Media24Media.com: #RuralWaterSupply

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #RuralWaterSupply. Show all posts
Showing posts with label #RuralWaterSupply. Show all posts

रीवा में गहराया जल संकट, हाइड्रो फ्रैक्चरिंग से बढ़ेगी हैंडपंपों की ताकत

No comments Document Thumbnail

पीएचई टीम और नायब तहसीलदार ने ग्रामीणों के साथ बनाई कार्ययोजना; भूगर्भ वैज्ञानिक भी पहुंचे  

आरंग- भीषण गर्मी के बीच ग्राम रीवा में पेयजल की किल्लत गहरा गई है। पानी की बूंद-बूंद को तरसते ग्रामीणों की सुध लेने शुक्रवार को प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर गांव पहुंचा। 

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के अधिकारियों और मंदिर हसौद के नायब तहसीलदार ने सीधे मोर्चा संभालते हुए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से चर्चा की और संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक कार्ययोजना पेश की, जिस पर ग्रामीणों ने सहमति जताई है। गांव में दम तोड़ते जलस्तर को देखते हुए पीएचई विभाग लगातार जद्दोजहद कर रहा है। कम पानी उगलने वाले हैंडपंपों की हाइड्रो फ्रैक्चरिंग मशीनों से जांच की जा रही है, ताकि उनकी जल क्षमता को बढ़ाया जा सके। संकट की गंभीरता को देखते हुए पीएचई ने भूगर्भ विशेषज्ञों (जियोलॉजिस्ट) की टीम को मैदान में उतारा है। यह टीम गांव के भीतर भूगर्भ जल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर रही है, ताकि पानी की उपलब्धता वाले नए पॉइंट चिह्नित किए जा सकें। इस दौरान सरपंच, उपसरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


जल जीवन मिशन 2.0 को गति देने के लिए जिला कलेक्टरों के 8वें पेयजल संवाद का आयोजन

No comments Document Thumbnail

जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों का 8वां पेयजल संवाद आयोजित किया। इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर/उपायुक्त तथा राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के जल जीवन मिशन (JJM) के मिशन निदेशक शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के कार्यान्वयन को तेज करना और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना था।

इस संवाद की अध्यक्षता DDWS के सचिव अशोक के.के. मीना ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन तथा DDWS के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

सचिव ने अपने संबोधन में बताया कि 2019 में शुरू हुए जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप और सामुदायिक स्रोतों पर निर्भरता को घटाकर घर-घर नल जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में बड़ी प्रगति हुई है। कोविड काल की चुनौतियों के बावजूद मिशन ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और अब इसे दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है। वर्तमान में लगभग 81% ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन उपलब्ध है।

उन्होंने स्थिरता (Sustainability) पर जोर देते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे का निर्माण केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से हुआ है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक कार्यक्षमता स्थानीय शासन पर निर्भर करती है। JJM 2.0 के तहत गांव के भीतर की जल आपूर्ति व्यवस्था ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएगी, जबकि बड़े ढांचे राज्य सरकारों के पास रहेंगे। ग्राम पंचायतों को स्थानीय सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करना होगा और ग्राम सभाओं के माध्यम से समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

उन्होंने जिला स्तर पर सेवा सुधार के लिए DWSM बैठकों के महत्व पर भी जोर दिया और जिला कलेक्टरों से हर महीने नियमित बैठकें करने, पेयजल और स्वच्छता सेवाओं की समीक्षा करने तथा विवरण डैशबोर्ड पर अपलोड करने का आग्रह किया।

सचिव ने यह भी बताया कि 1 अप्रैल 2024 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के क्रियान्वयन में जिला कलेक्टरों की जिम्मेदारी बढ़ गई है, जिसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जा रही है।

अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन ने कहा कि JJM 2.0 और अन्य सुधारों के तहत जिला स्तर के नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर मिशन के लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन, समन्वय और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने आगामी 22 मई 2026 को होने वाली जिला कलेक्टरों की बैठक में पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया, जिसमें JJM 2.0 और SBM-G के तहत प्राथमिक कार्यों पर दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

परियोजना निगरानी और सुधार प्रणाली पर प्रस्तुति

बैठक में सुजलम भारत PM गति शक्ति मोबाइल ऐप के प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग मॉड्यूल पर प्रस्तुति दी गई, जिसके माध्यम से जल जीवन मिशन की योजनाओं की निर्माण, परीक्षण, कमीशनिंग और हैंडओवर तक की निगरानी की जा सकती है।

इसके साथ ही व्यापक कार्यान्वयन और सुधार योजना (CIRP) फ्रेमवर्क पर भी प्रस्तुति दी गई, जिसमें भौतिक प्रगति, वित्तीय प्रबंधन, जल गुणवत्ता, शासन सुधार और डिजिटल निगरानी को शामिल किया गया है।

जिलों द्वारा सर्वोत्तम प्रथाओं की प्रस्तुति

नागपुर (महाराष्ट्र):

जल संकट वाले क्षेत्र में सोलर आधारित पंप और वर्षा जल संचयन से 24 घंटे जल आपूर्ति सुनिश्चित की गई, जिससे लागत में भारी कमी आई।

कोरापुट (ओडिशा):

पहाड़ी क्षेत्रों में स्प्रिंग आधारित प्रणाली, सोलर योजनाएं और डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से जल आपूर्ति मजबूत की गई।

कोल्लम (केरल):

100% मीटरिंग, 24 घंटे शिकायत निवारण प्रणाली और 24 घंटे जल आपूर्ति प्रणाली लागू की गई।

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश):

नदी पुनर्जीवन, तालाब संरक्षण और समुदाय आधारित जल संरक्षण अभियानों के माध्यम से जल स्तर में सुधार किया गया।

पाली (राजस्थान):

जल संकट से निपटने के लिए भूजल और सतही जल के संयोजन, वर्षा जल संचयन और रिचार्ज संरचनाओं को अपनाया गया।

धनबाद (झारखंड):

डिजिटल ऐप के माध्यम से जल संपत्तियों की निगरानी, तालाब पुनर्जीवन और सूखे बोरवेल्स को पुनः सक्रिय किया गया।

निष्कर्ष

इन प्रस्तुतियों ने जल जीवन मिशन के तहत किए जा रहे प्रयासों, चुनौतियों और नवाचारों को उजागर किया। अंत में अतिरिक्त सचिव कमल किशोर सोआन ने जिला कलेक्टरों की सक्रिय भूमिका को मिशन की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा ‘जिला कलेक्टर्स पेयजल संवाद’ का दूसरा संस्करण आयोजित

No comments Document Thumbnail

पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS), जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल जीवन मिशन (JJM) के तहत स्थानीय प्रशासन को सशक्त बनाने, जल स्रोतों की स्थिरता सुनिश्चित करने और ग्रामीण जल आपूर्ति सेवा वितरण में जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से ‘जिला कलेक्टर्स पेयजल संवाद’ का दूसरा संस्करण आयोजित किया गया।

यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोन ने की। कार्यक्रम में संयुक्त सचिव (NJJM) स्वाति मीना नाइक, वरिष्ठ अधिकारी, देशभर के जिला कलेक्टर्स/जिला मजिस्ट्रेट, मिशन निदेशक एवं राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की राज्य मिशन टीमों सहित 800 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

‘जिला कलेक्टर्स पेयजल संवाद’ श्रृंखला जल जीवन मिशन के अंतर्गत विकेंद्रीकृत जल प्रबंधन और स्थानीय शासन को मजबूत करने का एक राष्ट्रीय संवाद मंच है। इसका पहला संस्करण 14 अक्टूबर 2025 को आयोजित हुआ था, जिसमें डिजिटल टूल्स, जवाबदेही तंत्र और पारस्परिक सीख के माध्यम से पंचायतों और जिलों को सशक्त बनाने पर चर्चा हुई थी। आज आयोजित दूसरे संस्करण में जल स्रोतों की स्थिरता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें डेटा आधारित योजना, कानूनी सुरक्षा उपायों और मनरेगा के साथ अभिसरण पर बल दिया गया।

प्रमुख बिंदु

🔹 मनरेगा के साथ अभिसरण – सोन ने 23 सितंबर 2025 को जारी राजपत्र अधिसूचना S.O. 4288(E) का उल्लेख करते हुए जिलों से आग्रह किया कि वे जल स्रोत पुनर्भरण, संरक्षण और जल संचयन के कार्यों पर विशेष खर्च सुनिश्चित करें।

🔹 संरक्षण और नियामक तंत्र – 27 अक्टूबर 2025 को विभाग द्वारा जारी पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने ‘संरक्षित पेयजल क्षेत्र’ (Protected Drinking Water Zones) स्थापित करने, गश्त और निरीक्षण व्यवस्था लागू करने तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSCs) को समुदाय आधारित निगरानी के लिए सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि “जल जीवन मिशन में जिलाधिकारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि स्थायी सेवा वितरण का आधार डेटा-आधारित निर्णय, स्थानीय स्वामित्व और निवारक शासन है।”

निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) का प्रदर्शन

संयुक्त सचिव स्वाति मीना नाइक ने Decision Support System (DSS) का परिचय कराया, जिसे BISAG-N के सहयोग से विकसित किया गया है। यह प्रणाली राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को वैज्ञानिक आधार पर जल स्रोतों की योजना, आकलन और संरक्षण में सहायता करती है।
सहायक सचिव (DS-NJJM)अंकीता चक्रवर्ती ने DSS पोर्टल का प्रदर्शन किया, जो भू-स्थानिक मानचित्र, कृत्रिम जल पुनर्भरण आवश्यकता (AWRR) विश्लेषण और वास्तविक समय ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है।

जिलों द्वारा प्रस्तुत श्रेष्ठ अभ्यास

🔹 गडचिरोली (महाराष्ट्र) – पाइप जल योजनाओं और सौर ऊर्जा आधारित मिनी जल योजनाओं के माध्यम से FHTC कवरेज 8.37% से बढ़कर 93% तक पहुंचा। हनीकॉम्ब तकनीक आधारित वर्षा जल संचयन प्रणाली पर कार्य प्रगति पर है।

🔹 हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश) – सभी 248 ग्राम पंचायतों में ‘हर घर जल’ उपलब्ध। महिलाओं द्वारा फील्ड टेस्ट किट (FTK) से जल परीक्षण।

🔹 डांग (गुजरात) – महिला संचालित जल समितियां ‘मुख्यमंत्री महिला पानी समिति प्रोत्साहन योजना’ के तहत कार्यरत।

🔹 बारामुला (जम्मू-कश्मीर) – 6,600 किमी पाइपलाइन नेटवर्क, 228 फिल्ट्रेशन प्लांट, और 391 सेवा जलाशय। ₹60 करोड़ की परिहासपोरा मल्टी-विलेज योजना से 75,000 लोगों को स्वच्छ जल।

🔹 बोकारो (झारखंड) – ‘जल सहिया’ मॉडल से महिलाओं को प्रशिक्षण, संचालन, परीक्षण और वित्तीय प्रबंधन में सशक्त बनाया गया।

जिला कलेक्टर्स पेयजल संवाद के बारे में

DDWS द्वारा आरंभ की गई यह श्रृंखला जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में संलग्न जिला कलेक्टर्स और क्षेत्रीय अधिकारियों के लिए एक राष्ट्रीय ज्ञान-साझा और पारस्परिक सीख का मंच है। यह संवाद ग्रामीण भारत में दीर्घकालिक जल सुरक्षा और सेवा वितरण की स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


जल जीवन मिशन: ग्रामीण भारत में हर घर जल सुनिश्चित करने की क्रांति

No comments Document Thumbnail

भारत ने जल जीवन मिशन (Har Ghar Jal) के तहत ग्रामीण जल सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। 22 अक्टूबर 2025 तक, 15.72 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुँचाया जा रहा है, जो ग्रामीण भारत में सार्वभौमिक जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मिशन की शुरुआत और दृष्टिकोण

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को मिशन की शुरुआत की, उस समय केवल 3.23 करोड़ (16.71%) घरों में नल का जल उपलब्ध था। मिशन के तहत अब 12.48 करोड़ अतिरिक्त घरों को जोड़ा जा चुका है, जिससे यह ग्रामीण भारत में सबसे तेजी से बढ़ती आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक बन गया है।

जल जीवन मिशन का उद्देश्य माताओं और बहनों को पीने के जल के लिए दूर तक चलने के बोझ से मुक्त करना, उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाना, और ग्रामीण परिवारों के जीवन में सम्मान और गरिमा जोड़ना है।

मिशन के मुख्य उद्देश्य

  1. हर ग्रामीण घर में Functional Household Tap Connection (FHTC) सुनिश्चित करना।

  2. स्रोत स्थिरता: जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्भरण।

  3. समुदाय आधारित भागीदारी और जागरूकता अभियान।

  4. स्वास्थ्य और जीवन स्तर सुधार: जलजनित रोगों में कमी।

  5. सतत विकास: ग्रे वाटर प्रबंधन, वर्षा जल संचयन।

प्रगति (22 अक्टूबर 2025 तक)

  • 192 जिले: सभी घरों, स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों तक नल का जल।

  • ब्लॉक्स: 1,912 ने पूर्ण कवरेज रिपोर्ट की, 1,019 प्रमाणित।

  • ग्राम पंचायतें: 1,25,185 ने रिपोर्ट की, 88,875 प्रमाणित।

  • गांव: 2,66,273 रिपोर्ट किए, 1,74,348 प्रमाणित।

  • 100% कवरेज वाले राज्य/संघ राज्य क्षेत्र: 11, जिनमें गोवा, अंडमान और निकोबार, दादरा & नगर हवेली & दमण & दीव, हरियाणा, तेलंगाना, पुडुचेरी, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।

  • संस्थागत कवरेज: 9,23,297 स्कूल और 9,66,876 आंगनवाड़ी केंद्रों में नल का जल।

गुणवत्ता आश्वासन और निगरानी

  • 2,843 जल परीक्षण प्रयोगशालाएं ने 38.78 लाख जल नमूनों की जांच की।

  • 24.80 लाख महिलाओं ने फील्ड टेस्टिंग किट्स (FTKs) के उपयोग में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

  • यह समुदाय-संचालित दृष्टिकोण जल प्रदूषण का शीघ्र पता लगाने और स्थानीय स्वामित्व को मजबूत करता है।

मिशन के प्रमुख घटक

  1. ग्राम में पाइप्ड जल आपूर्ति – हर घर में नल का जल।

  2. सतत जल स्रोत – विश्वसनीय और दीर्घकालिक आपूर्ति।

  3. थोक जल स्थानांतरण और वितरण – ट्रिटमेंट प्लांट और वितरण नेटवर्क।

  4. तकनीकी हस्तक्षेप – जल गुणवत्ता सुधार।

  5. पिछले योजनाओं का उन्नयन – न्यूनतम सेवा स्तर 55 LPCD।

  6. ग्रे वाटर प्रबंधन – जल संरक्षण।

  7. समुदाय क्षमता निर्माण – सतत जल प्रबंधन में सामुदायिक क्षमता बढ़ाना।

  8. आपातकालीन निधि – प्राकृतिक आपदाओं या संकटों के लिए।

डिजिटल नवाचार

  • RPWSS मॉड्यूल: प्रत्येक योजना को डिजिटल ID देकर पारदर्शिता, ट्रेसबिलिटी और डेटा-आधारित निगरानी।

  • GIS और PM Gati Shakti के साथ एकीकृत, रियल-टाइम डैशबोर्ड और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स।

  • पंचायतों और जल समिति को सशक्त करना, स्थानीय कौशल विकास।

मिशन के प्रभाव

  • समय बचत: प्रत्येक दिन 5.5 करोड़ घंटे, मुख्यतः महिलाओं के लिए।

  • स्वास्थ्य लाभ: लगभग 4 लाख दस्त रोगों से होने वाली मौतों की रोकथाम, 14 मिलियन DALYs बचाई गई।

  • महिला सशक्तिकरण: 9 करोड़ महिलाएं अब पानी लेने नहीं जातीं।

  • नौकरी सृजन: लगभग 3 करोड़ व्यक्ति-वर्ष रोजगार के अवसर।

सामुदायिक और प्रौद्योगिकी-संचालित सफलता की कहानियाँ

  • महाराष्ट्र: Mhapan गांव में महिला स्वयं सहायता समूह ने 100% बिल संग्रह किया और स्व-सहायता मॉडल स्थापित किया।

  • नागालैंड: Wokha में जल स्रोत संरक्षण और वर्षा जल पुनर्भरण, युवा और महिलाओं के नेतृत्व में।

  • असम: Borbori में जलजनित रोग शून्य, सामुदायिक योगदान से सतत संचालन।

  • राजस्थान: Bothara में जल सुरक्षा योजना, चेक डैम और कंटूर ट्रेंच से जल स्तर 70 फीट बढ़ा।

  • पश्चिम बंगाल: ‘Jal Mitra’ ऐप ने निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की, 13.70 करोड़ सामुदायिक गतिविधियों को ट्रैक किया।

निष्कर्ष

जल जीवन मिशन ग्रामीण भारत में सुरक्षित नल जल, स्वास्थ्य, रोजगार और गरिमा सुनिश्चित कर रहा है। छह वर्षों में, यह हर घर जल के विजन को वास्तविकता में बदल रहा है। समुदाय-आधारित सहभागिता और डिजिटल नवाचार के माध्यम से यह मिशन सतत, समान और लोगों-केंद्रित विकास का आदर्श प्रस्तुत करता है।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.