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आत्मसमर्पित 95 नक्सलियों को 1.40 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से पुनर्वास को मिल रही गति

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन एवं जलवायु मंत्री तथा बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 के तहत बीजापुर जिले के 95 आत्मसमर्पित नक्सलियों को 1 करोड़ 40 लाख 86 हजार 700 रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।

बीजापुर कलेक्टर विश्वदीप ने नीति के प्रावधानों के अनुसार शस्त्रों के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के लिए राशि के आहरण और वितरण की स्वीकृति दी है।

यह प्रोत्साहन राशि आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें नया जीवन शुरू करने और सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दी जा रही है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापना का अवसर मिल रहा है, जिससे बस्तर अंचल में शांति और विकास को नई गति मिल रही है।

कृत्रिम पैर से बबीता के जीवन को मिली नई दिशा, प्रशासन की संवेदनशील पहल बनी सहारा

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वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की तत्परता से दो लाख रुपये की सहायता, आधुनिक कृत्रिम पैर लगने से लौटी आत्मनिर्भरता

अब आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रहीं बबीता यादव, शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार

रायपुर- संवेदनशील प्रशासन और समय पर मिली सहायता ने रायगढ़ जिले की 27 वर्षीय बबीता यादव के जीवन में नई उम्मीद का संचार किया है। एक गंभीर दुर्घटना के बाद अपना बायां पैर गंवाने वाली बबीता अब आधुनिक कृत्रिम पैर की सहायता से आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रही हैं। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की त्वरित पहल से उन्हें दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उनका कृत्रिम पैर लगवाया जा सका।



रायगढ़ जिले के ग्राम मुरालपाली निवासी बबीता यादव के साथ वर्ष 2025 में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद उनके बाएं पैर में गंभीर संक्रमण हो गया। संक्रमण हड्डियों तक फैल जाने के कारण चिकित्सकों को 27 जनवरी 2025 को उनका बायां पैर काटना पड़ा। इस घटना के बाद बबीता के सामने शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गईं और उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया।

विपरीत परिस्थितियों में भी बबीता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी तथा कलेक्टर से कृत्रिम पैर लगवाने के लिए सहायता की मांग की। उनकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल दो लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की और संबंधित अधिकारियों को शीघ्र आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिला प्रशासन के समन्वय से रायपुर स्थित इंडो लाइट्स संस्थान में बबीता को आधुनिक कृत्रिम पैर लगाया गया। कृत्रिम पैर लगने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब वे सहज रूप से चल-फिर रही हैं, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर रही हैं तथा आत्मनिर्भर होकर पहले की तरह सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं।

बबीता यादव ने कहा कि कृत्रिम पैर मिलने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उनका जीवन फिर से पटरी पर लौट आया हो। उन्होंने इस मानवीय सहयोग और संवेदनशील पहल के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, राज्य शासन तथा जिला प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपर कलेक्टर से भेंट कर भी इस सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि समय पर मिली सहायता ने उन्हें नया जीवन और नई उम्मीद प्रदान की है।

स्टेयरिंग ने बदली जिंदगी: पुनर्वास केंद्र से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े सुकमा के युवा

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रायपुर- कभी भय और अनिश्चितता से घिरे जीवन जीने वाले सुकमा जिले के कई युवाओं के लिए आज नई सुबह की शुरुआत हो चुकी है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास पहल और जिला प्रशासन के प्रयासों से ये युवा अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके हाथों में अब बंदूक नहीं, बल्कि रोजगार और सम्मानजनक जीवन की नई उम्मीद है।

पुनेम ज्योति

सोड़ी सोमड़ी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), सुकमा द्वारा पुनर्वासित युवाओं के लिए 30 दिवसीय एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) ऑनर ड्राइवर प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। 13 जून से 12 जुलाई तक चल रहे इस प्रशिक्षण में 31 युवा भाग ले रहे हैं।

प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को केवल वाहन चलाना ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, यातायात नियम, रोड संकेतों की जानकारी और वाहन की सामान्य मरम्मत का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने पर जिला प्रशासन सभी प्रतिभागियों का ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा रहा है, ताकि वे आसानी से रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ सकें।

इस प्रशिक्षण से जुड़ी सोड़ी सोमड़ी बताती हैं कि यहां हमें सुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाना सिखाया जा रहा है। अब हमें विश्वास है कि हम अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे। इसके लिए हम सरकार और प्रशासन के आभारी हैं।

इसी तरह पुनेम ज्योति कहती हैं कि रोजाना मिलने वाले प्रशिक्षण से हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है। ड्राइविंग सीखने के बाद हम रोजगार प्राप्त कर अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा सकेंगे।

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन का उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। कौशल विकास, ड्राइविंग प्रशिक्षण और लाइसेंस जैसी सुविधाओं के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। आज सुकमा के ये युवा आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों की ओर बढ़ रहे हैं और अपने साथ-साथ अपने परिवार के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं। यह बदलाव छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास और कौशल विकास योजनाओं की सार्थक सफलता का प्रेरक उदाहरण है।

बंदूक छोड़ी, सम्मान पाया : आत्मसमर्पण के बाद कमलू राम नुरेटी का पक्का आशियाना हुआ साकार

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 रायपुर- हिंसा की राह छोड़ जब कोई मुख्यधारा में लौटता है, तो न सिर्फ एक जीवन सुधरता है बल्कि पूरे समाज को एक नई दिशा मिलती है। नारायणपुर जिला के ओरछा विकासखंड के ग्राम पंचायत कोहकामेटा निवासी कमलू राम नुरेटी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी नक्सल संगठन की कड़ियों में उलझे कमलू राम ने वर्ष 2013 में आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का बड़ा फैसला किया। आज वे न केवल खुद एक सम्मानित जीवन जी रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।

भटके हुओं को दिखाई राह, शासन ने दिया सहारा

आत्मसमर्पण के बाद कमलू राम ने समाजहित को सर्वाेपरि माना। उन्होंने न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि अन्य नक्सल प्रभावित युवाओं को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित किया। उनके इसी सकारात्मक बदलाव और सामाजिक योगदान को देखते हुए राज्य शासन की पुनर्वास योजनाओं का सीधा लाभ उन तक पहुँचाया गया, जिससे उनके वर्षों पुराने पक्के घर का सपना साकार हो सका।

योजनाओं के समन्वय से तैयार हुआ सपनों का घर

कमलू राम को मुख्यधारा में पूरी तरह स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष प्रयास किए गए। वर्ष 2024-25 में विशेष परियोजना के अंतर्गत 'आत्मसमर्पित नक्सल पीड़ित योजना' के तहत उनका सर्वेक्षण किया गया, जिसके बाद उन्हें 1.20 लाख रुपए की लागत से पक्का आवास प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना से स्वीकृत हुआ।आवास निर्माण के दौरान ही उन्हें मनरेगा (वीबी-जी राम जी) के माध्यम से 23 हज़ार 490 रुपए की मजदूरी भी प्रदान की गई, जिसने निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण आर्थिक संबल दिया। नए आशियाने के साथ-साथ उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय और सौभाग्य योजना के माध्यम से बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध कराया गया है। 

मिला सम्मानजनक जीवन

कमलू राम नुरेटी ने कहा कि पहले मैं परिवार के साथ किराये के मकान में रहता था, जहाँ हर दिन नई कठिनाइयाँ सामने आती थीं। आज अपना पक्का घर, बिजली और शौचालय मिलने से पूरा परिवार बेहद खुश है। हमें एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिला है।

पुनर्वास योजनाएं ला रही हैं क्षेत्र में बदलाव

जिला प्रशासन का मानना है कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए संचालित योजनाएं धरातल पर बेहद सकारात्मक परिणाम दे रही हैं। कमलू राम की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि शासन की नीतियां और समाज का सहयोग एक साथ मिले, तो किसी भी जीवन को संवारा जा सकता है। यह बदलाव बस्तर और आस-पास के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और अटूट विश्वास को मजबूत कर रहा है।

नकटी में शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने से पहले सरकार ने प्रभावित परिवारों को दिया पक्का आवास

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अतिक्रमण हटाने से प्रभावित 65 परिवारों का नया रायपुर में होगा सम्मानजनक पुनर्वास

रायपुर- नया रायपुर के ग्राम नकटी की शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने विकास और मानवीय संवेदनशीलता का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। शासन -प्रशासन ने अतिक्रमण प्रभावित 65 परिवारों को बेघर छोड़ने के बजाय उन्हें नया रायपुर अटल नगर के सेक्टर-30 स्थित सर्वसुविधायुक्त ईडब्ल्यूएस आवासों में बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रभावित परिवारों को केवल पक्का मकान ही नहीं, बल्कि बिजली, पेयजल, सड़क, सीवर, सामुदायिक भवन, उद्यान और अन्य शहरी सुविधाओं से युक्त आवासीय परिसर उपलब्ध कराया जा रहा है। पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से पूरी हो, इसके लिए आठ सदस्यीय समिति भी गठित कर दी गई है।

ग्राम नकटी की शासकीय भूमि पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा  लगभग 38 एकड़ भूमि में से करीब 12 एकड़ भूमि विशेष योजना के लिए उपयोग होगी, जबकि शेष 26 एकड़ भूमि पर मंडल की स्ववित्तीय सामान्य आवास योजना विकसित की जाएगी।

भूमि पर अवैध रूप से निवासरत परिवारों के पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन ने 65 पात्र परिवारों की सूची गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को सौंपी है। इस सूची में शामिल परिवारों को 29 जून 2026 को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सेक्टर-30 में निर्मित रिक्त ईडब्ल्यूएस आवासों का अस्थायी आवंटन कर दिया गया।

पुनर्वास को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखते हुए सरकार ने आवासों को रहने योग्य बनाने का काम भी तेज़ी से शुरू किया। आवासों में ट्यूबलाइट, पंखे और विद्युत व्यवस्था पूरी कर दी गई है।

सरकार ने पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए मुख्यालय के अपर आयुक्त की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में उपयुक्त, कार्यपालन अभियंता, संपदा अधिकारी और सहायक अभियंताओं सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक पात्र परिवार को निर्धारित आवास मिले और पुनर्वास पूरी तरह पारदर्शी एवं बिना किसी अव्यवस्था के संपन्न हो।

सेक्टर-30 में कुल 1376 ईडब्ल्यूएस (जी+3) आवास निर्मित हैं। इनमें चतुर्थ तल पर उपलब्ध 109 रिक्त आवास पुनर्वास के लिए चिन्हित किए गए हैं। 31.45 वर्गमीटर (338.40 वर्गफीट) क्षेत्रफल वाले इन आवासों के परिसर में पक्की कंक्रीट सड़कें, वॉकिंग ट्रैक, सार्वजनिक उद्यान, सामुदायिक भवन, यूटिलिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सीवर नेटवर्क और नियमित जलापूर्ति जैसी सभी आवश्यक शहरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता केवल शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों का सम्मानजनक और स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना है। इसी सोच के साथ आवासों के आवंटन से लेकर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तक हर चरण की निगरानी की जा रही है ।

‘SMILE’ योजना—हाशिए से सम्मान की ओर एक सशक्त पहल

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नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा शुरू की गई SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना आज देश के सबसे वंचित वर्गों—ट्रांसजेंडर समुदाय और भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों—के जीवन में बदलाव की एक नई कहानी लिख रही है। 12 फरवरी 2022 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लॉन्च की गई यह योजना सामाजिक समावेशन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

₹390 करोड़ का निवेश, बदलाव की मजबूत नींव

वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक इस योजना के लिए कुल ₹390 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें ट्रांसजेंडर कल्याण के लिए ₹265 करोड़ और भिक्षावृत्ति पुनर्वास के लिए ₹125 करोड़ आवंटित किए गए हैं। हर वर्ष बढ़ते बजट से यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस योजना को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जमीनी स्तर पर असर—हजारों को मिला नया जीवन

मार्च 2026 तक भिक्षावृत्ति उप-योजना के तहत 31,055 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से 9,935 व्यक्तियों का सफलतापूर्वक पुनर्वास किया जा चुका है। इसके अलावा, देश के 17 राज्यों में 21 ‘गरिमा गृह’ संचालित हो रहे हैं, जहाँ ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सुरक्षित आवास, भोजन और कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए समग्र सहयोग

SMILE योजना, Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 के अनुरूप, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक सहायता देती है। इसके तहत छात्रों को छात्रवृत्ति, कौशल विकास प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में, आयुष्मान भारत TG प्लस के तहत हर ट्रांसजेंडर व्यक्ति को ₹5 लाख तक का वार्षिक स्वास्थ्य कवर मिलता है, जिसमें जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी और हार्मोन थेरेपी भी शामिल हैं।

भिक्षावृत्ति से आत्मनिर्भरता की ओर

इस योजना के अंतर्गत, भिक्षावृत्ति में लगे लोगों की पहचान कर उन्हें आश्रय, परामर्श और कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है, ताकि वे स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और समाज की मुख्यधारा में वापस लौट सकें।

‘SMILE’—सिर्फ योजना नहीं, बदलाव की सोच

SMILE योजना का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे हालात बनाना है जहाँ व्यक्ति को किसी सहायता की जरूरत ही न पड़े। यह योजना समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देती है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती है।

निष्कर्ष

SMILE योजना आज एक ऐसी पहल बनकर उभरी है, जो न केवल जीवन बदल रही है, बल्कि समाज में समानता और गरिमा के मूल्यों को भी मजबूत कर रही है। यह योजना साबित करती है कि सही नीतियों और प्रतिबद्धता के साथ, हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से तेलंगाना एवं अन्य प्रांतो में प्रवासित परिवारों के लिए पुर्नवास के लिए बनेगी कार्ययोजना

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अपर मुख्य सचिव गृह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग के ऐसे विस्थापित परिवार जो किन्ही कारणों बस्तर संभाग के सीमावर्ती तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश में प्रवासित है, ऐसे परिवारों के पुनर्वास की कार्ययोजना बनायी जा रही है। मंत्रालय महानदी भवन में आज अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में पुनर्वास हेतु गठित राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की प्रथम बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के संबंध में कार्ययोजना तैयार करने विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में बताया गया कि जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के लोग तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश राज्य में प्रवासित हो गए है। इसके लिए प्रवासित परिवारों की ओर से राष्ट्रीय जनजातीय आयोग में याचिका दायर किया गया है। इसके तहत माननीय आयोग द्वारा एक माह के भीतर सर्वे कर प्रवासित परिवारों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके परिपालन में बस्तर संभाग के संभागायुक्त द्वारा एक समयबद्ध कार्यक्रम के तहत कलेक्टर दंतेवाड़ा, सुकमा एवं जिला बीजापुर को प्रवासित परिवारों के सर्वे किया जाकर 15 दिन के भीतर प्रतिवेदन प्रेषित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सर्वे अनुसार जिला दंतेवाड़ा से तेलंगाना प्रदेश के 60 ग्राम में 618 परिवार के 2654 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से तेलंगाना प्रदेश के 293 ग्राम में 2733 परिवार के 12026 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से तेलंगाना प्रदेश के 114 ग्राम में 994 परिवार के 5029 व्यक्ति प्रवासित है। इस तरह छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से तेलंगाना राज्य के 467 ग्राम में 4345 परिवार के 19709 व्यक्ति प्रवासित है।

इसी तरह जिला दंतेवाड़ा से आंध्रप्रदेश के 25 ग्राम में 125 परिवार के 568 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से आंध्रप्रदेश के 155 ग्राम में 2462 परिवार के 10787 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से आंध्रप्रदेश के 04 ग्राम में 07 परिवार के 34 व्यक्ति प्रवासित है। इस तरह से छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से आंध्रप्रदेश राज्य के 184 ग्राम में 2594 परिवार के 11389 व्यक्ति प्रवासित है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ राज्य के जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के 667 ग्राम से तेलंगाना एवं आंध्रप्रदेश राज्य के 651 ग्राम में 6939 परिवार के 31098 व्यक्ति प्रवासित है। बैठक में अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बस्तर संभाग डोमन सिंह एवं पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज से चर्चा कर अन्य प्रांतों में प्रवासित परिवारों के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए एक बार और सीमावर्ती राज्यों के अधिकारियों से सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त कर लें।

अपर मुख्य सचिव गृह पिंगुआ ने कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों से अन्य प्रांतों में प्रवासित लोगों के बारे में उनके मूल ग्राम एवं निवास स्थान से आवश्यक जानकारी तैयार कर लें। जिससे पुनर्वास योजना बनाने आसानी होगी। इसी तरह से पुनर्वास योजना बनाने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देशित दिए गए है कि वे शीघ्र ही अपने-अपने विभागों के नोडल अधिकारी नियुक्त कर दें, जिससे शीघ्र पुनर्वास योजना बनाने में आसानी होगी। 

वीडियो कॉन्फ्रेंस में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, गृह विभाग की सचिव नेहा चम्पावत, आईजी बस्तर सुन्दरराज, कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह सहित कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा शामिल हुए। इसी तरह से बैठक में सामान्य प्रशासन, वित्त विभाग, राजस्व, स्कूल शिक्षा, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, वाणिज्य एवं उद्योग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

नए विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे पुनर्वासित युवा: विधानसभा में समझी जनतांत्रिक प्रणाली

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मुख्यधारा की ओर बढ़ते कदम — पुनर्वासित युवाओं ने विधानसभा में देखी जनतांत्रिक प्रक्रिया

संविधान और कानून के दायरे में रहकर समाज के विकास में निभाएंगे सक्रिय भूमिका: लोकतांत्रिक व्यवस्था को निकट से देखने का मिला प्रेरणादायी अवसर

मुख्यधारा में लौटे युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार कर रही सतत प्रयास — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

पुनर्वासितों की सुरक्षा और सम्मान का सरकार रखेगी विशेष ध्यान – मुख्यमंत्री

‘गन’तंत्र छोड़कर गणतंत्र में आने वाले युवाओं का स्वागत – उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा

रायपुर- माओवाद की विचारधारा त्यागकर संविधान की राह अपनाने वाले 120 पुनर्वासित युवाओं के दल ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा पहुंचकर जनतांत्रिक प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। युवाओं ने सदन की कार्यवाही को करीब से देखा तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को समझा। विधानसभा का यह शैक्षणिक भ्रमण उनके लिए प्रेरणादायी और मार्गदर्शक अनुभव साबित हुआ।


विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आत्मीय मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने सभी का ‘जय जोहार’ के साथ स्वागत करते हुए कहा कि पुनर्वास का निर्णय लेने वाले सभी साथियों का राज्य सरकार हृदय से अभिनंदन करती है। उन्होंने कहा कि सरकार पुनर्वासित युवाओं की सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि सभी पुनर्वासित युवा समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें और आत्मनिर्भर बनें। इसी उद्देश्य से पुनर्वास नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर आज संविधान के मंदिर में खड़े होकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का साक्षी बनना इस बात का प्रमाण है कि बदलाव संभव है। मुख्यमंत्री साय ने युवाओं को शिक्षा, स्वरोजगार और शासन की विभिन्न योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जो युवा ‘गन’तंत्र का रास्ता छोड़कर गणतंत्र की मुख्यधारा में लौटे हैं, उनका राज्य सरकार हृदय से स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि संविधान का मार्ग ही शांति, विकास और समृद्धि का मार्ग है। राज्य सरकार पुनर्वासित युवाओं के सम्मानजनक जीवन, रोजगार और कौशल विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये युवा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनेंगे और अन्य लोगों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करेंगे।

इस अवसर पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी, वन मंत्री केदार कश्यप, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक किरण देव तथा सुशांत शुक्ला ने भी पुनर्वासित युवाओं से मुलाकात कर उन्हें आश्वस्त किया कि शासन उनके साथ दृढ़ता से खड़ा है।


पुनर्वासित युवाओं ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को निकट से देखने का यह अवसर उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि वे अब संविधान और कानून के दायरे में रहकर समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

उल्लेखनीय है कि 120 सदस्यीय इस दल में 66 पुरुष एवं 54 महिला प्रतिभागी शामिल हैं। पुनर्वासित युवाओं का यह समूह तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण के तहत रायपुर पहुंचा है, जहां वे शासन-प्रशासन की विभिन्न व्यवस्थाओं, कार्यप्रणालियों एवं विकासात्मक पहलों से अवगत हो रहे हैं।

सीएआरए ने गुवाहाटी में दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की

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भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय के तहत केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) ने आज (30 जनवरी 2026) गुवाहाटी, असम में "विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना" विषय पर एक क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला सफलतापूर्वक आयोजित की।

पूरे दिन चलने वाली परामर्श बैठक में 122 हितधारकों ने भाग लिया, जिनमें राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियां (एसएआरए), विशेष गोद लेने एजेंसियां (एसएए), जिला बाल संरक्षण इकाइयां (डीसीपीयू), मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य पेशेवर, बाल संरक्षण कार्यकर्ता और क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से गोद लेने की प्रक्रिया से जुड़े कार्यकर्ता शामिल थे। बड़ी संख्या में भागीदारी ने यह दर्शाया कि विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए गोद लेने और पुनर्वास तंत्र को मजबूत करने के प्रति संस्थागत प्रतिबद्धता बढ़ रही है।

कार्यशाला की शुरुआत सीएआरए की पहलों का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए हुई, जिनका उद्देश्य विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए परिवार-आधारित देखभाल को बढ़ावा देना है, इसके बाद एक फिल्म का प्रदर्शन किया गया जिसमें विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों को सफलतापूर्वक अपनाने की कहानियाँ दिखाई गईं। कार्यक्रम में आगे, प्रत्येक राज्य के प्रतिनिधियों ने बच्चों को अपनाने और गैर-संस्थागत देखभाल को सुगम बनाने में वर्तमान चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और अपनाये जा रहे अभिनव दृष्टिकोणों पर अपने अनुभव साझा किए।

विशेष विषयों से संबंधित सिफारिशों को सामने लाने के लिए एक समूह चर्चा का भी आयोजन किया गया, जिनके बारे में जानकारी प्रतिनिधियों को पहले ही प्रदान की गई थीं। विचार-विमर्श निम्नलिखित विषयों से संबंधित थे:

  1. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी मूल्यांकन
  2. दत्तक ग्रहण के कानूनी और प्रक्रिया संबंधी पहलू
  3. वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियाँ
  4. शिकायत निवारण और संस्थागत समन्वय

प्रत्येक समूह ने पहचान, प्रमाणीकरण, परामर्श, प्रतिस्थापन और दत्तक ग्रहण के बाद के सहायता तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू करने योग्य सिफारिशें प्रस्तुत कीं। कार्यशाला में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक ग्रहण के संबंध में रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। अंतर-क्षेत्रीय समन्वय बढ़ाने, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की क्षमताओं का निर्माण करने और दत्तक ग्रहण करने वाले संभावित माता-पिता के बीच जानकारी आधारित निर्णय लेने को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।

परामर्श बैठक का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि दिव्यांग बच्चों को घरेलू स्तर पर गोद लेने को बढ़ावा दिया जाएगा, गैर-संस्थागत देखभाल तंत्र को मजबूत किया जाएगा और दत्तक ग्रहण जागरूकता माह के दौरान जागरूकता प्रयासों को तीव्र करने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप विकसित किया जाएगा।

सीएआरए ने अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया कि प्रत्येक बच्चे को, चाहे उसकी शारीरिक या विकासात्मक चुनौतियाँ कैसी भी हों, एक सुरक्षित, पोषणपूर्ण और स्थायी पारिवारिक वातावरण में पलना-बढ़ना चाहिए और गोद लेना बच्चों के कल्याण, पारदर्शिता और बच्चे के सर्वोत्तम हित के सिद्धांतों द्वारा मार्गदर्शित होना चाहिए।


‘पूना मारगेम’ से शांति की ओर मजबूती से बढ़ते कदम: बीजापुर में 34 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण

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छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रदेश बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बीजापुर जिले में ₹84 लाख के इनामी 34 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागते हुए भारतीय संविधान में आस्था जताई है और समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी की दृढ़ इच्छाशक्ति के अनुरूप छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में चल रहे सतत और ठोस प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की ‘पूना मारगेम’ नीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि संवाद, संवेदनशीलता और विकास, हिंसा से कहीं अधिक प्रभावी समाधान हैं। यह आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने की घटना नहीं है, बल्कि भय और भ्रम से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का निर्णय है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले सभी व्यक्तियों के पुनर्वास, सुरक्षा, आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि वे समाज में आत्मनिर्भर बन सकें।

मुख्यमंत्री ने आज भी भटके हुए युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा का मार्ग त्यागें, लोकतंत्र और विकास के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें तथा प्रदेश और देश के निर्माण में सहभागी बनें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रदेश बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास जारी रहेंगे।

आत्मसमर्पित एवं नक्सल पीड़ित 79 युवाओं को मिली नई राह

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कौशल प्रशिक्षण पूर्ण करने पर 10.33 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित

रायपुर- जिला प्रशासन द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए प्रयासों के अंतर्गत आज एक महत्वपूर्ण पहल को मूर्त रूप दिया गया। नक्सलवादी आत्मसमर्पित, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 के तहत जिला कौशल विकास प्राधिकरण एवं लाइवलीहुड कॉलेज नारायणपुर द्वारा प्रशिक्षित 79 प्रशिक्षणार्थियों को कौशल प्रशिक्षण पूर्ण करने पर कुल 10 लाख 33 हजार 965 रुपये की प्रोत्साहन राशि चेक के रूप में वितरित की गई।

जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर ने आत्मसमर्पित युवाओं को ड्राइविंग, प्लंबिंग, सिलाई एवं अन्य आजीविका उन्मुख trades में प्रशिक्षण पूरा करने पर शुभकामनाएँ दीं। ये सभी प्रशिक्षणार्थी जिले के अत्यंत सुदूर एवं दुर्गम क्षेत्रों—सोनपुर, अबूझमाड़ एवं कोंडागांव—से संबंधित है। प्रोत्साहन राशि का सदुपयोग सुनिश्चित करने पर विशेष बल देते हुए कलेक्टर ने

कहा कि धनराशि को परिवार की आवश्यक जरूरतों, बच्चों की शिक्षा तथा कृषि व आजीविका संबंधी कार्यों में लगाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब सभी को अपने गांवों में रहकर खेती-किसानी, मकान निर्माण तथा अपने कौशल के अनुरूप रोजगार गतिविधियों को आगे बढ़ाना चाहिए।

महिला प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने स्व-सहायता समूहों से जुड़कर सिलाई कार्य को संगठित रूप से बढ़ाने, उत्पादन क्षमता विकसित करने और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं प्लंबिंग प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूप स्थापना, मरम्मत और जलसुविधा से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का सुझाव दिया, ताकि गांवों को बेहतर सेवाएँ प्राप्त हो सकें। आधुनिक समय में बढ़ते ऑनलाइन धोखाधड़ी मामलों पर सतर्क रहने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक या संदेश पर भरोसा न करें तथा ओटीपी, एटीएम पिन या बैंक संबंधी जानकारी किसी से साझा न करें। किसी संदिग्ध स्थिति में तत्काल बैंक या प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित करने की सलाह दी।

कार्यक्रम के अंत में सभी 79 प्रशिक्षणार्थियों को चेक वितरित किए गए और उन्हें मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। यह पहल आत्मसमर्पित नक्सलियों को सम्मानजनक जीवन देने और आर्थिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में जिला प्रशासन का सराहनीय प्रयास है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। इस अवसर पर जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

समर्पित माओवादी : वर्दी की जगह अब होटल की यूनिफॉर्म पहन कर करेंगे जिंदगी की नई शुरुआत

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30 आत्मसमर्पित माओवादी सदस्यों को दिया जा रहा अतिथि सत्कार का प्रशिक्षण

रायपुर-छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के माओवादियों ने जब पुनर्वास किया, तब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील सरकार ने भी इन समर्पित माओवादियों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए सकारात्मक कदम उठाये जा रहे हैं, जिसके तहत जगदलपुर के निकट आड़ावाल में लाइवलीहुड कॉलेज में इन 30 आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास कार्ययोजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत गेस्ट सर्विस एसोसिएट का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह पहल न केवल इन पूर्व माओवादी सदस्यों को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि बस्तर के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास भी कर रही है।

ग्राहक सेवा, सत्कार  तक प्रशिक्षण का सफर

ये सभी 30 पुनर्वासित माओवादी जो कभी घने जंगलों में हिंसा के रास्ते पर थे, आज लाइवलीहुड कॉलेज के कैंपस में ग्राहक संवाद, होटल मैनेजमेंट और सॉफ्ट स्किल्स सीख रहे हैं। करीब 3 महीने के इस कोर्स में उन्हें होटल इंडस्ट्रीज की बारीकियां सिखाई जा रही हैं, ताकि वे बस्तर के होमस्टे, रिसॉर्ट्स और टूरिस्ट स्पॉट्स में आत्मविश्वास से काम कर सकें।

दर्द भरे जीवन से आजादी की ओर

एक पूर्व माओवादी रामू (परिवर्तित नाम) ने भावुक होकर कहा कि बस्तर के जंगल में हिंसा की जिंदगी ने सिर्फ दर्द दिया, अब लाइवलीहुड कॉलेज में सीखकर लगता है, असली आजादी यहीं है। अब स्वयं मेहनत कर घर-परिवार को खुशहाल बनाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदृष्टि एवं मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अमल से अब तक हजारों युवा सशक्त हो चुके हैं। बीजापुर जैसे संवेदनशील इलाकों में सरकार की पुनर्वास नीति सुनहरा मॉडल साबित हो रहा है। नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा, यहां हिंसा की जगह विकास और रोजगार की नई कहानी लिखी जाएगी।

उपमुख्यमंत्री एवं राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बनी संवेदनशील पुनर्वास नीति का यह असर है कि मुख्यधारा में युवा लौट रहे हैं और शासन द्वारा इन पुनर्वासित युवाओं को रोजगार और कौशल सीखा कर इन्हें समाज के साथ पुनः जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। बस्तर अपने प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है ऐसे में पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी उद्योग में युवा जुड़कर रोजगार पा सकते हैं और अपनी जीवन संवार सकते हैं l इससे बस्तर पर्यटन को भी नया आयाम प्राप्त होगा, पर्यटक बस्तर के पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित होंगे l


बस्तर में पुनर्वास की रोशनी से मिट रहा भय का अंधकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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संवाद, संवेदना और विश्वास की नई धरती बन रहा है बस्तर - मुख्यमंत्री

रायपुर- राज्य सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ और ‘नियद नेल्ला नार योजना’ ने बस्तर अंचल में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। इन नीतियों के परिणामस्वरूप माओवाद की हिंसक विचारधारा में लिप्त युवाओं में विश्वास जागा है और वे मुख्यधारा में लौटकर विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीजापुर जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्ज़ीवन” अभियान के तहत आज सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों से कुल ₹66 लाख के इनामी 51 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम इस बात का प्रमाण है कि बस्तर भय और हिंसा के अंधकार से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और प्रगति के नए युग में प्रवेश कर रहा है। शासन की संवेदनशील नीतियाँ और मानवीय दृष्टिकोण इस परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि संवाद ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में देश अब नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस परिवर्तन की यात्रा में सहभागी बनें, ताकि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक गाँव शांति, प्रगति और समरसता का प्रतीक बन सके।

स्ट्रोक की रोकथाम और पुनर्वास में समग्र एवं निवारक देखभाल प्रदान करने में आयुष प्रणालियों की महत्वपूर्ण भूमिका: आयुष मंत्रालय

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आयुष मंत्रालय ने स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के लिए आयुष प्रणालियों की समग्र, निवारक और पुनर्वासात्मक देखभाल की भूमिका पर बल दिया है। भारत में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक होने के नाते, स्ट्रोक से निपटने के लिए आयुष प्रणालियाँ एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाती हैं, जो शरीर की संतुलन प्रणाली को सुदृढ़ करने, लचीलापन बढ़ाने और दीर्घकालिक पुनर्प्राप्ति को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है — जिससे पारंपरिक चिकित्सा उपचार को प्रभावी रूप से पूरक बनाया जा सके।

आयुष और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने कहा,

“स्ट्रोक की बढ़ती चुनौती व्यापक और एकीकृत स्वास्थ्य रणनीतियों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। निवारक देखभाल और दीर्घकालिक पुनर्वास पर आधारित आयुष प्रणालियाँ पारंपरिक स्ट्रोक प्रबंधन को महत्वपूर्ण रूप से पूरक कर सकती हैं। आयुष मंत्रालय साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो और स्ट्रोक के राष्ट्रीय बोझ को कम किया जा सके। हमारा ध्यान मजबूत शोध सहयोग और जन-जागरूकता बढ़ाने पर है, जो स्ट्रोक की घटनाओं को कम करने और सतत पुनर्प्राप्ति मार्गों को समर्थन देने में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है।”

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा,

“आयुष प्रणालियाँ सामूहिक रूप से स्ट्रोक जैसी जटिल न्यूरोलॉजिकल विकारों को समझने और प्रबंधित करने के लिए एक समग्र ढाँचा प्रदान करती हैं। मंत्रालय सहयोगात्मक और अनुवादात्मक अनुसंधान को बढ़ावा दे रहा है ताकि आयुष आधारित उपचारों की चिकित्सीय क्षमता को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और विस्तारित किया जा सके, जिससे स्ट्रोक की रोकथाम, पुनर्वास और समग्र तंत्रिका स्वास्थ्य के लिए एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ किया जा सके।”

आयुष प्रणालियाँ शरीर, मन और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर देती हैं। इनकी निवारक दर्शनशास्त्र और समग्र उपचार पद्धतियाँ न केवल रोग प्रबंधन पर केंद्रित हैं, बल्कि प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पुनरावृत्ति कम करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने पर भी ध्यान देती हैं।

आयुर्वेद में स्ट्रोक को वात दोष की असंतुलन स्थिति के रूप में समझा जाता है, जिससे शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या पक्षाघात हो सकता है। आयुर्वेदिक उपचार का उद्देश्य संतुलन बहाल करना है — जिसमें शुद्धिकरण, पुनर्स्थापन और पुनर्वासात्मक चिकित्सा शामिल हैं जो रक्त संचार, तंत्रिका कार्य और समग्र जीवन शक्ति को बढ़ावा देती हैं।

होम्योपैथी को सहायक उपचार के रूप में प्रभावी पाया गया है, विशेषकर न्यूरोलॉजिकल सुधार, मोटर रिकवरी और स्ट्रोक के बाद जीवन की गुणवत्ता में सुधार में।

आयुष मंत्रालय ने बताया कि विभिन्न आयुष प्रणालियाँ स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन और पुनर्वास के लिए विशिष्ट और पूरक दृष्टिकोण प्रदान करती हैं, जो शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल दोनों प्रकार की पुनर्प्राप्ति को लक्षित करती हैं।

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