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भारतीय रेल का व्यापक आधुनिकीकरण: विद्युतीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं से हरित भविष्य की ओर कदम

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भारतीय रेल सुरक्षा, समयबद्धता, विश्वसनीयता और यात्री सुविधा को बढ़ाने के लिए अपने बुनियादी ढांचे और रोलिंग स्टॉक (Engine, Coaches आदि) को लगातार आधुनिक तकनीक अपनाते हुए उन्नत कर रही है। ये सुधार भारतीय रेल को आधुनिक बनाने और यात्रियों की बढ़ती अपेक्षाओं को पूरा करने पर केंद्रित हैं।

आधुनिक तकनीक और रेल नेटवर्क के विद्युतीकरण (Electrification) के कारण कोयला आधारित इंजन और डीजल इंजनों के उपयोग में कमी आई है।

रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण

भारतीय रेल पर ब्रॉड गेज (BG) नेटवर्क का लगभग 99.2% विद्युतीकरण किया जा चुका है। शेष नेटवर्क का विद्युतीकरण कार्य जारी है।

विद्युतीकरण की प्रगति इस प्रकार है:

  • अवधि
  • रूट किलोमीटर
  • 2014 से पहले (लगभग 60 वर्ष)
  • 21,801
  • 2014–25
  • 46,900

ऊर्जा-कुशल आधुनिक इंजन

भारतीय रेल अत्याधुनिक तीन-फेज IGBT तकनीक पर आधारित लोकोमोटिव का निर्माण और संचालन कर रही है।
इनमें रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम होता है, जिससे ब्रेक लगाने पर ऊर्जा वापस सिस्टम में जाती है और ये अधिक ऊर्जा-कुशल बनते हैं।

भाप इंजन का सीमित उपयोग

कोयला आधारित भाप इंजन अब केवल निम्न स्थानों पर उपयोग किए जाते हैं:

  • यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त पर्वतीय रेल मार्गों पर

  • मौसमी स्टीम ट्रेनें

  • IRCTC के सहयोग से चार्टर्ड ट्रेनों में

नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग

भारतीय रेल ने अपने ट्रैक्शन (Train Operation) के लिए आवश्यक बिजली को सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने की योजना बनाई है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा।

नवंबर 2025 तक:

  • 812 MW सौर ऊर्जा संयंत्र

  • 93 MW पवन ऊर्जा संयंत्र
    स्थापित किए जा चुके हैं और रेल ट्रैक्शन की आवश्यकता पूरी कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त:

  • 100 MW नवीकरणीय ऊर्जा (RTC मोड) SECI से प्राप्त होना शुरू

  • 1,500 MW हाइब्रिड (सोलर + विंड + स्टोरेज) नवीकरणीय क्षमता भी ट्रैक्शन के लिए सुनिश्चित

ट्रैक्शन खर्च

वर्ष 2023–24 में भारतीय रेल का कुल ट्रैक्शन खर्च ₹29,614 करोड़ था।

हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना

भारतीय रेल ने RDSO द्वारा तैयार मानकों के अनुसार अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की अत्याधुनिक परियोजना शुरू की है। यह परियोजना साफ-सुथरी और हरित उर्जा आधारित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

2030 तक नेट ज़ीरो कार्बन लक्ष्य

भारतीय रेल 2030 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जक बनने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है। इसके लिए बिजली की आवश्यकता धीरे-धीरे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी की जाएगी।


PM-KUSUM योजना के तहत किसानों और FPOs को मिली बड़ी सफलता

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पीएम-कुसुम योजना एक मांग आधारित योजना है। इसकी क्षमता आवंटन उन राज्यों को प्राप्त मांग और प्रगति के आधार पर किया जाता है। योजना में किसान, किसानों के समूह, किसान उत्पादक संगठन (FPO), जल उपयोगकर्ता संघ (WUA), प्राथमिक कृषि क्रेडिट सोसायटी (PACS) आदि भाग ले सकते हैं।

यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा रही है। 30 नवंबर 2025 तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में योजना की स्थापना प्रगति (Annexure-I) के अनुसार है।

योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या, जिसमें FPO शामिल हैं, Annexure-II में दी गई है।

30 नवंबर 2025 तक PM-KUSUM योजना के सभी घटकों के तहत कुल 10,203 मेगावाट सौर ऊर्जा स्थापित की जा चुकी है।

योजना के तहत वित्तीय सहायता राज्यों की मांग, SIAs द्वारा रिपोर्ट की गई प्रगति और योजना की दिशानिर्देशों के अनुसार जारी की जाती है। अब तक राज्यों से प्राप्त मांग के अनुसार ₹7,106 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।

योजना के क्रियान्वयन को सरल बनाने के लिए मंत्रालय ने 17 जनवरी 2024 को व्यापक संशोधित दिशानिर्देश जारी किए।

दिशानिर्देशों के अनुसार लघु और सीमांत किसानों तथा सूक्ष्म सिंचाई तकनीक का उपयोग करने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जाती है।

योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए मंत्रालय समय-समय पर व्यापक जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यशालाएँ आयोजित करता है। इसमें राज्यों के साथ समीक्षा बैठक और मार्गदर्शन भी शामिल हैं।

यह जानकारी संयुक्त राज्य मंत्री, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा श्रिपाद यसो नाइक द्वारा लोकसभा में लिखित उत्तर में दी गई।

Annexure-II: PM-KUSUM योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या (30.11.2025 तक)

  • S.No   राज्य/केंद्र शासित प्रदेश कुल लाभार्थी (FPO सहित)
    Arunachal Pradesh     616
    Assam 151
    Chhattisgarh 9
    Goa 859
    Gujarat 2,28,504
    Haryana 1,80,582
    Himachal Pradesh 1,193
    Jammu & Kashmir 3,601
    Jharkhand 43,693
    Karnataka 60,387
    Kerala 13,489
    Ladakh 102
    Madhya Pradesh 37,689
    Maharashtra 11,21,416
    Manipur 150
    Meghalaya 98
    Mizoram 40
    Nagaland 140
    Odisha 10,113
    Punjab 17,592
    Rajasthan 2,35,924
    Tamil Nadu 4,950
    Tripura 7,061
    Uttar Pradesh 72,417
    Uttarakhand 1,663
    West Bengal 20
  • कुल लाभार्थी: 20,42,459


भारत ने दर्ज की अब तक की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा वृद्धि, ओडिशा में 1.5 लाख रूफटॉप सोलर की योजना

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केंद्रीय नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री  प्रल्हाद जोशी ने भारत में ऐतिहासिक रूप से स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार को उजागर करते हुए कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में देश ने अभी तक की सबसे बड़ी गैर-फॉसिल क्षमता जोड़ी है, कुल 31.25 GW, जिसमें से 24.28 GW सौर ऊर्जा है।

जोशी ने यह जानकारी ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट 2025, पुरी, ओडिशा में दी और साथ ही ओडिशा के लिए 1.5 लाख रूफटॉप सोलर ULA मॉडल की घोषणा की, जिससे राज्य के लगभग 7–8 लाख लोगों को लाभ मिलेगा और उनकी सशक्तिकरण में मदद होगी।

वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की भूमिका

उन्होंने कहा कि विश्व ने 2022 में 1 TW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने में लगभग 70 साल लिए, लेकिन 2024 तक केवल दो साल में 2 TW की क्षमता हासिल कर ली। इस वैश्विक वृद्धि में भारत का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

पिछले 11 वर्षों में भारत की सौर क्षमता 2.8 GW से लगभग 130 GW तक बढ़ी, यानी 4,500% से अधिक की वृद्धि। केवल 2022–2024 के बीच, भारत ने वैश्विक सौर ऊर्जा में 46 GW का योगदान दिया और तीसरे सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में उभरा।

जोशी ने यह भी कहा कि भारत के पास विश्व के पाँचवें सबसे बड़े कोयला भंडार हैं और यह कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। इसके बावजूद, भारत धीरे-धीरे कोयले और नवीकरणीय ऊर्जा का संतुलन बना रहा है।

ओडिशा में नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में प्रगति

ओडिशा के लिए नई पहलों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत उपभोक्ता-स्वामित्व वाले Utility-Led Aggregation (ULA) मॉडल के तहत राज्य में 1.5 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम (प्रति यूनिट 1 kW) स्थापित किए जाएंगे। इससे लगभग 7–8 लाख लोगों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को लाभ मिलेगा।

मंत्री ने बताया कि ओडिशा पहले से ही स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में अग्रणी है। राज्य में स्थापित कुल नवीकरणीय क्षमता 3.1 GW से अधिक है, जो राज्य की कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 34% से अधिक है।

PM सूर्य घर योजना के तहत:

  • 1.6 लाख परिवारों ने रूफटॉप सोलर के लिए आवेदन किया

  • 23,000 से अधिक इंस्टॉलेशन पूरे हुए

  • 19,200 से अधिक परिवारों के बैंक खातों में ₹147 करोड़ से अधिक की सब्सिडी सीधे ट्रांसफर की गई

प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और केंद्र–राज्य सहयोग

जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बनाए गए समग्र इकोसिस्टम, आसान व्यापारिक माहौल, निवेशकों का विश्वास, मजबूत आधारभूत संरचना, मांग-आधारित योजनाएँ और केंद्र–राज्य सहयोग ने भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को गति दी है।

मंत्री ने ओडिशा के भविष्य के लिए आश्वस्ति व्यक्त की और राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव, और जनता की सराहना की, जिन्होंने स्वच्छ ऊर्जा और हरित तकनीक को बढ़ावा दिया।

ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट (GELS) 2025

ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट (GELS) 2025, पुरी भारत की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज़ करने के लिए नीति निर्माता, नवप्रवर्तनकर्ता और उद्योग नेताओं को एक मंच पर लाने का पहला कदम है।
5–7 दिसंबर 2025 के बीच आयोजित इस समिट में केंद्रीय और राज्य ऊर्जा मंत्री, वैश्विक ऊर्जा नेता, नवप्रवर्तक और उद्योगपति भाग लेंगे, जो ऊर्जा के भविष्य को आकार देने के लिए विचार-विमर्श करेंगे।


पी.एम. सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत रायगढ़ का एक ग्राम बनेगा ‘सोलर मॉडल विलेज’

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जिला स्तरीय चयन समिति ने शुरू की चयन प्रक्रिया, 10 सर्वाधिक आबादी वाले ग्रामों में अगले छह माह चलेगी प्रतिस्पर्धा

सौर संयंत्र स्थापना, जनजागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और नवाचार पर तय होगा मॉडल विलेज का चयन

रायुपर- केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पी.एम. सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत रायगढ़ जिले में एक ग्राम को पूर्णतः सौर ऊर्जा आधारित सोलर मॉडल विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। इस दिशा में जिला स्तरीय चयन समिति ने औपचारिक रूप से चयन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। कलेक्टर  की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिले के उन्हीं ग्रामों को प्रतिस्पर्धा में शामिल किया जाएगा, जिनकी जनसंख्या 5 हजार  से अधिक है। चूंकि जिले में इस श्रेणी के ग्राम सीमित संख्या में हैं, इसलिए प्रशासन ने सर्वाधिक जनसंख्या वाले 10 ग्रामों का चयन कर उन्हें छह माह की प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया में शामिल करने का निर्णय लिया है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर  राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को गति देने के लिए जिलों को निरंतर कार्य करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर घर सौर ऊर्जा लक्ष्य को धरातल पर साकार किया जा सके।

रायगढ़ जिले में केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार जिले में प्रतियोगिता के लिए चयनित 10 ग्राम ग्राम पंचायतों में घरघोड़ा विकासखंड का ग्राम कुडुमकेला, तमनार विकासखंड का ग्राम तमनार, रायगढ़ विकासखंड का ग्राम खैरपुर, धरमजयगढ़ विकासखंड का ग्राम विजयनगर, तमनार विकासखंड का ग्राम तराईमाल, लैलूंगा विकासखंड का ग्राम गहनाझरिया, पुसौर विकासखंड का ग्राम गढ़मरिया, धरमजयगढ़ विकासखंड का ग्राम छाल, पुसौर विकासखंड का ग्राम सिसरिंगा, और पुसौर विकासखंड का ग्राम कोडातराई। इन्हीं ग्रामों में से एक ग्राम जिले का पहला सोलर मॉडल विलेज बनेगा।

 जिले के सभी विकासखंड से ग्राम  पंचायतों का चयन किया गया है। इन ग्रामों में अब अगले छह माह तक सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, जनजागरूकता अभियान चलाने, घरेलू एवं सामुदायिक सौर संयंत्रों की स्थापना, तथा योजनाओं के लिए ग्रामीणों द्वारा किए जाने वाले आवेदनों की सतत समीक्षा की जाएगी।

इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए  प्रत्येक चयनित ग्राम में आदर्श ग्राम समिति गठित की जा रही है, जिसमें सरपंच, सचिव, जनप्रतिनिधि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक, डॉक्टर, कृषि विस्तार अधिकारी तथा संबंधित शासकीय अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यह समिति डोर-टू-डोर संपर्क कर ग्रामीणों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। साथ ही पी.एम. कुसुम योजना, जल जीवन मिशन के सोलर डुअल पंप, सोलर हाईमास्ट, सोलर स्ट्रीट लाइट तथा अन्य नवीकरणीय ऊर्जा आधारित व्यवस्थाओं की जानकारी भी प्रदान करेगी।

क्रेडा के सहायक अभियंता विक्रम वर्मा ने बताया कि इस प्रतियोगिता के दौरान प्रत्येक ग्राम अपनी जरूरतों के अनुसार सामुदायिक सौर संयंत्रों के प्रस्ताव तैयार कर जिला स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। छह माह की अवधि पूर्ण होने पर जिला स्तरीय समिति द्वारा सभी ग्रामों का मूल्यांकन किया जाएगा। यह मूल्यांकन ग्रामीणों द्वारा स्थापित सौर संयंत्रों की संख्या, योजनाओं के लिए किए गए आवेदनों, सामुदायिक सहभागिता, उपलब्ध ऊर्जा सुविधाओं और सौर संसाधनों के उपयोग की आधारशिला पर किया जाएगा।

इसी मूल्यांकन के आधार पर जिले के पहले सोलर मॉडल विलेज का चयन किया जाएगा और चयनित ग्राम का विस्तृत डी.पी.आर. तैयार कर 15 मार्च 2025 तक ऊर्जा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को भेजा जाएगा, ताकि उस ग्राम को पूर्णतः सौर ऊर्जा आधारित आदर्श मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने IMD के दो Doppler Weather Radars, सौर ऊर्जा प्रणाली और मौसम विज्ञान संग्रहालय का उद्घाटन किया

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 डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के तीन प्रमुख कार्यक्रमों का उद्घाटन किया। इनमें शामिल हैं: रायपुर और मंगलूरु में दो अत्याधुनिक डॉपलर वेदर राडार (DWRs), Mausam Bhawan में नई सौर ऊर्जा प्रणाली, और छात्रों एवं युवाओं के लिए मौसम विज्ञान संग्रहालय।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में IMD ‘मिशन मौसम’ परियोजना को तेजी से लागू कर रहा है, जिसे 14 जनवरी 2025 को IMD के 150 वर्षीय उत्सव पर देश को समर्पित किया गया था। उन्होंने बताया कि देश के राडार नेटवर्क को लगभग तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था। अब कुछ ही महीनों में 126 राडार स्थापित हो चुके हैं, जबकि लक्ष्य 2027 तक 47 से लगभग तीन गुना बढ़ाने का था।

रायपुर में ड्यूल पोलराइज्ड, सॉलिड-स्टेट पावर एम्पलीफायर आधारित C-बैंड डॉपलर वेदर राडार स्थापित किया गया है, जो 250 किमी की कवरेज क्षमता के साथ मानसून डिप्रेशन, निम्न दबाव प्रणाली, भारी वर्षा, तूफान, बिजली, ओले, हवाओं और उथल-पुथल का पता लगा सकता है। यह राडार छत्तीसगढ़, आंतरिक ओड़िशा, पूर्व मध्य प्रदेश, दक्षिण पश्चिम झारखंड और पूर्व उत्तर प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में IMD की भविष्यवाणी क्षमताओं को मजबूत करेगा।

मंगलूरु में दूसरा C-बैंड डॉपलर वेदर राडार स्थापित किया गया है, जो कर्नाटक, गोवा, दक्षिण कोंकण, उत्तरी लक्षद्वीप और कर्नाटक, केरल, गोवा और दक्षिण महाराष्ट्र के क्षेत्रीय तूफानों और गंभीर मौसम की निगरानी करेगा। यह कर्नाटक का पहला IMD राडार है और पश्चिमी तट पर आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दोनों राडार ‘Make in India’ पहल के तहत विकसित किए गए हैं।

डॉ. सिंह ने मौसम विज्ञान संग्रहालय का भी उद्घाटन किया, जो छात्रों, शोधकर्ताओं और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। संग्रहालय में ऐतिहासिक मौसम उपकरण, ऊपरी वायु अवलोकन प्रणाली, संचार उपकरण, राडार और उपग्रह घटक प्रदर्शित किए गए हैं।

इसके अलावा, Mausam Bhawan परिसर में 771 kWp सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित की गई है, जिसमें 1,315 सौर पैनल शामिल हैं। इस पहल से IMD की ऊर्जा खपत पूरी तरह से पूरी होने के बाद अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी जा सकेगी, जिससे पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ दोनों होंगे।

डॉ. सिंह ने कहा कि ये लॉन्च IMD की भूमिका को मजबूत करते हैं और देश के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देंगे। उन्होंने IMD को “विश्व बंधु” करार दिया क्योंकि यह पड़ोसी देशों को मौसम सेवाएँ और आपदा सलाह प्रणालियाँ उपलब्ध कराता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की आठवीं महासभा का उद्घाटन किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (28 अक्टूबर, 2025) नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की आठवीं महासभा के उद्घाटन सत्र का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) मानवता की साझा आकांक्षा का प्रतीक है — सौर ऊर्जा को समावेश, गरिमा और सामूहिक समृद्धि के स्रोत के रूप में उपयोग करने की दिशा में एक वैश्विक प्रयास।

राष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है, और इस खतरे से निपटने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। भारत जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके समाधान के लिए दृढ़ कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि ISA सौर ऊर्जा को अपनाने और उसके उपयोग को प्रोत्साहित कर इस वैश्विक चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि समावेश का विचार भारत की विकास यात्रा की पहचान है। देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में घरों को रोशन करने के हमारे अनुभव ने इस विश्वास को मजबूत किया है कि ऊर्जा समानता ही सामाजिक समानता की नींव है। सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता समुदायों को सशक्त बनाती है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देती है और बिजली आपूर्ति से कहीं आगे जाकर अवसरों के द्वार खोलती है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि सशक्तिकरण और समावेशी विकास का साधन है।

राष्ट्रपति ने सभी सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे केवल अवसंरचना निर्माण से आगे बढ़कर लोगों के जीवन पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि इस महासभा को एक सामूहिक कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए जो सौर ऊर्जा को रोजगार सृजन, महिलाओं के नेतृत्व, ग्रामीण आजीविका और डिजिटल समावेशन से जोड़े। प्रगति को केवल मेगावॉट में नहीं, बल्कि रोशन हुए जीवन, सशक्त परिवारों और परिवर्तित समुदायों की संख्या से मापा जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी विकास और उन्नत तकनीकों के साझा उपयोग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि सभी देशों को अधिकतम लाभ मिल सके। साथ ही, बड़े पैमाने पर सौर संयंत्रों के विस्तार के दौरान पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण ही हरित ऊर्जा की मूल प्रेरणा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमें अपने देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया और आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस महासभा की चर्चाएँ और निर्णय सौर ऊर्जा उत्पादन में एक मील का पत्थर साबित होंगे और एक समावेशी व न्यायपूर्ण विश्व के निर्माण में योगदान देंगे।


भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र: गति से परिपक्वता की ओर

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भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र अब एक नए और परिवर्तनकारी चरण में प्रवेश कर रहा है, जो केवल क्षमता विस्तार की गति से नहीं, बल्कि इसके सिस्टम की मजबूती, स्थिरता और गहराई से परिभाषित होगा। पिछले एक दशक में रिकॉर्ड वृद्धि के बाद, अब ध्यान केवल मेगावाट जोड़ने पर नहीं बल्कि एक मजबूत, भरोसेमंद और लचीले साफ-सुथरे ऊर्जा ढांचे (clean energy architecture) के निर्माण पर केंद्रित है, जो 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के देश के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का समर्थन कर सके।

मात्रा से गुणवत्ता की ओर संक्रमण

पिछले दस वर्षों में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 35 GW (2014 में) से बढ़कर आज 197 GW (बड़े हाइड्रो को छोड़कर) हो गई है। इतनी तेज वृद्धि के बाद अगला कदम सिर्फ क्षमता बढ़ाने से नहीं बल्कि सिस्टम सुधार और गहन समेकन की आवश्यकता को दर्शाता है।

अब ध्यान केवल क्षमता विस्तार से क्षमता अवशोषण (capacity absorption) की ओर बढ़ रहा है। इसमें ग्रिड इंटीग्रेशन, ऊर्जा भंडारण (energy storage), हाइब्रिडाइजेशन और बाज़ार सुधार शामिल हैं — ये 500 GW से अधिक गैर-जीवाश्म ऊर्जा भविष्य की नींव हैं। इस दृष्टिकोण से हालिया क्षमता वृद्धि में थोड़ी मंदी एक संतुलित, भरोसेमंद और लचीली वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

बहुपथीय विस्तार द्वारा विश्व की सबसे तेज़ RE वृद्धि

अभी 40 GW से अधिक परियोजनाएँ पीपीए (PPA), पीएसए (PSA) या ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी के अंतिम चरण में हैं, जो निवेश की मजबूती को दर्शाती हैं। राज्यों और डिस्कॉम द्वारा नवीकरणीय पावर खरीद दायित्व (RPO) का पालन, ट्रांसमिशन लाइन अपग्रेड और ग्रिड इंटीग्रेशन तकनीक का उपयोग, बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा नीलामी से पहले प्राथमिकताएं हैं।

वर्तमान वर्ष में केंद्रीय RE एजेंसियों ने 5.6 GW और राज्य एजेंसियों ने 3.5 GW की नीलामी की है। इसके अलावा, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता 2025 में लगभग 6 GW RE क्षमता जोड़ने की योजना बना रहे हैं। इस प्रकार, RE क्षमता वृद्धि कई रास्तों से हो रही है, केवल केंद्रीय एजेंसियों द्वारा नहीं।

नीति में जानबूझकर बदलाव

पिछले दो वर्षों में नीति का ध्यान केवल क्षमता वृद्धि से सिस्टम डिज़ाइन की ओर गया है। ऊर्जा भंडारण या पीक पावर सप्लाई के साथ RE पावर टेंडर अब प्रमुख हैं, जो फर्म और डिस्पैचेबल ग्रीन पावर की ओर इशारा करते हैं। बैटरी ऊर्जा भंडारण सिस्टम (BESS) को ग्रिड और परियोजना स्तर पर एकीकृत किया जा रहा है। PLI योजना, घरेलू सामग्री आवश्यकता (Domestic Content Requirement), आयात शुल्क और ALMM जैसी नीतियां घरेलू उत्पादन बढ़ा रही हैं और आयात निर्भरता कम कर रही हैं।

GST और ALMM के पुनर्संरचनात्मक बदलाव लागत स्थिर करने, मॉड्यूल विश्वसनीयता बढ़ाने और सोलर मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता बढ़ाने के लिए रणनीतिक कदम हैं। साथ ही, बैटरी भंडारण की तैनाती Viability Gap Funded परियोजनाओं, संप्रभु टेंडर और नए भंडारण दायित्वों के माध्यम से बढ़ रही है।

ट्रांसमिशन सुधार और 200 GW क्षमता

ट्रांसमिशन अब नया फोकस है। भारत का ग्रिड ₹2.4 लाख करोड़ के ट्रांसमिशन प्लान के माध्यम से पुनः डिजाइन किया जा रहा है, जो नवीकरणीय ऊर्जा संपन्न राज्यों को मांग केंद्रों से जोड़ता है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और राजस्थान, गुजरात, लद्दाख से उच्च क्षमता वाली ट्रांसमिशन लाइनें निवेश प्राथमिकता में हैं।

HVDC कॉरिडोर और इंटर-रीजनल ट्रांसमिशन क्षमता को 120 GW से 143 GW (2027) और 168 GW (2032) तक बढ़ाने की योजना है। CERC General Network Access Regulations 2025 में संशोधन ने ‘solar-hours’ और ‘non-solar-hours’ के माध्यम से डाइनामिक कॉरिडोर शेयरिंग की सुविधा दी है, जो कंजेशन कम करने और stranded RE परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

निवेश आकर्षण

संक्षिप्त विलंब के बावजूद भारत नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के लिए आकर्षक बना हुआ है। टैरिफ दुनिया में सबसे कम में से हैं। अंतरराष्ट्रीय निवेशक अब इंटीग्रेटेड और स्टोरेज-बैक्ड पोर्टफोलियो की ओर देख रहे हैं।

विस्तार से समेकन की कहानी

सच्ची RE कहानी विस्तार से समेकन की है। अब मुख्य चुनौतियाँ इंटीग्रेशन, विश्वसनीयता और स्केल एफिशियेंसी हैं। अस्थायी क्षमता वृद्धि में धीमापन परिपक्वता का संकेत है।

वर्चुअल पावर पर्चेज एग्रीमेंट (VPPA) और अन्य मार्केट आधारित साधन RE तैनाती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। ये कॉर्पोरेट और संस्थागत खरीदारों को वर्चुअल रूप से RE पावर खरीदने की अनुमति देते हैं, जिससे निवेश और मांग बढ़ती है।

आगे का रास्ता

  • राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक में बड़े हाइब्रिड और RTC प्रोजेक्ट्स

  • ऑफशोर विंड और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज

  • PM Suryaghar और PM KUSUM के तहत ग्रामीण भागीदारी

  • नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन

  • ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज III के माध्यम से RE इंटीग्रेशन

निष्कर्ष

भारत की साफ़ ऊर्जा संक्रमण अब संस्थागत मजबूती और स्थायित्व पर केंद्रित है। एक दशक की तेज़ दौड़ के बाद अब सेक्टर ग्रिड ताकत, स्थानीय उत्पादन और वित्तीय स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की RE यात्रा अब कंसोलिडेशन चरण में है, जो भविष्य की तेजी और सतत वृद्धि सुनिश्चित करेगी।

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा कहानी अब गति खोने की नहीं, बल्कि परिपक्वता और मजबूती हासिल करने की कहानी है।

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