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छत्तीसगढ़ में BharatNet को बड़ा बढ़ावा, ₹3,942 करोड़ की मंजूरी

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों की डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। Digital Bharat Nidhi (DBN), दूरसंचार विभाग और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच Amended BharatNet Programme (ABP) के क्रियान्वयन के लिए समझौता हुआ है। यह समझौता 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित संचार भवन में हुआ।

इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में BharatNet के विस्तार के लिए ₹3,942 करोड़ की वित्तीय सहायता मंजूर की है। इसका उद्देश्य राज्य के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में तेज एवं बेहतर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।

11,682 ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगा नेटवर्क

Amended BharatNet Programme के तहत छत्तीसगढ़ की 11,682 ग्राम पंचायतों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 8,328 गांवों में मांग के आधार पर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना है। इससे उन ग्रामीण इलाकों को भी हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने में मदद मिलेगी, जहां अभी डिजिटल सेवाओं की पहुंच सीमित है। 

समझौते में Digital Bharat Nidhi, छत्तीसगढ़ सरकार, Chhattisgarh State BharatNet Infrastructure Limited (CSBIL), BSNL और Chhattisgarh Infotech Promotion Society (CHiPS) शामिल हैं। राज्य के नेतृत्व वाले मॉडल के तहत परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। 

3 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को मिलेगा लाभ

परियोजना के तहत तीन लाख से अधिक ग्रामीण घरों तक फाइबर कनेक्शन पहुंचाने में सरकारी वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण परिवारों को इंटरनेट आधारित शिक्षा, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं, डिजिटल भुगतान, टेलीमेडिसिन और अन्य डिजिटल सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। 

गांवों में डिजिटल सेवाओं को मिलेगी रफ्तार

BharatNet का विस्तार केवल इंटरनेट कनेक्शन तक सीमित नहीं है। बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से ग्राम पंचायतों में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन प्रमाणपत्र एवं सरकारी सेवाएं, डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और वित्तीय समावेशन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और शहरों के बीच मौजूद डिजिटल अंतर को कम करने में भी मदद मिलेगी। 

केंद्र सरकार ने 2023 में Amended BharatNet Programme को देश के बसे हुए गांवों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाने के उद्देश्य से मंजूरी दी थी। छत्तीसगढ़ सहित चुनिंदा राज्यों में इसके राज्य-आधारित क्रियान्वयन की व्यवस्था की गई है। 

कुल मिलाकर, ₹3,942 करोड़ का यह निवेश छत्तीसगढ़ के ग्रामीण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि परियोजना निर्धारित गति से लागू होती है, तो हजारों ग्राम पंचायतों और गांवों में इंटरनेट आधारित शिक्षा, रोजगार, कारोबार और सरकारी सेवाओं के नए अवसर खुल सकते हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 में ग्रामीण सड़कों के निर्माण हेतु ₹18,907 करोड़ आवंटित, 26,474 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य

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भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) तथा अन्य ग्रामीण संपर्क परियोजनाओं के अंतर्गत 26,474 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 18,907 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं।

यह जानकारी ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दी गई, जिसमें पीएमजीएसवाई और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (RCPLWEA) के तहत राज्यों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल ने की।

समीक्षा बैठक में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, राजस्थान और तेलंगाना के अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों तथा राज्य ग्रामीण सड़क विकास एजेंसियों (SRRDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

अंतिम छोर तक संपर्क (Last-Mile Connectivity) पर विशेष जोर

सचिव ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों के लक्ष्यों और क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए शेष वंचित क्षेत्रों तक ग्रामीण सड़क संपर्क सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।

राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे पीएमजीएसवाई-I तथा पीएम-जनमन (PM-JANMAN) के अंतर्गत शेष सभी असंबद्ध बस्तियों को शीघ्र जोड़ने की दिशा में कार्य करें। विशेष रूप से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) की बस्तियों को प्राथमिकता देने को कहा गया। उन्होंने सभी पात्र ग्रामीण क्षेत्रों तक हर मौसम में उपयोग योग्य सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने, क्रियान्वयन संबंधी बाधाओं को दूर करने तथा लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़क परियोजनाओं की समीक्षा

बैठक में आरसीपीएलडब्ल्यूईए के तहत प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में सड़क अवसंरचना के रणनीतिक महत्व को देखते हुए सचिव ने संबंधित राज्यों को कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखने और स्वीकृत परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

भाग लेने वाले राज्यों ने अपनी कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत कीं और मंत्रालय को आश्वस्त किया कि सभी लंबित कार्य और वार्षिक लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएंगे।

गुणवत्ता और डिजिटल शासन को सुदृढ़ करने पर बल

समीक्षा का एक प्रमुख विषय ग्रामीण सड़क परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थिरता रहा। सचिव ने कहा कि टिकाऊ और विश्वसनीय ग्रामीण संपर्क सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन और प्रभावी रखरखाव व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

राज्यों से फील्ड स्तर पर निरीक्षण बढ़ाने, गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को मजबूत करने और परियोजना क्रियान्वयन के दौरान प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।

बैठक में ई-मार्ग (e-MARG) प्लेटफॉर्म के सार्वभौमिक उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। यह प्रणाली ग्रामीण सड़कों के रखरखाव, प्रदर्शन मूल्यांकन और भुगतान की रीयल-टाइम निगरानी की सुविधा प्रदान करती है। इसके व्यापक उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

आगे की रणनीति

बैठक के समापन पर सचिव ने राज्यों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने, भूमि अधिग्रहण और वन स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने, परियोजना माइलस्टोन का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने तथा राज्य सरकारों, राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (NRIDA) और ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच समन्वय को और मजबूत करने के निर्देश दिए।

राज्यों ने भी क्रियान्वयन में तेजी लाने, अवसंरचना की गुणवत्ता में सुधार करने तथा देश की प्रत्येक पात्र बस्ती तक हर मौसम में सड़क संपर्क का लाभ पहुंचाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

पीएमजीएसवाई के 25 वर्ष पूरे, पीएमजीएसवाई-IV का राष्ट्रीय शुभारंभ

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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana – PMGSY) के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सिल्वर जुबली समारोह और PMGSY-IV का राष्ट्रीय शुभारंभ 10 मई को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भैरुंडा में आयोजित किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान  मुख्य अतिथि होंगे, जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।

ग्रामीण विकास को बड़ा बढ़ावा

इस अवसर पर केंद्र सरकार मध्य प्रदेश को PMGSY-IV के तहत 973 सड़कों के निर्माण की मंजूरी देगी, जिनकी कुल लंबाई 2,117 किलोमीटर होगी। इससे राज्य की 987 बस्तियों को लाभ मिलेगा।

इसके साथ ही पीएम-जनमन योजना के तहत 384 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को भी मंजूरी दी जाएगी, जिससे 168 पिछड़ी बस्तियों को सीधा फायदा मिलेगा।

₹18,907 करोड़ का आवंटन

कार्यक्रम में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए PMGSY के तहत ₹18,907 करोड़ के आवंटन की घोषणा की जाएगी, जिसमें मध्य प्रदेश के लिए ₹830 करोड़ शामिल हैं।

ग्रामीण कनेक्टिविटी पर जोर

सरकार का मानना है कि गांव की सड़क केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि और बाजार तक पहुंच का माध्यम है। यह योजना ग्रामीण भारत के जीवन स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभा रही है।

अन्य प्रमुख उपस्थितियां

इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री, राज्य सरकार के मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

नई दिशा

यह आयोजन ग्रामीण सड़क निर्माण में तकनीक आधारित विकास और देशभर में बेहतर कनेक्टिविटी की दिशा में एक नए चरण की शुरुआत माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना–IV के तहत 10,000 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को मंजूरी, ग्रामीण कनेक्टिविटी में नया मील का पत्थर

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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना–IV (PMGSY-IV) के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। जम्मू और कश्मीर, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम सहित राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 10,000 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। यह कदम ग्रामीण विकास विभाग की विकसित भारत की दिशा में प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


कनेक्टिविटी से ग्रामीण विकास को नई दिशा

इन सड़कों का निर्माण केवल बुनियादी ढांचा नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम है। इन परियोजनाओं से लगभग 3,270 पहले असंयोजित बस्तियों को पहली बार कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुँच आसान होगी और ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

PMGSY-IV: लक्ष्य और दायरा

PMGSY-IV के तहत कुल 25,000 असंयोजित बस्तियों को कनेक्ट करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • मैदानी इलाकों में 500+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ

  • उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्यों/UTs में 250+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ

  • विशेष श्रेणी क्षेत्र (जनजातीय क्षेत्र, आकांक्षी जिले/ब्लॉक, रेगिस्तानी क्षेत्र)

  • LWE प्रभावित जिलों में 100+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ

योजना की विशेषताएँ

  • 62,500 किलोमीटर की ऑल-वेदर सड़कें बनाई जाएंगी

  • सड़क मार्गों के साथ आवश्यक पुलों का निर्माण भी सुनिश्चित किया जाएगा

वित्तीय एवं कार्यान्वयन ढांचा

केंद्र सरकार ने 11 सितंबर 2024 को PMGSY-IV की कार्यावधि (FY 2024-25 से 2028-29) को मंजूरी दी थी।

  • कुल अनुमानित लागत: ₹70,125 करोड़

  • केंद्र की हिस्सेदारी: ₹49,087.50 करोड़

  • राज्य की हिस्सेदारी: ₹21,037.50 करोड़


मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना: 57 मार्गों पर बस संचालन, पहली बार यात्री बस सुविधा से जुड़े 330 गाँव

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मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025 से दूरस्थ गाँवों को सुलभ आवागमन की सौगात

छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अंचलों में आवागमन की सुविधा सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025 का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। यह योजना उन ग्रामों तक सार्वजनिक परिवहन पहुँचाने की दिशा में एक निर्णायक पहल है, जहाँ अब तक यात्री बस सुविधा उपलब्ध नहीं थी।


योजना के प्रथम चरण में बस्तर एवं सरगुजा संभाग के जिलों को सम्मिलित किया गया है। 

अब तक मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत कुल 57 चयनित मार्गों पर 57 बसों का संचालन प्रारंभ किया जा चुका है। इन बसों के माध्यम से कुल 330 नए गाँवों तक पहली बार यात्री बस सुविधा पहुँची है, जिससे ग्रामीण जनजीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

योजना का प्रमुख उद्देश्य ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों को जनपद मुख्यालय, नगरीय क्षेत्र, तहसील मुख्यालय तथा जिला मुख्यालयों से जोड़ना है, जहाँ पूर्व में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं थी। इससे ग्रामीण नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं तक सुगम पहुँच सुनिश्चित हो रही है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के अंतर्गत बस संचालकों को राज्य शासन द्वारा प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। प्रथम वर्ष ₹26 प्रति किलोमीटर, द्वितीय वर्ष ₹24 प्रति किलोमीटर तथा तृतीय वर्ष ₹22 प्रति किलोमीटर की दर से सहायता दी जा रही है।

इसके अतिरिक्त योजना के तहत गासिक कर में पूर्णतः छूट अधिकतम तीन वर्षों की अवधि के लिए प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण मार्गों पर बस संचालन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाया जा सके।

मार्ग चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है। इस योजना के अंतर्गत मार्गों का चयन जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा के आधार पर राज्य स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है, ताकि वास्तविक आवश्यकता वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता मिल सके।

चयनित मार्गों पर बस संचालन हेतु निविदा प्रक्रिया अपनाई जाती है। निविदा के माध्यम से न्यूनतम वित्तीय दर प्रस्तावित करने वाले पात्र आवेदक का चयन किया जाता है, जिससे शासन पर न्यूनतम वित्तीय भार पड़े और सेवा सतत बनी रहे।

निविदा में चयनित आवेदक से विधिवत परमिट आवेदन प्राप्त कर सुनवाई की प्रक्रिया के उपरांत बस संचालन हेतु परमिट जारी किया जाता है। इससे नियामकीय प्रक्रिया का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाता है।

वर्तमान में 12 नवीन ग्रामीण मार्गों पर बस संचालन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। इसके अतिरिक्त 15 नए ग्रामीण मार्गों का चयन कर लिया गया है, जिन पर बस संचालन हेतु निविदाएँ आमंत्रित की गई हैं।

जिलावार स्थिति की बात करें तो सुकमा में 8, नारायणपुर में 4, जगदलपुर में 2, कोण्डागांव में 4, कांकेर में 6, दंतेवाड़ा में 7, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 2, सूरजपुर में 6, कोरिया में 5, जशपुर में 7, बलरामपुर में 4 तथा अंबिकापुर में 2 बसों का संचालन किया जा रहा है। इस प्रकार कुल 57 मार्गों पर 57 बसें संचालित हैं।

आगामी कार्ययोजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 200 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाकर समावेशी विकास, सामाजिक सशक्तिकरण और आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान करेगा।

नववर्ष पर बीएसएनएल ने देशभर में VoWiFi (वाई-फाई कॉलिंग) सेवा की शुरुआत की

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नववर्ष के अवसर पर भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल), भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी, को देशभर में वॉयस ओवर वाई-फाई (VoWiFi), जिसे वाई-फाई कॉलिंग भी कहा जाता है, के राष्ट्रव्यापी शुभारंभ की घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है। यह उन्नत सेवा अब देश के सभी दूरसंचार सर्किलों में बीएसएनएल के सभी ग्राहकों के लिए उपलब्ध है, जिससे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी निर्बाध और उच्च गुणवत्ता की कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।

यह सेवा अब देश के सभी दूरसंचार सर्किलों में बीएसएनएल ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। VoWiFi के माध्यम से ग्राहक वाई-फाई नेटवर्क पर वॉयस कॉल और संदेश भेज एवं प्राप्त कर सकते हैं, जिससे घरों, कार्यालयों, बेसमेंट तथा दूरदराज़ क्षेत्रों जैसे कमजोर मोबाइल सिग्नल वाले स्थानों में भी स्पष्ट और विश्वसनीय कनेक्टिविटी मिलती है।

VoWiFi एक IMS आधारित सेवा है, जो वाई-फाई और मोबाइल नेटवर्क के बीच निर्बाध हैंडओवर को समर्थ बनाती है। कॉल ग्राहक के मौजूदा मोबाइल नंबर और फोन डायलर के माध्यम से की जाती हैं, इसके लिए किसी भी तृतीय-पक्ष एप्लिकेशन की आवश्यकता नहीं होती।

यह सेवा विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में लाभकारी है, जहाँ मोबाइल कवरेज सीमित हो सकता है, बशर्ते स्थिर वाई-फाई कनेक्शन उपलब्ध हो—चाहे वह बीएसएनएल भारत फाइबर हो या कोई अन्य ब्रॉडबैंड सेवा। VoWiFi नेटवर्क पर भीड़ को कम करने में सहायक है और इसे पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किया जा रहा है, यानी वाई-फाई कॉलिंग पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।

VoWiFi का शुभारंभ बीएसएनएल के नेटवर्क आधुनिकीकरण कार्यक्रम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा देशभर में, विशेषकर कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों में, कनेक्टिविटी सुधारने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

VoWiFi अधिकांश आधुनिक स्मार्टफोनों पर समर्थित है। ग्राहकों को केवल अपने हैंडसेट की सेटिंग्स में जाकर Wi-Fi Calling को सक्षम करना होगा। डिवाइस संगतता और सहायता से संबंधित जानकारी के लिए ग्राहक अपने नज़दीकी बीएसएनएल ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं या बीएसएनएल हेल्पलाइन 1800 1503 पर कॉल कर सकते हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कोल्हापुर में ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन में 6,000 डाक कर्मचारियों को संबोधित किया

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 केंद्रीय संचार और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 13 दिसंबर 2025 को कोल्हापुर में आयोजित ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन में गोवा और पुणे क्षेत्र के लगभग 6,000 ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) को संबोधित किया।

सम्मेलन में मंत्री का संबोधन

सिंधिया ने महाराष्ट्र की स्थानीय भाषा मराठी में अपने मार्मिक संबोधन में डाक कर्मचारियों की निष्ठापूर्ण सेवा भावना की सराहना की। उन्होंने डाकियों को “विश्वास के पुल” बताते हुए कहा कि वे केवल पत्र नहीं पहुँचाते, बल्कि हर घर तक बैंकिंग, बीमा और सरकारी सेवाओं को भी पहुँचाते हैं। उन्होंने ग्रामीण भारत को जोड़ने और देश के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला।

सम्मेलन में उन्होंने डाक कर्मचारियों के लिए लागू कई कल्याण सुधारों का स्मरण कराया, जैसे कि ग्रामीण डाक सेवकों के बच्चों का केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश, भत्तों में वृद्धि, नए यूनिफॉर्म और जैकेट डिज़ाइन का परिचय, और प्रोजेक्ट एरो। उन्होंने कहा कि ये पहलें सरकार की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा हैं जो अपने फील्ड कार्यबल की सुनती और उन्हें सशक्त बनाती है।

इंडिया पोस्ट का योगदान

सिंधिया ने भारत पोस्ट की अद्वितीय उपस्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर में 1.65 लाख से अधिक डाकघर हैं जो लगभग 6.5 लाख गांवों को सेवाएँ प्रदान करते हैं। उन्होंने विभाग को एक आधुनिक लॉजिस्टिक्स और सेवा केंद्र में बदलने का आह्वान किया, जो नवाचार, विश्वसनीयता और मूल्य आधारित दृष्टिकोण से संचालित हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण “डाकिया अब बैंक लाया” को स्मरण करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे इंडिया पोस्ट ने केवल पत्र वितरण से आगे बढ़कर वित्तीय समावेशन और नागरिक सेवाओं का विश्वसनीय माध्यम बनकर अपनी सेवा भावना “सेवा भाव” को बनाए रखा है।

उत्कृष्ट डाक सेवकों का सम्मान

सम्मेलन का एक मुख्य आकर्षण महाराष्ट्र के 10 उत्कृष्ट ग्रामीण डाक सेवकों का सम्मान था। केंद्रीय मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक पुरस्कार विजेता से संवाद किया और उन्हें नई इंडिया पोस्ट जैकेट, कैप और डाकिया बैग पहनाया, जो डाक सेवा में गरिमा, पहचान और गर्व का प्रतीक बना। इस पहल को उपस्थित कर्मचारियों ने जोरदार तालियों और भावपूर्ण सराहना के साथ स्वीकार किया।

अन्य प्रमुख अतिथिगण

डायस पर छत्रपति शाहू महाराज, कोल्हापुर के सांसद; धनंजय महाडिक, कोल्हापुर के सांसद; जितेन्द्र गुप्ता, महानिदेशक, डाक सेवाएँ;  सुवेंदु कुमार स्वैन, सदस्य (पर्सनेल), डाक सेवा बोर्ड और अमिताभ सिंह, मुख्य डाकपाल, महाराष्ट्र सर्कल उपस्थित रहे।

एआई आधारित “भाषिणी” मंच का उपयोग

इस अवसर पर एआई-आधारित “भाषिणी” मंच का उपयोग किया गया, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत विकसित किया गया है। इस पहल ने भाषाई और सांस्कृतिक अंतर को पाटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के माध्यम से एक समावेशी और बहुभाषी डिजिटल भारत के निर्माण में सरकार की दृष्टि को प्रदर्शित किया।

समापन

सिंधिया ने सभी डाक कर्मचारियों से गर्व, निष्ठा और नवाचार के साथ सेवा जारी रखने का आह्वान किया और देश सेवा और परिवर्तन की भावना को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। अपने संबोधन का समापन उन्होंने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए “धन्यवाद, जय हिंद” के साथ किया।

भारत पोस्ट का आधुनिकीकरण: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डाक सेवा में सुधार और विस्तार पर जोर दिया

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केंद्रीय संचार और वि. वि. वि. राज्य मंत्री,ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा को संबोधित करते हुए भारत पोस्ट को मजबूत बनाने और आधुनिक बनाने में किए गए महत्वपूर्ण कदमों का उल्लेख किया।

सिंधिया ने बताया कि वर्तमान में भारत पोस्ट देशभर में 1.64 लाख डाक घर संचालित कर रहा है, जिसे 2.78 लाख ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) की समर्पित टीम का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने उनके अमूल्य योगदान को स्वीकार करते हुए कहा कि ग्रामीण डाक सेवक केवल व्यवसाय ही नहीं करते, बल्कि मानवता के भावों को भी एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुँचाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्राप्त परिवर्तन को उजागर करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सरकार ने भारत पोस्ट को मजबूत बनाने पर व्यापक ध्यान केंद्रित किया है। प्रमुख उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:

  • पिछले 3.5 वर्षों में लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज़्म प्रभावित राज्यों में 4,903 नए डाक घर बनाए गए।

  • बैंकों से वंचित गांवों में 5,746 डाक घर स्वीकृत किए गए, जिनमें से 5,657 (97%) डाक घर पहले ही खोले जा चुके हैं।

  • पिछले 11 वर्षों में राष्ट्रीय नेटवर्क में कुल 10,170 डाक घर जोड़े गए।

  • डाक घर भवनों के निर्माण और नवीनीकरण के लिए ₹405 करोड़ का निवेश किया गया, जिसमें 49 धरोहर डाक घर भी शामिल हैं, जिन्हें भारत पोस्ट की संस्थागत धरोहर माना जाता है।

सिंधिया ने यह भी बताया कि हालांकि महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, भारत पोस्ट के स्वामित्व वाले बाकी 25,000 डाक घरों के नवीनीकरण के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता होगी।

भविष्य की ओर बढ़ते हुए, केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि भारत पोस्ट अपने संचालन को आधुनिक बनाने और सुव्यवस्थित करने के लिए व्यापक बिज़नेस प्रोसेस री-इंजीनियरिंग (BPR) पहल कर रहा है। इससे प्रथम-मील, मध्य-मील और अंतिम-मील वितरण प्रणालियों में सुधार होगा, जो नागरिकों के लिए तेज़, सेवा-केंद्रित और डिजिटल रूप से सक्षम होंगी।

उन्होंने आगे कहा कि भारत पोस्ट ऑटोमेशन ला रहा है और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन कर रहा है, ताकि यह विश्व के प्रमुख लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं में से एक बन सके।

सरकार राष्ट्रीय डाक नेटवर्क को मजबूत करने, सेवा वितरण को बेहतर बनाने और भारत पोस्ट को देश के लिए एक आधुनिक, प्रौद्योगिकी-संचालित लॉजिस्टिक्स पावरहाउस में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।

कोंडापल्ली में संचार क्रांति का नया सवेरा: मोबाइल नेटवर्क पहुंचते ही नाच उठे ग्रामीण

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दशकों की प्रतीक्षा समाप्त: कोंडापल्ली में पहली बार मोबाइल नेटवर्क, गांव में उत्सव का माहौल

नियद नेल्ला नार योजना ने बदली तस्वीर: कोंडापल्ली में जीवन हुआ आसान

रायपुर- दूरसंचार, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएँ जहाँ देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य जीवन का आधार बन चुकी हैं, वहीं बस्तर संभाग के कुछ सुदूर वनांचलों ने दशकों तक इन सुविधाओं को कभी देखा ही नहीं था। ऐसे ही एक इलाके, बीजापुर जिले के ग्राम कोंडापल्ली, में अभूतपूर्व उत्सव का माहौल देखने को मिला जब गाँव में पहली बार मोबाइल नेटवर्क आया।

कोंडापल्ली तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित एक घना वनांचल है, जहाँ वर्षों से सड़क, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं। ऐसे में गाँव में मोबाइल टॉवर स्थापित होना स्थानीय समुदाय के लिए केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि दुनिया से जुड़ने का प्रतीक बन गया।

जैसे ही टॉवर के सक्रिय होने की घोषणा हुई, ग्रामीणों में उत्साह की लहर दौड़ पड़ी। महिलाएँ, पुरुष, बच्चे — सभी रैली के रूप में टॉवर स्थल तक पहुँचे। पारंपरिक विधि से टॉवर की पूजा-अर्चना की गई। माँदर की थाप पर लोग भावुक होकर नाच उठे। यह दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं था।

इस उत्सव में केवल कोंडापल्ली ही नहीं, बल्कि आसपास के गाँवों के लोग भी शामिल हुए। ग्रामीणों ने कहा कि यह उनके लिए केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि “बाहरी दुनिया से पहला वास्तविक जुड़ाव” है। सुरक्षा बलों के जवानों ने भी ग्रामीणों की खुशी में शामिल होकर मिठाइयाँ वितरित कीं।

अब मोबाइल नेटवर्क ग्रामीणों के लिए बैंकिंग, आधार, राशन, स्वास्थ्य योजनाओं, पेंशन और शैक्षणिक सुविधाओं का प्रवेश-द्वार बनेगा। जिनके लिए यह सेवाएँ अब तक दूर का सपना थीं, उनके लिए यह दिन जीवन में एक नया अध्याय लेकर आया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित नियद नेल्ला नार योजना का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाकर लोगों में विश्वास बढ़ाना और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है। योजना के तहत सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बैंकिंग, संचार सहित प्रशासनिक सेवाओं को तेज़ी से पहुँचाने का काम किया जा रहा है।

योजना का दायरा व्यापक है — 69 नवीन कैम्पों के आसपास स्थित 403 ग्रामों में 09 विभागों की 18 सामुदायिक सेवाएँ और 11 विभागों की 25 व्यक्तिमूलक योजनाएँ पहुँचाई जा रही हैं, ताकि ग्रामीण किसी भी मूलभूत सुविधा से वंचित न रहें।

इस पूरी प्रक्रिया में संचार अधोसंरचना सबसे प्रभावी साबित हो रही है। पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में 728 नए टॉवर स्थापित किए गए हैं — जिनमें 116 एलडब्ल्यूई कार्यक्रम से, 115 आकांक्षी जिलों में, और 467 टावर 4G नेटवर्क के रूप में लगाए गए हैं। इसके साथ ही 449 टॉवरों का 2G से 4G में उन्नयन किया गया है।

कोंडापल्ली में नियद नल्ला नार योजना से तेज़ी से बदलाव आए हैं। दिसम्बर 2024 में कैम्प स्थापित होने के बाद पहली बार प्रशासन गाँव तक नियमित रूप से पहुँचने लगा। यहाँ लंबे समय से बंद पड़ी सड़क का पुनर्निर्माण बार्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने अपने जिम्मे लिया है और 50 किलोमीटर सड़क का कार्य प्रगति पर है।

गाँव में दो महीने पहले ही पहली बार विद्युत लाइन पहुँची है। बिजली आने के बाद से बच्चों की पढ़ाई, छोटे व्यवसाय और ग्रामीण जीवन में अभूतपूर्व सकारात्मक बदलाव देखे जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा लगातार सेचुरेशन शिविर आयोजित कर सभी योजनाओं का लाभ प्रत्येक परिवार तक पहुँचाया जा रहा है।

कोंडापल्ली में मोबाइल नेटवर्क के आगमन से यह स्पष्ट हो गया है कि विकास की किरण अब उन इलाकों तक भी पहुँच रहा है, जो वर्षों से प्रतीक्षा में थे। संचार सुविधा के इस नए सवेरे ने ग्रामीणों को भरोसा दिया है कि अब उनका गाँव भी राज्य के अन्य हिस्सों की तरह आधुनिक सुविधाओं से जुड़कर आगे बढ़ेगा।

बीजापुर जिले के कोंडापल्ली में मोबाइल नेटवर्क का पहुँचना सिर्फ एक टॉवर का खड़ा होना नहीं है, यह उन लोगों के सपनों का उठ खड़ा होना है जो वर्षों से दुनिया से कटे हुए थे। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर का हर गांव–हर परिवार विकास की मुख्यधारा से जुड़े, डिजिटल सुविधाओं तक पहुँचे और अवसरों के नए द्वार उनके लिए खुलें। यह सिर्फ संचार की शुरुआत नहीं, बल्कि विश्वास, बदलाव और नई संभावनाओं के युग का आरंभ है। - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की प्रगति पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिए तेज़ी लाने के निर्देश

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केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली के कृषि भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की प्रगति की समीक्षा की गई और आगामी कार्ययोजना के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में ग्रामीण विकास सचिव शैलेश सिंह और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में अधिकारियों ने मंत्री को राज्यवार प्रगति की जानकारी दी। बताया गया कि कुछ पहाड़ी और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण कार्य अस्थायी रूप से धीमा हुआ है, जबकि अन्य सभी क्षेत्रों में योजना का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है।

विशेष ध्यान उत्तर-पूर्वी राज्यों और वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर छत्तीसगढ़ पर दिया गया। शिवराज चौहान ने अधिकारियों को उत्तर-पूर्व में कार्यों को तेज़ करने के निर्देश दिए और घोषणा की कि वे जल्द ही इस क्षेत्र में एक विशेष समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रतिनिधि शामिल होंगे तथा ग्रामीण विकास की विभिन्न योजनाओं — जैसे PMGSY, मनरेगा, कौशल विकास, और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन — की प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर चर्चा की जाएगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की 25वीं वर्षगांठ को राष्ट्रव्यापी स्तर पर मनाया जाएगा। शिवराज चौहान ने कहा, “यह योजना हमारे ग्रामीण भारत के हालात और दिशा दोनों बदलने वाली ऐतिहासिक पहल है। 25 वर्ष पूरे होना अपने आप में एक अद्भुत उपलब्धि है।”

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि PMGSY की 25 वर्षों की सफलता को दर्शाने वाली एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए और जारी की जाए, ताकि योजना के राष्ट्रीय प्रभाव को उजागर किया जा सके।

बैठक के अंत में शिवराज चौहान ने अधिकारियों से कहा कि कार्य की गति को और तेज़ करें और राज्य सरकारों के साथ समन्वय में आने वाली चुनौतियों का शीघ्र समाधान करें। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सभी सड़क निर्माण परियोजनाएं उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप समय सीमा के भीतर पूरी हों, ताकि टिकाऊ अवसंरचना के माध्यम से समावेशी ग्रामीण विकास को सुनिश्चित किया जा सके।

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