ वेश में कौशल विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। आने वाले वर्षों में यह पहल न केवल लाखों युवाओं के जीवन में परिवर्तन लाएगी, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की पहचान

प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। वर्ष 2025-26 में 19 कौशल ट्रेडों में आयोजित जिला एवं राज्य स्तरीय इंडिया स्किल प्रतियोगिता में 3,327 युवाओं ने भाग लिया, जिनमें से 381 प्रतिभागी राज्य स्तर तक पहुंचे। ईस्ट जोन क्षेत्रीय प्रतियोगिता, भुवनेश्वर में छत्तीसगढ़ के 38 प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 01 स्वर्ण, 02 रजत, 05 कांस्य एवं 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस सहित कुल 12 पदक अर्जित किए।

वहीं राष्ट्रीय स्तर की इंडिया स्किल प्रतियोगिता में राज्य के 03 प्रतिभागियों ने प्रतिनिधित्व किया, जिनमें से 01 प्रतिभागी ने मेडल ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं सफल आयोजन के लिए भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को प्रशस्ति पत्र से भी सम्मानित किया गया।

PM-SETU योजना को मिली बड़ी मंजूरी: देशभर के 200 आईटीआई क्लस्टरों में होगा विस्तार, ₹1,237.58 करोड़ के निवेश को स्वीकृति

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नई दिल्ली- कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सचिव देबाश्री मुखर्जी की अध्यक्षता में आज प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) की चौथी राष्ट्रीय संचालन समिति (National Steering Committee) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में महानिदेशक (DGT) दिलीप कुमार, संयुक्त सचिव मानसी सहाय ठाकुर, विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य प्रमुख हितधारक शामिल हुए।

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए समिति ने PM-SETU योजना को पायलट चरण से आगे बढ़ाकर देशभर के 200 चिन्हित आईटीआई क्लस्टरों में लागू करने की मंजूरी दे दी। अब राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी औद्योगिक क्षमता और तैयारियों के आधार पर इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू कर सकेंगे।

समिति ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए। इनमें उद्योगों की अधिक भागीदारी, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) की भूमिका बढ़ाने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने जैसे कदम शामिल हैं।

बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि ₹1,237.58 करोड़ की स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को मंजूरी देना रही। इसके तहत देश के विभिन्न राज्यों में उद्योगों की साझेदारी से आईटीआई संस्थानों का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

राज्यवार प्रमुख निवेश

ओडिशा

  • गवर्नमेंट आईटीआई बरबिल को हब बनाया गया है।

  • जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड एंकर इंडस्ट्री पार्टनर होगी।

  • प्रस्तावित निवेश: ₹240.21 करोड़

गुजरात

  • गवर्नमेंट आईटीआई सूरत को हब बनाया गया है।

  • आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया एंकर इंडस्ट्री पार्टनर होगी।

  • प्रस्तावित निवेश: ₹240.18 करोड़

तेलंगाना
तीन आईटीआई क्लस्टरों को मंजूरी दी गई है—

  • गवर्नमेंट आईटीआई ओल्ड सिटी – एंकर पार्टनर: अपोलो मेड-स्किल्स लिमिटेड (₹241.01 करोड़)

  • गवर्नमेंट आईटीआई पटानचेरू – एंकर पार्टनर: श्री सिद्धार्थ इंफ्राटेक एंड सर्विसेज (SSISPL) (₹275.24 करोड़)

  • गवर्नमेंट आईटीआई संगारेड्डी – एंकर पार्टनर: न्यूलैंड फाउंडेशन (₹240.94 करोड़)

PM-SETU योजना क्या है?

PM-SETU केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) को आधुनिक बनाना है। इस योजना के तहत उद्योगों के सहयोग से आईटीआई में आधुनिक मशीनें, बेहतर आधारभूत संरचना, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल मिल सके और रोजगार के अवसर बढ़ें।

उत्तरी-पूर्व की प्रतिभा का राष्ट्रीय मंच: इंडिया स्किल्स 2025–26 का नॉर्थ ईस्ट रीजनल कॉम्पटीशन गुवाहाटी में 19–22 जनवरी 2026 को

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भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा आयोजित इंडिया स्किल्स 2025–26 के नॉर्थ ईस्ट रीजनल कॉम्पटीशन का आयोजन 19 से 22 जनवरी 2026 तक गुवाहाटी विश्वविद्यालय, असम में किया जा रहा है। यह पहली बार है जब उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए समर्पित रीजनल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सभी आठ राज्यों की प्रतिभाएँ 26 विभिन्न कौशल श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करेंगी।

इस प्रतियोगिता का उद्घाटन 19 जनवरी 2026 को कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री, जयंत चौधरी द्वारा किया जाएगा। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) इस प्रतियोगिता का ज्ञान साझेदार और कार्यान्वयन एजेंसी है।

इंडिया स्किल्स, भारत की प्रमुख राष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता है, जो देश के सर्वश्रेष्ठ कौशल प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण और वैश्विक मानकों के अनुसार उनकी तुलना करने का एक मंच है। इस वर्ष के इंडिया स्किल्स 2025–26 साइकिल में 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 3.65 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने 63 कौशल श्रेणियों में पंजीकरण किया है।

नॉर्थ ईस्ट रीजनल प्रतियोगिता का उद्देश्य क्षेत्रीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच पर लाना, भौगोलिक और लॉजिस्टिक बाधाओं को कम करना, तथा स्थानीय कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। इस प्रतियोगिता के विजेता इंडिया स्किल्स 2025–26 के राष्ट्रीय चरण में प्रवेश करेंगे और देश के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाली प्रतिभाओं की श्रृंखला को आगे बढ़ाएंगे।


जॉब-लिंक्ड कौशल विकास का नया मंच: एमएसडीई का जन शिक्षा संस्थान सम्मेलन पुणे में 19-20 जनवरी 2026 को

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केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), भारत सरकार, 19-20 जनवरी 2026 को पुणे, महाराष्ट्र के Symbiosis Skill and Professional University के ऑडिटोरियम हॉल में दो दिवसीय जन शिक्षा संस्थान (JSS) ज़ोनल सम्मेलन एवं स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन व प्रगति समीक्षा कार्यशाला का आयोजन करेगा।

इस सम्मेलन में 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 152 जन शिक्षा संस्थानों के प्रतिनिधि, MSDE, Directorate of Jan Shikshan Sansthan (DJSS), National Institute for Entrepreneurship and Small Business Development (NIESBUD) तथा अन्य महत्वपूर्ण हितधारक शामिल होंगे।

जन शिक्षा संस्थान (JSS) योजना: एक व्यापक परिचय

JSS योजना केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे MSDE द्वारा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य गैर-शिक्षित, नव-शिक्षित, स्कूल ड्रॉपआउट और समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों को गैर-औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। योजना में विशेष रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित समूहों पर जोर दिया जाता है।

वर्तमान में 26 राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों में 294 JSS कार्यरत हैं, जो 51 NSQF-आधारित पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं और स्थानीय स्तर पर आजीविका सृजन में योगदान देते हैं।

प्रमुख आंकड़े (31 दिसंबर 2025 तक)

  • कुल 34 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण

  • जिनमें 28.3 लाख महिलाएँ शामिल

  • प्रशिक्षण मुख्य रूप से डोर-टू-डोर स्तर पर सब-सेंटर्स के माध्यम से दिया जाता है

  • विशेष रूप से अभिलाक्षित जिले, आदिवासी क्षेत्र, वामपंथी प्रभावित क्षेत्र, सीमा और दूरदराज के इलाकों में सक्रिय

पुणे सम्मेलन का उद्देश्य और मुख्य विषय

यह सम्मेलन JSS के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच होगा। सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • FY 2025–26 में भाग लेने वाले JSS की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा

  • नीति, दिशा-निर्देशों में सुधार और कार्यान्वयन चुनौतियों पर संरचित स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन

  • JSS कार्यकर्ताओं की क्षमता वृद्धि: रोजगार कौशल, उद्यमिता, आजीविका, क्रेडिट लिंकिंग और वित्तीय प्रबंधन

  • AI और डिजिटल टूल्स सहित मांग-आधारित और उभरते कौशल क्षेत्रों की पहचान

  • आधुनिक कौशल प्रयोगशालाओं का एक्सपोज़र विज़िट

  • JSS की बेहतरीन प्रथाओं और स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन

समापन सत्र और भविष्य की रूपरेखा

20 जनवरी 2026 को आयोजित वैलिडेटरी सत्र में MSDE की वरिष्ठ अधिकारी देबाश्री मुखर्जी (सचिव, MSDE) मुख्य भाषण देंगी। इस सत्र में सम्मेलन की प्रमुख सिफारिशें और निष्कर्ष तैयार किए जाएंगे, जो JSS योजना को और मजबूत बनाने में मदद करेंगे।

सरकारी दृष्टि के साथ समावेशी विकास

यह ज़ोनल सम्मेलन MSDE के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जो समुदाय आधारित कौशल विकास को और प्रभावी, गुणवत्ता पूर्ण और व्यापक बनाने के लिए किया जा रहा है। यह भारत सरकार की समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि के अनुरूप है।


PM-SETU के तहत पुणे में उद्योग परामर्श बैठक: उन्नत आईटीआई के माध्यम से भविष्य-तैयार कार्यबल की दिशा में कदम

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कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई), भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से प्रधानमंत्री कौशल एवं रोज़गार परिवर्तन उन्नत आईटीआई (PM-SETU – Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs) योजना के कार्यान्वयन के अंतर्गत 19 जनवरी 2026 को पुणे में एक प्रमुख उद्योग परामर्श बैठक का आयोजन करेगा। प्रधानमंत्री द्वारा विकसित भारत के विज़न के अनुरूप घोषित यह महत्वाकांक्षी पहल भविष्य के लिए तैयार, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परामर्श बैठक यशवंतराव चव्हाण अकादमी ऑफ़ डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन (यशदा), पुणे में आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य उद्योग की भागीदारी को प्रोत्साहित करना तथा योजना के उद्योग-नेतृत्व वाले कार्यान्वयन ढांचे के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

इस परामर्श में 50 से अधिक पात्र कंपनियाँ भाग लेंगी, जो निर्माण, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, तेल एवं गैस तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगी। बैठक की अध्यक्षता देबाश्री मुखर्जी, सचिव, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा की जाएगी। उनके साथ मनीषा वर्मा, अपर मुख्य सचिव, कौशल, रोज़गार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग, महाराष्ट्र सरकार भी उपस्थित रहेंगी। इस अवसर पर वे क्षेत्र के आईटीआई एवं उद्योगों का भी दौरा करेंगी।

PM-SETU योजना के अंतर्गत देशभर में 1,000 सरकारी आईटीआई को हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से आधुनिक बनाने का लक्ष्य है। इसके तहत 200 हब आईटीआई को उन्नत अवसंरचना और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा, जबकि 800 स्पोक आईटीआई जिलों में प्रशिक्षण की पहुँच को विस्तारित करेंगे। इस योजना में आईटीआई को सरकारी स्वामित्व लेकिन उद्योग-प्रबंधित संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे मांग-आधारित प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और बेहतर प्लेसमेंट अवसर सुनिश्चित हो सकें। क्लस्टर आधारित साझेदारी के माध्यम से उद्योग, एंकर इंडस्ट्री के साथ मिलकर प्रशिक्षण और रोज़गार से जुड़ी मज़बूत कड़ियाँ स्थापित करेगा।

अधिकारियों के अनुसार, यह परामर्श बैठक इस बात पर प्रकाश डालेगी कि PM-SETU किस प्रकार उद्योग को केवल समय-समय पर सहभागिता तक सीमित न रखते हुए, कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में निरंतर और संरचित भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करती है। क्लस्टर मॉडल के तहत उद्योग साझेदार संस्थागत शासन में प्रत्यक्ष भागीदारी कर सकेंगे, प्रशिक्षण को वास्तविक श्रम बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल सकेंगे, पाठ्यक्रम एवं शिक्षण पद्धतियों में सुधार कर सकेंगे, प्रशिक्षकों के कौशल उन्नयन में सहयोग देंगे तथा अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट तंत्र को मज़बूत बनाएंगे। इससे भर्ती लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि और उद्योग मानकों के अनुरूप जॉब-रेडी प्रतिभा की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

योजना के क्रियान्वयन की दिशा में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भी प्रारंभिक कदम उठाए गए हैं। अब तक 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रारंभिक क्लस्टरों की पहचान कर ली है और 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने राज्य स्तरीय संचालन समितियों (State Steering Committees) को अधिसूचित कर दिया है।

परामर्श बैठक के दौरान, राज्य में व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोज़गार परिणामों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उद्योग एवं संस्थागत साझेदारियों को औपचारिक रूप देने हेतु समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान भी किया जाएगा। इनमें व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय (DVET), महाराष्ट्र सरकार और FIAT इंडिया, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया, अनुदीप फ़ाउंडेशन, तथा DVET और SDN/वाधवानी के बीच साझेदारियाँ शामिल हैं।

PM-SETU भारत की कौशल यात्रा में एक निर्णायक मोड़ साबित होने जा रही है, जो सरकार और उद्योग के बीच सहयोग के स्वरूप को पुनर्परिभाषित करेगी। यह योजना उच्च गुणवत्ता वाले व्यावसायिक संस्थानों के निर्माण, भविष्य-उन्मुख पाठ्यक्रमों के विकास और उभरते क्षेत्रों के लिए सशक्त प्रतिभा पाइपलाइन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संस्थागत शासन को सुदृढ़ कर, प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र का आधुनिकीकरण कर तथा कौशल को श्रम बाज़ार की मांग से जोड़कर, यह पहल विकसित भारत के अवसरों के लिए देश के युवाओं को तैयार करने में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी।

मुंबई में उद्योग–सरकार कौशल संवाद आयोजित, पीएम-सेतु से उद्योग-संगत कौशल विकास को मिलेगा नया आयाम

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कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के साथ साझेदारी में आज ताज महल पैलेस, मुंबई में “कौशल प्रतिभा के लिए उद्योग–सरकार सहयोग को सशक्त बनाना” विषय पर एक उच्चस्तरीय उद्योग संवाद का आयोजन किया। इस संवाद की अध्यक्षता जयंत चौधरी, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री, भारत सरकार ने की। कार्यक्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य, आतिथ्य, बैंकिंग और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों के वरिष्ठ उद्योग नेताओं, विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा उद्योग-संगत कौशल ढांचे को मजबूत करने और रोजगारपरकता बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि भारत एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहाँ तीव्र तकनीकी परिवर्तन, कार्यस्थलों के बदलते स्वरूप और जनसांख्यिकीय बदलाव विभिन्न क्षेत्रों में कौशल आवश्यकताओं को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी युवा आबादी के बावजूद उद्योगों को जॉब-रेडी प्रतिभा न मिल पाना कौशल असंतुलन को दर्शाता है, जिससे उद्योग–सरकार के बीच अधिक गहन और संरचित सहयोग की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

मंत्री ने उत्कृष्टता केंद्रों (Centres of Excellence – CoEs) के लिए एक सुसंगत राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने की सरकार की महत्वाकांक्षा को रेखांकित किया, जिसमें उन्नत कौशल, उद्योग प्रासंगिकता और मापनीय रोजगार परिणामों पर विशेष ध्यान होगा। उन्होंने बताया कि CoEs को उच्च स्तरीय कौशल प्रशिक्षण, प्रशिक्षक उत्कृष्टता और पाठ्यक्रम नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो सीधे उद्योग की मांग से जुड़े होंगे।

जयंत चौधरी ने सरकार की प्रमुख पहल पीएम-सेतु (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई) का भी उल्लेख किया, जिसे आईटीआई को आधुनिक, आकांक्षी और परिणामोन्मुख संस्थानों के रूप में पुनर्स्थापित करने वाला एक परिवर्तनकारी सुधार बताया। लगभग ₹60,000 करोड़ के अनुमानित परिव्यय के साथ, पीएम-सेतु के तहत 1,000 सरकारी आईटीआई को उद्योग-संगत उत्कृष्टता केंद्रों में उन्नत किया जाएगा। इसके लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाया जाएगा, जिसमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई को जोड़कर देशभर में गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार किया जाएगा। इस योजना की एक प्रमुख विशेषता उद्योग-नेतृत्व वाली गवर्नेंस है, जिसे विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से लागू किया जाएगा। यह एसपीवी वित्तीय प्रबंधन, अवसंरचना और उपकरण विकास, निगरानी एवं मूल्यांकन, हितधारक सहभागिता और उद्योग सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मंत्री ने कहा,

“पीएम-सेतु व्यावसायिक संस्थानों के उद्योग से जुड़ने के तरीके में एक प्रणालीगत बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। पाठ्यक्रम डिजाइन, प्रशिक्षक प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट में उद्योग की भागीदारी सुनिश्चित कर हम ऐसे आईटीआई बना रहे हैं, जो घरेलू और वैश्विक श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप, प्रासंगिक और आकांक्षी हों।”

उन्होंने स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर्स (SIICs) की रणनीतिक भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जो वैश्विक गतिशीलता को समर्थन देते हैं, और उद्योग से आग्रह किया कि वे SIICs को अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले प्रशिक्षण और विदेश रोजगार के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने में सक्रिय भागीदारी निभाएं। साथ ही, उन्होंने विश्व आर्थिक मंच (WEF) के स्किल एक्सेलेरेटर में भारत की भागीदारी को हाल ही में मिली कैबिनेट मंजूरी का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे भारत की कौशल प्रणाली को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी।

परिणाम मापन और पारदर्शिता पर जोर देते हुए, मंत्री ने एम्प्लॉयबिलिटी मैट्रिक्स को एक विश्वसनीय और मानकीकृत सूचकांक बताया, जो विभिन्न क्षेत्रों में जॉब-रेडीनेस का आकलन करने में सहायक होगा। उन्होंने APAAR ID और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया, जो लचीले शिक्षण मार्ग, क्रेडिट पोर्टेबिलिटी और आजीवन कौशल उन्नयन को संभव बनाते हैं। अप्रेंटिसशिप पर बोलते हुए उन्होंने NAPS और NATS के तहत भागीदारी बढ़ाने पर सरकार के फोकस को दोहराया और इसे शिक्षा तथा रोजगार के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया।

अर्चना मयराम, आर्थिक सलाहकार, MSDE ने गोलमेज चर्चाओं की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए उद्योग की मांग और उपलब्ध कौशल के बीच बढ़ते अंतर पर प्रकाश डाला। पीएम-सेतु पर प्रस्तुति देते हुए उन्होंने कहा कि नियोक्ताओं को उपयुक्त दक्षताओं वाले उम्मीदवार ढूंढने में कठिनाई हो रही है, जबकि तीव्र तकनीकी बदलाव उद्योगों से उभरते कौशलों के प्रति निरंतर सजग रहने की अपेक्षा करता है। उन्होंने जनरेशन-ज़ेड की बदलती अपेक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे त्वरित प्रतिफल चाहते हैं और करियर स्थिरता को लेकर चिंतित रहते हैं, इसलिए कौशल को अधिक आकांक्षी बनाना, आत्मसम्मान को मजबूत करना और सार्थक रोजगार के स्पष्ट मार्ग तैयार करना आवश्यक है—जिसे पीएम-सेतु जैसी पहलें संबोधित करती हैं।

उद्योग की ओर से बी. थियागराजन, अध्यक्ष, CII ने कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में उद्योग की सह-निर्माता की भूमिका पर बल दिया और कहा कि प्रशिक्षण को कार्यस्थल की वास्तविकताओं और भविष्य के विकास क्षेत्रों के अनुरूप बनाए रखने के लिए सरकार के साथ निकट सहयोग आवश्यक है। आशंक देसाई, अध्यक्ष, मास्टेक ने नए और सहयोगात्मक कौशल मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि उभरती औद्योगिक आवश्यकताओं और तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए उद्योग, प्रशिक्षण संस्थानों और सरकार के बीच घनिष्ठ साझेदारी अनिवार्य है।

इंटरएक्टिव सत्र के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने CII और मंत्री के साथ विचार साझा किए कि विभिन्न उद्योग सरकार के साथ मिलकर कौशल विकास में कैसे योगदान दे सकते हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि समन्वित प्रशिक्षण कार्यक्रम और मजबूत प्लेसमेंट से प्रशिक्षणार्थियों के नामांकन और रोजगार अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। विचार-विमर्श का केंद्र उद्योग-नेतृत्व वाले कौशल मॉडल को सशक्त बनाना, प्रशिक्षण संस्थानों का आधुनिकीकरण, अप्रेंटिसशिप का विस्तार और श्रम-बाजार की आवश्यकताओं के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना रहा।

सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सरकार और उद्योग के बीच निरंतर सहयोग ही एक कुशल, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के निर्माण की कुंजी है, जो भारत की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूती प्रदान करेगा।

NCVET ने अदानी स्किल्स एंड एजुकेशन फाउंडेशन को अवार्डिंग बॉडी (स्टैंडर्ड) के रूप में मान्यता दी

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राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (NCVET) ने 26 नवंबर 2025 को अदानी स्किल्स एंड एजुकेशन फाउंडेशन के साथ समझौता किया, जिसके तहत इसे Awarding Body (Standard) के रूप में मान्यता दी गई और इसे पूरे भारत में क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त हुए।

इस मान्यता के तहत अदानी स्किल्स एंड एजुकेशन फाउंडेशन अब पोर्ट लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में NCVET द्वारा अनुमोदित योग्यताओं के लिए शिक्षार्थियों को प्रमाणित और मान्यता प्रदान कर सकेगा। यह पूरे देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की संरचित, जवाबदेह और गुणवत्ता-आधारित डिलीवरी सुनिश्चित करता है।

NCVET राष्ट्रीय कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में उद्योग की भागीदारी को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है। पोर्ट्स, लॉजिस्टिक्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर में विशेष विशेषज्ञता रखने वाली अदानी स्किल्स एंड एजुकेशन फाउंडेशन के साथ यह सहयोग उद्योग-संरेखित मानक, NCVET दिशानिर्देशों के अनुसार उन्नत प्रशिक्षण गुणवत्ता और शिक्षार्थियों के लिए विस्तारित अवसर प्रदान करेगा।

NCVET ने पोर्ट मैनेजमेंट डोमेन में अदानी स्किल्स एंड एजुकेशन फाउंडेशन की पहली योग्यता को मंजूरी दी है। यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में कुशल कार्यबल की आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

NCVET इस सहयोग के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षण परिदृश्य को और सशक्त बनाने और युवाओं को विश्वसनीय कौशल और राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रदान करने की उम्मीद करता है।

डीजीटी और ऑटोडेस्क के बीच साझेदारी से डिजिटल डिजाइन और ‘मेक’ कौशल को मिलेगी नई गति: आईटीआई और एनएसटीआई के प्रशिक्षकों को मिलेगा अत्याधुनिक प्रशिक्षण

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प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी), कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के अंतर्गत, और ऑटोडेस्क ने आज एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर साझेदारी की घोषणा की, जिसका उद्देश्य भारत भर के राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के फैकल्टी और प्रशिक्षकों के बीच डिजिटल डिजाइन और ‘मेक’ कौशल को बढ़ावा देना है।

इस साझेदारी का उद्देश्य प्रशिक्षकों और शिक्षकों की डिजिटल क्षमताओं को मजबूत करना, छात्रों में रोजगार कौशल को बढ़ाना और भारत के कार्यबल को आर्किटेक्चर, इंजीनियरिंग, विनिर्माण और निर्माण जैसे क्षेत्रों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।

एमओयू का आदान-प्रदान नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में किया गया, जिसमें देबाश्री मुखर्जी, सचिव, एमएसडीई; सुनील कुमार गुप्ता, उप महानिदेशक, डीजीटी; और ऑटोडेस्क के शीर्ष अधिकारी एंड्रयू एनेग्नोस्ट (सीईओ), स्टीव ब्लम (सीओओ), हारेष खुबचंदानी, और कमोलिका गुप्ता पेरेस उपस्थित थे।

ऑटोडेस्क की ‘स्टेट ऑफ डिजाइन एंड मेक रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, भारत की 52% कंपनियों ने कहा है कि एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से संबंधित कौशल भविष्य में उनकी शीर्ष भर्ती प्राथमिकता होगी। इस साझेदारी के तहत, आने वाले तीन वर्षों में कौशल विकास को एआई, उद्योग नवाचार और नए कैरियर अवसरों के अनुरूप बनाया जाएगा। ऑटोडेस्क अपने पेशेवर सॉफ्टवेयर को देशभर के 14,500 से अधिक आईटीआई और 33 एनएसटीआई के शिक्षकों और छात्रों के लिए उपलब्ध कराएगा, जिससे प्रशिक्षक लाखों युवाओं को उन्नत डिजिटल डिजाइन और विनिर्माण कौशल सिखा सकें।

सचिव, एमएसडीई देबाश्री मुखर्जी ने कहा,

“ऑटोडेस्क के साथ यह साझेदारी एनएसटीआई और आईटीआई के प्रशिक्षकों की क्षमताओं को उन्नत डिजाइन तकनीकों से सशक्त बनाएगी। यह अकादमिक शिक्षा और उद्योग प्रथाओं के बीच की खाई को पाटने में मदद करेगी, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर कुशल और तकनीकी रूप से सशक्त प्रतिभा का केंद्र बन सके।”

ऑटोडेस्क के अध्यक्ष और सीईओ एंड्रयू एनेग्नोस्ट ने कहा,

“भारत को कुशल प्रतिभा के वैश्विक नेता के रूप में उभरते देखना गर्व की बात है। डीजीटी के साथ हमारी साझेदारी शिक्षकों और छात्रों को डिजिटल उपकरणों और उद्योग से जुड़ी सीख प्रदान करने के लिए है। जैसे-जैसे एआई डिजाइन और विनिर्माण को बदल रहा है, वैसे-वैसे एआई-तैयार प्रतिभा की मांग भी बढ़ रही है। यह सहयोग भारत के कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को भविष्य के अवसरों के लिए तैयार करेगा।”

इस पहल के तहत संयुक्त रूप से शैक्षिक कार्यक्रमों, पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षण गतिविधियों का विकास किया जाएगा, जिसमें ऑटोडेस्क की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग होगा।

यह सहयोग स्किल इंडिया मिशन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और व्यावसायिक प्रशिक्षण में डिजिटल डिजाइन तकनीक को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

About DGT (प्रशिक्षण महानिदेशालय)

डीजीटी, एमएसडीई के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय निकाय है, जो भारत में व्यावसायिक प्रशिक्षण की नीति, मानक और समन्वय का दायित्व संभालता है। देशभर में 14,500+ आईटीआई, 33 एनएसटीआई और आईटीओटी संस्थानों के माध्यम से यह 23 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान करता है।
डीजीटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3डी प्रिंटिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे नई पीढ़ी के ट्रेड्स में प्रशिक्षण को भी प्रोत्साहित कर रहा है।

About Autodesk (ऑटोडेस्क)

ऑटोडेस्क विश्वभर के डिजाइनरों, इंजीनियरों और निर्माताओं को डिजाइन और मेक प्लेटफॉर्म के माध्यम से समर्थ बनाता है। यह सॉफ्टवेयर कंपनी शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर छात्रों और शिक्षकों को निःशुल्क पहुंच, प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करती है।


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