Media24Media.com: #SocialProtection

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #SocialProtection. Show all posts
Showing posts with label #SocialProtection. Show all posts

भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से 101 करोड़ लोग जुड़े, आबादी के 68% से अधिक को मिला लाभ : डॉ. मनसुख मांडविया

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का दायरा अब लगभग 101 करोड़ लोगों तक पहुंच चुका है, जो देश की 68 प्रतिशत से अधिक आबादी को कवर करता है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने पिछले सप्ताह हैदराबाद में आयोजित ब्रिक्स श्रम मंत्रियों की बैठक में भी रेखांकित किया, जो भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर मिली मान्यता का प्रमाण है।

डॉ. मांडविया नई दिल्ली में आयोजित चौथे ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट को संबोधित कर रहे थे। इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एम्प्लॉयर्स (AIOE) ने फिक्की (FICCI) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के सहयोग से किया।

उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, नियोक्ता, श्रमिक और ट्रेड यूनियनों के बीच निरंतर समन्वय ही स्वस्थ औद्योगिक संबंधों की आधारशिला है। आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को साथ लेकर चलने के लिए सभी पक्षों की साझेदारी आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि औद्योगीकरण राष्ट्रीय विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी मॉडल की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ये पहल आजीविका के नए अवसर पैदा करने, अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसा संतुलित विकास मॉडल आवश्यक है जो एक ओर श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करे तथा दूसरी ओर उद्योगों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को भी बढ़ावा दे।

डॉ. मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थिर कर व्यवस्था, बढ़ती बचत, बढ़ी हुई क्रय शक्ति और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के कारण आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का सकारात्मक चक्र विकसित हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जीडीपी में प्रत्येक 1 प्रतिशत वृद्धि के साथ रोजगार में 1.11 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि लगभग 12 वर्ष पहले रोजगार वृद्धि का यह अनुपात केवल 0.008 प्रतिशत था।

उन्होंने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में प्रस्तावित सुधारों की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य में केवल ईएसआईसी अस्पताल ही नहीं, बल्कि बेहतर निजी अस्पतालों को भी ईएसआईसी से संबद्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के रूप में मान्यता दी जा सकती है। इसके अलावा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की सभी दावों की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल की जा रही है तथा एकल यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के माध्यम से खातों का स्वतः स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, यूपीआई के माध्यम से पीएफ निकासी की सुविधा पर भी विचार किया जा रहा है।

इस अवसर पर भारत में ILO की दक्षिण एशिया निदेशक सुश्री मिचिको मियामोटो ने भारत को सामाजिक सुरक्षा के विस्तार पर बधाई देते हुए कहा कि ILO के आकलन के अनुसार भारत अब एक अरब से अधिक लोगों को कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने वाला देश बन गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि भारत की आर्थिक प्रगति को और गति देगी।

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने दो दिवसीय सम्मेलन की स्मारिका का भी विमोचन किया।

जिनेवा में 114वें अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे की महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें, कौशल विकास और श्रम सहयोग पर जोर

No comments Document Thumbnail

श्रम एवं रोजगार तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) राज्य मंत्री, भारत सरकार, शोभा करंदलाजे ने 9 जून 2026 को स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में आयोजित 114वां अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (ILC) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उन्होंने समावेशी विकास, लैंगिक समानता और सामाजिक संवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। सम्मेलन के दौरान उनकी सहभागिता और उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों ने भारत की सशक्त एवं समन्वित कूटनीतिक उपस्थिति को प्रदर्शित किया।

सम्मेलन के इतर, केंद्रीय राज्य मंत्री ने नेपाल के युवा, श्रम एवं रोजगार मंत्री रामजी यादव के साथ द्विपक्षीय बैठक की। नेपाल ने भारत के डिजिटल पोर्टलों की सराहना की। भारत ने “Neighbourhood First” नीति के अंतर्गत नेपाल को एक प्राथमिक साझेदार बताया। दोनों मंत्रियों ने कौशल विकास, श्रम गतिशीलता तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इस वार्ता ने दोनों देशों के श्रमिकों के लिए अवसरों और कल्याण को बढ़ावा देने तथा पारंपरिक और भाईचारेपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

अंगोला की लोक प्रशासन, श्रम एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री टेरेसा रोड्रिग्स डायस के साथ बैठक में श्रम एवं रोजगार, कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा और कार्यबल प्रशिक्षण में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने रोजगार सेवाओं, कौशल विकास, कार्यबल नियोजन और डिजिटल प्रशासन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। अंगोला ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक प्रणालियों की सराहना की और ज्ञान-साझाकरण का अनुरोध किया। भारत ने रोजगार सेवाओं, श्रमिक पंजीकरण, रोजगार एवं कौशल मिलान के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के डिज़ाइन, विकास और संचालन में तकनीकी सहायता तथा क्षमता निर्माण सहयोग की पेशकश की।

मॉरीशस के श्रम एवं औद्योगिक संबंध मंत्री मुहम्मद रेजा कासम उतीम के साथ बैठक में मंत्री शोभा करंदलाजे ने दोनों देशों के बीच साझा इतिहास, संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और गहरे जन-से-जन संबंधों पर आधारित घनिष्ठ एवं दीर्घकालिक संबंधों की सराहना की। मॉरीशस ने श्रम एवं रोजगार क्षेत्र में भारत द्वारा विकसित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) में हुई उल्लेखनीय प्रगति की प्रशंसा की। भारत ने अपनी विशेषज्ञता साझा करने तथा डिजिटल समाधान विकसित करने में निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इसके अतिरिक्त, शोभा करंदलाजे ने फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के श्रम मंत्रियों से भी मुलाकात की। इन बैठकों में कौशलों की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Skills) और मांग-आधारित कौशल विकास के माध्यम से भारत से कुशल जनशक्ति के कानूनी प्रवासन के मार्गों पर चर्चा की गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत G RAM G बिल पर शिवराज सिंह चौहान का लेख किया साझा

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा किया है, जिसमें विकसित भारत G RAM G बिल के उद्देश्यों को रेखांकित किया गया है।

लेख में बताया गया है कि विकसित भारत G RAM G बिल का उद्देश्य ग्रामीण आजीविका में व्यापक परिवर्तन लाना है। इसके तहत रोजगार गारंटी को और सशक्त बनाने, स्थानीय स्तर पर योजना निर्माण को बढ़ावा देने, श्रमिकों की सुरक्षा और कृषि उत्पादकता के बीच संतुलन स्थापित करने, विभिन्न सरकारी योजनाओं के समन्वय, जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों की क्षमता बढ़ाने और शासन व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। लेख में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह विधेयक सामाजिक सुरक्षा से पीछे हटने का नहीं, बल्कि उसके नवीनीकरण का प्रतीक है।

केंद्रीय मंत्री द्वारा लिखे गए इस लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,

“इस अवश्य-पठनीय लेख में केंद्रीय मंत्री @ChouhanShivraj ने बताया है कि विकसित भारत G RAM G बिल किस प्रकार रोजगार गारंटी को मजबूत करके, स्थानीय योजना प्रक्रिया को सशक्त बनाकर, श्रमिक सुरक्षा और कृषि उत्पादकता के बीच संतुलन स्थापित करके, योजनाओं के समन्वय, जमीनी स्तर की क्षमता को मजबूत करने और शासन के आधुनिकीकरण के माध्यम से ग्रामीण आजीविका को रूपांतरित करने का लक्ष्य रखता है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया है कि यह विधेयक सामाजिक सुरक्षा से पीछे हटना नहीं है, बल्कि उसका नविकरण है।”

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020: प्रमुख विशेषताएँ और व्यापक श्रमिक कल्याण सुधार

No comments Document Thumbnail

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • यह संहिता नौ मौजूदा सामाजिक सुरक्षा कानूनों को एकीकृत कर एक रूपरेखा प्रदान करती है, जिससे संगठित, असंगठित, गिग एवं प्लेटफ़ॉर्म सभी प्रकार के श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

  • EPFO और ESIC का दायरा पूरे देश में विस्तारित किया गया है, जिससे अधिक संस्थान और अधिक श्रमिक सामाजिक सुरक्षा लाभों के अंतर्गत आएंगे।

  • गिग एवं प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को पहली बार मान्यता दी गई है और उनके कल्याण हेतु सामाजिक सुरक्षा कोष का प्रावधान किया गया है।

  • महिलाओं के लिए 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश, वर्क-फ्रॉम-होम, एवं क्रेच सुविधा जैसे प्रावधानों को और सशक्त बनाया गया है।

  • डिजिटल रिकॉर्ड, अपराधमुक्तिकरण, अपराधों के निपटारे में संयोजन (compounding), और तकनीक आधारित निरीक्षण-प्रधान सहायक प्रणाली के माध्यम से “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” को बढ़ावा दिया गया है।

परिचय

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 भारत के श्रम कल्याण ढांचे में एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिसका उद्देश्य सभी वर्गों के श्रमिकों के लिए व्यापक और समावेशी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह संहिता नौ सामाजिक सुरक्षा कानूनों को एकीकृत कर एक सरल और व्यापक ढांचा प्रदान करती है, जिससे संगठित, असंगठित, गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा लाभों की पहुंच बढ़ाई जा सके।

इन विविध श्रम कानूनों को एक मंच पर लाकर, संहिता अनुपालन को सरल बनाती है, दक्षता बढ़ाती है, और जीवन एवं विकलांगता बीमा, स्वास्थ्य एवं मातृत्व लाभ, भविष्य निधि (PF) और ग्रेच्युटी जैसे लाभों तक पहुंच को विस्तारित करती है। यह डिजिटल प्रणालियों और पारदर्शी तंत्रों के माध्यम से कार्यान्वयन को मजबूत करती है, जिससे नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को सुगमता मिलती है।

श्रमिक-हितैषी प्रावधान (Pro-Worker Provisions)

1. फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को ग्रेच्युटी

संहिता की धारा 53 के तहत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों (FTE) के लिए ग्रेच्युटी की पात्रता अवधि 5 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष कर दी गई है।
1 वर्ष की निरंतर सेवा पूर्ण करने पर उन्हें अनुपातिक आधार पर ग्रेच्युटी मिलेगी।

2. गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को शामिल करना

धारा 113 और 114 के तहत पहली बार गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराए गए हैं।
इसके तहत “एग्रीगेटर” की परिभाषा भी शामिल की गई है।

मुख्य प्रावधान—

  • राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन

  • राज्य स्तरीय बोर्ड जो असंगठित, गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों हेतु योजनाओं की सिफारिश करेगा

  • सामाजिक सुरक्षा कोष (Social Security Fund)—केंद्र/राज्य योगदान, CSR, कंपाउंडिंग से प्राप्त राशि आदि से बनाया जाएगा

  • धारा 13—भविष्य की आवश्यकताओं हेतु अतिरिक्त कार्य भी सौंपे जा सकेंगे

3. EPFO का सार्वभौमिक कवरेज

EPF अधिनियम, 1952 को समाप्त कर दिया गया है।
अब 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी प्रतिष्ठान EPFO के दायरे में आएंगे।
इससे कर्मचारी भविष्य निधि कवरेज बढ़ेगा और विवाद कम होंगे।

4. राष्ट्रीय पंजीकरण एवं यूनिक आईडी

असंगठित, गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस बनेगा।
पोर्टल पर पंजीकरण के बाद प्रत्येक श्रमिक को यूनिक आईडी मिलेगी, जो आधार सत्यापित होगी।
इससे प्रवासी श्रमिकों को देशभर में पोर्टेबिलिटी मिलेगी।

5. “वेतन” की एक समान परिभाषा

वेतन = मूल वेतन + महंगाई भत्ता + रिटेनिंग भत्ता
अन्य भत्ते 50% से अधिक होने पर अतिरिक्त राशि वेतन में जोड़ी जाएगी।
इससे ग्रेच्युटी, पेंशन आदि में लाभ बढ़ेगा।

6. “परिवार” की विस्तृत परिभाषा

अब इसमें शामिल—

  • महिला कर्मचारी की सास-ससुर (आय सीमा आधारित)

  • माता-पिता न होने पर अविवाहित नाबालिग भाई/बहन

ESIC लाभों का दायरा बढ़ा।

7. आवागमन के दौरान दुर्घटना पर मुआवज़ा

घर से कार्यस्थल के बीच यात्रा में दुर्घटना होने पर अब इसे सेवा के दौरान दुर्घटना माना जाएगा।

8. ESIC का विस्तार

ESIC अब पूरे भारत में लागू होगा।

  • 10 से कम कर्मचारियों वाले संस्थानों के लिए स्वैच्छिक विकल्प

  • ख़तरनाक कार्यों में 1 कर्मचारी होने पर भी अनिवार्य

  • प्लांटेशन श्रमिक भी शामिल

महिला-हितैषी प्रावधान (Pro-Women Provisions)

1. मातृत्व लाभ

  • 80 दिन कार्य पर उपस्थित—पात्र

  • 26 सप्ताह का अवकाश

  • गोद लेने/सरोगेसी पर 12 सप्ताह

2. वर्क-फ्रॉम-होम

मातृत्व अवकाश के बाद, कार्य की प्रकृति अनुरूप, वर्क-फ्रॉम-होम का प्रावधान।

3. सरल चिकित्सा प्रमाणन

अब प्रमाण पत्र—

  • पंजीकृत डॉक्टर

  • आशा कार्यकर्ता

  • एएनएम

  • दाई
    द्वारा जारी किया जा सकेगा।

4. मेडिकल बोनस

₹3,500—प्रि-नैटल/पोस्ट-नैटल सेवाएँ न मिलने पर देय।

5. स्तनपान अवकाश

बच्चे के 15 माह तक प्रतिदिन दो ब्रेक।

6. क्रेच सुविधा

50+ कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में अनिवार्य।

  • चार बार विजिट

  • साझा क्रेच सुविधा की अनुमति

  • क्रेच न होने पर ₹500/माह (प्रति बच्चा, अधिकतम दो)

विकास-उन्मुख प्रावधान (Pro-Growth Provisions)

1. डिजिटलीकरण

सभी रिकॉर्ड/रिटर्न इलेक्ट्रॉनिक रूप में—अनुपालन सरल, लागत कम।

2. जांच पर सीमा

PF जांच आरंभ करने की सीमा—5 वर्ष
जांच 2 वर्ष में पूरी, CPFC की अनुमति से 1 वर्ष अतिरिक्त।

3. अपील हेतु कम जमा राशि

अब केवल 25% जमा कर अपील दायर की जा सकती है (पहले 40–70%)।

4. भवन निर्माण उपकर—स्व-मूल्यांकन

उपकर संग्रह सरल व तेज़ होगा।

5. प्लांटेशन हेतु ESIC

प्लांटेशन मालिक स्वेच्छा से ESIC अपना सकेंगे।

6. अपराधमुक्तिकरण (Decriminalization)

  • उल्लंघन सुधार हेतु 30 दिन की नोटिस अवधि

  • 13 अपराधों में जेल के स्थान पर जुर्माना

  • 7 अपराध कंपाउंडेबल

7. निरीक्षक-कम-फैसिलिटेटर

धारा 72—

  • ऑनलाइन, रैंडम निरीक्षण

  • सहयोगात्मक, मार्गदर्शक दृष्टिकोण

  • इंस्पेक्टर राज में कमी

8. अपराधों का संयोजन (Compounding)

पहली बार—

  • केवल जुर्माने से निपटान

  • अधिकतम जुर्माने का 50%/75% देकर मामला सुलझाया जा सकता है

  • मुकदमों में कमी

रोज़गार-उन्मुख प्रावधान (Pro-Employment Provisions)

1. करियर सेंटर

  • पंजीकरण, मार्गदर्शन, जॉब-मैचिंग

  • डिजिटल व फिजिकल—दोनों प्लेटफॉर्म

  • नियोक्ताओं द्वारा रिक्तियों की अनिवार्य सूचना

2. फिक्स्ड-टर्म रोजगार

FTE कर्मचारियों को—

  • 1 वर्ष में ग्रेच्युटी

  • स्थायी कर्मचारियों जैसी सामाजिक सुरक्षा

3. श्रमिकों का सार्वभौमिक कवरेज

(a) गिग एवं प्लेटफ़ॉर्म श्रमिक—पहली बार मान्यता
(b) असंगठित/स्व-नियोजित श्रमिक—विशेष योजनाएँ

निष्कर्ष

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 नौ मौजूदा कानूनों को एकीकृत कर, संगठित–असंगठित सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करती है। यह महिलाओं की भागीदारी बढ़ाती है, अनुपालन सरल बनाती है, और “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” को प्रोत्साहित करती है।
यह संहिता विकसित भारत 2047 की दिशा में समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.