Media24Media.com: #PassingOutParade

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एयर फ़ोर्स अकादमी से निकले 231 नए योद्धा, पहली बार NDA की महिला कैडेट्स भी बनीं वायुसेना अधिकारी

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हैदराबाद- हैदराबाद के डुंडीगल स्थित एयर फ़ोर्स अकादमी में आयोजित संयुक्त स्नातक परेड (Combined Graduation Parade) के दौरान 231 फ्लाइट कैडेट्स को भारतीय वायुसेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्रदान किया गया। इनमें 194 पुरुष और 37 महिला कैडेट्स शामिल हैं। खास बात यह रही कि इस बैच में पहली बार राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की महिला कैडेट्स भी शामिल थीं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 217वें कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा की और सफल कैडेट्स को राष्ट्रपति आयोग (President's Commission) प्रदान किया। इसके साथ ही फ्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं के प्रशिक्षण का समापन हुआ।

इस अवसर पर भारतीय नौसेना के 9 अधिकारियों, भारतीय तटरक्षक बल के 3 अधिकारियों और वियतनाम के 2 अधिकारियों को ‘विंग्स’ प्रदान किए गए। वहीं 3 अधिकारियों को नेविगेशन प्रशिक्षण पूरा करने पर ‘ब्रेवेट्स’ से सम्मानित किया गया।

रक्षा मंत्री ने नव-नियुक्त अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना हमेशा देश की सुरक्षा का मजबूत कवच और प्रभावी शक्ति रही है। उन्होंने 1947-48 के कश्मीर युद्ध, 1971 के युद्ध और हालिया ऑपरेशन सिंदूर में वायुसेना की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वायुसेना ने अपने साहस, अनुशासन और सटीक कार्रवाई से देश का गौरव बढ़ाया है।

उन्होंने अधिकारियों को आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के युद्ध केवल सैनिकों और हथियारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ड्रोन, सैटेलाइट, सेंसर, रोबोटिक्स और साइबर तकनीकों का उपयोग युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल रहा है।

राजनाथ सिंह ने युवा अधिकारियों से लगातार सीखते रहने, नई तकनीकों को अपनाने और भविष्य की युद्ध रणनीतियों के अनुरूप खुद को तैयार रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनके कंधों पर लगी ‘विंग्स’ केवल एक बैज नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास का प्रतीक हैं।

महिला अधिकारियों को विशेष बधाई देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी भारतीय वायुसेना को और अधिक मजबूत तथा संतुलित बनाएगी। उन्होंने इसे सशक्त और समावेशी सैन्य बल का प्रतीक बताया।

समारोह के दौरान शानदार फ्लाईपास्ट, आकाश गंगा स्काईडाइविंग टीम, महिला एयर वॉरियर ड्रिल टीम ‘शक्ति’, सारंग हेलीकॉप्टर टीम, सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम और सुखोई-30 एमकेआई के हैरतअंगेज प्रदर्शन ने दर्शकों का मन मोह लिया।

यह समारोह नव-नियुक्त अधिकारियों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण रहा, जहां उन्होंने राष्ट्र की संप्रभुता, सम्मान और सुरक्षा की रक्षा करने की शपथ ली और देश सेवा की नई यात्रा की शुरुआत की।

आईएमए की पासिंग आउट परेड में राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन, महिला कैडेट्स को बताया नए भारत की ताकत

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देहरादून- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा की।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अधिकारी कैडेट्स को देश के सबसे कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनका साहस और विवेक भविष्य में उनकी सबसे बड़ी ताकत होंगे।

राष्ट्रपति ने विशेष रूप से परेड में शामिल नौ महिला कैडेट्स को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह केवल भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास में एक नया अध्याय नहीं है, बल्कि महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत की प्रगति का प्रेरणादायक उदाहरण भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में और अधिक महिला कैडेट्स अकादमी का हिस्सा बनेंगी।

राष्ट्रपति मुर्मू ने मित्र देशों से आए विदेशी कैडेट्स को भी बधाई देते हुए कहा कि वे आईएमए से प्राप्त मूल्यों और प्रशिक्षण के बल पर अपने-अपने देशों की सेनाओं में उत्कृष्ट योगदान देंगे।

उन्होंने कहा कि आईएमए में विदेशी कैडेट्स की मौजूदगी भारत की मित्रता, सहयोग और वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यहां विकसित होने वाले आपसी विश्वास और पेशेवर संबंध देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के रक्षक हैं और 140 करोड़ से अधिक भारतीयों के विश्वास की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने उन्हें हमेशा सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य मानने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी प्रगति और जटिल वैश्विक परिस्थितियों के इस दौर में भारतीय सेना को हमेशा भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने युवा अधिकारियों से आजीवन सीखते रहने, साहसिक निर्णय लेने और नैतिक नेतृत्व का परिचय देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि एक सैन्य अधिकारी के रूप में उनकी जिम्मेदारी केवल नेतृत्व करना ही नहीं, बल्कि अपने सैनिकों का मार्गदर्शन और उनकी देखभाल करना भी है। उन्हें उदाहरण प्रस्तुत करते हुए टीम भावना, समर्पण और विश्वास को मजबूत बनाना होगा ताकि वे अपनी इकाइयों की युद्ध क्षमता को और अधिक प्रभावी बना सकें।


आईएनएस चिल्का में 12 जून को आयोजित होगी 01/26 बैच की पासिंग आउट परेड

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भुवनेश्वर/चिल्का- भारतीय नौसेना के अग्निवीरों और भारतीय तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) के नाविकों के 01/26 बैच की पासिंग आउट परेड (POP) 12 जून 2026 को आईएनएस चिल्का में आयोजित की जाएगी। यह परेड 16 सप्ताह के कठोर प्रारंभिक प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक है, जिसे भारतीय नौसेना के आठवें अग्निवीर बैच और भारतीय तटरक्षक बल के नाविकों ने पूरा किया है।

यह आयोजन प्रशिक्षुओं के अनुशासित, सशक्त और पेशेवर रूप से सक्षम ‘समुद्री योद्धाओं’ में परिवर्तन की महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है, जो अब राष्ट्र सेवा के लिए अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

इस अवसर पर पश्चिमी नौसैनिक कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल Sanjay Vatsayan मुख्य अतिथि एवं परेड के निरीक्षण अधिकारी होंगे। समारोह में प्रशिक्षुओं के परिजन, पूर्व सैनिक, प्रतिष्ठित खिलाड़ी और अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहेंगे।

पासिंग आउट परेड भारतीय नौसेना की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत प्रशिक्षण को एक पेशेवर और सक्षम युद्धक बल की नींव माना जाता है। आईएनएस चिल्का अपने संरचित शैक्षणिक, शारीरिक और बाह्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को अनुशासित, आत्मविश्वासी और दक्ष समुद्री योद्धाओं के रूप में तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह प्रशिक्षण “कर्तव्य, सम्मान और साहस” के मूल्यों पर आधारित है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि समापन समारोह (Valedictory Function) की अध्यक्षता करेंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं, चैंपियन डिवीजन और सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक को पुरस्कार एवं ट्रॉफियां प्रदान करेंगे। इस अवसर पर प्रशिक्षुओं की द्विभाषी पत्रिका ‘अंकुर’ का भी विमोचन किया जाएगा।

पासिंग आउट परेड के बाद प्रशिक्षुओं को विभिन्न नौसैनिक प्रतिष्ठानों और भारतीय नौसेना तथा भारतीय तटरक्षक बल के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।

भारतीय नौसेना ने बताया कि इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण (Live Streaming) उसके आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किया जाएगा।


गरुड़ कमांडो की पासिंग आउट परेड आयोजित, भारतीय वायुसेना को मिले नए स्पेशल फोर्स ऑपरेटर्स

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23 मई 2026 को एयर फोर्स स्टेशन चांदीनगर स्थित गरुड़ रेजिमेंटल ट्रेनिंग सेंटर (GRTC) में भारतीय वायुसेना की स्पेशल फोर्स ‘गरुड़’ के प्रशिक्षण पूर्ण होने पर “मैरून बेरेट सेरेमोनियल परेड” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में एयर वाइस मार्शल राहुल गुप्ता, ACAS Ops (Space) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और परेड की समीक्षा की।

कार्यक्रम के दौरान गरुड़ रेजिमेंटल ट्रेनिंग सेंटर के कमांडेंट ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा प्रशिक्षण से जुड़ी विभिन्न जानकारियां दीं। एयर वाइस मार्शल राहुल गुप्ता ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने वाले जवानों को बधाई देते हुए कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में स्पेशल फोर्सेस के लिए कठोर प्रशिक्षण और आधुनिक कौशल बेहद जरूरी हैं।

मुख्य अतिथि ने सफल प्रशिक्षुओं को मैरून बेरेट, गरुड़ प्रोफिशिएंसी बैज और स्पेशल फोर्स टैब प्रदान किए। साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जवानों को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।

पासिंग आउट समारोह के दौरान गरुड़ कमांडो ने कई शानदार सैन्य कौशलों का प्रदर्शन किया। इनमें कॉम्बैट फायरिंग, बंधक बचाव अभियान, फायरिंग ड्रिल, असॉल्ट एक्सप्लोसिव्स, बाधा पार करना, दीवार चढ़ाई, स्लिथरिंग, रैपलिंग और मिलिट्री मार्शल आर्ट्स शामिल रहे।

“मैरून बेरेट सेरेमोनियल परेड” गरुड़ कमांडो के लिए गर्व और उपलब्धि का प्रतीक मानी जाती है। यह कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन और जवानों के “यंग स्पेशल फोर्स ऑपरेटर्स” के रूप में भारतीय वायुसेना की प्रतिष्ठित गरुड़ फोर्स में शामिल होने का प्रतीक है।

भारतीय वायुसेना के विशेष अभियानों, विशेषकर “ऑपरेशन सिंदूर” में स्पेशल फोर्स की भूमिका को देखते हुए, नए प्रशिक्षित गरुड़ कमांडो भविष्य के विशेष मिशनों में वायुसेना की क्षमता को और मजबूत करेंगे।

गरुड़ विशेष बलों का गौरवपूर्ण क्षण: चंडी नगर में मैरून बेरेट सेरेमोनियल परेड आयोजित

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  1. भारतीय वायु सेना की विशेष बल इकाई ‘गरुड़’ के ऑपरेटिव्स के प्रशिक्षण के सफल समापन के उपलक्ष्य में 17 जनवरी 2026 को वायु सेना स्टेशन चंडी नगर स्थित गरुड़ रेजिमेंटल प्रशिक्षण केंद्र (GRTC) में मैरून बेरेट सेरेमोनियल परेड का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सहायक वायुसेना प्रमुख (ऑपरेशंस – वायु रक्षा) ने मुख्य अतिथि के रूप में परेड की समीक्षा की।

  2. गरुड़ रेजिमेंटल प्रशिक्षण केंद्र के कमांडेंट ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा विभिन्न प्रशिक्षण पहलुओं की जानकारी दी। मुख्य अतिथि ने प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर ‘गरुड़ों’ को बधाई दी। युवा कमांडो को संबोधित करते हुए उन्होंने बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप विशेष बलों के कौशल को निखारने और कठोर प्रशिक्षण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने सफल ‘गरुड़’ प्रशिक्षुओं को मैरून बेरेट, गरुड़ प्रवीणता बैज एवं स्पेशल फोर्सेज टैब प्रदान किए तथा पुरस्कार विजेताओं को ट्रॉफियां भी प्रदान कीं।

  3. पासिंग आउट सेरेमनी के दौरान ‘गरुड़ों’ ने युद्ध फायरिंग, बंधक बचाव, फायरिंग ड्रिल, असॉल्ट विस्फोटक, बाधा पार करना, दीवार चढ़ना, स्लिथरिंग, रैपलिंग तथा सैन्य मार्शल आर्ट्स जैसी विभिन्न कौशलों का प्रदर्शन किया।

  4. मैरून बेरेट सेरेमोनियल परेड ‘गरुड़ों’ के लिए गर्व और उपलब्धि का क्षण है, जो अत्यंत कठोर प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन तथा उनके ‘युवा विशेष बल ऑपरेटर’ के रूप में रूपांतरण का प्रतीक है, जिससे वे विशिष्ट ‘गरुड़’ बल में सम्मिलित होते हैं।

  5. ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायु सेना के विशेष बलों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए, नव-प्रशिक्षित विशेष बल ऑपरेटर भारतीय वायु सेना की क्षमताओं को और सुदृढ़ करेंगे, जिससे वह नव-परिभाषित विशेष अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकेगी।

आईएनएस चिल्का में 02/25 बैच की भव्य पासिंग आउट परेड संपन्न

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आईएनएस चिल्का में 08 जनवरी 2026 को 02/25 बैच की पासिंग आउट परेड (POP) का आयोजन किया गया, जो 16 सप्ताह के एब-इनिशियो प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक रहा। सूर्यास्त के बाद आयोजित इस भव्य सेरेमोनियल परेड में प्रशिक्षुओं ने अनुशासन, दृढ़ता और युद्ध तत्परता से परिपूर्ण नौसैनिक पेशेवरों में अपने रूपांतरण का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

इस पासिंग-आउट बैच में कुल 2,172 प्रशिक्षु शामिल थे, जिनमें 2,103 अग्निवीर (113 महिला अग्निवीर सहित), 270 एसएसआर (मेडिकल असिस्टेंट), भारतीय नौसेना के 44 खेल कोटा के कार्मिक तथा भारतीय तटरक्षक बल के 295 नाविक शामिल थे।

वाइस एडमिरल समीर सक्सेना, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी नौसेना कमान, इस परेड के मुख्य अतिथि एवं समीक्षा अधिकारी थे। कमोडोर बी दीपक अनील, कमांडिंग ऑफिसर, आईएनएस चिल्का, परेड के संचालन अधिकारी रहे। इस अवसर पर विशिष्ट पूर्व सैनिक, प्रख्यात खेल हस्तियां, वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, अन्य गणमान्य अतिथि तथा पासिंग-आउट प्रशिक्षुओं के परिजन उपस्थित रहे।

परेड में प्रशिक्षुओं द्वारा अर्जित उच्च स्तर के ड्रिल, अनुशासन और पेशेवर दक्षता का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। पुरुष प्रशिक्षुओं के साथ महिला अग्निवीरों की सहभागिता ने परिचालन भूमिकाओं में समावेशन और लैंगिक समानता के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।

परेड को संबोधित करते हुए एफओसी-इन-सी (दक्षिण) ने प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण की सफल पूर्णता पर बधाई दी। उन्होंने उन्हें अपने पेशेवर कौशल को निरंतर निखारने, तकनीकी रूप से सजग रहने तथा नौसेना के मूल मूल्यों—कर्तव्य, सम्मान और साहस—को आत्मसात करने का संदेश दिया। उन्होंने प्रशिक्षुओं से साहस और दृढ़ संकल्प के साथ अपने भविष्य का मार्ग निर्धारित करते हुए राष्ट्र के सम्मान को बनाए रखने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने अग्निवीरों के माता-पिता के योगदान की सराहना करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को स्वीकार किया। मुख्य अतिथि ने टीम चिल्का की अथक मेहनत और नौसेना व राष्ट्र के रूपांतरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए प्रशंसा व्यक्त की।

मुख्य अतिथि द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अग्निवीरों को पदक और ट्रॉफियां प्रदान की गईं। साशी बी केंचावगोल और जतिन मिश्रा को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (एसएसआर) और सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (एमआर) के लिए नौसेना प्रमुख रोलिंग ट्रॉफी एवं स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। अनिता यादव को समग्र मेरिट में सर्वश्रेष्ठ महिला अग्निवीर के लिए जनरल बिपिन रावत रोलिंग ट्रॉफी प्रदान की गई। केशव सूर्यवंशी और सोनेन्द्र को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ नाविक (जीडी) और सर्वश्रेष्ठ नाविक (डीबी) घोषित किया गया।

इससे पूर्व आयोजित दीक्षांत समारोह में समग्र चैम्पियनशिप ट्रॉफी खारवेला डिवीजन को प्रदान की गई, जबकि अशोक डिवीजन उपविजेता रहा। इस अवसर पर आईएनएस चिल्का की द्विभाषी प्रशिक्षु पत्रिका ‘अंकुर 2025’ के द्वितीय संस्करण का भी विमोचन किया गया, जिसमें अग्निवीरों के अनुभवों और उनके रूपांतरणकारी प्रशिक्षण यात्रा को दर्शाया गया है।


आईएमए देहरादून में 157वीं पासिंग आउट परेड सम्पन्न, 525 युवा अधिकारी भारतीय सेना में हुए कमीशन

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देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में आज ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वायर पर 157वीं पासिंग आउट परेड का भव्य आयोजन गर्व, परंपरा और सैन्य वैभव के साथ सम्पन्न हुआ। यह गौरवपूर्ण अवसर भारतीय सेना में अधिकारी कैडेट्स के कमीशनिंग का साक्षी बना और अकादमी के शाश्वत आदर्श वाक्य “वीरता और विवेक” को साकार करता हुआ कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और अदम्य जज़्बे की सशक्त मिसाल बना।

थल सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परेड की सलामी ली और प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर नव-नियुक्त अधिकारियों को बधाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सैन्य पेशा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक पवित्र आह्वान है, जिसमें निस्वार्थ सेवा, अटूट समर्पण और आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान की अपेक्षा होती है। उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी की गौरवशाली परंपरा की सराहना की, जिसने समय-समय पर दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता और निर्भीक अधिकारी राष्ट्र को प्रदान किए हैं, जिन्होंने साहस और सम्मान की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखा है।

थल सेनाध्यक्ष ने आधुनिक सुरक्षा परिदृश्य की गतिशील और बहुआयामी प्रकृति पर प्रकाश डाला, जो अब सैन्य, तकनीकी और सामाजिक क्षेत्रों तक विस्तृत है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज के युद्ध में कूटनीति और निर्णायक सैन्य कार्रवाई के बीच निर्बाध समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना निरंतर आधुनिकीकरण और नवाचार के माध्यम से स्वयं को सुदृढ़ कर रही है और नव-नियुक्त अधिकारी इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अनिश्चित परिस्थितियों में नेतृत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियाँ स्पष्ट उत्तर नहीं देंगी और अधिकारियों की अनुकूलन क्षमता, विवेक और सत्यनिष्ठा की परीक्षा लेंगी।

जनरल द्विवेदी ने युवा अधिकारियों से उदाहरण बनकर नेतृत्व करने, नैतिक मूल्यों को बनाए रखने और अपने जवानों के लिए मार्गदर्शक व आदर्श बनने का आह्वान किया। उन्होंने 14 मित्र देशों के 34 विदेशी अधिकारी कैडेट्स को भी प्रशिक्षण पूर्ण करने पर बधाई दी और कहा कि अकादमी में बनी मित्रताएँ देशों के बीच रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करने वाले स्थायी बंधन का प्रतीक हैं। प्रशिक्षकों और स्टाफ की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने उनके समर्पण और उत्कृष्टता की प्रशंसा की। साथ ही, गर्वित अभिभावकों को उनके त्याग और विश्वास के लिए धन्यवाद देते हुए राष्ट्र की ओर से आभार व्यक्त किया।

चाणक्य के शाश्वत ज्ञान का स्मरण कराते हुए थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि भौतिक संपत्ति और जीवन क्षणभंगुर हैं, लेकिन धर्म—कर्तव्य और नैतिकता—शाश्वत है। उन्होंने प्रत्येक अधिकारी से राष्ट्र सेवा में सम्मान, निष्ठा और साहस बनाए रखने का आह्वान किया। अपने संबोधन के समापन में उन्होंने युवा अधिकारियों से सदैव उद्देश्यपूर्ण, सजग और समय से आगे रहने का आग्रह किया, ताकि वे भारत की संप्रभुता और भविष्य की सुरक्षा के सच्चे रक्षक बन सकें।

इस अवसर पर 157वें रेगुलर कोर्स, 46वें टेक्निकल एंट्री स्कीम कोर्स, 140वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स, 55वें स्पेशल कमीशंड ऑफिसर्स कोर्स और टेरिटोरियल आर्मी ऑनलाइन एंट्रेंस एग्ज़ाम 2023 कोर्स के कुल 525 अधिकारी कैडेट्स, साथ ही 14 मित्र देशों के 34 अधिकारी कैडेट्स को कमीशन प्रदान किया गया। यह कमीशनिंग न केवल भारत के रक्षा नेतृत्व को सशक्त करती है, बल्कि मित्र राष्ट्रों के साथ स्थायी सैन्य साझेदारियों की निरंतरता का भी प्रतीक है।

समारोह में गर्वित अभिभावक, परिवारजन, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। परेड का समापन पारंपरिक ‘अंतिम पग’ के साथ हुआ, जब नव-नियुक्त अधिकारी राष्ट्र की संप्रभुता, सम्मान और आदर्शों की रक्षा के संकल्प के साथ आगे बढ़े।

रिव्यूइंग ऑफिसर द्वारा प्रदान किए गए पुरस्कार:

  • स्वॉर्ड ऑफ ऑनर – अकादमी कैडेट एडजुटेंट निश्कल द्विवेदी

  • स्वर्ण पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम) – अकादमी कैडेट एडजुटेंट निश्कल द्विवेदी

  • रजत पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में द्वितीय) – बटालियन अंडर ऑफिसर बादल यादव

  • कांस्य पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में तृतीय) – सीनियर अंडर ऑफिसर कमलजीत सिंह

  • रजत पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम – टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स) – ऑफिसर कैडेट जाधव सुजीत संपत

  • रजत पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम – टेक्निकल एंट्री स्कीम-46) – विंग कैडेट कैप्टन अभिनव मेहरोत्रा

  • रजत पदक (स्पेशल कमीशंड ऑफिसर) – ऑफिसर कैडेट सुनील कुमार छेत्री

  • पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम – विदेशी कैडेट) – जूनियर अंडर ऑफिसर मोहम्मद सफ़ीन अशरफ़ (बांग्लादेश)

  • थल सेनाध्यक्ष बैनर – इंफाल कंपनी (ऑटम टर्म 2025 में 12 कंपनियों में सर्वश्रेष्ठ)

157वां कोर्स जब नेतृत्व और सेवा की अपनी यात्रा आरंभ करता है, तब भारतीय सैन्य अकादमी एक बार फिर यह प्रमाणित करती है कि वह साहस, पेशेवर दक्षता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण से युक्त अधिकारियों को गढ़ने वाली एक अग्रणी संस्था है।

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