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एनसीबी की राष्ट्रीय कार्यशाला में आईएस 456:2025 (ड्राफ्ट) पर मंथन, कंक्रीट स्थायित्व और गुणवत्ता आश्वासन पर विशेषज्ञों की चर्चा

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राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन सामग्री परिषद (एनसीबी) ने 9 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में “आईएस 456:2025 (ड्राफ्ट) के अनुसार कंक्रीट के स्थायित्व डिज़ाइन और गुणवत्ता आश्वासन” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में निर्माण उद्योग, शैक्षणिक जगत, अनुसंधान संस्थानों और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के विशेषज्ञों ने भाग लिया और स्थायित्व-आधारित कंक्रीट डिज़ाइन तथा प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की।

कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण उन्नत कंक्रीट प्रौद्योगिकी (एडवांस्ड कंक्रीट टेक्नोलॉजी - एसीटी) पर छह माह के ऑनलाइन प्रमाणन कार्यक्रम का शुभारंभ रहा, जिसे भारत सरकार के कौशल विकास मिशन के अनुरूप तैयार किया गया है। एनसीबी के प्रमुख (सीसीई) डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि यह 25-सप्ताह का हाइब्रिड कार्यक्रम है, जिसमें सप्ताहांत ऑनलाइन कक्षाएँ और एनसीबी बल्लभगढ़ में चार दिवसीय ऑन-साइट मॉड्यूल शामिल है। इसमें मिक्स डिज़ाइन, स्थायित्व, गुणवत्ता आश्वासन/नियंत्रण प्रणाली, आरएमसी संचालन और उन्नत सतत कंक्रीट जैसे विषय शामिल होंगे।

समापन पैनल चर्चा “क्या हम आईएस 456:2025 को लागू करने के लिए तैयार हैं?” में उद्योग की तैयारी, कार्यान्वयन चुनौतियों और क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया। इस सत्र का संचालन एनसीबी के संयुक्त निदेशक ई. अमित त्रिवेदी ने किया, जबकि विशेषज्ञों ने प्रदर्शन-आधारित मानकों और मजबूत गुणवत्ता आश्वासन प्रथाओं पर जोर दिया। एनसीबी के प्रमुख (सीआईएस)जी. जे. नायडू ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन सीएसआईआर-सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार रामानर्चला ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। भारतीय मानक ब्यूरो के उप महानिदेशक (मानकीकरण) ई. संजय पंत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि एनसीबी के महानिदेशक डॉ. एल. पी. सिंह भी कार्यक्रम में शामिल रहे।

तकनीकी सत्रों में एनसीबी के संयुक्त निदेशक ई. पी. एन. ओझा, आईआईटी मद्रास के प्रो. मनु संतानम, एनसीबी के पूर्व संयुक्त निदेशक ई. वी. वी. अरोड़ा तथा टंडन कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन प्रो. महेश टंडन ने कंक्रीट स्थायित्व डिज़ाइन, निर्माण सामग्री, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और ड्राफ्ट कोड के अनुरूप प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट प्रावधानों पर अपने विचार साझा किए।

गुणवत्ता आश्वासन (QA) सम्मेलन 2026

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‘ट्रेसबिलिटी, स्पीड और ट्रस्ट – स्मार्ट क्वालिटी एश्योरेंस के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग’ विषय पर एक क्वालिटी एश्योरेंस (QA) कॉन्क्लेव 13 फरवरी 2026 को मानेकशॉ ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

इस सम्मेलन में रक्षा मंत्रालय, भारतीय नौसेना, गुणवत्ता आश्वासन एजेंसियों, शिपयार्ड, रक्षा सार्वजनिक उपक्रम (PSU) और प्रमुख उद्योग भागीदारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इसमें नौसेना और रक्षा विनिर्माण में गुणवत्ता आश्वासन के भविष्य पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

सम्मेलन का उद्देश्य

इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य डिजिटल तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करना है, जिससे:

  • गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रियाओं को मजबूत किया जा सके

  • विनिर्माण श्रृंखला में ट्रेसबिलिटी बढ़ाई जा सके

  • अनुमोदन और प्रमाणन प्रक्रियाओं में तेजी लाई जा सके

  • सभी हितधारकों के बीच दीर्घकालिक विश्वास बनाया जा सके

यह सम्मेलन नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों और उद्योग नेताओं के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा, ताकि वे सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान कर सकें और आधुनिक, तकनीक-सक्षम QA पारिस्थितिकी तंत्र के लिए रोडमैप तैयार कर सकें।

तकनीकी सत्र

तकनीकी सत्रों में पैनल चर्चाएँ होंगी, जिनमें शामिल हैं:

  • शिपबिल्डिंग के लिए डिजिटल QA – ट्रेसबिलिटी, स्पीड और ट्रस्ट

  • QA नीति अनुपालन और उद्योग सहयोग

  • नौसैनिक जहाज निर्माण और स्पेयर सप्लाई के लिए QA

इन चर्चाओं में शिपबिल्डिंग, स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति, नीति अनुपालन और सहयोगी गुणवत्ता आश्वासन ढाँचे से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा की जाएगी।

महत्वपूर्ण पहलें

सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की जाएँगी, जिनमें शामिल हैं:

  • Indian Naval & Marine Industry – Capability Catalogue का विमोचन, जिससे उद्योग सहभागिता और सूचना साझा करने को मजबूत किया जाएगा।

  • कॉमन इंफॉर्मेशन मॉडल पर संयुक्त सेवा दिशानिर्देशों का प्रकाशन, ताकि युद्ध प्रणालियों और सेंसरों के डेटा का एकीकृत प्रबंधन हो सके।

  • ग्रीन चैनल स्टेटस और स्व-प्रमाणीकरण (Self-Certification) की घोषणा, जो गुणवत्ता प्रदर्शन में उत्कृष्ट उद्योग भागीदारों को सम्मानित करेगी।


IS 19412:2025 – अगरबत्ती (Incense Sticks) के लिए नया भारतीय मानक जारी, उपभोक्ता सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित

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केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री, प्रत्‍भात जोशी ने IS 19412:2025 – अगरबत्ती (Incense Sticks) — विनिर्देश, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा विकसित, जारी किया। यह मानक राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर भारत मंडपम, नई दिल्ली में जारी किया गया।

नए मानक में कुछ कीटाणुनाशक रसायनों और सिंथेटिक सुगंधित पदार्थों के अगरबत्तियों में उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है, जो मानव स्वास्थ्य, इनडोर वायु गुणवत्ता और पर्यावरण के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। IS 19412:2025 में ऐसे निषिद्ध पदार्थों की सूची दी गई है, जिनमें कीटाणुनाशक रसायन जैसे एलेथ्रिन, पर्मेथ्रिन, सायपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन और फिप्रोनिल शामिल हैं, साथ ही सिंथेटिक सुगंधित इंटरमीडिएट्स जैसे बेंज़ाइल साइनाइड, एथिल एक्रिलेट और डाइफेनिलामाइन। ये कई पदार्थ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिबंधित या सीमित हैं।

उपभोक्ता सुरक्षा, इनडोर वायु गुणवत्ता, पर्यावरणीय स्थिरता और नियामक अनुपालन को ध्यान में रखते हुए, साथ ही वैश्विक स्तर पर कुछ सुगंधित रसायनों और रसायनों पर प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए, अगरबत्ती के लिए समर्पित भारतीय मानक की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। यह मानक अगरबत्तियों को मशीन-निर्मित, हाथ-निर्मित और पारंपरिक मसाला अगरबत्तियों में वर्गीकृत करता है और कच्चे माल, जलने की गुणवत्ता, सुगंध प्रदर्शन और रासायनिक पैरामीटरों के लिए आवश्यकताएँ निर्धारित करता है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित उत्पाद और गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

इस मानक के अनुरूप उत्पाद BIS स्टैण्डर्ड मार्क प्राप्त करने के पात्र होंगे, जिससे उपभोक्ता आत्मविश्वास के साथ सूचित विकल्प चुन सकेंगे। IS 19412:2025 के अधिसूचना से उपभोक्ता विश्वास बढ़ाने, नैतिक और टिकाऊ उत्पादन प्रथाओं को बढ़ावा देने, पारंपरिक आजीविका की रक्षा करने और भारतीय अगरबत्ती उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार में पहुंच बढ़ाने की उम्मीद है।

इस मानक का विकास Fragrance and Flavour Sectional Committee (PCD 18) द्वारा व्यापक हितधारक परामर्श के माध्यम से किया गया। CSIR–Central Institute of Medicinal and Aromatic Plants (CIMAP), CSIR–Indian Institute of Toxicology Research (IITR), CSIR–Central Food Technological Research Institute (CFTRI), Fragrance and Flavour Development Centre (FFDC), कन्नौज, और All India Agarbatti Manufacturers Association के विशेषज्ञों ने इसके निर्माण में योगदान दिया।

भारत अगरबत्तियों का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, जिसमें उद्योग का वार्षिक अनुमानित आकार लगभग ₹8,000 करोड़ है और 150 से अधिक देशों में लगभग ₹1,200 करोड़ का निर्यात होता है। यह क्षेत्र कारीगरों, MSMEs और माइक्रो-उद्यमियों का बड़ा इकोसिस्टम सहारा देता है, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, और महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण रोजगार के अवसर प्रदान करता है।

अगरबत्तियां, जो भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाओं का अभिन्न हिस्सा हैं, घरों, पूजा स्थलों, ध्यान केंद्रों और वेलनेस स्पेस में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं। योग, ध्यान, अरोमाथेरेपी और समग्र स्वास्थ्य में वैश्विक रुचि बढ़ने के साथ, अगरबत्ती उत्पादों की मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काफी बढ़ गई है।

सरकार ने लॉन्च किया ऑनलाइन पोर्टल: निजी उद्योग अब बन सकेंगे सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र (GATC)

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उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत उपभोक्ता मामले विभाग ने भारतीय उद्योगों, प्रयोगशालाओं और परीक्षण सुविधाओं के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है, जिसके माध्यम से वे सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र (Government Approved Test Centre - GATC) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन 30 नवंबर, 2025 तक आधिकारिक पोर्टल https://doca.gov.in/gatc पर ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं। यह पहल भारत में वजन और माप (Weights and Measures) की सत्यापन प्रणाली को विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे व्यापार में सटीकता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

कानूनी ढांचा और उद्देश्य

यह पहल लीगल मेट्रोलॉजी (Government Approved Test Centre) नियम, 2013 के अंतर्गत की गई है, जिनमें 23 अक्टूबर, 2025 को संशोधन किया गया था। संशोधित नियमों ने निजी क्षेत्र को सशक्त बनाया है ताकि वे सरकारी सत्यापन प्रणाली का हिस्सा बन सकें। इस सुधार के तहत, निजी प्रयोगशालाएं और उद्योग अब वजन एवं माप उपकरणों के सत्यापन कार्य में भाग ले सकेंगे।

यह पहल सार्वजनिक–निजी साझेदारी (PPP) मॉडल को बढ़ावा देती है, जिससे सत्यापन क्षमता में वृद्धि, प्रतीक्षा समय में कमी और व्यापार एवं उपभोक्ताओं के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित होंगी।

आवेदन प्रक्रिया

जिन संस्थानों के पास उपयुक्त परीक्षण उपकरण, अंशांकन (calibration) सुविधाएं और योग्य तकनीकी कर्मचारी हैं, वे मान्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं। पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल, सरल और पारदर्शी बनाया गया है — जिसमें ऑनलाइन शुल्क भुगतान, आवेदन स्थिति की ट्रैकिंग और तेज अनुमोदन प्रक्रिया शामिल है।

मान्यता प्राप्त केंद्र 18 प्रकार के उपकरणों का सत्यापन कर सकेंगे

मान्यता प्राप्त GATCs को निम्नलिखित 18 प्रकार के उपकरणों का सत्यापन या पुनः सत्यापन करने की अनुमति होगी —

  1. वाटर मीटर

  2. स्फिग्मोमैनोमीटर (रक्तचाप मापक)

  3. क्लिनिकल थर्मामीटर

  4. ऑटोमैटिक रेल वेब्रिज

  5. टेप माप

  6. नॉन-ऑटोमैटिक वजन मशीन (150 किग्रा तक)

  7. नॉन-ऑटोमैटिक वजन मशीन (क्लास IIII)

  8. लोड सेल

  9. बीम स्केल

  10. काउंटर मशीन

  11. सभी प्रकार के वेट्स

  12. गैस मीटर

  13. ऊर्जा मीटर

  14. नमी मापक (Moisture Meter)

  15. वाहन स्पीड मीटर

  16. ब्रीथ एनालाइज़र

  17. मल्टी-डायमेंशनल माप उपकरण

  18. फ्लो मीटर

शुल्क और निरीक्षण व्यवस्था

आवेदनकर्ताओं को ₹2 लाख प्रति श्रेणी के हिसाब से ऑनलाइन शुल्क जमा करना होगा, जो वार्षिक नवीनीकरण के लिए भी लागू होगा।

सत्यापन शुल्क नए पांचवें अनुसूची (Fifth Schedule) के अनुसार तय किए गए हैं, जैसे —

  • घरेलू वाटर मीटर: ₹250

  • वाणिज्यिक वाटर मीटर: ₹1,000

  • औद्योगिक वाटर मीटर: ₹2,500

  • स्फिग्मोमैनोमीटर: ₹100

  • क्लिनिकल थर्मामीटर: ₹50

  • नॉन-ऑटोमैटिक वजन मशीन (150 किग्रा तक): ₹3,000

  • फ्लो मीटर (100 मिमी तक): ₹5,000

जहां शुल्क सूचीबद्ध नहीं है, वहां संबंधित राज्य के लीगल मेट्रोलॉजी (Enforcement) नियमों के अनुसार शुल्क लागू होगा।

उपभोक्ता संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

यह पहल स्वास्थ्य, परिवहन, अवसंरचना और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में माप की सटीकता सुनिश्चित करेगी, जहां परिशुद्धता (precision) अत्यंत आवश्यक है।

इससे राज्य लीगल मेट्रोलॉजी विभागों की क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे वे निरीक्षण, प्रवर्तन और उपभोक्ता शिकायत निवारण पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुधार

संशोधित नियम वैश्विक OIML (International Organization of Legal Metrology) मानकों के अनुरूप हैं। भारत अब एक OIML प्रमाणन प्राधिकरण (Certification Authority) के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाणपत्र जारी कर सकता है, जिससे भारतीय निर्माताओं को देश के भीतर ही वैश्विक प्रमाणन प्राप्त करने में सुविधा होगी।


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