Media24Media.com: #PublicSafety

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #PublicSafety. Show all posts
Showing posts with label #PublicSafety. Show all posts

बाढ़ नियंत्रण की तैयारियों को लेकर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा बाढ़ नियंत्रण को लेकर कान्फ्रेंस

No comments Document Thumbnail

प्रदेश में 18 अगस्त को टेबल टॉप और 20 अगस्त को होगी मॉक एक्सरसाइज

रायपुर- भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ राज्य में बाढ़ आपदा प्रबंधन एवं पूर्व तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के सभी जिलों के आपदा प्रबंधन नोडल अधिकारियों को बाढ़ की स्थिति से निपटने और आवश्यक कार्यवाहियों के संचालन के लिए विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया।

18 को टेबल टॉप और 20 अगस्त को मॉक एक्सरसाइज

कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा राज्य के सभी जिलों में बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी। इसके ठीक बाद 20 अगस्त को व्यापक मॉक एक्सरसाइज का आयोजन होगा।

अधिकारियों को कार्यप्रणाली समझने के निर्देश

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान की जाने वाली सभी प्रक्रियाओं को भली-भांति समझें। उन्होंने कहा कि वास्तविक बाढ़ आपदा के समय त्वरित राहत व बचाव कार्य के लिए यह अभ्यास अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।

विभिन्न विभागों की भूमिका पर चर्चा

बैठक के दौरान बाढ़ आपदा के समय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और पशुपालन जैसे अंतर-विभागीय समन्वय से की जाने वाली कार्यवाहियों की विस्तार से समीक्षा की गई।

इस उच्च स्तरीय बैठक में नगर सेना, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा एवं SDRF के महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय), मंडल रेल प्रबंधक (रायपुर डिवीजन), NDRF कमांडेंट, स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट के निदेशक, विज्ञान केंद्र, दूरसंचार, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के साथ-साथ राज्य शासन के पंचायत, ऊर्जा, जल संसाधन, लोक निर्माण, परिवहन और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बीमारी रोकने की ताक़त आपके पास, संदिग्ध मामलों की सूचना सीधे सरकार तक पहुंचाएं

No comments Document Thumbnail

किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले दिखें तो IHIP पोर्टल पर दें जानकारी, स्वास्थ्य विभाग करेगा तत्काल जांच

रायपुर- किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में यदि अचानक एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले सामने आने लगें, तो यह किसी संभावित रोग प्रकोप (Outbreak) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले इसकी जानकारी स्थानीय लोगों को ही होती है। अब आम नागरिक भी ऐसी संदिग्ध स्वास्थ्य घटनाओं की सूचना सीधे भारत सरकार के एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) पर दर्ज कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग समय रहते जांच कर आवश्यक नियंत्रण उपाय शुरू कर सके।

जनभागीदारी को बढ़ावा देने और रोगों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के अंतर्गत इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) पर सामुदायिक आधारित रोग निगरानी (Community Based Surveillance) की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस व्यवस्था के माध्यम से कोई भी नागरिक अपने आसपास दिखाई देने वाली किसी असामान्य बीमारी अथवा संभावित रोग प्रकोप की सूचना सीधे ऑनलाइन दर्ज कर सकता है।

पोर्टल पर सूचना दर्ज करते समय सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर, आयु, लिंग, पता तथा व्यवसाय जैसी सामान्य जानकारी के साथ घटना की तिथि, स्थान, बीमारी अथवा स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संक्षिप्त विवरण दर्ज करना होता है। यदि घटना से संबंधित कोई फोटो या अन्य दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उन्हें भी प्रमाण के रूप में अपलोड किया जा सकता है। सभी अनिवार्य जानकारी भरने के बाद मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी से सत्यापन करने पर सूचना संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों तक पहुंच जाती है। आवश्यकता पड़ने पर अधिकारी अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना देने वाले व्यक्ति से भी संपर्क कर सकते हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी संक्रामक बीमारी के फैलाव को रोकने में समय पर सूचना मिलना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। प्रारंभिक स्तर पर मिली सूचना से स्वास्थ्य विभाग शीघ्र जांच, सैंपल संग्रह, उपचार और आवश्यक नियंत्रण उपाय शुरू कर सकता है, जिससे बीमारी को बड़े प्रकोप या महामारी का रूप लेने से रोका जा सकता है। सामुदायिक निगरानी न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाती है, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से पूरे समाज की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल सत्य, तथ्यात्मक एवं जिम्मेदारीपूर्ण जानकारी ही पोर्टल पर दर्ज करें। अफवाहों, अपुष्ट सूचनाओं या भ्रामक जानकारी से बचें, ताकि स्वास्थ्य तंत्र वास्तविक घटनाओं पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कर सके।

यदि आपके आसपास किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में अचानक एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले दिखाई दें, तो उसकी सूचना https://ihip.mohfw.gov.in/cbs/#/ पर अवश्य दें। आपकी समय पर दी गई एक सूचना अनेक लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकती है और संभावित महामारी को प्रारंभिक स्तर पर ही रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई

No comments Document Thumbnail

ओवररेटिंग मामले में दो आबकारी उप निरीक्षक निलंबित

एक एडीईओ के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के लिए अनुशंसा 

रायपुर- आबकारी आयुक्त छत्तीसगढ़ ने राज्य के विभिन्न जिलों में शराब दुकानों में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री और नियंत्रण में लापरवाही के मामलों में सख्त कार्रवाई करते हुए दो आबकारी उप निरीक्षकों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई। निलंबित अधिकारियों में बालोद जिले के गुरूर के आशाराम शाक्य (आबकारी उप निरीक्षक) तथा बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम रोहासी स्थित देशी कम्पोजिट मदिरा दुकान के प्रभारी पी.माधव राव (आबकारी उप निरीक्षक) शामिल हैं।

एक अन्य मामले में निलोफर जैन सहायक जिला आबकारी अधिकारी जो देश कम्पोजिट मदिरा दुकान अरकार जिला बालोद के प्रभारी सह मंडल प्रभारी का दायित्व था उनके शिथिल नियंत्रण, कर्तव्य की प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरतने के कारण आबकारी आयुक्त द्वारा एडीईओ के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए सचिव वाणिज्यिक-कर (आबकारी) विभाग को पत्र जारी किया है।

वर्तमान चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार नए आपराधिक कानूनों ने न्याय व्यवस्था में लाया ऐतिहासिक परिवर्तन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

No comments Document Thumbnail

स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री साय ने कहा— आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध न्याय दिलाना नए कानूनों का मूल उद्देश्य

समन्वित प्रयासों से नए कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी राज्य - मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा

ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस और आईसीजेएस जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से न्याय प्रणाली हो रही अधिक प्रभावी और जवाबदेह

नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य में सतत प्रशिक्षण, मॉनिटरिंग और तकनीकी क्षमता विकास पर विशेष जोर

रायपुर- वर्तमान समय की आवश्यकताओं और बदलती चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए नए आपराधिक कानून भारत की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन के वाहक बने हैं। इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रणालियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्याय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाकर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में आयोजित "स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस" राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं। इन कानूनों की मूल भावना नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था की स्थापना है, जिसमें पीड़ित को शीघ्र न्याय मिले और अपराधी कानून के शिकंजे से बच न सके।

उन्होंने कहा कि पुराने कानून ऐसे समय में बने थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था। आज अपराधों की प्रकृति बदल चुकी है और तकनीक न्याय व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन गई है। नए कानूनों ने डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तथा वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को विधिक मान्यता देकर अपराध अनुसंधान और अभियोजन को नई मजबूती प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा प्रारंभ होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। ई-साक्ष्य जैसी व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से न्याय प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है। पहले समन की तामील में कई दिन लग जाते थे, जबकि अब ई-समन के माध्यम से सूचना तत्काल संबंधित व्यक्ति तक पहुंच रही है और उसकी डिजिटल ट्रैकिंग भी संभव हो गई है। न्याय श्रुति जैसी व्यवस्था न्यायालयीन कार्यवाही के सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ ऑनलाइन एवं हाइब्रिड सुनवाई को भी अधिक सक्षम बना रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से देशभर के पुलिस थाने डिजिटल रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं। इससे अपराधियों का रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध हो जाता है और पुलिस को त्वरित कार्रवाई में सुविधा मिलती है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं तथा राज्य में अब तक 1 लाख 97 हजार 547 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित कर रहा है। इससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव हुआ है और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी में उल्लेखनीय कमी आई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तकनीक निरंतर विकसित हो रही है। इसलिए न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को समय-समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक है। राज्य सरकार नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रशिक्षण, क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की आपराधिक न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, त्वरित और तकनीक आधारित बनेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम देश की न्याय व्यवस्था में व्यापक बदलाव लेकर आए हैं। इन कानूनों की सफलता केवल उनके लागू होने में नहीं, बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं द्वारा उनके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आज की चर्चा केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपराधिक अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है। ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति तथा डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी व्यवस्थाएं नए कानूनों की मूल भावना को साकार करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विशेष रूप से ई-साक्ष्य को उन्होंने साक्ष्य प्रबंधन की समग्र एवं एकीकृत प्रणाली बताते हुए कहा कि इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी।

उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया अपराध स्थल से प्रारंभ होती है। यदि प्रारंभिक जांच वैज्ञानिक, निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, तो पूरी न्यायिक प्रक्रिया अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी। तकनीक न्यायिक विवेक का स्थान नहीं ले सकती, लेकिन उसे अधिक प्रभावी अवश्य बना सकती है।

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जून माह के दौरान जिला न्यायालयों में लगभग 9,910 मामलों तथा उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। उन्होंने सभी हितधारकों से न्याय श्रुति प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल अभिलेखों को व्यापक कानूनी मान्यता प्रदान की है, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने अपराध पंजीयन, अनुसंधान, तलाशी, जब्ती, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसी प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ नए आपराधिक कानूनों एवं डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की समीक्षा के बाद इसके त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप न्याय एवं कानून व्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है।
उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों की मूल भावना यह सुनिश्चित करना है कि निचली अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध न्याय मिल सके। उन्होंने "वन डेटा, वन एंट्री" की अवधारणा पर कार्य करने, एफआईआर की मैनुअल प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस, नेफिस, सीआरपीआई एप्लिकेशन और डीएनए सैंपलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों के व्यापक उपयोग पर बल दिया।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.के. चन्द्रवंशी, उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्तिगण, प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य विभाग सुषमा सावंत, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विभिन्न जिलों के न्यायाधीश, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सीसीटीएनएस के नोडल अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, एफएसएल के अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक, विधि विशेषज्ञ तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

सुरक्षा के दृष्टि से केन्द्रीय जेल रायपुर में मुलाकात व्यवस्था में अस्थाई परिवर्तन

No comments Document Thumbnail

रायपुर- केन्द्रीय जेल रायपुर में विगत माह बंदियों से मुलाकात के दौरान कुछ परिजनों द्वारा दैनिक उपयोग की सामग्रियों में प्रतिबंधित वस्तुएँ छिपाकर जेल परिसर के भीतर पहुँचाने का प्रयास किया गया था। जेल शासन के सघन तलाशी एवं सतर्क सुरक्षा व्यवस्था के कारण ऐसे सभी प्रयास विफल कर दिए गए तथा संबंधित प्रतिबंधित सामग्री जप्त कर आवश्यक कार्यवाही की गई।

अधीखक केन्द्रीय जेल रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार जेल की सुरक्षा एवं अनुशासन को दृष्टिगत रखते हुए और सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से जेल प्रशासन द्वारा एहतियातन बंदियों के दैनिक उपयोग की कुछ चयनित सामग्रियों को जेल केन्टीन से क्रय कर बंदियों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अन्य सभी स्वीकृत सामग्री पूर्ववत् नियमानुसार बंदियों के परिजन स्वयं उपलब्ध करा सकते हैं।

यह व्यवस्था पूर्णतः अस्थायी है तथा इसका उद्देश्य केवल प्रतिबंधित सामग्री की जेल में संभावित प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है। जेल केन्टीन में उपलब्ध कराई जा रही सभी सामग्रियाँ गुणवत्तापूर्ण हैं तथा उनकी दरें सामान्य बाजार दरों से कम निर्धारित की गई हैं, जिससे बंदियों के परिजनों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े।

टूटा पुल बना स्कूली बच्चों की पढ़ाई में बाधा, ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर लगाए उपेक्षा के आरोप

No comments Document Thumbnail

महासमुंद- जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खट्टा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क पर बना जर्जर पुल और क्षतिग्रस्त सड़क बरसात के दिनों में स्कूली बच्चों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल पर थोड़ी सी बारिश के बाद ही पानी बहने लगता है, जिससे आसपास के छह गांवों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई बार बच्चों को स्कूल नहीं पहुंच पाना पड़ता है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

ग्रामीणों के अनुसार यह पुल खट्टा, कोकड़ी, रखमखेड़ा सहित आसपास के गांवों के विद्यार्थियों के लिए प्रमुख मार्ग है। इसी रास्ते से स्वामी आत्मानंद विद्यालय पटेवा, खट्टा हाई स्कूल, खट्टा प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय तथा कोकड़ी शासकीय विद्यालय के छात्र-छात्राएं आवागमन करते हैं।

चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने बताया कि बरसात के दौरान पुल के ऊपर पानी बहने लगता है, जिससे छात्र-छात्राओं का स्कूल जाना जोखिम भरा हो जाता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बालिकाएं तेज बहाव के बीच पुल पार करने से डरती हैं, जिसके कारण कई बार वे स्कूल नहीं जा पातीं।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यही मार्ग गर्भवती महिलाओं, बीमार मरीजों और अन्य ग्रामीणों के लिए अस्पताल एवं आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है। पुल पर पानी आने से आपातकालीन परिस्थितियों में भी लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत के सरपंच डॉ. राजकमल पटेल तथा जनपद पंचायत अध्यक्ष दिशा रामस्वरूप दीवान का निवास भी इसी गांव में है और उन्हें भी इसी मार्ग से आवागमन करना पड़ता है। ग्रामीणों का दावा है कि लंबे समय से पुल और सड़क की मरम्मत नहीं होने के कारण लोगों में जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक, सांसद और संबंधित विभाग से मांग की है कि बरसात समाप्त होने की प्रतीक्षा किए बिना पुल की तत्काल मरम्मत अथवा वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और किसी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुल का निर्माण या मरम्मत नहीं कराई गई तो इसका सबसे अधिक असर स्कूली शिक्षा, विशेषकर बालिका शिक्षा पर पड़ेगा। उनका मानना है कि सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना बच्चों के शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम है।

रायपुर में 70 लाख रुपये की चोरी का खुलासा, 12 दिन पहले रखे गए कुक ने दिया वारदात को अंजाम

No comments Document Thumbnail

रायपुर- राजधानी रायपुर में एक कारोबारी के घर हुई करीब 70 लाख रुपये की नकदी और जेवरात चोरी के मामले का पुलिस ने महज छह घंटे में खुलासा कर दिया। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाला आरोपी कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि सिर्फ 12 दिन पहले काम पर रखा गया कुक निकला।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने घर की गतिविधियों और कीमती सामान की पूरी जानकारी जुटाने के बाद मौके का फायदा उठाकर लाखों रुपये नकद और सोने-चांदी के आभूषण लेकर फरार हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने विशेष टीम गठित कर आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों का पीछा किया। लगातार कार्रवाई करते हुए पुलिस ने महज छह घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी का बड़ा हिस्सा बरामद कर लिया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने नौकरी के दौरान घर की सुरक्षा व्यवस्था और दिनचर्या को अच्छी तरह समझ लिया था, जिसके बाद उसने वारदात की योजना बनाई।

पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरी की वारदात में आरोपी के साथ कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं। इस त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस की सराहना की जा रही है।

देशभर में भारी बारिश का अलर्ट: कई राज्यों में मूसलाधार वर्षा की चेतावनी, लोगों से सतर्क रहने की अपील

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। गुजरात, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले 24 घंटों के दौरान तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

प्रशासन ने संबंधित जिलों में आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा है। नागरिकों से मौसम की ताज़ा जानकारी पर नज़र रखने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है।

पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला ने अस्पताल पहुंचकर घायल पुलिस जवानों का जाना हाल

No comments Document Thumbnail

रैली के दौरान ड्यूटी निभाते हुए 16 पुलिस जवान हुए घायल, चिकित्सकों से चर्चा कर कमिश्नर ने उपचार की जानकारी ली

रायपुर- रायपुर में आज एक रैली के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और रैली को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल द्वारा बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था संभाली जा रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों द्वारा अचानक पत्थर एवं बोतलें फेंके जाने से अव्यवस्था की स्थिति निर्मित हो गई, जिसमें ड्यूटी पर तैनात पुलिस के 16 जवान घायल हो गए। घायलों में एक महिला आरक्षक शामिल थी, दो पुलिस जवानों को गंभीर चोटें आई हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही रायपुर के पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला में अस्पताल पहुंच भर्ती पुलिस जवानों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों से घायल जवानों के स्वास्थ्य एवं उपचार की विस्तृत जानकारी ली तथा सभी घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए। उन्होंने जवानों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

घायल जवान कलेश्वर वर्मा ने बताया कि बैरिकेटिंग के दौरान भीड़ के बीच फंस जाने से उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल लाया गया। वहीं, प्रशिक्षु उप निरीक्षक (पीएसआई) देवराज सिंह के सिर पर बोतल लगने से गंभीर चोट आई है, जिनका उपचार चिकित्सकों की निगरानी में जारी है।

अन्य घायल आरक्षकों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इस दौरान पुलिस उपायुक्त (मध्य) तारकेश्वर पटेल, एसीपी नीलेश द्विवेदी, टीआई राजेश मरई सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

No comments Document Thumbnail

प्रभावित परिवारों तक बिना विलंब राहत सामग्री एवं आवश्यक सहायता पहुँचाने को कहा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर एवं जांजगीर-चांपा जिलों में हुई अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त संसाधन एवं सहायता भी तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि राहत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर राहत पहुँचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित नागरिकों के साथ खड़ी है तथा जनजीवन को शीघ्र सामान्य बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

सड़क पर केज व्हील वाले ट्रैक्टर दौड़े तो कटेगा चालान

No comments Document Thumbnail

रायपुर- खेतों में जुताई और मिट्टी पलटने के लिए इस्तेमाल होने वाले लोहे के केज व्हील (पिंजरा पहिया) लगे ट्रैक्टर अब सार्वजनिक सड़कों और सीमेंट रोड पर नहीं चल सकेंगे। ऐसे ट्रैक्टर सड़क पर चलते पाए जाने पर परिवहन विभाग मोटरयान अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई करेगा। जिला परिवहन विभाग ने किसानों और ट्रैक्टर संचालकों को इस संबंध में चेतावनी जारी करते हुए नियमों का पालन करने की अपील की है।

परिवहन विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश पर सभी जिला परिवहन अधिकारियों को सार्वजनिक सड़कों पर केज व्हील लगे ट्रैक्टरों का संचालन रोकने और उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

दरअसल, यह फैसला उच्च न्यायालय, बिलासपुर में दायर एक जनहित याचिका के बाद लिया गया है। याचिका में कहा गया था कि कृषि कार्यों के लिए बनाए गए केज व्हील का उपयोग केवल खेतों तक सीमित होना चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर इन्हें सड़कों और राजमार्गों पर भी चलाया जा रहा है। इससे सड़कें क्षतिग्रस्त होती हैं और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। परिवहन विभाग का कहना है कि सार्वजनिक मार्गों पर ऐसे ट्रैक्टरों का संचालन मोटरयान अधिनियम और प्रचलित नियमों के अनुरूप नहीं है।

परिवहन विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि जुताई या मिट्टी पलटने का कार्य पूरा होने के बाद ट्रैक्टर से केज व्हील हटाकर सामान्य रबर के टायर लगाएं और उसके बाद ही सार्वजनिक सड़कों पर वाहन चलाएं। इससे सड़कें सुरक्षित रहेंगी और हादसों की आशंका भी कम होगी। परिवहन विभाग ने कहा है कि अपील के बावजूद यदि कोई ट्रैक्टर चालक केज व्हील लगे ट्रैक्टर के साथ सार्वजनिक सड़क पर चलता पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार चालान सहित विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

महासमुंद: जर्जर सड़क और पुल से संकट में बच्चों की पढ़ाई, 15 दिन में काम शुरू नहीं हुआ तो कलेक्टर और मुख्यमंत्री से मिलेंगे छात्र-छात्राएं

No comments Document Thumbnail

महासमुंद- महासमुंद जिले की ग्राम पंचायत खट्टा के अंतर्गत स्थित जर्जर सड़क और पुल एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं। लगातार बारिश के बीच ग्रामीणों, अभिभावकों और स्कूली बच्चों का कहना है कि यदि जल्द ही सड़क और पुल की मरम्मत या नए ऊंचे पुल का निर्माण नहीं कराया गया, तो क्षेत्र के कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीणों के अनुसार यह पुल वर्षों पुराना है और हर मानसून में क्षतिग्रस्त हो जाता है। उनका कहना है कि तेज बारिश के दौरान पुल के ऊपर से पानी बहने लगता है, जिससे आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है। यह मार्ग पटेवा से महासमुंद जाने का प्रमुख संपर्क मार्ग होने के साथ-साथ कोकड़ी शासकीय विद्यालय, खट्टा प्राथमिक, मिडिल एवं हाई स्कूल तथा रामखेड़ा प्राथमिक और मिडिल स्कूल तक पहुंचने का भी मुख्य रास्ता है।

कोकड़ी शासकीय विद्यालय के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया का कहना है कि यह समस्या नई नहीं, बल्कि कई दशकों से बनी हुई है। उनके अनुसार हर वर्ष बारिश में पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण शिक्षक, विद्यार्थी और ग्रामीण जोखिम उठाकर आवागमन करने को मजबूर हो जाते हैं। उनका मानना है कि इस स्थान पर स्थायी समाधान के लिए एक नया और ऊंचा पुल बनाया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि पूर्व में इस पुल पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें लोगों को गंभीर चोटें आईं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले सड़क और पुल का स्थायी समाधान किया जाए।

विद्यालय की शाला प्रबंधन एवं विकास समिति, अभिभावकों और विद्यार्थियों ने जिला प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे सामूहिक रूप से कलेक्टर महासमुंद और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी समस्या रखेंगे।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। इस कारण क्षेत्र के लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों और विद्यार्थियों की मांग है कि जल्द से जल्द नया, मजबूत और ऊंचा पुल तथा सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि बरसात के दौरान भी बच्चों की पढ़ाई, शिक्षकों का आवागमन और आम लोगों की आवाजाही निर्बाध रूप से जारी रह सके।

​सेंचुरी पार कर चुका मुरूमसिल्ली बाँध पूरी तरह सुरक्षित

No comments Document Thumbnail

अफवाहों पर लगा विराम, मानसून से निपटने जल संसाधन विभाग मुस्तैद

​रायपुर- छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक जल संरचनाओं के मुकुटमणि और गंगरेल जलाशय के मुख्य मददगार मुरूमसिल्ली बाँध को लेकर सोशल मीडिया पर तैर रहीं तमाम तरह की आशंकाएं पूरी तरह बेबुनियाद और भ्रामक हैं। जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 103 साल पुराना यह ऐतिहासिक बाँध पूरी तरह सुरक्षित, अडिग और मजबूत है। मानसून की आहट के बीच बाँध की दीर्घकालिक सुरक्षा और जल प्रबंधन को लेकर विभाग न केवल सतर्क है, बल्कि विशेषज्ञ अभियंताओं की देखरेख में नियमित तकनीकी परीक्षण और मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

दरअसल, मानसून के आगमन के साथ ही बांधों की सुरक्षा को लेकर कई तरह की अफवाहें सिर उठाने लगती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की तथ्यहीन खबरों का शिकार न हों और केवल अधिकृत सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

​शीर्ष तकनीकी टीम ने परखी एक-एक दीवार

परियोजना की संवेदनशीलता और इसके महत्व को देखते हुए हाल ही में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता  के नेतृत्व में शीर्ष अधिकारियों के एक दल ने मुरूमसिल्ली बाँध का सघन और विस्तृत तकनीकी निरीक्षण किया। इस उच्च स्तरीय टीम में अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता  तथा अनुविभागीय अधिकारी शामिल थे।

इस दौरान टीम ने बाँध के तटबंधों, संरचनात्मक स्थिति और जल निकासी (स्लुइस गेट्स) की व्यवस्था का गहन बारीकी से परीक्षण किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाँध की दीवारों या मुख्य ढांचे में किसी भी प्रकार की दरार या क्षति नहीं है।

​रेनकट रोकने के लिए 'वर्षा पूर्व' सुरक्षा चक्र

तेज बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव (रेनकट) से बाँध के किनारों को सुरक्षित रखना एक सामान्य और अनिवार्य तकनीकी प्रक्रिया है। मुख्य अभियंता ने इसी कड़ी में वर्षा पूर्व तटबंधों के संरक्षण और मरम्मत कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। विभागीय अमला इस समय युद्धस्तर पर मुस्तैद होकर इन सुरक्षात्मक कार्यों को अंजाम दे रहा है, ताकि आने वाले समय में बाँध की कार्यक्षमता और जन सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित रहे।

​भविष्य के संकट से निपटने के लिए जल प्रबंधन

इस वर्ष पानी की हर बूंद को सहेजने के लिए विभाग अभी से बेहद वैज्ञानिक और दूरदर्शी जल प्रबंधन अपना रहा है। वर्तमान में मुरूमसिल्ली बाँध अपनी क्षमता के शिखर की ओर बढ़ रहा है। यहाँ 130.07 एमसीएम (80.29 प्रतिशत) जल संग्रहण हो चुका है, जबकि मुख्य गंगरेल जलाशय में 325.95 एमसीएम (42.50 प्रतिशत) पानी दर्ज किया गया है।​चूंकि मुरूमसिल्ली में जलस्तर काफी बेहतर स्थिति में है, इसलिए भविष्य में यदि कम वर्षा या अवर्षा के हालात बनते हैं, तो भी सिंचाई और पेयजल का संकट न हो, इस रणनीति के तहत मुरूमसिल्ली से नियंत्रित और सुरक्षित मात्रा में पानी गंगरेल जलाशय की ओर छोड़ा जा रहा है। 

वर्ष 1923 में निर्मित मुरूमसिल्ली बाँध केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी व्यवस्था का एक ऐतिहासिक हिस्सा है। वर्तमान में इसके रख-रखाव के लिए किए जा रहे सभी कार्य पूरी तरह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश: छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख भवनों का होगा सुरक्षा ऑडिट

No comments Document Thumbnail

रायपुर- हाल ही में देश में हुई अग्नि दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्यभर के सभी प्रमुख सरकारी एवं सार्वजनिक भवनों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और भविष्य में संभावित हादसों को रोकना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक परिसरों, भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक भवनों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जाए। साथ ही जहां भी सुरक्षा संबंधी कमियां पाई जाएं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दूर किया जाए।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा ऑडिट के दौरान फायर सेफ्टी उपकरणों, आपातकालीन निकास मार्गों (Emergency Exits), फायर अलार्म सिस्टम, बिजली व्यवस्था तथा अन्य सुरक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों को सुधारात्मक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सुरक्षा ऑडिट पूरा कर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि यह अभियान न केवल अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन प्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाएगा। इससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियां बेहतर होंगी और जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

अग्नि सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी नई स्थिति रिपोर्ट

No comments Document Thumbnail

बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था को लेकर गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से अग्नि सुरक्षा संबंधी तैयारियों और आधुनिकीकरण कार्यों पर नई स्थिति रिपोर्ट (Status Report) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अग्निशमन सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए 280 करोड़ रुपये से अधिक की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत राज्यभर में नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, मौजूदा फायर स्टेशनों को सुदृढ़ किया जाएगा तथा अत्याधुनिक अग्निशमन वाहन, बचाव उपकरण और अन्य आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि अग्निशमन विभाग की क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जा सके।

हाईकोर्ट ने सरकार से इन योजनाओं की प्रगति, समय-सीमा और क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अग्निशमन सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।

राज्य सरकार की इस पहल से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की फायर सेफ्टी और आपदा प्रबंधन प्रणाली को अधिक आधुनिक, सक्षम और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बलौदाबाजार में सनसनीखेज खुलासा: किराना व्यापारी ने 8 हत्याओं का किया कबूलनामा

No comments Document Thumbnail

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। एक किराना व्यापारी ने पुलिस पूछताछ के दौरान पिछले चार महीनों में आठ लोगों की हत्या करने की बात स्वीकार की है।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने व्यक्तिगत रंजिश, जमीन संबंधी विवाद, कर्ज के लेन-देन और आपसी दुश्मनी के चलते लोगों को कथित तौर पर जहर देकर मौत के घाट उतारने की बात कबूली है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने निशाने पर उन लोगों को बनाता था, जिनसे उसका किसी न किसी प्रकार का विवाद या मनमुटाव था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम गठित कर दी है और आरोपी के दावों की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मौत से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की अलग-अलग जांच की जाएगी ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद क्षेत्र में दहशत और चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोग मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: खतरनाक और रेबीज संक्रमित आवारा कुत्तों को दी जा सकेगी इच्छामृत्यु

No comments Document Thumbnail

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से बढ़ते हमलों और रेबीज संक्रमण के मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में जहां लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरा है, वहां रेबीज संक्रमित और अत्यधिक आक्रामक आवारा कुत्तों को उचित चिकित्सकीय जांच के बाद इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया) दी जा सकती है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल विशेष परिस्थितियों में और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया जाएगा। किसी भी कुत्ते को इच्छामृत्यु देने से पहले अधिकृत पशु चिकित्सकों द्वारा उसकी स्वास्थ्य जांच करना और यह प्रमाणित करना आवश्यक होगा कि वह रेबीज से संक्रमित है या लोगों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगमों और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, रेबीज संक्रमण और लोगों पर हमलों की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि पशु क्रूरता रोकने के नियमों और मानवीय दृष्टिकोण का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।

इस फैसले के बाद देशभर में आवारा कुत्तों की समस्या, सार्वजनिक सुरक्षा और पशु अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोगों ने फैसले का समर्थन किया है, जबकि पशु प्रेमी संगठनों ने इसे संवेदनशील मुद्दा बताते हुए सावधानी बरतने की अपील की है।

400 अत्याधुनिक आपातकालीन वाहन एवं 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रायपुर में अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ और मोबाइल फॉरेंसिक वैन का किया शुभारंभ

‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ के साथ प्रदेश में त्वरित सहायता और वैज्ञानिक जांच व्यवस्था होगी सशक्त

‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित सेवा से पुलिस, मेडिकल इमरजेंसी, आगजनी, सड़क दुर्घटना और आपदा जैसी हर स्थिति में मिलेगी त्वरित सहायता

रायपुर- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज माना पुलिस परेड ग्राउंड, रायपुर में छत्तीसगढ़ पुलिस की अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ तथा मोबाइल फॉरेंसिक वैन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह एवं  की गरिमामयी उपस्थिति में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 400 अत्याधुनिक डायल-112 वाहनों तथा 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विधायकगण, जनप्रतिनिधिगण तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित यह आधुनिक सेवा पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत करते हुए नागरिकों को एक ही नंबर पर त्वरित आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराएगी। इसके तहत शुरू किए गए 400 अत्याधुनिक वाहनों में स्मार्टफोन, जीपीएस, वायरलेस रेडियो, पीटीजेड कैमरा, डैश कैम, मोबाइल एनवीआर और सोलर बैकअप जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन तकनीकों की मदद से घटनास्थल की लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित संचार सुनिश्चित किया जा सकेगा। 

यह सेवा 24x7 संचालित होगी। इसमें जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग, एडवांस व्हीकल ट्रैकिंग, एसआईपी ट्रंक टेक्नोलॉजी तथा स्वचालित कॉलर लोकेशन पहचान जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। राज्य के सभी 33 जिला समन्वय केंद्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया है। नागरिक वॉयस कॉल, एसएमएस, ईमेल, वेब पोर्टल, व्हाट्सएप, चैटबॉट और SOS-112 इंडिया ऐप के माध्यम से भी सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

मोबाइल फॉरेंसिक वैन से घटनास्थल पर ही होगी वैज्ञानिक जांच

‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ थीम पर आधारित 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्रदेश में अपराध अनुसंधान को नई दिशा देंगी। “32 वैन – 32 जिले – एक संकल्प: सटीक जांच, त्वरित न्याय” के उद्देश्य के साथ शुरू की गई यह पहल घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

लगभग 65 लाख रुपये प्रति यूनिट लागत वाली इन अत्याधुनिक वैन में घटनास्थल संरक्षण किट, साक्ष्य संग्रहण एवं सीलिंग उपकरण, फिंगरप्रिंट डिटेक्शन सिस्टम, नार्कोटिक्स परीक्षण किट, डिजिटल फॉरेंसिक सपोर्ट, उच्च गुणवत्ता फोटोग्राफी व्यवस्था, बुलेट होल स्क्रीनिंग एवं बैलिस्टिक जांच किट तथा गनशॉट रेजिड्यू (GSR) परीक्षण किट जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अब तक अपराध स्थल से साक्ष्य प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने में समय लगता था, जिससे साक्ष्यों के दूषित होने की संभावना बनी रहती थी तथा रिपोर्ट आने में भी विलंब होता था। नई मोबाइल फॉरेंसिक वैन के माध्यम से घटनास्थल पर ही प्रारंभिक जांच, साक्ष्य संरक्षण, परीक्षण और डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा सकेगा। इससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

साक्ष्य आधारित न्याय व्यवस्था को मिलेगा नया बल

राज्य सरकार का उद्देश्य वैज्ञानिक जांच को जन-जन तक पहुंचाना, साक्ष्य आधारित न्याय प्रणाली को मजबूत करना, अपराध नियंत्रण में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका को बढ़ाना तथा समयबद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करना है। 

आधुनिक डायल-112 सेवा और मोबाइल फॉरेंसिक वैन के संचालन से प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा, अपराध अनुसंधान को नई गति मिलेगी तथा आम नागरिकों का कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे नेक्स्ट जेन सीजी डायल 112 का शुभारंभ

No comments Document Thumbnail

गृह मंत्री विजय शर्मा ने किया कार्यक्रम स्थल का किया निरीक्षण

रायपुर- प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं को और अधिक आधुनिक, त्वरित एवं नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में नेक्स्ट जेन सीजी डायल 112 इंटीग्रेटेड इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस 2.0) का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर चलित फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी एवं 400 अत्याधुनिक डायल 112 वाहन का भी शुभारंभ किया जाएगा।

कार्यक्रम की तैयारियों के तहत प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने आज कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को कार्यक्रम की सभी तैयारियां समयबद्ध एवं सुव्यवस्थित ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। नेक्स्ट जेन सीजी डायल 112 प्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन की दिशा में एक अभिनव पहल है, जिसके माध्यम से पुलिस सेवा, फायर सर्विस, मेडिकल इमरजेंसी सहायता, महिला हेल्पलाइन, चाइल्ड हेल्पलाइन, आपदा प्रबंधन सहायता तथा हाईवे इमरजेंसी जैसी सेवाओं को एकीकृत मंच पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे नागरिकों को त्वरित एवं समन्वित सहायता सुनिश्चित हो रही है। 

इस उन्नत प्रणाली में केंद्रीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, जीपीएस आधारित इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहन, जीआईएस आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऑटोमेटिक कॉल लोकेशन पहचान प्रणाली तथा तकनीक सक्षम डिस्पैच प्रबंधन जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। नई व्यवस्था के माध्यम से अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा, सड़क दुर्घटना प्रतिक्रिया, चिकित्सकीय सहायता तथा जन-संकट की परिस्थितियों में और अधिक प्रभावी सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। 

प्रदेश में संचालित डायल 112 सेवा वर्ष 2018 से अब तक लाखों नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता प्रदान कर चुकी है तथा वर्तमान में इसकी सेवाएं 16 जिलों तक सीमित थी अब यह प्रदेश के सभी 33 जिलों तक विस्तारित हो जायेगी।

भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

No comments Document Thumbnail

मंत्री के निर्देश पर आंगनबाड़ी के समय में बड़ा बदलाव

आंगनबाड़ी केंद्र प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से 11:00 बजे तक होंगे संचालित

रायपुर- प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए त्वरित और संवेदनशील निर्णय लिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के स्पष्ट निर्देश पर ग्रीष्मकाल के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन समय में बदलाव करते हुए इसे 6 घंटे से घटाकर 4 घंटे कर दिया गया है।

निर्देशानुसार 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक आंगनबाड़ी केंद्र प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संचालित होंगे। विशेष रूप से 23 अप्रैल से 30 जून 2026 तक बच्चों की उपस्थिति का समय केवल सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे तक निर्धारित किया गया है, ताकि वे भीषण गर्मी और लू के प्रभाव से सुरक्षित रह सकें।

इस निर्धारित अवधि में बच्चों को पूर्व तय समय-सारिणी के अनुसार प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख एवं शिक्षा (ECCE गतिविधियां) के साथ-साथ पूरक पोषण आहार का नियमित वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की शिक्षा और पोषण सेवाओं की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

आंगनबाड़ी केंद्रों में अन्य आवश्यक सेवाएं प्रातः 11:00 बजे तक जारी रहेंगी। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अपने निर्धारित जॉब चार्ट के अनुसार शेष कार्यों का निष्पादन करेंगी। साथ ही, गृहभेंट के माध्यम से पोषण परामर्श देने की महत्वपूर्ण सेवा को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके तहत कार्यकर्ता केंद्र बंद होने के बाद घर-घर जाकर माताओं को जागरूक करेंगी।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। गर्म हवाओं और उच्च तापमान के बीच बच्चों को सुरक्षित रूप से घर पहुंचाने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार की लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी।

इसके साथ ही, सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इन व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करें और जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों में इसकी प्रगति की नियमित समीक्षा करें, ताकि जमीनी स्तर पर निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

ग्रीष्मकाल समाप्त होने के बाद 01 जुलाई  से आंगनबाड़ी केंद्र पुनः अपने सामान्य समय प्रातः 9:30 बजे से 3:30 बजे तक (6 घंटे) संचालित होंगे।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.