Media24Media.com: #StateDevelopment

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #StateDevelopment. Show all posts
Showing posts with label #StateDevelopment. Show all posts

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में खनन क्षेत्र में हासिल हुई एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि

No comments Document Thumbnail

सीएमडीसी एवं जेएनएआरडीडीसी के बीच हुआ ऐतिहासिक एमओयू 

क्रिटिकल मिनरल्स के अनुसंधान एवं वैज्ञानिक विकास को मिलेगी नई दिशा

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "क्रिटिकल मिनरल मिशन" एवं "आत्मनिर्भर भारत" के विजन को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक, सतत एवं मूल्यवर्धित उपयोग की दिशा में लगातार प्रभावी पहल कर रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) और जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान, विकास एवं डिजाइन केंद्र (जेएनएआरडीडीसी), नागपुर के मध्य आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व, सीएमडीसी के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद,  तथा प्रबंध संचालक रजत बंसल के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। 

एमओयू के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान, खनन, खनिज संसाधनों के मूल्य संवर्धन तथा क्रिटिकल मिनरल्स के विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही राज्य में उपलब्ध खनिज संपदा का योजनाबद्ध, समयबद्ध एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को गति मिलेगी।

एमओयू एक्सचेंज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पंकज कुलश्रेष्ठ ने अपने संबोधन में अनुसंधान आधारित खनिज विकास, नवाचार और संस्थागत सहयोग के महत्व पर बल देते हुए कहा कि यह साझेदारी राज्य एवं देश के खनिज क्षेत्र के लिए दूरगामी परिणाम देने वाली पहल साबित होगी। भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर ऑफ माइंस डॉ. बी.एल. गुर्जर ने सीएमडीसी एवं खनिज साधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि दोनों संस्थाओं का तालमेल राज्य के खनिज क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान कर रहा है। 

कार्यक्रम में सीएमडीसी के महाप्रबंधक यू.के. कुरैशी ने निगम की 25 वर्षों की विकास यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों, संचालित खनिज परियोजनाओं, भविष्य की कार्ययोजनाओं तथा सेवा प्रदाता के रूप में निगम की सफल पहलों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने छत्तीसगढ़ में उपलब्ध खनिज संसाधनों की अपार संभावनाओं तथा उनके वैज्ञानिक एवं समावेशी दोहन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। वहीं रीजनल कंट्रोलर ऑफ माइंस प्रेम प्रकाश ने सीएमडीसी की टिन एवं कोरंडम परियोजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं तथा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता एवं वैधानिक प्रक्रियाओं को मजबूती मिली है।

जेएनएआरडीडीसी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र सिंह ने बताया कि संस्थान रेड मड से गैलियम एवं वैनेडियम तथा बॉक्साइट के उप-उत्पादों से स्कैंडियम की पुनर्प्राप्ति (रिकवरी) पर महत्वपूर्ण अनुसंधान कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे शोध भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

एमओयू का औपचारिक आदान-प्रदान भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर जनरल एवं जेएनएआरडीडीसी के निदेशक पंकज कुलश्रेष्ठ तथा सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक संजय कनकने ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।

कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि सीएमडीसी एवं जेएनएआरडीडीसी के बीच यह सहयोग खनिज अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग तथा सतत खनन को नई दिशा देगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खनिज क्षेत्र में हासिल यह एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक संपदा को विकास का आधार बना रही है। यह पहल न केवल प्रधानमंत्री के क्रिटिकल मिनरल मिशन और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध खनिज संपदा का सुनियोजित उपयोग कर राज्य के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति को भी नई गति प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक संजय कनकने ने स्वागत उद्बोधन दिया उन्होंने एमओयू को खनिज क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह साझेदारी भविष्य में राज्य के खनिज विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

स्वस्थ समाज ही समृद्ध राज्य की नींव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री ने जीपीएम में नवीन जिला अस्पताल भवन निर्माण कार्य का किया शुभारंभ

18 करोड़ के लागत से बनेगा 100 बिस्तरयुक्त जिला अस्पताल भवन 

52 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त और 71 ग्राम पंचायतें बाल विवाह मुक्त

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जीपीएम जिले की स्थापना की छठवीं वर्षगांठ के अवसर पर जिले को स्वास्थ्य क्षेत्र की एक बड़ी सौगात दी है। उन्होंने जिला अस्पताल के नवीन भवन के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। नवीन जिला अस्तपाल करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा। यह अत्याधुनिक अस्पताल 100 बिस्तरयुक्त होगा। इस अस्पताल के बनने से जिले के नागरिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक प्रणव मरपच्ची ने की।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि स्वस्थ समाज ही समृद्ध राज्य की नींव होता है। जीपीएम जिले में नए अस्पताल भवन का निर्माण स्वास्थ्य सुविधाओं को नई मजबूती देगा। टीबी मुक्त और बाल विवाह मुक्त पंचायतें इस बात का प्रमाण हैं कि जब शासन और समाज मिलकर काम करते हैं, तो बड़े सामाजिक बदलाव संभव होते हैं। छत्तीसगढ़ को रोगमुक्त, सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। 

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में जिले की 52 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त एवं 71 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया। इन पंचायतों के सरपंचों को प्रशस्ति पत्र एवं महात्मा गांधी जी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया। गौरतलब है कि बाल विवाह मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों में पिछले दो वर्षों में एक भी बाल विवाह के प्रकरण सामने नहीं आए हैं, वहीं टीबी मुक्त पंचायतों में दो से तीन वर्षों से कोई नया प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है। यह उपलब्धि जनजागरूकता, स्वास्थ्य विभाग और पंचायतों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को गति देने के लिए जागरूकता हेतु तीन प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जन-जागरूकता और अधिक सशक्त हो सके। यह अभियान 10 फरवरी से शुरु होकर 25 फरवरी तक चलेगा। जिसमें लोगो को निःशुल्क रुप से फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सामूहिक दवा सेवन कराया जाएगा। कार्यक्रम में विधायक अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैंकरा, अनेक जनप्रतिनिधियों सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में गाइडलाइन दरों का युक्तियुक्त निर्धारण, पारदर्शिता और सरलता की दिशा में बड़ा कदम

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000 के प्रावधानों के तहत केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड, छत्तीसगढ़ द्वारा स्थावर संपत्तियों के बाजार मूल्य निर्धारण से संबंधित गाइडलाइन दर वर्ष 2025–26 को अनुमोदित करते हुए 20 नवंबर 2025 से प्रदेशभर में लागू कर दिया गया है। यह निर्णय राज्य में संपत्ति मूल्यांकन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तार्किक और जनसुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

विगत पांच वर्षों से गाइडलाइन दरों का पुनरीक्षण नहीं होने के कारण प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में कई प्रकार की विसंगतियां उत्पन्न हो गई थीं। वर्ष 2025–26 की नवीन गाइडलाइन में इन विसंगतियों को दूर करते हुए दरों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। पूर्व प्रचलित गाइडलाइन में नगर पालिका क्षेत्रों में कुल 200 कंडिकाएं थीं, जिन्हें घटाकर 102 किया गया है। एक ही वार्ड में अलग-अलग कंडिकाओं और भिन्न दरों के कारण आमजन को संपत्ति के मूल्य को समझने में कठिनाई होती थी, जिसे अब सरल और स्पष्ट बनाया गया है।

वार्ड परिसीमन के बाद कंडिकाओं में आवश्यक संशोधन कर नई परिस्थितियों के अनुरूप दरें निर्धारित की गई हैं। समाचार पत्रों में प्रकाशित दरों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि वर्ष 2025–26 की गाइडलाइन में लगभग समान दरों को समायोजित कर एकरूप किया गया है, जिससे औसतन लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि परिलक्षित होती है। उदाहरण के तौर पर महासमुंद जिले में नई गाइडलाइन में पूरे रायपुर मार्ग की दर 32,500 रुपये तथा 20 मीटर अंदर की दर 7,500 रुपये निर्धारित की गई है।

इसी प्रकार यतियतनलाल वार्ड में परिसीमन के कारण दरों को युक्तियुक्त करते हुए 4,800 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये किया गया है। वार्ड क्रमांक 03 में भी एक ही मार्ग पर स्थित कंडिकाओं को समायोजित कर नई कंडिका सृजित की गई है और दरों में औसतन 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पुष्पा पेट्रोल पंप से पंकज सोनी के मकान तक निर्धारित दरें शंकर नगर वार्ड के सामने की दरों के अनुरूप रखी गई हैं, जिससे सड़क के आमने-सामने स्थित क्षेत्रों में समान दरें लागू हो सकें।

बरोण्डा चौक तथा बरोण्डा चौक से भाजपा कार्यालय तक के क्षेत्रों में भी दरों का युक्तियुक्तकरण करते हुए औसतन 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसी प्रकार अन्य वार्डों में भी समान परिस्थिति और महत्व के क्षेत्रों में दरों को एकरूप करते हुए संतुलित वृद्धि सुनिश्चित की गई है।

राज्य सरकार द्वारा किए गए इस पुनरीक्षण का उद्देश्य वास्तविक प्रचलित बाजार मूल्य को गाइडलाइन दरों में समाहित करना है, ताकि संपत्ति क्रय-विक्रय, स्टांप शुल्क और पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़े तथा आम नागरिकों को स्पष्ट और न्यायसंगत दरों का लाभ मिल सके। यह पहल छत्तीसगढ़ में सुगम, भरोसेमंद और जनहितैषी संपत्ति मूल्यांकन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से की सौजन्य मुलाकात

No comments Document Thumbnail

छत्तीसगढ़ में रेल सुविधाओं के विस्तार और नए प्रोजेक्ट्स पर हुई विस्तृत चर्चा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से सौजन्य मुलाकात की। बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ में रेलवे से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों रेल सुविधाओं के विस्तार, नए रेल प्रोजेक्ट्स की प्रगति, तथा प्रगतिरत परियोजनाओं की पूर्णता के संबंध में  विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई।मुख्यमंत्री साय ने आग्रह किया कि   स्वीकृत परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए, ताकि नागरिकों, उद्योगों और व्यापारियों को बेहतर परिवहन सुविधाएँ मिल सकें। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे मंत्रालय छत्तीसगढ़ में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार उपस्थित थे।

एपीएल अपोलो इंडस्ट्रीज ने छत्तीसगढ़ में 1200 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया, 100 बिस्तरों का चैरिटी अस्पताल भी बनाएगी कंपनी

No comments Document Thumbnail

रायपुर- एपीएल अपोलो इंडस्ट्रीज ग्रुप के चेयरमैन संजय गुप्ता ने अपनी टीम के साथ आज नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाक़ात की। मुलाक़ात के दौरान कंपनी ने राज्य में लगभग ₹1200 करोड़ के औद्योगिक निवेश का बड़ा प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा।

कंपनी ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि वह छत्तीसगढ़ में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए औद्योगिक संयंत्रों की स्थापना पर गंभीरता से काम कर रही है। निवेश प्रस्ताव राज्य की नई औद्योगिक नीति और तेज़ी से विकसित हो रहे औद्योगिक बुनियादी ढांचे को देखते हुए पेश किया गया है।

बैठक में एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल की घोषणा भी की गई। एपीएल अपोलो ग्रुप ने बताया कि वह छत्तीसगढ़ में 100 बिस्तरों का एक आधुनिक चैरिटी अस्पताल भी जल्द शुरू करेगा, जिससे आम जनता को किफ़ायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकेंगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ अहम मुलाकात, राज्य में खाद्य प्रसंस्करण को मिलेगी नई दिशा

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री चिराग पासवान से उनके कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान छत्तीसगढ़ से जुड़े अनेक जनहित विषयों पर रचनात्मक और सार्थक चर्चा हुई। मुख्यमं त्रीसाय ने विशेष रूप से राज्य में खाद्य सुरक्षा, कृषि-आधारित उद्योगों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM) संस्थान की स्थापना छत्तीसगढ़ में की जाए, ताकि राज्य के युवाओं को आधुनिक खाद्य तकनीक, उद्यमिता तथा नए रोजगारों से संबंधित उच्चस्तरीय प्रशिक्षण का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि कृषि दृष्टि से छत्तीसगढ़ एक मजबूत राज्य है और यहां ऐसे संस्थान से हजारों छात्रों, किसानों तथा खाद्य-आधारित उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस प्रस्ताव को अत्यंत सकारात्मक रूप से लेते हुए कहा कि वे इस विषय पर हर संभव सहयोग देंगे और इसे गंभीरता से विचार में लेंगे।

मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री साय ने यह अनुरोध भी किया कि वर्ल्ड फूड इंडिया के रीजनल समिट का आयोजन रायपुर में किया जाए। उन्होंने कहा कि रायपुर की समृद्ध खाद्य परंपरा, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और विविधता ऐसे आयोजन के लिए आदर्श गंतव्य बनाती है। यह फेस्टिवल क्षेत्रीय पाक-परंपराओं को वैश्विक पहचान देगा और नए खाद्य-आधारित उद्यमों के लिए बड़े अवसर उत्पन्न करेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह आयोजन दिल्ली के वर्ल्ड फूड इंडिया अथवा गुवाहाटी के नॉर्थ ईस्ट फूड फेस्ट की तर्ज पर हर दो वर्ष में आयोजित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में खाद्य वस्तुओं की जांच के लिए फूड टेस्टिंग लैब तथा खाद्य उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए फूड इर्रेडिएशन यूनिट स्थापित की जानी हैं, जिनके लिए राज्य केंद्र से सहयोग चाहता है। उन्होंने कहा कि धान तथा फल–सब्जी आधारित उद्योगों में बड़े निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को व्यापक गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने जानकारी दी कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को विशेष महत्व दिया गया है और निवेशकों को अनेक अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इसी के अंतर्गत Drools कंपनी द्वारा छत्तीसगढ़ में ₹1,000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है, जिससे लगभग 3,000 लोगों को रोजगार मिलेगा और इसका लाभ ग्रामीण व आदिवासी समुदायों तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को राइस ब्रान ऑयल हब के रूप में विकसित करना है, जिससे तेल आयात पर निर्भरता कम होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को सुदृढ़ समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ और विकसित भारत 2047 का सपना इन्हीं प्रयासों के माध्यम से साकार होगा।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत तथा इन्वेस्टमेंट कमिश्नर रितु सेन उपस्थित थीं।

प्रदेशवासियों के सपनों को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कर रही है कार्य: मुख्यमंत्री साय

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री "छत्तीसगढ़ 25 साल बेमिसाल” कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित “छत्तीसगढ़ 25 साल बेमिसाल” कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने राज्य की 25 वर्ष की स्वर्णिम विकास यात्रा पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि छत्तीसगढ़ की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की अहम भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों के सपनों को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने बस्तर सहित पूरे प्रदेश में विकास में बाधक नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं। सुरक्षा कैंप स्थापित किए जाने से सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों में भी विकास की पहुंच सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में किए जा रहे प्रयासों से नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर अपने मूल स्वरूप में भयमुक्त होकर प्रदेश के विकास में बेहतर भागीदारी देगा। साय ने कहा कि बस्तर ओलम्पिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के माध्यम से बस्तर की संस्कृति और प्रतिभा को दुनिया ने देखा है। बस्तर में शांति, समृद्धि और खुशहाली के नए युग का आरंभ हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के प्रति हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति पूरी दृढ़ता से लागू है। पूर्व में जो अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुए, उस पर कड़ा प्रहार किया गया है, जिसका परिणाम भी सभी देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने भूखमरी जैसे अभिशाप को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए थे, जिसके तहत गरीब परिवारों को अनाज उपलब्ध कराया गया। साथ ही, जरूरतमंद परिवारों को आज आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के सुशासन के सपनों को साकार करने की दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की लगभग सभी गारंटियों को पूरा कर दिया गया है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण ‘चरण पादुका योजना’ को भी पुनः प्रारंभ किया गया है। 

मुख्यमंत्री ने नई उद्योग नीति के आकर्षक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में निवेश लगातार बढ़ रहा है। अब तक राज्य सरकार को पौने आठ लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास में योगदान देने वाले विभिन्न संस्थानों और व्यक्तियों को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, मुख्यमंत्री के सलाहकार पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी अलोक सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री ने नीतीश कुमार को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर दी बधाई

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को शपथ लेने पर बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार एक अनुभवी प्रशासक हैं और उन्होंने राज्य में सुशासन सुनिश्चित करने में वर्षों का महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने उनके आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

प्रधानमंत्री ने बिहार के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि दोनों नेता जमीनी स्तर पर जनसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और बिहार की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री ने बिहार सरकार में मंत्रियों के रूप में शपथ लेने वाले सभी नेताओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह एक समर्पित और सक्षम टीम है, जो राज्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।

प्रधानमंत्री ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में लिखा:

  • “नीतीश कुमार जी को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बहुत-बहुत बधाई। वे एक कुशल और अनुभवी प्रशासक हैं। राज्य में सुशासन का उनका शानदार ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। नए कार्यकाल के लिए उन्हें मेरी हार्दिक शुभकामनाएं! @NitishKumar”

  • “सम्राट चौधरी जी और विजय सिन्हा जी को बिहार के उप मुख्यमंत्री बनने पर ढेरों बधाई। जमीनी स्तर पर दोनों नेताओं के पास जनसेवा का लंबा अनुभव है। उन्हें भी मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं! @samrat4bjp @VijayKrSinhaBih”


    “बिहार सरकार में मंत्रियों के रूप में शपथ लेने वाले सभी साथियों को मेरी हार्दिक बधाई। समर्पित नेताओं की यह एक ऐसी शानदार टीम है, जो बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। उन सभी को मेरी ढेरों शुभकामनाएं!”

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी रेखांकित किया कि बिहार की नई सरकार समर्पित नेतृत्व और टीम वर्क के माध्यम से राज्य के विकास और सुशासन को नई दिशा देगी।

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ की संवादात्मक बैठक, राज्य की सांख्यिकीय प्रणाली का लिया अवलोकन

No comments Document Thumbnail

लखनऊ- राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक संवादात्मक बैठक का आयोजन किया, जिसमें राज्य की सांख्यिकीय प्रणाली का अवलोकन किया गया। इस बैठक का उद्देश्य आधिकारिक सांख्यिकी की गुणवत्ता, समयबद्धता और पद्धतिगत स्थिरता को सुधारना तथा राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के अनुमानों में पारदर्शिता और मजबूती सुनिश्चित करना था।

बैठक में प्रो. राजीव लक्ष्मण करंडिकर, अध्यक्ष, NSC, प्रो. ए. गणेश कुमार, प्रो. देबासीस कुंडु, और आशित कुमार साधु, आयोग के सदस्य, के साथ-साथ डॉ. सौरभ गर्ग, सचिव, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) एवं सदस्य सचिव, NSC उपस्थित रहे। बैठक में MoSPI के वरिष्ठ अधिकारी और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख अधिकारी भी शामिल हुए। आयोग ने सांख्यिकी की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता बढ़ाने के लिए पद्धतिगत विकास और क्षमता निर्माण के महत्व पर बल दिया।

बैठक का शुभारंभ अल्का बहुगुणा धौंड़ियाल, निदेशक, अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES), द्वारा स्वागत भाषण के साथ हुआ। उन्होंने विकसित उत्तर प्रदेश और भारत @2047 की दृष्टि को प्राप्त करने में सटीक, विस्तारपूर्ण और समयोचित डेटा की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय सांख्यिकी योजना बनाने, निगरानी और विकासात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अनिवार्य है।

अलोक कुमार, प्रमुख सचिव (योजना), उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था (OTD) मिशन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने मुख्यमंत्री की दृष्टि साझा की, जिसमें उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अग्रणी योगदानकर्ता बनाने की दिशा पर जोर दिया गया। उन्होंने समर्थ यूपी पोर्टल, फैमिली आईडी डेटाबेस और महिला आर्थिक सशक्तिकरण (WEE) सूचकांक जैसी कई पहलें साझा कीं, जो डेटा-आधारित निर्णय लेने और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हैं।

DES टीम द्वारा प्रस्तुतियाँ राज्य में सांख्यिकीय अवसंरचना मजबूत करने में प्रगति को दर्शाती हैं। तकनीकी सत्रों में GSDP अनुमान, जिला घरेलू उत्पाद (DDP) की तैयारी, प्रशासनिक और सर्वेक्षण डेटा के उपयोग से बॉटम-अप दृष्टिकोण शामिल थे। महाकुंभ जैसे बड़े पैमाने की घटनाओं से आर्थिक गतिविधियों का मूल्यांकन और Periodic Labour Force Survey (PLFS) तथा All-India Survey on Unincorporated Sector Enterprises (ASUSE) के पायलट सर्वेक्षण पर भी प्रस्तुति दी गई।

डॉ. सौरभ गर्ग, सचिव, MoSPI ने प्रशासनिक डेटा के एकीकरण, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के अपनाने और सांख्यिकीय प्रक्रिया में पद्धतिगत पारदर्शिता बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डेटा स्रोतों का समन्वय, आधुनिक उपकरणों जैसे GIS और डैशबोर्ड का उपयोग, और डेटा की उपयोगकर्ताओं के लिए सुलभता प्रभावी शासन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए आवश्यक हैं।

NSC के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश सरकार की सांख्यिकीय प्रणाली को आधुनिक बनाने और विभागों में डेटा सिस्टम को एकीकृत करने की पहल की सराहना की। उन्होंने राज्य को अनुमानों की विधियों को सुधारने, सैम्पलिंग डिज़ाइन मजबूत करने और MoSPI के सहयोग से मानकीकृत मानकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। आयोग ने राज्य को पद्धतिगत कठोरता बढ़ाने और सांख्यिकीय संकलन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन और समर्थन देने का आश्वासन दिया।

MoSPI और राज्य योजना विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने GSDP, वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP), राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) और मूल्य सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण सांख्यिकीय क्षेत्रों पर विचार साझा किए। दोनों पक्षों ने जिला स्तर पर डेटा की विस्तारशीलता सुधारने और रीयल-टाइम निगरानी और प्रसार के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाने के महत्व पर बल दिया।

बैठक में WEE सूचकांक, फैमिली आईडी पहल और शिकायत निवारण एवं कार्यक्रम निगरानी डैशबोर्ड जैसी सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारों पर भी चर्चा हुई। इन पहलों को संपूर्ण डेटा प्रबंधन और बेहतर सेवा वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में मान्यता दी गई। NSC के सदस्यों ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि डेटा को प्रभावी ढंग से समावेशिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

समापन सत्र में डॉ. के. वी. राजू, आर्थिक सलाहकार, माननीय मुख्यमंत्री और अवनीश कुमार अवस्थी, सलाहकार, माननीय मुख्यमंत्री ने राज्य की साक्ष्य-आधारित योजना और डेटा-आधारित शासन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग तथा MoSPI द्वारा प्रदान किए गए मूल्यवान मार्गदर्शन और तकनीकी समर्थन की सराहना की।

बैठक का समापन NSC के अध्यक्ष, प्रो. राजीव लक्ष्मण करंडिकर के अभिभाषण के साथ हुआ, जिन्होंने मजबूत और पारदर्शी सांख्यिकीय प्रणाली बनाने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने संस्थागत क्षमता निर्माण में दृश्यमान प्रगति की है और GSDP अनुमानों में पद्धतिगत सुधार जारी रखने के महत्व पर जोर दिया, ताकि वास्तविक और साक्ष्य-आधारित रुझानों को परिलक्षित किया जा सके।


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के बीच उच्च स्तरीय वार्ता

No comments Document Thumbnail

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के अध्यक्ष प्रो. राजीव लक्ष्मण करंदीकरआयोग के सदस्य प्रो. ए गणेश कुमार ,असित कुमार साधु और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के सचिव और एनएससी के सदस्य सचिव डॉ. सौरभ गर्ग के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई। यह बैठक राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग और उत्तर प्रदेश के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) के बीच एक दिवसीय राज्य स्तरीय संवाद से पहले आयोजित की गई।

उत्तर प्रदेश की सांख्यिकीय प्रणाली को सुदृढ़ बनाना इस बैठक में चर्चा का मुख्य विषय था ताकि राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में सहायता मिल सके। मुख्यमंत्री ने आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधारविशेष रूप से राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)उपभोक्ता मूल्य सूचकांकरोज़गार संकेतकों और औद्योगिक सांख्यिकी के आकलन में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) की ओर से सहयोग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सीएम डैशबोर्ड और वन ट्रिलियन इकोनॉमी मिशन जैसी पहलों के माध्यम से आंकड़ों पर आधारित योजना बनाने और वास्तविक समय पर निगरानी के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर भी बल दिया।बैठक में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के अध्यक्ष ने साक्ष्य-आधारित लोक नीति निर्माण में विश्वसनीय सांख्यिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) अनुमानमूल्य सांख्यिकी और सर्वेक्षण डिज़ाइन जैसे पद्धतिगत और तकनीकी क्षेत्रों में राज्य को सहयोग देने के लिए राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने यह भी कहा कि शासन के सभी स्तरों पर आंकड़ों की सटीकतातुलना की योग्यता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय और राज्य-स्तरीय सांख्यिकीय प्रणालियों का सामंजस्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने "सांख्यिकी सुदृढ़ीकरण के लिए सहायता (एसएसएस)" योजना के अंतर्गत राज्य के साथ मंत्रालय के निरंतर सहयोग पर बल दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि उत्तर प्रदेश को आधुनिक सांख्यिकीय अवसंरचना के विकासडेटा प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने और उभरती हुई पद्धतियों तथा प्रौद्योगिकियों के संबंध में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधिकारियों के प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के आयोजन के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती रहेगी।

इस दौरान, कई सांख्यिकीय क्षेत्रों में राज्य की प्रगति की सराहना की गई। फिलहाल, उत्तर प्रदेश उन प्रमुख राज्यों में से एक है जिनमें मुद्रास्फीति की दर सबसे कम है और यह नियमित रूप से राज्य-स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) जारी करता है। उत्तर प्रदेश का आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस)घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस) और असंगठित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) जैसे राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। बैठक में जीडीपी और आईआईपी के लिए आधार वर्ष को 2022-23 में संशोधित करने पर चर्चा की गई और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने नई सामग्री बास्केट और फ़ैक्टरी फ़्रेम विकसित करने में पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

आयोग ने सांख्यिकीय आंकड़ों को शासन और विकास योजना के साथ एकीकृत करने में उत्तर प्रदेश के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) के प्रयासों की सराहना की। राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के अध्यक्ष ने राज्य को डिजिटल और सेवा-आधारित आर्थिक गतिविधियों से जुड़े नए और उभरते क्षेत्रों को शामिल करने के लिए अपने सांख्यिकीय कवरेज का और विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने पद्धतिगत समीक्षाओं के माध्यम से जिला स्तर पर आंकड़ों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

मुख्यमंत्री ने सुझावों का स्वागत किया और कहा कि राज्य सरकार सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के साथ घनिष्ठ सहयोग के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि कृषिउद्योगस्वास्थ्य और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में प्रगति को मापने के लिए मज़बूत और विश्वसनीय आंकड़े आवश्यक हैं। उन्होंने राज्य में सभी सांख्यिकीय पहलों के लिए निरंतर संस्थागत समर्थन का आश्वासन दिया।

बैठक में प्रशासनिक और वैकल्पिक डेटा स्रोतों के उपयोग तथा वास्तविक समय में रिपोर्टिंग के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने और राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली के अनुरूप एक समान मानकों को अपनाने के महत्व पर भी चर्चा हुई। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने बताया कि नियमित परामर्शक्षमता निर्माण कार्यक्रमों और डिजिटल पहलों के माध्यम से राज्यों को स्थानीय और क्षेत्रीय विकास के लिए सांख्यिकीय आंकड़ों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए सक्षम बनाया जा रहा है।

यह वार्ता केंद्र और राज्य सांख्यिकीय एजेंसियों के बीच मज़बूत समन्वय की दिशा में सकारात्मक कदम है। दोनों पक्षों ने उत्तर प्रदेश के आर्थिक परिवर्तन और समावेशी विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में प्रभावकारी सहायता के लिए पारदर्शीप्रौद्योगिकी-सक्षम और डेटा-संचालित सांख्यिकीय ढांचा विकसित करने के अपने साझा उद्देश्यों की पुष्टि की।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.