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शराब घोटाला मामले में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों पर ED की दबिश

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी की टीम ने धमतरी स्थित उनके आवास के साथ रायपुर में भी कार्रवाई की।

जानकारी के मुताबिक, ED की टीम सुबह धमतरी स्थित अग्रवाल के आवास पहुंची और कई घंटों तक दस्तावेजों तथा अन्य रिकॉर्ड की जांच की। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी। कुछ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और ED की कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया।

शराब घोटाले की जांच से जुड़ी कार्रवाई

यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा है। ED ने इससे पहले 11 अगस्त 2026 को रामगोपाल अग्रवाल को PMLA के तहत गिरफ्तार किया था। उस समय वह रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन बंदी के रूप में निरुद्ध थे। विशेष PMLA अदालत ने उन्हें ED की हिरासत में भेजा था।

ED का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2023 के दौरान छत्तीसगढ़ के आबकारी तंत्र में कथित अनियमितताओं से करीब ₹3,000 करोड़ की अपराध से अर्जित आय पैदा हुई। जांच एजेंसी के अनुसार, इस रकम के एक हिस्से के नकद लेनदेन में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका की जांच की जा रही है।

एजेंसी ने अपने आधिकारिक बयान में दावा किया है कि जांच के दौरान ऐसे बयान सामने आए जिनमें कथित नकदी को रायपुर स्थित राजीव भवन तक पहुंचाए जाने का उल्लेख है। हालांकि, ये ED द्वारा लगाए गए आरोप हैं और मामले की जांच अभी जारी है।

आगे भी जारी रहेगी जांच

ED ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। ताजा तलाशी के दौरान बरामद या जांचे गए दस्तावेजों और अन्य सामग्री के आधार पर एजेंसी आगे की कार्रवाई कर सकती है।

नोट: शराब घोटाले से जुड़े आरोपों और ED के दावों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही माना जाएगा।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल गिरफ्तार, ₹2,883 करोड़ के मामले में ED की कार्रवाई

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED के अधिकारियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी राज्य में कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की चल रही जांच के तहत की गई है।

₹2,883 करोड़ की कथित अपराध से हुई आय

ED की जांच जिस मामले से जुड़ी है, उसमें आर्थिक अपराध शाखा (EOW)/एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की चार्जशीट के आधार पर कथित घोटाले से हुई अपराध की आय लगभग ₹2,883 करोड़ आंकी गई है। ED के अनुसार, कथित अनियमितताएं वर्ष 2019 से 2022 के दौरान शराब की खरीद, लाइसेंसिंग और बिक्री से जुड़ी थीं।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे मामले में राजनीतिक पदाधिकारियों, वरिष्ठ अधिकारियों, शराब निर्माताओं, FL-10A लाइसेंस धारकों और उनके सहयोगियों से जुड़ा एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था और कथित तौर पर अवैध कमीशन की उगाही की गई।

ED की जांच में क्या सामने आया?

ED के अनुसार, कथित शराब घोटाले में अलग-अलग तरीकों से अवैध धन की व्यवस्था किए जाने की जांच की जा रही है। इनमें शराब की सरकारी खरीद पर कथित कमीशन, बिना हिसाब वाली देशी शराब की बिक्री तथा शराब निर्माताओं से कथित कमीशन जैसे पहलुओं की जांच शामिल है।

जांच के दौरान ED ने कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। एजेंसी ने पहले भी छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में तलाशी अभियान चलाकर नकदी, सोना, दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए थे। अप्रैल 2026 की एक कार्रवाई में लगभग ₹5.39 करोड़ की नकदी और सोना जब्त किए जाने की जानकारी ED ने दी थी।

आगे क्या?

रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद अब मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ED कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अपराध की आय से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला फिलहाल राज्य की राजनीति और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के केंद्र में है।


IICA मानेसर में “Meet the Legend” श्रृंखला के तहत न्यायिक विशेषज्ञों का विशेष सत्र, PGIP प्रतिभागियों को मिला महत्वपूर्ण मार्गदर्शन

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मानेसर स्थित Indian Institute of Corporate Affairs (IICA) में पोस्ट ग्रेजुएट इनसॉल्वेंसी प्रोग्राम (PGIP) के 7वें बैच के लिए “Meet the Legend” श्रृंखला के अंतर्गत एक विशेष और ज्ञानवर्धक सत्र का आयोजन किया गया। लगभग तीन घंटे चले इस मास्टरक्लास में दो प्रतिष्ठित न्यायिक विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की।

इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में J. P. Singh, न्यायिक सदस्य, GST अपीलीय न्यायाधिकरण और Balesh Kumar, सदस्य, अपीलीय न्यायाधिकरण (PMLA, FEMA, PBPTA, NDPSA और SAFEMA) उपस्थित रहे।

GST और IBC के संबंध पर विस्तृत चर्चा

अपने संबोधन में जे.पी. सिंह ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) की संरचना और इसका Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) के तहत चल रही दिवालिया कार्यवाही के साथ संबंध का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने “सप्लाई”, “कंसिडरेशन”, टैक्सेबल इवेंट, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) तथा रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म जैसे मूलभूत GST सिद्धांतों को विस्तार से समझाया। साथ ही उन्होंने अंतर-राज्य और अंतर-राज्यीय लेनदेन को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढांचे पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों जैसे Swiss Ribbons Pvt. Ltd. v. Union of India और Ghanashyam Mishra & Sons Pvt. Ltd. v. Edelweiss Asset Reconstruction Co. Ltd. का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि एक बार जब समाधान योजना स्वीकृत हो जाती है, तो उसमें शामिल न किए गए सभी दावे, जिनमें वैधानिक बकाया भी शामिल हैं, समाप्त माने जाते हैं।

सत्र के दौरान CIRP प्रक्रिया में व्यावहारिक अनुपालन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जैसे कि नई GST पंजीकरण की आवश्यकता, IRP/RP द्वारा रिटर्न दाखिल करना, ITC की उपलब्धता तथा IBC की धारा 14 के तहत मोराटोरियम का वसूली कार्यवाही पर प्रभाव।

IBC और PMLA के बीच कानूनी समन्वय पर प्रकाश

दूसरे वक्ता बलेश कुमार ने Prevention of Money Laundering Act, 2002 (PMLA) और IBC के बीच संबंधों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने “अपराध की आय” (Proceeds of Crime) की अवधारणा को समझाते हुए मनी लॉन्ड्रिंग की तीन प्रमुख अवस्थाओं — प्लेसमेंट, लेयरिंग और इंटीग्रेशन — की व्याख्या की।

उन्होंने National Company Law Tribunal (NCLT) और PMLA प्राधिकरणों के बीच अधिकार क्षेत्र से जुड़ी जटिलताओं पर भी चर्चा की, विशेषकर उन मामलों में जहाँ कॉरपोरेट देनदार CIRP के तहत हो और उसकी संपत्तियों पर अटैचमेंट की कार्यवाही चल रही हो।

उन्होंने IBC की धारा 32A के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह प्रावधान समाधान प्रक्रिया की सुरक्षा और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए बनाया गया है। उन्होंने Manish Kumar v. Union of India सहित कई न्यायिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालयों द्वारा लगातार ऐसे सिद्धांत विकसित किए जा रहे हैं जो दिवालिया समाधान और मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानूनों के उद्देश्यों के बीच संतुलन स्थापित करते हैं।

प्रतिभागियों को मिले व्यावहारिक और रणनीतिक दृष्टिकोण

इंटरएक्टिव सत्र के दौरान PGIP प्रतिभागियों को विभिन्न कानूनों के बीच समन्वय से उत्पन्न चुनौतियों को समझने और उनके समाधान के व्यावहारिक तरीकों के बारे में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला। इस चर्चा ने यह भी रेखांकित किया कि प्रभावी समाधान प्रक्रिया के लिए टैक्सेशन, दिवालिया कानून और प्रवर्तन कानूनों के बीच संबंधों की गहरी समझ आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में सेंटर फॉर PGIP के प्रमुख सुधाकर शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथि वक्ताओं का आभार व्यक्त किया और उनके बहुमूल्य मार्गदर्शन के लिए प्रशंसा की।

“IICA की ‘Meet the Legend’ श्रृंखला” प्रतिभागियों को देश के अग्रणी न्यायिक और नियामकीय विशेषज्ञों से जोड़कर अकादमिक उत्कृष्टता और पेशेवर क्षमता निर्माण के अपने उद्देश्य को निरंतर आगे बढ़ा रही है।


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