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JBIC गवर्नर का धोलेरा SIR दौरा: भारत की उभरती सेमिकॉन सिटी में प्रगतिशील अवसंरचना का अवलोकन

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जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) के गवर्नर नोबुमित्सु हयाशी ने आज गुजरात स्थित राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (NICDC) के फ्लैगशिप औद्योगिक पार्क ‘धोलेरा स्पेशल इंवेस्टमेंट रीजन (धोलेरा SIR)’ का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य भारत के पहले और उभरते सेमिकॉन सिटी में प्रगति की समीक्षा करना तथा तेजी से विकसित हो रहे ग्रीनफील्ड एवं ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक अवसंरचना पारिस्थितिकी तंत्र का आकलन करना था। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है और धोलेरा देश का सबसे महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड स्मार्ट औद्योगिक शहर बनकर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

धोलेरा SIR की विश्व-स्तरीय अवसंरचना की सराहना

दौरे के दौरान JBIC गवर्नर हयाशी ने धोलेरा SIR की विश्व-स्तरीय योजना, मजबूत अवसंरचना तैयारियों और उत्कृष्ट प्रशासनिक ढांचे की सराहना की। उन्होंने भारत की सेमीकंडक्टर विकास यात्रा पर विश्वास व्यक्त करते हुए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट की तेज प्रगति को नोट किया। उन्होंने कहा कि धोलेरा की एकीकृत प्रणालियाँ, स्केलेबल यूटिलिटीज और भविष्य-तैयार अवसंरचना उसे उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निवेशों के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी गंतव्य बनाती हैं।

ABCD बिल्डिंग और प्रमुख यूटिलिटी सुविधाओं का निरीक्षण

दौरा ABCD बिल्डिंग से शुरू हुआ, जो धोलेरा का प्रशासन एवं कमांड सेंटर है। यहाँ प्रतिनिधिमंडल ने एकीकृत योजना ढांचा, डिजिटल गवर्नेंस आर्किटेक्चर और केंद्रीकृत यूटिलिटी प्रबंधन प्रणालियों की समीक्षा की।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने इंस्टीट्यूटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), एक्सपीरियंस सेंटर और टोरेंट पावर के 400 kV सबस्टेशन जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का भ्रमण किया, जो उन्नत विनिर्माण के लिए धोलेरा की मजबूत आधारभूत संरचना को दर्शाती हैं।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के 91,000 करोड़ रुपये के सेमीकॉन फैब प्लांट का अवलोकन

धोलेरा SIR में स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट में JBIC प्रतिनिधिमंडल ने टाटा समूह नेतृत्व के साथ बैठक की और 163-एकड़ में विकसित किए जा रहे कारखाने की प्रगति का जायजा लिया।
यह भारत का पहला व्यावसायिक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट है, जो ₹91,000 करोड़ के निवेश से PSMC (ताइवान) के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है।

यह प्लांट 2027 से उत्पादन शुरू करेगा और 110 nm से 28 nm नोड्स तक प्रति माह 50,000 वेफर्स का निर्माण करेगा। इससे 20,000 से अधिक उच्च-कुशल रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
गवर्नर हयाशी ने उम्मीद जताई कि यह परियोजना भारत–जापान तकनीकी सहयोग को नए आयाम देगी।

NICDC और DICDL ने प्रस्तुत किए धोलेरा के प्रमुख फीचर्स

NICDC के CEO एवं MD रजत कुमार सैनी ने धोलेरा SIR की प्रमुख विशेषताओं पर प्रस्तुति दी। DICDL के MD  कुलदीप आर्या एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

भारत के NICDC औद्योगिक शहरों में जापानी कंपनियों का बढ़ता निवेश

जापानी कंपनियों ने NICDC के विभिन्न औद्योगिक नगरों में 116 एकड़ से अधिक क्षेत्र में ₹1,700 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है।
नवीनतम निवेशकों में NX Logistics India Pvt. Ltd. शामिल है, जिसने AURIC (शेंद्रा) में 12.86 एकड़ से विस्तार करते हुए अब धोलेरा में भी अपनी इकाई स्थापित की है। इससे ₹86 करोड़ का निवेश और 400 नौकरियाँ पैदा होंगी।

अन्य जापानी कंपनियाँ—Nippon Express, Nagata, Sango और Fuji Silvertech—भी अपने परिचालन का विस्तार कर रही हैं।

उच्च स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों का केंद्र बन रहा है धोलेरा

हाल के महीनों में धोलेरा ने JBIC, JETRO, JICA, जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एवं दर्जनों अन्य कंपनियों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी की है।
यह भारत–जापान औद्योगिक सहयोग में धोलेरा की केंद्रीय भूमिका को प्रदर्शित करता है।

धोलेरा में विकसित हो रहा है संपूर्ण स्मार्ट औद्योगिक शहर

धोलेरा में सामाजिक अवसंरचना भी तेजी से विकसित हो रही है:

  • 200-बेड का मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल

  • एकीकृत विद्यालय

  • गेस्ट हाउस एवं कॉर्पोरेट होटल

  • अंतरराष्ट्रीय टेंट सिटी

  • मल्टी-क्यूज़ीन फूड कोर्ट

  • अग्निशमन स्टेशन

  • निजी डेवलपर्स द्वारा आवासीय व वाणिज्यिक परियोजनाएँ

धोलेरा का Activation Area एक आधुनिक मिश्रित-उपयोग परिसर के रूप में उभर रहा है।

JBIC गवर्नर हयाशी का यह दौरा न केवल धोलेरा की वैश्विक प्रतिष्ठा को मजबूत करता है, बल्कि भारत–जापान सेमीकंडक्टर सहयोग और वैश्विक वैल्यू चेन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करता है।

डीआरडीओ नई दिल्ली में आयोजित ‘उदीयमान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ESTIC) 2025’ में भाग ले रहा है

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) नई दिल्ली के भारत मंडपम में 3 से 5 नवंबर, 2025 तक आयोजित हो रहे Emerging Science, Technology and Innovation Conclave (ESTIC) 2025 में भाग ले रहा है। इस वर्ष सम्मेलन का विषय है – ‘विकसित भारत 2047: सतत नवाचार, तकनीकी प्रगति और सशक्तिकरण का मार्गदर्शन’, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 नवंबर, 2025 को किया। यह सम्मेलन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के मार्गदर्शन में 13 मंत्रालयों एवं विभागों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री ने ₹1 लाख करोड़ अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना कोष (RDI Scheme Fund) का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य निजी क्षेत्र आधारित अनुसंधान एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना और भारत को वैश्विक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में विकसित करना है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर यह भी कहा कि सरकार निजी क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

सम्मेलन में अग्रणी वैज्ञानिकों के व्याख्यान, पैनल चर्चाएँ, प्रस्तुतियाँ और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी आयोजित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और युवा नवोन्मेषकों के बीच सहयोग को सशक्त बनाना और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करना है।

मुख्य आयोजकों में से एक के रूप में DRDO ‘इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण’ पर थीमैटिक सत्र का नेतृत्व कर रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं DRDO अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत 5 नवंबर, 2025 को इस विषय पर तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करेंगे।

सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीकी पारिस्थितिकियों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो स्वास्थ्य सेवा, संचार, परिवहन, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में प्रमुख प्रणालियों को संचालित करते हैं। DRDO ने सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें 4-इंच सिलिकॉन कार्बाइड वेफर्स के स्वदेशी उत्पादन और गैलियम नाइट्राइड हाई इलेक्ट्रॉन मोबिलिटी ट्रांजिस्टर (HEMT) को 150 वॉट तक निर्मित करने की क्षमता शामिल है।

पैनल चर्चाओं में भाग लेने वाले अन्य DRDO अधिकारियों में विशिष्ट वैज्ञानिक एवं महानिदेशक (माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज, कम्प्यूटेशनल सिस्टम्स एवं साइबर सिस्टम्स) श्रीमती सुमा वरुघीस, डिफेंस मेटालर्जिकल रिसर्च लेबोरेटरी, हैदराबाद के निदेशक डॉ. रामलिंगम बालामुरलीकृष्णन, और सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी, दिल्ली की वैज्ञानिक-जी डॉ. सोमन महाजन शामिल हैं।

ESTIC 2025 में शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और सरकार से जुड़े 3,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं, जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, नवप्रवर्तक और नीति निर्माता भी सम्मिलित हैं। सम्मेलन में 11 प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा हो रही है, जिनमें उन्नत सामग्री और विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बायो-निर्माण, ब्लू इकोनॉमी, डिजिटल संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण, उभरती कृषि प्रौद्योगिकियाँ, ऊर्जा, पर्यावरण और जलवायु, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकी, क्वांटम विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं।

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