Media24Media.com: #SustainableEnergy

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #SustainableEnergy. Show all posts
Showing posts with label #SustainableEnergy. Show all posts

ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता में भारत ग्लोबल साउथ को देगा ऊर्जा सुरक्षा का नेतृत्व: प्रधानमंत्री मोदी

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए कहा कि ब्रिक्स (BRICS) 2026 की अध्यक्षता के दौरान भारत का लक्ष्य ग्लोबल साउथ को सुरक्षित, लचीले, न्यायसंगत और सतत वैश्विक ऊर्जा भविष्य के केंद्र में स्थापित करना है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर कहा कि भारत का मानना है कि मजबूत और टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली केवल प्रभावी घरेलू नीतियों से ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत वैश्विक साझेदारी से भी निर्मित होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने लेख में स्पष्ट किया है कि भारत ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक सहयोग के माध्यम से विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सभी देशों के लिए सुरक्षित एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम: ऊर्जा सुरक्षा हेतु कोयला—15वें वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी चरण का शुभारंभ

No comments Document Thumbnail

कोयला मंत्रालय 17 अप्रैल 2026 को “आत्मनिर्भर भारत: ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला” विषय पर एक हितधारक परामर्श (Stakeholder Consultation) आयोजित करने जा रहा है, साथ ही वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 15वें चरण का शुभारंभ भी किया जाएगा। यह कार्यक्रम मुंबई में आयोजित होगा, जिसमें श्री विक्रम देव दत्त, सचिव, कोयला मंत्रालय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह पहल भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और आत्मनिर्भर राष्ट्र के विजन को आगे बढ़ाने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामियों की उल्लेखनीय सफलता को आगे बढ़ाते हुए, कोयला मंत्रालय देश के ऊर्जा परिदृश्य को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत के बाद से घरेलू कोयले की उपलब्धता में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।

आगामी 15वां चरण इसी प्रगतिशील यात्रा को आगे बढ़ाता है। इसमें कोयला खदानों को अत्यंत उदार शर्तों पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा मिले, विविध निवेश आकर्षित हों और उद्योग की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो। इस चरण में पूरी तरह से अन्वेषित (fully explored) और आंशिक रूप से अन्वेषित (partially explored) कोयला ब्लॉकों की पेशकश की जाएगी, जिसमें अनुभवी खनन कंपनियों के साथ-साथ नए और तकनीक-आधारित उद्यमों को भी भाग लेने का अवसर मिलेगा।

यह पहल कोयला क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, निवेश को प्रोत्साहित करने, रोजगार सृजन और समग्र क्षेत्रीय विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वाणिज्यिक कोयला खनन ढांचे ने पारदर्शिता को बढ़ाया है, प्रतिस्पर्धा को मजबूत किया है और सभी प्रतिभागियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए हैं। इसके परिणामस्वरूप घरेलू उद्योगों के लिए कोयले की उपलब्धता बढ़ी है और आयात पर निर्भरता कम हुई है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है।

वाणिज्यिक कोयला खनन देश की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है और विभिन्न उद्योगों के लिए कोयले की स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। आने वाला चरण इस मजबूत नींव को और सुदृढ़ करेगा और क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य में विश्वास को बढ़ाएगा।

कोयला मंत्रालय देश को विश्वसनीय और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ-साथ सतत विकास, नवाचार और दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

स्वदेशी तकनीक की जीत: भारत का PFBR रिएक्टर हुआ सफल

No comments Document Thumbnail

भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, 500 मेगावाट (MWe) प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को रात 08:25 बजे सफलतापूर्वक पहली क्रिटिकलिटी (नियंत्रित विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया की शुरुआत) हासिल की। यह देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वदेशी परमाणु तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह उपलब्धि डॉ. अजीत कुमार मोहंती (सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग एवं अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा आयोग), श्रीकुमार जी. पिल्लई (निदेशक, IGCAR), अल्लू अनंत (CMD-इन-चार्ज, BHAVINI) और  के.वी. सुरेश कुमार (पूर्व CMD, BHAVINI) की उपस्थिति में हासिल की गई। यह सभी मानकों को पूरा करने के बाद संभव हुआ, जिन्हें परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) ने कठोर सुरक्षा समीक्षा के बाद मंजूरी दी थी।

PFBR का डिजाइन और तकनीकी विकास पूरी तरह से इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा किया गया, जो परमाणु ऊर्जा विभाग का एक अनुसंधान केंद्र है। इसका निर्माण और संचालन भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा किया गया।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत की दीर्घकालिक परमाणु रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पारंपरिक रिएक्टरों के विपरीत, PFBR में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग होता है। इसके कोर के चारों ओर यूरेनियम-238 की परत होती है, जो तेज न्यूट्रॉन की मदद से प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित हो जाती है। इससे रिएक्टर जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक उत्पन्न करने में सक्षम होता है।

इस रिएक्टर को भविष्य में थोरियम-232 के उपयोग के लिए भी डिजाइन किया गया है, जो परिवर्तित होकर यूरेनियम-233 बनेगा और भारत के परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण को ऊर्जा प्रदान करेगा।

यह क्षमता देश के सीमित यूरेनियम संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करती है और भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करती है।

पहली क्रिटिकलिटी हासिल करने के साथ ही भारत अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को साकार करने के और करीब पहुंच गया है। फास्ट ब्रीडर तकनीक वर्तमान रिएक्टरों और भविष्य के थोरियम आधारित रिएक्टरों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती है।

यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता को दर्शाती है। इस रिएक्टर में उन्नत सुरक्षा प्रणाली, उच्च तापमान तरल सोडियम कूलिंग तकनीक और क्लोज्ड फ्यूल साइकिल का उपयोग किया गया है, जिससे परमाणु सामग्री का पुनर्चक्रण संभव होता है और अपशिष्ट कम होता है।

यह परियोजना वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और उद्योग सहयोगियों के समर्पण का परिणाम है, जिन्होंने स्वदेशी तकनीकों और उपकरणों के माध्यम से इसका निर्माण किया। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता को भी दर्शाता है।

ऊर्जा उत्पादन के अलावा, यह कार्यक्रम परमाणु ईंधन चक्र, उन्नत सामग्री, रिएक्टर भौतिकी और बड़े पैमाने की इंजीनियरिंग में देश की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करता है।

जैसे-जैसे भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर विश्वसनीय, कम-कार्बन और उच्च दक्षता वाली ऊर्जा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पहली क्रिटिकलिटी की यह उपलब्धि न केवल एक तकनीकी मील का पत्थर है, बल्कि “विकसित भारत” के लिए एक सतत और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में बड़ा कदम भी है।


स्वच्छ ऊर्जा में बड़ी सफलता: नए पॉलिमर से ऊर्जा भंडारण और हाइड्रोजन उत्पादन में क्रांतिकारी प्रगति

No comments Document Thumbnail

ऊर्जा भंडारण और स्वच्छ ईंधन (हाइड्रोजन) उत्पादन के क्षेत्र में एक बड़ी प्रगति करते हुए वैज्ञानिकों ने नए, आसानी से संश्लेषित और अत्यधिक प्रभावी पॉलिमरिक पदार्थ विकसित किए हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Zn(DAB) और Cd(DAB) नामक ये समन्वय पॉलिमर (coordination polymers) विशेष रूप से डिजाइन की गई संरचनाएं हैं, जिनमें जिंक (Zn²⁺) या कैडमियम (Cd²⁺) धातु आयन और 3,3'-डायमिनोबेंजिडीन (DAB) नामक कार्बनिक अणु मिलकर मजबूत परतदार ढांचा बनाते हैं। इन्हें सरल, कमरे के तापमान पर और बिना जटिल उपकरणों के बड़े पैमाने पर तैयार किया जा सकता है, जिससे ये औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त बनते हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) और बेंगलुरु स्थित क्राइस्ट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की टीम ने इन पदार्थों का परीक्षण किया और स्वच्छ ऊर्जा के दो प्रमुख क्षेत्रों—ऊर्जा भंडारण और हाइड्रोजन उत्पादन—में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए।

प्रयोगशाला परीक्षणों में Zn(DAB) ने 2091.4 F g⁻¹ और Cd(DAB) ने 1341.6 F g⁻¹ की ऊर्जा भंडारण क्षमता दिखाई। व्यावहारिक उपकरणों (सुपरकैपेसिटर) में भी Zn(DAB) ने 785.3 F g⁻¹ और Cd(DAB) ने 428.5 F g⁻¹ का प्रदर्शन किया। साथ ही, ये सामग्री 5000 चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों के बाद भी अपनी क्षमता बनाए रखने में सक्षम रही, जो उनकी टिकाऊपन को दर्शाता है।

इसके अलावा, ये पदार्थ पानी को विभाजित कर स्वच्छ हाइड्रोजन ईंधन उत्पादन में भी सक्षम हैं। Zn(DAB) के लिए 263 mV और Cd(DAB) के लिए 209 mV की कम ऊर्जा आवश्यकता (ओवरपोटेंशियल) इन्हें अत्यधिक प्रभावी बनाती है, जिससे भविष्य में हरित हाइड्रोजन उत्पादन अधिक सस्ता और कुशल हो सकता है।

ऊर्जा भंडारण और हाइड्रोजन उत्पादन—दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण ये सामग्री स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। यह नवाचार शोध और वास्तविक उपयोग के बीच की दूरी को कम करने में सहायक होगा।

यह शोध ACS Omega और Catalysis Science & Technology जैसे प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित हुआ है, जो समन्वय पॉलिमरों को अगली पीढ़ी के स्वच्छ ऊर्जा पदार्थों के रूप में स्थापित करता है।

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: भारत में ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के मानक अधिसूचित

No comments Document Thumbnail

भारत सरकार ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 27 फरवरी 2026 को भारत के लिए ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के मानक अधिसूचित किए हैं। ये मानकनवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयद्वारा जारी किए गए हैं। इन मानकों में उत्सर्जन की सीमा और पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिन्हें पूरा करने पर अमोनिया और मेथनॉल को “ग्रीन” माना जाएगा, अर्थात् वे नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग करके उत्पादित किए गए हों।

ग्रीन अमोनिया के लिए मानक

भारत के लिए निर्धारित मानक के अनुसार ग्रीन अमोनिया में कुल गैर-जैविक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन—जो ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, अमोनिया संश्लेषण, शुद्धिकरण, संपीड़न और ऑन-साइट भंडारण से उत्पन्न होता है—0.38 किलोग्राम CO₂ समतुल्य प्रति किलोग्राम अमोनिया (kg CO₂ eq/kg NH₃) से अधिक नहीं होना चाहिए। यह गणना पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर की जाएगी।

ग्रीन मेथनॉल के लिए मानक

इसी प्रकार, ग्रीन मेथनॉल के लिए कुल गैर-जैविक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन—जो ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, मेथनॉल संश्लेषण, शुद्धिकरण और ऑन-साइट भंडारण से उत्पन्न होता है—0.44 किलोग्राम CO₂ समतुल्य प्रति किलोग्राम मेथनॉल (kg CO₂ eq/kg CH₃OH) से अधिक नहीं होना चाहिए। यह भी पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।

कार्बन डाइऑक्साइड के स्रोत

अधिसूचना के अनुसार ग्रीन मेथनॉल के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली कार्बन डाइऑक्साइड निम्न स्रोतों से प्राप्त की जा सकती है:

  • जैविक (Biogenic) स्रोत

  • Direct Air Capture (DAC)

  • मौजूदा औद्योगिक स्रोत

मंत्रालय समय-समय पर कार्बन डाइऑक्साइड के पात्र स्रोतों में संशोधन कर सकता है। ऐसे संशोधन भविष्य में लागू होंगे और उपयुक्त ग्रैंडफादरिंग प्रावधानों के साथ लागू किए जाएंगे।

नवीकरणीय ऊर्जा की परिभाषा

ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के उत्पादन में प्रयुक्त नवीकरणीय ऊर्जा में वह बिजली भी शामिल होगी जो नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न होकर ऊर्जा भंडारण प्रणाली में संग्रहीत की गई हो या लागू नियमों के अनुसार ग्रिड के साथ बैंक की गई हो।

निगरानी और प्रमाणन

अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि मापन, रिपोर्टिंग, निगरानी, ऑन-साइट सत्यापन और प्रमाणन के लिए विस्तृत कार्यप्रणाली नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा अलग से जारी की जाएगी।

पहले से जारी निविदाएँ

अधिसूचना से पहले जारी की गई किसी भी टेंडर, बोली प्रक्रिया या निविदा पर उस समय लागू नियम और शर्तें लागू रहेंगी। हालांकि, यदि संभव हो और दोनों पक्ष सहमत हों, तो ऐसी निविदाओं को नए मानकों के अनुरूप भी बनाया जा सकता है।

उद्योग और निर्यात के लिए महत्व

ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के मानकों की यह अधिसूचना उद्योग, निवेशकों और अन्य हितधारकों को स्पष्ट दिशा प्रदान करेगी। यह उर्वरक, शिपिंग, बिजली और भारी उद्योग जैसे क्षेत्रों के डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देने में सहायक होगी और भारत को ग्रीन ईंधनों के विश्वसनीय उत्पादक और निर्यातक के रूप में मजबूत बनाएगी।

भारतीय ग्रीन हाइड्रोजन डेवलपर्स ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के लिए निर्यात बाजारों को लक्ष्य बना रहे हैं। इन मानकों के जारी होने से भारत ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत ग्रीन हाइड्रोजन और उसके उत्पादों के लिए अपने नियामक ढांचे को और मजबूत किया है।

सीएसआईआर-एनपीएल में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 का आयोजन, ‘रमन प्रभाव’ की ऐतिहासिक खोज को किया नमन

No comments Document Thumbnail

 CSIR–National Physical Laboratory (सीएसआईआर-एनपीएल) ने 28 फरवरी 1928 को C. V. Raman द्वारा रमन प्रभाव की ऐतिहासिक घोषणा की स्मृति में 28 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (एनएसडी-2026) मनाया। इस अवसर पर प्रातःकाल “राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन” तथा अपराह्न “राष्ट्रीय विज्ञान दिवस व्याख्यान” का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन से हुई, जिसने 40 वर्ष से कम आयु के शोधार्थियों, विद्यार्थियों और युवा वैज्ञानिकों को अपने शोध पोस्टर प्रस्तुत करने का सशक्त मंच प्रदान किया। पोस्टर प्रस्तुति तीन व्यापक विषयों—मैटेरियल्स साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MST), फिजिक्स, इंजीनियरिंग एंड मेट्रोलॉजी (PEM), तथा एनवायरनमेंट, हेल्थ एंड केमिस्ट्री (EHC)—के अंतर्गत आयोजित की गई। चयनित श्रेष्ठ पोस्टरों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और अंतर्विषयी शोध को बढ़ावा देना था।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस व्याख्यान सत्र का शुभारंभ निदेशक, सीएसआईआर-एनपीएल प्रो. वेणु गोपाल अचंता के उद्घाटन संबोधन से हुआ। उन्होंने रमन प्रभाव के साथ सीएसआईआर-एनपीएल के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि के. एस. कृष्णन ने रमन प्रभाव के लिए निर्णायक प्रमाण प्रस्तुत किए थे तथा वे सीएसआईआर-एनपीएल के संस्थापक निदेशक भी रहे। प्रो. अचंता ने स्थानीय एवं वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु स्थानीय समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने क्वांटम मेट्रोलॉजी की उभरती चुनौतियों को स्वीकार करने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अग्रणी क्षेत्रों में मेट्रोलॉजिकल हस्तक्षेपों को आगे बढ़ाने की महत्ता रेखांकित की।

मुख्य अतिथि प्रो. भीम सिंह, विज्ञान श्री, एएनआरएफ राष्ट्रीय विज्ञान चेयर प्रोफेसर एवं आईआईटी दिल्ली के एमेरिटस/मानद प्रोफेसर ने “इलेक्ट्रिक व्हीकल—एक सतत ऊर्जा क्रांति” विषय पर राष्ट्रीय विज्ञान दिवस व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास, तकनीक, चार्जिंग प्रणालियों और मिशन-आधारित रोडमैप पर प्रकाश डालते हुए इसे सतत ऊर्जा क्रांति का आधार बताया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. प्रतीक शर्मा, कुलपति, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने समाज की समस्याओं का एक सुव्यवस्थित भंडार (रिपॉजिटरी) तैयार करने और उनके समाधान हेतु अकादमिक संस्थानों एवं अनुसंधान प्रयोगशालाओं के सहयोग पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने अकादमिक-शोध समन्वय और नवाचार-आधारित विकास की अपनी दृष्टि से श्रोताओं को प्रेरित किया।

कार्यक्रम का समापन एनएसडी-2026 के संयोजक डॉ. गोविंद गुप्ता द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सीएसआईआर-एनपीएल द्वारा आयोजित प्रथम राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन सहित विभिन्न गतिविधियों तथा ‘कैटालिसिस विकसित भारत’ पहल के अंतर्गत विज्ञान में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला।


भूटान और भारत के बीच विद्युत क्षेत्र सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा

No comments Document Thumbnail

आज नई दिल्ली में भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री,ल्योंपो जेम छेरिंग ने केंद्रीय विद्युत मंत्री और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री, मनोहर लाल तथा राज्य मंत्री (विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा), श्रीपाद नाइक से भेंट की। यह बैठक दोनों देशों के विद्युत क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को और मजबूत करने पर केंद्रित रही।

भारत-भूटान जलविद्युत सहयोग की शुरुआत 1961 में हुई थी, जिसके बाद 2006 में हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर सहयोग पर समझौता हुआ।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने पुनत्सांगछू-II हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना (1020 मेगावाट) से विद्युत उत्पादन के वाणिज्यिक अनुकूलन पर विचार किया। इसके अलावा पुनत्सांगछू-I हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना (1200 मेगावाट) के जल्दी चालू होने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में सांकॉश हाइड्रोपावर परियोजना के आगे के रास्तों पर भी चर्चा हुई। साथ ही दोनों देशों ने 2040 तक के क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लिंक का मूल्यांकन किया। इसके अलावा भूटान में कम उत्पादन वाले महीनों में विद्युत की शेड्यूलिंग को सरल बनाने की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।

मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग की सराहना की और इसे और मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय: 2025 में ऊर्जा सुलभता, स्थिरता और सुरक्षा में प्रगति

No comments Document Thumbnail

परिचय

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण एवं उत्पादन, परिष्करण, वितरण और विपणन, साथ ही उनके आयात, निर्यात और संरक्षण के लिए जिम्मेदार है। तेल और गैस भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण इनपुट हैं।

वित्तीय वर्ष 2025 में मंत्रालय ने सस्ती ऊर्जा पहुँच, घरेलू उत्पादन वृद्धि, बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना जैसी बहुआयामी पहलें की। ये सभी पहलें ऊर्जा पहुँच, ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं।

स्वच्छ रसोई ईंधन तक सार्वभौमिक पहुँच

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत 1 दिसंबर 2025 तक लगभग 10.35 करोड़ लाभार्थियों को लाभ मिला। लंबित आवेदन निपटाने और एलपीजी कवरेज बढ़ाने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 25 लाख अतिरिक्त कनेक्शन की मंजूरी दी गई।

पात्रता प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एकल Deprivation Declaration लागू किया गया, जिससे आवेदन प्रक्रिया तेज और अधिक समावेशी हुई।

LPG की सस्ती उपलब्धता और उपभोग

  • PMUY लाभार्थियों के लिए 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर ₹300 की लक्षित सब्सिडी प्रति सिलेंडर, साल में नौ रिफिल तक।

  • इससे एलपीजी की खपत में निरंतर वृद्धि हुई—FY 2019-20 में औसत 3 रिफिल प्रति व्यक्ति, FY 2024-25 में 4.47 रिफिल और FY 2025-26 में 4.85 रिफिल तक बढ़ गई।

  • बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण को तेज किया गया—1 दिसंबर 2025 तक PMUY उपभोक्ताओं का 71% और गैर-PMUY उपभोक्ताओं का 62% प्रमाणित।

  • नवंबर 2025 में देशव्यापी अभियान चलाकर मोबाइल आधारित प्रमाणीकरण नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया।

सुरक्षा और जागरूकता

  • बेसिक सेफ्टी चेक अभियान के तहत 12.12 करोड़ से अधिक मुफ्त सुरक्षा निरीक्षण किए गए।

  • 4.65 करोड़ से अधिक एलपीजी होज़ को डिस्काउंट पर बदला गया।

  • इससे घरेलू LPG उपयोग में सुरक्षा मानक और जागरूकता बढ़ी।

पेट्रोलियम विपणन अवसंरचना

  • 90,000 से अधिक रिटेल आउटलेट्स में डिजिटल भुगतान सुविधा उपलब्ध कराई गई।

  • 2.71 लाख POS टर्मिनल समर्थित।

  • 3,200 से अधिक बोवसर कमिशनिंग के माध्यम से दूरदराज़ क्षेत्रों में डोर-टू-डोर वितरण बढ़ाया गया।

  • स्वच्छ भारत मिशन के तहत अधिकांश रिटेल आउटलेट्स में शौचालय की सुविधा और पुरुष/महिला के लिए अलग-अलग सुविधाएं सुनिश्चित की गईं।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और APNA GHAR

  • FAME-II योजना के तहत 8,932 EV चार्जिंग स्टेशन रिटेल आउटलेट्स में स्थापित।

  • Oil Marketing Companies द्वारा 18,500 से अधिक चार्जिंग स्टेशन अपने संसाधनों से।

  • APNA GHAR पहल के तहत 500+ ट्रकर्स के लिए वेसाइड सुविधा केंद्र स्थापित।

  • Public Sector Oil Marketing Companies 2024-25 से 2028-29 के दौरान 4,000 ऊर्जा स्टेशन स्थापित कर रही हैं।

  • ये स्टेशन इंटीग्रेटेड मोबिलिटी हब के रूप में विकसित हो रहे हैं—पेट्रोल, डीज़ल, CNG, LNG (जहाँ संभव हो) और EV चार्जिंग।

  • 1 नवंबर 2025 तक 1,064 ऊर्जा स्टेशन पूरे देश में स्थापित।

गैस आधारित अर्थव्यवस्था का विस्तार

  • परिचालन गैस पाइपलाइन लंबाई 15,340 किमी (2014) से बढ़कर 25,429 किमी (जून 2025)।

  • अतिरिक्त 10,459 किमी पाइपलाइन निर्माणाधीन।

  • PNGRB और सरकार द्वारा पूर्ण राष्ट्रीय गैस ग्रिड के निर्माण से गैस की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

  • Unified Pipeline Tariff (One Nation, One Grid, One Tariff) से क्षेत्रीय परिवहन लागत में समानता आई।

  • लगभग 90% पाइपलाइनें इस प्रणाली में शामिल।

  • सिटी गैस वितरण (CGD) 307 भौगोलिक क्षेत्रों तक बढ़ा।

  • 1.57 करोड़ PNG घरेलू कनेक्शन और 8,400+ CNG स्टेशन।

  • घरेलू गैस आवंटन के नए दिशानिर्देशों से उपभोक्ताओं की कीमत अस्थिरता कम हुई।

SATAT और बायोगैस

  • 1 नवंबर 2025 तक 130+ CBG संयंत्र चालू, कई निर्माणाधीन।

  • FY 2025-26 से CBG के CNG और PNG में अनिवार्य मिश्रण।

  • पाइपलाइन कनेक्टिविटी और बायोमास संग्रहण के लिए वित्तीय सहायता।

बायोफ्यूल्स और ethanol blending

  • पेट्रोल में ईथेनॉल मिश्रण 19.24% (ESY 2024-25)।

  • विदेशी मुद्रा बचत: ₹1.55 लाख करोड़ से अधिक।

  • Pradhan Mantri JI-VAN योजना के तहत एडवांस्ड बायोफ्यूल्स, Panipat और Numaligarh में 2nd generation ethanol plants।

  • Sustainable Aviation Fuel (SAF) blending: अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए 2027-2030 में क्रमशः 1%, 2% और 5% लक्ष्य।

  • IOCL ने Panipat refinery में SAF उत्पादन के लिए ISCC CORSIA प्रमाणन प्राप्त किया।

  • IOCL और Air India ने SAF आपूर्ति के लिए MoU किया।

  • Biodiesel blending और फीडस्टॉक विविधीकरण बढ़ाया गया।

अपस्ट्रीम सेक्टर सुधार

  • Oilfields (Regulation and Development) Amendment Act, 2025 लागू।

  • Petroleum and Natural Gas Rules, 2025 अधिसूचित।

  • Hydrocarbon Exploration Licensing Policy (HELP) के तहत 172 ब्लॉक्स (~3.78 लाख sq km) आवंटित।

  • निवेश: लगभग USD 4.36 बिलियन।

  • अन्वेषण गतिविधियां: भूकंपीय सर्वेक्षण, ड्रिलिंग, Mission Anveshan।

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार

  • Phase-II सुविधाओं के तहत अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियाँ।

  • विदेशी निवेशों के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति स्रोतों में विविधीकरण।

निष्कर्ष

वित्तीय वर्ष 2025 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ऊर्जा सुलभता, सस्ती उपलब्धता, स्थिरता और सुरक्षा में महत्वपूर्ण प्रगति की।
नीतिगत सुधार, बुनियादी ढांचे का विस्तार और स्वच्छ ऊर्जा पहलें भारत को सशक्त, समावेशी और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की दिशा में आगे ले जा रही हैं।


परमाणु ऊर्जा पर नया कानून: लोकसभा में डॉ. जितेंद्र सिंह का जवाब, सुरक्षा के साथ आधुनिक ढांचा मजबूत करने पर जोर

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया बिल, 2025 पर हुई बहस का जवाब देते हुए सदस्यों की चिंताओं का समाधान किया और सरकार द्वारा व्यापक नए परमाणु कानून की आवश्यकता को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक 1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम से चली आ रही मूल सुरक्षा, संरक्षा और नियामक व्यवस्थाओं को बनाए रखते हुए, आधुनिक तकनीकी, आर्थिक और ऊर्जा संबंधी वास्तविकताओं के अनुरूप भारत के परमाणु ढांचे का आधुनिकीकरण करता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि प्रस्तावित कानून मौजूदा प्रावधानों का एकीकरण करता है और परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक दर्जा देकर नियामक ढांचे को सुदृढ़ बनाता है, जो अब तक कार्यकारी आदेश के तहत काम करता था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानक, विखंडनीय पदार्थ, उपयोग किया हुआ ईंधन और भारी जल पर नियंत्रण तथा नियमित निरीक्षण सरकार के अधीन ही रहेंगे—भले ही निजी भागीदारी क्यों न हो। निजी संस्थाओं को संवेदनशील सामग्री पर कोई नियंत्रण नहीं होगा और स्पेंट फ्यूल का प्रबंधन पहले की तरह सरकार ही करेगी।

देयता (लायबिलिटी) के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि विधेयक पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे को कमजोर नहीं करता। उन्होंने समझाया कि रिएक्टर के आकार से जुड़े क्रमिक (ग्रेडेड) कैप्स के जरिए ऑपरेटर देयता को तार्किक बनाया गया है, ताकि स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स जैसी नई तकनीकों को बढ़ावा मिले, साथ ही पीड़ितों को पूर्ण मुआवजा सुनिश्चित हो। इसके लिए बहु-स्तरीय व्यवस्था प्रस्तावित है—ऑपरेटर देयता, सरकार समर्थित न्यूक्लियर लायबिलिटी फंड, और कन्वेंशन ऑन सप्लीमेंटरी कम्पनसेशन के तहत अंतरराष्ट्रीय सहायता। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रथाओं और रिएक्टर सुरक्षा में प्रगति को देखते हुए सप्लायर देयता हटाई गई है, जबकि लापरवाही और दंडात्मक प्रावधान कानून में यथावत लागू रहेंगे।

मंत्री ने यह भी खारिज किया कि विधेयक से सार्वजनिक क्षेत्र की क्षमता कमजोर होगी। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में परमाणु ऊर्जा विभाग का बजट लगभग 170% बढ़ा है और 2014 से परमाणु स्थापित क्षमता दोगुनी हुई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मानकों की तुलना में भारत की ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी अभी भी कम है, जबकि डेटा प्रोसेसिंग, स्वास्थ्य सेवा और उद्योग जैसे क्षेत्रों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए—नवीकरणीय ऊर्जा के साथ—परमाणु ऊर्जा का विस्तार आवश्यक है। यह विधेयक जिम्मेदार निजी और संयुक्त उद्यम भागीदारी को सक्षम बनाता है, ताकि संसाधन सीमाओं को पाटा जा सके, परियोजनाओं की अवधि घटे और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल किया जा सके—वह भी राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित से समझौता किए बिना।

व्यापक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि परमाणु ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि कैंसर उपचार, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी इसका उपयोग है। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रस्तावित कानून में पहली बार पर्यावरणीय और आर्थिक क्षति को भी परमाणु क्षति की परिभाषा में शामिल किया गया है। स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स और अनुसंधान व नवाचार के लिए घोषित निवेशों के साथ यह कानून स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ते भारत के लिए स्वच्छ, विश्वसनीय ऊर्जा का सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगा—और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग की भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ बनाए रखेगा।

AI/ML आधारित समाधान से स्मार्ट और उपभोक्ता-केंद्रित बिजली वितरण की दिशा में भारत

No comments Document Thumbnail

मनोहर लाल, ऊर्जा मंत्री, ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित अनुप्रयोग बुद्धिमान, उपभोक्ता-केंद्रित और स्व-संवर्धित वितरण नेटवर्क बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मंत्री ने यह बात दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही, जो कि बिजली वितरण क्षेत्र में AI/ML प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर केंद्रित था, और आज भारत मण्डपम, नई दिल्ली में आयोजित किया गया।

उन्होंने कहा कि AI/ML आधारित समाधान, स्मार्ट मीटर एनालिटिक्स, डिजिटल ट्विन्स, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, चोरी का पता लगाने वाली बुद्धिमत्ता, उपकरण-स्तरीय उपभोक्ता अंतर्दृष्टि, स्वचालित आउटेज पूर्वानुमान और GenAI आधारित निर्णय समर्थन उपभोक्ता अनुभव और संचालन दक्षता दोनों को बदल सकते हैं।

मनोहर लाल ने राष्ट्रीय सम्मेलन में उद्योग, राज्यों, नवाचारकों, अकादमिक संस्थानों और प्रौद्योगिकी साझेदारों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने वितरण कंपनियों (DISCOMs), एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सेवा प्रदाताओं (AMISPs), प्रौद्योगिकी समाधान प्रदाताओं (TSPs) और होम ऑटोमेशन समाधान प्रदाताओं (HASPs) द्वारा प्रस्तुत AI/ML समाधानों की प्रशंसा की।

मंत्री ने सभी DISCOMs से कहा कि वे पारिस्थितिकी तंत्र के सभी हितधारकों के साथ मिलकर स्मार्ट, भरोसेमंद और उपभोक्ता-केंद्रित वितरण प्रणाली की ओर संक्रमण करें। उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को सक्रिय रूप से शामिल करना आवश्यक है। यह महत्वपूर्ण है कि नई तकनीकों के चारों ओर कभी-कभी फैली भ्रांतियों को दूर किया जाए और तकनीक को अपनाने के लिए उपभोक्ताओं का बहुमूल्य समर्थन प्राप्त किया जाए।

मनोहर लाल ने कहा कि AI/ML आधारित समाधान यह दर्शाते हैं कि तकनीक विश्वास बहाल करने में सक्षम है, घरों को उनके खपत प्रबंधन में सशक्त बनाती है, आउटेज को होने से पहले रोकती है, ईमानदार उपभोक्ताओं को चोरी के बोझ से बचाती है और DISCOMs को नुकसान कम करने, पावर खरीद लागत को अनुकूलित करने और मजबूत अवसंरचना में पुनर्निवेश करने में सक्षम बनाती है—जो भारत को डिजिटल बिजली सुधार और भविष्य-तैयार ग्रिड प्रशासन में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करता है।

राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, पंकज अग्रवाल, सचिव, ऊर्जा मंत्रालय ने DISCOMs में डिजिटलीकरण को मजबूत करने और AI/ML आधारित समाधानों को अपनाने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला, जो संचालन और वित्तीय सुधारों में मापन योग्य लाभ देते हैं। उन्होंने क्षमता निर्माण, सुरक्षित डेटा-साझाकरण ढांचे और इंटरऑपरेबिलिटी के महत्व पर जोर दिया ताकि सम्मेलन में प्रदर्शित नवाचारों को देशव्यापी रूप से बढ़ाया जा सके और देश में ऊर्जा संक्रमण को सुविधाजनक बनाया जा सके।

सम्मेलन में नवाचार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आह्वान किया गया, और DISCOMs, AMISPs, TSPs और होम ऑटोमेशन समाधान प्रदाताओं से 195 आवेदन प्राप्त हुए। प्रारंभिक स्क्रीनिंग के बाद, 51 समाधानों को विस्तृत जूरी मूल्यांकन के लिए पहले दिन (6 दिसंबर, 2025) चुना गया।

विस्तृत मूल्यांकन के बाद, DISCOMs श्रेणी में TNPDCL (तमिलनाडु), MP East (मध्य प्रदेश), AMISP श्रेणी में Tata Power और Apraava, समाधान प्रदाता श्रेणी में Pravah और Flock Energy और होम ऑटोमेशन समाधान श्रेणी में Tata Power विजेता घोषित किए गए।

आज विजेताओं ने अपने प्रस्तुतिकरण में तमिलनाडु द्वारा राजस्व सुरक्षा के लिए उन्नत स्मार्ट मीटर एनालिटिक्स, MP East द्वारा नुकसान कम करने के लिए सटीक उपभोक्ता इंडेक्सिंग जैसी डेटा-आधारित नवाचारों को उजागर किया। AMISP जैसे TP Power Plus और Apraava Energy ने व्यवहार-आधारित डिमांड रिस्पॉन्स और AI आधारित संचालन स्वचालन प्रदर्शित किया, जबकि TSPs जैसे Pravah और Flock Energy ने वास्तविक समय ग्रिड बुद्धिमत्ता और उपभोक्ता उपकरण एनालिटिक्स को प्रदर्शित किया। Tata Power ने ऊर्जा उपयोग की निगरानी और नियंत्रण के लिए भविष्यवादी और उपयोगकर्ता-मित्रवत समाधान प्रस्तुत किया।

विजेताओं को ऊर्जा मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया और उन्होंने इन समाधानों को राज्यों में व्यापक रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

मनोहर लाल, ऊर्जा मंत्री ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा विकसित STELLAR (Strategic Expansion for Long Term Load Adequacy and Resilience) का भी शुभारंभ किया, जो DISCOMs को संसाधन पर्याप्तता अध्ययन करने और दीर्घकालिक पर्याप्तता योजनाएँ तैयार करने में सक्षम बनाएगा। साथ ही, इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम (ISGF) ने बिजली उपयोगिताओं के लिए AI, ML, AR/VR और रोबोटिक्स समाधान और रोडमैप पर हैंडबुक प्रस्तुत किया, जिसमें 174 उपयोग मामलों को हाइलाइट किया गया, जिनमें से 45 भारतीय उपयोगिताओं से संबंधित हैं।


भारत ने गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का 50% हासिल किया, MNRE ने सौर निर्माण में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया

No comments Document Thumbnail

भारत ने पहले ही अपने स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल कर लिया है, जो पेरिस समझौते के तहत अपनी राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य से पांच साल पहले है।

31 अक्टूबर 2025 तक, गैर-जीवाश्म स्रोतों से स्थापित क्षमता लगभग 259 गीगावाट (GW) है, जिसमें चालू वित्तीय वर्ष (अक्टूबर 2025 तक) में 31.2 GW की नई क्षमता जुड़ी है।

कई जगह यह रिपोर्ट किया जा रहा है कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने वित्तीय संस्थानों को नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए नए वित्त पोषण को रोकने का परामर्श जारी किया है, जिससे अत्यधिक अधिशक्ति (overcapacity) को लेकर चिंता जताई जा रही है।

यह स्पष्ट किया जाता है कि MNRE ने किसी भी वित्तीय संस्था को नवीकरणीय ऊर्जा विद्युत परियोजनाओं या नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण सुविधाओं के लिए वित्त पोषण रोकने का कोई परामर्श नहीं दिया है।

हालांकि, MNRE ने विभागीय वित्तीय सेवाओं और एनबीएफसी जैसे PFC, REC और IREDA को सौर पीवी (Solar PV) निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में वर्तमान घरेलू स्थापित उत्पादन क्षमताओं की स्थिति भेजी है, जिसमें सौर मॉड्यूल, अपस्ट्रीम स्तर जैसे सौर सेल, इंट, वेफर, पॉलीसिलिकॉन और सहायक उपकरण जैसे सौर ग्लास और एल्युमिनियम फ्रेम शामिल हैं। इसका उद्देश्य वित्तीय संस्थाओं को प्रस्तावों का मूल्यांकन करते समय संतुलित और सूचित दृष्टिकोण अपनाने में मदद करना है, ताकि वे केवल सौर मॉड्यूल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि सौर पीवी निर्माण के अपस्ट्रीम स्तर और सहायक उपकरणों में भी अपने पोर्टफोलियो का विस्तार कर सकें।

भारत सरकार सौर पीवी निर्माण में आत्मनिर्भर बनने और देश को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में प्रमुख खिलाड़ी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रतिबद्धता को कई पहल के माध्यम से समर्थन प्राप्त है, जिसमें उच्च दक्षता सौर पीवी मॉड्यूल के लिए PLI योजना और भारतीय निर्माताओं के लिए समान अवसर प्रदान करने के उपाय शामिल हैं।

इन पहलों के प्रभाव से सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता में वृद्धि हुई है, जो 2014 में केवल 2.3 GW थी और आज MNRE की Approved List of Models and Manufacturers (ALMM) में लगभग 122 GW तक पहुंच चुकी है। यह वृद्धि भारत के सौर पीवी निर्माण की सफलता और उद्योग, विभिन्न राज्य सरकारों और भारत सरकार के संयुक्त प्रयासों को दर्शाती है।

यह कदम यह भी सुनिश्चित करता है कि भारत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने और वैश्विक कार्बन उत्सर्जन घटाने में सार्थक योगदान देने के अपने लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है। MNRE भविष्य में भी सौर निर्माण इकोसिस्टम को नीति समर्थन, अवसंरचना विकास और नवाचार के माध्यम से मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय हितधारकों के साथ लगातार संवाद जारी रखेगा ताकि भारत की सौर ऊर्जा यात्रा समान, प्रतिस्पर्धी और भविष्य-तैयार बनी रहे।

44वें IITF में विद्युत मंत्रालय के पावर पवेलियन का उद्घाटन, भारत की ऊर्जा यात्रा का शानदार प्रदर्शन

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रिपद य. नाइक ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 14–27 नवंबर 2025 तक आयोजित हो रहे 44वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले (IITF 2025) में विद्युत मंत्रालय के पवेलियन का उद्घाटन किया।

उन्होंने कहा कि यह पवेलियन भारत की बदलती ऊर्जा यात्रा का जीवंत प्रतीक है, जो “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त रूप से प्रदर्शित करता है। यहां भारत की ऊर्जा व्यवस्था के पारंपरिक स्रोतों से स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज़ी से हो रहे संक्रमण और तकनीक-आधारित, नागरिक-केंद्रित, समावेशी और टिकाऊ ऊर्जा तंत्र को दर्शाया गया है।

मंत्री ने बताया कि इस पवेलियन में NTPC, NHPC, SJVN, THDC, PFC, Power Grid और REC जैसी सात प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ (PSUs) देश की ऊर्जा क्रांति और विकसित भारत @ 2047 के विज़न में अपने योगदान को प्रस्तुत कर रही हैं।

उन्होंने युवाओं, छात्रों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों से आग्रह किया कि वे पावर पवेलियन अवश्य आएँ और भारत की अद्वितीय ऊर्जा यात्रा, चुनौतियों, नवाचारों और भविष्य की संभावनाओं को करीब से अनुभव करें।

पावर पवेलियन की प्रमुख विशेषताएँ (Hall No. 1)

IITF 2025 में विद्युत मंत्रालय का पवेलियन एक इंटरेक्टिव और इमर्सिव अनुभव प्रदान करता है, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति को आधुनिक प्रदर्शनों के माध्यम से दिखाया गया है। पवेलियन की मुख्य आकर्षण:

  • काइनेटिक LED वॉल

  • एनामॉर्फिक 3D डिस्प्ले

  • इमर्सिव पावर जर्नी ज़ोन

  • स्मार्ट मीटर और स्मार्ट होम डेमोंस्ट्रेशन

  • AI संचालित Holobot

  • इंटरैक्टिव क्विज़ स्टेशन

  • EESL Mart

  • PSP डियोरामा

  • थीम आधारित सेल्फी वॉल और AI फोटो बूथ

  • ऊर्जा “चक्र” की प्रतीकात्मक स्थापना

यह पवेलियन भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, तकनीकी उन्नति और भविष्य की हरित ऊर्जा प्रतिबद्धता का एक सशक्त उदाहरण है।

कोल इंडिया और IIT मद्रास मिलकर बनाएंगे “सस्टेनेबल एनर्जी सेंटर”: भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की दिशा में ऐतिहासिक कदम

No comments Document Thumbnail

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने बुधवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत IIT मद्रास में “सस्टेनेबल एनर्जी सेंटर” (Centre for Sustainable Energy) की स्थापना की जाएगी। इस समझौते पर सीआईएल के निदेशक (तकनीकी) अच्युत घाटक और IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर सीआईएल के अध्यक्ष पी. एम. प्रसाद, साथ ही दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

यह केंद्र सतत ऊर्जा प्रौद्योगिकियों (Sustainable Energy Technologies) में अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) और क्षमता निर्माण पहलों का एक प्रमुख केंद्र होगा। CIL द्वारा वित्तपोषित और उसके रणनीतिक विविधीकरण लक्ष्यों के अनुरूप, यह केंद्र कोयला खदानों के पुनःउपयोग, निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों के विकास, और भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में कोयले को एक मूल्यवान फीडस्टॉक के रूप में पुनर्परिभाषित करने के समाधान विकसित करने पर केंद्रित रहेगा। यह साझेदारी देश की नेट-जीरो (Net-Zero) 2070 की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए स्वदेशी अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास के माध्यम से भारत की ऊर्जा परिवर्तन यात्रा में नेतृत्व करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस अवसर पर बोलते हुए, सीआईएल के अध्यक्ष पी. एम. प्रसाद ने कहा कि कोल इंडिया एक ऊर्जा प्रदाता से भारत की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण यात्रा का एक प्रमुख सक्षमकर्ता बनने की दिशा में परिवर्तन कर रहा है। उन्होंने कहा, “यह समझौता कोल इंडिया की सतत विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक कदम है। IIT मद्रास के साथ इस सहयोग के माध्यम से, कोल इंडिया ऊर्जा सुरक्षा, डीकार्बोनाइजेशन और सामाजिक-आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करने का लक्ष्य रखता है।”

IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि ने कहा कि उद्योग–शैक्षणिक सहयोग IIT मद्रास की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जो भारत को निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करने में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा, “कोल इंडिया के साथ यह साझेदारी हमारे इस मिशन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हम मिलकर ऐसे स्केलेबल और प्रभावशाली समाधान विकसित करेंगे जो भारत के सतत ऊर्जा भविष्य का समर्थन करें।”

यह केंद्र मानव संसाधन विकास में भी योगदान देगा, जिसमें पीएचडी, पोस्टडॉक्टरल और इंटर्नशिप कार्यक्रम शामिल होंगे, ताकि शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की नई पीढ़ी को भारत के हरित ऊर्जा परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए तैयार किया जा सके।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत देशभर में 25 लाख नए एलपीजी कनेक्शन स्वीकृत

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से उज्ज्वल होगा प्रदेश की बहनों का भविष्य - मुख्यमंत्री साय

छत्तीसगढ़ में  “सुशासन तिहार” और “नियद नेल्ला नार योजना” के अंतर्गत 1.59 लाख माताओं-बहनों को मिलेगा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ

रायपुर- भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत देशभर में 25 लाख नए एलपीजी कनेक्शन स्वीकृत किए गए हैं। इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ में  “सुशासन तिहार” और “नियद नेल्ला नार योजना” के अंतर्गत 1.59 लाख पात्र माताओं-बहनों को उज्ज्वला योजना का लाभ प्राप्त होगा।यह निर्णय छत्तीसगढ़ की लाखों माताओं-बहनों के जीवन में स्वच्छ ऊर्जा और स्वास्थ्य का उजाला लेकर आएगा। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में जो उजाला फैलाया है, वह आने वाले वर्षों में पूरे समाज के विकास का आधार बनेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति हमेशा से परिवार और समाज की धुरी रही है। उज्ज्वला योजना के माध्यम से उन्हें वह सम्मान मिला है जिसकी वे हकदार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्रत्येक पात्र बहन तक इस योजना का लाभ पहुँचाने के लिए कटिबद्ध है। भारत सरकार के इस निर्णय से छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा। ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की महिलाएं अब प्रदूषण रहित वातावरण में जीवन जी सकेंगी। 

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 28 लाख महिलाएं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ प्राप्त कर रही हैं।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.