Media24Media.com: #SocialSecurity

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #SocialSecurity. Show all posts
Showing posts with label #SocialSecurity. Show all posts

भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से 101 करोड़ लोग जुड़े, आबादी के 68% से अधिक को मिला लाभ : डॉ. मनसुख मांडविया

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का दायरा अब लगभग 101 करोड़ लोगों तक पहुंच चुका है, जो देश की 68 प्रतिशत से अधिक आबादी को कवर करता है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने पिछले सप्ताह हैदराबाद में आयोजित ब्रिक्स श्रम मंत्रियों की बैठक में भी रेखांकित किया, जो भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर मिली मान्यता का प्रमाण है।

डॉ. मांडविया नई दिल्ली में आयोजित चौथे ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट को संबोधित कर रहे थे। इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एम्प्लॉयर्स (AIOE) ने फिक्की (FICCI) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के सहयोग से किया।

उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, नियोक्ता, श्रमिक और ट्रेड यूनियनों के बीच निरंतर समन्वय ही स्वस्थ औद्योगिक संबंधों की आधारशिला है। आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को साथ लेकर चलने के लिए सभी पक्षों की साझेदारी आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि औद्योगीकरण राष्ट्रीय विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी मॉडल की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ये पहल आजीविका के नए अवसर पैदा करने, अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसा संतुलित विकास मॉडल आवश्यक है जो एक ओर श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करे तथा दूसरी ओर उद्योगों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को भी बढ़ावा दे।

डॉ. मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थिर कर व्यवस्था, बढ़ती बचत, बढ़ी हुई क्रय शक्ति और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के कारण आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का सकारात्मक चक्र विकसित हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जीडीपी में प्रत्येक 1 प्रतिशत वृद्धि के साथ रोजगार में 1.11 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि लगभग 12 वर्ष पहले रोजगार वृद्धि का यह अनुपात केवल 0.008 प्रतिशत था।

उन्होंने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में प्रस्तावित सुधारों की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य में केवल ईएसआईसी अस्पताल ही नहीं, बल्कि बेहतर निजी अस्पतालों को भी ईएसआईसी से संबद्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के रूप में मान्यता दी जा सकती है। इसके अलावा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की सभी दावों की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल की जा रही है तथा एकल यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के माध्यम से खातों का स्वतः स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, यूपीआई के माध्यम से पीएफ निकासी की सुविधा पर भी विचार किया जा रहा है।

इस अवसर पर भारत में ILO की दक्षिण एशिया निदेशक सुश्री मिचिको मियामोटो ने भारत को सामाजिक सुरक्षा के विस्तार पर बधाई देते हुए कहा कि ILO के आकलन के अनुसार भारत अब एक अरब से अधिक लोगों को कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने वाला देश बन गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि भारत की आर्थिक प्रगति को और गति देगी।

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने दो दिवसीय सम्मेलन की स्मारिका का भी विमोचन किया।

श्रम मंत्रालय के प्रयासों से धनबाद में तीन पुराने औद्योगिक विवादों का समाधान, श्रमिकों को ₹55 लाख से अधिक की राहत

No comments Document Thumbnail

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) [CLC(C)] के क्षेत्रीय तंत्र ने धनबाद में तीन लंबे समय से लंबित औद्योगिक विवादों का सफलतापूर्वक समाधान कर सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा मृत कर्मचारियों के आश्रितों को 55 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय राहत दिलाई है।

क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय), धनबाद तथा सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय)-I एवं II के प्रयासों से हुए इन समझौतों ने समय पर न्याय, सामाजिक सुरक्षा और सौहार्दपूर्ण औद्योगिक संबंधों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

BCCL के दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को मिलेगा दीर्घकालिक वित्तीय सहयोग

सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय)-I, धनबाद ने भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की बुर्रागढ़ कोलियरी के एक दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को मुआवजा दिलाने से जुड़े विवाद का समाधान कराया।

प्रबंधन और श्रमिक संगठन कोयला इस्पात मजदूर पंचायत के बीच कई दौर की सुलह-वार्ता के बाद 1 जुलाई 2026 को समझौता ज्ञापन (MoS) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत आश्रित को 60 वर्ष की आयु तक मासिक वित्तीय सहायता मिलेगी। इस समझौते का अनुमानित वित्तीय प्रभाव लगभग 30 लाख रुपये है।

FCIL के दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिला लंबित ब्याज भुगतान

सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय)-II, धनबाद ने फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (FCIL) के दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों पर देय ब्याज के लंबे समय से लंबित विवाद का भी समाधान कराया।

7 जुलाई 2026 को हुए समझौते के अनुसार FCIL प्रबंधन सेवानिवृत्ति की तिथि से लेकर अनुग्रह राशि (Ex-gratia) और अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment) के वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज का भुगतान करेगा। इस समझौते का अनुमानित वित्तीय प्रभाव करीब 14 लाख रुपये है।

सुलह प्रक्रिया के दौरान नियोक्ताओं की यह वैधानिक जिम्मेदारी भी रेखांकित की गई कि सेवानिवृत्ति लाभों का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। FCIL प्रबंधन ने भविष्य में ऐसी देरी रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

ECL के दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को भी मिली राहत

क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय), धनबाद ने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के एक दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को वित्तीय सहायता दिलाने से जुड़े विवाद का भी सफल समाधान कराया।

प्रबंधन और श्रमिक संगठन के बीच सुलह-वार्ता के बाद 3 जुलाई 2026 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते का अनुमानित वित्तीय प्रभाव लगभग 11 लाख रुपये है। इसके तहत आश्रित को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे उसे समय पर आर्थिक सहयोग और सामाजिक सुरक्षा मिल सकेगी।

सुलह प्रक्रिया के दौरान ECL प्रबंधन को कर्मचारियों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों के प्रति अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का पालन करने के महत्व से भी अवगत कराया गया।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा कि मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) का क्षेत्रीय तंत्र नियोक्ताओं, श्रमिक संगठनों और कर्मचारियों के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से श्रम कानूनों के पालन, सामाजिक सुरक्षा एवं सेवानिवृत्ति लाभों के समयबद्ध वितरण तथा उद्योगों में विश्वास और सहयोग का वातावरण मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। मंत्रालय का उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिवारों को समय पर न्याय, वित्तीय सुरक्षा और उनके वैधानिक अधिकार सुनिश्चित करना है।

श्रम मंत्रालय की बड़ी पहल: जागरूकता, सुलह और त्वरित कार्रवाई से श्रमिकों को मिला करोड़ों का लाभ

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) [CLC(C)] संगठन देशभर में श्रमिक कल्याण, औद्योगिक सौहार्द और श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। जबलपुर, भुवनेश्वर, रायपुर और कानपुर में हाल ही में की गई पहलें इस दिशा में संगठन की सक्रिय भूमिका को दर्शाती हैं।

मंत्रालय के अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य श्रम संहिताओं (Labour Codes) को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना, श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना, श्रम कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना तथा शिकायतों का समयबद्ध समाधान करना है।

जबलपुर में सामाजिक सुरक्षा संहिता पर जागरूकता कार्यक्रम

जबलपुर स्थित उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय द्वारा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के प्रबंधन प्रतिनिधियों, मानव संसाधन (HR) अधिकारियों और कर्मचारियों को संहिता के तहत उनके अधिकारों और दायित्वों की जानकारी दी गई। विशेष रूप से कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकार, मातृत्व लाभ, सुरक्षित कार्य वातावरण और क्रेच सुविधा संबंधी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।

भुवनेश्वर में 81 संविदा श्रमिकों को मिले ₹51.27 लाख

भुवनेश्वर स्थित उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय ने गेल (GAIL) से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले का सफल समाधान किया। सुलह प्रक्रिया के बाद 81 संविदा श्रमिकों को बकाया वेतन, अवकाश वेतन और बोनस सहित कुल ₹51.27 लाख का भुगतान कराया गया। इस पहल से श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हुई।

रायपुर में सात श्रमिकों को मिला ग्रेच्युटी का भुगतान

रायपुर स्थित उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय ने बैकोंठ सीमेंट वर्क्स में कार्यरत पूर्व संविदा श्रमिकों की ग्रेच्युटी भुगतान संबंधी शिकायत का समाधान किया। समय पर हस्तक्षेप और ठेकेदार तथा प्रधान नियोक्ता के बीच समन्वय स्थापित कर सात पात्र श्रमिकों को कुल ₹3.31 लाख की ग्रेच्युटी दिलाई गई। यह कार्रवाई श्रमिकों को उनके वैधानिक लाभ दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कानपुर में बीमार श्रमिक को घर पहुंचकर मिला ₹20.32 लाख का भुगतान

कानपुर में क्षेत्रीय श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय ने गंभीर रूप से बीमार और बिस्तर पर पड़े एक श्रमिक से जुड़े औद्योगिक विवाद का मानवीय संवेदनशीलता के साथ समाधान किया। सुलह प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित श्रमिक को ₹20.32 लाख की अंतिम भुगतान राशि उसके घर जाकर सौंपी गई, जिससे अनावश्यक प्रशासनिक देरी से बचते हुए उसे समय पर न्याय मिल सका।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा कि मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) संगठन जागरूकता कार्यक्रमों, प्रभावी सुलह प्रक्रिया और शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, जिम्मेदार रोजगार प्रथाओं को बढ़ावा देने तथा देशभर में श्रम कानूनों के प्रभावी अनुपालन के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।


एआईआईएमएस ऋषिकेश के कर्मचारियों के लंबित ग्रेच्युटी मामलों के त्वरित निस्तारण हेतु विशेष शिविर का आयोजन

No comments Document Thumbnail

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के अधीन उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), देहरादून के कार्यालय द्वारा भुगतान उपदान अधिनियम, 1972 (Payment of Gratuity Act, 1972) के प्रावधानों के तहत एक विशेष शिविर (कैंप सिटिंग) का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), ऋषिकेश के कर्मचारियों से संबंधित लंबे समय से लंबित ग्रेच्युटी मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण करना था।

इस विशेष शिविर की अध्यक्षता उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), देहरादून ने अधिनियम के अंतर्गत अपीलीय प्राधिकारी (Appellate Authority) के रूप में की। दिनभर चली सुनवाई के दौरान एआईआईएमएस ऋषिकेश से संबंधित लगभग नौ माह से लंबित 169 अपीलों पर सुनवाई की गई।

सुनवाई के उपरांत 46 अपीलों का कर्मचारियों के पक्ष में सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया, जिससे संबंधित कर्मचारियों को लगभग 40 लाख रुपये की वैधानिक ग्रेच्युटी राशि का तत्काल लाभ सुनिश्चित हुआ। यह विशेष अभियान मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) संगठन की उस सक्रिय कार्यप्रणाली को दर्शाता है, जिसके माध्यम से श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा उनके दावों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा रहा है।

कार्यवाही के दौरान संबंधित ठेकेदार एवं उसके प्रतिनिधियों मैसर्स प्रिंसिपल सिक्योरिटी एंड एलाइड सर्विसेज को भुगतान उपदान अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनिवार्य अनुपालन के संबंध में सख्त निर्देश एवं जागरूकता प्रदान की गई। अपीलीय प्राधिकारी ने समय पर ग्रेच्युटी का भुगतान, वैधानिक अभिलेखों का समुचित संधारण तथा श्रमिकों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

इस पर ठेकेदार ने प्राधिकरण को आश्वासन दिया कि अधिनियम के सभी प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने तथा पात्र कर्मचारियों के सभी दावों का समयबद्ध निस्तारण करने के लिए तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।


संकट की घड़ी में बना सहारा: प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से मिला दो लाख रुपये का आर्थिक संबल

No comments Document Thumbnail

बिहान की दीदी के परिवार को समय पर मिली सहायता, मुश्किल दौर में बनी सरकार की जनकल्याणकारी योजना का सहारा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुदूर वनांचल तक पहुंच रहा है। सुकमा जिले में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ने एक जरूरतमंद परिवार को कठिन समय में आर्थिक सहारा देकर संवेदनशील शासन व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

दुख की घड़ी में मिला आर्थिक संबल

सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के ग्राम आरलमपल्ली की दुर्गा स्व-सहायता समूह से जुड़ी बिहान की दीदी दुधी सन्नी का 8 अप्रैल 2026 को आकस्मिक निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल गई।

दो महीने में मिला दो लाख रुपये का बीमा दावा

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में बिहान योजना की टीम ने तुरंत बीमा दावा तैयार कर भारतीय स्टेट बैंक की दोरनापाल शाखा को भेजा। बैंक ने भी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं प्राथमिकता से पूरी कीं।

संयुक्त प्रयासों का परिणाम यह रहा कि मृतिका के पति एवं नामिनी दुधी सोमा के बैंक खाते में 27 मई 2026 को मात्र दो महीने के भीतर 2 लाख रुपये की बीमा दावा राशि जमा हो गई। यह सहायता राशि नगर पंचायत अध्यक्ष राधा नायक द्वारा हितग्राही को प्रदान की गई।

टीमवर्क से मिली समय पर राहत

इस कार्य में भारतीय स्टेट बैंक दोरनापाल के शाखा प्रबंधक आनंद सिंह, बिहान की पीआरपी  रूकमणी कर्मा तथा एफएलसीआरपी कुमारी शालिनी ओडला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी के समन्वित प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले परिवार को बिना अनावश्यक विलंब के आर्थिक सहायता मिल सकी।

गरीब परिवारों के लिए सुरक्षा कवच बन रही योजना

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन रही है। परिवार के कमाने वाले सदस्य के असामयिक निधन की स्थिति में मिलने वाली बीमा राशि संकट की घड़ी में बड़ा सहारा साबित होती है।

दुधी सन्नी के परिवार की यह कहानी बताती है कि जब शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचता है, तो वह न केवल आर्थिक सहायता देता है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में परिवार को नया संबल और विश्वास भी प्रदान करता है।

40 साल से अधिक उम्र के श्रमिकों के लिए देशभर में मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने दिल्ली स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए देशव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच अभियान का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य देशभर के श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार “श्रम शक्ति” और “युवा शक्ति” को सशक्त बनाने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने रोजगार सृजन, श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाए हैं।

उन्होंने बताया अब 40 वर्ष से अधिक आयु के सभी श्रमिकों की हर वर्ष मुफ्त स्वास्थ्य जांच की जाएगी। इस स्वास्थ्य परीक्षण के जरिए गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान हो सकेगी और जरूरत पड़ने पर ESIC अस्पतालों में उपचार और दवाइयों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

मंत्री ने कहा कि नए श्रम संहिताओं के तहत पुरुष और महिला श्रमिकों को समान वेतन, महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करना और वर्क फ्रॉम होम जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। साथ ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

डॉ. मंडाविया ने कहा कि पहले श्रमिकों की समस्याओं को अनदेखा किया जाता था, लेकिन वर्तमान सरकार श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

डॉ. मनसुख मांडविया ने बीएमएस के अखिल भारतीय त्रैवार्षिक सम्मेलन में श्रमिक कल्याण को बताया विकसित भारत की आधारशिला

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज ओडिशा के पुरी में आयोजित भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के अखिल भारतीय त्रैवार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने दोहराया कि श्रमिकों का कल्याण, गरिमा और सुरक्षा सरकार की राष्ट्रीय विकास की परिकल्पना के केंद्र में है।

डॉ. मांडविया ने कहा,

“मुझे श्रम शक्ति और युवा शक्ति के लिए कार्य करने का सौभाग्य मिला है। ये दोनों शक्तियाँ भारत की प्रगति की आधारशिला हैं और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगी।”

मंत्री ने कहा कि बीएमएस न केवल भारत का सबसे बड़ा ट्रेड यूनियन है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बीएमएस ने श्रमिकों के कल्याण, देश के श्रमबल को न्याय दिलाने और उन्हें राष्ट्रीय विकास व आर्थिक वृद्धि में भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह जोर देते हुए कि आर्थिक विकास के लिए श्रमिक और उद्योग—दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, मंत्री ने कहा कि एक मजबूत और सुदृढ़ अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए दोनों के बीच सामंजस्य और सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसी संतुलन को मजबूत करने, श्रमिकों के लिए कल्याण और सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने तथा उद्योगों के लिए अनुपालन को सरल बनाने के उद्देश्य से श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को लागू किया है।

उन्होंने कहा,

“मैं बीएमएस को बधाई देता हूँ कि उसने 15 अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ श्रम संहिताओं का स्वागत किया, श्रमिकों में जागरूकता फैलाई और दुष्प्रचार का मुकाबला किया। यह जिम्मेदार और रचनात्मक नेतृत्व को दर्शाता है, जिसमें संगठनात्मक हितों से ऊपर श्रमिकों के हितों को रखा गया है।”

श्रम संहिताओं के सक्षम प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने अनिवार्य नियुक्ति पत्र, पुरुषों और महिलाओं के लिए समान अवसर, वार्षिक स्वास्थ्य जांच तथा खतरनाक उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का उल्लेख किया।

सामाजिक सुरक्षा पहलों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने लगातार कवरेज बढ़ाने और श्रमिकों के लिए संस्थागत समर्थन को मजबूत करने का कार्य किया है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुसार लगभग 94 करोड़ लोग अब सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत आ चुके हैं और वर्ष 2026 तक 100 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का लक्ष्य है।

उन्होंने आगे कहा कि ईएसआईसी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में अब श्रमिकों के बच्चों के लिए मेडिकल शिक्षा में आरक्षण की सुविधा दी जा रही है, जिससे वित्तीय बोझ कम होगा और उच्च शिक्षा की उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में सहायता मिलेगी।

डॉ. मांडविया ने कहा कि बीएमएस ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की वेतन सीमा बढ़ाने, न्यूनतम मजदूरी (फ्लोर वेज) पर निर्णय लेने तथा ईपीएस-95 के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने से संबंधित प्रतिवेदन प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन सभी विषयों पर श्रमिकों के हित में गंभीरता से विचार किया जाएगा और शीघ्र निर्णय लिए जाएंगे।

उन्होंने कहा,

“देश की प्रगति श्रमिकों के कल्याण से अलग नहीं की जा सकती। जब श्रमिक समृद्ध होते हैं, तब देश समृद्ध होता है।”

‘नया भारत’ के निर्माण में श्रमिकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार श्रमिक कल्याण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाकर आगे बढ़ती रहेगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार उन संगठनों का निरंतर समर्थन करेगी जो ईमानदारी से श्रमिकों के कल्याण, सशक्तिकरण और संरक्षण के लिए कार्य करते हैं।

डॉ. मांडविया ने सभी हितधारकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा,
“हमें सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने होंगे, हर श्रमिक को आगे बढ़ाना होगा और उन्हें अपनी पूरी क्षमता को साकार करने के लिए सशक्त बनाना होगा।”

इस सम्मेलन ने श्रम सुधारों, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक सशक्तिकरण पर संवाद के लिए एक मंच प्रदान किया, जिसमें देशभर से श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें हिरणमय पंड्या, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीएमएस; रविंद्र हिमते, राष्ट्रीय महामंत्री, बीएमएस; सर्गेई चेर्नोगायेव, अध्यक्ष, एफएनपीआर, रूस; मा. भागैया, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, आरएसएस; तथा युकी ओत्सुजी, वर्कर स्पेशलिस्ट, दक्षिण एशिया एवं कंट्री ऑफिस, आईएलओ, नई दिल्ली शामिल थे।


पीडीयूएनएएसएस में “सदस्य-प्रथम” दृष्टिकोण पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

No comments Document Thumbnail

पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS) ने आज एक रणनीतिक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया, जो सामाजिक सुरक्षा प्रशासन में “सदस्य-प्रथम” दृष्टिकोण की ओर निर्णायक बदलाव का संकेत देती है। इस सत्र में पेंशनभोगियों की गरिमा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए संचालनात्मक ढांचे को पुन: व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया, साथ ही CITES प्रोजेक्ट और कोड ऑन सोशल सेक्यूरिटी के लिए संस्थागत तत्परता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

मुख्य भाषण वर्चुअल माध्यम से रमेश कृष्णमूर्ति, केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (CPFC) ने दिया। उन्होंने डिजिटल परिवर्तन को सहानुभूतिपूर्ण सामाजिक सुरक्षा प्रणाली की रीढ़ बताते हुए कहा:

"हमारा परिवर्तन पूरी तरह संस्थागत रूप से संगठित और सदस्य-केंद्रित होना चाहिए। हमारे पेंशनभोगियों के लिए समय पर सेवा सिर्फ एक मापदंड नहीं, बल्कि गरिमा का विषय है।"

उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण तेजी से बढ़ती सदस्य संख्या की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अनिवार्य है। विशेष रूप से पेंशन जैसी संवेदनशील मामलों में विश्वसनीयता और जवाबदेही अपरिहार्य हैं।

कार्यशाला में पेंशनभोगी अनुभव पर विशेष जोर दिया गया। चंद्रमौली चक्रवर्ती (ACC-HQ), स्म्ति. अपराजिता जग्गी (ACC), और S. K. गुप्ता (RPFC-I) ने पेंशन विभाग की ओर से प्रतिभागियों को संबोधित किया और निम्नलिखित उपायों पर प्रकाश डाला:

  • पेंशन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित कर प्रतीक्षा समय कम करना।

  • सभी ज़ोन में प्रक्रियाओं का मानकीकरण कर समान सेवा गुणवत्ता सुनिश्चित करना।

  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए संपूर्ण अनुभव को बेहतर बनाना, जिससे पेंशन मामलों को स्पष्टता और गति के साथ निपटाया जा सके।

सलील शंकर (ACC, IS Division) ने CITES प्रोजेक्ट का खाका प्रस्तुत किया और इसे “Ease of Living” के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बताया। यह प्रोजेक्ट डिजिटल क्षमताओं को बढ़ाने, तेज़ दावा निपटान और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

साथ ही,  P. B. वर्मा (ACC, Compliance, Recovery & Legal) ने अनुपालन ढांचे को मजबूत करने की पहलों पर चर्चा की, जबकि कोड ऑन सोशल सेक्यूरिटी में संक्रमण के दौरान व्यापार सुगमता बनाए रखने पर जोर दिया।

स्वागत भाषण में, कुमार रोहित, निदेशक, PDUNASS ने कहा कि अकादमी के क्षमता निर्माण प्रयास अब “सक्रिय शासन” पर केंद्रित हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि कोड ऑन सोशल सेक्यूरिटी के अनुरूप होना, कार्यकर्ताओं और पेंशनभोगियों दोनों को मजबूत सुरक्षा प्रदान करने के लिए आवश्यक है।

कार्यशाला का संचालन कोर्स डायरेक्टर हरीश यादव, RPFC-I के पर्यवेक्षण में सुचारू रूप से किया गया। उनकी सूक्ष्म समन्वय क्षमता ने अधिकारियों को मैदान स्तर के अनुभव और नवाचार साझा करने के लिए एक संरचित और उत्पादक वातावरण प्रदान किया।

कार्यशाला का समापन EPFO की सदस्य-केंद्रित प्रतिबद्धता के संकल्प के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने डिजिटल पहलों का उपयोग केवल दक्षता के लिए नहीं, बल्कि देश भर के लाखों पेंशनभोगियों के लिए विश्वसनीय, सुलभ और सहानुभूतिपूर्ण सामाजिक सुरक्षा जाल प्रदान करने के लिए करने का संकल्प लिया।

PDUNASS के बारे में

पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS) कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का प्रमुख प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान है। यह अकादमी कुशल, उत्तरदायी और सहानुभूतिपूर्ण कार्यबल तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो भारत भर में लाखों हितधारकों को उच्च गुणवत्ता वाली सामाजिक सुरक्षा सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम हो।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों, NABARD और RBI के कर्मचारियों व पेंशनर्स को वेतन-पेंशन में राहत

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने और पेंशनर्स की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों (PSGICs) और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के कर्मचारियों के लिए वेतन संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और NABARD के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन संशोधन को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

यह निर्णय सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों और पेंशनर्स के आर्थिक कल्याण और सम्मानजनक जीवन स्तर को सुनिश्चित किया जा रहा है।

PSGICs: वेतन और पारिवारिक पेंशन में संशोधन

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के कर्मचारियों के लिए 1 अगस्त 2022 से वेतन संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत कुल वेतन बिल में 12.41 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिसमें मौजूदा मूल वेतन और महंगाई भत्ते पर 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल है। इस फैसले से 43,247 कर्मचारी लाभान्वित होंगे।

इसके अलावा, 1 अप्रैल 2010 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए एनपीएस (NPS) में सरकार के योगदान को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे उनके भविष्य को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

सरकार ने पारिवारिक पेंशन में भी सुधार करते हुए इसे 30 प्रतिशत की समान दर पर संशोधित किया है। इससे 15,582 में से 14,615 पारिवारिक पेंशनर्स को लाभ मिलेगा।

वित्तीय प्रभाव:इस पूरे निर्णय से सरकार पर कुल ₹8,170.30 करोड़ का व्यय आएगा, जिसमें

  • ₹5,822.68 करोड़ वेतन एरियर,

  • ₹250.15 करोड़ एनपीएस योगदान,

  • ₹2,097.47 करोड़ पारिवारिक पेंशन पर खर्च होंगे।

PSGICs में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, न्यू इंडिया एश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और एग्रीकल्चरल इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया शामिल हैं।

NABARD: वेतन और पेंशन में व्यापक सुधार

NABARD के ग्रुप ‘A’, ‘B’ और ‘C’ कर्मचारियों के लिए 1 नवंबर 2022 से वेतन और भत्तों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इससे करीब 3,800 वर्तमान और पूर्व कर्मचारी लाभान्वित होंगे।

इसके साथ ही, 1 नवंबर 2017 से पहले सेवानिवृत्त NABARD पेंशनर्स, जिन्हें मूल रूप से NABARD द्वारा नियुक्त किया गया था, उनकी पेंशन को RBI-NABARD पेंशनर्स के समान कर दिया गया है।

वित्तीय प्रभाव:

  • वेतन संशोधन से वार्षिक वेतन बिल में लगभग ₹170 करोड़ की वृद्धि

  • एरियर के रूप में कुल ₹510 करोड़ का भुगतान

  • पेंशन संशोधन से ₹50.82 करोड़ का एकमुश्त एरियर

  • हर माह ₹3.55 करोड़ का अतिरिक्त पेंशन व्यय, जिससे 269 पेंशनर्स और 457 पारिवारिक पेंशनर्स को लाभ मिलेगा।

RBI: पेंशन और पारिवारिक पेंशन में बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पारिवारिक पेंशनर्स की पेंशन में भी संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत 1 नवंबर 2022 से मूल पेंशन और महंगाई राहत पर 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।

इस संशोधन के बाद पेंशन में कुल मिलाकर 1.43 गुना प्रभावी बढ़ोतरी होगी, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मासिक आय में उल्लेखनीय सुधार आएगा। इससे कुल 30,769 लाभार्थी, जिनमें 22,580 पेंशनर्स और 8,189 पारिवारिक पेंशनर्स शामिल हैं, लाभान्वित होंगे।

वित्तीय प्रभाव:इस फैसले से कुल ₹2,696.82 करोड़ का व्यय अनुमानित है, जिसमें

  • ₹2,485.02 करोड़ एकमुश्त एरियर

  • ₹211.80 करोड़ वार्षिक अतिरिक्त पेंशन व्यय शामिल है।

निष्कर्ष

इन निर्णयों से कुल मिलाकर लगभग 46,322 कर्मचारी, 23,570 पेंशनर्स और 23,260 पारिवारिक पेंशनर्स लाभान्वित होंगे। यह कदम बढ़ती महंगाई के प्रभाव को कम करने, सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने और वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह देश के समावेशी और सतत आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली संस्थाओं को निरंतर मजबूत करती रहेगी।


केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अटल पेंशन योजना को वित्त वर्ष 2030–31 तक जारी रखने को दी मंजूरी

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030–31 तक जारी रखने तथा इसके अंतर्गत प्रचारात्मक एवं विकासात्मक गतिविधियों और गैप फंडिंग के लिए सरकारी सहायता को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।

कार्यान्वयन रणनीति (Implementation Strategy):

यह योजना वित्त वर्ष 2030–31 तक जारी रहेगी, जिसके लिए सरकार निम्नलिखित मदों में सहयोग प्रदान करेगी—

  • प्रचारात्मक एवं विकासात्मक गतिविधियाँ:असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक योजना की पहुंच बढ़ाने हेतु जागरूकता अभियान, क्षमता निर्माण और आउटरीच गतिविधियाँ।

  • गैप फंडिंग:योजना की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करने और इसके दीर्घकालिक सतत संचालन के लिए आवश्यक सहायता।

मुख्य प्रभाव (Major Impact):

  • लाखों निम्न आय वर्ग एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आय सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

  • वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा और भारत के पेंशनयुक्त समाज की ओर संक्रमण को समर्थन मिलेगा।

  • विकसित भारत @2047 के विजन को मजबूती मिलेगी, क्योंकि यह योजना स्थायी सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है।

पृष्ठभूमि (Background):

  • शुरुआत:अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी।

  • योजना की विशेषताएं:APY के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद ₹1,000 से ₹5,000 प्रतिमाह तक की सुनिश्चित न्यूनतम पेंशन प्रदान की जाती है, जो योगदान पर आधारित होती है।

  • प्रगति:19 जनवरी 2026 तक इस योजना के अंतर्गत 8.66 करोड़ से अधिक सदस्य नामांकित हो चुके हैं, जिससे यह भारत की समावेशी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुकी है।

  • विस्तार की आवश्यकता:योजना की निरंतरता, व्यापक जागरूकता, क्षमता निर्माण और वित्तीय व्यवहार्यता बनाए रखने के लिए सरकारी समर्थन का जारी रहना आवश्यक है।

अटल पेंशन योजना का यह विस्तार देश के असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक वृद्धावस्था प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पीडीयूएनएएसएस में ईपीएफओ अधिकारियों के लिए ‘कानूनी प्रबंधन एवं दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), 2016’ पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS), नई दिल्ली में कल ईपीएफओ (Employees’ Provident Fund Organisation) के अधिकारियों के लिए ‘कानूनी प्रबंधन एवं दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), 2016’ पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। यह कार्यक्रम 19 से 23 जनवरी 2026 तक चल रहा है और इसका उद्देश्य ईपीएफओ अधिकारियों की दिवालियापन से संबंधित मामलों और IBC ढांचे के तहत उत्पन्न कानूनी मुद्दों से निपटने की कानूनी तथा संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाना है।

उद्घाटन सत्र

उद्घाटन सत्र को PDUNASS के निदेशक कुमार रोहित, दिवाला और दिवालियापन बोर्ड ऑफ इंडिया (IBBI) के महाप्रबंधक राजेश तिवारी, PDUNASS के चीफ लर्निंग ऑफिसर रिजवान उद्दीन और RPFC-I एवं कोर्स डायरेक्टर संजय कुमार राय ने संबोधित किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्व

PDUNASS के निदेशक कुमार रोहित ने कहा कि दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 ने भारत के कानूनी और आर्थिक ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया है। उन्होंने बताया कि ईपीएफओ जैसी वैधानिक संस्थाएं मोराटोरियम प्रावधानों, provident fund देयों की प्राथमिकता, आकलन बनाम वसूली, और IBC प्रणाली के तहत निर्णायक प्राधिकरणों के समक्ष प्रतिनिधित्व जैसे जटिल कानूनी मुद्दों का सामना कर रही हैं।

निदेशक ने यह भी बताया कि दिवालियापन संबंधी न्यायशास्त्र लगातार विकसित हो रहा है, इसलिए ईपीएफओ अधिकारियों को कानूनी रूप से अपडेट, प्रक्रियात्मक रूप से संगठित और संस्थागत रूप से समन्वित रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दिवालियापन मामलों का प्रभावी प्रबंधन श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा हितों की रक्षा और IBC के वैधानिक ढांचे का पालन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम को ईपीएफओ के वैधानिक कार्यों से संबंधित दिवालियापन प्रक्रियाओं की व्यावहारिक और समग्र समझ प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।

कार्यक्रम में भागीदारी

कुमार रोहित ने बताया कि RPFC-I, RPFC-II और APFC रैंक के अधिकारी, अनुभवी क्षेत्र अधिकारी और नए भर्ती हुए अधिकारी, इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। उन्होंने IBBI द्वारा कार्यक्रम के लिए विशेषज्ञ संसाधन व्यक्तियों की उपलब्धता के लिए समर्थन की सराहना की।

अन्य सत्र और शिक्षण सामग्री

IBBI के महाप्रबंधक राजेश तिवारी ने IBC के उद्देश्य, संस्थागत ढांचा और प्रमुख हितधारकों की भूमिकाओं पर प्रकाश डाला। PDUNASS के चीफ लर्निंग ऑफिसर रिजवान उद्दीन ने कार्यक्रम की शैक्षणिक संरचना और सीखने के उद्देश्यों की जानकारी दी, जबकि कोर्स डायरेक्टर संजय कुमार राय ने कोर्स डिजाइन और अपेक्षित सीखने के परिणामों की व्याख्या की।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं

संजय कुमार राय ने बताया कि कार्यक्रम में IBBI के अधिकारी, रेजोल्यूशन प्रोफेशनल, ईपीएफओ के स्टैंडिंग काउंसल, पूर्व NCLT/NCLAT सदस्य और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद शामिल होंगे। सत्रों में ईपीएफओ में कानूनी प्रबंधन, IBC-संबंधित मामलों का निपटान, provident fund देयों की वसूली और दिवालियापन प्रक्रियाओं पर हालिया न्यायिक निर्णयों पर चर्चा होगी।

यह पहल PDUNASS की क्षमता निर्माण और ईपीएफओ अधिकारियों की कानूनी तत्परता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, ताकि वे दिवालियापन समाधान ढांचे में श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा हितों की प्रभावी रक्षा कर सकें।

PDUNASS के बारे में

पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS) ईपीएफओ की शीर्ष प्रशिक्षण संस्था है, जो श्रम और रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत आती है। 1990 में स्थापित PDUNASS सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और परामर्श कार्य करती है।

EPFO अधिकारियों के लिए नैतिक नेतृत्व को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम: PDUNASS और ICCfG के बीच रणनीतिक साझेदारी

No comments Document Thumbnail

भारत में सार्वजनिक सेवा वितरण को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की शीर्ष प्रशिक्षण संस्था पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS) ने आईसी सेंटर फॉर गवर्नेंस (ICCfG) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। इस संबंध में नई दिल्ली में आज एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह MoU EPFO अधिकारियों के लिए तकनीकी दक्षता के साथ-साथ नैतिक नेतृत्व और नैतिक मूल्यों को संस्थागत रूप से प्रशिक्षण प्रणाली में शामिल करने का एक व्यापक ढांचा स्थापित करता है।

समझौता ज्ञापन पर PDUNASS की ओर से क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I राम आनंद तथा ICCfG की ओर से महासचिव शांति नारायण ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर PDUNASS के निदेशक कुमार रोहित सहित ICCfG के कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब EPFO “ईज़ ऑफ लिविंग” सुधारों और डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में संगठन को न केवल तकनीकी रूप से दक्ष बल्कि नैतिक रूप से सुदृढ़ अधिकारियों की आवश्यकता है।

‘मिशन कर्मयोगी’ की दिशा में कदम

इस सहयोग का उद्देश्य “मिशन कर्मयोगी” की परिकल्पना को साकार करना है, जिसमें नियम-आधारित कार्यप्रणाली से आगे बढ़कर भूमिका-आधारित नैतिक दक्षता पर जोर दिया गया है। यह पहल पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता को प्रशासन का अभिन्न हिस्सा बनाने में सहायक होगी।

PDUNASS के निदेशक कुमार रोहित ने कहा कि EPFO की बढ़ती जिम्मेदारियों के मद्देनज़र अधिकारियों को केवल प्रक्रियात्मक ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक विवेक की भी आवश्यकता है। यह साझेदारी कौशल प्रशिक्षण से आगे बढ़कर चरित्र निर्माण पर केंद्रित है।

संरचित प्रशिक्षण व्यवस्था

MoU के तहत चरणबद्ध वार्षिक प्रशिक्षण ढांचा तैयार किया गया है। इसमें

  • ग्रुप ‘A’ अधिकारियों के लिए ICCfG केंद्रों पर आवासीय नेतृत्व और नीति-आधारित प्रशिक्षण

  • ग्रुप ‘B’ अधिकारियों के लिए PDUNASS परिसर में पेशेवर आचरण और नागरिक-केंद्रित सेवा पर आधारित प्रशिक्षण शामिल है।

इससे सभी स्तरों पर अधिकारियों को भरोसेमंद और उत्तरदायी सार्वजनिक सेवा देने के लिए तैयार किया जाएगा।

सुधारों के संदर्भ में पहल

यह पहल 2025 में EPFO द्वारा लागू किए गए हालिया सुधारों—जैसे सरल निकासी प्रणाली और केंद्रीकृत पेंशन भुगतान व्यवस्था—को नैतिक आधार प्रदान करती है। डिजिटल स्वचालन के साथ-साथ मानवीय विवेक और नैतिक निर्णय-क्षमता को मजबूत करना इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य है।

यह समझौता भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रशासन प्रणाली को भविष्य के लिए तैयार, मूल्य-आधारित और जनविश्वास से परिपूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए पेंशनर सम्मेलन में

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पेंशनर्स समाज की धरोहर हैं, जिन्होंने अपने सेवाकाल में शासन-प्रशासन की नींव को सुदृढ़ किया और आज राज्य के विकास में अपना योगदान दे रहे है। प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारू संचालन में पेंशनरों का अनुभव बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी कर्तव्यनिष्ठ सेवा के कारण ही प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से जारी है। मुख्यमंत्री आज पमशाला में आयोजित सरगुजा संभागीय पेंशनर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के वक्त जिन शासकीय सेवकों ने कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हुए राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, वे आज भले ही सेवानिवृत हो चुके है लेकिन उनका अनुभव और मार्गदर्शन नए अधिकारियों के लिए हमेशा काम आएगा। सम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ पेंशनरों को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने पूर्व सरगुजा कमिश्नर रिटायर्ड आईएएस महेश्वर साय पैंकरा द्वारा लिखित किताब करमडार एवं अन्य कथनी तथा महुवा के फूल का विमोचन किया। उन्होंने पेंशनर संघ की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राधा-कृष्ण मंदिर में दर्शन व पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। 

इस अवसर पर प्रांताध्यक्ष डॉ डीपी मनहर ने कहा कि मुख्यमंत्री साय पेंशनर संघ सम्मलेन में शामिल होने वाले पहले मुख्यमंत्री है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, पूर्व विधायक भरत साय, पेंशनर संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ डीपी मनहर, बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे।


वेतन संहिता, 2019 : श्रमिकों के अधिकार और आर्थिक न्याय को सशक्त बनाती ऐतिहासिक पहल

No comments Document Thumbnail

परिचय

भारत सरकार समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए समावेशी नीतियों व कार्यक्रमों के प्रति प्रतिबद्ध है, जो समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाते हैं। श्रम और रोजगार मंत्रालय का उद्देश्य सभी के लिए सम्मानजनक कार्य परिस्थितियाँ, गुणवत्तापूर्ण जीवन एवं सतत् रोजगार अवसर प्रदान करना है।

द्वितीय राष्ट्रीय श्रम आयोग ने अनुशंसा की थी कि मौजूदा श्रम कानूनों को कार्य-आधारित समूहों में चार या पाँच श्रम संहिताओं में समेकित किया जाए। इसी क्रम में वेतन संहिता, 2019 चार प्रमुख संहिताओं में से एक है। यह संहिता समानता, श्रमिक कल्याण और उद्यमों की स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई गई है। यह प्रमुख परिभाषाओं को मानकीकृत करती है, प्रक्रियाओं को सरल बनाती है तथा नियोक्ताओं के लिए तेज और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करती है। इन श्रम सुधारों का व्यापक लक्ष्य है—सभी के लिए सम्मानजनक रोजगार सृजन के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देना।

वेतन संहिता, 2019 : समाहित किए गए कानून

वेतन संहिता, 2019 में 4 प्रमुख वेतन एवं भुगतान संबंधी कानूनों को सम्मिलित किया गया है:

  • भुगतान-ए-वेतन अधिनियम, 1936

  • न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948

  • बोनस भुगतान अधिनियम, 1965

  • समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976

यह संहिता श्रमिक अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ नियोक्ताओं के लिए अनुपालन को सरल बनाती है। यह समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शोषण से सुरक्षा प्रदान करती है, जो कार्यस्थल पर गरिमा और स्थिरता सुनिश्चित करती है। महिलाओं के लिए समान वेतन और प्रतिनिधित्व की गारंटी देकर यह समावेशी श्रम बाजार को मजबूत करती है।

इन प्रावधानों से उत्पादकता, श्रमिक कल्याण, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास—सभी को बढ़ावा मिलता है।

क्या आप जानते हैं?

श्रम सुधारों के तहत सिंगल रजिस्ट्रेशन, सिंगल लाइसेंस और सिंगल रिटर्न की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे अनुपालन बोझ कम होता है और रोजगार को बढ़ावा मिलता है।

वेतन संहिता, 2019 के तहत —

  • नियमों की संख्या 163 से घटकर 58,

  • फॉर्म 20 से घटकर 6

  • रजिस्टर 24 से घटकर 2 कर दिए गए हैं।

न्यूनतम एवं न्यायसंगत वेतन सुनिश्चित करना

न्यूनतम वेतन का सार्वभौमीकरण

धारा 5 के अनुसार अब न्यूनतम वेतन सभी क्षेत्रों, संगठित और असंगठित दोनों पर लागू होंगे। पहले यह केवल अनुसूचित रोजगारों पर लागू था, जिससे केवल लगभग 30% श्रमिक ही कवर होते थे।

श्रमिक-हितैषी प्रावधान

  • हर कर्मचारी को न्यूनतम वेतन का कानूनी अधिकार

  • देशभर में वेतन असमानता में कमी

  • दिहाड़ी, आकस्मिक श्रमिक, प्रवासी मजदूरों को सुरक्षा

  • आय में स्थिरता और बेहतर जीवन स्तर

रोजगार-हितैषी प्रावधान

  • महिलाओं और प्रवासी श्रमिकों की भागीदारी में वृद्धि

  • निष्पक्ष वेतन से नौकरी में स्थिरता

फ़्लोर वेज (राष्ट्रीय न्यूनतम आधार वेतन)

धारा 9 व नियम 11 के अनुसार केंद्र सरकार फ्लोर वेज तय करेगी, जो भोजन, वस्त्र आदि की न्यूनतम जीवन आवश्यकताओं पर आधारित होगा। राज्य सरकारें इससे कम वेतन निर्धारित नहीं कर सकेंगी।

लाभ

  • राज्यों में वेतन असमानता में कमी

  • मजदूरों की मूल आवश्यकताओं की पूर्ति

  • प्रवासन में कमी

  • एकसमान न्यायसंगत वेतन सुनिश्चित

कौशल, क्षेत्र और कठिनाई के आधार पर न्यूनतम वेतन

  • समय-कार्य एवं पीस-रेट कार्य हेतु वेतन दरें सरकार तय करेगी

  • कौशल, क्षेत्र और कार्य कठिनाई को आधार बनाया जाएगा

  • वेतन का पुनरीक्षण हर 5 वर्ष में अनिवार्य

वेतन का पुनर्निर्धारण

वेतन में—

  • मूल वेतन

  • महंगाई भत्ता

  • रिटेनिंग भत्ता
    शामिल होंगे।

यदि भत्ते कुल वेतन के 50% से अधिक हैं, तो अतिरिक्त भाग को वेतन में जोड़ा जाएगा।

लाभ

  • सामाजिक सुरक्षा लाभ (PF, ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभ, बोनस) अधिक होंगे

  • संविदा एवं अनौपचारिक श्रमिकों को समान सुरक्षा

कार्य घंटे का निर्धारण

धारा 13 (नियम 6) के अनुसार:

  • सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे

  • किसी दिन अधिकतम 12 घंटे (विशेष परिस्थितियों में)

  • साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य

यह प्रावधान कार्य-जीवन संतुलन, स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार लाता है।

वेतन भुगतान की गारंटी

समय पर वेतन भुगतान

धारा 17 के अनुसार:

  • दैनिक → शिफ्ट समाप्ति पर

  • साप्ताहिक → साप्ताहिक अवकाश से पहले

  • पखवाड़े → 2 दिनों के भीतर

  • मासिक → अगले महीने की 7 तारीख तक

  • इस्तीफा/निष्कासन → 2 कार्य दिवसों के भीतर

वेतन पर्ची (वेज स्लिप)

धारा 50(3) के अनुसार वेतन भुगतान के समय इलेक्ट्रॉनिक/भौतिक वेतन पर्ची देना अनिवार्य।

वार्षिक बोनस का भुगतान

  • पात्रता: वर्ष में कम से कम 30 दिन कार्य

  • बोनस: 8.33% से 20% तक

  • उद्देश्य: लाभ-साझेदारी, प्रेरणा और उपभोग क्षमता बढ़ाना

दावा दाखिल करने की सीमा अवधि बढ़ाकर 3 वर्ष

इससे कर्मचारियों को न्याय पाने की अधिक समय-सुविधा मिलती है।

पीस-रेट कार्य के लिए न्यूनतम समय-दर वेतन

धारा 12 के अनुसार, न्यूनतम समय-दर से कम वेतन नहीं दिया जा सकता।

ओवरटाइम भुगतान

धारा 14 के अनुसार ओवरटाइम वेतन सामान्य वेतन से दोगुना।

दंडों का गैर-आपराधिकरण (Decriminalisation)

  • पहली बार के अपराध पर कंपाउंडिंग (50% अधिकतम जुर्माना)

  • कारावास हटाकर नागरिक दंड लागू

  • न्याय तेज और मैत्रीपूर्ण अनुपालन वातावरण

विकासोन्मुख प्रावधान

  • परिभाषाओं का एकीकरण

  • इंस्पेक्टर राज की समाप्ति

  • वेब-आधारित निरीक्षण

  • पारदर्शी, सहयोगात्मक अनुपालन

वन नेशन, वन वेज कोड

वेतन, कार्यकर्ता, कर्मचारी आदि की एक समान परिभाषा पूरे देश में लागू।

इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर की व्यवस्था

निरीक्षण के साथ-साथ जागरूकता, मार्गदर्शन और अनुपालन में सहायता प्रदान करना।

नियोक्ता की संपत्तियों की सुरक्षा

सरकारी अनुबंधों से संबंधित जमा राशि को न्यायालयों द्वारा जब्त नहीं किया जा सकेगा (कर्मचारी देयताओं को छोड़कर)।

लैंगिक समानता

लिंग-आधारित भेदभाव पर प्रतिबंध

धारा 3 के अंतर्गत:

  • भर्ती, वेतन, कार्य-शर्तों में कोई लिंग आधारित भेदभाव नहीं

  • ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए भी समान संरक्षण

सलाहकार बोर्डों में महिलाओं का एक-तिहाई प्रतिनिधित्व

धारा 42 के अनुसार—महिलाओं की नीतिगत भागीदारी सुनिश्चित।

निष्कर्ष

वेतन संहिता, 2019 भारत के श्रम बाजार में न्याय, समानता और समावेशिता को मजबूत बनाती है। यह श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करती है, नियोक्ताओं के हितों को संतुलित करती है, अनुपालन सरल बनाती है, और औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देती है।

संपूर्ण रूप से, यह संहिता श्रमिकों की गरिमा, आर्थिक न्याय और राष्ट्र के समग्र विकास को प्रोत्साहित करती है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व में श्रम सुधारों का ऐतिहासिक क्रियान्वयन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज देश में चार श्रम संहिताओं के ऐतिहासिक क्रियान्वयन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रम सुधारों का यह महत्वपूर्ण निर्णय देश के 40 करोड़ से अधिक श्रमिकों के अधिकार, सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की एक अभूतपूर्व गारंटी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का दिन भारत के श्रम क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर है। चारों श्रम संहिताओं के लागू होने से न्यूनतम वेतन का अधिकार, महिलाओं को समान वेतन का प्रावधान, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, प्रत्येक श्रमिक के लिए सामाजिक सुरक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा और ओवरटाइम पर डबल वेतन जैसी व्यवस्थाएँ पूरे देश में सुनिश्चित होंगी। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से न केवल श्रमिक वर्ग को लाभ मिलेगा, बल्कि औद्योगिक वातावरण अधिक पारदर्शी, संतुलित और श्रमिक-हितैषी होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जिस समावेशी और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लिया है, श्रम संहिताओं का लागू होना उस दिशा में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम है। उन्होंने कहा कि भारत की कार्यशील जनसंख्या राष्ट्र की उत्पादन शक्ति और आर्थिक समृद्धि की आधारशिला है, और उनके अधिकारों का संरक्षण किसी भी सशक्त राष्ट्र की प्राथमिकता है। यह संहिताएँ देश की श्रम शक्ति को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण प्रदान करेंगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले इस निर्णय के लिए वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के प्रति आभार प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुधार नई अर्थव्यवस्था, बेहतर औद्योगिक संबंधों और मजबूत श्रम बाजार का आधार साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन से देशभर में रोजगार, उत्पादन, निवेश और औद्योगिक विकास की गति और अधिक मजबूत होगी, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।

IITF 2025 में EPFO का भव्य पदार्पण: डिजिटल सोशल सिक्योरिटी का नया युग शुरू

No comments Document Thumbnail

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पहली बार भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) 2025 में अपने अत्याधुनिक पैवेलियन का आयोजन किया, जिसका स्थान भारत मंडपम, नई दिल्ली रहा। इस पैवेलियन का औपचारिक उद्घाटन केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने किया। इस अवसर पर श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री रमेश कृष्णमूर्ति तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, EPFO तथा अन्य प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

डॉ. मंडाविया ने EPFO पैवेलियन के उद्घाटन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि IITF सदैव भारत की विकास यात्रा को दर्शाने का एक महत्वपूर्ण मंच रहा है। इस वर्ष EPFO पहली बार IITF में अपने नए, आधुनिक और सशक्त स्वरूप के साथ उपस्थित हुआ है, जो पारदर्शिता, दक्षता और व्यापक सेवा प्रदायन का प्रतीक है। उन्होंने EPFO की भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में निरंतर प्रगति की सराहना की और इसे देश के कार्यबल की वित्तीय गरिमा सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण संस्था बताया।

उन्होंने बताया कि EPFO वर्षों से देश के करोड़ों श्रमिकों के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार स्तंभ रहा है। संगठन ने मैनुअल प्रक्रियाओं से डिजिटल प्लेटफॉर्म तक एक लंबी यात्रा तय की है, जिसके परिणामस्वरूप संगठित, असंगठित, शहरी और ग्रामीण – हर श्रमिक तक भविष्य निधि सेवाएँ सम्मानपूर्वक और तेजी से पहुँच रही हैं।

पिछले वर्ष में EPFO ने अपने डिजिटल इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं—उन्नत यूनिफाइड पोर्टल, पुनर्निर्मित वेबसाइट, सरलित दावा प्रक्रियाएँ, रियल-टाइम शिकायत निवारण, पेपरलेस ऑनबोर्डिंग और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट के माध्यम से पेंशनर्स को दरवाज़े पर सहायता उपलब्ध कराना—इन सभी ने नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाया है।

डॉ. मंडाविया ने कहा कि यह पैवेलियन केवल सेवाओं का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि EPFO के “भविष्य-उन्मुख, सदस्य-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-संचालित” संगठन बनने के संकल्प को दर्शाता है। यह दिखाता है कि किस प्रकार डिजिटल सार्वजनिक सेवाएँ नागरिकों को सशक्त करती हैं, उद्यमों को सहयोग देती हैं और संस्थाओं व नागरिकों के बीच विश्वास को मजबूत करती हैं।

उन्होंने आगंतुकों, नियोक्ताओं और युवाओं को पैवेलियन का अवलोकन करने, इसकी सेवाओं को समझने और सामाजिक सुरक्षा के महत्व को जानने के लिए आमंत्रित किया। साथ ही, EPFO टीम को एक सूचनाप्रद, इंटरैक्टिव और भविष्य-दृष्टि वाले पैवेलियन के निर्माण के लिए बधाई दी, जो सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की राष्ट्रीय दृष्टि से मेल खाता है।

शोभा करंदलाजे ने भी EPFO को अपनी शुभकामनाएँ दीं और आग्रह किया कि संगठन आगंतुकों को ऑन-द-स्पॉट सेवाएँ उपलब्ध कराते हुए अधिकतम जागरूकता फैलाने का कार्य करे।

EPFO पैवेलियन, भारत सरकार की ‘जीवन की सुगमता’ और ‘सभी के लिए डिजिटल सार्वजनिक सेवाएँ’ की दृष्टि के अनुरूप एक भविष्य-तैयार, नागरिक-केंद्रीय डिजिटल अनुभव प्रदान करता है। आगंतुक यहाँ पेंशन सुविधा ज़ोन, नियोक्ता सहायता केंद्र, ई-सेवा डेमो तथा EPF, EPS, EDLI, PM-VBRY और नवनिर्घारित Employees Enrolment Scheme 2025 जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर जागरूकता स्टॉलों का अवलोकन कर सकते हैं।

हर डेस्क पर EPFO के विशेषज्ञ मौजूद हैं, जो लाइव सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। आगंतुक पैवेलियन में अपना दावा दाखिल कर सकते हैं, संयुक्त घोषणा कर सकते हैं, UAN जनरेट कर सकते हैं और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं।

पैवेलियन में इंटरैक्टिव टचस्क्रीन किओस्क भी लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से उपयोगकर्ता प्रक्रिया-शिक्षण वीडियो देख सकते हैं, प्रकाशन पढ़ सकते हैं और क्विज़ के माध्यम से सेवाओं को बेहतर समझ सकते हैं। बड़े डिस्प्ले स्क्रीन निरंतर शिक्षाप्रद सामग्री प्रदर्शित कर जागरूकता बढ़ाते हैं।

सभी आयु वर्गों के लिए अनुभव को मनोरंजक बनाने हेतु पैवेलियन में किड्स प्ले ज़ोन, नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो और सेल्फी बूथ की व्यवस्था की गई है। आगंतुक सोशल मीडिया सेल्फी गतिविधियों में भाग ले सकते हैं और बच्चे पेंटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं। इन सभी गतिविधियों में भाग लेने वालों के लिए विशेष उपहार भी रखे गए हैं, जिससे पैवेलियन शिक्षा और मनोरंजन दोनों का संगम बन जाता है।

दोहा में विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन में डॉ. मांडविया ने प्रस्तुत की भारत की गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा की प्रेरक यात्रा

No comments Document Thumbnail

श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया दोहा, कतर में आयोजित द्वितीय विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं, जहाँ उन्होंने उच्च स्तरीय गोलमेज सम्मेलन और पूर्ण सत्र में भारत की गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति को प्रस्तुत किया।

निति आयोग द्वारा आयोजित एक साइड इवेंट "गरीबी से बाहर निकलने के मार्ग: अंतिम व्यक्ति को सशक्त बनाने में भारत का अनुभव" में डॉ. मांडविया ने बताया कि भारत ने लगभग 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला है और सामाजिक सुरक्षा कवरेज को 64% से अधिक आबादी तक विस्तारित किया है। उन्होंने कहा कि भारत की विकास दृष्टि के केंद्र में महिलाएं और बच्चे हैं — देशभर में 11.8 करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन प्रदान किया जा रहा है और लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उद्यमिता को बढ़ावा दे रही हैं।

उन्होंने बताया कि जन धन, आधार और मोबाइल (JAM) त्रयी के माध्यम से भारत की डिजिटल क्रांति ने कल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शी और समावेशी डिलीवरी सुनिश्चित की है। अब तक 1.4 करोड़ युवाओं को स्किल इंडिया मिशन के तहत प्रशिक्षित किया गया है और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के माध्यम से 3.5 करोड़ नए औपचारिक रोजगार सृजित होंगे।

डॉ. मांडविया ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा आयोजित ग्लोबल कोएलिशन फॉर सोशल जस्टिस के स्पॉटलाइट सत्र में भी भाग लिया और भारत की सामाजिक न्याय और जिम्मेदार व्यवसाय आचरण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि 2017 से 2023 के बीच भारत में 17 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित हुए, बेरोजगारी दर 6% से घटकर 3.2% हुई और महिलाओं की कार्यबल भागीदारी लगभग दोगुनी हो गई है।

उन्होंने भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख किया जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के 7.8 करोड़ से अधिक सदस्य हैं और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) 15.8 करोड़ बीमित व्यक्तियों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है। वहीं ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से 31 करोड़ असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा गया है।

अपने द्विपक्षीय बैठकों में, डॉ. मांडविया ने विभिन्न देशों के मंत्रियों से मुलाकात की —

  • कतर की सामाजिक विकास एवं परिवार मंत्री बुथैना बिन्त अली अल जब्र अल नुआइमी से मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने सामाजिक सुरक्षा, पारिवारिक कल्याण और डिजिटल नवाचार में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

  • रोमानिया के श्रम और सामाजिक एकजुटता मंत्री पेट्रे-फ्लोरिन मैनोले से मुलाकात में शिक्षा से रोजगार (E2E) पहल पर चर्चा हुई, जिससे कौशल विकास और श्रम गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा।

  • ILO महानिदेशक गिल्बर्ट एफ. हॉन्ग्बो से बैठक में डॉ. मांडविया ने भारत-ILO साझेदारी को और गहरा करने की इच्छा व्यक्त की और BRICS अध्यक्षता 2026 के दौरान तकनीकी सहयोग का स्वागत किया।

  • रूस के श्रम और सामाजिक संरक्षण मंत्री एंटन ओलेगोविच कोट्याकोव के साथ बैठक में दोनों पक्षों ने BRICS और G20 जैसे बहुपक्षीय मंचों में सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।

  • यूरोपीय संघ की सामाजिक अधिकार एवं कौशल कार्यकारी उपाध्यक्ष रॉक्साना मिनज़ाटू से मुलाकात में डॉ. मांडविया ने भारत की रोजगार सृजन, महिलाओं की भागीदारी और सामाजिक सुरक्षा विस्तार की उपलब्धियों को साझा किया।

अंत में, डॉ. मांडविया ने कतर में भारतीय समुदाय से भी संवाद किया और 8 लाख से अधिक प्रवासी भारतीयों की मेहनत, ईमानदारी और भारत-कतर साझेदारी में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने विकसित भारत 2047 की दिशा में भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि, डिजिटल रूपांतरण, कौशल विकास और बुनियादी ढांचा सशक्तिकरण की जानकारी दी



Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.