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सीआरपीएफ ने किया एकता दौड़ का वृहत् आयोजन, ग्रामीण,विद्यार्थी व शिक्षक हुए एकता दौड़ में शामिल

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आरंग- शुक्रवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल के 150 वीं जयंती के अवसर पर भारत सरकार के निर्देशानुसार वृहत् रूप से एकता दौड़ का आयोजन हुआ। 

जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, पूर्व माध्यमिक एवं हायर सेकंडरी स्कूल भिलाई के छात्र छात्राएं व शिक्षक शिक्षिकाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए एकता दौड़ में शामिल हुए।उप कमांडेंट अजय सिंह ने हरी झंडी दिखाकर एकता दौड़ को रवाना किया। इस अवसर पर एकता दौड़ में भाग लेने वाले शिक्षको, विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को सीआरपीएफ कैंप की ओर से "रन फार यूनिटी"  टी-शर्ट का वितरण भी किया गया। वहीं उप कमांडेंट अजय सिंह ने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के सपनों को साकार करने हेतु कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को शपथ दिलाया और राष्ट्रीय एकता के महत्व पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। 

एकता दौड़ में बड़ी संख्या में सीआरपीएफ के उच्च व अधिनस्थ अधिकारियों व सैनिकों ने उत्साह से भाग लिया।कार्यक्रम के आयोजन संयोजन में अहम् भूमिका उप कमांडेंट अजय सिंह, सहायक कमांडेंट प्रवीण मोरे, सहायक कमांडेंट लोकनाथन डी, सहायक कमांडेंट राजकुमार चितला सहित अन्य जवानों का रहा।इस दरम्यान जवानों और विद्यार्थियों द्वारा "भारत माता की - जय"  और "सरदार बल्लभ भाई पटेल - अमर रहे" नारों से पूरा वातावरण  गुंजायमान होता रहा l


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाकर किया शुभारंभ, सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर एकता की शपथ दिलाई

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज राष्ट्रीय एकता दिवस – 2025 के अवसर पर नई दिल्ली में ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को एकता प्रतिज्ञा भी दिलाई। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, डॉ. मनसुख मांडविया, दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि 2014 से हर वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि आज सरदार पटेल की 150वीं जयंती है और इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह निर्णय लिया है कि इसे पूरे देश में विशेष रूप से मनाया जाए।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्रता संग्राम में ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत के वर्तमान स्वरूप को गढ़ने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी के आह्वान पर सरदार पटेल ने अपने वकालत के पेशे को त्याग दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। 1928 के बारडोली सत्याग्रह के दौरान उनके नेतृत्व कौशल की सच्ची झलक देखने को मिली, जब किसानों के साथ अन्याय के विरोध में आंदोलन छेड़ा गया। यह आंदोलन जो एक छोटे से कस्बे में शुरू हुआ था, वह देखते ही देखते पूरे देश में फैल गया और ब्रिटिश शासन को किसानों की माँगें मानने पर मजबूर होना पड़ा। इसी आंदोलन के बाद महात्मा गांधी ने उन्हें “सरदार” की उपाधि दी और वे सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम से प्रसिद्ध हुए।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के 562 रियासतों में विभाजन की चुनौती थी और यह प्रश्न उठता था कि इतनी बिखरी हुई रियासतों वाला देश एकजुट भारत कैसे बनेगा।अमित शाह ने बताया कि सरदार पटेल के अथक प्रयास, दृढ़ निश्चय और राजनीतिक कौशल से इन सभी रियासतों का विलय संभव हुआ और वर्तमान भारत का नक्शा आकार में आया। काठियावाड़, भोपाल, जूनागढ़, जोधपुर, त्रावणकोर और हैदराबाद जैसी रियासतों ने अलग रहने की कोशिश की, लेकिन सरदार पटेल की लौह इच्छाशक्ति ने उन्हें भारत के साथ जोड़ दिया।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल का केवल एक अधूरा कार्य शेष रह गया था — कश्मीर का पूर्ण एकीकरण। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाकर वह कार्य पूरा किया, जो सरदार पटेल का सपना था, और आज हमारे सामने वास्तविक रूप से एकीकृत भारत है।

अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के दिन जब देश के लोग तिरंगा फहरा रहे थे, तब सरदार पटेल नौसेना के युद्धपोत की निगरानी कर रहे थे। उस समय लक्षद्वीप पर नियंत्रण को लेकर प्रश्न उठा था, और सरदार पटेल ने तत्काल नौसेना को वहाँ भेजकर तिरंगा फहरवाया, जिससे लक्षद्वीप भारत का अभिन्न अंग बन गया।

गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष की सरकारों ने सरदार पटेल को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे वास्तव में अधिकारी थे। उन्हें भारत रत्न प्राप्त करने में 41 वर्ष लग गए। उन्होंने बताया कि सरदार पटेल के योगदान के अनुरूप कोई भव्य स्मारक भी नहीं बनाया गया था। जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने केवडिया में एक भव्य स्मारक — स्टैच्यू ऑफ यूनिटी — बनाने का संकल्प लिया। इस स्मारक की आधारशिला 31 अक्टूबर 2013 को रखी गई और केवल 57 महीनों में 182 मीटर ऊँची यह प्रतिमा तैयार हुई, जो आज पूरे देश की एकता का प्रतीक है।

अमित शाह ने बताया कि सरदार पटेल किसानों के नेता थे, और इस प्रतिमा के निर्माण में उपयोग किए गए लगभग 25,000 टन लोहे का संग्रह किसानों के उपकरणों को पिघलाकर किया गया। प्रतिमा के निर्माण में लगभग 90,000 घन मीटर कंक्रीट और 1,700 टन कांसे का प्रयोग हुआ। अब तक लगभग 2.5 करोड़ लोग स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का भ्रमण कर चुके हैं।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने जिस मार्ग पर चलकर देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा की नींव रखी, उसी मार्ग पर आज भारत आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में केवडिया में सभी राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) ने सरदार पटेल को भव्य परेड के माध्यम से श्रद्धांजलि दी। गृह मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपरांत हर वर्ष यह एकता परेड इसी भव्य स्वरूप में आयोजित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष ‘रन फॉर यूनिटी’ और प्रतिज्ञा कार्यक्रम भी विशेष रूप से मनाए जा रहे हैं।अमित शाह ने बताया कि कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामाख्या तक पूरे देश में सरदार पटेल के विचारों को विशेषकर युवाओं तक पहुँचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो युवा आज राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा की प्रतिज्ञा ले रहे हैं, वही भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता होंगे।

राष्ट्रीय एकता दिवस 2025: सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर एक भारत, श्रेष्ठ भारत का उत्सव

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परिचय

राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) हर वर्ष 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में देश की एकता, अखंडता और विविधता में एकता के मूल्यों को सम्मान देने हेतु मनाया जाता है। सरदार पटेल ने स्वतंत्र भारत के राजनीतिक और राष्ट्रीय एकीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। इस दिवस का उद्देश्य नागरिकों को देश की एकता, संप्रभुता और अखंडता के प्रति संकल्पबद्ध करना है।

राष्ट्रीय एकता दिवस पहली बार वर्ष 2014 में मनाया गया था, जब भारत सरकार ने इसे औपचारिक रूप से घोषित किया। 31 अक्टूबर 2015 को आयोजित समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत (Ek Bharat Shreshtha Bharat)’ पहल की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच आपसी संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करना है।

2025 का वर्ष विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती का वर्ष है।

सरदार पटेल की विरासत

भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारत के राजनीतिक एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने 560 से अधिक रियासतों — जो देश के लगभग 40% क्षेत्र और जनसंख्या को कवर करती थीं — को भारत संघ में विलय कराया।
‘स्टेट्स डिपार्टमेंट’ के प्रमुख के रूप में उन्होंने कूटनीति, संवाद और आवश्यकतानुसार प्रशासनिक दृढ़ता का प्रयोग करते हुए देश के विखंडन को रोका और भारत की भौगोलिक एकता सुनिश्चित की। उनके नेतृत्व में आधुनिक भारत की एकीकृत लोकतांत्रिक संरचना की नींव पड़ी।

पटेल ने अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) की स्थापना की, जिसे उन्होंने देश की “इस्पाती ढांचा (Steel Frame)” कहा — जो आज भी राष्ट्रीय एकता और प्रशासनिक स्थिरता का आधार है।

एक भारत श्रेष्ठ भारत – सरदार पटेल के दृष्टिकोण की निरंतरता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 31 अक्टूबर 2015 को आरंभ की गई ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत (EBSB)’ पहल, सरदार पटेल के एकीकृत भारत के दृष्टिकोण का मूर्त रूप है।
यह कार्यक्रम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करता है, जिससे “विविधता में एकता” का संदेश सशक्त हो सके।

मुख्य उद्देश्य:

  • नागरिकों के बीच भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करना

  • राज्यों के बीच संवाद और साझेदारी बढ़ाना

  • भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करना

  • पारस्परिक समझ और श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना

EBSB से जुड़े प्रमुख कार्यक्रम:

  • भाषा संगम ऐप – 22 आधिकारिक भाषाओं में 100 से अधिक वाक्यों को सीखने हेतु

  • युवा संगम एवं EBSB क्लब्स – युवाओं के लिए अंतर-राज्यीय संवाद मंच

  • काशी-तमिल संगमम् – उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक बंधन का उत्सव

  • My Bharat डिजिटल पोर्टल – नागरिक सहभागिता, क्विज़ और अभियान

  • Dekho Apna Desh एवं EBSB वॉल जैसी डिजिटल पहलें – देश की विविधता का उत्सव

2025 के आयोजन और कार्यक्रम

इस वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस विशेष रूप से ऐतिहासिक है, क्योंकि यह सरदार पटेल की 150वीं जयंती का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को एकता नगर (केवड़िया), गुजरात में आयोजित मुख्य समारोह में भाग लेंगे।

मुख्य कार्यक्रमों की झलक:

  • मुख्य परेड स्थल: एकता नगर, नर्मदा जिला

  • विशेष प्रदर्शन: वायुसेना की ‘सूर्य किरण’ टीम द्वारा एयर शो

  • भागीदारी: 9 राज्यों और 1 केंद्रशासित प्रदेश के 16 मार्चिंग दस्ते, 4 CAPF इकाइयाँ, NCC कैडेट्स, महिला अधिकारी द्वारा प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर

  • सांस्कृतिक झांकियाँ: “विविधता में एकता” थीम पर आधारित 900 कलाकारों का प्रदर्शन

  • भारत पर्व (1–15 नवंबर): विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, फूड फेस्टिवल और बिरसा मुंडा जयंती विशेष समारोह

  • Run for Unity: दिल्ली में राजघाट से लाल किला तक आयोजित मैराथन, जिसमें छात्र, विकलांगजन, और सुरक्षा बल शामिल होंगे

  • ₹280 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ

देशी नस्ल के कुत्तों की परेड

इस वर्ष की परेड में रामपुर हाउंड्स और मुढ़ोल हाउंड्स (BSF के भारतीय नस्ल के कुत्ते) का दल भी शामिल होगा। यह “आत्मनिर्भर भारत” की भावना को प्रदर्शित करेगा।
इन कुत्तों ने राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ‘रिया’ नामक मुढ़ोल हाउंड, जिसने ‘ऑल इंडिया पुलिस डॉग प्रतियोगिता’ में प्रथम स्थान प्राप्त किया, दल का नेतृत्व करेगी।

Sardar@150 Unity March

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा My Bharat प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से “Sardar@150 Unity March” का आयोजन किया जा रहा है।
यह यात्रा युवाओं में एकता, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई है।

मुख्य बिंदु:

  • लॉन्च: 6 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा

  • प्रतियोगिताएँ: सोशल मीडिया रील्स, निबंध लेखन, Sardar@150 Young Leaders प्रोग्राम

  • पहला चरण (31 अक्टूबर – 25 नवंबर): सभी जिलों में पदयात्राएँ, निबंध-वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, महिला कल्याण शिविर आदि

  • राष्ट्रीय पदयात्रा (26 नवंबर – 6 दिसंबर): करमसद (पटेल का जन्मस्थान) से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (केवड़िया) तक 152 किमी की यात्रा

निष्कर्ष

  • राष्ट्रीय एकता दिवस सरदार पटेल की उस दूरदर्शी नेतृत्व की याद दिलाता है, जिसने विभाजित रियासतों को जोड़कर एक भारत की नींव रखी।
  • आज यह दिवस केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि नागरिक एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रनिर्माण की सतत प्रेरणा बन चुका है।
  • ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के माध्यम से यह उत्सव अब केवल एक दिन नहीं, बल्कि सालभर चलने वाला जन आंदोलन बन गया है — जो भारत की विविधता में एकता के अमर मंत्र को जीवंत रखता है।

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