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लाल किला मैदान से गूंजा जनजातीय गौरव का स्वर

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राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले – जनजातीय समाज दुनिया को सिखा सकता है प्रकृति संग विकास

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर राष्ट्रीय समागम में देशभर से जुटे हजारों जनजातीय प्रतिनिधि

जनजातीय भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण पर मुख्यमंत्री ने दिया विशेष जोर

जनजातीय समाज भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप - मुख्यमंत्री साय 

नई दिल्ली- देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री केदार कश्यप एवं रामविचार नेताम भी उपस्थित थे। 

कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में  लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान  मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

समाज में न्याय और समानता की प्रेरणा देता रहेगा बाबा साहेब का जीवन : मुख्यमंत्री

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रायपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 21 फीट ऊंची प्रतिमा का भव्य अनावरण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर के सामने स्थित डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर चौक में उनकी 21 फीट ऊंची पंचधातु से निर्मित भव्य प्रतिमा का अनावरण किया।

इस अवसर पर आयोजित गरिमामय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समानता की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के नेतृत्व और उनके द्वारा निर्मित भारतीय संविधान ने वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाया है। उनके विचार आज भी समाज को न्याय और समानता की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाते हैं।

मुख्यमंत्री ने आयोजन समिति की मांग पर मंगल भवन, सामुदायिक भवन सहित विभिन्न निर्माण एवं जीर्णोद्धार कार्यों के लिए 60 लाख रुपये की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह राशि स्थानीय स्तर पर सामाजिक गतिविधियों और जनसुविधाओं को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार प्रदान किया है। इसी कारण आज समाज के सभी वर्गों को अपने जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि बाबा साहेब ने विपरीत परिस्थितियों में भी कोलंबिया विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त कर यह सिद्ध किया कि शिक्षा ही समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम है।

उन्होंने कहा कि आज देश के प्रत्येक कोने में बाबा साहेब की प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो उनके प्रति लोगों के अटूट सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक हैं। रायपुर सहित पूरे प्रदेश में उनकी जयंती हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है, जिससे नई पीढ़ी निरंतर प्रेरणा प्राप्त कर रही है।

मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण पर बाबा साहेब के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी समाज की प्रगति वहां की महिलाओं की स्थिति से आंकी जाती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार बाबा साहेब के सपनों को साकार करने की दिशा में कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का माध्यम बन रही हैं। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” के लक्ष्य के साथ छत्तीसगढ़ सरकार भी “विकसित छत्तीसगढ़” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है, जिसमें बाबा साहेब के आदर्श मार्गदर्शक हैं।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करते हुए सामाजिक समरसता, समानता और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री खुशवंत साहेब, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक किरण सिंह देव, महापौर नगर पालिक निगम रायपुर मीनल चौबे, विधायक पुरंदर मिश्रा,  अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प: समरसता भोज में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

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संविधान हमारे लोकतंत्र की आत्मा है और समरसता उसकी सबसे बड़ी शक्ति - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के शंकरनगर स्थित दुर्गा मैदान में डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर   आयोजित समरसता भोज कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने जनप्रतिनिधियों और आमजन के साथ बैठकर भोजन किया तथा स्वयं लोगों को भोजन परोसकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसके संविधान का निर्माण करने का गौरव बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यह संविधान देश के 140 करोड़ नागरिकों को समानता, अधिकार और गरिमा के साथ जीवन जीने का आधार प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने दृढ़ संकल्प और अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर उच्चतम स्थान प्राप्त किया और समाज के वंचित, शोषित एवं कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने नारी शिक्षा और सम्मान के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और माता सावित्रीबाई फुले द्वारा प्रारंभ किए गए नारी शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के अभियान को बाबा साहेब ने आगे बढ़ाया और उसे नई दिशा दी।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बाबा साहेब के जन्म, शिक्षा, दीक्षा, कार्य और समाधि स्थलों को “पंच तीर्थ” के रूप में विकसित कर उन्हें सच्चा और स्थायी सम्मान दिया जा रहा है। 

इस अवसर पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समरसता का प्रेरक उदाहरण है। उनके विचार आज भी समाज को समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। समरसता भोज जैसे आयोजन सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक किरण सिंह देव ने कहा कि बाबा साहेब ने संविधान के माध्यम से समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने की मजबूत व्यवस्था दी। आज मुख्यमंत्री साय और के नेतृत्व में अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

समरसता भोज कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा,  छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित  थे।

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ फिलाटेलिक प्रदर्शनी का आयोजन, डाक टिकटों के जरिए दिखाई गई भारत की एकता और लोकतंत्र की झलक

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नई दिल्ली- भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा प्रधानमंत्री संग्रहालय के सहयोग से “एक भारत, श्रेष्ठ भारत: डाक टिकटों के माध्यम से भारत की एकता और लोकतंत्र का उत्सव” शीर्षक से भव्य फिलाटेलिक प्रदर्शनी का आयोजन 14 से 17 अप्रैल 2026 तक किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने किया।

उद्घाटन के बाद  ज्योतिरादित्य एम. सिंधियाने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और वहां उपस्थित डाक टिकट संग्राहकों (फिलाटेलिस्ट), डिजाइनरों और विशेषज्ञों से संवाद किया। उन्होंने भारत की समृद्ध डाक विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने में उनके योगदान की सराहना की।

डाक टिकटों में दिखी भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत

इस प्रदर्शनी में भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक घटनाओं और डाक परंपराओं को दर्शाने वाले डाक टिकटों का विशेष संग्रह प्रदर्शित किया गया है।
इसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े विषय प्रमुख आकर्षण हैं, जो दर्शकों को एक ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव प्रदान करते हैं।

केंद्रीय मंत्री का संबोधन

अपने संबोधन में  ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि यह आयोजन डाक विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने प्रधानमंत्री संग्रहालय की टीम को सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि स्वतंत्रता से लेकर अमृत काल और आगे शताब्दी काल तक भारत की यात्रा में डाक विभाग की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और आगे भी बनी रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि डाक विभाग और संग्रहालय मिलकर देशभर में ऐसी प्रदर्शनी आयोजित करेंगे, जिससे भारत की समृद्ध विरासत को और व्यापक रूप से प्रस्तुत किया जा सके।

विशेष चित्र पोस्टकार्ड जारी

इस अवसर पर तीन विशेष चित्र पोस्टकार्ड सेट जारी किए गए, जो निम्न अवसरों को समर्पित हैं:

  • प्रधानमंत्री संग्रहालय का चौथा स्थापना दिवस

  • डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल 2026)

  • भारतीय संविधान

 एमओयू के जरिए सहयोग को नई दिशा

कार्यक्रम के दौरान डाक विभाग और प्रधानमंत्री संग्रहालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते का उद्देश्य सांस्कृतिक और डाक विरासत को बढ़ावा देना है। इसके तहत देशभर में प्रदर्शनी, जागरूकता कार्यक्रम और संयुक्त रूप से डाक उत्पाद तैयार किए जाएंगे। साथ ही संग्रहालय में इंडिया पोस्ट का विशेष काउंटर स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है।

प्रधानमंत्री पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन

अपने दौरे के दौरान  ज्योतिरादित्य एम. सिंधियाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें उनके जीवन, नेतृत्व और प्रमुख योजनाओं को प्रदर्शित किया गया है।

निष्कर्ष

यह फिलाटेलिक प्रदर्शनी न केवल भारत की डाक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है, बल्कि देश की एकता, लोकतंत्र और विविधता को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है। यह पहल ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

आंबेडकर जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश: सामाजिक समरसता और शिक्षा पर दिया जोर

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गांधीनगर- द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को गुजरात के गांधीनगर स्थित लोक भवनमें आयोजित ‘सामाजिक समरसता महोत्सव’ में भाग लिया। यह कार्यक्रम डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकरकी जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति ने बाबासाहेब को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने देश के विकास और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बहुआयामी योगदान दिए हैं। उन्होंने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि आंबेडकर केवल एक महान विधिवेत्ता ही नहीं, बल्कि एक कुशल अर्थशास्त्री और समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने बैंकिंग, सिंचाई, बिजली, श्रम प्रबंधन और केंद्र-राज्य संबंधों जैसे क्षेत्रों में भी अहम योगदान दिया।

उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बाबासाहेब ने हमेशा शिक्षा को सशक्त समाज की नींव माना। संविधान में शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया है और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे समाज के कमजोर वर्गों को शिक्षा के प्रति जागरूक करें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।

सामाजिक समरसता पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि करुणा और समानता समाज की एकता के मूल आधार हैं। उन्होंने कहा कि जब लोग जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर एकता और भाईचारे की भावना अपनाते हैं, तभी सच्ची सामाजिक समरसता स्थापित होती है। उन्होंने कहा कि भारत के सभी नागरिक एक हैं और देश की प्रगति के लिए एकजुट रहना आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने गुजरात में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों—जैसे वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, पशुपालन और कृषि विकास—की सराहना भी की।

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने डॉ. आंबेडकर के उस संदेश को याद किया, जिसमें उन्होंने सामाजिक लोकतंत्र को जीवन का आधार बताते हुए स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को उसके मूल तत्व बताया था।

निष्कर्ष

राष्ट्रपति के इस संबोधन ने डॉ. आंबेडकर के विचारों और उनके आदर्शों को पुनः जीवंत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा, समानता और सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलकर ही एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत का निर्माण संभव है।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के बाद सामुदायिक पावर हाउस के रूप में जाने जाएंगे सिद्दी पहलवान

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सिद्दी समुदाय के पहलवानों ने जीते तीन स्वर्ण और एक रजत पदक

रायपुर- 'प्रतिभा को किसी परिचय की जरूरत नहीं होती'- यह कहावत 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स- 2026' में सच साबित हुई, जहां कर्नाटक के 'सिद्दी समुदाय' के पहलवानों ने मैट पर अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है। उनकी यह सफलता अब सिर्फ़ पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय के कुश्ती के क्षेत्र में एक ताकत के तौर पर उभरने का प्रतीक है। अफ़्रीकी मूल के भारत में लगभग 50,000 सिद्दी लोग रहते हैं, जिनमें से एक-तिहाई कर्नाटक में निवास करते हैं।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में कर्नाटक के 9 पहलवानों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 4 सिद्दी समुदाय से थे। इन चार पहलवानों में से तीन ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि एक को रजत पदक मिला। स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवानों में मनीषा जुआवा सिद्दी (76 किग्रा), रोहन एम डोड़ामणि (ग्रीको रोमन 60 किग्रा) और प्रिंसिता पेदरू फर्नांडिस सिद्दी   (68 किग्रा) शामिल हैं जबकि शालिना सेयर सिद्दी (57 किग्रा) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

इन पहलवानों की सफलता न सिर्फ उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी कहती है, बल्कि कुश्ती जैसे खेलो में सिद्दी समुदाय के बढ़ते वर्चस्व को भी दिखाता है। कर्नाटक के इन चारों पहलवानों का दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल हुआ था और वहां भी ये पहले नंबर पर रहे थे। 

सिद्दी समुदाय के प्रदर्शन से कर्नाटक कुश्ती टीम की कोच ममता बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं।

ममता ने कहा, ''जैसे हमारे देश में कुश्ती में हरियाणा का दबदबा है तो ठीक वैसे ही हमारे राज्य में अहलियाल क्षेत्र का कुश्ती में वर्चस्व रहता है। राज्य में डिपार्टमेंट ऑफ यूथ एंड डेवलपमेंट एंड सेंटर मुख्य रूप से इन्हीं सिद्दी समुदाय के लिए है। इनके बच्चे यहीं पर ट्रेनिंग करते  हैं। पिछले कुछ समय से इस समुदाय के लोगों के अंदर कुश्ती का क्रेज बढ़ा है और वे अब अपने बच्चों को कुश्ती में भेजने लगे हैं।

उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले से आने वाले पुरुष पहलवान रोहन एम. डोड़ामणि भी इसी समुदाय से आते हैं। डोड़ामणि की मां सरकारी स्कूल में खाना पकाती हैं जबकि पिता का छह साल पहले ही देहांत हो चुका है।

रोहन ने कहा, “सिद्दी समुदाय के अंदर समय-समय पर छोटे दंगल होते रहते हैं और जो इनमें जीतता है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया जाता है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में स्वर्ण जीतने से पहले मैं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी भाग ले चुका हूं।''

देश में खिलाड़ियों के अंदर छिपी प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें एक बेहतर मंच देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय ने मिलकर 2018 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स की शुरुआत की थी। उसके बाद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत हुई है। 

साई के टैलेंट डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य महा सिंह राव कहते हैं, '' साई और खेल मंत्रालय की तरफ से हम कम उम्र के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करते हैं ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो सपना है कि 2036 ओलंपिक खेल भारत में हो, उस सपने को साकार करने के लिए ये सरकार की रणनीति का एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री के अलावा खेल मंत्री, साई और हम इस सपने को साकार करने में लगे हुए हैं कि आगे आने वाले ओलंपिक खेलों में हम ज्यादा से ज्यादा मेडल जीते।''

उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से आने वाली शालिना सेयर सिद्दी ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने के बाद कहा, ''हमारे समुदाय में कुश्ती को लेकर अब लोग दिलचस्पी लेने लगे हैं। मैंने अपने अंकल के कहने पर कुश्ती शुरू की थी और शुरू से ही वह मुझे ट्रेनिंग देते आ रहे हैं। मैंने इस प्रतियोगिता के लिए मेहनत तो पूरी की थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और मैं स्वर्ण जीतने से चूक गई।'' 

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से ही आने वाली प्रिंसिता सिद्दी ने कहा, ''शुरुआत में मुझे कुश्ती में दिलचस्पी नहीं थी और मैं बहुत रोई थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे जब हमारे समुदाय के बच्चे इसमें भाग लेने लगे तो उन्हें देखकर मैं भी प्रैक्टिस करने लगी। यहां तक पहुंचने के लिए मैं शाम-सुबह दो-दो घंटे प्रैक्टिस करती हूं। मुझे इंटरनेशनल लेवल पर मेडल लाना है और इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं।''

इन पहलवानों की सफलता इस बात को सिद्ध करती है कि जब सही मंच, ट्रेनिंग और सपोर्ट मिलता है, तो दूरदराज के समुदायों से भी प्रतिभाएं शिखर तक पहुंच सकती हैं और भारत के खेल भविष्य को आकार दे सकती हैं।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ पहुंचना शुरू

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अरुणाचल के वेटलिफ्टरों का विमानतल पर रंगारंग स्वागत 

रायपुर- खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में भागीदारी के लिए खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ पहुंचना शुरू हो गया है। आज सवेरे अरुणाचल प्रदेश के वेटलिफ्टरों का 14 सदस्यीय दल रायपुर पहुंचा। इनमें 13 खिलाड़ी और एक सपोर्टिंग स्टॉफ शामिल है।

खिलाड़ियों के छत्तीसगढ़ आगमन पर रायपुर के स्वामी विवेकानंद विमानतल पर राऊत नाचा दल की रंगारंग प्रस्तुतियों के बीच खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा साई (SAI) के अधिकारियों ने गुलाब भेंटकर सभी खिलाड़ियों का हार्दिक स्वागत किया। 23 मार्च को कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खिलाड़ी बड़ी संख्या में रायपुर पहुंचेंगे।

देश में पहली बार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ के तीन शहरों - रायपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर में किया गया है। इसमें देशभर के करीब तीन हजार जनजातीय खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। 25 मार्च से 3 अप्रैल तक छत्तीसगढ़वासियों को सात खेलों में रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। इस दौरान पुरूष और महिला वर्गों में हॉकी, फुटबॉल, कुश्ती, एथलेटिक्स, तैराकी, तीरंदाजी और वेटलिफ्टिंग की प्रतियोगिताएं होंगी।


सरहुल उत्सव जनजातीय संस्कृति की विशिष्ट धरोहर, इसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर के दीपू बगीचा में आयोजित पारंपरिक सरहुल महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धरती माता, सूर्य देव एवं साल वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा और समृद्ध फसल की कामना की। सरहुल की पारंपरिक रस्म के तहत पूजा कराने वाले बैगा द्वारा मुख्यमंत्री के कान में सरई (साल) फूल खोंचकर शुभ आशीष प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने जिलेवासियों को सरहुल उत्सव एवं हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरहुल महोत्सव सदियों से प्रकृति, धरती और जीवन के संतुलन का प्रतीक रहा है। बैगा, पाहन एवं पुजारी द्वारा की जाने वाली पूजा-अर्चना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन मूल्यों की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि यह पर्व जनजातीय समाज की समृद्ध सभ्यता और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जिसे सहेजकर रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की जनता से किए गए वादों को तेजी से पूरा कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 25 किश्तों में 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी किए जा चुके हैं, जिससे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। वहीं 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में प्रस्तुत धर्म स्वातंत्र्य विधेयक भी सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा।

उल्लेखनीय है कि सरहुल परब चैत्र माह में मनाया जाने वाला उरांव समुदाय का प्रमुख पर्व है, जो प्रकृति के नवजीवन और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है। इस पर्व में धरती माता और सूर्य देव के प्रतीकात्मक विवाह के साथ सामूहिक पूजा की जाती है। सरना स्थल पर पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना, प्रसाद वितरण और लोकनृत्य-गीतों के माध्यम से सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ किया जाता है। घर-घर सरई फूल और पवित्र जल का वितरण कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजी 100 से अधिक महिलाओं एवं युवतियों की टोली ने मनमोहक सरहुल नृत्य प्रस्तुत किया। मांदर की गूंजती थाप और उत्साह से भरे वातावरण ने पूरे परिसर को जनजातीय संस्कृति के रंग में रंग दिया, जहां जनसैलाब उमड़ पड़ा और उत्सव का उल्लास चरम पर रहा।

इस अवसर पर अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट, विधायक गोमती साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में किए दर्शन, ‘राम राज्य’ के आदर्श पर दिया जोर

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अयोध्या- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर का दौरा किया और राम लला के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में विभिन्न स्थलों पर पूजा-अर्चना और आरती की तथा श्री राम यंत्र स्थापना एवं पूजन भी किया।

यह पावन अवसर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नव संवत्सर 2083 के आरंभ और नवरात्रि के प्रथम दिन के रूप में विशेष महत्व रखता है।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या की पवित्र भूमि पर आना उनके लिए “सर्वोच्च सौभाग्य” है। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक अवसरों—जैसे भूमि पूजन, प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार के उद्घाटन और मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण—को भारत की संस्कृति और इतिहास के स्वर्णिम क्षण बताया।

अपने संबोधन में उन्होंने ‘राम राज्य’ की अवधारणा पर विशेष बल देते हुए कहा कि यह आदर्श समाज आर्थिक समृद्धि, सामाजिक समानता और नैतिक मूल्यों पर आधारित होता है। गोस्वामी तुलसीदास के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राम राज्य में कोई भी व्यक्ति दुखी, वंचित या असहाय नहीं होता।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य, भगवान श्रीराम के आशीर्वाद और नागरिकों की एकजुटता से अवश्य प्राप्त होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में इस समय आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो रहा है, और सभी नागरिकों को एकता, भाईचारे और समर्पण के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।

यह दौरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान और विकसित राष्ट्र के संकल्प को भी दर्शाता है।


अबूझमाड़ की धरती से देश-दुनिया को दिया जा रहा है अमन और शांति का मजबूत संदेश: मुख्यमंत्री साय

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अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन: शांति, विश्वास और विकास का सामूहिक दौड़

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारायणपुर में अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन को दिखाई हरी झंडी

10 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने लगाई दौड़, आत्मसमर्पित नक्सली भी बने आयोजन का हिस्सा

रायपुर- अबूझमाड़ की पावन धरती से शांति, सद्भाव और विकास का सशक्त संदेश देते हुए आज अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 2026 का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अलसुबह नारायणपुर के हाईस्कूल परिसर के समीप आयोजित हाफ मैराथन सहभागिता की और धावकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा सांकेतिक रूप से स्वयं भी दौड़ लगाई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विजयी प्रतिभागियों को प्रदान किए जाने वाले मैडल का अनावरण भी किया। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज अबूझमाड़ की धरती से पूरे देश और दुनिया को अमन और शांति का मजबूत संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह वही अबूझमाड़ है, जहाँ कभी आम नागरिकों और जवानों का पहुँचना भी कठिन था, लेकिन आज सकारात्मक वातावरण के कारण हजारों लोग यहाँ एकत्रित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में माओवाद से मुक्ति की दिशा में युवा वर्ग का जोश और उत्साह यह संकेत दे रहा है कि जल्द ही यह क्षेत्र खुशियों से आबाद होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार की नीतियों और नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है और बस्तर लाल आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा। उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में लगे सुरक्षा बलों के अधिकारियों एवं जवानों के अदम्य साहस और पराक्रम को नमन करते हुए कहा कि उन्हीं के बलिदान और समर्पण से आज बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की मजबूत नींव पड़ी है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में बस्तर क्षेत्र में 351 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है तथा नए विकास कार्यों की घोषणा भी की गई है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र पिछले चार दशकों से विकास से वंचित रहा, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा और बस्तर में विकास की गंगा निरंतर बहेगी। उन्होंने सम्पूर्ण बस्तर और छत्तीसगढ़ को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के सरकार के संकल्प को दोहराया।

उल्लेखनीय है कि यह 21 किलोमीटर लंबी हाफ मैराथन नारायणपुर से बासिंग तक आयोजित की गई, जिसमें देश-विदेश से आए 60 से अधिक विदेशी प्रतिभागियों सहित बस्तर संभाग, प्रदेश एवं अन्य राज्यों के 10 हजार से अधिक धावकों ने भाग लिया। मैराथन से पूर्व हाईस्कूल परिसर में जुंबा वॉर्मअप कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों प्रतिभागियों ने एक साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता की। 

आत्मसर्पित माओवादी बने मैराथन का हिस्सा

इस आयोजन की सबसे विशेष और ऐतिहासिक बात यह रही कि आत्मसमर्पित माओवादी युवाओं ने भी हथियार छोड़कर शांति और मुख्यधारा में लौटने का संदेश देते हुए मैराथन में हिस्सा लिया। नारायणपुर की अबूझमाड़िया जनजाति सहित स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी बनाया।

कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक केदार कश्यप, जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा, बस्तर सांसद महेश कश्यप, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, वैद्यराज पद्मश्री हेमचंद मांझी, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी पी. सुंदरराज, कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक राबिनसन गुरिया, जिला सीईओ आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

भारत पर्व 2026 में ऐतिहासिक लाल किले पर आंध्र प्रदेश दिवस का उत्सव

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नई दिल्ली-भारत पर्व 2026 के अवसर पर, जो ऐतिहासिक लाल किला में आयोजित किया गया, 30 जनवरी 2026 को आंध्र प्रदेश दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक, कलात्मक और पर्यटन विरासत का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला।

भारत पर्व, जिसे पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के रूप में आयोजित किया जाता है, एक भव्य राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करता है। यह मंच एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संस्कृति, पर्यटन, व्यंजन, हस्तशिल्प और विरासत को प्रदर्शित करता है।

आंध्र प्रदेश पवेलियन इस अवसर का प्रमुख आकर्षण रहा, जिसमें थीम-आधारित पर्यटन प्रदर्शन, पारंपरिक फूड कोर्ट और अद्भुत हैंडलूम प्रदर्शनी शामिल थे। आगंतुकों ने राज्य की ऐतिहासिक विरासत, कलात्मक परंपराओं और रचनात्मक उत्कृष्टता का प्रत्यक्ष अनुभव किया।

आंध्र प्रदेश दिवस का एक प्रमुख आकर्षण कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य का भव्य प्रदर्शन था, जिसमें 46 विशिष्ट कलाकारों ने भाग लिया। इस प्रस्तुति में आंध्र प्रदेश के शास्त्रीय नृत्य की सौम्यता, विलक्षणता और आध्यात्मिक गहराई जीवंत हो उठी। प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और राज्य की गहन सांस्कृतिक धरोहर और शास्त्रीय कला के संरक्षण के प्रति समर्पण को प्रतिबिंबित किया।

भारतीय संस्कृति के प्रशंसक, पर्यटक और उत्सव में शामिल आगंतुक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, कलाकारों को प्रोत्साहित किया और इस राष्ट्रीय मंच पर आंध्र प्रदेश के गौरव में सहभागी बने।

भारत पर्व 2026 में आंध्र प्रदेश दिवस का आयोजन भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता की ताकतवर अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, और इस उत्सव की भूमिका को सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में मजबूत किया।



भारत पर्व में IHM रांची की झारखंडी पाक और सांस्कृतिक विरासत ने बिखेरी ग्लोबल छवि

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नई दिल्ली-ऐतिहासिक लाल किला में आयोजित भारत पर्व 2026 में अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान का जीवंत पल देखने को मिला, जब ब्राज़ीलियाई नागरिक ने इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (IHM) रांची के स्टॉल का दौरा किया और झारखंड की समृद्ध पाक और सांस्कृतिक विरासत में गहरी रुचि दिखाई।

IHM रांची के छात्रों ने मेहमान का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें झारखंडी व्यंजन, पारंपरिक भोजन प्रथाएँ, देशज सामग्री और राज्य की रंगीन सांस्कृतिक परंपराओं से अवगत कराया। उन्होंने भारत पर्व की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जो पूरे देश की विविध संस्कृतियों, व्यंजनों और परंपराओं को एक मंच पर लाकर "विविधता में एकता" और वैश्विक सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।

शेफ हरे कृष्ण चौधरी, जो IHM रांची का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने विशेष रूप से झारखंडी भोजन पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारतीय खाद्य परंपराओं के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय व्यंजन स्थानीय भूगोल, जलवायु और जनजातीय विरासत से गहराई से प्रभावित होते हैं और झारखंडी व्यंजन भारत की समृद्ध पाक विविधता का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत पर्व जैसे आयोजन सांस्कृतिक और पाक कूटनीति के माध्यम से भारत की सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं।

ब्राज़ीलियाई अतिथि ने छात्रों और फैकल्टी की आतिथ्य भावना, ज्ञान और प्रस्तुति की सराहना की, और झारखंडी व्यंजन की सरलता, पोषण और सांस्कृतिक गहराई की प्रशंसा की। यह बातचीत सांस्कृतिक कूटनीति का उत्कृष्ट उदाहरण बनी और भारत पर्व के उद्देश्य को मजबूत किया कि भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को वैश्विक दर्शकों तक पहुँचाया जाए।

स्किल स्टूडियो गतिविधियों के तहत, शेफ हरे कृष्ण चौधरी ने लाइव कुकिंग डेमोंस्ट्रेशन में पारंपरिक झारखंडी व्यंजन धुस्का के साथ आलू चना सब्जी प्रस्तुत किया। इस व्यंजन को आगंतुकों और खाद्य प्रेमियों से खूब सराहना मिली। डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से उन्होंने यह दिखाया कि झारखंडी व्यंजन सरल, पौष्टिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हैं, और कैसे देशज सामग्री एवं पारंपरिक पकाने की तकनीकें सतत और समुदाय-केंद्रित खाद्य प्रथाओं को दर्शाती हैं।

यह प्रस्तुति न केवल झारखंड की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को बढ़ावा देती है, बल्कि IHM रांची के स्किल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी उजागर करती है। आगंतुकों ने व्यंजन के स्वाद, प्रस्तुति और सांस्कृतिक कहानी कहने के तरीके की तारीफ की, जिससे झारखंडी भोजन भारत पर्व का यादगार आकर्षण बन गया।

भारत पर्व 2026 में IHM रांची की भागीदारी यह पुष्टि करती है कि संस्थान क्षेत्रीय व्यंजनों के संरक्षण और प्रचार के प्रति प्रतिबद्ध है और छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव प्रदान करता है। स्किल स्टूडियो में शेफ हरे कृष्ण चौधरी की उपस्थिति ने संस्थान की भारत की विविध पाक विरासत को प्रमुख मंचों पर प्रस्तुत करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।




वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष: राजीव चौक में भारतीय वायु सेना बैंड की देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति

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 भारत देश अपने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मना रहा है। इस अवसर पर सामूहिक गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सैन्य बैंड प्रस्तुतियों का आयोजन देश के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर किया जा रहा है। इन आयोजनों का उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय गौरव, एकता और देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना है।

इन्हीं समारोहों के अंतर्गत 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राजीव चौक स्थित एम्फीथिएटर में भारतीय वायु सेना (IAF) बैंड द्वारा एक भव्य संगीतमय प्रस्तुति दी गई। 31 संगीतकारों से युक्त इस बैंड ने लगभग 45 मिनट की प्रस्तुति में ब्रास, रीड, स्ट्रिंग और इलेक्ट्रॉनिक वाद्ययंत्रों के संयोजन से 11 मनमोहक धुनें प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में ‘वंदे मातरम्’ की भावपूर्ण प्रस्तुति तथा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के पराक्रम को समर्पित गीत ‘सिंदूर’ शामिल रहे।

सदियों से संगीत भारतीय संस्कृति का एक अमूल्य रत्न रहा है और यह भारत की समृद्ध सैन्य परंपरा का भी अभिन्न अंग है, जो एकता को प्रोत्साहित करता है और वीरता की प्रेरणा देता है। वर्ष 1944 में स्थापना के बाद से भारतीय वायु सेना बैंड, भारतीय और पाश्चात्य संगीत के अपने विविध संग्रह के माध्यम से देश की सैन्य परंपराओं का सशक्त प्रतीक बना हुआ है।

भारतीय वायु सेना बैंड का उद्देश्य अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से देशवासियों में देशभक्ति की भावना को जागृत करना और राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है।


पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन, राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित स्मरणोत्सव के द्वितीय चरण के अंतर्गत वंदे मातरम् का सामूहिक गायन आयोजित किया। यह द्वितीय चरण 19 जनवरी 2026 से 26 जनवरी 2026 तक मनाया जा रहा है।


कार्यक्रम का नेतृत्व मंत्रालय के सचिव तनय कुमार ने किया। इस अवसर पर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली स्थित मंत्रालय परिसर में एकत्रित हुए और भावपूर्ण स्वर में राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया। इस आयोजन की गूंज पूरे परिसर में देशभक्ति का वातावरण लेकर आई। मंत्रालय के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में भी इसी प्रकार के सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने उन कालजयी पंक्तियों के प्रति सामूहिक श्रद्धा व्यक्त की, जिन्होंने पिछले 150 वर्षों से पीढ़ियों को प्रेरित किया है।

यह आयोजन भारत सरकार द्वारा अनुमोदित उस व्यापक राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है।


राष्ट्रीय विद्यालय बैंड प्रतियोगिता 2026: जोनल स्तर का समापन, ग्रैंड फिनाले के लिए 16 टीमें चयनित

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गणतंत्र दिवस समारोह 2026 के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय विद्यालय बैंड प्रतियोगिता का जोनल स्तर सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इसके अंतर्गत देश भर से 16 टीमों का चयन किया गया है, जो 24 जनवरी 2026 को नेशनल बाल भवन, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले भव्य फाइनल में अपनी प्रस्तुति देंगी।

इन 16 टीमों का चयन पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण—चारों जोनों से किया गया है। प्रत्येक जोन से ब्रास बैंड बॉयज़, ब्रास बैंड गर्ल्स, पाइप बैंड बॉयज़ और पाइप बैंड गर्ल्स—चार श्रेणियों में एक-एक टीम को फाइनल के लिए चुना गया है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य देशभर के स्कूली बच्चों में देशभक्ति, एकता और अनुशासन की भावना को प्रोत्साहित करना है।

ग्रैंड फिनाले के लिए चयनित 16 टीमें

ब्रास बैंड (लड़के)

  1. सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, लुपुंगुटु, चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम – झारखंड (पूर्व)

  2. संजीवनी सैनिक स्कूल एवं जूनियर कॉलेज, कोपरगांव – महाराष्ट्र (पश्चिम)

  3. सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, कानपुर रोड, लखनऊ – उत्तर प्रदेश (उत्तर)

  4. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, पेरिये, कासरगोड – केरल (दक्षिण)

ब्रास बैंड (लड़कियां)

  1. होली क्रॉस हाई स्कूल, कारबुक, गोमती – त्रिपुरा (पूर्व)

  2. डॉन बॉस्को हाई स्कूल एवं जूनियर कॉलेज, मुंबई – महाराष्ट्र (पश्चिम)

  3. सेंट जोसेफ कॉलेज, आशियाना, लखनऊ – उत्तर प्रदेश (उत्तर)

  4. प्रोविडेंस गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल, कोझिकोड – केरल (दक्षिण)

पाइप बैंड (लड़के)

  1. कैराली स्कूल, एचईसी टाउनशिप, रांची – झारखंड (पूर्व)

  2. श्री स्वामीनारायण गुरुकुल कुमार विद्यालय, गिर सोमनाथ – गुजरात (पश्चिम)

  3. गवर्नमेंट बॉयज़ सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बदली – दिल्ली (उत्तर)

  4. द ग्रेट इंडिया सैनिक स्कूल, रायपुर – छत्तीसगढ़ (दक्षिण)

पाइप बैंड (लड़कियां)

  1. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, कांके, रांची – झारखंड (पूर्व)

  2. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, सूरतगढ़ – राजस्थान (पश्चिम)

  3. गवर्नमेंट सर्वोदय कन्या विद्यालय, पालम कॉलोनी – दिल्ली (उत्तर)

  4. पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, एएससी सेंटर, बेंगलुरु – कर्नाटक (दक्षिण)

पुरस्कार एवं मूल्यांकन

प्रत्येक श्रेणी में शीर्ष तीन टीमों को नकद पुरस्कार, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे—

  • प्रथम पुरस्कार: ₹51,000

  • द्वितीय पुरस्कार: ₹31,000

  • तृतीय पुरस्कार: ₹21,000

शेष टीम को ₹11,000 का सांत्वना पुरस्कार दिया जाएगा। प्रस्तुतियों का मूल्यांकन रक्षा मंत्रालय द्वारा नियुक्त जूरी करेगी, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना के सदस्य शामिल होंगे।

आयोजन एवं भागीदारी

यह प्रतियोगिता रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की जा रही है। इसके प्रथम चरण में सीबीएसई, आईसीएसई, केवीएस, एनवीएस, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय, पीएम-श्री और सैनिक स्कूलों सहित सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के विद्यालयों ने भाग लिया।

इस वर्ष प्रतियोगिता में उत्साह और भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

  • 763 स्कूल बैंड टीमों ने राज्य स्तर पर भाग लिया

  • इनमें से 94 टीमें जोनल स्तर के लिए चयनित हुईं

  • जोनल स्तर पर 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की 80 टीमों के 2,217 बच्चों ने हिस्सा लिया

यह प्रतियोगिता देशभर के विद्यार्थियों में अनुशासन, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और सशक्त बनाने का एक प्रभावशाली मंच बन रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा के स्थापना दिवस पर दी शुभकामनाएं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पूर्वोत्तर भारत के तीन राज्यों—मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा—के स्थापना दिवस के अवसर पर वहां के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने क्षेत्र के सभी भाई-बहनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि अपने निरंतर प्रयासों के बल पर वे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करें।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर निरंतर परिश्रम और प्रगति की भावना को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया। यह श्लोक सतत प्रयास के महत्व को रेखांकित करता है और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है।

साझा किया गया संस्कृत श्लोक है—

“चरैवेति चरैवेति चरन्वै मधु विन्दति।
सूर्यास्य पश्य श्रेमाणं न मामार न जीर्यति॥”

इस श्लोक का भावार्थ है कि जो व्यक्ति निरंतर आगे बढ़ता रहता है, वही प्रगति की मधुरता का अनुभव करता है। जैसे सूर्य बिना थके निरंतर प्रकाश देता रहता है, वैसे ही सतत परिश्रम से ही सफलता प्राप्त होती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा कि उत्तर पूर्व के ये तीनों राज्य आज अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं और इस अवसर पर उन्होंने वहां के नागरिकों को ढेरों शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री के इस संदेश से न केवल पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों में उत्साह का संचार हुआ, बल्कि निरंतर प्रयास और विकास के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिली।

देशभक्ति गीतों से गुंजा चरौदा,बच्चों ने गाया बैंड के ध्वनि के साथ वंदेमातरम् गीत

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आरंग- वंदेमातरम् गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर देश भर में सामूहिक रूप से वंदे मातरम् गीत गायन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।इसी कड़ी में डीआईजी अजय कुमार सिंह सीआरपीएफ कैंप ग्रुप केंद्र भिलाई रायपुर के निर्देशन में मंगलवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में कैंप के जवानों की बैंड टीम द्वारा वंदे मातरम् गीत का सस्वर गायन किया गया।जो बच्चों, शिक्षको व ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। संस्था के नवाचारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया 

बैंड की सुमधुर ध्वनि के साथ वन्दे मातरम् गीत गायन से बच्चों में गजब का उत्साह दिखा। बच्चे उत्साहित होकर भारत माता की जय, वंदे मातरम् का उद्घोष करते नजर आए। वंदेमातरम् गीत गायन कार्यक्रम के संयोजन में  इंस्पेक्टर यू बी चतुर्वेदी, एएसआई हेमराज और हवलदार सोमपाल ने अहम् भूमिका निभाया।इस अवसर पर संस्था प्रमुख के के परमाल, सरपंच देवशरण धीवर,उप सरपंच रवि बंजारे, संतोष कोसरिया, रेत कलाकार हेमचंद साहू ने वंदे मातरम कार्यक्रम में शामिल होकर बच्चों और जवानों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने किया। उक्त कार्यक्रम के आयोजन संयोजन में शिक्षक सूर्यकांत चन्द्राकार, दीनदयाल धीवर,डिलेश्वर साहू,सुशील कुमार आवडे, जीतेंद्र यदु,शिक्षिका संगीता पाटले, प्रभा साहू, पार्वती साहू ने सहभागिता निभाई।

वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर राज्यभर में द्वितीय चरण के कार्यक्रम 19 से 26 जनवरी तक

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26 जनवरी को रायपुर में राज्यपाल तथा जगदलपुर में मुख्यमंत्री के आतिथ्य में होंगे विशेष आयोजन

व्यापक जनभागीदारी के साथ ग्राम पंचायत, जनपद, जिला एवं राज्य स्तर पर कार्यक्रमों का होगा आयोजन

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर राज्यभर में चार चरणों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसके तहत द्वितीय चरण में कार्यक्रमों का आयोजन 19 से 26 जनवरी 2026 तक किया जाएगा। 

गणतंत्र दिवस के दिन रायपुर में राज्यपाल तथा जगदलपुर में मुख्यमंत्री के आतिथ्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे। साथ ही राज्य के सभी जिला मुख्यालयों, ब्लॉक मुख्यालयों, ग्राम पंचायतों तथा स्कूल-कॉलेजों में ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के पश्चात बड़े पैमाने पर सामूहिक वंदे मातरम् गायन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में मंत्रीगण, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि, स्थानीय अधिकारी, प्रमुख हस्तियां और नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

द्वितीय चरण में 19 से 26 जनवरी तक राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में एनसीसी, एनएसएस, स्काउट एवं गाइड की सहभागिता के साथ वंदे मातरम् से संबंधित संगीतमय प्रस्तुतियाँ, विशेष सभाएँ, निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण, रंगोली, चित्रकला एवं प्रदर्शनी आयोजित की जाएंगी। राज्य पुलिस बैंड द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम् एवं देशभक्ति गीतों पर आधारित प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी।

सार्वजनिक एवं निजी सहभागिता के तहत प्रदेश में वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ स्थापित किए जाएंगे, जहां नागरिक अपनी आवाज में वंदे मातरम् का गायन रिकॉर्ड कर अभियान के पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल पर वंदे मातरम् की पूर्व रिकॉर्डेड धुन के साथ गायन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। 

उल्लेखनीय है कि प्रथम चरण का आयोजन 7 से 14 नवंबर 2025 को सफलतापूर्वक किया जा चुका है। वही तृतीय चरण 7 से 15 अगस्त 2026 को हर घर तिरंगा अभियान के साथ संचालित किया जाएगा एवं चतुर्थ चरण का आयोजन 1 से 7 नवंबर 2026 को किया जाएगा। भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह आयोजन ग्राम पंचायत, जनपद, जिला एवं राज्य स्तर पर व्यापक जनभागीदारी के साथ कार्यक्रमों को संपन्न कराया जाएगा, जिसका उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रगीत के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना है।

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