Media24Media.com: #PharmaInnovation

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #PharmaInnovation. Show all posts
Showing posts with label #PharmaInnovation. Show all posts

भारत फार्मा 2026: दवा क्षेत्र में नवाचार और वैश्विक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

No comments Document Thumbnail

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत औषधि विभाग (Department of Pharmaceuticals) द्वारा इंडिया फार्मा 2026 (9वां संस्करण) का आयोजन 13-14 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित फिक्की (FICCI) हाउस में किया जा रहा है। यह आयोजन FICCI और Indian Pharmaceutical Alliance (IPA) के सहयोग से आयोजित हो रहा है।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल द्वारा किया जाएगा।

थीम

इस वर्ष का विषय है:
"Discover in India: Leapfrogging Life-Sciences Innovation"
यह थीम भारत को एक वैश्विक फार्मा नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।

आयोजन के प्रमुख उद्देश्य

  • भारत की फार्मा क्षमता और R&D को बढ़ावा देना

  • वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करना

  • दवा उद्योग को वॉल्यूम से वैल्यू और इनोवेशन आधारित मॉडल की ओर ले जाना

प्रमुख प्रतिभागी

इस दो दिवसीय कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग विशेषज्ञ शामिल होंगे:

  • मनोज जोशी (सचिव, औषधि विभाग)

  • पुण्य सलिला श्रीवास्तव (सचिव, स्वास्थ्य मंत्रालय)

  • प्रो. विनोद के. पॉल (सदस्य, नीति आयोग)

  • डॉ. रेणु स्वरूप, डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन (विशेषज्ञ)

  • DCGI, CDSCO और US FDA के प्रतिनिधि

साथ ही उद्योग जगत के प्रमुख नाम:

  • दिलीप सांघवी (Sun Pharma)

  • पंकज पटेल (Zydus Lifesciences)

  • सिप्ला, मैनकाइंड, एबॉट, एलि लिली जैसी कंपनियों के प्रतिनिधि

मुख्य सत्र

कार्यक्रम में 6 प्रमुख प्लेनरी सेशन होंगे:

  • नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियां

  • नियामक प्रणाली को सशक्त बनाना

  • AI और नई तकनीकों का उपयोग

  • CRDMO क्षमता का विकास

  • फार्मा फाइनेंसिंग इकोसिस्टम

  • नवाचार को आगे बढ़ाने की रणनीतियां

इसके अलावा स्टार्टअप शोकेस भी आयोजित किया जाएगा।

महत्व

भारत पहले से ही सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं का वैश्विक आपूर्तिकर्ता है। यह आयोजन देश को फार्मा इनोवेशन हब बनाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

बजट 2026–27: Biopharma SHAKTI से भारत के बायोफार्मा क्षेत्र को नया रूप

No comments Document Thumbnail

प्रमुख निष्कर्ष

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में बायोफार्मा शक्ति (Biopharma SHAKTI) की घोषणा की गई, जिसका बजट पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य भारत में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के उत्पादन के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना है।
  • यह पहल भारत को वैश्विक बायोफार्मा उद्योग में अग्रणी बनाने और वैश्विक बायोफार्मास्यूटिकल मार्केट के 5% हिस्से पर कब्ज़ा करने के लक्ष्य के अनुरूप है।
  • राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (National Biopharma Mission) और पिछले कुछ वर्षों में शुरू की गई अन्य योजनाएँ भी इसी उद्देश्य की दिशा में काम कर रही हैं।

परिचय

केंद्रीय बजट 2026–27 भारत की दवा उद्योग नीति में एक निर्णायक बदलाव दर्शाता है, जिसमें बायोफार्मा और बायोलॉजिक दवाओं को स्वास्थ्य और विनिर्माण रणनीति के केंद्र में रखा गया है। यह भारत को वैश्विक बायोफार्मा उद्योग में अग्रणी बनाने और वैश्विक बाजार में 5% हिस्सेदारी हासिल करने की सरकार की दृष्टि के अनुरूप है।

गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बढ़ते बोझ और वैश्विक स्तर पर बायोलॉजिक्स एवं बायोसिमिलर पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए, बजट बायोफार्मा को उच्च मूल्य वाला, भविष्य-सामना करने वाला और स्वास्थ्य एवं आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में स्थान देता है।

बायोफार्मा का मतलब जीवित जैविक तंत्र (जैसे मानव कोशिकाएं, सूक्ष्मजीव या फफूंदी) के माध्यम से चिकित्सा उत्पादों का उत्पादन या निर्माण करना है। उदाहरणों में टीके, एंटीबॉडी उपचार, जीन थेरेपी, सेल इम्प्लांट, आधुनिक इंसुलिन और रीकॉम्बिनेंट प्रोटीन दवाएँ शामिल हैं।

केंद्रीय बजट 2026–27: बायोफार्मा शक्ति पहल

मुख्य घोषणाएँ:

  1. Biopharma SHAKTI की स्थापना: पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का बजट, जिसका उद्देश्य भारत में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के लिए पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। यह पहल घरेलू विकास और उत्पादन, आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए है।

  2. NIPER नेटवर्क का विस्तार: तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPERs) की स्थापना और सात मौजूदा NIPERs का उन्नयन, जिससे बायोफार्मा में विशेषज्ञ मानव संसाधनों की जरूरत पूरी हो सके।

  3. क्लिनिकल रिसर्च इकोसिस्टम का निर्माण: देशभर में 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइटों का विकास प्रस्तावित, जिससे बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर पर उन्नत नैदानिक परीक्षण तेज़ होंगे और भारत को वैश्विक नैतिक और उच्च-गुणवत्ता वाले क्लिनिकल ट्रायल के लिए प्राथमिक स्थान बनाया जा सके।

  4. नियामक ढांचे को सशक्त करना: CDSCO की क्षमता बढ़ाना, विशेषज्ञ वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मियों को शामिल करना, अनुमोदन समय सीमाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप करना और जटिल बायोफार्मास्यूटिकल उत्पादों का तेज़ मूल्यांकन सुनिश्चित करना।

महत्व

बजट ने निर्माण क्षमता, विशेषज्ञ मानव संसाधन, क्लिनिकल रिसर्च क्षमता और नियामक विश्वसनीयता को एक ही ढांचे में जोड़ा है। यह संकेत देता है कि भारत सस्ती जेनेरिक दवाओं के निर्माता से उच्च गुणवत्ता, नवाचार-आधारित बायोफार्मास्यूटिकल उत्पादों का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।

इस पहल से भारत को वैश्विक बायोफार्मा बाजार में प्रतिस्पर्धा करने और घरेलू स्तर पर उन्नत और किफायती बायोलॉजिक दवाओं तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बायोफार्मा क्या है?

पारंपरिक रासायनिक दवाओं के बजाय अब दवाएँ जैविकी (Biology) के माध्यम से विकसित हो रही हैं। बायोफार्मा वह हिस्सा है जो जीवित जैविक तंत्र का उपयोग करके दवाओं का निर्माण करता है।

सरल शब्दों में, बायोफार्मा दवाएँ कोशिकाओं, सूक्ष्मजीवों या अन्य जैविक पदार्थों से बनाई जाती हैं। इनमें मानव या पशु कोशिकाएं, बैक्टीरिया, फफूंदी आदि शामिल हो सकते हैं। इनका उद्देश्य बीमारियों को रोकना, निदान करना या इलाज करना होता है। उदाहरण में टीके, थेराप्यूटिक प्रोटीन, बायोसिमिलर और अन्य उन्नत बायोलॉजिक थेरेपी शामिल हैं।

भारत में बायोफार्मा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकारी पहल

भारत की फार्मास्यूटिकल उद्योग केवल सस्ती जेनेरिक दवाएँ बनाने तक सीमित नहीं रही; अब यह उच्च मूल्य और जटिल बायोफार्मास्यूटिकल उत्पादों में निवेश कर रही है। भारत उपलब्ध गुणवत्ता वाली दवाओं का वैश्विक हब बन चुका है, उत्पादन के हिसाब से 3रा और मूल्य के हिसाब से 14वां स्थान।

सरकार ने पिछले वर्षों में अनुसंधान, उत्पादन, नवाचार और व्यावसायीकरण के लिए कई नीतिगत पहलें और योजनाएँ लागू की हैं। इनमें राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (NBM – i3), BIRAC-लिड बायोटेक इनोवेशन सपोर्ट, PLI स्कीम, SPI स्कीम, Bulk Drug Parks, PRIP, BioE3 और Bio-RIDE जैसी प्रमुख योजनाएँ शामिल हैं।

इन पहलों का उद्देश्य सरकार, अकादमी, उद्योग और स्टार्टअप्स को एक साथ लाकर साझा अवसंरचना का निर्माण, नवाचार को बढ़ावा और घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाना है।

राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (NBM) – Innovate in India (i3)

2017 में शुरू हुआ, इसका उद्देश्य भारत को 2025 तक 100 अरब डॉलर के वैश्विक बायोटेक उद्योग में बदलना और वैश्विक फार्मास्यूटिकल बाजार में 5% हिस्सेदारी प्राप्त करना है।

NBM के अंतर्गत 101 परियोजनाएँ, 150+ संस्थाएँ और 30 MSMEs शामिल हैं। इससे 1,000+ रोजगार पैदा हुए, जिनमें 304 वैज्ञानिक और शोधकर्ता शामिल हैं। जीनोम इंडिया प्रोग्राम के तहत 10,000 जीनोम सिक्वेंस किए जा रहे हैं।

BIRAC-नेतृत्व वाले नवाचार समर्थन

BIRAC (2012 में स्थापित) स्टार्टअप्स को फंडिंग, इनक्यूबेशन और मार्गदर्शन प्रदान करता है। प्रमुख योजनाएँ:

  • Biotechnology Ignition Grant (BIG): 50 लाख तक शुरुआती स्टार्टअप्स के लिए।

  • SEED Fund: 30 लाख तक प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट स्टार्टअप्स के लिए।

  • LEAP Fund: 1 करोड़ तक वाणिज्यिकरण-तैयार नवाचार के लिए।

  • जनCARE – अमृत ग्रैंड चैलेंज: AI, मशीन लर्निंग, टेलीमेडिसिन और ब्लॉकचेन आधारित 89 डिजिटल हेल्थ टेक इनोवेशन।

विनिर्माण और औद्योगिक सुदृढ़ता

PLI, SPI और Bulk Drug Parks जैसी योजनाओं के माध्यम से निर्माण क्षमता बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना, MSME अपग्रेडेशन और साझा अवसंरचना निर्माण पर ध्यान दिया गया।

निष्कर्ष

ये सभी उपाय भारत में सशक्त बायोफार्मा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए सरकार की रणनीति को दर्शाते हैं। बायोफार्मा शक्ति योजना, पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ, मानव संसाधन विकास, क्लिनिकल ट्रायल अवसंरचना और नियामक क्षमता में निवेश के माध्यम से भारत को वैश्विक बायोफार्मा हब बनाने का महत्वपूर्ण कदम है।


डॉ. जितेंद्र सिंह: स्वास्थ्य और फार्मा में AI का विवेकपूर्ण उपयोग और निजी क्षेत्र के सहयोग से भारत बनेगा वैश्विक हेल्थकेयर हब

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज जोर देकर कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का विवेकपूर्ण उपयोग स्वास्थ्य और फार्मा क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो सकता है। उन्होंने उभरती जैवप्रौद्योगिकी और जीन थेरेपी परियोजनाओं में निजी क्षेत्र के साथ सरकार के मजबूत सहयोग पर भी प्रकाश डाला।

कन्फेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री (CII) फार्मा एवं लाइफ साइंसेज समिट 2025 में संबोधन करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबसे बड़ी परिवर्तन यह है कि सरकार उद्योग तक समान उत्साह के साथ पहुँचती है, जो पूरे सरकारी और उद्योग दृष्टिकोण को दर्शाता है।

मंत्री ने बताया कि AI अब केवल विकल्प नहीं बल्कि निदान, दवा खोज और स्वास्थ्य सेवा वितरण में एक आवश्यक उपकरण बन गया है। हालांकि, इसका उपयोग मानव-केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा, “वास्तविक चुनौती यह है कि हम AI को इस तरह एक हाइब्रिड मॉडल में एकीकृत करें जो तकनीक और मानवीय सहानुभूति का संतुलन बनाए।”

स्वास्थ्य नवाचार के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि AI-आधारित निदान मॉडल अब कल्चर परीक्षण का समय दिनों से मिनटों तक घटा रहे हैं, और AI संचालित टेलीमेडिसिन परियोजनाएँ स्थानीय बोलियों में दूरदराज के गांवों तक चिकित्सा सेवाओं का विस्तार कर रही हैं, जिससे रोगियों का आत्मविश्वास और परिणाम दोनों बेहतर हो रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की बढ़ती वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षमताओं को उजागर करते हुए कहा कि सरकार निजी क्षेत्र के साथ जीन थेरेपी, जैवप्रौद्योगिकी और टीका विकास जैसे सीमांत क्षेत्रों में सक्रिय रूप से भागीदारी कर रही है। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की कई पहल अब प्रमुख निजी कंपनियों के साथ सहयोग में काम कर रही हैं, ताकि सिंथेटिक एंटीबायोटिक्स, DNA और HPV वैक्सीन, और बायो-निर्माण जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी समाधान विकसित किए जा सकें।

सरकार की व्यापक अनुसंधान पहल का उल्लेख करते हुए मंत्री ने उद्योग नेताओं को हाल ही में घोषित ₹1 लाख करोड़ के R&D फंड का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया, जो स्वास्थ्य, कृषि और अन्य क्षेत्रों में गहरी तकनीक परियोजनाओं का समर्थन करता है। उन्होंने कहा, “पहली बार, सरकार नवाचार के लिए निजी कंपनियों को वित्तपोषित कर रही है — जो भारत की R&D पारिस्थितिकी में एक परिवर्तनकारी कदम है।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में आयातक से निर्यातक में बदलाव की भी सराहना की, विशेष रूप से टीकों, बायोसिमिलर और किफायती मेडिकल उपकरणों में। उन्होंने कहा, “हम अब उच्च गुणवत्ता वाली, लागत-कुशल स्वास्थ्य तकनीक का उत्पादन कर रहे हैं जो दुनिया भर में बाज़ार पा रही हैं।”

अपने संबोधन को समाप्त करते हुए मंत्री ने उद्योग हितधारकों से कहा कि वे केवल अपने क्षेत्रों का नेतृत्व न करें, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति में साझेदार के रूप में काम करें और नए सहयोग क्षेत्रों का सुझाव दें। उन्होंने कहा, “विज्ञान, चिकित्सा और प्रौद्योगिकी अब एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं, और हमें मिलकर वैश्विक स्वास्थ्य के भविष्य को आकार देने में एक बड़ी भूमिका के लिए तैयार रहना चाहिए।”

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.