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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर पीएम मोदी का संदेश: पोखरण परीक्षण ने दुनिया को दिखाया भारत का सामर्थ्य

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प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए वर्ष 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण को भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य और आत्मगौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत, समर्पण और अदम्य संकल्प का परिणाम थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज तकनीक आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बन चुकी है। तकनीकी विकास देश में नवाचार को गति दे रहा है, नए अवसर पैदा कर रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में भारत की प्रगति को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का निरंतर प्रयास प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, अनुसंधान को बढ़ावा देने और देशहित में उपयोगी समाधान विकसित करने पर केंद्रित है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पोखरण परमाणु परीक्षण को याद करते हुए कहा कि 11 मई 1998 को हुए इस ऐतिहासिक परीक्षण ने पूरी दुनिया को भारत की अद्भुत क्षमताओं से परिचित कराया था। उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों को देश के गौरव और स्वाभिमान का सच्चा शिल्पी बताया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया—

“अग्निर्मूर्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयम्।
अपां रेतांसि जिन्वति॥”

प्रधानमंत्री ने इसका अर्थ बताते हुए कहा कि अग्नि स्वर्ग की सर्वोच्च शक्ति और पृथ्वी पर ऊर्जा का मूल स्रोत है। यही ऊर्जा सूक्ष्मतम कणों में छिपी शक्ति को जागृत कर सृष्टि में गति और ऊर्जा का संचार करती है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर अपने संदेश में कहा कि भारत तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और आने वाले समय में यह देश के विकास का सबसे बड़ा आधार बनेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने चंडीगढ़ में आयोजित होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 2025 की तैयारियों की उच्च-स्तरीय समीक्षा की

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 2025 की तैयारियों की समीक्षा हेतु एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह महोत्सव 6 से 9 दिसंबर 2025 तक चंडीगढ़ में आयोजित किया जाएगा।

29 सितंबर 2025 को हुई पिछली समीक्षा बैठक की प्रगति पर आगे बढ़ते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस वर्ष का IISF भारत की वैज्ञानिक सोच और नवाचार की दिशा में हुए परिवर्तनकारी बदलाव को प्रदर्शित करेगा, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संभव हुआ है।

उन्होंने कहा, “आज विज्ञान नीतियों का नेतृत्व कर रहा है। पहले विज्ञान नीतियों का इंतजार करता था, लेकिन अब नीतियाँ विज्ञान और प्रौद्योगिकी द्वारा निर्देशित हो रही हैं।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत ने विज्ञान-आधारित शासन (Science-led Governance) की दिशा में निर्णायक कदम उठाए हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार अब नियंत्रक की बजाय एक सहायक (Facilitator) की भूमिका निभा रही है, जहाँ निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और युवा नवाचारकर्ता डीप टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी और स्वच्छ ऊर्जा नवाचारों को आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि IISF 2025 भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों का उत्सव होगा — जिसमें मंत्रालयों, अकादमिक संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स की भागीदारी रहेगी — और यह आत्मनिर्भर भारत की भावना को सशक्त रूप से प्रदर्शित करेगा।

मंत्री ने बताया कि इस वर्ष का IISF भारत की उन उपलब्धियों को उजागर करेगा जो राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के प्रमुख स्तंभ बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि IISF 2025 न केवल वैज्ञानिक संवाद का मंच होगा, बल्कि यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी उत्सव बनेगा।

बैठक में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, पृथ्वी विज्ञान सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत कुमार मोहंती, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोकले, तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव एवं सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी उपस्थित रहीं।

इसके अतिरिक्त विज्ञान भारती (Vijnana Bharati) के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।

चंडीगढ़ में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2025 की तैयारियों की समीक्षा

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यहाँ आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चंडीगढ़ में होने वाले इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) 2025 की तैयारियों की समीक्षा की। यह महोत्सव पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा।

बैठक के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने लॉजिस्टिक योजनाओं, प्रदर्शनी लेआउट और विभिन्न एजेंसियों के कार्यक्रम एकीकरण की समीक्षा की और सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे विद्यालयों और अभिभावकों को लक्षित करते हुए सतत जन-जागरूकता अभियान चलाएँ, ताकि महोत्सव में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी संबद्ध मंत्रालयों को हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन के साथ मिलकर स्कूल विज्ञान मेले, मोबाइल प्रदर्शनी, क्षेत्रीय रोड शो और स्थानीय मीडिया प्रचार जैसे कार्यक्रम पहले से शुरू करने होंगे।

तैयारियों के हिस्से के रूप में मंत्री ने नोडल विभाग को प्रत्येक जिले में “विज्ञान संचार केंद्र” (Science Communication Hubs) स्थापित करने और युवा एंबेसडरों को नियुक्त कर शहर के सार्वजनिक स्थलों पर प्रारंभिक टीज़र इंस्टॉलेशन लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि स्टार्टअप बूथ और नागरिक-विज्ञान प्रदर्शनी को महोत्सव स्थल के डिज़ाइन में शामिल किया जाए, जिसमें छात्र नवाचार क्षेत्र, इंटरैक्टिव प्रदर्शनी और जन-भागीदारी ट्रैक भी हों।

डॉ. सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि स्टार्टअप्स को केवल सहायक भूमिका में नहीं, बल्कि महोत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने विज्ञान सचिवों से शीघ्र स्वीकृतियाँ, मंत्रालयों के बीच समन्वय और मीडिया साझेदारियाँ सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि कार्यक्रम का सफल आयोजन हो सके।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि यह महोत्सव केवल वैज्ञानिक प्रगति का प्रदर्शन भर न होकर एक भागीदारीपूर्ण जन-उत्सव बने, जो विज्ञान, छात्रों और समाज के बीच सेतु का काम करे। जागरूकता अभियानों पर जोर इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार इस बार इसे आमजन, विशेषकर स्कूली बच्चों और अभिभावकों के लिए भी एक अनिवार्य आयोजन बनाने को प्रतिबद्ध है।

बड़े परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो IISF देश के सबसे बड़े विज्ञान जन-जागरूकता मंचों में से एक बन चुका है, जिसमें प्रदर्शनी, युवा मंच, स्टार्टअप मंडप और इंटरैक्टिव साइंस थियेटर जैसे कार्यक्रमों का समावेश है। चंडीगढ़ में होने वाला 2025 का आयोजन तभी सफल होगा जब प्रदर्शनी के साथ-साथ जमीनी स्तर पर जागरूकता और स्कूल समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित हो।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारियों में प्रो. अजय कुमार सूद (भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार), डॉ. एम. रविचंद्रन (सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय), डॉ. अजीत कुमार मोहंती (सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग), प्रो. अभय करंदीकर (सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग), डॉ. राजेश गोखले (सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग) और डॉ. एन. कलैसेल्वी (सचिव, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग और महानिदेशक, सीएसआईआर) शामिल थे। विज्ञान भारती के प्रतिनिधि भी बैठक में उपस्थित रहे।


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