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बदलते बस्तर की तस्वीर: पर्यटन से विकास की नई राह

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प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प, होमस्टे और इको-टूरिज्म से स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिल रहा विस्तार

बस्तर में पर्यटन संभावनाओं का नया अध्याय

रायपुर- छत्तीसगढ़ का बस्तर अब अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। कभी नक्सलवाद और हिंसा के संदर्भ में चर्चा में रहने वाला यह क्षेत्र आज अपनी प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और आतिथ्य के कारण पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। बदलते वातावरण के साथ बस्तर में पर्यटन, इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के नए अवसर आकार ले रहे हैं।

बस्तर की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर एवं कैलाश गुफाएं, मां दंतेश्वरी मंदिर, दलपत सागर और बस्तर पैलेस जैसे स्थल पर्यटकों को प्रकृति, रोमांच, अध्यात्म और इतिहास का अनूठा अनुभव देते हैं। यहां आने वाला पर्यटक केवल दर्शनीय स्थल नहीं देखता, बल्कि स्थानीय जीवन, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और संगीत से भी जुड़ता है। यही कारण है कि बस्तर को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव आधारित पर्यटन के एक विशिष्ट क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। 

कनेक्टिविटी से खुल रहे विकास के नए रास्ते

पर्यटन के विस्तार के लिए बेहतर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण आधार है। बस्तर में सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने के प्रयास पर्यटन की संभावनाओं को नई गति दे रहे हैं। ‘बस्तर 2.0’ ब्लूप्रिंट में 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव दूरस्थ क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट बस्तर को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में रायपुर और हैदराबाद के लिए हवाई संपर्क उपलब्ध है। वहीं रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना जैसी योजनाएं भविष्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की संभावनाएं रखती हैं। बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ केवल पर्यटकों को ही नहीं मिलेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार, ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर संपर्क और युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

होमस्टे से गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ

बस्तर में ग्रामीण और जनजातीय होमस्टे पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बन है। छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के साथ रहकर ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक खान-पान का अनुभव देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

होमस्टे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पर्यटन का आर्थिक लाभ सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंच रहा है। पर्यटकों के ठहरने के साथ भोजन, स्थानीय गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से आसपास के अन्य परिवारों के लिए भी आय के अवसर बन रहे हैं।

बस्तर में नए कमरे के निर्माण पर प्रति कमरा 1 लाख रुपये और पूर्व से निर्मित कमरे के नवीनीकरण पर प्रति कमरा 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है। न्यूनतम एक से अधिकतम नौ कमरों तक सहायता की व्यवस्था से ग्रामीण परिवार अपनी क्षमता के अनुसार पर्यटन गतिविधियों से जुड़ सकते हैं। वर्तमान में 85 हितग्राहियों को अनुदान हेतु बैंको को प्रस्ताव भेजी जा चुका है तथा 27 होमस्टे पूर्व से छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ पंजीकृत हैं। 

संस्कृति बनी पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत

बस्तर की जनजातीय संस्कृति उसकी सबसे बड़ी विशिष्टताओं में शामिल है। बेलमेटल और धातु शिल्प, लकड़ी एवं बांस की कला, पारंपरिक आभूषण, नृत्य, संगीत और खान-पान देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इस सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच दे रहे हैं। वर्ष 2026 के बस्तर पंडुम में जनजातीय संस्कृति की 12 विधाओं को मंच मिला और लगभग 55 हजार आदिवासी लोगों की सहभागिता हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर दिया। 

आस्था से लेकर एडवेंचर तक पर्यटन की विविध संभावनाएं

बस्तर में धार्मिक, सांस्कृतिक, इको और एडवेंचर पर्यटन की संभावनाएं एक साथ मौजूद हैं। मां दंतेश्वरी मंदिर और बस्तर दशहरा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को आधार देते हैं, वहीं कांगेर घाटी और धुड़मारास जैसे क्षेत्र प्रकृति एवं रोमांच आधारित पर्यटन के लिए नए अवसर प्रस्तुत करते हैं।

धुड़मारास में एडवेंचर पर्यटन, ग्लास ब्रिज और कैनोपी वॉक जैसी सुविधाओं की योजना तथा गांव का यूएन टूरिज्म बेस्ट टूरिज्म विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए चयन ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दे रहा है। 

पर्यटन से रोजगार और स्थानीय समृद्धि

बस्तर के पर्यटन विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। होमस्टे संचालक, पर्यटन गाइड, स्थानीय ड्राइवर, भोजन सेवा, हस्तशिल्प विक्रेता, सांस्कृतिक कलाकार और साहसिक पर्यटन से जुड़े युवा इस नई पर्यटन अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं।

बस्तर के पर्यटन रोडमैप के अंतर्गत 45 युवाओं को पर्यटन प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। यह संकेत है कि पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों के विकास तक सीमित न रखकर स्थानीय कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में भी काम हो रहा है। 

बस्तर की नई तस्वीर

बस्तर का पर्यटन ऐसे मॉडल में से एक है, जिसमें प्रकृति सुरक्षित रहे, जनजातीय संस्कृति की मौलिकता बनी रहे और पर्यटन से पैदा होने वाली आय का लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। सड़कें बस्तर को जोड़ रही हैं, हवाई संपर्क दूरी कम कर रहा है, रेल कनेक्टिविटी की संभावनाएं विस्तार पा रही हैं, होमस्टे गांवों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ रहे हैं और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इसकी सांस्कृतिक पहचान को देश के सामने ला रहे हैं। 

बस्तर अब केवल अतीत की कहानी नहीं है। यह संभावनाओं का नया अध्याय है, जहां जंगलों की हरियाली, जलप्रपातों की सुंदरता, जनजातीय संस्कृति की जीवंतता और स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी मिलकर छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई दिशा दे रही है। बस्तर की नई पहचान अब उसके अतीत से नहीं, बल्कि शांति, प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय विकास की नई संभावनाओं से लिखी जा रही है।

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड देगा ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’, 10 श्रेणियों में होगा सम्मान

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटन क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले उद्यमियों, संस्थाओं और व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड लगातार दूसरे वर्ष ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ प्रदान करने जा रहा है। इस बार पर्यटन क्षेत्र की पूरी श्रृंखला को ध्यान में रखते हुए 10 अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे।

प्रत्येक श्रेणी में एक विजेता का चयन किया जाएगा। विजेताओं को ₹11 हजार की पुरस्कार राशि और मेमेंटो प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक व्यक्ति और संस्थाएं अपनी प्रविष्टियां it@visitcg.in पर ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं।

इन 10 श्रेणियों में मिलेगा पुरस्कार

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने पर्यटन से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों को पुरस्कार योजना में शामिल किया है। इनमें—

  1. सर्वश्रेष्ठ होटल

  2. सर्वश्रेष्ठ पंजीकृत टूर ऑपरेटर

  3. सर्वश्रेष्ठ जिला टूरिज्म प्रमोशन अवॉर्ड

  4. सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्टार्टअप/उद्यमिता पुरस्कार

  5. CTB Star Performer – सर्वश्रेष्ठ रिसॉर्ट

  6. CTB Star Performer – पर्यटक सूचना केंद्र

  7. सर्वश्रेष्ठ होमस्टे

  8. सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर

  9. सर्वश्रेष्ठ इको टूरिज्म साइट अवॉर्ड

  10. सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड शामिल हैं।

पर्यटन के साथ पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी फोकस

इस पुरस्कार की खासियत यह है कि इसमें सिर्फ पर्यटन स्थलों या होटल कारोबार को ही नहीं, बल्कि होमस्टे, डिजिटल प्रचार, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, पर्यटन स्टार्टअप और जिला स्तर पर पर्यटन विकास जैसे क्षेत्रों को भी सम्मान के दायरे में रखा गया है।

इको-टूरिज्म श्रेणी में नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा करने वाली पहलों को भी महत्व मिलेगा।

सोशल मीडिया के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन की ब्रांडिंग करने वालों को भी मौका

सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका को देखते हुए सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की श्रेणी भी रखी गई है। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों पर आधारित रील्स, वीडियो और अन्य डिजिटल कंटेंट के माध्यम से राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति, जनजातीय जीवन, ऐतिहासिक स्थलों और वन्यजीवों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित किया जाएगा।

होमस्टे से गांवों की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वालों का सम्मान

सर्वश्रेष्ठ होमस्टे श्रेणी में बुकिंग, घरेलू पर्यटकों की संख्या, राजस्व और वार्षिक वृद्धि के साथ पर्यटकों को मिलने वाली सुविधाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर पैदा करने वाले होमस्टे को भी विशेष महत्व दिया जाएगा।

एडवेंचर टूरिज्म को भी मिलेगा प्रोत्साहन

छत्तीसगढ़ में कैंपिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों का संचालन करने वाले श्रेष्ठ संचालक को सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड दिया जाएगा। इसमें पर्यटकों की संख्या, गंतव्य प्रबंधन, राजस्व, नए एडवेंचर प्रोडक्ट और पर्यटकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण अनुभव उपलब्ध कराने जैसे मानकों को देखा जाएगा।

15 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन

पुरस्कार के लिए आवेदन पत्र छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध है। पात्र व्यक्ति, संस्थाएं और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक अपनी प्रविष्टियां 15 सितंबर 2026 तक ई-मेल के जरिए भेज सकते हैं। प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन निर्धारित पात्रता और मूल्यांकन मानदंडों के आधार पर राज्य पर्यटन विभाग/निर्णायक समिति द्वारा किया जाएगा।

पर्यटन को नई पहचान देने की पहल

‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ के जरिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में उत्कृष्टता, नवाचार, सतत पर्यटन, बेहतर सेवाओं, डिजिटल प्रचार, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देना है। इससे राज्य के पर्यटन से जुड़े विभिन्न हितधारकों को अपने काम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का अवसर मिलेगा।

रामगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को विश्व पटल पर दिलाएंगे नई पहचान - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य समापन

रामगढ़ के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये की घोषणा, उदयपुर एवं डूमरडीह को मिलाकर नगर पंचायत बनाने की घोषणा

मुख्यमंत्री ने 6 पहाड़ी कोरवा बच्चों का कराया शाला प्रवेश, टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स का किया सम्मान

रायपुर- रामगढ़ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन का केंद्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपरा, प्रकृति पूजा, आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। सरगुजा की यह पवित्र भूमि प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है। अनेक प्राचीन ग्रंथों में रामगढ़ का उल्लेख मिलता है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को प्रमाणित करता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के ऐतिहासिक दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के  समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनश्रुतियों के अनुसार त्रेतायुग में वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने इस क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। सीताबेंगरा गुफा आज भी श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है तथा रामगढ़ की हवाओं और शिलाओं में रामायण की स्मृतियां आज भी जीवंत हैं।

उन्होंने कहा कि सीताबेंगरा गुफा भारत की सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में से एक मानी जाती है, जहां हजारों वर्ष पूर्व सांस्कृतिक आयोजन और नाट्य प्रस्तुतियां होती थीं। वहीं जोगीमारा गुफा अपनी प्राचीन भित्तिचित्र कला के लिए विश्वविख्यात है। हाथीपोल जैसी प्राकृतिक शैल संरचना तथा यहां के प्राचीन शिल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साक्षी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकवि कालिदास द्वारा मेघदूतम् की रचना इसी क्षेत्र में किए जाने का उल्लेख मिलता है, जिससे रामगढ़ का साहित्यिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार रामगढ़, सीताबेंगरा और जोगीमारा जैसी ऐतिहासिक धरोहरों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। यहां पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य से परिचित हो सकें। उन्होंने कहा कि जिस भव्यता के साथ इस वर्ष रामगढ़ महोत्सव का आयोजन हुआ है, उसी भव्यता के साथ यह महोत्सव प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में सरगुजा जिले में 2,387 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश में लोगों के पक्के आवास का सपना तेजी से साकार हो रहा है। 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति प्रदान की गई है तथा प्रतिदिन लगभग 1,600 आवास बनकर तैयार हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के कारण बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। पुनर्वासित नक्सलियों तथा विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) परिवारों को भी आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों से 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। 13 लाख किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस प्रदान किया गया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1,000 रुपये अंतरित किए जा रहे हैं। रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या दर्शन कराया गया है। तीर्थयात्रा दर्शन योजना के अंतर्गत देश के 19 प्रमुख तीर्थस्थलों को शामिल किया गया है, जहां वरिष्ठ नागरिक अपनी इच्छा के अनुसार दर्शन कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए विभिन्न विभागों में लगातार भर्ती प्रक्रिया संचालित की जा रही है। आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रारंभ की गई है, जिसके माध्यम से लोगों की शिकायतों का प्रभावी समाधान किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रामगढ़ के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही क्षेत्रवासियों की मांग पर उदयपुर एवं डूमरडीह को मिलाकर नगर पंचायत के गठन की घोषणा भी की।इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामगढ़ महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककला और गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का सशक्त माध्यम है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य कर रहा है।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सभी को रामगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लगभग 50 वर्षों से आयोजित हो रहा यह महोत्सव ऐतिहासिक, पौराणिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने पहाड़ी कोरवा बच्चों का कराया शाला प्रवेश, टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंच से विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के छह बच्चों का शाला प्रवेश कराया। उन्होंने बच्चों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाई तथा स्कूल बैग, वॉटर बॉटल सहित अध्ययन सामग्री प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने 26 से 30 जून तक सरगुजा जिले के विभिन्न पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर विशेष डॉक्यूमेंट्री तैयार करने वाले टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया।

समापन समारोह में विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, विधायक शकुंतला पोर्ते, विधायक उद्देश्वरी पैंकरा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर सहित अन्य विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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जोगीमारा गुफा शिलालेख एवं हाथीपोल का किया अवलोकन

हमारी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय "रामगढ़ महोत्सव-2026" के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन किया तथा इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की अनूठी प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य एवं पर्यटन का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत भी विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान रखती है। रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर प्राप्त हों।

उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख एवं चित्रकला की अनुपम धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों में अपनी कालजयी कृति "मेघदूतम्" की रचना की थी, जिसका आरंभ "आषाढस्य प्रथमदिवसे" से होता है। इसी ऐतिहासिक एवं साहित्यिक स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की भित्तिचित्र परंपरा तथा यहाँ प्राप्त प्राचीन अभिलेख इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।

रामगढ़ की एक अन्य महत्वपूर्ण पहचान "हाथीपोल" नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी तथा 15 से 20 फीट ऊँची यह प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ इस सम्पूर्ण क्षेत्र को और अधिक रहस्यमयी, आकर्षक एवं ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं। रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित इन कलात्मक गुफाओं का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

नागपुर एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण से मध्य भारत की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बढ़ावा: नितिन गडकरी

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नागपुर- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नागपुर के आधुनिकीकरण और विस्तार से मध्य भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। इससे क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होगा, निवेश आकर्षित होंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विदर्भ क्षेत्र में औद्योगिक विकास को मजबूती मिलेगी।

नागपुर एयरपोर्ट को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत GMR Group को सौंपने के औपचारिक समारोह में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि भारत के भौगोलिक केंद्र में स्थित नागपुर तेजी से व्यापार, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, वाणिज्य और मल्टीमॉडल परिवहन का प्रमुख केंद्र बन रहा है। एयरपोर्ट के विस्तार और आधुनिकीकरण से इस विकास को और गति मिलेगी।

समारोह में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, रामटेक सांसद श्यामकुमार बर्वे, राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

गडकरी ने कहा कि उन्नत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा विदर्भ क्षेत्र में पर्यटन, खनन, कृषि और निर्यात आधारित उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बेहतर हवाई संपर्क से यात्रियों और माल परिवहन की सुविधा बढ़ेगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और नए व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से नागपुर को सिंगापुर और दुबई जैसे प्रमुख वैश्विक शहरों से सीधे जोड़ने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने का आग्रह किया। उनके अनुसार, इससे व्यापार, पर्यटन, निवेश और वैश्विक बाजारों से जुड़ाव को बढ़ावा मिलेगा।

स्थानीय उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए गडकरी ने सुझाव दिया कि नागपुर की प्रसिद्ध ऑरेंज बर्फी और अन्य क्षेत्रीय उत्पादों को एयरपोर्ट पर प्रदर्शित किया जाए, जिससे स्थानीय उद्यमियों को नया बाजार मिलेगा और विदर्भ की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर नितिन गडकरी, के. राममोहन नायडू और देवेंद्र फडणवीस ने संयुक्त रूप से डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नया लोगो भी लॉन्च किया, जो एयरपोर्ट के विकास के नए अध्याय का प्रतीक है।

एयरपोर्ट के दीर्घकालिक विकास कार्यक्रमों में आधुनिक कार्गो सुविधाएं, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) इंफ्रास्ट्रक्चर और यात्रियों के लिए उन्नत सुविधाओं का विकास शामिल है। इन पहलों से नागपुर को एक एयरपोर्ट-आधारित आर्थिक केंद्र और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

विश्व पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान की ओर बढ़ेगा सिरपुर, सिरपुर एकीकृत विकास परियोजना को मिली रफ्तार

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पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक 

यूनेस्को विश्व विरासत सूची, लाइट एंड साउंड शो, बांस राफ्टिंग, आधुनिक पर्यटक सुविधाओं और सिरपुर महोत्सव को लेकर लिए गए कई अहम निर्णय

रायपुर- छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर सिरपुर को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित सिरपुर एकीकृत विकास परियोजना संबंधी अंतर्विभागीय समिति की द्वितीय बैठक में सिरपुर के समग्र विकास, पर्यटन अधोसंरचना के विस्तार और विश्वस्तरीय विरासत गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, जिला प्रशासन महासमुंद, सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, वन विभाग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में प्रथम बैठक के निर्णयों पर हुई प्रगति की समीक्षा करते हुए पर्यटन सचिव ने सभी विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिरपुर को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में मिश्रित श्रेणी में शामिल कराने के लिए तैयार प्रस्ताव को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए तथा एकीकृत विकास की कार्ययोजना को निर्धारित समय-सीमा में आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिरपुर की समृद्ध बौद्ध, जैन और हिंदू विरासत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए सभी विभागों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

पर्यटकों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रशिक्षित स्थानीय गाइडों की सूची तैयार कर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को उपलब्ध कराने, गाइडों के न्यूनतम शुल्क निर्धारित करने तथा लक्ष्मण मंदिर, पर्यटन सूचना केंद्र और अन्य प्रमुख स्थलों पर उनकी सूची एवं संपर्क विवरण प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही स्थानीय गाइडों को विभिन्न विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण देने तथा प्रशिक्षित गाइडों को पर्यटन सूचना केंद्रों एवं पुरातत्व संस्थानों में अवसर उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया।

बैठक में सिरपुर आने वाले पर्यटकों के लिए नए आकर्षण विकसित करने का भी निर्णय लिया गया। इसके तहत कोडार डैम और रायकेश तालाब में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से बांस राफ्टिंग, नौकायन तथा कैंटीन संचालन जैसी गतिविधियां प्रारंभ की जाएंगी, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे और पर्यटकों को नए अनुभव प्राप्त होंगे।

पर्यटन अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए लक्ष्मण मंदिर परिसर के आसपास सुव्यवस्थित पार्किंग, स्मृति चिन्ह बिक्री केंद्र, पेयजल, शौचालय, कैफेटेरिया और अन्य आवश्यक सुविधाओं का शीघ्र विकास करने का निर्णय लिया गया। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड, सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन को विकास कार्यों की प्रगति नियमित रूप से साझा करने के निर्देश भी दिए गए।

सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से पर्यटकों तक पहुंचाने के लिए सुरंग टीला में अत्याधुनिक लाइट एंड साउंड शो विकसित किया जाएगा। इसके लिए ह्वेनसांग की यात्रा, कलचुरी काल, बौद्ध, जैन एवं हिंदू विरासत, सूर्यवर्मा-वासटा, वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर तथा लोरिक-चंदा जैसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक प्रसंगों पर आधारित आकर्षक स्क्रिप्ट शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में आगामी सिरपुर महोत्सव को और अधिक भव्य एवं आकर्षक स्वरूप देने पर भी सहमति बनी। महोत्सव में सिरपुर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत पर आधारित विशेष एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। साथ ही दक्षिण एशियाई देशों से अधिकाधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रचार-प्रसार एवं रणनीति तैयार करने का निर्णय लिया गया।राज्य स्तरीय संग्रहालय को सार्वजनिक-निजी सहभागिता मॉडल पर विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसके लिए ओडिशा के कोणार्क तथा तमिलनाडु के केलडी स्थित संग्रहालयों का अध्ययन भ्रमण जुलाई माह में कराया जाएगा तथा अगस्त-सितंबर तक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसके अलावा विदेशों में पहुंचे सिरपुर के महत्वपूर्ण पुरावशेषों को भारत वापस लाने के लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही करने तथा नए उत्खनन स्थलों का संयुक्त निरीक्षण कर 15 दिनों के भीतर उनका चयन करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में जिला प्रशासन महासमुंद को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए आवश्यक भूमि का आवंटन एक माह के भीतर सुनिश्चित करने, भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रक्रियाओं में समन्वय स्थापित करने तथा सुरंग टीला क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही सिरपुर में पर्यटन गतिविधियों के प्रभावी संचालन और प्रबंधन के लिए डेस्टिनेशन मैनेजमेंट संगठन अथवा विशेष प्रयोजन वाहन गठित करने का प्रस्ताव तैयार करने पर भी बल दिया गया।

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रस्तुत सिरपुर एकीकृत विकास योजना के प्रस्तुतीकरण पर पर्यटन सचिव ने निर्देश दिए कि कोर एवं बफर क्षेत्र का स्पष्ट निर्धारण किया जाए, प्रस्तावित बौद्ध पार्क को सार्वजनिक-निजी सहभागिता मॉडल पर विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए, सुरंग टीला के लाइट एंड साउंड शो की स्क्रिप्ट 15 दिनों के भीतर अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की जाए तथा आगामी पर्यटन सत्र को ध्यान में रखते हुए सभी परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन समय-सीमा में तैयार कर कार्य प्रारंभ किया जाए।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सिरपुर के विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए अंतर्विभागीय समिति की बैठक प्रत्येक तीन माह में नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। बैठक के अंत में पर्यटन सचिव डॉ. एस. भारती दासन ने सभी विभागों से समन्वित एवं समयबद्ध प्रयास सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि सिरपुर को उसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के अनुरूप विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

Union Budget 2026–27 में पर्यटन विकास: भारत को वैश्विक पर्यटन और मेडिकल टूरिज्म हब बनाने की रणनीति

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा में मंदिरों और मठों के संरक्षण, तीर्थ केंद्रों के विकास और कनेक्टिविटी व सुविधाओं में सुधार का प्रस्ताव है।

  • भारत पहला ग्लोबल बिग कैट समिट आयोजित करेगा, जिसमें 95 देशों के नेता और मंत्री भाग लेंगे, जिससे इको-टूरिज्म में भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका मजबूत होगी।

  • पूर्वोदय राज्यों में पाँच प्रमुख पर्यटन स्थल विकसित किए जाएंगे और कनेक्टिविटी के लिए 4,000 ई-बसें दी जाएंगी।

  • पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे ताकि भारत मेडिकल टूरिज्म का वैश्विक केंद्र बन सके।

  • 15 पुरातात्विक स्थलों (जैसे लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, सारनाथ, हस्तिनापुर, लेह पैलेस आदि) को सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

परिचय

पर्यटन भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो रोजगार, विदेशी मुद्रा और क्षेत्रीय विकास में बड़ी भूमिका निभाता है।
2025 के पर्यटन डेटा के अनुसार:

  • पर्यटन का कुल योगदान GDP में 5.22% है।

  • प्रत्यक्ष योगदान 2.72% है।

  • रोजगार में कुल योगदान 13.34% और प्रत्यक्ष रोजगार 5.82% है।

इसलिए सरकार ने पर्यटन को एक रणनीतिक विकास क्षेत्र माना है और बजट 2026–27 में इसे मजबूत करने के लिए कई योजनाएँ घोषित की हैं।

Union Budget 2026–27: पर्यटन से जुड़े प्रमुख घोषणाएँ

थीम आधारित और गंतव्य आधारित पर्यटन विकास

  • पूर्वोत्तर भारत में बौद्ध सर्किट विकास योजना शुरू की जाएगी।

  • इसमें मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थ केंद्र, कनेक्टिविटी सुधार और सुविधाएँ शामिल होंगी।

  • इससे आध्यात्मिक पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

यह योजना पहले की स्वदेश दर्शन योजना (2014–15) और स्वदेश दर्शन 2.0 पर आधारित है।

इको-टूरिज्म और कनेक्टिविटी

  • हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, अराकू घाटी और पश्चिमी घाट में प्राकृतिक ट्रेल्स और पर्वतीय पर्यटन विकसित होंगे।

  • ओडिशा, कर्नाटक और केरल में कछुआ ट्रेल्स और आंध्र प्रदेश में बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स विकसित होंगे।

  • रेल और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाई जाएगी ताकि दूरस्थ पर्यटन स्थलों तक पहुँच आसान हो।

ग्लोबल बिग कैट समिट 2026

  • भारत 2026 में पहला वैश्विक बिग कैट सम्मेलन आयोजित करेगा।

  • इसमें 95 देशों के नेता और मंत्री भाग लेंगे।

  • इसका उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, वैज्ञानिक सहयोग और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देना है।

  • भारत के पास 7 में से 5 बड़ी बिल्ली प्रजातियाँ हैं –

    • बाघ,

    • शेर,

    • तेंदुआ,

    • हिम तेंदुआ,

    • चीता।

संस्थागत और मानव संसाधन सुधार

  • नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट को अपग्रेड कर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी बनाया जाएगा।

  • 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10,000 टूरिस्ट गाइड्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  • इससे पर्यटन सेवाओं की गुणवत्ता और रोजगार बढ़ेगा।

डिजिटल और विरासत अवसंरचना

  • नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड बनाया जाएगा, जिससे पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों का डिजिटल दस्तावेज़ बनेगा।

  • 15 ऐतिहासिक स्थलों को इमर्सिव सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र बनाया जाएगा, जैसे:

    • लोथल

    • धोलावीरा

    • राखीगढ़ी

    • सारनाथ

    • हस्तिनापुर

    • लेह पैलेस

मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म

  • 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित होंगे।

  • इसमें आधुनिक अस्पताल, आयुष केंद्र, पुनर्वास सुविधाएँ और मेडिकल टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होगा।

  • भारत को वैश्विक हेल्थ टूरिज्म हब बनाने का लक्ष्य है।

 पूर्वोदय राज्यों पर विशेष ध्यान

  • बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में 5 प्रमुख पर्यटन स्थल विकसित होंगे।

  • 4,000 इलेक्ट्रिक बसें कनेक्टिविटी के लिए दी जाएंगी।

  • उद्देश्य: पूर्वी भारत को पर्यटन और विकास का नया केंद्र बनाना।

निष्कर्ष

Union Budget 2026–27 में पर्यटन को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बनाने की रणनीति अपनाई गई है।
सरकार का फोकस:

  • बुनियादी ढाँचा

  • सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत संरक्षण

  • डिजिटल सिस्टम

  • कौशल विकास

  • मेडिकल और इको-टूरिज्म

  • क्षेत्रीय विकास

इन कदमों से रोजगार बढ़ेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और भारत वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख गंतव्य बनेगा।


ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा मयाली - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत जशपुर को मिली पर्यटन विकास की बड़ी सौगात

होम-स्टे, रिसोर्ट, पाथवे, लैंडस्केपिंग सहित आधुनिक पर्यटक सुविधाओं का होगा विकास

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 की उप-योजना सीबीडीडी के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना का मयाली नेचर कैंप में विधिवत भूमिपूजन किया। लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से क्रियान्वित इस परियोजना के तहत मयाली, विश्व प्रसिद्ध मधेश्वर पर्वत (विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग) तथा बगीचा स्थित कैलाश गुफा क्षेत्र में विभिन्न पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

यह परियोजना क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत के संरक्षण के साथ-साथ समुदाय आधारित पर्यटन को सशक्त बनाएगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और जशपुर जिले को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलेगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि मयाली-बगीचा विकास परियोजना जशपुर जिले के पर्यटन विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। आज मयाली के विकास की मजबूत नींव रखी गई है। मयाली अब पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है और आने वाले समय में यह एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मयाली की पहचान सदियों से मधेश्वर महादेव से जुड़ी रही है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है। इस विकास परियोजना के माध्यम से मधेश्वर पर्वत के धार्मिक एवं पर्यटन महत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। परियोजना के अंतर्गत मयाली डेम के समीप पर्यटक रिसोर्ट एवं स्किल डेवलपमेंट सेंटर का निर्माण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मयाली को एक समग्र इको-टूरिज्म और एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां के जंगल, झरने, पहाड़ और समृद्ध आदिवासी संस्कृति को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाया जाएगा। पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा।मुख्यमंत्री साय ने कहा इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा होम-स्टे नीति लागू की गई है, जिससे ग्रामीण परिवार पर्यटन गतिविधियों से सीधे जुड़कर आय अर्जित कर सकेंगे और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आई है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर में टूर गाइड, होटल सेवा, एडवेंचर स्पोर्ट्स, हस्तशिल्प एवं डिजिटल बुकिंग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे न केवल पर्यटन बल्कि जशपुर की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं को भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

विकास कार्यों से बदलेगी मयाली की तस्वीर, उभरेगा नया पर्यटन केंद्र

मयाली क्षेत्र को प्राकृतिक, धार्मिक एवं ग्रामीण पर्यटन के समग्र गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत 5 पर्यटक कॉटेज, कॉन्फ्रेंस एवं कन्वेंशन हॉल, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, भव्य प्रवेश द्वार, बाउंड्री वॉल, आधुनिक टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का निर्माण किया जाएगा। इन सुविधाओं से पर्यटकों के ठहराव एवं विभिन्न आयोजनों की बेहतर व्यवस्था होगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

धार्मिक पर्यटन को सशक्त करने के लिए शिव मंदिर क्षेत्र में प्रवेश द्वार, टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का विकास किया जाएगा। वहीं बगीचा स्थित कैलाश गुफा परिसर में प्रवेश द्वार, पिकनिक स्पॉट, रेस्टिंग शेड, घाट विकास, पाथवे तथा सीढ़ियों एवं रेलिंग का जीर्णाेद्धार किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक अनुभव मिलेगा।

यह समस्त कार्य भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा संचालित स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना के माध्यम से किए जाएंगे। परियोजना के पूर्ण होने से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक-प्राकृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक गोमती साय, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, विभिन्न बोर्ड-निगमों के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2026 की शुभ शुरुआत: छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहर को मिलेगी नई पहचान – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम ज़िले के भोरमदेव धाम में आयोजित कार्यक्रम में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने नववर्ष 2026 की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नए वर्ष की शुरुआत ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कार्य से होना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना राज्य की प्राचीन धरोहर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का प्रतीक है। कबीरधाम जिले के इस भोरमदेव धाम में महादेव शिव की आराधना, अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक साथ दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बेहतर शुरुआत नए वर्ष की नहीं हो सकती थी और इस परियोजना के लिए उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों को बधाई दी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भोरमदेव की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।

भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरे-भरे वनांचल के बीच स्थित इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है। यह केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि हजार वर्षों की साधना, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यहाँ भगवान शिव की पूजा भोरमदेव के रूप में की जाती है, जहाँ शैव दर्शन, लोक आस्था और आदिवासी परंपराएँ एक साथ मिलकर भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

उन्होंने कहा कि सावन के महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा यहाँ की एक महत्वपूर्ण परंपरा है और उन्हें स्वयं कांवड़ियों का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल और छेरकी महल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण भव्य शिल्पाकृतियाँ खजुराहो की कला से तुलना योग्य हैं। नागवंशी शासनकाल में निर्मित नागर शैली की यह अद्वितीय वास्तुकला अपने आप में अद्भुत है। यह स्थल न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास, कला और सामाजिक जीवन का सशक्त साक्ष्य भी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महाशिवरात्रि पर यह स्थान प्रमुख तीर्थ के रूप में हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जहाँ आदिवासी परंपराओं और शैव प्रथाओं का अनोखा संगम दिखाई देता है। मड़वा महल, जिसका संबंध विवाह मंडप से माना जाता है, तथा छेरकी महल की दीवारों पर अंकित वन और नदी से जुड़ी आकृतियाँ प्रकृति-निष्ठ जीवनदर्शन को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि भोरमदेव का यह संपूर्ण क्षेत्र धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र है, जिसे वर्तमान सरकार व्यापक रूप से विकसित करने जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को संरचनात्मक मजबूती मिली है। नई पर्यटन नीति एवं होम-स्टे पॉलिसी के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा सहित छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानीय उत्सवों ने प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ केवल मंदिरों और स्थापत्य तक सीमित नहीं हैं; बल्कि नाचा परंपरा, 13 पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोकनृत्य और गीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्पण हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि धार्मिक आस्थाओं में यहाँ भगवान राम को ‘भाँचा राम’ या ‘वनवासी राम’ के रूप में पूजा जाता है क्योंकि उनके वनवास के लगभग 10 वर्ष दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत हुए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है तथा रेल और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचना सरल होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर काॅरिडोर के भूमिपूजन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है।

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि सुशासन का प्रभाव आज देश-दुनिया में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल, बिजली, बैंक खाता और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं। 

केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि भोरमदेव मंदिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी विशेष आस्था का केंद्र रहा है और यह परियोजना उनके कार्यकाल की स्मृति के रूप में कबीरधाम जिले को एक नई पहचान देगी।  केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि यह वर्ष परिवर्तन का वर्ष है और भारत को विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प में 140 करोड़ देशवासी सहभागी बनें।  

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर यहां के विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चैत्र माह के तेरहवीं तिथि को भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया जाता है, पिछले वर्ष जब स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने के लिए हमने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से निवेदन किया था और भोरमदेव महोत्सव के दिन  हमें स्वीकृति प्राप्त हो गयी थी और आज भूमिपूजन भी सम्पन्न हो गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भोरमदेव की तरह ही आस्था का केंद्र माने जाने वाले पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर का भी अब विकास किया जा रहा है। 

कार्यक्रम मे उपमुख्यमंत्री अरुण साव, केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू, सांसद संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक भावना बोहरा, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल, राज्य कृषक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

त्रिपुरा में माताबाड़ी पर्यटन सर्किट को मॉडल गंतव्य के रूप में विकसित करने पर हुई समीक्षा बैठक

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केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा की उपस्थिति में त्रिपुरा के माताबाड़ी पर्यटन सर्किट के विकास को लेकर एक समीक्षा बैठक की। बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) के राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, मंत्रालय के सचिव तथा केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में माताबाड़ी सर्किट को एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की समग्र रणनीति की समीक्षा की गई। इस दौरान क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया, ताकि पर्यटन से उत्पन्न अवसरों के माध्यम से स्थानीय लोगों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित हो और उन्हें स्थायी आजीविका के साधन प्राप्त हों।

सिंधिया ने कहा कि त्रिपुरा के इतिहासकारों को भी पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्हें पर्यटक गाइड और सहायकों के प्रशिक्षण में भागीदार बनाया जाए, ताकि राज्य के इतिहास की प्रामाणिक जानकारी पर्यटकों तक पहुंच सके। इस प्रक्रिया को संस्थागत स्वरूप देते हुए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों का समन्वय किया जाना चाहिए।

चर्चा के दौरान इस बात पर बल दिया गया कि त्रिपुरा की सुंदरता उसकी प्राचीन ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक परिवेश में जीवंत बनाए रखने में निहित है। माताबाड़ी सर्किट के विकास में राज्य के इतिहास की स्पष्ट झलक दिखनी चाहिए और सौम्य सौंदर्यशास्त्र (सॉफ्ट एस्थेटिक्स) को बनाए रखा जाना चाहिए। साथ ही, स्थानीय त्रिपुरा व्यंजनों को पर्यटक अनुभव का अभिन्न हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि पर्यटन सर्किट में एक उच्चस्तरीय और विशिष्ट (निच) घटक भी शामिल होना चाहिए, जिससे प्रमुख आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्र के खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। निच और हाई-एंड पर्यटन को जन-आधारित पर्यटन सर्किट के साथ समन्वयित कर अधिकतम लाभ प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। त्रिपुरा के पर्यटन मंत्री को इस मॉडल को मार्गदर्शक उदाहरण के रूप में आगे बढ़ाने की सलाह दी गई, ताकि माताबाड़ी सर्किट न केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र बल्कि पूरे देश के लिए पर्यटन विकास का मानक बन सके।

बैठक के अंत में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना की गई, जिनके मार्गदर्शन में राज्य में पर्यटन विकास के लिए संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण आकार ले रहा है।

पूर्वोत्तर में एकीकृत पर्यटन विकास को गति: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 4वीं उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स बैठक में किया मार्गदर्शन

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केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री, ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज नई दिल्ली में आयोजित पर्यटन पर 4वीं उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स (HLTF) बैठक में भाग लिया। इस बैठक की अध्यक्षता मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने की। इसमें त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, सिक्किम के पर्यटन मंत्री त्शेरिंग टी. भूटिया, अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन मंत्री पासंग दोर्जे सोना तथा पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम.आर. सिनरेम भी उपस्थित रहे।

बैठक ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक एकीकृत और क्रियाशील पर्यटन ब्लूप्रिंट तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया। इसमें प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने, चुनौतियों की पहचान करने और राज्यों के बीच समन्वित कार्यान्वयन को तेज करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक के प्रमुख बिंदु इस प्रकार रहे:

🌄 पर्यटन क्षमता को अनलॉक करने पर जोर

  • मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करना

  • विश्वस्तरीय पर्यटन अवसंरचना का विकास

  • वैश्विक आकर्षण वाले प्रमुख पर्यटन स्थलों का निर्माण

  • एडवेंचर एवं इको-टूरिज्म को बढ़ावा

  • संस्कृति, प्रकृति और विरासत आधारित नए पर्यटन उत्पाद विकसित करना

🧭 कौशल विकास व सेवा मानकीकरण

  • स्थानीय युवाओं के लिए स्किलिंग इकोसिस्टम का विस्तार

  • सेवा मानकों को एकरूप करना

  • क्षमता-विकास को सुदृढ़ कर सतत उद्योग विकास को बढ़ावा

🌐 उत्तरी-पूर्व का एकीकृत ब्रांडिंग अभियान

  • पूर्वोत्तर भारत को एक प्रीमियम पर्यटन क्षेत्र के रूप में वैश्विक मंच पर स्थापित करना

  • नीतिगत प्रक्रियाओं को सरल बनाकर निजी निवेश आकर्षित करना

  • राज्यों के बीच मजबूत समन्वय से सहज पर्यटन सर्किट विकसित करना

🗣️ मंत्री सिंधिया के प्रमुख विचार

मंत्री सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत, भारत की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर का शक्ति-केंद्र है और इसे देश के सबसे आकर्षक पर्यटन गंतव्यों में परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया:

  • अंतिम मील कनेक्टिविटी का सुदृढ़ीकरण

  • स्थिरता-आधारित पर्यटन विकास

  • हर राज्य के प्रमुख त्योहारों का वार्षिक कैलेंडर तैयार करना

📝 अगले कदम

केंद्रीय मंत्री ने मेघालय सरकार से अनुरोध किया कि सभी सदस्यों की सुझावों को शामिल कर अंतिम HLTF रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

यह बैठक पूर्वोत्तर क्षेत्र में टिकाऊ, समन्वित और व्यापक पर्यटन विकास की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से पर्यटन के अंतर्राष्ट्रीय पटल पर उभर रहा है जशपुर

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 जर्मन मेहमानों को जशपुर की जनजातीय संस्कृति ने किया मंत्रमुग्ध

रायपुर-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की प्रेरणा और राज्य सरकार की पर्यटन संवर्धन नीतियों के अंतर्गत जशपुर अब विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह बना रहा है। इसकी झलक हाल ही में तब देखने को मिली जब जर्मनी से आए पर्यटक बर्नहार्ड और  फ्रांजिस्का जशपुर की जनजातीय संस्कृति, कला और आत्मीयता से गहराई से प्रभावित हुए।

दोनों पर्यटकों ने क्षेत्रीय स्टार्टअप “ट्रिप्पी हिल्स” के अनुभवात्मक पर्यटन कार्यक्रम के तहत जनजातीय जीवन की बारीकियों को समझा। यात्रा की शुरुआत मलार समुदाय से हुई, जो अपने उत्कृष्ट हस्तनिर्मित आभूषणों और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। इन कारीगरों की रचनात्मकता ने विदेशी मेहमानों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा के गांव में उन्होंने पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के साथ गहरे संबंध को महसूस किया। वहीं अगरिया समुदाय के दौरे में लौह गलाने की पारंपरिक तकनीक का जीवंत प्रदर्शन हुआ, जिसने दोनों अतिथियों को आश्चर्यचकित कर दिया। यात्रा का समापन स्थानीय हाट-बाजार में हुआ, जहाँ रंगीन वस्त्र, मिट्टी की खुशबू और पारंपरिक जनजातीय संगीत ने जशपुर की जीवंत सांस्कृतिक धड़कन को अभिव्यक्त किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हमेशा इस बात पर बल दिया है कि जशपुर की जनजातीय संस्कृति केवल धरोहर नहीं, बल्कि पर्यटन विकास का सशक्त माध्यम भी है। उनके नेतृत्व में जशपुर में सड़क, संचार और सुविधाओं के प्रसार से नए पर्यटन मार्ग तैयार हो रहे हैं। “कल्चर देवी” और “अनएक्सप्लॉरड बस्तर” जैसे संगठनों के सहयोग से स्थानीय समुदायों को भी अपने हुनर को दुनिया के सामने लाने का अवसर मिला है। यह अनूठा सांस्कृतिक अनुभव इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति अब वैश्विक आकर्षण का केंद्र बन रही है, जहाँ परंपरा, प्रकृति और आधुनिकता का सुंदर संगम नजर आता है।




उदयपुर में दो दिवसीय राज्य पर्यटन मंत्रियों की बैठक: “वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन” विज़न को आगे बढ़ाने पर जोर

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पर्यटन मंत्रालय ने 14–15 अक्टूबर 2025 को उदयपुर, राजस्थान में दो दिवसीय राज्य पर्यटन मंत्रियों की बैठक का आयोजन किया, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पर्यटन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित हुए।

यह बैठक प्रधानमंत्री के “वन स्टेट: वन ग्लोबल डेस्टिनेशन” विज़न को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर रही — इसका उद्देश्य हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में कम से कम एक वैश्विक मानक वाला पर्यटन स्थल विकसित करना है। यह पहल संघीय बजट 2025–26 की घोषणाओं के अनुरूप है, जिसमें डेस्टिनेशन डेवलपमेंट और डेस्टिनेशन मैनेजमेंट के लिए द्वैतीय रणनीति का उल्लेख किया गया है, जो भारत के पर्यटन परिवर्तन एजेंडा और विकसित भारत रोडमैप का हिस्सा है।

बैठक का फोकस जारी स्टेकहोल्डर्स परामर्शों को आगे बढ़ाने पर था, जहां राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पर्यटन मंत्रियों ने '50 डेस्टिनेशन्स के विकास' और 'परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव प्रदान करना' के लिए प्रारूपित ड्राफ्ट पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए — यह भारत के पर्यटन परिवर्तन एजेंडा के दो मुख्य स्तंभ हैं। इसने निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले पर्यटन हब विकास और PLI आधारित डेस्टिनेशन मैच्योरिटी मॉडल के माध्यम से डेस्टिनेशन मैनेजमेंट पर जोर दिया।

बैठक की शुरुआत सचिव (पर्यटन) वी. विद्यावती के उद्घाटन भाषण से हुई, इसके बाद केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दो-दिवसीय चर्चा का संदर्भ प्रस्तुत किया। यह आयोजन केंद्र, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और उद्योग स्टेकहोल्डर्स के बीच सहयोगात्मक कार्रवाई के महत्व को रेखांकित करता है, ताकि वैश्विक मानकों के पर्यटन स्थलों के विकास का विज़न साकार हो सके।

दो दिवसीय बैठक के दौरान, विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पर्यटन मंत्री और अधिकारी बजट पहलों के अनुरूप डेस्टिनेशन कॉन्सेप्ट प्रस्तुत करेंगे। प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश एक संभावित पर्यटन स्थल को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में प्रदर्शित करेगा और अपने दृष्टिकोण को साझा करेगा।

दूसरे दिन ड्राफ्ट इंटीग्रेटेड टूरिज़्म प्रमोशन स्कीम (ITPS) दिशानिर्देशों पर केंद्रित परामर्श होगा, जिसका उद्देश्य भारत को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक समग्र पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।

इस सम्मेलन के माध्यम से, मंत्रालय नीति समन्वय को बढ़ावा देने और पर्यटन परिवर्तन एजेंडा को प्रभावी ढंग से लागू करने का लक्ष्य रखता है, ताकि प्रत्येक क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सतत पर्यटन इकोसिस्टम के निर्माण में योगदान दे और विकसित भारत के निर्माण में मदद करे।

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