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Union Budget 2026–27 में पर्यटन विकास: भारत को वैश्विक पर्यटन और मेडिकल टूरिज्म हब बनाने की रणनीति

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा में मंदिरों और मठों के संरक्षण, तीर्थ केंद्रों के विकास और कनेक्टिविटी व सुविधाओं में सुधार का प्रस्ताव है।

  • भारत पहला ग्लोबल बिग कैट समिट आयोजित करेगा, जिसमें 95 देशों के नेता और मंत्री भाग लेंगे, जिससे इको-टूरिज्म में भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका मजबूत होगी।

  • पूर्वोदय राज्यों में पाँच प्रमुख पर्यटन स्थल विकसित किए जाएंगे और कनेक्टिविटी के लिए 4,000 ई-बसें दी जाएंगी।

  • पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे ताकि भारत मेडिकल टूरिज्म का वैश्विक केंद्र बन सके।

  • 15 पुरातात्विक स्थलों (जैसे लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, सारनाथ, हस्तिनापुर, लेह पैलेस आदि) को सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

परिचय

पर्यटन भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो रोजगार, विदेशी मुद्रा और क्षेत्रीय विकास में बड़ी भूमिका निभाता है।
2025 के पर्यटन डेटा के अनुसार:

  • पर्यटन का कुल योगदान GDP में 5.22% है।

  • प्रत्यक्ष योगदान 2.72% है।

  • रोजगार में कुल योगदान 13.34% और प्रत्यक्ष रोजगार 5.82% है।

इसलिए सरकार ने पर्यटन को एक रणनीतिक विकास क्षेत्र माना है और बजट 2026–27 में इसे मजबूत करने के लिए कई योजनाएँ घोषित की हैं।

Union Budget 2026–27: पर्यटन से जुड़े प्रमुख घोषणाएँ

थीम आधारित और गंतव्य आधारित पर्यटन विकास

  • पूर्वोत्तर भारत में बौद्ध सर्किट विकास योजना शुरू की जाएगी।

  • इसमें मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थ केंद्र, कनेक्टिविटी सुधार और सुविधाएँ शामिल होंगी।

  • इससे आध्यात्मिक पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

यह योजना पहले की स्वदेश दर्शन योजना (2014–15) और स्वदेश दर्शन 2.0 पर आधारित है।

इको-टूरिज्म और कनेक्टिविटी

  • हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, अराकू घाटी और पश्चिमी घाट में प्राकृतिक ट्रेल्स और पर्वतीय पर्यटन विकसित होंगे।

  • ओडिशा, कर्नाटक और केरल में कछुआ ट्रेल्स और आंध्र प्रदेश में बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स विकसित होंगे।

  • रेल और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाई जाएगी ताकि दूरस्थ पर्यटन स्थलों तक पहुँच आसान हो।

ग्लोबल बिग कैट समिट 2026

  • भारत 2026 में पहला वैश्विक बिग कैट सम्मेलन आयोजित करेगा।

  • इसमें 95 देशों के नेता और मंत्री भाग लेंगे।

  • इसका उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, वैज्ञानिक सहयोग और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देना है।

  • भारत के पास 7 में से 5 बड़ी बिल्ली प्रजातियाँ हैं –

    • बाघ,

    • शेर,

    • तेंदुआ,

    • हिम तेंदुआ,

    • चीता।

संस्थागत और मानव संसाधन सुधार

  • नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट को अपग्रेड कर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी बनाया जाएगा।

  • 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10,000 टूरिस्ट गाइड्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  • इससे पर्यटन सेवाओं की गुणवत्ता और रोजगार बढ़ेगा।

डिजिटल और विरासत अवसंरचना

  • नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड बनाया जाएगा, जिससे पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों का डिजिटल दस्तावेज़ बनेगा।

  • 15 ऐतिहासिक स्थलों को इमर्सिव सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र बनाया जाएगा, जैसे:

    • लोथल

    • धोलावीरा

    • राखीगढ़ी

    • सारनाथ

    • हस्तिनापुर

    • लेह पैलेस

मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म

  • 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित होंगे।

  • इसमें आधुनिक अस्पताल, आयुष केंद्र, पुनर्वास सुविधाएँ और मेडिकल टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होगा।

  • भारत को वैश्विक हेल्थ टूरिज्म हब बनाने का लक्ष्य है।

 पूर्वोदय राज्यों पर विशेष ध्यान

  • बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में 5 प्रमुख पर्यटन स्थल विकसित होंगे।

  • 4,000 इलेक्ट्रिक बसें कनेक्टिविटी के लिए दी जाएंगी।

  • उद्देश्य: पूर्वी भारत को पर्यटन और विकास का नया केंद्र बनाना।

निष्कर्ष

Union Budget 2026–27 में पर्यटन को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बनाने की रणनीति अपनाई गई है।
सरकार का फोकस:

  • बुनियादी ढाँचा

  • सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत संरक्षण

  • डिजिटल सिस्टम

  • कौशल विकास

  • मेडिकल और इको-टूरिज्म

  • क्षेत्रीय विकास

इन कदमों से रोजगार बढ़ेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और भारत वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख गंतव्य बनेगा।


आदिवासी क्षेत्रों में होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने दिशा-निर्देश जारी किए

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आदिवासी क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पहल

पर्यटन मंत्रालय ने आदिवासी क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए “आदिवासी क्षेत्रों में होमस्टे का विकास” हेतु राज्य सरकारों और UT प्रशासन के लिए दिशानिर्देश और प्रस्ताव तैयार करने का टेम्पलेट जारी किया है। यह पहल प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA) के तहत स्वदेश दर्शन योजना का एक उप-योजना है।

इस पहल का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में होमस्टे विकसित करना, जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना और आदिवासी समुदायों के लिए रोज़गार व आजीविका के अवसर बढ़ाना है।

दिशानिर्देशों में होमस्टे मालिकों के तकनीकी कौशल विकास और प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इस योजना के तहत:

  • 1000 होमस्टे विकसित किए जाएंगे।

  • ग्राम समुदाय की आवश्यकताओं के लिए प्रति होमस्टे 5 लाख रुपये तक सहायता।

  • प्रत्येक परिवार के लिए दो नए कमरे बनाने के लिए 5 लाख रुपये तक सहायता।

  • मौजूदा कमरों के नवीनीकरण के लिए 3 लाख रुपये तक सहायता।

चुनौती आधारित पर्यटन स्थल विकास

स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत ‘Challenge Based Destination Development’ उप-योजना तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य पर्यटक अनुभव को बेहतर बनाना और पर्यटन स्थलों को सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है।

ग्रामीण पर्यटन और सतत पर्यटन को बढ़ावा

पर्यटन मंत्रालय भारत को समग्र रूप में बढ़ावा देता है, विभिन्न पहलों के माध्यम से।

  • ग्रामीण होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना।

  • ग्रामीण पर्यटन स्थलों और उत्पादों का प्रचार मंत्रालय की वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से।

ग्रीन और इको पर्यटन के विकास हेतु:

  • मंत्रालय ने राष्ट्रीय इको पर्यटन और सतत पर्यटन रणनीतियाँ तैयार की हैं।

  • Travel for LiFE कार्यक्रम शुरू किया गया है, ताकि देश में सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके और पर्यटकों एवं पर्यटन व्यवसायों को सतत पर्यटन प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

यह जानकारी आज लोकसभा में पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत द्वारा लिखित उत्तर में दी गई।


त्रिपुरा में माताबाड़ी पर्यटन सर्किट को मॉडल गंतव्य के रूप में विकसित करने पर हुई समीक्षा बैठक

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केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा की उपस्थिति में त्रिपुरा के माताबाड़ी पर्यटन सर्किट के विकास को लेकर एक समीक्षा बैठक की। बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) के राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, मंत्रालय के सचिव तथा केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में माताबाड़ी सर्किट को एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की समग्र रणनीति की समीक्षा की गई। इस दौरान क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया, ताकि पर्यटन से उत्पन्न अवसरों के माध्यम से स्थानीय लोगों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित हो और उन्हें स्थायी आजीविका के साधन प्राप्त हों।

सिंधिया ने कहा कि त्रिपुरा के इतिहासकारों को भी पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्हें पर्यटक गाइड और सहायकों के प्रशिक्षण में भागीदार बनाया जाए, ताकि राज्य के इतिहास की प्रामाणिक जानकारी पर्यटकों तक पहुंच सके। इस प्रक्रिया को संस्थागत स्वरूप देते हुए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों का समन्वय किया जाना चाहिए।

चर्चा के दौरान इस बात पर बल दिया गया कि त्रिपुरा की सुंदरता उसकी प्राचीन ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक परिवेश में जीवंत बनाए रखने में निहित है। माताबाड़ी सर्किट के विकास में राज्य के इतिहास की स्पष्ट झलक दिखनी चाहिए और सौम्य सौंदर्यशास्त्र (सॉफ्ट एस्थेटिक्स) को बनाए रखा जाना चाहिए। साथ ही, स्थानीय त्रिपुरा व्यंजनों को पर्यटक अनुभव का अभिन्न हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि पर्यटन सर्किट में एक उच्चस्तरीय और विशिष्ट (निच) घटक भी शामिल होना चाहिए, जिससे प्रमुख आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्र के खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। निच और हाई-एंड पर्यटन को जन-आधारित पर्यटन सर्किट के साथ समन्वयित कर अधिकतम लाभ प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। त्रिपुरा के पर्यटन मंत्री को इस मॉडल को मार्गदर्शक उदाहरण के रूप में आगे बढ़ाने की सलाह दी गई, ताकि माताबाड़ी सर्किट न केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र बल्कि पूरे देश के लिए पर्यटन विकास का मानक बन सके।

बैठक के अंत में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना की गई, जिनके मार्गदर्शन में राज्य में पर्यटन विकास के लिए संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण आकार ले रहा है।

पूर्वोत्तर में एकीकृत पर्यटन विकास को गति: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 4वीं उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स बैठक में किया मार्गदर्शन

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केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री, ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज नई दिल्ली में आयोजित पर्यटन पर 4वीं उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स (HLTF) बैठक में भाग लिया। इस बैठक की अध्यक्षता मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने की। इसमें त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, सिक्किम के पर्यटन मंत्री त्शेरिंग टी. भूटिया, अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन मंत्री पासंग दोर्जे सोना तथा पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम.आर. सिनरेम भी उपस्थित रहे।

बैठक ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक एकीकृत और क्रियाशील पर्यटन ब्लूप्रिंट तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया। इसमें प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने, चुनौतियों की पहचान करने और राज्यों के बीच समन्वित कार्यान्वयन को तेज करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक के प्रमुख बिंदु इस प्रकार रहे:

🌄 पर्यटन क्षमता को अनलॉक करने पर जोर

  • मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करना

  • विश्वस्तरीय पर्यटन अवसंरचना का विकास

  • वैश्विक आकर्षण वाले प्रमुख पर्यटन स्थलों का निर्माण

  • एडवेंचर एवं इको-टूरिज्म को बढ़ावा

  • संस्कृति, प्रकृति और विरासत आधारित नए पर्यटन उत्पाद विकसित करना

🧭 कौशल विकास व सेवा मानकीकरण

  • स्थानीय युवाओं के लिए स्किलिंग इकोसिस्टम का विस्तार

  • सेवा मानकों को एकरूप करना

  • क्षमता-विकास को सुदृढ़ कर सतत उद्योग विकास को बढ़ावा

🌐 उत्तरी-पूर्व का एकीकृत ब्रांडिंग अभियान

  • पूर्वोत्तर भारत को एक प्रीमियम पर्यटन क्षेत्र के रूप में वैश्विक मंच पर स्थापित करना

  • नीतिगत प्रक्रियाओं को सरल बनाकर निजी निवेश आकर्षित करना

  • राज्यों के बीच मजबूत समन्वय से सहज पर्यटन सर्किट विकसित करना

🗣️ मंत्री सिंधिया के प्रमुख विचार

मंत्री सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत, भारत की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर का शक्ति-केंद्र है और इसे देश के सबसे आकर्षक पर्यटन गंतव्यों में परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया:

  • अंतिम मील कनेक्टिविटी का सुदृढ़ीकरण

  • स्थिरता-आधारित पर्यटन विकास

  • हर राज्य के प्रमुख त्योहारों का वार्षिक कैलेंडर तैयार करना

📝 अगले कदम

केंद्रीय मंत्री ने मेघालय सरकार से अनुरोध किया कि सभी सदस्यों की सुझावों को शामिल कर अंतिम HLTF रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

यह बैठक पूर्वोत्तर क्षेत्र में टिकाऊ, समन्वित और व्यापक पर्यटन विकास की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुई।

गंगटोक में आयोजित होगा उत्तर-पूर्व क्षेत्र का 13वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट 2025

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भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए 13वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (ITM) का आयोजन 13 से 16 नवंबर 2025 तक गंगटोक, सिक्किम में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत करेंगे। इस अवसर पर सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उत्तर-पूर्वी राज्यों के पर्यटन मंत्री एवं पर्यटन मंत्रालय तथा राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट, पर्यटन मंत्रालय की एक वार्षिक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य उत्तर-पूर्वी क्षेत्र — “भारत की अष्टलक्ष्मी” — की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करना है। यह आयोजन क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए सतत और समावेशी पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। गंगटोक में आयोजित यह 13वां संस्करण मंत्रालय की इस प्रतिबद्धता को दोहराता है कि उत्तर-पूर्व को ईको-टूरिज़्म, वेलनेस, संस्कृति और एडवेंचर के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा।

गंगटोक में इस आयोजन का विशेष महत्व है। सिक्किम को सतत और जिम्मेदार पर्यटन का आदर्श राज्य माना जाता है। स्वच्छ प्राकृतिक सौंदर्य, जैविक खेती, आध्यात्मिक विरासत और जीवंत स्थानीय संस्कृति के कारण सिक्किम उस सामुदायिक और पर्यावरण-सचेत पर्यटन का उत्कृष्ट उदाहरण है जिसे मंत्रालय पूरे देश में प्रोत्साहित करना चाहता है। यह आयोजन मंत्रालय की ‘ट्रैवल फॉर लाइफ’ पहल के अनुरूप है।

13वें अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में देश-विदेश से व्यापक भागीदारी होगी। 19 देशों (जैसे स्पेन, थाईलैंड, फ्रांस, रूस, जर्मनी, वियतनाम आदि) से प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में 39 अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर, 5 अंतरराष्ट्रीय इन्फ्लुएंसर, 50 घरेलू खरीदार, 20 घरेलू इन्फ्लुएंसर एवं ट्रैवल मीडिया, और 91 घरेलू विक्रेता शामिल होंगे। आयोजन में तकनीकी सत्र, पैनल चर्चाएं, उत्पाद प्रस्तुतिकरण और B2B मीटिंग्स आयोजित की जाएंगी ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिल सके।

राज्य पर्यटन अधिकारियों के साथ चर्चाएं सिनेमैटिक टूरिज्म, होमस्टे, युवा उद्यमिता, डिजिटल नवाचार, स्थायित्व और साहसिक पर्यटन जैसे विषयों पर केंद्रित होंगी। कार्यक्रम में उत्तर-पूर्व की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, प्रतिभागियों को गंगटोक और उसके आसपास के प्रमुख स्थलों जैसे रुमटेक मठ, दो द्रुल छोर्टेन और नामग्याल तिब्बतोलॉजी संस्थान के तकनीकी भ्रमण का अवसर भी मिलेगा।

उत्पाद प्रस्तुतियों में वन्यजीव और नदी क्रूज़ पर्यटन, त्योहारों, विरासत, हस्तशिल्प, खानपान और साहसिक गतिविधियों जैसे क्षेत्रों की संभावनाएं प्रदर्शित की जाएंगी। आयोजन के बाद, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू प्रतिभागियों के लिए उत्तर-पूर्वी राज्यों के विभिन्न गंतव्यों की यात्राओं का आयोजन किया जाएगा ताकि वे क्षेत्र की सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें।

गंगटोक में आयोजित 13वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट 2025, उत्तर-पूर्व की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव होने के साथ-साथ, सरकार की इस दृष्टि को भी सुदृढ़ करता है कि उत्तर-पूर्व को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। अपनी शांत प्राकृतिक दृश्यों, जीवंत समुदायों और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता के साथ, सिक्किम इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रस्तुत करता है — जो एकता में विविधता और जिम्मेदार पर्यटन आधारित विकास की भावना का प्रतीक है।

विश्व पर्यटन दिवस 2025 : सतत, समावेशी और भविष्य उन्मुख पर्यटन की ओर भारत की पहल

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विश्व पर्यटन दिवस 2025 : पर्यटन और सतत रूपांतरण

भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने विश्व पर्यटन दिवस 2025 का आयोजन शनिवार, 27 सितंबर 2025 को किया। इस वर्ष का विषय था – “पर्यटन और सतत रूपांतरण”। इस अवसर पर सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और नागरिक समाज से जुड़े प्रमुख हितधारक एकत्रित हुए और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आर्थिक विकास तथा पर्यटन में सतत प्रथाओं को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे सुमन बेरी, उपाध्यक्ष, नीति आयोग।सुरेश गोपी, पर्यटन एवं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि सुमन बिल्ला, अतिरिक्त सचिव, पर्यटन मंत्रालय ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम ने संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) की थीम को प्रतिबिंबित करते हुए, “विकसित भारत 2047” की दिशा में भारत की यात्रा में पर्यटन की भूमिका को रेखांकित किया।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष का संबोधन

उन्होंने कहा कि “पर्यटन केवल मनोरंजन नहीं है; यह आर्थिक रूपांतरण, पर्यावरणीय संरक्षण और सामाजिक समावेशन का सशक्त साधन है। विश्व के अनेक देशों ने यह सिद्ध किया है कि सतत पर्यटन जैव विविधता को संरक्षित करते हुए आजीविका सृजन में सहायक हो सकता है। भारत में भी यही क्षमता है, बशर्ते हम सततता को रणनीति के केंद्र में रखें।”

उन्होंने परिवहन, शहरी विकास, डिजिटल तकनीक और अवसंरचना के अभिसरण की आवश्यकता पर बल दिया। सड़क, रेल, हवाई और जलमार्ग के बीच सहज संपर्क से न केवल पर्यटन स्थल अधिक सुलभ होंगे बल्कि भीड़भाड़ वाले स्थलों पर दबाव भी घटेगा।

पर्यटन राज्य मंत्री का संबोधन

सुरेश गोपी ने कहा कि भारत सततता को अपनी पर्यटन योजनाओं के मूल में शामिल कर रहा है। उन्होंने स्वदेश दर्शन 2.0 और प्रसाद योजना जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो पर्यावरण-अनुकूल आवास, ग्रामीण एवं ग्राम पर्यटन और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देती हैं।

उन्होंने कहा कि पर्यटन परिवहन और अवसंरचना जैसी सेवाओं से गहरे जुड़ा है। भारत ने पर्यटन दृष्टि में कनेक्टिविटी को केंद्र में रखा है। हवाई अड्डे, राजमार्ग, अंतर्देशीय जलमार्ग और रेलवे में निवेश से घरेलू व अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए यात्रा अनुभव सुगम हो रहे हैं। उड़ान योजना, अंतिम मील कनेक्टिविटी और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब्स इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रमुख उपलब्धियाँ

  • MoUs पर हस्ताक्षर – नेटफ्लिक्स, अतिथि फाउंडेशन और प्रमुख ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों (OTAs) के साथ समझौते हुए। नेटफ्लिक्स साझेदारी के तहत भारतीय गंतव्यों को सिनेमाई कहानी कहने के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रचारित किया जाएगा।

  • परियोजना प्रबंधन सूचना प्रणाली (PMIS) का शुभारंभ – पर्यटन अवसंरचना परियोजनाओं की रीयल-टाइम निगरानी और प्रबंधन हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म।

  • भारत पर्यटन डेटा संकलन 2025 (66वां संस्करण) का विमोचन – जिसमें रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटक आगमन, रोजगार सृजन और आर्थिक योगदान को दर्शाया गया है।

  • “होमस्टे हेतु मुद्रा ऋण मार्गदर्शिका” पुस्तिका जारी – जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से ऋण के लिए ऑनलाइन आवेदन की चरणबद्ध जानकारी प्रदान करती है।

अन्य मुख्य आकर्षण

  • उच्च स्तरीय पैनल चर्चा – सड़क, विमानन, रेलवे और शिपिंग मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बहु-माध्यमीय संपर्क को सतत विकास की कुंजी बताया।

  • विषयगत सत्र – महाकुंभ 2025 और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसे केस स्टडी प्रस्तुत किए गए।

  • डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DMOs), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), एआर/वीआर और डिजिटल ट्विन्स के उपयोग पर चर्चा हुई।

निष्कर्ष

विश्व पर्यटन दिवस 2025 के इस आयोजन ने भारत की इस प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया कि पर्यटन को सतत, समावेशी और समृद्ध भविष्य निर्माण का आंदोलन बनाया जाएगा। यह आयोजन नवाचार, अभिसरण और जन-केंद्रित विकास के माध्यम से भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करता है।



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