Media24Media.com: #SchoolChildren

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #SchoolChildren. Show all posts
Showing posts with label #SchoolChildren. Show all posts

गरियाबंद में जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे, 20 फीट ऊंची लोहे की सीढ़ी बनी मजबूरी

No comments Document Thumbnail

गरियाबंद/मैनपुर- शिक्षा को बच्चों का मौलिक अधिकार माना जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड में स्कूली बच्चों के सामने पढ़ाई तक पहुंचने के लिए ही जान जोखिम में डालने की मजबूरी खड़ी हो गई है। यहां देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर वर्षों से अधूरा पड़ा पुल बच्चों के लिए परेशानी और खतरे का बड़ा कारण बन गया है।

मानसून के दौरान पैरी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी पार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आसपास की बस्तियों के दर्जनों बच्चे स्कूल जाने के लिए अधूरे पुल के एक पिलर पर लगी करीब 20 फीट ऊंची और संकरी लोहे की सीढ़ी का सहारा लेने को मजबूर हैं। पीठ पर भारी स्कूल बैग और नीचे तेज बहाव वाली नदी—इस खतरनाक रास्ते से गुजरना बच्चों की रोजमर्रा की मजबूरी बन गया है।

छह साल से अधूरा पड़ा है पुल

मैनपुर तहसील मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर करीब 300 मीटर लंबे पुल का निर्माण पिछले लगभग 5-6 वर्षों से चल रहा है। लंबे समय के बावजूद पुल का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है और कई बार शिकायत करने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

पुल का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में नदी पार करने का सुरक्षित रास्ता बंद हो जाता है। यही वजह है कि बच्चों को अधूरे पुल के पिलर और उससे जुड़ी लोहे की सीढ़ी के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है।

एक गलती और हो सकता है बड़ा हादसा

इस पूरे रास्ते में सबसे बड़ा खतरा बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। लोहे की सीढ़ी संकरी है और बारिश के दौरान फिसलन भी बढ़ जाती है। इसके अलावा निर्माणाधीन पुल के कई हिस्सों में लोहे के सरिए बाहर निकले हुए बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन सरियों से चोट लगने का खतरा भी बना रहता है।

जब बच्चे सीढ़ी से ऊपर-नीचे होते हैं, तो उनके परिजनों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ जाती है। जरा सा पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने पर नीचे बह रही नदी में गिरने का गंभीर खतरा है।

बारिश में और भयावह हो जाती है स्थिति

पैरी नदी सामान्य दिनों में अपेक्षाकृत शांत रहती है। गर्मी के मौसम में नदी का जलस्तर काफी कम हो जाने से कई स्थानों पर लोग आसानी से आवागमन कर लेते हैं। लेकिन मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण नदी उफान पर आ जाती है और बच्चों के लिए यह रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में बच्चों के स्कूल जाने की चिंता अभिभावकों को लगातार सताती रहती है। इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए वे इस जोखिम भरे रास्ते से स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।

पहले भी दिए जा चुके हैं निर्माण पूरा करने के निर्देश

जानकारी के मुताबिक, पुल निर्माण में देरी को लेकर ग्रामीणों की शिकायत के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले भी निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। निर्माण एजेंसी को काम में तेजी लाने और निर्धारित समय में पुल पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। ग्रामीणों के मुताबिक, इसके बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका।

अब बच्चों के इस खतरनाक सफर का वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में है और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है।

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

लंबे समय से पुल का निर्माण पूरा नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था नहीं की गई और पुल का निर्माण शीघ्र पूरा नहीं हुआ, तो वे आंदोलन और नेशनल हाईवे-130C पर चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।

प्रशासन ने समाधान का दिया भरोसा

मामला सामने आने के बाद प्रशासन भी हरकत में आया है। रिपोर्टों के अनुसार गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकालने की बात कही है। प्रशासन की ओर से बच्चों के लिए सुरक्षित अस्थायी आवागमन की व्यवस्था और अधूरे पुल के निर्माण की समीक्षा किए जाने की बात सामने आई है।

सबसे बड़ा सवाल—आखिर कब खत्म होगा बच्चों का यह जोखिम?

एक ओर सरकार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मैनपुर क्षेत्र के बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। यह मामला सिर्फ अधूरे पुल का नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा तक उनकी पहुंच और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा गंभीर सवाल है।

अब ग्रामीणों और अभिभावकों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। जरूरत इस बात की है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए तत्काल व्यवस्था की जाए और वर्षों से अधूरे पड़े पुल का निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए।

प्राथमिक विद्यालय सलिहाभांठा के बच्चों ने निकाली भव्य कांवड़ यात्रा, जगह-जगह हुआ स्वागत

No comments Document Thumbnail

पटेवा- सावन माह के पावन अवसर पर प्राथमिक विद्यालय सलिहाभांठा के बच्चों ने श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ भव्य कांवड़ यात्रा निकाली। विद्यालय प्रबंधन समिति के मार्गदर्शन तथा प्रधान पाठक योगेश निर्मलकर एवं शिक्षक रामेश्वर ढीढी के नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरे गांव में उत्साह का माहौल बना दिया।

कांवड़ यात्रा के लिए बच्चों ने आकर्षक रूप से सजी कांवड़ लेकर यात्रा प्रारंभ की। इस दौरान बच्चे भगवान शिव-पार्वती तथा विभिन्न गणों के आकर्षक वेशभूषा में नजर आए। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुति और धार्मिक उत्साह ने ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित किया।

जुन्ना तालाब से जल लेकर पहुंचे शिव मंदिर

विद्यालय से प्रारंभ हुई कांवड़ यात्रा जुन्ना तालाब पहुंची, जहां बच्चों ने विधि-विधान से जल लिया। इसके बाद कांवड़ यात्री बच्चे तालाब स्थित शिव मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना के बाद गांव के मुख्य शिव मंदिर की ओर रवाना हुए।

पूरे रास्ते बच्चों में गजब का उत्साह देखने को मिला। कांवड़ यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह बच्चों का स्वागत किया। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया, वहीं अनेक ग्रामीण उत्साहपूर्वक बच्चों के साथ नाचते-गाते हुए यात्रा में शामिल हुए। इससे पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।

मुख्य शिव मंदिर में किया जलाभिषेक

कांवड़ यात्रा गांव के मुख्य शिव मंदिर पहुंची, जहां बच्चों ने भगवान शिव को पवित्र जल अर्पित कर जलाभिषेक किया। इस दौरान बच्चों ने श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की आराधना की और गांव की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

विद्यालय द्वारा आयोजित इस पहल को ग्रामीणों और पालकों का भी भरपूर सहयोग मिला। कार्यक्रम ने बच्चों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ उनमें सामूहिकता, अनुशासन, सेवा और संस्कार की भावना विकसित करने का संदेश दिया।

विद्यालय में हुई भजन संध्या

कांवड़ यात्रा पूरी करने के बाद सभी बच्चे वापस विद्यालय पहुंचे। यहां पालकों और ग्रामीणों के साथ भजन संध्या का आयोजन किया गया। भक्ति गीतों और भजनों से विद्यालय परिसर का वातावरण भक्तिमय हो गया। बच्चों, पालकों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भजन संध्या में सहभागिता की।

कार्यक्रम के समापन पर पालकों और गांववासियों के सहयोग से प्रसाद वितरण किया गया। बच्चों सहित कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और आगंतुकों को प्रसाद वितरित किया गया।

ग्रामीणों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन

कांवड़ यात्रा को सफल बनाने में विद्यालय प्रबंधन समिति, पालकों, शिक्षकों और ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में पिरीत राम साहू, पंचराम ध्रुव, भोजराम साहू, योगीराम साहू, बैगा नंद ध्रुव, भुनेश्वर साहू, भीम यादव, कार्तिक सिन्हा, उमेश सिन्हा, पूर्णिमा यादव, देवकी सिन्हा, बरतनीन दीवान, प्रमिला ध्रुव, बिसनी दीवान, हेमलता ध्रुव, तिलक यादव, भुवन साहू, तिलक साहू, उमेन्द्र दीवान, भूपेंद्र मनोज साहू, सुकदेव दीवान, लीलेश्वर साहू एवं विष्णु दीवान का विशेष सहयोग रहा।

विद्यालय परिवार ने सभी पालकों, ग्रामीणों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों को अपनी भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों की सहभागिता और ग्रामीणों के उत्साह से कांवड़ यात्रा पूरे गांव के लिए यादगार बन गई।


https://youtu.be/weoLy9hhZTs

पीएम पोषण मिलेट चिक्की योजना पर हाईकोर्ट सख्त, केवल सात जिलों तक सीमित रखने पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पीएम पोषण मिलेट चिक्की योजना को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि यह योजना केवल सात जिलों तक ही क्यों सीमित रखी गई है, जबकि राज्य के अन्य जिलों के स्कूली बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। न्यायालय ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि योजना के सीमित दायरे के पीछे क्या कारण हैं।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि योजना का उद्देश्य स्कूली बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी पात्र विद्यार्थियों को समान रूप से इसका लाभ मिले। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि सीमित जिलों में योजना लागू होने से अन्य क्षेत्रों के बच्चों के साथ असमानता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

पीएम पोषण मिलेट चिक्की योजना के तहत विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पोषणयुक्त मिलेट (श्री अन्न) से बनी चिक्की उपलब्ध कराई जाती है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना, कुपोषण को कम करना और मोटे अनाज (मिलेट) के उपयोग को बढ़ावा देना है।

याचिका में योजना को केवल सात जिलों तक सीमित रखने के निर्णय पर सवाल उठाया गया था। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत यह जानना चाहती है कि योजना का विस्तार पूरे राज्य में क्यों नहीं किया गया और अन्य जिलों के विद्यार्थियों को इससे वंचित रखने का आधार क्या है।

अब राज्य सरकार को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि योजना के चयनित जिलों में ही लागू होने के पीछे प्रशासनिक, वित्तीय या अन्य क्या कारण हैं तथा भविष्य में इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की क्या योजना है।

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद यह मामला शिक्षा और पोषण योजनाओं में समान अवसर सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.