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आम जनता को शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम इस्तेमाल करें: मुख्य सचिव विकासशील

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सूचना प्रौद्योगिकी पर सूचना विज्ञान अधिकारियों की कार्यशाला सम्पन्न

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में उभरती नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। मुख्य सचिव ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि शासन की सभी योजनाओं का अधिकतम फायदा लोगों को शीघ्र मिले इसके लिए सूचना प्रौद्योगिक की सभी जरूरी नई तकनीकियों का उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि सूचना और संचार संस्थानों को अपने कार्यक्रम मोबाइल ऐप, वेबसाइट आदि नागरिक केन्द्रित और आसानी से उपयोग करने लायक बनायें। 

मुख्य सचिव ने कहा कि एनआईसी के अधिकारियों को नई आईटी से हमेशा अपडेट रहना चाहिए। नई सूचना तकनीक से शासन की योजनाओं से हितग्राहियों को शीघ्रता से लाभान्वित किया जाना चाहिए। सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद ने राज्य स्तरीय सूचना केन्द्र एवं जिला सूचना विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों से उनके संस्थान में उपलब्ध संसाधनों एवं उपकरणों की उपलब्धता तथा जरूरतों के बारे में जानकारी ली।

कार्यालय के शुभारंभ सेशन में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र मुख्यालय नई दिल्ली के डीडीजी दयानंद साहा ने कहा कि विभिन्न नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं के जरिए हम नागरिकों को सेवायें प्रदान कर सकते है। कार्यशाला को विविध सूचना प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ अधिकारियों ने प्रतिभागियों को जानकरी दी। कार्यशाला में ट्रिपल आईटी के संचालक तथा कुलपति प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने एआई के उपयोग के संबंध में व्यापक जानकारी दी। एनआईसी छत्तीसगढ़ के संयुक्त संचालक श्रीकांत पाण्डे ने साईबर सुरक्षा, संयुक्त संचालक अभिजीत कौशिक,  उपेन्द्र सिंह सहित अन्य आईटी विशेषज्ञों ने भी सम्बोधित किया। कार्यशाला में जिलों से आए जिला सूचना विज्ञान अधिकारियों और राज्य स्तरीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों के बीच सूचना प्रौद्योगिकियों का उपयोग नागरिक सेवाओं के लिए करने एवं शासन की फ्लैगशिप स्कीमों का फायदा हितग्राहियों तक शीघ्र पहुंचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के बारे में विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। कार्यशाला में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के विभिन्न जिलों में कार्यरत जिला सूचना विज्ञान अधिकारी और एनआईसी के राज्य स्तरीय अधिकारी शामिल हुए।


यूआईडीएआई और मैपमायइंडिया के बीच समझौता, Mappls ऐप पर दिखेंगे अधिकृत आधार केंद्र

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नई दिल्ली- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के लिए मैपमायइंडिया के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस समझौते के तहत आने वाले महीनों में Mappls ऐप पर देशभर के अधिकृत आधार केंद्रों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

इस पहल से लोगों को अधिकृत आधार केंद्रों की पहचान करने और वहां तक पहुंचने में आसानी होगी। साथ ही, उपयोगकर्ता यह भी देख सकेंगे कि किस केंद्र पर कौन-सी सेवाएं उपलब्ध हैं, जैसे वयस्क नामांकन, बच्चों का नामांकन या केवल पता और मोबाइल अपडेट।

यह सहयोग नागरिकों की सुविधा बढ़ाने, गलत जानकारी को रोकने और आधार सेवा केंद्रों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। यह समझौता 1 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित हुआ।

यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार ने कहा कि यह पहल नागरिक-केंद्रित सेवाओं को और मजबूत करेगी और देशभर में सत्यापित आधार केंद्रों की डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करेगी, जिससे लोगों को सही और अधिकृत केंद्र आसानी से मिल सकें।

इस सेवा के लागू होने के बाद, जब उपयोगकर्ता Mappls ऐप पर आधार केंद्र खोजेंगे, तो उन्हें सीधे अधिकृत केंद्रों की जानकारी मिलेगी। मैपमायइंडिया इस प्लेटफॉर्म पर यूआईडीएआई द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी को एकीकृत कर सटीक डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करेगा।

मैपमायइंडिया के सह-संस्थापक और सीएमडी राकेश वर्मा ने कहा कि यह यूआईडीएआई के साथ जुड़कर लोगों को आधार सेवाओं तक आसान पहुंच देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 में “भविष्य के महासागरों के लिए AI” पर उच्चस्तरीय चर्चा

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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES), भारत सरकार ने 16–20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 के तहत “AI for Our Oceans of Tomorrow: Data, Models and Governance” विषय पर एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया।

विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत में महासागर शासन, आपदा प्रबंधन, समुद्री आजीविका और ब्लू इकॉनॉमी (Blue Economy) के विकास में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है। इस सत्र में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, उद्योग जगत के नेता, स्टार्टअप और वित्तीय विशेषज्ञ शामिल हुए।

महासागरों की भूमिका और AI का महत्व

मुख्य भाषण देते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक डॉ. एम. मोहापात्रा ने बताया कि महासागर जलवायु नियंत्रण, आपदा जोखिम कम करने, खाद्य सुरक्षा और आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के पास महासागर अवलोकन, चक्रवात पूर्वानुमान, समुद्री डेटा सिस्टम और शुरुआती चेतावनी सेवाओं में मजबूत राष्ट्रीय क्षमताएं हैं, जिससे चरम मौसम घटनाओं में जान-माल के नुकसान में काफी कमी आई है।

उन्होंने यह भी बताया कि डेटा-आधारित और AI-सक्षम मॉडल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों (जैसे महासागर तापमान वृद्धि, अम्लीकरण और समुद्र स्तर वृद्धि) को समझने में पारंपरिक भौतिक मॉडलों के पूरक हो सकते हैं।
उन्होंने डीप ओशन मिशन को एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल बताया, जो गहरे समुद्र की खोज, अपतटीय ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग पर केंद्रित है।

भारत-नॉर्वे सहयोग और डिजिटल महासागर ढांचा

भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने महासागरों और ब्लू इकॉनमी में भारत-नॉर्वे सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि AI मछली पालन, शिपिंग, बंदरगाह संचालन और तटीय लचीलापन बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में नेतृत्व भारत को खुले डेटा, साझा मानकों और जिम्मेदार डिजिटल शासन पर आधारित एक वैश्विक डिजिटल महासागर ढांचा विकसित करने में सक्षम बनाता है, जिससे पूरी दुनिया को लाभ होगा।

डिजिटल ओशन इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्लू इकॉनॉमी

पैनल चर्चा में सरकारी, अकादमिक, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करते हुए एक डिजिटल ओशन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर सकता है, जो खुले डेटा, AI आधारित इंटेलिजेंस और मजबूत शासन ढांचे को एकीकृत करेगा।

AI समुद्री आजीविका बढ़ाने, लागत घटाने और ब्लू इकॉनॉमी क्षेत्रों में डेटा-आधारित निर्णय लेने के लिए आवश्यक होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि महासागर अभी भी डेटा की कमी वाला और जटिल क्षेत्र हैं, इसलिए भौतिक विज्ञान आधारित AI (Physics-informed AI) और फिजिकल इंटेलिजेंस की जरूरत है।

नीतिगत समर्थन, डेटा उपलब्धता, वित्तीय सहयोग और जोखिम साझा करने के साथ ब्लू इकॉनॉमी भारत और ग्लोबल साउथ के लिए दीर्घकालिक विकास का बड़ा इंजन बन सकती है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार और निवेश के अवसर पैदा होंगे।

समापन टिप्पणी

सत्र का समापन डॉ. (कमांडर) पी. के. श्रीवास्तव, वैज्ञानिक G और सलाहकार, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने किया। उन्होंने महासागर कार्यक्रमों में AI के एकीकरण के लिए संरचित रोडमैप बनाने की मंत्रालय की प्रतिबद्धता दोहराई।


India AI Impact Startups 2026: भारत में सामाजिक और आर्थिक बदलाव के लिए AI स्टार्टअप्स की नई तस्वीर

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India AI Impact Summit 2026 में जारी यह रिपोर्ट 110 स्टार्टअप्स और गैर-लाभकारी संगठनों का प्रोफाइल प्रस्तुत करती है, जो बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक प्रभाव के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर रहे हैं। यह रिपोर्ट IndiaAI और Kalpa Impact द्वारा प्रकाशित की गई है और इसमें स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, जलवायु, वित्तीय समावेशन, शहरी परिवहन और सार्वजनिक सेवा वितरण जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

यह रिपॉजिटरी भारत के AI-for-impact इकोसिस्टम का पहला संरचित मैपिंग है, जो दिखाती है कि भारतीय संस्थापक स्थानीय समस्याओं के लिए वैश्विक स्तर पर उपयोगी समाधान बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वॉयस AI और स्थानीय भाषाओं में इंटरफेस वंचित समुदायों तक पहुंचने का प्रमुख माध्यम बन रहे हैं, और “मेड-इन-इंडिया” फाउंडेशन मॉडल्स पर काम करने वाले स्टार्टअप्स की संख्या भी बढ़ रही है।

यह रिपोर्ट:

  • नीति निर्माताओं को AI समाधानों के एकीकरण में मदद करेगी

  • निवेशकों को तकनीकी रूप से परिपक्व और स्केलेबल स्टार्टअप्स पहचानने में सहायता देगी

  • वैश्विक विकास समुदाय को ग्लोबल साउथ के लिए दोहराने योग्य मॉडल प्रदान करेगी

Abhishek Singh (MeitY और IndiaAI Mission) ने कहा कि यह रिपॉजिटरी नीति निर्माताओं, उद्योग और निवेशकों के लिए एक व्यावहारिक संसाधन है और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में AI क्षमताओं के एकीकरण को आसान बनाएगी।

Mohammed Y. Safirulla (IndiaAI Mission) ने कहा कि भारत का AI इकोसिस्टम तेजी से परिपक्व हो रहा है और यह रिपोर्ट दिखाती है कि स्टार्टअप्स अब पायलट प्रोजेक्ट्स से बड़े पैमाने पर लागू समाधानों की ओर बढ़ रहे हैं।

Anshul Singhal (MeitY) ने कहा कि भारतीय AI स्टार्टअप्स सिर्फ एप्लिकेशन नहीं, बल्कि समावेशन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहे हैं—जैसे कोर्ट ट्रांसक्रिप्शन, ग्रामीण स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और किसान सलाह प्रणाली।

Sushant Kumar (Kalpa Impact) ने कहा कि भारतीय AI स्टार्टअप्स “सुपर-यूटिलिटी” समाधान बना रहे हैं, जैसे बिना इंटरनेट काम करने वाला Edge AI और स्थानीय भाषाओं में बोलने वाले वॉयस बॉट्स। कई स्टार्टअप्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार कर चुके हैं, जिससे भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए AI एक्सपोर्ट हब बन रहा है।


रेडियो की विश्वसनीयता और एआई की गति मिलकर जनसेवा को बनायेंगे अधिक सशक्त : मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वंदे मातरम के नए गायन संस्करण का पेन ड्राइव लॉन्च किया। 

मुख्यमंत्री साय ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए आकाशवाणी रायपुर और यूनेस्को को इस खास आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का विषय ‘रेडियो और एआई’ अत्यंत सामयिक और उपयोगी है। सूचना क्रांति के इस युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग सभी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक जनोपयोगी बनाने पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सही समय पर सही जानकारी नागरिकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसमें रेडियो की भूमिका शुरू से ही अत्यंत प्रभावी रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आकाशवाणी देश का सबसे भरोसेमंद समाचार प्रसारक है। निजी चैनलों के बीच तेज़ी से खबरें देने की प्रतिस्पर्धा के बावजूद आकाशवाणी ने अपनी विश्वसनीय, संतुलित और जनहितकारी सूचना परंपरा को बनाए रखा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में यह सूचना, शिक्षा और स्वस्थ मनोरंजन का सशक्त माध्यम है। उन्होंने रेडियो से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि जब दूरस्थ गांवों तक किसी अन्य माध्यम की पहुंच नहीं थी, तब रेडियो ही देश-दुनिया से जुड़ने का एकमात्र माध्यम था। किसानों और ग्रामीण अंचलों के लिए आकाशवाणी आज भी विशेष भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ जैसे लोकप्रिय कार्यक्रम के लिए रेडियो का चयन इसकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आकाशवाणी के छह स्टेशन संचालित हैं तथा रायपुर से विविध भारती सेवा प्रसारित हो रही है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘रेडियो और एआई’ संचार के क्षेत्र में नई क्रांति ला सकता है। एआई की मदद से कंटेंट को अधिक प्रभावी, सटीक और त्वरित बनाया जा सकता है। आपातकालीन सूचनाएं, मौसम पूर्वानुमान, कृषि सलाह और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अधिक तेजी और सटीकता से प्रसारित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ डिजिटल भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। नवा रायपुर में देश का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीकी सुरक्षा के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे। नई औद्योगिक नीति के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है और डिजिटल तकनीक के जरिए अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आकाशवाणी के माध्यम से छत्तीसगढ़ी, गोंडी और हल्बी भाषाओं में प्रसारण से स्थानीय जुड़ाव मजबूत हुआ है और श्रोताओं की रुचि में वृद्धि हुई है। 

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि रेडियो की विश्वसनीयता और एआई की गति मिलकर जनसेवा को और अधिक सशक्त बनाएंगी और विकसित भारत के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प सभी के सहयोग से अवश्य साकार होगा।

कार्यक्रम में यूनेस्को के रीजनल एडवाइजर ऑफ कम्युनिकेशन एंड इनफॉर्मेशन हज़्ज़ाज़ मा'अली ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि रेडियो पूरी दुनिया में सबसे अधिक पहुंच रखता है और सबसे अधिक भरोसे वाला माध्यम है। रेडियो ने कठिन समय में भी अपनी विश्वसनीयता बनाए रखते हुए दुनिया को सही सूचनाएं प्रदान की। सुश्री अली ने कहा कि एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और इस दिशा में ठोस प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी रायपुर छत्तीसगढ़ी और हिंदी भाषा में पूरे प्रदेश विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों तक अपनी सेवाएं दे रहा है। सुश्री अली ने कहा कि यूनेस्को रेडियो के विस्तार के लिए आकाशवाणी के साथ मिलकर नवाचार और तकनीकी पहलुओं पर लगातार सहयोग करेगा। 

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव कुमार जैन, उप महानिदेशक व्ही. राजेश्वर, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

सी-डॉट को ‘सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन’ के लिए स्कॉच अवॉर्ड 2025, आपदा चेतावनी प्रणाली में देश को मिली बड़ी उपलब्धि

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नई दिल्ली- भारत सरकार के दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास के अग्रणी संस्थान सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) को उसकी स्वदेशी सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन (CBS) तकनीक के लिए प्रतिष्ठित “SKOCH Award-2025” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान “Resourcing Viksit Bharat” विषय पर आयोजित 104वें स्कॉच समिट के दौरान प्रदान किया गया।

स्कॉच अवॉर्ड देशभर में शासन और विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सरकारी एवं निजी संस्थानों, परियोजनाओं और व्यक्तियों को दिया जाता है। यह पुरस्कार वित्त, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनकल्याण जैसे क्षेत्रों में नागरिकों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली पहलों को मान्यता देता है।

C-DOT का सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन एक अत्याधुनिक आपदा एवं आपातकालीन चेतावनी मंच है, जो भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), केंद्रीय जल आयोग (CWC), भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS), रक्षा भू-सूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) और भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) जैसी संस्थाओं को एकीकृत करता है। यह प्लेटफॉर्म सभी मोबाइल ऑपरेटरों, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDMA) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से त्वरित चेतावनी संदेश प्रसारित करता है।

यह स्वदेशी, किफायती और पूर्णतः स्वचालित प्रणाली भौगोलिक रूप से लक्षित (Geo-targeted), बहु-आपदा और 21 भाषाओं में बहुभाषी चेतावनी देने में सक्षम है, जिससे आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र की ‘Early Warnings for All (EW4All)’, आईटीयू के कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप है।

इस अवसर पर C-DOT के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि यह सम्मान नागरिकों की सुरक्षा के लिए तकनीक को समर्पित करने के C-DOT के संकल्प की पहचान है। उन्होंने कहा कि सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों तक समय पर जीवनरक्षक जानकारी पहुंचाकर सार्वजनिक सुरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाता है। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को भी मजबूती प्रदान करती है और भारत को वैश्विक स्तर पर इस तकनीक के चुनिंदा प्रदाताओं में शामिल करती है।

C-DOT, दूरसंचार विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत एक प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्था है, जिसने डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान में C-DOT 5G, 6G, क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसे भविष्य की तकनीकों पर कार्य कर रहा है।

यह पुरस्कार C-DOT के ईवीपी डॉ. पंकज डलेला ने प्राप्त किया।

AI/ML आधारित समाधान से स्मार्ट और उपभोक्ता-केंद्रित बिजली वितरण की दिशा में भारत

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मनोहर लाल, ऊर्जा मंत्री, ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित अनुप्रयोग बुद्धिमान, उपभोक्ता-केंद्रित और स्व-संवर्धित वितरण नेटवर्क बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मंत्री ने यह बात दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही, जो कि बिजली वितरण क्षेत्र में AI/ML प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर केंद्रित था, और आज भारत मण्डपम, नई दिल्ली में आयोजित किया गया।

उन्होंने कहा कि AI/ML आधारित समाधान, स्मार्ट मीटर एनालिटिक्स, डिजिटल ट्विन्स, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, चोरी का पता लगाने वाली बुद्धिमत्ता, उपकरण-स्तरीय उपभोक्ता अंतर्दृष्टि, स्वचालित आउटेज पूर्वानुमान और GenAI आधारित निर्णय समर्थन उपभोक्ता अनुभव और संचालन दक्षता दोनों को बदल सकते हैं।

मनोहर लाल ने राष्ट्रीय सम्मेलन में उद्योग, राज्यों, नवाचारकों, अकादमिक संस्थानों और प्रौद्योगिकी साझेदारों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने वितरण कंपनियों (DISCOMs), एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सेवा प्रदाताओं (AMISPs), प्रौद्योगिकी समाधान प्रदाताओं (TSPs) और होम ऑटोमेशन समाधान प्रदाताओं (HASPs) द्वारा प्रस्तुत AI/ML समाधानों की प्रशंसा की।

मंत्री ने सभी DISCOMs से कहा कि वे पारिस्थितिकी तंत्र के सभी हितधारकों के साथ मिलकर स्मार्ट, भरोसेमंद और उपभोक्ता-केंद्रित वितरण प्रणाली की ओर संक्रमण करें। उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को सक्रिय रूप से शामिल करना आवश्यक है। यह महत्वपूर्ण है कि नई तकनीकों के चारों ओर कभी-कभी फैली भ्रांतियों को दूर किया जाए और तकनीक को अपनाने के लिए उपभोक्ताओं का बहुमूल्य समर्थन प्राप्त किया जाए।

मनोहर लाल ने कहा कि AI/ML आधारित समाधान यह दर्शाते हैं कि तकनीक विश्वास बहाल करने में सक्षम है, घरों को उनके खपत प्रबंधन में सशक्त बनाती है, आउटेज को होने से पहले रोकती है, ईमानदार उपभोक्ताओं को चोरी के बोझ से बचाती है और DISCOMs को नुकसान कम करने, पावर खरीद लागत को अनुकूलित करने और मजबूत अवसंरचना में पुनर्निवेश करने में सक्षम बनाती है—जो भारत को डिजिटल बिजली सुधार और भविष्य-तैयार ग्रिड प्रशासन में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करता है।

राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, पंकज अग्रवाल, सचिव, ऊर्जा मंत्रालय ने DISCOMs में डिजिटलीकरण को मजबूत करने और AI/ML आधारित समाधानों को अपनाने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला, जो संचालन और वित्तीय सुधारों में मापन योग्य लाभ देते हैं। उन्होंने क्षमता निर्माण, सुरक्षित डेटा-साझाकरण ढांचे और इंटरऑपरेबिलिटी के महत्व पर जोर दिया ताकि सम्मेलन में प्रदर्शित नवाचारों को देशव्यापी रूप से बढ़ाया जा सके और देश में ऊर्जा संक्रमण को सुविधाजनक बनाया जा सके।

सम्मेलन में नवाचार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आह्वान किया गया, और DISCOMs, AMISPs, TSPs और होम ऑटोमेशन समाधान प्रदाताओं से 195 आवेदन प्राप्त हुए। प्रारंभिक स्क्रीनिंग के बाद, 51 समाधानों को विस्तृत जूरी मूल्यांकन के लिए पहले दिन (6 दिसंबर, 2025) चुना गया।

विस्तृत मूल्यांकन के बाद, DISCOMs श्रेणी में TNPDCL (तमिलनाडु), MP East (मध्य प्रदेश), AMISP श्रेणी में Tata Power और Apraava, समाधान प्रदाता श्रेणी में Pravah और Flock Energy और होम ऑटोमेशन समाधान श्रेणी में Tata Power विजेता घोषित किए गए।

आज विजेताओं ने अपने प्रस्तुतिकरण में तमिलनाडु द्वारा राजस्व सुरक्षा के लिए उन्नत स्मार्ट मीटर एनालिटिक्स, MP East द्वारा नुकसान कम करने के लिए सटीक उपभोक्ता इंडेक्सिंग जैसी डेटा-आधारित नवाचारों को उजागर किया। AMISP जैसे TP Power Plus और Apraava Energy ने व्यवहार-आधारित डिमांड रिस्पॉन्स और AI आधारित संचालन स्वचालन प्रदर्शित किया, जबकि TSPs जैसे Pravah और Flock Energy ने वास्तविक समय ग्रिड बुद्धिमत्ता और उपभोक्ता उपकरण एनालिटिक्स को प्रदर्शित किया। Tata Power ने ऊर्जा उपयोग की निगरानी और नियंत्रण के लिए भविष्यवादी और उपयोगकर्ता-मित्रवत समाधान प्रस्तुत किया।

विजेताओं को ऊर्जा मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया और उन्होंने इन समाधानों को राज्यों में व्यापक रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

मनोहर लाल, ऊर्जा मंत्री ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा विकसित STELLAR (Strategic Expansion for Long Term Load Adequacy and Resilience) का भी शुभारंभ किया, जो DISCOMs को संसाधन पर्याप्तता अध्ययन करने और दीर्घकालिक पर्याप्तता योजनाएँ तैयार करने में सक्षम बनाएगा। साथ ही, इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम (ISGF) ने बिजली उपयोगिताओं के लिए AI, ML, AR/VR और रोबोटिक्स समाधान और रोडमैप पर हैंडबुक प्रस्तुत किया, जिसमें 174 उपयोग मामलों को हाइलाइट किया गया, जिनमें से 45 भारतीय उपयोगिताओं से संबंधित हैं।


डिजिटल छत्तीसगढ़: जिसने दूर रह रही बेटी को दिया सबसे बड़ा सहारा

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मीलों की दूरी मिटा दी तकनीक ने—डिजिटल छत्तीसगढ़ की मानवीय मिसाल

भुवनेश्वर में रहते हुए भी सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र किया प्राप्त 

छत्तीसगढ़ की डिजिटल व्यवस्था ने बनाया मुश्किल काम आसान

रायपुर- डिजिटल भारत अभियान और छत्तीसगढ़ शासन की ई-सेवाओं ने आम नागरिकों के जीवन को न सिर्फ आसान बनाया है, बल्कि समय, मेहनत और संसाधनों की बड़ी बचत भी सुनिश्चित की है। भुवनेश्वर में रहने वाली सोनम त्रिपाठी का अनुभव इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने डिजिटल सेवाओं के सहारे अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और अपनी बीमार माताजी के बैंक खाते को बिना किसी परेशानी के भुवनेश्वर में स्थानांतरित करवा लिया।


विवाह के बाद भुवनेश्वर में बस चुकी सोनम त्रिपाठी के माता-पिता बिलासपुर में ही रहते थे। पिता का निधन होने के बाद नगरपालिका बिलासपुर ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। लेकिन जब उनकी माताजी की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अपने साथ भुवनेश्वर ले जाना पड़ा, तब एक नई चुनौती सामने आई कि माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर। बैंक ने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का आग्रह किया, जिसकी जानकारी त्रिपाठी को पहले नहीं थी, और इसी कारण काम कुछ समय के लिए अटक  गया। इस दस्तावेज़ की आवश्यकता ने परिवार को असमंजस में डाल दिया।

इंटरनेट और डिजिटल छत्तीसगढ़ का मिला सहारा

सोनम त्रिपाठी ने समाधान की तलाश शुरू की और इंटरनेट की मदद से छत्तीसगढ़ के जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यालय का संपर्क नंबर प्राप्त किया। भुवनेश्वर से ही उन्होंने संबंधित कर्मचारी से संपर्क किया। कार्यालय कर्मचारी ने आवश्यक दस्तावेज़ों, ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रमाण पत्र प्राप्ति के चरणों की स्पष्ट एवं सहज जानकारी प्रदान की। डिजिटल व्यवस्था की बदौलत कुछ ही दिनों में उन्हें अपने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन उपलब्ध हो गया, और बैंक की समस्त औपचारिकताएँ तुरंत पूर्ण हो गईं।

डिजिटल सेवाएँ समय बचाती हैं, परेशानी दूर करती हैं —  सोनम त्रिपाठी

सोनम त्रिपाठी बताती हैं कि यदि उन्हें डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी पहले मिल जाती, तो उनका काम और पहले ही पूरा हो जाता। उनका कहना है कि बैंकिंग, सरकारी सहायता, संपत्ति, पेंशन और अन्य कार्यों में बाधा से बचने के लिए ऐसे दस्तावेज़ समय रहते बनवा लेना चाहिए। मैंने भी भुवनेश्वर से ही ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की और प्रमाण पत्र कुछ ही दिनों में प्राप्त हो गया।

उनका अनुभव बताता है कि सूचना की उपलब्धता, तकनीक का उपयोग और सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण किस प्रकार जटिल लगने वाले कामों को भी सरल और तेज बनाते हैं।

डिजिटल छत्तीसगढ़: अब हर नागरिक के ‘एक क्लिक’ पर सरकारी सेवाएँ

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण, शिकायत निवारण, प्रमाण पत्र उपलब्धता और विभिन्न सेवाओं के डिजिटलीकरण ने आमजन की परेशानी को काफी हद तक कम किया है। बिलासपुर से लेकर बस्तर तक हर कोई घर बैठे प्रमाण पत्र, आवेदन स्थिति और अन्य सेवाओं का लाभ उठा पा रहा है। इससे न केवल समय और ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि प्रक्रियाएँ पारदर्शी और विश्वसनीय भी बनी हैं।

सोनम त्रिपाठी की यह कहानी उन नागरिकों के लिए प्रेरणा है जो परंपरागत प्रक्रियाओं की कठिनाइयों से परेशान रहते हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि समय पर सूचना, सहयोगी प्रशासन और आधुनिक डिजिटल सेवाओं की सहायता से कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शीघ्रता और सरलता से पूरा किया जा सकता है।

डिजिटल छत्तीसगढ़ की यह मिसाल न केवल राज्य के डिजिटल परिवर्तन की सफलता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि डिजिटल भारत अभियान कैसे आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहा है।

छत्तीसगढ़ की डिजिटल सेवाएँ अब आम नागरिकों की जिंदगी में बदलाव ला रही हैं। भुवनेश्वर में रहते हुए भी सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर बिना किसी कठिनाई के पूरा कर लिया—यह हमारे ई-गवर्नेंस सिस्टम की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और दक्षता का प्रमाण है। “डिजिटल छत्तीसगढ़” का लक्ष्य ही यही है कि हर नागरिक को घर बैठे, एक क्लिक में, तेज़ और सरल तरीके से सरकारी सेवाएँ उपलब्ध हों।त्रिपाठी का यह अनुभव डिजिटल भारत अभियान और राज्य सरकार की नागरिक-केंद्रित कार्यशैली की सफलता को रेखांकित करता है। - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

भारत इंटरनेट गवर्नेंस फोरम (IIGF‑2025) का पांचवां संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न

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नई दिल्ली- भारत इंटरनेट गवर्नेंस फोरम (IIGF‑2025) का पांचवां संस्करण दो दिवसीय चर्चा के बाद आज संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम इंडिया हबिटेट सेंटर और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित किया गया। इस बहु-हितधारक सभा में केंद्रीय मंत्रालयों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, नागरिक समाज संगठनों, विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय निकायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारत में एक खुले, विश्वसनीय और समावेशी इंटरनेट इकोसिस्टम को बढ़ावा देने पर विचार विमर्श किया।

थीम और उप-थीम

इस वर्ष की थीम थी: “Advancing Internet Governance for an Inclusive and Sustainable Viksit Bharat”। 

फोरम ने तीन उप-थीमों पर विचार किया:

  1. समावेशी डिजिटल भविष्य

  2. लचीली और सतत विकास के लिए डिजिटल अवसंरचना

  3. लोग, ग्रह और प्रगति के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

 मुख्य चर्चाएँ और कार्यशालाएँ

  • चार पैनल चर्चाएँ और बारह कार्यशालाएँ आयोजित की गईं।

  • विषयों में ग्रामीण कनेक्टिविटी, ओपन डिजिटल सिस्टम, डोमेन नाम और DNS सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण, सामग्री मॉडरेशन और AI का नैतिक उपयोग शामिल थे।

  • यूनाइटेड नेशंस इंटरनेट गवर्नेंस फोरम, मेटा, गूगल क्लाउड, CCAOI और कई शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों ने वैश्विक और राष्ट्रीय दृष्टिकोण साझा किए।


मुख्य उद्घाटन भाषण

केंद्रीय राज्य मंत्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी,  जितिन प्रसाद ने उद्घाटन करते हुए कहा:

“डिजिटल प्रगति तभी संभव है जब सभी मिलकर काम करें। हमारा लक्ष्य हर नागरिक को सुरक्षित, किफायती और भरोसेमंद इंटरनेट पहुंचाना है। मजबूत 5G कवरेज, डिजिटल पब्लिक सिस्टम और डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के माध्यम से हम ऐसे वातावरण का निर्माण कर रहे हैं जो लोगों की सुरक्षा करे और नए अवसर खोले।”

सुशील पाल, संयुक्त सचिव, MeitY ने कहा कि IIGF ने भारत की डिजिटल यात्रा में प्रगति और AI के साथ उभरती चुनौतियों को उजागर किया है।

डॉ. देवेश त्यागी, CEO, NIXI ने कहा:

“भारत की इंटरनेट कहानी कई हितधारकों द्वारा लिखी जाएगी। IIGF ने इसे सुनिश्चित किया है कि हर आवाज़ मायने रखती है। विशेष हित समूह और इंटर्नशिप योजनाओं ने हजारों छात्रों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सक्रिय किया है।”

मुख्य निष्कर्ष

  • सार्वभौमिक और सार्थक इंटरनेट पहुंच भारत की डिजिटल यात्रा का मूल होना चाहिए।

  • डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और भरोसेमंद मानकों के माध्यम से विश्वास निर्माण आवश्यक है।

  • फोरम ने भारत और विश्व के लिए सुरक्षित, समावेशी और लचीले इंटरनेट के निर्माण के प्रति साझा प्रतिबद्धता के साथ समापन किया।

IIGF के बारे में

  • भारत इंटरनेट गवर्नेंस फोरम, संयुक्त राष्ट्र इंटरनेट गवर्नेंस फोरम का राष्ट्रीय अध्याय है।

  • इसे 2021 में स्थापित किया गया और यह बहु-हितधारक प्रारूप अपनाता है जिसमें सरकार, उद्योग, नागरिक समाज, तकनीकी समुदाय और शैक्षणिक संस्थान समान रूप से योगदान देते हैं।

  • IIGF‑2025 का आयोजन 27-28 नवंबर, 2025 को दिल्ली में किया गया।

अधिक जानकारी और IIGF समुदाय में भाग लेने के लिए: https://indiaigf.in/


स्वच्छता स्टार्टअप कॉन्क्लेव में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन स्टार्टअप्स के दूसरे कोहोर्ट का उद्घाटन

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भारत, जो अब दुनिया में तीसरे स्थान पर है और 100 से अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स का घर बन चुका है, स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार के लिए एक शक्ति बन गया है। इस तेजी को आगे बढ़ाते हुए, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने स्टार्टअप इनक्यूबेशन और इनोवेशन सेंटर (SIIC), IIT कानपुर के साथ साझेदारी में 24 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में स्वच्छता स्टार्टअप कॉन्क्लेव आयोजित किया, जहां स्वच्छता और कचरा प्रबंधन क्षेत्र के स्टार्टअप्स के दूसरे कोहोर्ट का शुभारंभ किया गया।

मुख्य बिंदु:

  • राज्य मंत्री, MoHUA, टोकन साहू ने स्टार्टअप्स के दूसरे कोहोर्ट का उद्घाटन किया।

  • टोकन साहू ने बताया कि पिछले दशक में स्वच्छ भारत मिशन–अर्बन (SBM-U) ने पारंपरिक कचरा प्रबंधन को अत्याधुनिक, तकनीक-संचालित समाधानों में बदल दिया है। स्टार्टअप्स के साथ जुड़कर युवा नवाचारकों को सशक्त बनाना, रोजगार सृजन और स्थायी शहरों के निर्माण में मदद कर रहा है।

  • मिशन ने स्थानीय स्तर पर विकसित, लागत-कुशल नवाचारों और व्यवसाय मॉडल को अपनाने पर जोर दिया है, और ‘वोकल फॉर लोकल’ व ‘मेक इन इंडिया’ के दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया है।

  • स्वच्छता स्टार्टअप चैलेंज 2022 के पहले कोहोर्ट में 230+ आवेदन प्राप्त हुए थे, जिसमें से 30 स्टार्टअप्स को तकनीकी और वित्तीय समर्थन के लिए चुना गया। इन स्टार्टअप्स ने 300+ लाख लीटर अपशिष्ट जल का उपचार, 63,000+ मीट्रिक टन कचरा प्रबंधित, 15,000 मीट्रिक टन सड़क कचरा साफ किया और 200 मीट्रिक टन जैविक कचरा प्रोसेस किया। इनकी कुल वैल्यू ₹500 करोड़ से अधिक है और 2,000 से अधिक रोजगार सृजित किए गए।

  • कोहोर्ट 2 में 32 स्टार्टअप्स शामिल हैं, जो सर्कुलर वेस्ट मैनेजमेंट, सेग्रिगेशन, डेस्लडिंग और वेस्ट-टू-एनर्जी जैसे क्षेत्रों में नवाचार कर रहे हैं। IIT कानपुर और शहरी स्थानीय निकायों के सहयोग से इन्हें मेंटरशिप, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मार्केट एक्सेस प्रदान किया जाएगा।

लक्ष्य:

MoHUA का लक्ष्य कचरा प्रबंधन स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करना और एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जहां स्टार्टअप्स, निवेशक, शहरी स्थानीय निकाय और अन्य हितधारक आपस में जुड़ सकें। इस पहल के माध्यम से तकनीक-संचालित, स्वच्छ और टिकाऊ शहरी समाधानों को तेजी से अपनाया जा सकेगा।

यह कार्यक्रम स्वच्छ भारत मिशन–अर्बन के तहत तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप सहभागिता को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पूरे देश में स्वच्छ, टिकाऊ और आत्मनिर्भर शहरी वातावरण के निर्माण में योगदान देगा।

ग्रामीण तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए RuTAG 2.0 की वार्षिक समीक्षा बैठक IIT गुवाहाटी में सम्पन्न

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भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA), प्रो. अजय कुमार सूद ने ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह (RuTAG) 2.0 की दूसरी वार्षिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। यह पहल प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) की ओर से चलाई जा रही है। बैठक 13 और 14 नवंबर 2025 को इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IIT) गुवाहाटी में आयोजित की गई। बैठक में डॉ. पर्विंदर मैनी, वैज्ञानिक सचिव, OPSA और डॉ. राकेश कौर, सलाहकार/वैज्ञानिक ‘G’, OPSA एवं RuTAG समन्वयक भी शामिल हुए।

बैठक के उद्घाटन सत्र की शुरुआत प्रो. सशिंद्र कुमार काकोटी, IIT गुवाहाटी के स्वागत भाषण के साथ हुई, जिन्होंने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में ग्रामीण तकनीकों को बढ़ावा देने और सतत आजीविका के लिए नवाचार की दिशा में संस्थान की पहल को रेखांकित किया। डॉ. कौर ने RuTAG 2.0 की 2024-25 की प्रगति का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें सात केंद्रों की उपलब्धियों और राज्य विभागों, उद्योगों और सामुदायिक संगठनों के साथ सहयोग का विस्तार शामिल था। प्रो. देवेंद्र जलीहल, निदेशक, IIT गुवाहाटी; डॉ. हफ़्सा अहमद, वैज्ञानिक ‘D’, OPSA; और डिबोजित पाठक, तकनीकी स्टाफ, OPSA भी सत्र में उपस्थित रहे।

अपने मुख्य भाषण में प्रो. सूद ने ग्रामीण भारत में जीवन स्तर सुधारने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “RuTAG हमारे अनुसंधान संस्थानों को ग्रामीण समुदायों की जरूरतों से जोड़ता है और यह सुनिश्चित करता है कि वैज्ञानिक ज्ञान सशक्तिकरण का एक उपकरण बने। जब ग्रामीण भारत स्थानीय विकसित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होगा, तो यह आत्मनिर्भरता की नींव को मजबूत करेगा।” उन्होंने RuTAG केंद्रों में गुणवत्ता, मानकीकरण और सहयोग बनाए रखने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. पर्विंदर मैनी ने कहा, “जब वैज्ञानिक प्रयास स्थानीय जरूरतों पर केंद्रित होते हैं, तो यह ग्रामीण आजीविका को बदल सकता है। अगले चरण में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि RuTAG के तहत विकसित हर तकनीक लोगों तक स्थायी और प्रभावी तरीके से पहुंचे।” उन्होंने स्व-सहायता समूहों, सूक्ष्म उद्यमों और स्थानीय नवाचारकों के साथ जुड़ाव बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रो. जलीहल ने RuTAG 2.0 से उन तकनीकों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया जिनका क्षेत्रीय परिनियोजन और मापनीय प्रभाव स्पष्ट हो। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम परिपक्वता की स्थिति तक पहुंच चुका है और केंद्रों को वास्तविक ग्रामीण चुनौतियों को हल करने वाले समस्या विवरणों का चयन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समाधान केवल प्रोटोटाइप तक सीमित न रहें, बल्कि व्यापक रूप से अपनाए जाएं।

PSA प्रो. सूद ने RuTAG 2.0 वार्षिक प्रगति रिपोर्ट 2024-25 जारी की, जिसमें कृषि, पशुपालन, पश्च-फसल प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, जल शुद्धिकरण और ग्रामीण हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में 56 से अधिक चल रहे परियोजनाओं का विवरण है, जिनमें कई प्रोटोटाइप और क्षेत्रीय परिनियोजन चरणों तक पहुंच चुकी हैं। प्रो. सूद ने IIT गुवाहाटी में कृषि एवं जलवोल्टिक्स नवाचार केंद्र (CIAAV) और वेलनेस-प्रोडक्ट नवाचार के लिए एकीकृत सुविधा (IFWPI) का भी उद्घाटन किया। इस केंद्र का उद्देश्य कृषि और जलवोल्टिक्स, वेलनेस-उत्पाद विकास में अंतरविषयक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना है, जिससे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में ग्रामीण उद्यमिता और आजीविका सृजन को सुदृढ़ किया जा सके।

एक ग्रासरूट नवाचार और स्टार्टअप प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया, जिसमें RuTAG केंद्रों और RuTAG 2.0 कार्यक्रम के तहत साझेदार संगठनों द्वारा विकसित तकनीक और प्रोटोटाइप प्रदर्शित किए गए। ड्रोन-आधारित ग्रामीण अनुप्रयोगों का भी School of Agro and Rural Technology (SART), IIT गुवाहाटी में प्रदर्शन किया गया।

समीक्षा सत्रों के दौरान सभी सात RuTAG केंद्रों (IIT गुवाहाटी, SKUAST-कश्मीर, IIT दिल्ली, IIT बॉम्बे, IIT रुड़की, ICAR-NAARM हैदराबाद और IIT मद्रास) ने अपनी वार्षिक प्रगति प्रस्तुत की और क्षेत्रीय कार्यान्वयन से मिली अंतर्दृष्टियाँ साझा की। चर्चा का फोकस प्रमाणित तकनीकों को स्केल करने, अंतर-केंद्र सहयोग बढ़ाने और सरकारी विभागों, उद्योग और स्थानीय समुदायों के साथ साझेदारी स्थापित करने पर रहा।

साइडलाइन पर एक हितधारक बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER), सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), उत्तर प्रदेश सरकार, North East Centre for Technology Application and Reach (NECTAR), Assam Science Technology and Environment Council (ASTEC), NABARD और Assam State Rural Livelihoods Mission (ASRLM) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन RuTAG 2.0 की रणनीतिक रोडमैप पर विचार-विमर्श के साथ हुआ, जिसका उद्देश्य सहयोगी विज्ञान, नवाचार और साझेदारियों के माध्यम से ग्रामीण विकास को और अधिक उन्नत बनाना है।

ESTIC 2025 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर उच्च स्तरीय पैनल चर्चा : भारत के जिम्मेदार एआई नवाचार और समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

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भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने उभरती विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार संगोष्ठी (ESTIC 2025) के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया।

इस सत्र की अध्यक्षता एस. कृष्णन, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने की। इसमें सरकार, शिक्षाजगत और उद्योग क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिन्होंने इस बात पर विचार-विमर्श किया कि भारत कैसे जिम्मेदारीपूर्वक एआई का उपयोग करते हुए नवाचार, समावेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को आगे बढ़ा सकता है।

यह सत्र आगामी इंडिया–एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी साबित हुआ, जिसमें भारत के उभरते एआई पारिस्थितिकी तंत्र — डिजिटल अवसंरचना का विस्तार, स्वदेशी बड़े भाषा मॉडलों (Large Language Models) का विकास, नैतिक एआई गवर्नेंस को सुदृढ़ करना, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना — जैसे विषयों पर केंद्रित चर्चाएँ होंगी।

मुख्य संबोधन

सत्र की शुरुआत करते हुए एस. कृष्णन, सचिव, MeitY ने कहा,

“किसी भी तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है — वह जीवन की गुणवत्ता को कैसे बेहतर बनाती है और देश के लोगों को क्या अवसर प्रदान करती है। भारत के लिए यह वास्तव में एक बड़ा अवसर है कि हम एआई जैसी क्षैतिज और व्यापक तकनीक का उपयोग करके 2047 तक ‘विकसित भारत (Viksit Bharat)’ के लक्ष्य की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ें।”

इंडियाAI मिशन की भूमिका पर प्रकाश

अभिषेक सिंह, अतिरिक्त सचिव, MeitY, महानिदेशक, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) एवं सीईओ, इंडियाAI मिशन ने कहा,

“एआई नवाचार के मार्ग खोलने के लिए इंडियाएआई मिशन हमारे पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद सभी खामियों को दूर करने पर केंद्रित है। भारत का सबसे बड़ा बल उसका मानव पूंजी है, लेकिन एआई मॉडल और अनुप्रयोग बनाने के लिए हमें किफायती कंप्यूटिंग, गुणवत्तापूर्ण डेटा सेट्स, और निरंतर निवेश की भी आवश्यकता है। मिशन की सात स्तंभों वाली रणनीति — सस्ती कंप्यूटिंग, डेटा प्लेटफ़ॉर्म, फाउंडेशन मॉडल्स, स्टार्टअप समर्थन, और सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई के लिए टूल्स — के माध्यम से हम एक ऐसा तंत्र बना रहे हैं जो भारत को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों के समकक्ष खड़ा करेगा। हमारा लक्ष्य ऐसे एआई अनुप्रयोग बनाना है जो न केवल भारत की जरूरतें पूरी करें बल्कि नवाचार, नैतिकता और विश्वास के वैश्विक मानक स्थापित करें।”

स्वदेशी एआई विकास की दिशा में प्रेरणा

डॉ. श्रीधर वेंबू, सह-संस्थापक एवं मुख्य वैज्ञानिक, Zoho Corporation ने कहा,

“हमें सीमित संसाधनों और बजट की चुनौतियों से उबरने के लिए एक अलग मार्ग तलाशना होगा। जब संसाधन सीमित होते हैं, तो वही प्रतिबंध हमें बेहतर और नवाचारी समाधान खोजने के लिए प्रेरित करते हैं। मेरा मानना है कि इस दिशा में नई विज्ञान की खोज होना बाकी है — एक ऐसी नींव जो पूरी तरह से बदल देगी कि हम इन समस्याओं को कैसे देखते और हल करते हैं।”

विभिन्न क्षेत्रों में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका

सत्र में अग्रणी शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं ने एआई की परिवर्तनकारी संभावनाओं पर अपने विचार रखे:

  • डॉ. गीता मंजनाथ, संस्थापक, सीईओ और सीटीओ, निरामाई हेल्थ एनालिटिक्स ने बताया कि एआई आधारित नवाचार स्तन कैंसर की पहचान को अधिक सुलभ और किफायती बना रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में असमानता कम हो रही है।

  • डॉ. श्रीराम राघवन, उपाध्यक्ष, आईबीएम रिसर्च (AI), ने खुले नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Open Innovation Ecosystems) की शक्ति पर प्रकाश डाला, जो एआई विकास को तीव्र गति प्रदान करते हैं।

  • डॉ. अमित शेठ एनसीआर चेयर प्रोफेसर और निदेशक, एआई संस्थान, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलाइना ने बताया कि सामान्य एआई से उद्देश्य-आधारित, डोमेन-विशिष्ट प्रणालियों की ओर संक्रमण से ऊर्जा, विनिर्माण और अन्य क्षेत्रों में उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

पैनल चर्चा — “नवाचार और समावेशन के लिए जिम्मेदार एआई”

इस विषय पर आयोजित पैनल चर्चा का संचालन शशि शेखर वैम्पति, सह-संस्थापक, DeepTech for Bharat Foundation एवं पूर्व सीईओ, प्रसार भारती ने किया।

इसमें प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया —

  • डॉ. हेरिक मयंक विन, सीटीओ, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), मुंबई

  • प्रो. बालारमन रवींद्रन, प्रमुख, डेटा साइंस एवं एआई विभाग, आईआईटी मद्रास

  • अभिषेक सिंह, अतिरिक्त सचिव, MeitY, सीईओ, इंडियाAI मिशन

  • डॉ. रिमझिम अग्रवाल, सह-संस्थापक एवं सीटीओ, ब्रेनसाइटएआई, बेंगलुरु

  •  देबजानी घोष, विशिष्ट फेलो, नीति आयोग एवं पूर्व अध्यक्ष, नैसकॉम

  • प्रो. पी. वेंकट रंगन, कुलपति, अमृता विश्व विद्यापीठम, कोयंबटूर

पैनल में भारत के एआई पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न पहलुओं — डिजिटल अवसंरचना का विस्तार, स्वदेशी बड़े भाषा मॉडल्स का विकास, नैतिक एआई शासन की मजबूती, और वैश्विक साझेदारी को प्रोत्साहन — पर विस्तृत चर्चा हुई।

विशेष बल इस बात पर दिया गया कि तकनीकी प्रगति को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं और सामाजिक समावेशन के लक्ष्यों के साथ संतुलित किया जाए।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने जारी की भारत एआई गवर्नेंस गाइडलाइंस, जिम्मेदार और समावेशी एआई अपनाने की दिशा में बड़ा कदम

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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आज इंडियाAI मिशन के तहत भारत एआई गवर्नेंस गाइडलाइंस (India AI Governance Guidelines) जारी कीं — जो विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षित, समावेशी और जिम्मेदार एआई (AI) अपनाने के लिए एक व्यापक रूपरेखा (framework) प्रस्तुत करती हैं।

इन दिशानिर्देशों का औपचारिक विमोचन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने किया। इस अवसर पर एस. कृष्णन, सचिव, MeitY; अभिषेक सिंह, अतिरिक्त सचिव, MeitY, सीईओ इंडियाAI मिशन और डीजी, एनआईसी; कविता भाटिया, वैज्ञानिक ‘जी’ एवं जीसी, MeitY और सीओओ इंडियाAI मिशन; तथा प्रो. बी. रवींद्रन, आईआईटी मद्रास उपस्थित थे। साथ ही डॉ. प्रीति बंजल, सलाहकार एवं वैज्ञानिक ‘जी’ और डॉ. पर्विंदर मैनी, वैज्ञानिक सचिव, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय से भी इस अवसर पर उपस्थित रहीं।

इन दिशानिर्देशों का विमोचन इंडिया–एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिससे भारत उत्तरदायी एआई शासन (Responsible AI Governance) में अपनी नेतृत्व भूमिका को और सुदृढ़ कर रहा है।

इन गाइडलाइंस में एक मजबूत शासन ढांचा प्रस्तुत किया गया है, जिसका उद्देश्य सुरक्षित, नवोन्मेषी और मानव-केंद्रित एआई विकास को प्रोत्साहित करना है, साथ ही व्यक्तियों और समाज के लिए संभावित जोखिमों को कम करना है। यह ढांचा चार प्रमुख घटकों पर आधारित है —

  1. सात मार्गदर्शक सिद्धांत (सूत्र) – नैतिक एवं उत्तरदायी एआई के लिए

  2. छह स्तंभों पर आधारित शासन संबंधी प्रमुख सिफारिशें

  3. लघु, मध्यम और दीर्घकालिक कार्ययोजना

  4. उद्योग, डेवलपर्स और नियामकों के लिए व्यावहारिक दिशानिर्देश, ताकि एआई प्रणालियों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके

इस अवसर पर एस. कृष्णन, सचिव, MeitY ने कहा,

“हमारा ध्यान जहाँ भी संभव हो, मौजूदा कानूनों का उपयोग करने पर है। इस रूपरेखा का मूल केंद्र ‘मानव-केंद्रितता (Human-Centricity)’ है — यह सुनिश्चित करना कि एआई मानवता की सेवा करे और लोगों के जीवन को बेहतर बनाए, साथ ही संभावित हानियों को संबोधित करे।”

प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा,

“इस ढांचे का मूल सिद्धांत बहुत स्पष्ट है — ‘Do No Harm’ (हानि मत पहुँचाओ)। हमारा ध्यान नवाचार के लिए सैंडबॉक्स तैयार करने और जोखिम न्यूनीकरण सुनिश्चित करने पर है, ताकि यह प्रणाली लचीली और अनुकूलनीय बनी रहे। इंडियाएआई मिशन इस पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त करेगा और विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों के लिए प्रेरणा बनेगा।”

अभिषेक सिंह, अतिरिक्त सचिव, MeitY, सीईओ इंडियाAI मिशन और डीजी, एनआईसी ने कहा,

“समिति ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद एक प्रारूप तैयार किया, जिसे सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया। प्राप्त सुझावों से विभिन्न क्षेत्रों की सक्रिय भागीदारी झलकती है। एआई के तेजी से विकसित होते परिदृश्य को देखते हुए दूसरी समिति का गठन किया गया, जिसने सुझावों को समाहित कर अंतिम दिशानिर्देश तैयार किए। भारत सरकार का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि एआई सुलभ, किफायती और समावेशी बने, साथ ही सुरक्षित, विश्वसनीय और उत्तरदायी नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो।”

ये दिशानिर्देश आईआईटी मद्रास के प्रो. बालारमन रवींद्रन की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा तैयार किए गए हैं, जिसमें नीति आयोग, MeitY, डॉट, माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च इंडिया, ट्राइलीगल, iSPIRT फाउंडेशन तथा अन्य नीति और उद्योग विशेषज्ञ शामिल हैं।

इन दिशानिर्देशों को नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के लिए एक मूलभूत संदर्भ दस्तावेज के रूप में देखा जा रहा है, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित, उत्तरदायी और समावेशी एआई अपनाने में सहयोग को प्रोत्साहित करेगा।
रिपोर्ट को http://indiaai.gov.in/ पर देखा जा सकता है।

 इंडियाएआई हैकाथॉन फॉर मिनरल टार्गेटिंग के विजेता घोषित

इस अवसर पर इंडियाएआई मिशन के Applications Development Pillar और भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (GSI), खनन मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इंडियाएआई हैकाथॉन फॉर मिनरल टार्गेटिंग के विजेताओं की भी घोषणा की गई। इस हैकाथॉन का उद्देश्य एआई और मशीन लर्निंग के माध्यम से खनिज संसाधन पहचान (Mineral Prognostication) को सशक्त बनाना था।

विजेता टीमें इस प्रकार हैं:

🏆 प्रथम पुरस्कार (₹10 लाख): CricSM AI – Critical and Strategic Mineral Mapping with AI — प्रो. पार्थ प्रतिम मंडल, दिनेश मुंडा, लितन दत्ता, तनमय सिंह, साई सत्यम जेना और डॉ. प्रदीप कुमार शुक्ला

🥈 द्वितीय पुरस्कार (₹7 लाख): Knowledge and Data-Driven Mineral Targeting Approach — सौम्य मित्रा, सप्तर्षि मलिक, क्षौनीश पात्रा, संतु विश्वास

🥉 तृतीय पुरस्कार (₹5 लाख): SUVARN – Semi-Unsupervised Value-Adaptive Artificial Resource Network — सयंतनी भट्टाचार्य, डॉ. सब्यसाची नाग, अरुण ए., युवथिश कन्ना जी एस

⭐ विशेष पुरस्कार (₹5 लाख): AI और ML आधारित समाधान — दीपा कुमारी, अनामिका चौधरी, और संध्या जगन्नाथन, जिन्होंने REE, Ni-PGE, कॉपर, डायमंड, आयरन, मैंगनीज और गोल्ड जैसे खनिजों की खोज के नए संभावित क्षेत्रों की पहचान के लिए नवाचार किया।

यह घोषणा भारत की सुरक्षित, समावेशी और स्केलेबल एआई नवाचार की दिशा में यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत 19–20 फरवरी 2026, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की तैयारी कर रहा है, जिसमें वैश्विक नेताओं, नीति-निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाया जाएगा, ताकि People, Planet और Progress के लिए एआई की परिवर्तनकारी भूमिका पर चर्चा की जा सके।

तीन प्रमुख ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज के लिए आवेदन शुरू — कुल पुरस्कार राशि ₹5.85 करोड़

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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा सितंबर 2025 में घोषित तीन प्रमुख ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन प्रतियोगिताओं की कुल पुरस्कार राशि ₹5.85 करोड़ रखी गई है। 

ये तीन पहलें —
1️⃣ AI for All: Global Impact Challenge,
2️⃣ AI by HER: Global Impact Challenge, 
3️⃣ YUVAi: Global Youth Challenge —
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ऐसे परिवर्तनकारी नवाचारों की पहचान, पोषण और प्रदर्शन के लिए शुरू की गई हैं, जिनमें सामाजिक और आर्थिक प्रभाव उत्पन्न करने की अपार क्षमता है।

प्रतियोगिताएं आधिकारिक वेबसाइट https://impact.indiaai.gov.in/ पर लाइव हैं। चयनित विजेताओं को मेंटॉरशिप, निवेशकों तक पहुंच, क्लाउड/कंप्यूट समर्थन और ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर अपने विचारों को विस्तार देने का अवसर मिलेगा।

चयनित नवाचारों को इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 (19–20 फरवरी 2026, नई दिल्ली) में प्रदर्शित किया जाएगा।

🔹 1. AI for All: Global Impact Challenge

यह प्रतियोगिता ऐसे एआई नवाचारों के लिए है जो राष्ट्रीय और वैश्विक जरूरतों को बड़े पैमाने पर पूरा करने में सक्षम हैं।
मुख्य क्षेत्र: कृषि, जलवायु व स्थिरता, शिक्षा, वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य, विनिर्माण, शहरी अवसंरचना व मोबिलिटी, और वाइल्डकार्ड/ओपन इनोवेशन।

पुरस्कार और सहयोग:

  • शीर्ष 10 विजेताओं के लिए ₹2.5 करोड़ तक के पुरस्कार।

  • 20 फाइनलिस्ट को इंडिया-एआई समिट में भाग लेने के लिए यात्रा सहायता।

  • निवेशकों, मेंटर्स और क्लाउड सुविधाओं तक पहुंच।
    पात्रता: विश्वभर के छात्र, शोधकर्ता, पेशेवर, कंपनियां और स्टार्टअप्स जिनके पास पायलट स्तर का या तैयार एआई समाधान हो।

🔹 2. AI by HER: Global Impact Challenge

यह विशेष रूप से महिला-नेतृत्व वाले एआई नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतियोगिता है। इसका आयोजन निति आयोग के वुमन एंटरप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म (WEP) द्वारा किया जा रहा है।

मुख्य क्षेत्र: कृषि, साइबर सुरक्षा, डिजिटल वेलबीइंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा व जलवायु, और वाइल्डकार्ड/ओपन इनोवेशन।

पुरस्कार और सहयोग:

  • शीर्ष 10 विजेताओं को ₹2.5 करोड़ तक के पुरस्कार।

  • 30 फाइनलिस्ट को यात्रा सहायता।

  • जिम्मेदार एआई, निवेश तैयारी और स्टोरीटेलिंग पर वर्चुअल बूटकैंप।

  • निवेशकों के साथ विशेष सत्र और अवसर।
    पात्रता: महिला-नेतृत्व वाली टीमें, छात्र टीमें या महिला-नेतृत्व वाले संस्थान जिनके पास कार्यशील प्रोटोटाइप या एआई समाधान हो।

🔹 3. YUVAi: Global Youth Challenge

यह पहल 13–21 वर्ष के युवा नवाचारकों के लिए है, ताकि वे सार्वजनिक हित में एआई आधारित समाधान विकसित कर सकें।

मुख्य क्षेत्र: सामुदायिक सशक्तिकरण, प्रमुख क्षेत्रों में परिवर्तन, और स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण।

पुरस्कार और सहयोग:

  • कुल ₹85 लाख की पुरस्कार राशि।

  • शीर्ष 3 विजेताओं को ₹15 लाख प्रत्येक,

  • अगले 3 को ₹10 लाख प्रत्येक,

  • 2 विशेष मान्यता पुरस्कार ₹5 लाख प्रत्येक।

  • शीर्ष 20 प्रतिभागियों को यात्रा सहायता।

  • 10-दिवसीय वर्चुअल बूटकैंप और निवेशकों के सामने प्रस्तुति का अवसर।
    पात्रता: 13–21 वर्ष के युवा जिनके पास कार्यशील प्रोटोटाइप या एआई समाधान है।

🔹 प्रमुख तिथियां

  • आवेदन प्रारंभ: 10 अक्टूबर 2025

  • अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर 2025

  • वर्चुअल बूटकैंप: नवंबर 2025

  • फाइनलिस्ट की घोषणा: 31 दिसंबर 2025

  • ग्रैंड शोकेस: फरवरी 19–20, 2026 (नई दिल्ली)

🔹 आवेदन प्रक्रिया

सभी प्रतियोगिताओं के लिए आवेदन www.impact.indiaai.gov.in पोर्टल पर किए जा सकते हैं।
प्रत्येक चुनौती के पृष्ठ पर पात्रता, समयसीमा, दिशानिर्देश, और सामान्य प्रश्नों से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।


अब समुद्र से मिलेगा पीने का पानी!

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 नया साइफ़न-आधारित थर्मल डीसैलिनेशन सिस्टम : खारे समुद्र के पानी से सस्ता और तेज़ पीने का पानी

एक नया साइफ़न-आधारित थर्मल डीसैलिनेशन सिस्टम अब खारे समुद्री पानी को पीने योग्य मीठे पानी में बदल सकता है—मौजूदा तरीकों की तुलना में तेज़, सस्ता और अधिक भरोसेमंद।

पारंपरिक सोलर स्टिल्स जो प्रकृति के जलचक्र की नकल करते हैं, लंबे समय से जल शोधन के सरल उपकरण माने जाते रहे हैं। लेकिन इनमें दो प्रमुख चुनौतियाँ आती हैं:

  • नमक जमना – वाष्पीकरण सतह पर परत जम जाती है, जिससे जल प्रवाह रुक जाता है।

  • सीमा बाधाएँ – विकिंग (wicking) सामग्री पानी को केवल 10–15 सेमी तक ही खींच सकती है, जिससे उत्पादन सीमित रहता है।

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने इन दोनों चुनौतियों को एक सरल सिद्धांत—साइफ़न प्रक्रिया (siphonage)—से हल किया है।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

सिस्टम के केंद्र में है एक कंपोज़िट साइफ़न:

  • कपड़े की विक सतत रूप से खारे पानी को खींचती है।

  • गुरुत्वाकर्षण पानी को निरंतर प्रवाहित करता है।

  • नमक जमने से पहले ही बहकर निकल जाता है, जिससे सतह साफ़ रहती है।

खारा पानी एक गर्म धातु सतह पर पतली परत में फैलता है, वाष्पित होता है और पास ही ठंडी सतह पर (सिर्फ़ 2 मिमी की दूरी पर) संघनित होकर मीठे पानी में बदल जाता है। यह अत्यंत संकीर्ण एयर-गैप दक्षता को बढ़ाता है और सूर्य की रोशनी में प्रति वर्ग मीटर प्रति घंटे 6 लीटर से अधिक साफ़ पानी उपलब्ध कराता है—जो पारंपरिक सोलर स्टिल्स से कई गुना अधिक है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • बहु-स्तरीय डिज़ाइन: गर्मी का पुन: उपयोग करके अधिकतम उत्पादन।

  • कम लागत और टिकाऊ: केवल एल्युमिनियम और कपड़े जैसे साधारण पदार्थों से निर्मित।

  • ऊर्जा लचीला: सौर ऊर्जा या अपशिष्ट ऊष्मा से संचालित।

  • नमक प्रतिरोधी: 20% तक खारे पानी को भी बिना अवरुद्ध हुए शुद्ध कर सकता है।

संभावित उपयोग

  • दूरदराज़ और ऑफ-ग्रिड समुदाय

  • आपदा प्रभावित क्षेत्र

  • शुष्क तटीय इलाके

  • द्वीप देश

यह शोध पत्रिका Desalination में प्रकाशित हुआ है और भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा समर्थित है।

शोधकर्ताओं के शब्दों में, यह तकनीक है—“स्केलेबिलिटी, नमक-प्रतिरोध और सरलता”—एक प्यासे विश्व के लिए समाधान।


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