Media24Media.com: #VikasBhiVirasatBhi

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #VikasBhiVirasatBhi. Show all posts
Showing posts with label #VikasBhiVirasatBhi. Show all posts

कोल्हापुर में अमित शाह का संबोधन: सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकास के नए युग की शुरुआत

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज महाराष्ट्र के कोल्हापुर में आयोजित ‘धन्यवाद सभा’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कई ऐसे कार्य पूरे किए हैं जिन्हें कभी असंभव माना जाता था। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम का पुनर्विकास तथा सोमनाथ मंदिर का स्वर्ण अलंकरण भारत की सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जागरण के प्रतीक हैं।

अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर को मिली नई गति

अमित शाह ने कहा कि अब कोल्हापुर स्थित माता अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर के निर्माण कार्य की शुरुआत भी इसी सांस्कृतिक पुनर्जागरण का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र के साथ देशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का विकास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र का व्यापक पुनर्विकास किया जा रहा है। यह परियोजना 28 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में विकसित की जाएगी।

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा मंदिर परिसर

परियोजना के तहत मंदिर परिसर में AI आधारित सुरक्षा प्रणाली, LED लाइटिंग, हेरिटेज वॉक, लाइट एंड साउंड शो, बहुउद्देश्यीय सभागार, अन्नछत्र, पुलिस स्टेशन और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही आसपास स्थित 41 छोटे-बड़े प्राचीन मंदिरों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में ये 12 वर्ष विकास, सांस्कृतिक जागरण, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के रूप में याद किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने ग्रामीण विकास, शहरी विकास, कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने, सेमीकंडक्टर, क्वांटम इंजीनियरिंग, डेटा सेंटर और नई तकनीकों के क्षेत्र में भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया है। साथ ही चंद्रयान-3 की सफलता और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ‘शिव शक्ति पॉइंट’ की स्थापना को भारत के गौरव का प्रतीक बताया।

मुख्य बातें

  • कोल्हापुर में अमित शाह ने ‘धन्यवाद सभा’ को किया संबोधित।

  • अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर परियोजना को बताया सांस्कृतिक पुनर्जागरण का हिस्सा।

  • ₹1,500 करोड़ की लागत से होगा मंदिर और आसपास के क्षेत्र का विकास।

  • मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाओं और हेरिटेज संरक्षण पर विशेष जोर।

  • मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का उल्लेख।


विकास भी, विरासत भी के मंत्र से त्रिपुरा ने विकास की तेज़ रफ्तार पकड़ी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र को आत्मसात करने से त्रिपुरा ने अपने विकास सफर में तेज़ रफ्तार हासिल की है और राज्य निरंतर नई उपलब्धियाँ दर्ज कर रहा है।

प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे, जिसमें उन्होंने त्रिपुरा के अपने हालिया दौरे के अनुभव साझा किए थे।मंत्री सिंधिया ने अपने आलेख में राज्य की बदलती तस्वीर, तेज़ी से उभरती विकास क्षमता और अपार संभावनाओं को विस्तार से रेखांकित किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि त्रिपुरा आज न केवल आधुनिक अवसंरचना, औद्योगिक विकास और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, बल्कि साथ-साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और पहचान को भी सहेजते हुए आगे बढ़ रहा है। यह संतुलित दृष्टिकोण राज्य के समग्र और सतत विकास को नई दिशा दे रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा:

“‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए त्रिपुरा विकास की तेज़ रफ्तार पकड़ चुका है और हर दिन नई-नई उपलब्धियाँ दर्ज कर रहा है। केंद्रीय मंत्री @JM_Scindia जी ने त्रिपुरा प्रवास के अपने अनुभवों को साझा करते हुए राज्य की बदलती तस्वीर और अपार संभावनाओं के बारे में विस्तार से बताया है। पढ़िए उनका यह आलेख…”

प्रधानमंत्री का यह संदेश इस बात को रेखांकित करता है कि कैसे आधुनिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को साथ लेकर चलने की नीति से त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्य देश के विकास मानचित्र पर नई पहचान बना रहे हैं।


प्रधानमंत्री ने असम को दी बड़ी सौगात: काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमि पूजन, विकास और संरक्षण का अद्भुत संगम

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम के कालियाबोर में लगभग ₹6,950 करोड़ की लागत से बनने वाले काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना (एनएच-715 के कालियाबोर–नुमालीगढ़ खंड के 4-लेनिंग कार्य) का भूमि पूजन किया। इस अवसर पर विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों के स्नेह और आशीर्वाद के लिए आभार व्यक्त किया तथा कहा कि काजीरंगा की यात्रा हमेशा उन्हें विशेष आनंद और आत्मीयता से भर देती है।

प्रधानमंत्री ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में अपने पूर्व प्रवास को याद करते हुए कहा कि यहां बिताया गया समय उनके जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक रहा है। हाथी सफारी के दौरान उन्होंने काजीरंगा की प्राकृतिक सुंदरता को बहुत निकट से अनुभव किया था। उन्होंने असम को वीरों की धरती बताते हुए कहा कि यहां के लोग हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में गुवाहाटी में आयोजित बागुरुंबा द्वौ उत्सव का उल्लेख करते हुए कहा कि 10,000 से अधिक कलाकारों की ऊर्जा, खाम की लय और सिफुंग की मधुर ध्वनि ने पूरे देश को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने बोडो समाज की बेटियों सहित सभी कलाकारों को इस ऐतिहासिक प्रस्तुति के लिए बधाई दी और सोशल मीडिया व मीडिया के योगदान की भी सराहना की।

विकास भी, विरासत भी का सशक्त उदाहरण

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम में लगातार हो रहे विकास कार्य सरकार के “विकास भी, विरासत भी” के संकल्प को सशक्त करते हैं। उन्होंने हाल ही में गुवाहाटी एयरपोर्ट के नए टर्मिनल और नामरूप में अमोनिया-यूरिया संयंत्र की आधारशिला का भी उल्लेख किया।

कालियाबोर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह वही भूमि है जहां से वीर योद्धा लाचित बोरफुकन ने मुगलों के विरुद्ध रणनीति बनाई थी। आज वही कालियाबोर आधुनिक कनेक्टिविटी और विकास का केंद्र बन रहा है।

काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर: पर्यावरण और प्रगति का संतुलन

प्रधानमंत्री ने बताया कि 86 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में 35 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर शामिल है, जिससे वाहन ऊपर से गुजरेंगे और नीचे वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही बनी रहेगी। यह परियोजना गैंडों, हाथियों और बाघों के पारंपरिक मार्गों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा, सड़क सुरक्षा बढ़ेगी और यात्रा समय घटेगा।

यह परियोजना नागांव, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट जिलों से होकर गुजरेगी तथा अपर असम, विशेषकर डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया की कनेक्टिविटी को मजबूती देगी। जाखलबंधा और बोकाखाट में बाइपास निर्माण से शहरी यातायात सुगम होगा और लोगों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर होगी।

रेल कनेक्टिविटी को नई गति

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई—गुवाहाटी (कामाख्या)–रोहतक और डिब्रूगढ़–लखनऊ (गोमती नगर)। इसके साथ ही गुवाहाटी–कोलकाता वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की घोषणा भी की गई। इन सेवाओं से उत्तर पूर्व और उत्तर भारत के बीच संपर्क मजबूत होगा, व्यापार, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले वर्षों में असम के लिए रेल बजट में पांच गुना वृद्धि की गई है, जिससे नई रेल लाइनें, दोहरीकरण और विद्युतीकरण संभव हुआ है।

प्रकृति संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों से 2025 में एक भी गैंडे के अवैध शिकार की घटना नहीं हुई, जो असम की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने “वन दुर्गा” जैसी पहलों और आधुनिक निगरानी व्यवस्था की सराहना की। साथ ही कहा कि प्रकृति के संरक्षण से पर्यटन बढ़ा है और स्थानीय युवाओं को होमस्टे, गाइड सेवा और हस्तशिल्प के माध्यम से रोजगार मिल रहा है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम और पूरा उत्तर पूर्व अब विकास की मुख्यधारा में मजबूती से जुड़ चुका है। काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं यह प्रमाण हैं कि भारत आज दुनिया को दिखा रहा है कि अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी साथ-साथ आगे बढ़ सकती हैं। अंत में उन्होंने असमवासियों को इन ऐतिहासिक परियोजनाओं के लिए बधाई दी।

इस अवसर पर असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, पबित्र मार्गेरिटा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

विशेष लेख-सशक्त मानसिकता से आत्मनिर्भरता की ओर- पोषण निर्माण में अहम भूमिका निभा रही हैं सूरजपुर की महिलाएं

No comments Document Thumbnail

रायपुर- आर्थिक रूप से सशक्तिकरण की नींव सशक्त मानसिकता पर आधारित होती है। दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास व्यक्ति को सफलता की दिशा में आगे बढ़ाते हैं। सूरजपुर जिले की स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने इस सोच को व्यवहार में उतारते हुए आत्मनिर्भरता की एक सशक्त मिसाल प्रस्तुत की है। ये महिलाएं न केवल स्वयं सशक्त बन रही हैं, बल्कि जिले की महिलाओं एवं बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के अभियान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

पोषण और महिलाओं का सशक्तिकरण दोनों होता है

पोषण आहार (रेडी-टू-ईट या RTE) निर्माण संयंत्र सरकार द्वारा संचालित ऐसी इकाइयाँ हैं, जो आंगनवाड़ियों और अन्य योजनाओं के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरी बालिकाओं के लिए पौष्टिक, पहले से तैयार भोजन बनाती हैं, जिसे महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) द्वारा चलाया जाता है, जिससे पोषण और महिलाओं का सशक्तिकरण दोनों होता है, जिसमें गेहूं, दालें, और दूध जैसे घटक शामिल होते हैं, जो प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। 

स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नमकीन दलिया तथा मीठा शक्ति आहार का निर्माण 

जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तत्काल उपभोग हेतु तैयार पोषण आहार (रेडी टू ईट) निर्माण संयंत्र का शुभारंभ किया गया है। इन संयंत्रों में स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नमकीन दलिया तथा मीठा शक्ति आहार का निर्माण किया जा रहा है, जो विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘डी’, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, पाइरीडॉक्सिन, फोलिक अम्ल, कोबालामिन, लोह तत्व (आयरन), कैल्शियम एवं जिंक जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर है।

तीनों संयंत्रों में 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से पोषण आहार निर्माण कार्य में संलग्न

जिले प्रशासन द्वारा जिले में कुल 07 पोषण आहार निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए है। यहां वर्तमान में भैयाथान, प्रतापपुर एवं सूरजपुर विकासखंड में तीन संयंत्रों का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। इन तीनों संयंत्रों में 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से पोषण आहार निर्माण कार्य में संलग्न हैं। निर्मित पोषण आहार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को निःशुल्क प्रदान किया जा रहा है। इस प्रकार स्व-सहायता समूहों की महिलाएं मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण में अप्रत्यक्ष किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इस सम्बन्ध में महत्वपूर्ण बात है कि पोषण आहार के निर्माण के साथ-साथ उसके वितरण की भी जिम्मेदारी भी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपी गई है।

भैयाथान विकासखंड में 15 स्व-सहायता समूह

सूरजपुर विकासखंड में 15 स्व-सहायता समूह तथा प्रतापपुर विकासखंड में 13 स्व-सहायता समूह सक्रिय रूप से वितरण कार्य में अपनी भूमिका निभा रही है। इन समूहों के माध्यम से कुल 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार वितरण कार्य में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इस योजना से महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। मानसिक रूप से सशक्त ये महिलाएं अब घरेलू कार्यों के साथ-साथ आजीविका से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह पहल न केवल निश्चित रूप से जिले में पोषण स्तर सुधारने में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.