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आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक उड़ान : विक्रम-1 की सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

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भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार का सशक्त प्रतीक है विक्रम-1 : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित भारत के पहले निजी कक्षीय प्रक्षेपण यान विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे देश के अंतरिक्ष इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन की नीतियों के फलस्वरूप आज भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में नई पहचान बना रहा है। विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण इसी परिवर्तनकारी सोच का परिणाम है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उपलब्धि भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ अनौपचारिक लंच पर किया संवाद

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए एक अनौपचारिक लंच का आयोजन किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह पिछले एक दशक से समय-समय पर अपने आवास पर मीडिया के साथ इस प्रकार की अनौपचारिक बैठकों का आयोजन करते रहे हैं। यह आयोजन पत्रकारों के साथ खुले और सहज संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

इस अवसर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शासन सुधार और राष्ट्रीय विकास से जुड़े समकालीन विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने विभिन्न नीतिगत पहलों, उभरते जनहित के विषयों और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए तथा अनौपचारिक सुझाव भी दिए।

संवाद के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने SHANTI अधिनियम, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) की भूमिका और देश के विभिन्न हिस्सों में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण विधायी और नीतिगत विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती रहेगी।

सरकार के सुधार एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि विज्ञान सुधारों का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जबकि शासन सुधार तेजी से प्रौद्योगिकी आधारित हो रहे हैं। उन्होंने CPGRAMS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार तकनीक पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के प्रशासनिक और डिजिटल गवर्नेंस मॉडल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रुचि देखने को मिल रही है, जिसके चलते विदेशी छात्र भारत आकर इन मॉडलों का अध्ययन कर रहे हैं।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) अभियान जैसी नागरिक-केंद्रित पहलों का भी उल्लेख किया, जिससे पेंशनधारकों को बड़ी सुविधा मिली है। उन्होंने कहा कि ऐसी डिजिटल सुधार पहलें सरकार की “ईज ऑफ लिविंग” और “ईज ऑफ वर्किंग” की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में हाल ही में घोषित ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) फंड का उल्लेख करते हुए मंत्री ने इसे भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा और विचार से प्रभाव तक की यात्रा तेज होगी।

अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे विकास पर बात करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने संचार, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, कृषि और नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष अनुप्रयोगों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 जैसे आगामी अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी भी साझा की, जो भारत की चंद्र अन्वेषण क्षमता को और मजबूत करेंगे।

मंत्री ने लैवेंडर क्रांति जैसे विज्ञान आधारित सामाजिक-आर्थिक अभियानों का भी उल्लेख किया, जो ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और स्थानीय उद्यमिता को जोड़कर आजीविका के नए अवसर सृजित कर रहे हैं।

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पूरे संवाद के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने मीडिया के साथ निरंतर संवाद के महत्व पर जोर देते हुए पत्रकारों को जटिल नीतिगत पहलों और वैज्ञानिक उपलब्धियों को आम जनता तक पहुँचाने में सरकार का अहम साझेदार बताया। उन्होंने सूचित जन विमर्श और रचनात्मक प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका की सराहना की।

यह अनौपचारिक लंच खुले संवाद और आपसी सराहना के माहौल में संपन्न हुआ, जिसने सरकार और मीडिया के बीच पारदर्शिता, सहयोग और राष्ट्र निर्माण के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।

प्रधानमंत्री ने LVM3-M6 की सफल लॉन्चिंग पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को दी बधाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने LVM3-M6 की सफल लॉन्चिंग पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है। इस मिशन के तहत भारतीय धरती से अब तक का सबसे भारी उपग्रह तथा अमेरिका का BlueBird Block-2 अंतरिक्ष यान अपने निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक गर्वपूर्ण उपलब्धि है और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है।

मोदी ने कहा,

“LVM3 द्वारा विश्वसनीय हेवी-लिफ्ट क्षमता का प्रदर्शन किया जाना गगनयान जैसे भविष्य के मिशनों की नींव को मजबूत करता है, वाणिज्यिक प्रक्षेपण सेवाओं के विस्तार में सहायक है और वैश्विक साझेदारियों को और सुदृढ़ करता है।”

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट किया:

“भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम…

LVM3-M6 की सफल लॉन्चिंग, जिसके माध्यम से भारतीय धरती से अब तक का सबसे भारी उपग्रह — अमेरिका का BlueBird Block-2 अंतरिक्ष यान — अपने निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया, भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक गर्वपूर्ण उपलब्धि है।

यह भारत की हेवी-लिफ्ट प्रक्षेपण क्षमता को सुदृढ़ करता है और वैश्विक वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में हमारी बढ़ती भूमिका को मजबूत करता है।

यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हमारे प्रयासों को भी दर्शाता है। हमारे परिश्रमी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को हार्दिक बधाई।

भारत अंतरिक्ष की दुनिया में निरंतर नई ऊँचाइयों को छूता रहेगा!”

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