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नागपुर बनेगा ग्रीन सिटी: 25 लाख पेड़ लगाने का ऐलान, नितिन गडकरी ने विकास परियोजनाओं की दी जानकारी

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नागपुर। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर को देश के सबसे हरित शहरों में शामिल करने के उद्देश्य से शहर और जिले में 25 लाख पेड़ लगाने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत स्कूलों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और अन्य संस्थाओं को 2 से 3 मीटर ऊंचाई वाले पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और संरक्षण कार्य किया जा सके।

नागपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए गडकरी ने केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों और विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के सभी जिलों और तहसीलों की मैपिंग रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से की जाएगी तथा जिन जिलों ने बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया है, उन्हें विशेष सम्मान दिया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 58 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए हैं। आयुष्मान भारत योजना से 60 करोड़ लोगों को लाभ मिला है, जबकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 11 करोड़ एलपीजी कनेक्शन वितरित किए गए हैं। वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 11 करोड़ किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही है।

रोजगार सृजन के क्षेत्र में उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत लगभग 35 लाख करोड़ रुपये के ऋण 57 करोड़ लाभार्थियों को दिए गए हैं। स्टार्टअप इंडिया अभियान के तहत 1.6 लाख स्टार्टअप और 118 यूनिकॉर्न विकसित हुए हैं। इसके अलावा स्किल इंडिया मिशन के माध्यम से लगभग 5 करोड़ युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

नागपुर के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए गडकरी ने कहा कि कॉटन मार्केट, इतवारी मार्केट, ऑरेंज मार्केट, नेताजी मार्केट, कमल चौक कॉम्प्लेक्स और कई अन्य बाजारों के आधुनिकीकरण और पुनर्विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं। इसके अलावा नागपुर मेट्रो के दूसरे चरण का कार्य प्रगति पर है, जबकि तीसरे चरण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है।

उन्होंने यह भी बताया कि ऑक्सीजन पार्क, बर्ड पार्क, एम्स, आईआईएम, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, आईआईआईटी, बुद्धिस्ट सर्किट प्रोजेक्ट और दीक्षाभूमि पुनर्विकास जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शहर के विकास को नई दिशा दे रही हैं।

परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में गडकरी ने कहा कि प्रस्तावित नागपुर-हैदराबाद एक्सप्रेसवे बनने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा समय घटकर लगभग साढ़े तीन घंटे रह जाएगा। वहीं नागपुर का इंदोरा-दिघोरी फ्लाईओवर अंतिम चरण में है और इसे 1 अगस्त 2026 से आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।


स्वच्छता पखवाड़ा 2026: देशभर में स्वच्छता और जनजागरूकता की नई मिसाल, DBT के अभियान को मिली बड़ी सफलता

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नई दिल्ली- स्वच्छ भारत मिशन को नई गति देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने 1 मई से 15 मई 2026 तक देशव्यापी स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का सफल आयोजन किया। इस दौरान नई दिल्ली स्थित विभागीय मुख्यालय के साथ-साथ सभी स्वायत्त संस्थानों और सार्वजनिक उपक्रमों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया।

पखवाड़े की शुरुआत 1 मई को नई दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह से हुई, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वच्छ, स्वस्थ और जिम्मेदार भारत के निर्माण का संकल्प लिया। इस अवसर पर स्वच्छता को केवल एक अभियान नहीं बल्कि जन आंदोलन बनाने का संदेश दिया गया।

स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस

पंद्रह दिनों तक चले इस अभियान में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वास्थ्य जांच शिविर, पर्यावरण जागरूकता व्याख्यान, हस्ताक्षर अभियान, वृक्षारोपण कार्यक्रम, सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता अभियान, तनाव प्रबंधन कार्यशालाएं और विभिन्न सेमिनारों के माध्यम से लोगों को स्वच्छ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके अलावा "वेस्ट टू वेल्थ" प्रतियोगिता ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया, जिसमें बेकार वस्तुओं को उपयोगी उत्पादों में बदलने की कला को बढ़ावा दिया गया। जूट बैग वितरण और लकड़ी के पैकिंग मटेरियल से आकर्षक गमले तैयार करने जैसी गतिविधियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

स्कूलों और समुदायों तक पहुंचा अभियान

स्वच्छता पखवाड़ा केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहा। आसपास के सरकारी स्कूलों में शौचालयों और कक्षाओं के नवीनीकरण का कार्य किया गया। विद्यार्थियों के बीच निबंध, कविता और स्लोगन लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित कर स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई।

साथ ही प्रयोगशाला अपशिष्ट प्रबंधन (Laboratory Waste Management) पर विशेष व्याख्यान आयोजित कर वैज्ञानिक संस्थानों में सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणालियों को बढ़ावा दिया गया।

जनभागीदारी और श्रमदान को मिला बढ़ावा

अभियान के दौरान जल संरक्षण, स्वच्छता और श्रमदान को बढ़ावा देने वाली कई गतिविधियां आयोजित की गईं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों, वैज्ञानिकों, छात्रों और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर स्वच्छ भारत मिशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

सर्वश्रेष्ठ संस्थानों को मिला सम्मान

पखवाड़े के दौरान किए गए कार्यों की समीक्षा वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार की गई। विभिन्न गतिविधियों और नवाचारों के आधार पर तीन संस्थानों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए चुना गया।

स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के विजेता संस्थान:

🥇 BRIC - National Institute of Animal Biotechnology (NIAB)

🥈 BRIC - National Agri-Food Biotechnology Institute (NABI)

🥉 BRIC - Institute of Bioresources and Sustainable Development (IBSD)

इन संस्थानों को 2 जून 2026 को आयोजित एक विशेष समारोह में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव द्वारा सम्मानित किया गया।

देश को दिया स्वच्छता और जिम्मेदारी का संदेश

DBT के इस अभियान ने यह साबित किया कि स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से सफल होने वाला राष्ट्रीय आंदोलन है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने में यह पखवाड़ा एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है।

मुख्य बिंदु:

✅ 1 से 15 मई तक चला स्वच्छता पखवाड़ा 2026
✅ देशभर के DBT संस्थानों में व्यापक आयोजन
✅ वृक्षारोपण, स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
✅ स्कूलों में स्वच्छता और शिक्षा सुधार की पहल
✅ वेस्ट टू वेल्थ और प्लास्टिक मुक्त भारत पर विशेष जोर
✅ NIAB, NABI और IBSD बने सर्वश्रेष्ठ संस्थान

किसान स्कूल बहेराडीह में विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘सीड बॉल अभियान’ का शुभारंभ

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जांजगीर-चांपा- पौधरोपण और हरित आवरण बढ़ाने के लिए सीड बॉल एक सरल, सस्ता और प्रभावी माध्यम है। केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहकर सीड बॉल निर्माण और वितरण के माध्यम से अधिक से अधिक हरित क्षेत्र विकसित करने का प्रयास किया जाना चाहिए। यह बात चांपा एसडीएम पवन कोसमा ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल, बहेराडीह में आयोजित ‘सीड बॉल अभियान’ के शुभारंभ कार्यक्रम में कही।

उन्होंने कहा कि सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अभिनव पहल है, जो कम लागत और कम श्रम में अधिक पौधारोपण को संभव बनाती है। इस अवसर पर तहसीलदार प्रशांत पटेल ने कहा कि वर्ष 1973 से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है और बहेराडीह स्थित देश के पहले किसान स्कूल में इसे ‘सीड बॉल अभियान’ से जोड़कर अनोखे तरीके से मनाया गया है।

बलौदा जनपद पंचायत के संचार एवं संकर्म सभापति चूड़ामणि राठौर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। बढ़ती जनसंख्या, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के कारण प्रकृति का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। वहीं, सिवनी संकुल के शैक्षिक समन्वयक एवं शिक्षक अशोक तिवारी ने 100 से अधिक पौधों के रोपण का अपना अनुभव साझा करते हुए लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया।

सीड बॉल लेकर किसान स्कूल पहुंचे प्रकृति प्रेमी

अभियान में सिवनी की रुखमणि पाण्डेय, शर्मीला गोस्वामी, धुरकोट की धनबाई राजन, आरसेटी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही बिहान की कृषि सखियां एवं पशु सखियां, स्व-सहायता समूह की महिलाएं और बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी सीड बॉल लेकर किसान स्कूल पहुंचे।

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव एवं रामाधार देवांगन ने बताया कि जिले में पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर किसान स्कूल के माध्यम से लोगों को सीड बॉल वितरित किए गए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली बढ़ाने की शपथ भी दिलाई गई।

आरसेटी के अरुण पाण्डेय ने सीड बॉल की उपयोगिता बताते हुए कहा कि यह मिट्टी, गोबर अथवा कम्पोस्ट और बीजों से तैयार की गई छोटी गोल गेंद होती है। इन्हें बंजर भूमि, पहाड़ी क्षेत्रों, जंगलों के किनारों और खाली स्थानों पर फेंका जा सकता है। वर्षा होने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं। इस प्रक्रिया में गड्ढा खोदने या विशेष देखभाल की आवश्यकता बहुत कम होती है।

कार्यक्रम के दौरान वुशू खिलाड़ी संघ सिवनी की टीम ने किसान स्कूल को ब्रह्म कमल का पौधा भेंट किया। इस टीम में महासचिव गुलाबचंद यादव, अध्यक्ष प्रीतम दास महंत, व्यवस्थापक अविनाश मांझी, संस्थापक रीता धीवर, उपाध्यक्ष रितिका सिंह, सह सचिव ममता देवांगन सहित अन्य खिलाड़ी शामिल थे।

इस अवसर पर मितानिन रामबाई यादव, लक्ष्मीन यादव, भगवती यादव, सक्रिय महिला ललिता यादव, पशु सखी पुष्पा यादव, आरबीके साधना यादव, कृषि सखी अंजू साहू, बीना यादव, धनबाई राजन, रुखमणि पाण्डेय, शर्मीला गोस्वामी सहित सक्ती एवं जांजगीर-चांपा जिले की कृषि सखियां, पशु सखियां, मितानिन, क्रेडर्स तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

Kisaan School : किसान स्कूल में 5 जून से शुरू होगा सीड बॉल अभियान,सब्जी, फल फूल के बीजों से वितरण के लिए बनाई जा रही सीड बॉल

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जांजगीर-चाम्पा- जिले के एक छोटे से गांव बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल, जहां पर बनाई जा रही सब्जी, फल फूल की बीजों की सीड बॉल, जिसका वितरण लोगों को 5 जून को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर किया जाएगा और सीड बॉल अभियान का शुभारम्भ किया जाएगा. इस अभियान में किसान, स्कूली बच्चे, बिहान की दीदियां, सामाजिक संगठन के लोग और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे.


इस सम्बन्ध में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का एक सरल एवं प्रभावी माध्यम है. वर्षा ऋतु में सीड बॉल अभियान चलाकर बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जा सकता है. इस अभियान का शुभारम्भ 5 जून को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर सुबह 10 बजे वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह से किया जाएगा. किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि सीड बॉल बनाने के लिए उपजाऊ मिट्टी, गोबर या वर्मी कम्पोस्ट, सब्जी, फल या फूल की बीज और पानी जरुरत होती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले 5 भाग मिट्टी 2 भाग गोबर या वर्मी कम्पोस्ट आवश्यक मात्रा में बीज का मिश्रण करके गेंद बनाकर दो दिन छाया में सुखाना होता है और बारिश के मौसम में खेत, जंगल, पहाड़ी या खाली भूमि पर फेकना होता है. इसके लिए नीम, आम, जामुन, तेन्दु, करंज, गुलमोहर, इमली, मुनगा, व अन्य बीज शामिल कर सकते हैं. 

पर्यावरण में सीड बॉल का महत्व

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि पर्यावरण में सीड बॉल का बहुत ही बड़ा महत्व है. जैसे वनों की वृद्धि, मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण, वायु शुद्धिकरण, जलवायु परिवर्तन नियंत्रण, कम लागत एवं आसान तकनीक आदि शामिल है, वहीं इसके लाभ के बारे में बताया कि पौधों की सुरक्षा बढ़ती है. पक्षियों और चीटियों से बीज सुरक्षित रहतीं है. पानी की कम आवश्यकता, सूखे क्षेत्रो में भी उपयोगी, सामूहिक अभियान में आसान उपयोग कर सकते हैं. 

क्या है सीड बॉल...

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि यह एक छोटी गेंद होती है, जिसे मिट्टी, गोबर वर्मी कम्पोस्ट और बीज मिलाकर बनाई जाती है. इसका उपयोग पौधों और पेड़ों के बिजों को सुरक्षित तरीके से उगाने के लिए किया जाता है. बारिश होने पर यह गेंद धीरे धीरे गल जाती है और बीज अंकुरित होकर पौधा बन जाता है. इसे सीड बम भी कहा जाता है. यह प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण की एक सरल एवं कम लागत वाली तकनीक है.

भारत वैश्विक वन क्षेत्र में 9वें स्थान पर पहुंचा: पर्यावरण संरक्षण में बड़ी उपलब्धि

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भारत ने वैश्विक पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा बाली में जारी ग्लोबल फॉरेस्ट रिसोर्सेज असेसमेंट (GFRA) 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब कुल वन क्षेत्र के मामले में दुनिया में 9वें स्थान पर पहुंच गया है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की।

पिछले मूल्यांकन में भारत 10वें स्थान पर था। इसके अलावा, भारत ने वार्षिक वन क्षेत्र वृद्धि के मामले में भी दुनिया में अपना तीसरा स्थान बनाए रखा है, जो सतत वन प्रबंधन और पारिस्थितिक संतुलन के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह उल्लेखनीय प्रगति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों की सफलता को रेखांकित करती है, जो वन संरक्षण, वृक्षारोपण और समुदाय आधारित पर्यावरणीय कार्रवाई पर केंद्रित हैं।

प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान और पर्यावरण चेतना पर उनके लगातार जोर ने देशभर के लोगों को वृक्षारोपण और संरक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया है।

यह बढ़ती जनभागीदारी हरित और सतत भविष्य के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत कर रही है। मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि मोदी सरकार की योजनाओं, नीतियों, वन संरक्षण और विस्तार के प्रयासों तथा राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रमों का परिणाम है।

गांधी जयंती पर एनआईएन, पुणे में विशेष कार्यक्रम

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आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने दी श्रद्धांजलि, किया पुस्तक विमोचन और वृक्षारोपण

राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान (एनआईएन), पुणे ने केन्द्रीय संचार ब्यूरो (सीबीसी) के सहयोग से गांधी जयंती मनाई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव शामिल हुए।

प्रतापराव जाधव ने संस्थान परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और गांधी संग्रहालय का अवलोकन किया। सीबीसी की टीम ने गांधी भजनों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर एनआईएन की निदेशक डॉ. के. सत्यलक्ष्मी ने संस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं, शोध कार्यों और जनजागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी।

मुख्य संबोधन में  प्रतापराव जाधव ने कहा कि महात्मा गांधी जीवनभर प्राकृतिक चिकित्सा के समर्थक रहे। उन्होंने नागरिकों से प्राकृतिक चिकित्सा और योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की और कहा कि यही राष्ट्रपिता को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

समारोह में महात्मा गांधी के विचारों पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया तथा येवलेवाड़ी परिसर में वृक्षारोपण भी हुआ।


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