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VB–G RAM G अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन हेतु देशभर में 100 से अधिक क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती

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विकसित भारत–गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB–G RAM G] अधिनियम, 2025 के सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अधिनियम के 1 जुलाई 2026 से लागू होने से पहले देशभर में 100 से अधिक क्षेत्रीय अधिकारियों (Area Officers) की तैनाती का निर्णय लिया है।

ये क्षेत्रीय अधिकारी अधिनियम के क्रियान्वयन के प्रारंभिक चरण में सुविधादाता (Facilitator) और संसाधन व्यक्ति (Resource Person) के रूप में कार्य करेंगे। वे राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर कार्यान्वयन में सहयोग, स्थानीय क्षमताओं को सुदृढ़ करने, ज्ञान एवं अनुभव साझा करने, संचालन संबंधी चुनौतियों के समाधान तथा श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाने में सहायता प्रदान करेंगे।

इस भूमिका के लिए अधिकारियों को तैयार करने हेतु ग्रामीण विकास विभाग ने एक विशेष अभिमुखीकरण (Orientation) कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं, कार्यान्वयन ढाँचे, संस्थागत व्यवस्थाओं, प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासनिक प्रणालियों तथा राज्यों एवं जिलों को उपलब्ध सहायता तंत्रों की जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल ने की, जबकि संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे ने कार्यक्रम का संचालन किया।

अपने दौरों के दौरान क्षेत्रीय अधिकारी राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और जमीनी स्तर के कर्मचारियों से संवाद करेंगे ताकि कार्यान्वयन संबंधी आवश्यकताओं को समझा जा सके, अनुभवों एवं श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान हो सके, क्षमता निर्माण गतिविधियों को समर्थन मिल सके और संचालन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा सके। उनका यह सहयोग विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करेगा और नए ढाँचे में प्रभावी संक्रमण सुनिश्चित करेगा।

यह पहल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संस्थागत सहयोग प्रदान करते हुए VB–G RAM G अधिनियम के सुचारु और प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

VB–G RAM G अधिनियम, 2025 की प्रमुख विशेषताएँ

यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को सतत और समावेशी ग्रामीण विकास का आधार बनाने का प्रयास करता है। इसके अंतर्गत:

  • गारंटीकृत मजदूरी आधारित रोजगार को आजीविका संवर्धन से जोड़ा जाएगा।

  • जलवायु अनुकूलन एवं लचीलापन (Climate Resilience) को बढ़ावा दिया जाएगा।

  • ग्रामीण आधारभूत संरचना का निर्माण किया जाएगा।

  • प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी।

  • विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (VGPPs), GIS-आधारित योजना निर्माण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण (Convergence) के माध्यम से विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा।

मंत्रालय द्वारा की गई प्रमुख तैयारियाँ

मंत्रालय ने देशव्यापी तैयारी सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए ₹95,692 करोड़ की अंतरिम स्वीकृति।

  • सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को DBT-SPARSH प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ना।

  • सक्रिय श्रमिकों में लगभग 93% ई-केवाईसी (e-KYC) पूर्ण करना।

  • फेस ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली का देशभर में कार्यान्वयन।

  • समर्पित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का विकास।

  • बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण (Capacity Building) कार्यक्रमों का संचालन।

वर्तमान प्रगति

  • 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अधिनियम के कार्यान्वयन हेतु अपने बजट में प्रावधान कर दिए हैं।

  • 6 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने VB–G RAM G ढाँचे के अंतर्गत अपनी राज्य योजनाओं को अधिसूचित कर दिया है।

  • शेष राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी योजनाओं को अंतिम रूप देने की उन्नत अवस्था में हैं।

इस प्रकार, क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती और व्यापक तैयारी के माध्यम से सरकार VB–G RAM G अधिनियम, 2025 को सफलतापूर्वक लागू करने और ग्रामीण भारत के समग्र विकास को गति देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

VB-G RAM G अधिनियम 2025: ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी, ग्राम पंचायत को मिलेगी मुख्य भूमिका

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VB-G RAM G अधिनियम, 2025 का उद्देश्य ग्रामीण विकास ढांचे को विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप बनाना है। इस अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जिससे आजीविका सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

इस योजना में विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (Viksit Gram Panchayat Plans) के माध्यम से समग्र योजना निर्माण, विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय (convergence), और डिजिटल एवं भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका इस अधिनियम में स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है:

  • जिला पंचायत जिला स्तर पर योजना निर्माण, निगरानी और समन्वय करेगी।

  • ब्लॉक स्तर की पंचायत ब्लॉक स्तर की योजना तैयार करेगी और ग्राम पंचायतों को सहयोग देगी।

  • ग्राम पंचायत योजना निर्माण, कार्यान्वयन, कार्य आवंटन, रिकॉर्ड रखरखाव और सामाजिक ऑडिट की मुख्य जिम्मेदार संस्था होगी।

ग्राम पंचायत को ग्रामीण परिवारों का पंजीकरण, रोजगार कार्ड जारी करना, कार्य आवेदन प्रक्रिया, तकनीकी मानकों का पालन, डिजिटल रिकॉर्ड, और ग्राम सभा के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

यह अधिनियम महात्मा गांधी नरेगा के अनुभवों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और ग्राम पंचायत को योजना के क्रियान्वयन का मुख्य आधार बनाया गया है।


डॉ. सुकांत मजूमदार ने VB–G RAM G अधिनियम, 2025 के माध्यम से ग्रामीण रोजगार और शिक्षा में सुधार का किया वर्णन

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केंद्रीय राज्य मंत्री, शिक्षा एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास, डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत की। इस अवसर पर डॉ. मजूमदार ने कहा कि विकसित भारत—रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB–G RAM G) अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत के परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

उन्होंने बताया कि यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों के लिए वार्षिक कानूनी वेतन रोजगार गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ाता है। यह अधिनियम सशक्तिकरण, समावेशी विकास, विकास पहलों का समन्वय और सैचुरेशन-आधारित सेवाएं सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है, जिससे ग्रामीण भारत का आधार समृद्ध, लचीला और आत्मनिर्भर बन सके।

उन्होंने आगे कहा कि संसद ने VB–G RAM G अधिनियम, 2025 पारित कर दिया है, जो भारत के ग्रामीण रोजगार और विकास ढांचे में निर्णायक सुधार को दर्शाता है। यह अधिनियम रोजगार को केवल एक कल्याणकारी हस्तक्षेप से निकालकर समग्र विकास का एकीकृत उपकरण बनाने पर केंद्रित है।

मंत्री ने जोर दिया कि यह कानून ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा को मजबूत करेगा, शासन और जवाबदेही तंत्र को आधुनिक बनाएगा, और वेतन रोजगार को सतत और उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ेगा, जिससे समृद्ध और लचीला ग्रामीण भारत सुनिश्चित हो सके।

शिक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान:

मंत्री ने बताया कि VB–G RAM G ढांचा ग्रामीण शिक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ करने वाले कार्यों को सीधे लागू करने में सक्षम है, जैसे कि शारीरिक सुविधाओं और बुनियादी सुविधाओं की लंबित आवश्यकताओं को पूरा करना। इसमें सरकारी स्कूलों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान, कंपाउंड दीवार, शौचालय और किचन शेड के निर्माण और रखरखाव की व्यवस्था शामिल है, जो सुरक्षित, कार्यात्मक और बाल-अनुकूल शिक्षा वातावरण सुनिश्चित करेंगे।

इसी प्रकार, आंगनवाड़ी भवनों और शौचालयों का निर्माण और रखरखाव प्रारंभिक बाल शिक्षा की नींव को मजबूत करेगा और सेवाओं की गरिमा, स्वच्छता और निरंतरता सुनिश्चित करेगा।

डॉ. मजूमदार ने यह भी बताया कि ग्रामीण पुस्तकालय भवनों और प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केंद्रों का समावेश औपचारिक शिक्षा से परे सीखने के अवसरों का विस्तार करता है, और ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और वयस्क शिक्षार्थियों को ज्ञान संसाधनों और व्यावसायिक मार्गों तक पहुँच प्रदान करता है।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि VB–G RAM G अधिनियम, 2025 के पारित होने से भारत की ग्रामीण रोजगार गारंटी का नया युग शुरू हुआ है। कानूनी रोजगार को 125 दिनों तक बढ़ाना, विकेंद्रीकृत और भागीदारीपूर्ण योजना लागू करना, जवाबदेही मजबूत करना, और सैचुरेशन-आधारित विकास संस्थागत करना, यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को सशक्तिकरण, समावेशी विकास और समृद्ध, लचीला ग्रामीण भारत बनाने का रणनीतिक उपकरण बनाता है, जो विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

विकसित भारत–जी राम जी बिल 2025: ग्रामीण रोजगार गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ाया गया

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केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज लोकसभा में “विकसित भारत–गैरंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण): VB G RAM G (विकसित भारत–जी राम जी) बिल, 2025” पेश किया।

बिल का उद्देश्य:

VB G RAM G बिल, 2025 का उद्देश्य ग्रामीण विकास के एक समग्र ढांचे की स्थापना करना है, जो राष्ट्रीय दृष्टि “विकसित भारत @2047” के अनुरूप हो। इसके तहत प्रत्येक ग्रामीण गृहस्थी के वयस्क सदस्यों को, जो अविकसित (अकुशल) श्रमिक कार्य करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों का कानूनी रोजगार गारंटी प्रदान की जाएगी। बिल का उद्देश्य सशक्तिकरण, विकास, समेकन और संतृप्ति के माध्यम से एक समृद्ध और लचीले ग्रामीण भारत का निर्माण करना है।

मुख्य विशेषताएँ:

  1. रोजगार गारंटी: प्रत्येक ग्रामीण गृहस्थी को स्वेच्छा से अविकसित श्रमिक कार्य करने पर प्रति वर्ष 125 दिन रोजगार की कानूनी गारंटी।

  2. Viksit Bharat National Rural Infrastructure Stack: सभी कार्यों को एकीकृत राष्ट्रीय ढांचे में सम्मिलित किया जाएगा, जो जल सुरक्षा, ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका-संबंधी अवसंरचना, तथा चरम मौसम एवं आपदा तैयारियों से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देगा।

  3. Viksit Gram Panchayat Plans (VGPPs): सभी कार्य ग्राम स्तर पर VGPPs के माध्यम से पहचाने जाएंगे, जो नीचे से ऊपर की ओर आधारित, समेकन-प्रधान और संतृप्ति-केंद्रित होंगे। ये योजनाएँ ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर एकीकृत की जाएंगी।

  4. राज्य स्तर की लचीलापन: राज्यों को वित्तीय वर्ष में 60 दिनों के लिए कार्य न कराने की पूर्व-सूचना देने का अधिकार, ताकि कृषि कार्यों के उच्चतम मौसम में श्रमिक उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

  5. केंद्र-राज्य वित्त पोषण: यह एक केन्द्रीय प्रायोजित योजना (CSS) होगी, जिसमें नॉर्थ-ईस्ट और हिमालयी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 90:10 और अन्य राज्यों के लिए 60:40 के फंड शेयरिंग पैटर्न होंगे।

  6. समान वितरण और पारदर्शिता: राज्यों को फंड का नॉरमेटिव आवंटन और जिला एवं ग्राम पंचायत स्तर पर पारदर्शी तथा जरूरत आधारित वितरण सुनिश्चित करना होगा।

  7. डिजिटल और तकनीकी निगरानी: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, स्थानिक तकनीक-समर्थित योजना और निगरानी, मोबाइल-आधारित रिपोर्टिंग, वास्तविक समय डैशबोर्ड, AI-सक्षम विश्लेषण और मजबूत सामाजिक ऑडिट तंत्र।

  8. साप्ताहिक खुलासा बैठकें: ग्राम पंचायत भवनों में प्रत्येक सप्ताह कार्यों की स्थिति, भुगतान, शिकायतें, प्रगति और मजदूरी विवरण प्रस्तुत किए जाएंगे।

  9. मजदूरी और बेरोजगारी भत्ता: केंद्रीय सरकार द्वारा मजदूरी दर निर्धारित की जाएगी; तय दरों तक रोजगार न मिलने पर राज्य सरकारें बेरोजगारी भत्ता प्रदान करेंगी।

पृष्ठभूमि:

पिछले दो दशकों में ग्रामीण भारत में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं—ग्रामीण कनेक्टिविटी, आवास, पीने के पानी, स्वच्छता, विद्युतीकरण, वित्तीय समावेशन और डिजिटल पहुंच में वृद्धि हुई है। ग्रामीण कार्यबल में विविधता आई है और आय व उत्पादक अवसंरचना के प्रति आकांक्षाएँ बढ़ी हैं। इन बदलते परिदृश्यों को देखते हुए, संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण, योजना समेकन और तकनीकी हस्तक्षेप आवश्यक हो गया है।

इस बिल के माध्यम से रोजगार गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन प्रति वर्ष किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण संपत्ति निर्माण और ग्रामीण विकास की गति तेज होगी, तथा “विकसित भारत @2047” की दृष्टि के अनुरूप ग्रामीण परिवारों का सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा।

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