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CSIR-NIScPR ने ‘विज्ञान संचार और उभरते रुझान’ पर दो दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया

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सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR), नई दिल्ली ने 4–5 अगस्त 2026 को CSIR इंटीग्रेटेड स्किल इनिशिएटिव (फेज-III) के अंतर्गत ‘विज्ञान संचार और उभरते रुझान’ विषय पर दो दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया।

संस्थान के प्रशिक्षण प्रभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों, मीडिया और उद्योग जगत से 30 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण को अनुभव-आधारित (Experiential Learning) बनाया गया, जिसमें विशेषज्ञ व्याख्यान, संवादात्मक चर्चाएं और व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से आधुनिक विज्ञान संचार और उभरती प्रौद्योगिकियों की व्यापक जानकारी दी गई।

विज्ञान संचार में जिम्मेदारी और एआई की बढ़ती भूमिका पर जोर

कार्यक्रम का उद्घाटन CSIR-NIScPR की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि संस्थान लंबे समय से देश में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने और विज्ञान संचार को मजबूत करने के लिए कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जिम्मेदार विज्ञान संचार, डिजिटल प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिससे वैज्ञानिक जानकारी को अधिक विश्वसनीय, प्रभावी और व्यापक बनाया जा सकता है।

विज्ञान और समाज के बीच सेतु है विज्ञान संचार

CSIR-NIScPR के प्रशिक्षण प्रभाग के प्रमुख मुकेश ए. पुंड ने स्वागत भाषण में कहा कि विज्ञान संचार वैज्ञानिक अनुसंधान और समाज के बीच की दूरी को कम करने का प्रभावी माध्यम बन चुका है।

कार्यक्रम की नोडल प्रधान अन्वेषक (PI) मीताली भारती ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया और पूरे कार्यक्रम का संचालन किया। वहीं पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. परमानंद बर्मन ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा शैक्षणिक सत्रों का संचालन किया।

आधुनिक विज्ञान संचार के विभिन्न पहलुओं पर हुआ प्रशिक्षण

दो दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को विज्ञान संचार के विभिन्न समकालीन विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें—

  • विज्ञान संचार की मूल अवधारणाएं एवं विभिन्न प्रारूप

  • श्रोताकेंद्रित संचार रणनीतियां

  • व्यवहारिक विज्ञान (Behavioural Insights)

  • सोशल मीडिया प्रबंधन

  • पॉडकास्ट निर्माण

  • इन्फोग्राफिक्स और लघु वीडियो तैयार करना

  • विज्ञान संचार में एआई आधारित ऐप्स का उपयोग

  • नैतिकता एवं पेशेवर जिम्मेदारियां

  • विज्ञान संचार में उभरते करियर अवसर

जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में डॉ. हेमांसी और प्रियंका (अशोका विश्वविद्यालय), डॉ. परमानंद बर्मन, डॉ. वी. वी. बिनॉय (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़, बेंगलुरु), डॉ. एच. एस. सुधीरा (निदेशक, गुब्बी लैब्स), डॉ. मेहर वान तथा CSIR-NIScPR के संकाय सदस्यों ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।

प्रशिक्षण की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए प्रतिभागियों की अपेक्षाओं, सीखने के परिणामों और अनुभवों का मूल्यांकन पूर्व एवं पश्चात प्रशिक्षण सर्वेक्षण के माध्यम से किया गया।

प्रतिभागियों को प्रदान किए गए प्रमाणपत्र

समापन सत्र में मुकेश ए. पुंड और मीताली भारती ने प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने पर बधाई दी और उनसे अपने-अपने संस्थानों में साक्ष्य-आधारित एवं जिम्मेदार विज्ञान संचार को बढ़ावा देने के लिए अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग करने का आह्वान किया।

CSIR इंटीग्रेटेड स्किल इनिशिएटिव के सह-प्रधान अन्वेषक सलीम अंसारी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वय किया। कार्यक्रम के सफल समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।


भारत ने इंटरनेशनल ओलंपियाड 2026 में रचा इतिहास, 12 गोल्ड और 7 सिल्वर मेडल जीतकर दुनिया में लहराया तिरंगा

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नई दिल्ली- भारत के युवा वैज्ञानिकों और गणितज्ञों ने वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। राष्ट्रीय ओलंपियाड कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित भारतीय छात्रों ने 12 स्वर्ण (Gold) और 7 रजत (Silver) पदक जीतकर अब तक की सबसे शानदार उपलब्धियों में से एक हासिल की। खास बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय भौतिकी (Physics) और रसायन विज्ञान (Chemistry) ओलंपियाड में भारतीय टीम ने सभी स्वर्ण पदक जीतकर संयुक्त रूप से विश्व में पहला स्थान प्राप्त किया।

इस ऐतिहासिक सफलता पर परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy-DAE) ने छात्रों, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत की 'युवा शक्ति' और देश में वैज्ञानिक प्रतिभाओं को निखारने के लिए वर्षों से किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम है।

चार अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन

वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भारतीय टीम का प्रदर्शन इस प्रकार रहा—

  • अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (IPhO) – सभी 5 स्वर्ण पदक, संयुक्त रूप से विश्व में प्रथम स्थान।

  • अंतरराष्ट्रीय रसायन विज्ञान ओलंपियाड (IChO) – सभी 4 स्वर्ण पदक, संयुक्त रूप से विश्व में प्रथम स्थान।

  • अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड (IBO) – 1 स्वर्ण और 3 रजत पदक।

  • अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड (IMO) – 2 स्वर्ण और 4 रजत पदक।

इस तरह भारत ने कुल 12 गोल्ड और 7 सिल्वर पदक जीतकर वैश्विक मंच पर अपनी वैज्ञानिक और गणितीय प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

DAE अध्यक्ष ने दी बधाई

परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव एवं परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सफलता छात्रों की कड़ी मेहनत, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के समर्पण तथा दशकों में विकसित मजबूत संस्थागत व्यवस्था का परिणाम है।

HBCSE की अहम भूमिका

इस उपलब्धि के पीछे होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र (HBCSE) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के इस राष्ट्रीय केंद्र को परमाणु ऊर्जा विभाग का सहयोग प्राप्त है। HBCSE देशभर से प्रतिभाशाली छात्रों का चयन कर उन्हें चरणबद्ध प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी कराता है।

HBCSE के निदेशक प्रो. अर्नब भट्टाचार्य ने कहा कि विभाग के निरंतर सहयोग के कारण भारत का ओलंपियाड कार्यक्रम विश्व के सबसे सम्मानित कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि छात्रों की यह सफलता विज्ञान और गणित में उत्कृष्टता की संस्कृति को और मजबूत करेगी।

दशकों की मेहनत का परिणाम

परमाणु ऊर्जा विभाग का कहना है कि उसका योगदान केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। विभाग ने HBCSE और TIFR के माध्यम से वैज्ञानिकों, शिक्षकों और विशेषज्ञों का एक मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया है, जिसने वर्षों से देश की प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

DAE ने सभी पदक विजेता छात्रों, टीम लीडर्स, मेंटर्स, वैज्ञानिक पर्यवेक्षकों, शिक्षकों और सहयोगी संस्थानों को बधाई देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), अंतरिक्ष विभाग (DOS) और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग की भी सराहना की।

भारत के वैज्ञानिक भविष्य की नई उड़ान

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की यह ऐतिहासिक सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत वैज्ञानिक शिक्षा और प्रतिभा विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि न केवल देश के युवाओं को प्रेरित करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की महाशक्ति बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026: वैज्ञानिक सोच और नवाचार से सतत विकास का संकल्प

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33 जिलों के जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों का राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण सम्पन्न

'साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी' विषय पर स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान विकसित करने पर जोर

रायपुर- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीकॉस्ट) द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के अंतर्गत जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों के लिए एक दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार को रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में किया गया। 

कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेशभर के शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की नई थीम, परियोजना निर्माण प्रक्रिया, वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धति तथा मूल्यांकन प्रणाली से अवगत कराना था, ताकि अधिकाधिक विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं पर आधारित वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार कर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। कार्यशाला का आयोजन प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सोनमणी बोरा तथा महानिदेशक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में किया गया।

विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस देश का एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक कार्यक्रम है, जो 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए स्थानीय समस्याओं की पहचान करते हैं, आंकड़ों का संग्रह एवं विश्लेषण करते हैं तथा नवाचार आधारित समाधान प्रस्तुत करते हैं। ब्लॉक, जिला एवं राज्य स्तर पर चयनित बाल वैज्ञानिक राष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।

विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान क्षमता और नवाचार आधारित सोच विकसित करना

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक 'ई' एवं राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय, वैज्ञानिक 'डी' डॉ. ए. के. पाठक, वैज्ञानिक 'डी' डॉ. अमित दुबे, राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू तथा वनस्पति विज्ञान के वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. वी. के. कानूनगो कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की थीम "साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी" की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान क्षमता और नवाचार आधारित सोच विकसित करना है। उन्होंने शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं की वैज्ञानिक पहचान कर व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करें।

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की रूपरेखा और परियोजना निर्माण की जानकारी

कार्यशाला में राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की संपूर्ण रूपरेखा, पात्रता, परियोजना निर्माण की प्रक्रिया, अनुसंधान पद्धति, दस्तावेजीकरण, प्रस्तुतीकरण एवं मूल्यांकन प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक परियोजनाएं केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर स्थानीय आवश्यकताओं एवं समाजोपयोगी विषयों पर आधारित होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी विकसित हो।

स्थानीय समस्याओं पर आधारित परियोजनाओं को मिलेगा बढ़ावा

तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने इस वर्ष की थीम के विभिन्न उपविषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। इनमें R5 तकनीक (Reduce, Reuse, Recover, Redesign एवं Recycle) के माध्यम से कचरा प्रबंधन, E4 मॉडल (Explore, Experiment, Enhance एवं Evolve) के जरिए ऊर्जा संरक्षण एवं नवाचार, जल संचयन, पुनर्चक्रण एवं संरक्षण, तथा खाद्य, कृषि एवं स्वास्थ्य की स्थिरता के लिए भारतीय ज्ञान प्रणालियों के उपयोग जैसे विषय शामिल रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि इन विषयों पर विद्यार्थियों द्वारा स्थानीय समस्याओं के समाधान आधारित उत्कृष्ट वैज्ञानिक परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं।मिशन लाइफ़ की भावना से जोड़ने का आह्वान

राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की थीम और उसके विभिन्न उपविषयों का विस्तार से परिचय देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल वैज्ञानिक जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अनुसंधान, डेटा संग्रहण, विश्लेषण एवं समाधान आधारित सोच के लिए प्रेरित करना भी आवश्यक है। उन्होंने मार्गदर्शकों को वैज्ञानिक लेखन, परियोजना प्रस्तुतीकरण तथा मूल्यांकन के मानकों से अवगत कराते हुए Mission LiFE की भावना के अनुरूप अधिकाधिक विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

R5 तकनीक से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

डॉ. वी. के. कानूनगो ने अपने व्याख्यान में R5 सिद्धांतों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, अपशिष्ट में कमी, पुनः उपयोग, पुनः डिज़ाइन तथा पुनर्चक्रण की अवधारणा को अपनाकर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए दैनिक जीवन में इन सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

ऊर्जा संरक्षण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर विशेष जोर

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. आयुष खरे ने ऊर्जा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआई आधारित तकनीकों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के विकास को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार आधारित अनुसंधान करने का आह्वान किया।

वैज्ञानिक परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह

वहीं, प्रो. नमिता ब्राह्मे ने ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों तथा ऊर्जा दक्ष तकनीकों को सतत विकास की आधारशिला बताते हुए शिक्षकों से विद्यालय स्तर पर ऊर्जा ऑडिट, एलईडी अध्ययन, सौर कुकर एवं अन्य वैज्ञानिक परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को "एनर्जी एम्बेसडर" बनकर समाज में ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए।

प्रदेशभर के शिक्षक होंगे वैज्ञानिक प्रतिभाओं के मार्गदर्शक

कार्यशाला में प्रदेश के सभी 33 जिलों से जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के सफल आयोजन तथा अधिक से अधिक बाल वैज्ञानिकों को शोध एवं नवाचार आधारित परियोजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। आगामी राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में प्रदेशभर से चयनित बाल वैज्ञानिक अपनी शोध परियोजनाओं का प्रदर्शन करेंगे, जिनमें उत्कृष्ट प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों की भी सक्रिय सहभागिता रही।

56वें अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड 2026 में भारतीय छात्रों का स्वर्णिम प्रदर्शन, प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलंबिया के बुकारामांगा में आयोजित 56वें अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (International Physics Olympiad - IPhO) 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय दल के कनिष्क जैन, ऋद्धेश अनंत बेंदाले, ऋषित गर्ग, श्रेष्ठ सुरैया और स्वरित जोशी को बधाई दी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन छात्रों की यह उपलब्धि देश की युवा शक्ति (युवा शक्ति) की असीम क्षमता तथा विज्ञान और अनुसंधान के प्रति उनके समर्पण का एक और उत्कृष्ट उदाहरण है।

मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले एक दशक में भारतीय विद्यार्थियों ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के विभिन्न संस्करणों में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर लिखा:

“हमारे युवाओं का शानदार प्रदर्शन!

कोलंबिया के बुकारामांगा में आयोजित 56वें अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (IPhO) 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय दल के कनिष्क जैन, ऋद्धेश अनंत बेंदाले, ऋषित गर्ग, श्रेष्ठ सुरैया और स्वरित जोशी को हार्दिक बधाई।

उनकी यह उपलब्धि हमारी युवा शक्ति की असीम क्षमता तथा विज्ञान और अनुसंधान के प्रति उनके जुनून का एक और प्रेरणादायक उदाहरण है। यह भी अत्यंत प्रशंसनीय है कि पिछले एक दशक में हमारे विद्यार्थियों ने इस मंच के विभिन्न संस्करणों में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।”

छत्तीसगढ़ की इकलौती छात्रा, महासमुंद की बेटी का कमाल-इंटरनेशनल मून मिशन' के लिए रागनी साहू का राष्ट्रीय स्तर पर चयन

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रायपुर- महासमुंद जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए यह एक अत्यंत गर्व और ऐतिहासिक क्षण है। शासकीय आशीबाई गोलछा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद की होनहार छात्रा रागनी साहू का चयन अंतर्राष्ट्रीय चंद्र मिशन 'शक्तिसैट' (ShaktiSat) के लिए 'नेशनल फाइनलिस्ट' के रूप में हुआ है। इस प्रतिष्ठित वैश्विक अभियान की सूची में जगह बनाने वाली रागनी पूरे छत्तीसगढ़ राज्य से चुनी गईं इकलौती छात्रा हैं।

देशभर से चुनी गईं सिर्फ 20 प्रतिभाएं

इस वैश्विक अभियान के तहत पूरे भारत से कड़े राष्ट्रीय मूल्यांकन और साक्षात्कार (इंटरव्यू) के बाद 'केवल 20 राष्ट्रीय फाइनलिस्ट' का चयन किया गया है, जिसमें रागनी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए अपना स्थान पक्का किया है। रागनी ने वर्ष 2025 में अपने स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से इस मिशन में पंजीयन कराया था। चयन प्रक्रिया के दौरान उन्होंने लगभग 120 घंटे की ऑनलाइन प्रशिक्षण श्रृंखला के अंतर्गत 21 विस्तृत मॉड्यूल तथा 550 से अधिक स्पेस, सैटेलाइट, विज्ञान, नवाचार (इन्नोवेशन) और इंजीनियरिंग आधारित लेसन सफलतापूर्वक पूरे किए।

108 देशों के छात्र मिलकर बनाएंगे चंद्र उपग्रह

'मिशन शक्तिसैट' एक अंतर्राष्ट्रीय चंद्र सैटेलाइट मिशन है, जिसमें भारत के अलावा अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस सहित विश्व के 108 देशों के छात्र-छात्राएं हिस्सा ले रहे हैं। इस ऐतिहासिक मिशन के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा दो चंद्र उपग्रह (Moon Satellites) विकसित किए जाएंगे। इनमें से एक उपग्रह चंद्रमा की कक्षा (Orbit) में स्थापित होकर परिक्रमा करेगा। दूसरा रोवर चंद्रमा की सतह (Surface) पर उतरकर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा।

इसरो (ISRO) द्वारा 11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग

विद्यार्थियों द्वारा विकसित किए जा रहे इन उपग्रहों का प्रक्षेपण 11 अक्टूबर 2026 (अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस) के अवसर पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो (ISRO) द्वारा किया जाएगा। इससे पहले, रागनी साहू 22 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) में आयोजित होने वाली 8 दिवसीय नेशनल वर्कशॉप में भाग लेंगी। इस कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर होगा। यहाँ रागनी को इसरो व IN-SPACe के वैज्ञानिकों, भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और वैश्विक अंतरिक्ष विशेषज्ञों से सीधा संवाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा।

नीति आयोग से सम्बद्ध है मिशन

यह मिशन अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग से सम्बद्ध है। इस वैश्विक पहल का संचालन 'स्पेस किड्ज इंडिया' की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. केसन के नेतृत्व में किया जा रहा है, जबकि विंग कमांडर जाया तारे (रिटायर्ड) इस मिशन की भारत की राष्ट्रीय राजदूत हैं।

कलेक्टर और शिक्षा अधिकारियों ने दी बधाई

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने छात्रा रागनी साहू को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय स्कूल के प्राचार्य जी.आर. सिन्हा तथा अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी चंद्रशेखर मिथलेश के सतत मार्गदर्शन को दिया। जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. देवांगन एवं जिला मिशन समन्वयक रेखराज शर्मा ने भी रागनी को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2026 के लिए नामांकन शुरू, वैज्ञानिकों को मिलेगा बड़ा सम्मान

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नई दिल्ली- भारत सरकार ने राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (Rashtriya Vigyan Puraskar - RVP) 2026 के लिए नामांकन आमंत्रित किए हैं। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और नवप्रवर्तकों को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है।

इन पुरस्कारों का संचालन सीएसआईआर (CSIR) के अंतर्गत RVP सचिवालय द्वारा किया जाता है, जिसकी अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार करते हैं।

पुरस्कार की श्रेणियां

RVP-2026 के तहत चार प्रमुख श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे:

  • विज्ञान रत्न (Vigyan Ratna): जीवन भर के उत्कृष्ट योगदान के लिए

  • विज्ञान श्री (Vigyan Shri): विशेष योगदान के लिए

  • विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर (VY-SSB): 45 वर्ष तक के युवा वैज्ञानिकों के लिए

  • विज्ञान टीम (Vigyan Team): 3 या अधिक सदस्यों की टीम को

 किस-किस क्षेत्र में नामांकन?

नामांकन कई क्षेत्रों में आमंत्रित हैं, जैसे:

  • कृषि विज्ञान

  • परमाणु ऊर्जा

  • जैव विज्ञान

  • रसायन विज्ञान

  • रक्षा प्रौद्योगिकी

  • पृथ्वी विज्ञान

  • इंजीनियरिंग

  • पर्यावरण विज्ञान

  • गणित एवं कंप्यूटर विज्ञान

  • चिकित्सा

  • भौतिकी

  • अंतरिक्ष विज्ञान

  • तकनीक एवं नवाचार

आवेदन प्रक्रिया

  • आवेदन ऑनलाइन किए जा सकते हैं

  • पोर्टल: https://awards.gov.in

  • शुरुआत: 28 मार्च 2026

  • अंतिम तिथि: 11 मई 2026

  •  स्व-नामांकन (Self-nomination) भी स्वीकार्य है

सरकार का दृष्टिकोण

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पुरस्कार भारत में वैज्ञानिक उत्कृष्टता और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रतीक है। उन्होंने संस्थानों और व्यक्तियों से योग्य उम्मीदवारों को नामांकित करने की अपील की।

यह पहल भारत को ‘विकसित भारत’ और वैश्विक ज्ञान नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


विदेशी पत्रकारों के समक्ष भारत ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में अपनी प्रगति और वैश्विक नेतृत्व प्रदर्शित किया

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार ने 9–18 दिसंबर 2025 के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा आयोजित भारत भ्रमण पर आए मध्य एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के 40 से अधिक विदेशी मीडिया पत्रकारों के साथ एक संवादात्मक सत्र का आयोजन किया।

इस सत्र का उद्देश्य भारत की तीव्र प्रगति, उभरते वैश्विक नेतृत्व और विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को उजागर करना था।

DST के सचिव प्रो. अभय करंदीकर ने पत्रकारों को भारत की विकसित हो रही S&T इकोसिस्टम, प्रमुख राष्ट्रीय मिशन और Viksit Bharat @2047 के लिए देश की दृष्टि पर प्रस्तुति दी।

सचिव ने भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के समग्र और मिशन-चालित दृष्टिकोण पर जोर दिया, इसे "भारत की नवाचार-प्रेरित विकास को शक्ति देने वाला पूरे-सरकार इंजन" बताया। उन्होंने बताया कि मिशन-चालित कार्यक्रमों, मजबूत शोध नींव और वैश्विक सहयोगों के माध्यम से भारत भविष्य के लिए तैयार नवाचार नेता के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है।


इस प्रस्तुति के बाद एक खुली चर्चा आयोजित की गई, जिसमें निम्नलिखित क्षेत्रों पर विचार विमर्श हुआ:

  • भारत की S&T नीति सुधार और भविष्य की दिशा

  • वैश्विक साझेदारी के अवसर

  • सतत और समावेशी प्रौद्योगिकियों में भारत की नेतृत्व क्षमता

  • राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को आकार देने में नवाचार की भूमिका

DST के अतिरिक्त सचिव सुनील कुमार और DST एवं MEA के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस चर्चा में शामिल हुए।

यह दौरा अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को बेहतर समझने का अवसर प्रदान करता है और भारत के तकनीकी परिदृश्य पर अधिक सूचित वैश्विक रिपोर्टिंग के लिए रास्ते खोलता है। 

चंडीगढ़ में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2025 की तैयारियों की समीक्षा

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यहाँ आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चंडीगढ़ में होने वाले इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) 2025 की तैयारियों की समीक्षा की। यह महोत्सव पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा।

बैठक के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने लॉजिस्टिक योजनाओं, प्रदर्शनी लेआउट और विभिन्न एजेंसियों के कार्यक्रम एकीकरण की समीक्षा की और सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे विद्यालयों और अभिभावकों को लक्षित करते हुए सतत जन-जागरूकता अभियान चलाएँ, ताकि महोत्सव में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी संबद्ध मंत्रालयों को हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन के साथ मिलकर स्कूल विज्ञान मेले, मोबाइल प्रदर्शनी, क्षेत्रीय रोड शो और स्थानीय मीडिया प्रचार जैसे कार्यक्रम पहले से शुरू करने होंगे।

तैयारियों के हिस्से के रूप में मंत्री ने नोडल विभाग को प्रत्येक जिले में “विज्ञान संचार केंद्र” (Science Communication Hubs) स्थापित करने और युवा एंबेसडरों को नियुक्त कर शहर के सार्वजनिक स्थलों पर प्रारंभिक टीज़र इंस्टॉलेशन लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि स्टार्टअप बूथ और नागरिक-विज्ञान प्रदर्शनी को महोत्सव स्थल के डिज़ाइन में शामिल किया जाए, जिसमें छात्र नवाचार क्षेत्र, इंटरैक्टिव प्रदर्शनी और जन-भागीदारी ट्रैक भी हों।

डॉ. सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि स्टार्टअप्स को केवल सहायक भूमिका में नहीं, बल्कि महोत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने विज्ञान सचिवों से शीघ्र स्वीकृतियाँ, मंत्रालयों के बीच समन्वय और मीडिया साझेदारियाँ सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि कार्यक्रम का सफल आयोजन हो सके।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि यह महोत्सव केवल वैज्ञानिक प्रगति का प्रदर्शन भर न होकर एक भागीदारीपूर्ण जन-उत्सव बने, जो विज्ञान, छात्रों और समाज के बीच सेतु का काम करे। जागरूकता अभियानों पर जोर इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार इस बार इसे आमजन, विशेषकर स्कूली बच्चों और अभिभावकों के लिए भी एक अनिवार्य आयोजन बनाने को प्रतिबद्ध है।

बड़े परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो IISF देश के सबसे बड़े विज्ञान जन-जागरूकता मंचों में से एक बन चुका है, जिसमें प्रदर्शनी, युवा मंच, स्टार्टअप मंडप और इंटरैक्टिव साइंस थियेटर जैसे कार्यक्रमों का समावेश है। चंडीगढ़ में होने वाला 2025 का आयोजन तभी सफल होगा जब प्रदर्शनी के साथ-साथ जमीनी स्तर पर जागरूकता और स्कूल समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित हो।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारियों में प्रो. अजय कुमार सूद (भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार), डॉ. एम. रविचंद्रन (सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय), डॉ. अजीत कुमार मोहंती (सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग), प्रो. अभय करंदीकर (सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग), डॉ. राजेश गोखले (सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग) और डॉ. एन. कलैसेल्वी (सचिव, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग और महानिदेशक, सीएसआईआर) शामिल थे। विज्ञान भारती के प्रतिनिधि भी बैठक में उपस्थित रहे।


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